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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप युवाओं को हुनरमंद ही नहीं, जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को केवल कौशल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी नागरिक बनाने की दिशा में लगातार नए नवाचार कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने एक अभिनव निर्णय लेते हुए प्रदेश के सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर दैनिक समाचार-पत्र पठन को अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश के 75 जिलों में संचालित 800 से अधिक कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर वर्तमान में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अब ये युवा कौशल विकास के साथ-साथ देश-दुनिया की घटनाओं, समसामयिक विषयों और सामान्य ज्ञान से भी नियमित रूप से जुड़ेंगे। योगी सरकार की सोच, हुनर के साथ जागरूकता प्रदेश के  व्यावसायिक शिक्षा,  कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश का युवा केवल तकनीकी रूप से दक्ष ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक परिदृश्य की समझ रखने वाला भी बने। इस निर्णय का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों की एम्प्लॉयबिलिटी (रोजगार-क्षमता) बढ़ाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, संवाद कौशल और विश्लेषणात्मक सोच का विकास करना है। कक्षा की शुरुआत अब खबरों के साथ नए निर्देशों के अनुसार स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना और प्रोजेक्ट प्रवीण सहित सभी योजनाओं के अंतर्गत संचालित बैचों में कक्षा की शुरुआत समाचार-पत्र पठन से होगी। इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं (टीपी) और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन एजेंसियों (पीआईए) को अपने-अपने केंद्रों पर प्रतिदिन कम से कम एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। सॉफ्ट स्किल्स को मिलेगी मजबूती मिशन का मानना है कि अखबार पढ़ने से प्रशिक्षार्थियों का सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स मजबूत होगा, जो सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में चयन के लिए आवश्यक है। संपादकीय और लेखों के अध्ययन से भाषा शैली, शब्दावली और विचार अभिव्यक्ति में सुधार होगा। समाचारों के विश्लेषण से युवाओं में समालोचनात्मक चिंतन विकसित होगा, जिससे वे निर्णय लेने में अधिक सक्षम बनेंगे। वहीं, पहेलियों, सांस्कृतिक लेखों और प्रेरक कथाओं से छात्रों में एकाग्रता, धैर्य और संवेदनशीलता जैसे मानवीय गुण भी विकसित होंगे। सख्त निगरानी, तत्काल प्रभाव से लागू आदेश यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसकी निगरानी के लिए जिला समन्वयक, एमआईएस मैनेजर, डीपीएम और बीपीएम को निर्देशित किया गया है कि वे अपने मासिक निरीक्षण के दौरान इस गतिविधि की विशेष समीक्षा करें और रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख करें। उल्लेखनीय है कि इस पहल के लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे प्रशिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना गया है। युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में कदम मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, योगी सरकार के मार्गदर्शन में कौशल विकास को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रखा गया है। दैनिक समाचार-पत्र पठन को पाठ्यक्रम में शामिल कर युवाओं में समालोचनात्मक सोच, वैश्विक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे डिजिटल युग के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

लगातार सातवें वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में प्रदेश को मिला प्रतिष्ठित पुरस्कार

