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श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन स्मार्ट सिटी के “त्रिनेत्र” प्रोजेक्ट को मिला स्वर्ण (गोल्ड) पुरस्कार

भोपाल  राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में उज्जैन ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 2 दिवसीय 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में  महाकालेश्वर मंदिर में लागू किए गए एआई-आधारित एकीकृत निगरानी तंत्र "त्रिनेत्र" (TRINETRA) को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत प्रतिष्ठित स्वर्ण (गोल्ड) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त किया। कलेक्टर  रौशन कुमार ने उज्जैन जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए पुरस्कार प्राप्त किया। उन्होंने इस उपलब्धि को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन तथा सभी के सामूहिक प्रयास तथा निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया। सम्मेलन के पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों के जिला प्रशासनिक अधिकारियों एवं राज्यों ने अपने-अपने ई-गवर्नेंस नवाचारों का प्रदर्शन किया। कलेक्टर एवं अध्यक्ष उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड  रौशन कुमार सिंह द्वारा "त्रिनेत्र" परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन किया गया, जिसे उपस्थित विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों द्वारा अत्यधिक सराहा गया। सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में तथा राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक  प्रथम कौशिक,  पलाश शर्मा,  सचिन जैन एवं आईटी टीम उपस्थित रही। उज्जैन का त्रिनेत्र मॉडल निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारत सरकार और उज्जैन के "त्रिनेत्र" प्रोजेक्ट को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने के लिये शीघ्र ही एक एमओयू होगा। उज्जैन में विकसित इस स्वदेशी एआई मॉडल की सफलता एवं देशव्यापी अनुकरणीयता पर केंद्र सरकार की मुहर है — अब उज्जैन का "त्रिनेत्र" मॉडल देश के अन्य शहरों की सुरक्षा एवं स्मार्ट निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा। यह न केवल उज्जैन, अपितु संपूर्ण मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।  

37 बंद विद्यालय फिर से खुले, बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में प्रदेश में प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले में आयोजित जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव ने शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई। इस अवसर पर सांसद  महेश कश्यप की उपस्थिति में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया और लंबे समय से बंद पड़े 37 विद्यालयों का पुनः संचालन शुरू किया गया। नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत एजुकेशन सिटी में आयोजित कार्यक्रम में सांसद  महेश कश्यप ने बच्चों को तिलक लगाकर, पुष्प भेंट कर तथा अध्ययन सामग्री प्रदान कर विद्यालय परिवार में स्वागत किया। विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश, स्कूल बैग और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई। इससे बच्चों में नए उत्साह के साथ शिक्षा की शुरुआत हुई। 37 विद्यालयों के पुनः संचालन से गांवों में लौटी शिक्षा शाला प्रवेशोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण जिले के 37 बंद विद्यालयों का पुनः संचालन रहा। इससे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को अब अपने गांव या आसपास ही शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को फिर से विद्यालय से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों का हुआ सम्मान कार्यक्रम में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यार्थियों तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों का उत्साह बढ़ा तथा बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली। शिक्षा से ही बनेगा विकसित समाज सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत नींव है। केंद्र और राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने और शिक्षकों से पूरी निष्ठा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का आग्रह किया। हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी मती नम्रता चौबे ने कहा कि जिला प्रशासन हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष मती जानकी कोरसा ने विशेष रूप से बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए सभी अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने की अपील की। शासकीय पहल से बदल रही शिक्षा की तस्वीर शाला प्रवेशोत्सव और 37 विद्यालयों के पुनः संचालन से यह स्पष्ट है कि शासन की शिक्षा संबंधी योजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं। यह पहल न केवल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ रही है, बल्कि जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार कर रही है।

महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में परांपरागत विषय से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा विभाग उपलब्ध करवा रहा रोजगारोंमुखी शिक्षा

