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अल्पविराम टूल किट के माध्यम से जीवन में कराया जा रहा है आनंद का अहसास

भोपाल  राज्य आनंद संस्थान द्वारा तीन दिवसीय आनंदम सहयोगी प्रशिक्षण दिनांक 27 से 29 अप्रैल तक क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचाययत राज प्रशिक्षण केन्द्र, भदभदा, नीलबड, भोपाल में सम्पन्न हुआ। मध्यप्रदेश राज्य आनंद संस्थान ने अपनी स्थापना के दसवे वर्ष में प्रवेश किया है। इस अवसर पर राज्य के नागरिकों को खुशहाल जीवन जीने के उद्देश्य से अल्पविराम टूल के माध्यम से कुछ विधियां एवं प्रक्रियाओं के द्वारा जीवन में आनंद का एहसास कराया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश भर के 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक  सत्य प्रकाश आर्य के मुख्य आतिथ्य में किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों के बीच आनंद विभाग की रूपरेखा एवं स्वयं से संवाद करने की प्रक्रिया पर अपने विचार रखे।  मुकेश कारूवा,  अजीत महतो,  हितेंद्र बुधौलिया मती अंजना वास्तव मती नीलू शुक्ला,  गजेंद्र सरकार एवं  चंद्रकांत बोहरे ने विभिन्न प्रयोग एवं टूलों के माध्यम से प्रतिभागियों के बीच में अल्पविराम एवं आनंद से विषय से जुड़े विषयों को रखा। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक सम्पन्न

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मुख्यमंत्री  साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री  साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।  आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। बीते चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।  नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, वनमंत्री  केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सु लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष मती गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  प्रणव मरपच्ची, विधायक मती रायमुनी भगत, विधायक  चैतराम अटामी, विधायक  विक्रम उसेंडी, विधायक मती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक  नीलकंठ टेकाम, विधायक  आशाराम नेताम, मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।

ड्रोन निगरानी से अवैध खनन पर हुआ कड़ा प्रहार

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए तकनीक और नवाचार का सहारा लेते हुए एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। इसी कड़ी में अब खनन क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की शुरुआत कर दी गई है, जो राज्य में कानून व्यवस्था, खनिज संसाधन की सुरक्षा तथा राजस्व संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हो रहा है।              राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को जड़ से खत्म किया जाए। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब खनन क्षेत्रों में रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी, जिससे अवैध उत्खनन, परिवहन और संबंधित गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। यह कदम न केवल राजस्व हानि को रोकेगा, बल्कि अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी साबित होगा। खनिज विभाग का मैदानी अमला पहले से ही अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रहा था, लेकिन अब ड्रोन तकनीक के जुड़ने से इस कार्रवाई की गति और सटीकता दोनों बढ़ेंगी। ड्रोन से लगभग 5 किलोमीटर तक की रेंज और 120 मीटर तक ऊंचाई से निगरानी की क्षमता के चलते बड़े और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान कर मौके पर कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे अवैध गतिविधियों में संलिप्तों के बच निकलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।                 खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन में उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरा, नाइट विजन और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो व्यापक और सटीक निगरानी सुनिश्चित करती हैं। इसके जरिए बड़े और दुर्गम खनन क्षेत्रों पर भी आसानी से नजर रखी जा सकती है। यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। सरकार का यह साहसिक निर्णय न केवल कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि खनिज संसाधनों के संरक्षण और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। ड्रोन निगरानी की यह नई व्यवस्था राज्य में सुशासन और तकनीकी नवाचार का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।           इसी कड़ी में 29 अप्रैल 2026 को जिला कांकेर के तहकापार रेत खदान क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए सघन निगरानी और छापामार कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों एवं उपकरणों की पहचान की गई। ड्रोन निगरानी शुरू होते ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद केंद्रीय उड़नदस्ता दल और कलेक्टर (खनिज शाखा) के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए महानदी के किनारे भूईगांव की सीमा पर विशेष अभियान चलाकर एक चेन माउंटेन पोकलेन मशीन जेसीबी (215 एलसी) तथा एक हाईवा (क्रमांक CG08AV0975) जब्त किया गया।