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उन्नति की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश को गणतंत्र दिवस परेड में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में प्रदेश की झांकी को पॉपुलर च्वॉइस केटेगरी में द्वितीय पुरस्कार मिला। लोगों द्वारा सराही गई इस झांकी में बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास यात्रा को केन्द्रित किया गया था। उत्तर प्रदेश ने लगातार सातवें वर्ष पुरस्कार प्राप्त कर अपनी विशिष्ट सृजनात्मक पहचान कायम रखी।  कुल 30 झांकियों में प्राप्त किया दूसरा स्थान नई दिल्ली के राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अपर निदेशक अरविंद कुमार मिश्र को केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस परेड में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 13 मंत्रालयों व विभागों की कुल 30 झांकियां शामिल थीं, जिनमें लोकप्रियता के आधार पर उत्तर प्रदेश को दूसरा स्थान मिला। बुंदेलखण्ड की विरासत और आधुनिक विकास को किया गया प्रदर्शित समृद्वि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत थीम पर आधारित इस झांकी में उत्तर प्रदेश ने बुंदेलखण्ड की संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की झलक भी दिखाई थी। झांकी में बुंदेलखण्ड की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को प्रमुखता से दर्शाया गया। कालिंजर दुर्ग की शैल कला और एकमुख लिंग, क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करते दिखाई दिए। झांकी में बुंदेलखंड की मृद्भांड कला, मनका शिल्प, पारंपरिक हस्तशिल्प, एक जनपद एक उत्पाद, ब्रह्मोस मिसाइल, एक्सप्रेस नेटवर्क और आधुनिक अवसंरचना की झलक भी शामिल थी, जिसने विकास और परंपरा का संतुलित चित्र प्रस्तुत किया। सात वर्षों से जारी सम्मान की परंपरा उत्तर प्रदेश को आकर्षक झांकी के लिए लगातार सातवें वर्ष सम्मानित किया गया है। गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकियों ने वर्ष 2020 में द्वितीय तथा वर्ष 2021 और 2022 में प्रथम पुरस्कार जीता। वहीं, वर्ष 2023 में झांकी को ज्यूरी श्रेणी में तृतीय और पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला था। इसी प्रकार, झांकी को वर्ष 2024 में पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय स्थान, वर्ष 2025 में ज्यूरी श्रेणी में प्रथम तथा पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला। वर्ष 2026 में भी पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में प्रदेश की झांकी दूसरे स्थान पर रही, जिससे राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश की सृजनात्मक पहचान और मजबूत हुई।

अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर: UPPSC ने जारी किया 2026-27 का परीक्षा कैलेंडर

लखनऊ.  uppsc exam calendar 2026-27 Out: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने आखिरकार 2026–27 सत्र का डिटेल्ड एग्जाम कैलेंडर जारी कर दिया है। फरवरी से दिसंबर 2026 तक चलने वाली इस परीक्षा श्रृंखला में PCS, RO/ARO, शिक्षक, मेडिकल, तकनीकी और प्रोफेशनल सेवाओं से जुड़ी लगभग सभी प्रमुख भर्तियों की तारीखें शामिल हैं। इससे अभ्यर्थियों को अपनी रणनीति, टाइम टेबल और रिवीजन प्लान तय करने में बड़ी मदद मिलने वाली है। UPPSC Exam Calendar 2026: परीक्षा चक्र की शुरुआत फरवरी से आयोग के मुताबिक, 2026 का परीक्षा चक्र 2 फरवरी 2026 (सोमवार) से शुरू होगा और साल के आखिर तक यानी दिसंबर 2026 तक चलेगा। पूरी परीक्षा सूची UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर उपलब्ध है। सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा संयुक्त राज्य / अपर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (PCS) की बात करें तो इसकी मुख्य परीक्षा यानी मेन्स 29 मार्च 2026 से चार दिनों तक चलेगी। वहीं प्रारंभिक परीक्षा यानी प्री 6 दिसंबर 2026 को तय की गई। PCS अभ्यर्थियों के लिए यह कैलेंडर खास मायने रखता है क्योंकि अब उनके पास पूरे साल की स्पष्ट योजना मौजूद है। RO/ARO और APO जैसी परीक्षाओं का शेड्यूल अन्य प्रमुख प्रशासनिक परीक्षाओं में समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) मेन्स परीक्षा 2 और 3 फरवरी 2026 को होगी। वहीं सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) की प्रारंभिक परीक्षा 22 मार्च 2026 और मुख्य परीक्षा 17 जून 2026 को निर्धारित की गई है। इसके अलावा सहायक आयुक्त की मेन्स परीक्षा 28 जून 2026 से तीन दिनों तक चलेगी। शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए 2026 रहेगा निर्णायक शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी यह साल काफी अहम रहने वाला है। कैलेंडर के अनुसार स्टाफ नर्स (प्रारंभिक) परीक्षा 17 मार्च 2026 को होगी। सहायक अध्यापक (TGT) प्रीलिम्स 5 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि विभिन्न विषयों की TGT मेन्स परीक्षाएं मई और अगस्त 2026 में होंगी। पॉलीटेक्निक और प्रोफेसर भर्तियों की टाइमलाइन UPPSC कैलेंडर में पॉलीटेक्निक लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी शिक्षण सेवाओं की परीक्षाएं भी शामिल हैं। ये परीक्षाएं अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाएंगी, जिससे उच्च शिक्षा क्षेत्र के अभ्यर्थियों को भी तैयारी का पूरा समय मिल सके। तकनीकी और मेडिकल सेवाओं की परीक्षाएं तकनीकी और मेडिकल क्षेत्र की भर्तियों का शेड्यूल भी आयोग ने जारी कर दिया है। इसमें वन सेवा परीक्षा 14 से 16 जुलाई 2026, पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा 3 अक्टूबर 2026, फूड सेफ्टी ऑफिसर 25 अक्टूबर 2026, ड्रग इंस्पेक्टर 26 अक्टूबर 2026 और मेडिकल ऑफिसर परीक्षा 18 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। टेक्निकल एजुकेशन (Teaching/Training) सर्विस परीक्षा 2023 का अहम अपडेट UPPSC ने टेक्निकल एजुकेशन (Teaching/Training) सर्विस परीक्षा 2023 को लेकर भी जरूरी सूचना दी है। यह भर्ती 46 पदों के लिए है, जिनकी लिखित परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2025 को हो चुकी है। अब परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को 30 जनवरी 2026 से पारंपरिक आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि और नियम आवेदन की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2026, शाम 5 बजे तय की गई है। अभ्यर्थियों को भरे हुए फॉर्म की प्रिंट कॉपी और सभी जरूरी दस्तावेज स्वयं सत्यापित कर रजिस्टर्ड पोस्ट से या आयोग के काउंटर नंबर 3 पर जमा करना होगा। दस्तावेजों में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।