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग में वर्तमान में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। ऐसे में बी.ए., बी.कॉम. और बी.एससी. में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) रोजगारोन्मुखी उच्च शिक्षा का आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप संचालित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सामान्य स्नातक शिक्षा के साथ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है। तीसरे वर्ष में विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई करने के बजाय उद्योगों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलता है, जहां वे वास्तविक कार्यस्थल पर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इससे पढ़ाई पूरी होने तक वे उद्योगों की कार्यप्रणाली से परिचित हो जाते हैं और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए तैयार होते हैं। 2024 बैच की सफलता बनी नई प्रेरणा AEDP की सफलता अब पहले ही बैच में दिखाई देने लगी है। वर्ष 2024 में इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी अब दो वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद विभिन्न उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए चयनित किए जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह कार्यक्रम केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों से जोड़कर उनके करियर की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। इसी का उदाहरण इंदौर में आयोजित चयन प्रक्रिया में देखने को मिला। इसमें शामिल 37 विद्यार्थियों में से 20 विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा अप्रेंटिसशिप के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। यह परिणाम इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता और उद्योगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। पढ़ाई के साथ उद्योगों का अनुभव AEDP पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों से अलग है। पहले दो वर्षों में विद्यार्थियों को बी.ए., बी.कॉम. अथवा बी.एससी. की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ संबंधित उद्योगों से जुड़े विषयों, तकनीकों और व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यानी प्रथम वर्ष से ही विद्यार्थियों का फोकस केवल डिग्री प्राप्त करने पर नहीं, बल्कि रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर भी रहता है। तीसरे वर्ष में विद्यार्थियों को उनके विषय से संबंधित उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए भेजा जाता है। वहां वे अनुभवी विशेषज्ञों के साथ काम करते हुए वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव प्राप्त करते हैं। अप्रेंटिसशिप के दौरान उन्हें नियमानुसार स्टाइपेंड भी मिलता है तथा उद्योग में उनके कार्य एवं प्रदर्शन के आधार पर अंतिम वर्ष का मूल्यांकन किया जाता है। इससे विद्यार्थियों को अलग से पारंपरिक पढ़ाई के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है और स्नातक डिग्री के साथ उद्योगों का अनुभव भी प्राप्त होता है। भर्ती अभियान में मिला उद्योगों का भरोसा इंदौर में आयोजित भर्ती अभियान में लॉजिस्टिक्स एवं रिटेल क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों—कैरीफास्ट लॉजिस्टिक्स, आपार लॉजिस्टिक्स, मोज़ेक ग्रुप और लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स—ने सहभागिता की। इसमें पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, इंदौर तथा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने साक्षात्कार दिए। कंपनियों ने एमआईएस ऑपरेटर, वेयरहाउस सुपरवाइजर, लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेटर, बैक-एंड ऑपरेशंस एग्जीक्यूटिव और सप्लाई चेन सपोर्ट एसोसिएट जैसे पदों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की। चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार से 17 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड के साथ उद्योगों में कार्य करने और सीखने का अवसर मिलेगा। भर्ती परिणामों में कैरीफास्ट लॉजिस्टिक्स ने सर्वाधिक 11 विद्यार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया, जबकि मोज़ेक ग्रुप ने 7 और लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स ने 4 विद्यार्थियों का चयन किया। इनमें से कुछ विद्यार्थियों को इंदौर तथा भोपाल स्थित इकाइयों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। साक्षात्कार के दौरान विद्यार्थियों ने तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास, समस्या समाधान क्षमता और व्यावसायिक समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उद्योग प्रतिनिधियों ने लॉजिस्टिक्स संचालन, इन्वेंट्री प्रबंधन, डेटा विश्लेषण, कार्यस्थल संचार, माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल, गूगल शीट्स, ईआरपी प्लेटफॉर्म तथा अन्य डिजिटल टूल्स पर विद्यार्थियों की दक्षता की सराहना की। बढ़ रहा है विद्यार्थियों का रुझान मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के 963 विद्यार्थी वर्ष 2026 में अप्रेंटिसशिप के लिए पात्र हैं। वहीं, 2025-26 सत्र में AEDP के अंतर्गत 4,513 विद्यार्थियों ने विभिन्न सहभागी संस्थानों में प्रवेश लिया है, जो इस कार्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों के बढ़ते विश्वास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बढ़ती मांग को दर्शाता है। पहले ही बैच की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम विद्यार्थियों को केवल स्नातक डिग्री ही नहीं, बल्कि उद्योगों का व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान प्रवेश सत्र में यह कार्यक्रम युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।  