जरूरतमंदों को सम्मान और पारदर्शिता के साथ सहायता देना ही हमारा संकल्प

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी निर्धन, निराश्रित, वृद्धजनों, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहिता एवं दिव्यांगजनों के कल्याण एवं आर्थिक सहायता के लिए विभिन्न प्रकार की पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, यह सरकार के उस विश्वास का अंतरण है, जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार हर परिस्थिति में हर घड़ी जरूरतमंदों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रालय से समग्र पेंशन योजना के तहत प्रदेश के 33 लाख 45 हजार 231 हितग्राहियों के बैंक खातों में मार्च पेड अप्रैल की 200 करोड़ 71 लाख रुपये की पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केन्द्र सरकार की ओर से सभी पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यह हमारे लिए एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत दी जा रही यह पेंशन राशि उनके जीवनयापन में सहारा बनने के साथ-साथ उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, आयुक्त नि:शक्तजन कल्याण सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स एवं पेंशन हितग्राहियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का संकल्प है कि अंतिम पंक्ति में खड़े समाज के हर व्यक्ति तक सहायता समय पर, सम्मान के साथ और पारदर्शी तरीके से पहुंचे, जिससे कोई भी नागरिक अपने आपको असहाय महसूस न करे। सरकार हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जरूरतमंदों के हित में पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि समाज के कमजोर वर्गों को नियमित रूप से आर्थिक सहायता मिले और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति इस सहायता से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा ‍कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का आधार भी मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन की पेंशन योजनाओं में मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना में 62 हजार 594 हितग्राहियों को, मानसिक रूप से अविकसित/बहु दिव्यांग को आर्थिक सहायता योजना में 77 हजार 120 हितग्राहियों को और समग्र सामाजिक सुरक्षा (वृद्धजन, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहिता एवं दिव्यांगजन) पेंशन योजना में 32 लाख 5 हजार 517 हितग्राहियों को, इस प्रकार कुल 33 लाख 45 हजार 231 हितग्राहियों को 600 रुपए प्रतिमाह की दर से आज कुल 200.71 करोड़ रूपए की पेंशन राशि से लाभांवित किया गया है। 

Bihar MSP Hike: रबी फसलों के दाम बढ़े, सूरजमुखी की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी

समस्तीपुर. किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है। दरभंगा प्रमंडल के संयुक्त निदेशक ने इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश जारी कर व्यापक प्रचार-प्रसार का आदेश दिया है। गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (Wheat MSP Hike) में 160 रुपये की वृद्धि कर इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके साथ ही मसूर, चना, जौ, सरसों एवं सूरजमुखी (कुसुम) के दाम भी बढ़ाए गए हैं, जिससे किसानों को विविध फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। खास बात यह है कि सूरजमुखी के एमएसपी (Sunflower MSP Hike) में सबसे अधिक 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस कदम से दलहन व तिलहन उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी। सरकार का प्रयास किसानों को मसूर, चना और तेलहन जैसी फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित करने का है। इसके लिए चना, मसूर, जौ, सरसों एवं कुसुम का भी समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। मसूर और सरसों जैसी फसलें भी किसानों को आकर्षित कर सकती हैं, क्योंकि इनके दाम लागत से काफी ऊपर तय किए गए हैं। सूरजमुखी के एमएसपी में हुई सबसे अधिक बढ़ोतरी दाम बढ़ने से दलहन और तिलहन उत्पादन को बल मिलेगा। इसके साथ ही आयात पर निर्भरता घटेगी। गेहूं और चना जैसी फसलों की खरीद पर सरकार का ज्यादा ध्यान रहता है। ऐसे में किसानों को इनकी पैदावार बेचने में कोई परेशानी नहीं होगी। मसूर और कुसुम में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए यह प्रोत्साहन वाला कदम माना जा रहा है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम यानी सूरजमुखी के एमएसपी में हुई है, जिसकी कीमत 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 6540 रुपये कर दिया गया है। सूरजमुखी का पुराना एमएसपी 5940 रुपया था। इसमें 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरसों के एमएसपी में 250 रुपये की बढ़ोतरी मसूर का एमएसपी (Masoor MSP) 300 रुपये बढ़कर 7000 रुपये हो गया है। सरसों (Mustard MSP) में 250 रुपये, चना (Gram MSP) में 225 रुपये, जौ (Barley MSP) में 170 रुपये और गेहूं में 160 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि 2018-19 के बजट प्रविधानों के अनुरूप है, जिसमें लागत मूल्य का कम से कम डेढ़ गुना दाम सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित – रबी विपणन मौसम 2026-27 की रबी फसलों के लिए भारत सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग किसानों के बीच नया एमएसपी का प्रचार प्रसार कर रही है। इसमें गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अलावा जौ का 2150 रुपये, चना 5875 रुपये, मसूर 7000 रुपये, सरसो 6200 रुपये एवं सूरजमुखी 6540 रुपये प्रति क्विंटल है। – डॉ. सुमित सौरभ, जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर।

पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञान में डॉ. भीष्मदेव साहू को “डॉ सी एम सिंह नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड

रायपुर सरगुजा जिले के पशु चिकित्सालय मंगारी प्रभारी एवं अनुभवी वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भीष्मदेव साहू को पशु चिकित्सा और पशुपालन विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान “डॉ. सी एम सिंह एक्सीलेंस अवार्ड इन वेटरनरी साइंसेस -2026” से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार के लिये देश और विदेश के 8 संस्थान के द्वारा मूल्यांकन किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से पूरे प्रदेश, विशेषकर जिला बालोद, सरगुजा, उतई नगर एवं साहू समाज में हर्ष और गर्व का माहौल है। इस उपलब्धि के लिए पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। डॉ. साहू वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन के पशु चिकित्सा सेवाओं के अंतर्गत सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित उप संचालक कार्यालय से संबद्ध हैं और विकासखंड बतौली के मंगारी पशु चिकित्सालय प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग 15 वर्षों से राज्य शासन में पशु चिकित्सा सर्जन के रूप में कार्यरत हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र को सशक्त बनाने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संगम डॉ. साहू ने अपने कार्यकाल में पशु चिकित्सा सेवा, जन कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उनके पास मजबूत फील्ड अनुभव के साथ-साथ गहन अनुसंधान पृष्ठभूमि भी है। पशु कल्याण, निदान, चिकित्सा और आधुनिक उपचार पद्धतियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाती है। उन्होंने पशु रोग (लम्पी स्किन डिजीज, थनौती), कृत्रिम गर्भधान विषय पर राज्य और जिला स्तर पर पशु चिकित्सक, क्षेत्र अधिकारी और सहयोगियों को ट्रेनिंग  प्रदान किये।