धर्म पर सीधी टक्कर: अविमुक्तेश्वरानंद बोले– पहचान साबित करें योगी, वरना…

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझसे मेरे पद और परम्परा का प्रमाणपत्र मांगा। हमने सहज भाव से वह उनको सौंप दिया। क्योंकि सत्य को साक्ष्य से भय नहीं होता। किन्तु अब समय 'प्रमाण' लेने का नहीं, बल्कि उनको 'प्रमाण' देने का है। सम्पूर्ण सनातनी समाज की तरफ से मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'हिन्दू' होने का साक्ष्य मांगता हूं। हिन्दू होना केवल भाषणों या भगवे तक सीमित नहीं है, इसकी कसौटी 'गो-सेवा' और 'धर्म-रक्षा' है। गौमाता को राज्यमाता का दर्जा देकर वह अपने हिंदू होने का प्रमाण दें अन्यथा 40 दिन बाद हम धर्म सभा करके उन्हे नकली हिन्दू घोषित करेंगे।   40 दिन का अल्टीमेटम यह बातें ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को काशी में शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि हम शासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिनों का समय दे रहे हैं। यदि इन 40 दिनों के भीतर गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं मिला और निर्यात बन्नी शासनादेश जारी नहीं हुआ तो परिणाम गम्भीर होंगे।" कहा कि यदि 40 दिन व्यर्थ गए, तो आगामी 10-11 मार्च को लखनऊ की पुण्य धरा पर सम्पूर्ण सन्त समाज का समागम होगा। उस दिन हम मुख्यमंत्री को नकली हिन्दू घोषित करने को बाध्य होंगे। जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे हिन्दू कहलाने का नैतिक अधिकार नहीं है और उस योगी को तो बिलकुल नहीं जो गुरु गोरश्वनाथ की पवित्र गद्दी का खुद को महन्त कहते हों। कहा कि लगता है स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बन्दी कानून की मांग करना ही सबसे बड़ा अपराध हो चुका है। तभी तो जब-जब जिस-जिस ने यह आवाज उठाई सरकारों ने उसे क्रूरता पूर्वक रौंद दिया। उदाहरण 1966 का दिल्ली का गोरक्षा आन्दोलन है जिसमें तत्कालीन सरकार ने जाने कितने गोभक्तों सन्तों को गोलियों से भून दिया और धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री महाराज सहित प्रमुख सनातनियों पर भी तरह-तरह के अत्याचार किये और अब उसी आवाज को बुलन्द करने के कारण हमें और हमारा इस कार्य में सहयोग कर रहे गोभक्तों पर भान्ति-भान्ति के अत्याचार और अन्याय हो रहे हैं। यहां तक कि हमसे हमारे शङ्कराचार्य होने का प्रमाण तक मांगा जा रहा है और हमारी छवि को सनातनी जनता के बीच धूमिल करने के तरह-तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। इन सबका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्तों रामभद्राचार्य आदि के माध्यम से कर रहे हैं। सत्ता के समक्ष दो स्पष्ट और अपरिहार्य शर्तें रखी जा रही हैं। गोमाता को 'राज्यमाता' का आधिकारिक दर्जा दें। जिस प्रकार हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने देशी गायों को 'राज्यमाता' घोषित किया और जिस तरह नेपाल में गाय 'राष्ट्रीय पशु है, उसी तर्ज पर उत्तरप्रदेश में भी गोमाता को 'राज्यमाता' का सम्मान मिले। निर्यात के नाम पर गोवंश की हत्या का खेल मांस निर्यात का हब भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तरप्रदेश की हिस्सेदारी 40% से अधिक है। क्या 'रामराज्य' का स्वप्न गायों के रक्त से अर्जित विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा। निर्यात का सारा डेटा भैस के मांस' (Buffalo Meat नाम पर दर्ज होता है, किंतु यह एक खुला सत्य है कि बिना DNA परीक्षण के इस मास की आड़ में गोवंश को काटा और भेजा जा रहा है। राज्य में भैंसों की संख्या और मांस निर्यात की मात्रा में भारी अन्तर है। जब तक हर वधशाला और कण्टेनर का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं होता तब तक यह सरकार द्वारा दी गई 'मौन स्वीकृति है। शंकराचार्य ने कहा कि जन-जन का आह्वान यह केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन की आत्मा की रक्षा का प्रश्न है। उत्तराखण्ड ने 'राष्ट्रमाता' का प्रस्ताव दिया, महाराष्ट्र ने 'राज्यमाता' बनाया तो फिर भगवान राम और कृष्ण की धरती 'उत्तरप्रदेश' मांस निर्यात का केन्द्र क्यों बनी हुई है।  