विशेष लोक अदालत का आयोजन 21, 22 एवं 23 अगस्त को

रायपुर उच्चतम न्यायालय द्वारा न्याय को सरल एवं सुलभ तरीके से घर-घर तक पहुँचाने तथा आपसी सहभागिता और सहमति से न्याय की भावना को मूर्त रूप देने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह 2026 का आयोजन 21 अप्रैल 2026 से आरम्भ किया जा रहा है। जिसकी परिणति 21, 22 तथा 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ होगी।  विशेष लोक अदालत का आयोजन सर्वोच्च न्यायालय परिसर में 21, 22 तथा 23 अगस्त को होगा, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों को शामिल किया जाएगा। विशेष लोक अदालत पूर्व सुलह बैठकों का आयोजन राज्य, जिला, तालुका, उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण, समिति स्थित मध्यस्थता केन्द्र में किया जाएगा। पक्षकार इन सुलह-प्रयास हेतु बैंठकों, वार्ताओं में सशरीर अथवा आभासी (आनलाईन) रूप से शामिल हो सकते हैं। इस समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) के आयोजन का लक्ष्य सर्वोच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों का सुलह एवं आपसी सहमति से निष्पादन करना है।  अधिवक्तागण, वादकारियों तथा अन्य सभी संबंधित पक्षों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। 21 अप्रैल को हुए समाधान समारोह में आपसी सहमति एवं वार्ता से समाधान तलाशने का प्रयास किया गया। इन सुलह बैठकों का आयोजन राज्य, जिला, तालुका, उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण, समिति स्थित मध्यस्थता केन्द्र में किया गया। जिसमें प्रशिक्षित मध्यस्थ तथा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, समिति पक्षकारों की मदद लिया गया।  अपने मामले (जो सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है) को समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) में कैसे शामिल करें। इसके लिए गूगल फॉर्म तैयार किया गया है। इस गूगल फॉर्म को भरना अत्यंत सरल है। इसे भरकर अपने मामले को समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) 2026 में शामिल किया जा सकता है। यह गूगल फॉर्म सर्वोच्च न्यायालय के वेबसाइट www.sci.gov.in पर उपलब्ध है।

विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) का गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में शुभारंभ