गायक, शायर और आरजे के लिए बड़ा मौका: Voice of U.P. टैलेंट हंट की हुई लॉन्च

लखनऊ फीवर एफएम नेटवर्क और हिन्दुस्तान ने उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वॉयस टैलेंट हंट 'Voice of U.P.' की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूपी के गायक, शायर और आरजे जैसे कलाकार लाइव हिन्दुस्तान के ऐप पर इस टैलेंट हंट में हिस्सा ले सकते हैं। 'Fever in U.P.: Ab Machega Bhaukaal' के बैनर तले इस टैलेंट हंट का लॉन्च इवेंट लखनऊ में रखा गया था, जिसमें U.P. के कलाकारों, क्रिएटर्स और इंडस्ट्री के दिग्गजों का जमावड़ा दिखा। इस मौके पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी, यूपी के सीएम के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, Bigg Boss के अनाउंसर विजय विक्रम सिंह, एक्टर शारिब हाश्मी, कथाकार लक्ष माहेश्वरी और डिजिटल क्रिएटर्स मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और द फीमेल बैंड मौजूद रहे। आज की युवा पीढ़ी के बारे में बात करते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि यह पीढ़ी आत्मविश्वासी है, मंच पर खड़े होने से घबराती नहीं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सामने आना काफी नहीं है, अब क्रिएटर्स को अपने कंटेंट में गंभीरता चाहिए। मालिनी ने कहा 'मैं हर कलाकार में वही देखती हूं, जो मैं थी। बदायूँ, फर्रुखाबाद, कन्नौज- ये वो इलाके हैं, जहां दुनिया के सबसे कमाल के कलाकार पैदा हुए, लेकिन वहां कोई नहीं पहुँचता। प्रतिभा की कमी नहीं है- बस पहुंचाने वाला कोई नहीं था। जिस तरह रेडियो ने कभी कलाकारों को आवाज़ दी- 'Voice of UP' वही काम करेगा।' सीएम योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा, 'पहले लोग बताते नहीं थे कि वो UP के हैं, आज वही लोग गर्व से कहते हैं कि हम U.P. के हैं। अयोध्या और वाराणसी आज दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शहरों में हैं। यह U.P. का नया दौर है, और इस दौर में गांव-देहात के कलाकारों को एक असली मंच मिलना चाहिए। 'Voice of U.P.' वही मंच है।' विजय विक्रम सिंह ने कहा कि UP की आवाज़ों में वो दम है जो पूरे देश को सुनाई देना चाहिए। शारिब हाश्मी और लक्ष माहेश्वरी ने भी नए क्रिएटर्स को कंटेंट और निरंतरता पर ध्यान देने की सलाह दी। हिंदुस्तान के चीफ ऑपरेटिंग अफसर रजत कुमार ने कहा, ‘101 साल पुराना Hindustan Times, 90 साल का Hindustan और 20 साल का Fever FM- यह तीनों मिलकर UP में जो Voice Of U.P. लाने जा रहे हैं, वो काबिले तारीफ होगा।’ HT मीडिया ग्रुप के रेडियो बिज़नेस के सीईओ रमेश मेनन ने कहा, 'Fever Network आज UP का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क है- और 'Voice of U.P.' उसी का अगला कदम है। हमारा मानना है कि U.P. में वही जीतेगा, जो यहां के लोगों तक सिर्फ पहुंचे नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बने। 'Voice of U.P.' के जरिये हम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनना चाहते हैं, क्यूंकि जो आवाज़ यहां से उठेगी, वो पूरे देश को सुनाई देगी।' इस मौके पर मालिनी अवस्थी, विजय विक्रम सिंह, मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और मेरी जिंदगी- द फीमेल बैंड को पहले Voice of U.P. के अवार्ड से नवाज़ा गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के जाने-माने उद्योगपति और मीडिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी बड़ी तादाद में मौजूद रहे। राज्य के बड़े कारोबारी और एजेंसियों को उनके काम और योगदान के लिए भी 'Voice of U.P.' के खिताब से नवाज़ा गया। Voice of U.P. क्या है? Voice of U.P. उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वॉयस टैलेंट हंट है, जो Fever FM और Hindustan मिलकर लाए हैं। इस मुहिम का मकसद सीधा है- उत्तर प्रदेश के हर उस इंसान को एक मंच देना, जिसकी आवाज़ में दम है, लेकिन मौका नहीं मिला। चाहे आप गाते हों, या शायरी लिखते हों, कॉमेडी करते हों या RJ बनने का सपना देखते हों- Voice of UP में सबकी जगह है। वॉयस ऑफ यूपी में कैसे हिस्सा लें? वॉयस ऑफ यूपी में भाग लेना बेहद आसान है। इसके लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें, वीडियो के साथ एंट्री सबमिट करें और अपनी आवाज को वो मंच दें, जिसका वो हकदार है। Voice of UP के लिए रजिस्ट्रेशन 1 मई, 2026 को खुलेगा कैसे Voice of UP में शामिल हो सकते हैं     सबसे पहले हिंदुस्तान ऐप को गूगल प्लेस्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड करें     Voice of UP को सेलेक्ट करें     रजिस्टर करें 1 मई के बाद     अपना वीडियो अपलोड करें     ऐप कैसे डाउनलोड करें

“क्या मेरे बच्चे मुझे अपनाएंगे?”—जेल से छूटने से पहले महिला ने हाईकोर्ट में दायर किया आवेदन

ग्वालियर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जसोधा उर्फ रानी की अपील पर सुनवाई के दौरान एक संवेदनशील पहलू सामने आया, जहां न्यायालय ने रिहाई से पहले उसके बच्चों की मानसिक स्थिति जानना जरूरी माना। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने की। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि महिला अपीलकर्ता करीब 9 साल से जेल में है और उसने अपनी रिहाई के लिए यह कहते हुए आवेदन दिया कि वह अपने 18 साल के बेटे और 16 साल की बेटी की देखभाल करना चाहती है। कोर्ट के निर्देश पर पेश रिपोर्ट में सामने आया कि बेटा अब काम करता है और किराए के कमरे में अकेले रहता है। वहीं 16 साल की अपने चाचाओं के साथ रह रही है। दोनों बच्चों ने पढ़ाई भी छोड़ दी है। लोक अभियोजक ने कोर्ट को बताया कि महिला की रिहाई के बाद वह बच्चों से संपर्क करने की कोशिश करेगी, लेकिन बेटा संभवतः उसे स्वीकार न करे। साथ ही, महिला और उसके कथित साथी पवन जाटव उर्फ घोड़ा दोनों ही जेल में हैं, ऐसे में उनके आपसी संपर्क को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी, डबरा देहात जिला ग्वालियर और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को संयुक्त रूप से सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि दोनों बच्चे अपनी मां को जीवन में स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं, और परिवार में उनका साथ रहना संभव होगा या नहीं। साथ ही, जेल प्रशासन से भी महिला के व्यवहार और सह-आरोपित पवन जाटव से उसके संपर्क को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने यह सभी रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले पेश करने को कहा है।