मजाक बना मौत की वजह? पति के एक शब्द से टूटी मॉडल, फांसी लगाकर दी जान

लखनऊ राजधानी लखनऊ के सहादतगंज थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है। यहां मॉडलिंग का प्रशिक्षण ले रही एक 23 वर्षीय युवती ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। शुरुआती जांच में जो वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच चल रहे हंसी-मजाक के दौरान पति ने पत्नी को 'बंदरिया' कह दिया, जिससे वह इस कदर आहत हुई कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।   चार साल पहले हुआ था प्रेम विवाह सहादतगंज के लकड़मंडी इलाके की रहने वाली 23 वर्षीय तनु सिंह ने करीब चार साल पहले इंदिरानगर (तकरोही) निवासी राहुल श्रीवास्तव के साथ प्रेम विवाह किया था। राहुल पेशे से ऑटो चालक है, जबकि तनु अपनी खूबसूरती और प्रतिभा के दम पर ग्लैमर की दुनिया में पहचान बनाने के लिए मॉडलिंग का कोर्स कर रही थी। परिजनों के मुताबिक, दोनों के बीच प्रेम था, लेकिन एक छोटी सी घटना ने सब कुछ खत्म कर दिया। मजाक बना मौत का कारण दोपहर करीब 1:30 बजे घर के माहौल में हंसी-खुशी का आलम था। राहुल और तनु के साथ तनु की बड़ी बहन और उसका बेटा भी कमरे में मौजूद थे। सभी लोग आपस में ठिठोली कर रहे थे। इसी बीच राहुल ने मजाक-मजाक में तनु को 'बंदरिया' कह दिया। मॉडलिंग की छात्रा होने के नाते तनु अपने लुक्स को लेकर काफी संवेदनशील थी। पति के इस कमेंट को उसने दिल पर ले लिया और नाराज होकर दूसरे कमरे में चली गई। रोशनदान से लटका मिला शव तनु ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उस वक्त राहुल को लगा कि वह मामूली नाराजगी है, जो थोड़ी देर में दूर हो जाएगी। वह खाना लेने के लिए घर से बाहर चला गया। करीब आधे घंटे बाद जब राहुल वापस लौटा और तनु का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। अनहोनी की आशंका होने पर उसने खिड़की से झांककर देखा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। तनु रोशनदान के सहारे कपड़े के फंदे पर लटकी हुई थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित परिजनों ने आनन-फानन में दरवाजा तोड़कर तनु को नीचे उतारा और उसे लेकर सीधे डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान दौड़े। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की सूचना पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस की जांच जारी सहादतगंज पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है जो आपसी तकरार और मानसिक संताप के कारण हुआ है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों के बीच पहले से भी कोई विवाद चल रहा था या यह घटना केवल उस वक्त के मजाक का ही परिणाम थी। एक होनहार युवती की इस तरह मौत से इलाके के लोग भी स्तब्ध हैं।  