रायपुर विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के जिला स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पेंड्रा स्थित  अरपा सभा कक्ष कलेक्ट्रेट में किया गया। कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शुभारंभ समारोह का सीधा प्रसारण देखा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं मरवाही विधायक  प्रणव कुमार मरपच्ची थे, जबकि अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैकरा ने की। राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मिशन का शुभारंभ करते हुए ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन पर जोर दिया।              मुख्य अतिथि  प्रणव कुमार मरपच्ची ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सभी पंचायतों में समान रूप से विकास कार्य किए जा सकेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जनप्रतिनिधियों से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की अपील की। जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैकरा ने कहा कि यह योजना गांव, गरीब और किसानों के विकास से सीधे जुड़ी है। इसके माध्यम से आजीविका, निर्माण कार्य एवं अन्य विकास योजनाओं को गति मिलेगी, जिससे पंचायतों के साथ-साथ जिले और प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकेश रावटे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, जनपद पंचायत अध्यक्ष मरवाही जानकी कुशरो, जिला पंचायत सदस्य भवर सिंह गोवास, पवन पैकरा, पूर्णिमा पैकरा, जिला अध्यक्ष लालजी यादव, डिप्टी कलेक्टर सु आकांक्षा पांडे सहित जनप्रतिनिधि एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मानसिक मंदित संवासियों के भरण-पोषण के लिए अनुदान राशि 2,000 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजनों के लिए संचालित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों एवं हाफ वे होम में रहने वाले संवासियों के भरण-पोषण हेतु प्रति संवासी अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आश्रय गृहों में रहने वाले मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजन पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर निर्भर होते हैं। उन्हें पौष्टिक भोजन, समुचित स्वास्थ्य देखभाल और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। समय के साथ आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत को देखते हुए संवासियों के भरण-पोषण की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जाना आवश्यक है। गुरुवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जाएं तथा पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। श्रवण बाधित बच्चों का शीघ्र चिन्हांकन कर समयबद्ध कॉक्लियर इम्प्लांट तथा उपचार के बाद पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना है। सामाजिक, आर्थिक, चिकित्सकीय, भौतिक एवं शैक्षिक पुनर्वास से जुड़ी सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक सुविधाओं तथा शासकीय भवनों में बाधारहित वातावरण विकसित करने के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार शिक्षकों की समयबद्ध तैनाती की जाए। नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा तब तक ऐसी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा दिव्यांग पेंशन योजना, कुष्ठावस्था पेंशन योजना, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना, शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना, दुकान निर्माण एवं संचालन योजना, निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना, कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम, बचपन डे-केयर सेंटर, विशेष विद्यालय, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र तथा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा सहित अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12,23,295 दिव्यांगजन पेंशन योजना से लाभान्वित हुए, जबकि 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को 43,689 विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए गए। इसी अवधि में 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया तथा चालू वित्तीय वर्ष में 68 जनपदों से 335 बच्चों का चिन्हांकन किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 तक जहां 10 जनपदों में बचपन डे-केयर सेंटर संचालित थे, वहीं वर्तमान में 25 जनपदों में इनका संचालन किया जा रहा है तथा 28 अन्य जनपदों में स्थापना एवं संचालन की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसी प्रकार वर्ष 2017 तक 16 विशेष विद्यालय संचालित थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 28 हो गई है। इन विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, सहायक उपकरण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बस्तर प्रवास के अनुभवों के आधार पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का गोंडी एवं हल्बी भाषा में होगा व्यापक प्रचार-प्रसार महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने तथा जमीनी स्तर पर कार्यों में गति लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव  शहला निगार,दोनों विभागों के संचालक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का गोंडी एवं हल्बी भाषा में होगा व्यापक प्रचार-प्रसार मंत्री  राजवाड़े ने हाल ही में बस्तर संभाग के प्रवास तथा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री  अन्नपूर्णा देवी से हुई चर्चा के दौरान प्राप्त अनुभवों और सुझावों के आधार पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय भाषाओं में संवाद अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य से बस्तर संभाग में विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार गोंडी एवं हल्बी भाषा में किए जाने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं की सटीक जानकारी पहुंच सके। मंत्री  राजवाड़े ने बस्तर संभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं पर्यवेक्षक के रिक्त पदों को आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर शीघ्र भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में भवन, पोषण, पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। बैठक में उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए सभी जिलों में नियमित मॉनिटरिंग, सतत निरीक्षण और प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की। मंत्री  राजवाड़े ने पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में भर्ती बच्चों एवं उनकी माताओं को गुणवत्तापूर्ण उपचार, पौष्टिक आहार तथा बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने दिव्यांगजन एवं वृद्धजन कल्याण से संबंधित योजनाओं की प्रगति का आकलन करते हुए बस्तर संभाग में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के समयबद्ध वितरण, पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने तथा नियमित शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।उन्होंने सियान गुड़ी (डे-केयर सेंटर) एवं वृद्धाश्रमों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर आवास, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक के अंत में मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बस्तर संभाग के प्रवास के दौरान यह स्पष्ट रूप से अनुभव हुआ है कि क्षेत्र में विकास और विश्वास का नया वातावरण निर्मित हुआ है। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना तीव्र गति से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसका प्रभाव धरातल पर दिखाई दे। 