हरमू से चिरौंदी तक सफर होगा आसान, करोड़ों की लागत से बनेंगे फ्लाईओवर

रांची  राजधानी रांची में लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही ट्रैफिक जाम की समस्या अब काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। सरकार ने दो महत्वपूर्ण फ्लाईओवर परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इसके निर्माण के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर आवागमन तेज, सुगम और समय बचाने वाला हो जाएगा। खासतौर पर हरमू–अरगोड़ा – डिबडीह और करमटोली–साइंस सिटी–चिरौंदी रूट पर लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हरमू से अरगोड़ा चौक होते हुए डिबडीह ब्रिज तक   हरमू से अरगोड़ा चौक होते हुए डिबडीह ब्रिज तक 3.804 किमी लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिसकी लागत करीब 469.62 करोड़ रुपये है। यह फ्लाईओवर कटहल मोड़(चापुटोली) और अशोक नगर तक भी जुड़ेगा। करमटोली से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक वहीं, करमटोली से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक 3.216 किमी लंबा फ्लाईओवर बनेगा, जिस पर लगभग 351.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके साथ मोरहाबादी को जोड़ने के लिए लिंक रोड भी तैयार किया जाएगा। छह महीनों से चल रहा था लगातार सर्वे इन परियोजनाओं को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान ट्रैफिक लोड, सड़क की स्थिति, जमीन अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और भविष्य की जरूरतों जैसे कई पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसके बाद डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा गया, जिसे स्वीकृति भी मिल गई। यह वीडियो भी देखें तीन फ्लाईओवर के बनने से मिली है बड़ी राहत राजधानी में पहले बने कांटाटोली, सिरमटोली-मेकान और रातू रोड फ्लाईओवर ने ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया है। अब इन नई परियोजनाओं से शहर को और राहत मिलने की उम्मीद है। कांटाटोली और मेकान सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बनने से कांटाटोली फ्लाईओवर से वाहन चढ़ने के बाद मेकान चौक पर उतरेगी। समय की बचत में बड़ा बदलाव इन फ्लाईओवर के बनने के बाद अरगोड़ा से कडरू-हरमू तक पहुंचना आसान होगा। काव से डिबडीह ब्रिज तक करीब 15 मिनट की बचत होगी, जबकि चिरौंदी से करमटोली की दूरी 30 मिनट के बजाय सिर्फ 5 से 10 मिनट में तय हो सकेगी। जाम से मिलेगी राहत अरगोड़ा रोड, हरमू, कडरू, कटहल मोड़, बरियातू और मोरहाबादी जैसे इलाकों में रोजाना लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। ट्रैफिक का दबाव कम होगा और वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारू होगी। स्कूल, कालेज और आफिस जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आपातकालीन सेवाओं की रफ्तार भी बढ़ेगी और शहर की कुल यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी।

SOG की बड़ी कार्रवाई: अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी का रैकेट फेल

 अजमेर अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी पाने के चर्चित मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रूल को गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले इस मामले में पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा को भी पकड़ा जा चुका है, जिनसे पूछताछ के आधार पर यह कार्रवाई की गई. अब तक 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार एसओजी के एडिशनल एसपी श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बताया जा रहा है कि आरोपी को जयपुर से पकड़कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के रिमांड पर भेजा गया है.. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्रियों पर अंतिम साइन भी आरोपी ही करता था और वह कमीशन के आधार पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था. पुलिस अब पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. RPSC भर्ती में फर्जी डिग्री का खेल मामले की जांच लोकसेवा आयोग की शिकायत के बाद शुरू हुई थी. आयोग ने बताया था कि स्कूल लेक्चरर (हिंदी) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में चयनित दो युवतियों ने आवेदन के समय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की डिग्री बताई, लेकिन बाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की. जांच में सामने आया कि दोनों ने एमए की फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल की. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि उन्हें ये डिग्रियां उनके परिजनों के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थीं. इसके बाद एसओजी ने सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉक्टर सुरेश विश्नोई सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरियां दिलाने का काम कर रहा था. मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.