आवास, पेंशन व स्वच्छता में रिकॉर्ड प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं को नई गति

विकास के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश की बढ़त, कई योजनाओं में बना देश में नंबर वन  आवास, पेंशन व स्वच्छता में रिकॉर्ड प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं को नई गति कृषि, उद्योग व निवेश में अग्रणी भूमिका से बनी मजबूत अर्थव्यवस्था की तस्वीर इन्फ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी व ऊर्जा सुधारों से बदला प्रदेश का विकास परिदृश्य डिजिटल गवर्नेंस व ई-प्लेटफॉर्म के उपयोग में उत्तर प्रदेश की नेशनल लीडरशिप लखनऊ उत्तर प्रदेश ने केंद्र व राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के दम पर विकास के हर मोर्चे पर देश में मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं में पहला स्थान हासिल कर रहा है। इससे शासन-प्रशासन की परिणाम आधारित कार्यशैली स्पष्ट रूप से सामने आई है। योगी सरकार में उत्तर प्रदेश ने योजनाओं को कागज से जमीन तक पहुंचाने का कार्य किया है। यही कारण है कि आवास,  कृषि,  उद्योग,  इन्फ्रास्ट्रक्चर,  ऊर्जा,  डिजिटल गवर्नेंस व शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सुदृढ़ उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कारोबारी सहूलियत (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के मामले में प्रदेश टॉप अचीवर्स स्टेट है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं शहरी’ के अंतर्गत आवास निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। पिछले पौने नौ वर्षों में लगभग 62 लाख परिवारों को पक्के घर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब व मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में ठोस सुधार हुआ है। ‘अटल पेंशन योजना’ के अंतर्गत पंजीकरण के मामले में भी उत्तर प्रदेश ने देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सूक्ष्म, लघु व मध्यम (एमएसएमई) उद्योगों को मजबूती दी है। देश में सर्वाधिक, 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों की स्थापना उत्तर प्रदेश में हो चुकी है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। सरकार का फोकस स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर रहा है। कृषि क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश लगातार अपनी अग्रणी भूमिका बनाए हुए है। गन्ना, चीनी, खाद्यान, आम, दूध व आलू के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। किसानों को कृषि निवेश पर मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई। इस व्यवस्था को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है। इन्फ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 7 एक्सप्रेस-वे और 04 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे क्रियाशील हैं। एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) निर्माणाधीन है। सड़क एवं हवाई संपर्क के विस्तार से निवेश व पर्यटन को नई गति मिली है। स्वच्छता व ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नए मानक स्थापित किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण में प्रदेश का देश में पहला स्थान रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस कनेक्शन वितरण में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इससे गरीब परिवारों की रसोई में बड़ा बदलाव आया है।  डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व किया है। ई-मार्केटप्लेस जेम के माध्यम से देश में सर्वाधिक सरकारी खरीद करने वाला राज्य भी उत्तर प्रदेश है। एनपीएस ट्रेडर्स के अंतर्गत कामगारों के पंजीकरण में भी प्रदेश अग्रणी रहा है। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता व कार्य की गति बढ़ी है। शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्ययोजना विकसित करने में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। कौशल विकास नीति को लागू करने में प्रदेश नंबर वन है। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार करना है। एथेनॉल उत्पादन एवं आपूर्ति मामले में भी उत्तर प्रदेश देश में पहले पायदान पर खड़ा है।