प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों और जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान है बैतूल का कुकरू खामला

भोपाल  प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध, बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू एक अनछुआ रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पर्वतीय क्षेत्र वर्षा ऋतु में बादलों, कोहरे, घने वनों और हरियाली से आच्छादित रहता है। अदना नदी का प्रवाह, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं में शामिल हैं। वर्षभर सुहावने मौसम वाला कुकरू प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकिंग और बाइकिंग के शौकीनों के लिए उपयुक्त पर्यटन स्थल है। यहाँ स्थित सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट प्रमुख आकर्षण हैं। कुकरू अपनी कॉफी के साथ कोदो-कुटकी, आँवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा जैसे वन उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मोटे अनाज से बने पारंपरिक व्यंजन और वन उपज एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प यहाँ की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं। कॉफी बागानों से मिली विशिष्ट पहचान कुकरू-खामला क्षेत्र ऐतिहासिक कॉफी बागानों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ वर्ष 1944 में कॉफी की खेती प्रारंभ हुई थी, जिसने इस क्षेत्र को विशेष पहचान दिलाई। देश में गिने चुने प्रांतों में ही उच्च किस्म की कॉफी की खेती होती है। कुकरू में लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में उच्चतम किस्म की अरेबिका कॉफी का उद्यान है, जिसमें से 10 एकड़ में कॉफी की खेती की जाती है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड तथा वन विभाग द्वारा इन बागानों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। ईको टूरिज्म और पर्यटन अधोसंरचना का होगा विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू के भ्रमण के दौरान इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म का विस्तार, सनराइज एवं सनसेट प्वाइंट का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसॉर्ट का विकास, पर्यटन अधोसंरचना का विस्तार तथा ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। जनजातीय समुदायों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से होमस्टे योजना प्रारंभ करने की घोषणा की है। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा तथा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को निकट से जानने का अवसर मिलेगा। कुकरू तक पहुँचना आसान भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर और बैतूल से लगभग 90 किलोमीटर है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच नियमित ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें भोपाल–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित अन्य प्रमुख ट्रेन शामिल हैं। बैतूल से कुकरू तक टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भोपाल से बैतूल और वहाँ से शाहपुर होते हुए कुकरू पहुँचा जा सकता है। अंतिम चरण का पर्वतीय मार्ग प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। प्रकृति, संस्कृति और ईको टूरिज्म का संगम कुकरू प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का समन्वित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ ईको टूरिज्म सेंटर के अंतर्गत पर्यटकों के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है तथा मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है। मानसून के दौरान कुकरू की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान प्रदान करते हैं।  

उत्तर प्रदेश में बिजली दरें स्थिर और आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं करने का फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी बिजली की दरें वही रहेंगी, जो पिछले सात वर्षों से लागू हैं। खास बात यह है कि इस अवधि में बिजली की दरों में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को सीधा लाभ मिल रहा है। योगी सरकार के इस फैसले को बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को आर्थिक राहत मिली है। वहीं बिजली दरों को स्थिर रखने के साथ-साथ योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। प्रदेश में बिजली आपूर्ति लगातार बेहतर हुई है और शहरों से लेकर गांवों तक निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया गया है। सरकार का लक्ष्य हर शहर, हर गांव, हर सड़क और हर गली तक 24×7 गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है। इस वर्ष गर्मी के मौसम में उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड भी बनाया। राज्य में अधिकतम विद्युत आपूर्ति 32,673 मेगावाट तक पहुंच गई, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सोशल मीडिया (एक्स) पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी है। ऊर्जा मंत्री ने लिखा कि उत्तर प्रदेश में लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गईं। सभी उपभोक्ताओं के लिए 2026-27 में भी वही दरें रहेंगी जो सात वर्ष पहले थीं और यह तब जब विद्युत आपूर्ति भी अधिकतम है।

कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर हर महीने प्रगति की समीक्षा के दिए निर्देश

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों, मैदानी अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर प्रदेश में निर्माणाधीन पुलों, फ्लाई-ओवर्स और रेलवे ओवर-ब्रिजेस के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिरपुर भवन स्थित सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता कार्यालय में आयोजित बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर हर महीने प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित माइलस्टोन्स के अनुसार हर कार्य की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्माण कार्यों पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले  ठेकेदारों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा।  लोक निर्माण विभाग के सचिव ने राज्य में निर्माणाधीन सभी पुलों की प्रगति की संभागवार और वर्षवार समीक्षा की। उन्होंने बस्तर में आरसीपीएलडब्लूए (RCPLWA) के अंतर्गत प्रगतिरत पुलों के कार्य हर हाल में दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलों, फ्लाई-ओवर्स और रेलवे ओवर-ब्रिजेस के निर्माण के लिए प्रत्येक चरण और प्रक्रिया को निश्चित समयावधि में पूर्ण करने के लिए मुख्य अभियंता को एसओपी बनाने को कहा। उन्होंने इनका कड़ाई से पालन भी सुनिश्चित करने को कहा। विभागीय सचिव ने पुलों के निर्माण के दौरान कार्यस्थलों पर सुरक्षा के सभी मानकों का पूरा ध्यान रखने को कहा, जिससे की जान-माल की कोई हानि न हो। उन्होंने पुलों, फ्लाई-ओवर्स और रेलवे ओवर-ब्रिजेस के निर्माण में सड़क सुरक्षा के सभी मापदंडों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को फील्ड में कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कर ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के नियमित भुगतान करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को हर महीने भुगतान करने को कहा।  बंसल ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के नए कार्यों की प्राथमिकता तय कर उनके प्राक्कलन 31 जुलाई तक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने पहुंचविहीन गांवों तक बारहमासी कनेक्टीविटी के लिए पुलों के प्रस्ताव के साथ ही द्रुतगामी सड़कों में भी जहां पुलों की जरूरत है, उनके भी प्रस्ताव प्राथमिकता सूची में शामिल कर भेजने को कहा। उन्होंने कलेक्टरों के साथ समन्वय कर ब्लॉस्टिंग की अनुमति, भू-अर्जन, वन व्यपवर्तन, पेड़ कटाई तथा स्थल विवाद के लंबित मामलों का तेजी से निराकरण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इनका निराकरण नहीं होने की स्थिति में उच्च कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि उच्च स्तर पर इनका समाधान निकाला जा सके।  उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही से काम करते हुए निर्माण सामग्री और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समय-सीमा में पुलों के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर सभी पुलों की जानकारी 10 जुलाई तक अपलोड करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  एस.के. कोरी और अधीक्षण अभियंता  डी.के. माहेश्वरी सहित सभी मंडलों के अधीक्षण अभियंता, सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा सभी उप संभागों के अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। स्काई-वॉक के संचालन-संधारण की कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश  बंसल ने रायपुर में निर्माणाधीन स्काई-वॉक के कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसके संचालन और संधारण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके चालू होने के बाद साफ-सफाई, रखरखाव और बिजली आपूर्ति की स्थायी और पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने इसके हैंड-ओवर के लिए नगर निगम से चर्चा करने के भी निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि स्काई-वॉक का काम इस साल दिसम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। लोगों के चढ़ने-उतरने के लिए 1.2 किमी लंबाई के इस स्काई-वॉक में 9 एस्केलेटर्स और 4 लिफ्ट भी लगाए जाएंगे। ठेकेदारों की बैठक लेकर समस्याओं की ली जानकारी, कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश लोक निर्माण विभाग के सचिव  बंसल ने पुलों का निर्माण कर रहे ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्य एवं कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही गुणवत्ता और समय पर कार्य पूर्णता में कोई समझौता नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने, लोगों के बारहमासी आवागमन और माल परिवहन की दृष्टि से पुलों के निर्माण बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनके निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निर्धारित समयावधि में अच्छा काम होना चाहिए।