स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार

ग्रामीण भारत को संपत्ति अधिकारों का उपहार, एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार भूमि विवादों में कमी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला संबल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार प्रदान कर रही है, बल्कि दशकों से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। ग्रामीण स्वामित्व को मिली कानूनी मजबूती स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिक प्रमाण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अब तक 72,961 ग्रामों में प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा चुके हैं, जो सर्वे योग्य ग्रामों का लगभग 80.59 प्रतिशत है। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने मकान और भूमि पर स्पष्ट कानूनी स्वामित्व प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय सुविधाओं के लिए भी मान्य आधार बन गया है। घरौनी बनी आर्थिक सुरक्षा की कुंजी राजस्व विभाग द्वारा सहमति के आधार पर अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण ग्रामीण परिवारों को किया जा चुका है। घरौनी केवल स्वामित्व का प्रमाण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसके जरिए ग्रामीण परिवार अब औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण ले पा रहे हैं तथा सामाजिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ स्वामित्व योजना के प्रभाव से गांवों में भूमि और मकान से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। स्पष्ट रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों के कारण फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगी है। इससे न केवल ग्रामीण स्तर पर शांति और विश्वास बढ़ा है, बल्कि न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है। योगी सरकार की यह पहल सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। निरंतर जारी है वितरण प्रक्रिया सरकार द्वारा घरौनियों के वितरण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। 18 जनवरी 2025 के बाद 13,12,456 नई घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनका वितरण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। आने वाले समय में लाखों और ग्रामीण परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस योजना से वंचित न रहे। ड्रोन तकनीक से सर्वे की संभावनाएं स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,10,344 अधिसूचित ग्रामों में से 90,530 ग्राम ऐसे हैं, जहां ड्रोन सर्वे कराया जाना तकनीकी रूप से संभव है। इन ग्रामों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से सर्वे कर सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति के अनुरूप यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी। कुल मिलाकर, स्वामित्व योजना के माध्यम से योगी सरकार ने ग्रामीण समाज को संपत्ति अधिकार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का मजबूत आधार प्रदान किया है, जो उत्तर प्रदेश को देश में भूमि सुधार और ग्रामीण सशक्तिकरण का अग्रणी राज्य बना रहा है।

योगी सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान

आरसीएस–उड़ान में यूपी बना ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ योगी सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान CM योगी  के नेतृत्व में हवाई कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक विस्तार, नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में यूपी देश में अव्वल 2016 की तुलना में 2025 में यूपी में हवाई यात्रियों की संख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी, घरेलू उड़ानों के विस्तार से छोटे शहरों को मिला राष्ट्रीय संपर्क एयर कार्गो में पांच गुना उछाल, एमएसएमई व निर्यात को मिले नए पंख, जेवर एयरपोर्ट सहित नए हवाई अड्डे यूपी को बना रहे विमानन हब ‘उड़े देश का आम नागरिक’ का सपना सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हो रहा साकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व व सक्रिय नीतियों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस-उड़ान) के तहत ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का राष्ट्रीय अवॉर्ड प्रदान किया गया है। यह सम्मान नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में दिया गया है, जिसमें देश के वे राज्य शामिल हैं, जो न तो पर्वतीय हैं और न ही उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आते हैं। इस उपलब्धि ने उत्तर प्रदेश को देश के विमानन मानचित्र पर एक सशक्त और अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है। योगी सरकार की नीति से बदला प्रदेश का विमानन परिदृश्य योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कनेक्टिविटी को विकास का आधार बनाया। हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण, नए रनवे, नाइट लैंडिंग सुविधाएं व क्षेत्रीय उड़ानों को प्रोत्साहन देकर प्रदेश के छोटे शहरों को देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ा गया। आरसीएस-उड़ान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने गैर-प्राथमिक राज्यों की श्रेणी में सबसे तेज प्रगति दर्ज की।  यात्री यातायात में 2.6 गुना वृद्धि उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन के डायरेक्टर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों का असर यात्री आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है। वर्ष 2016 में प्रदेश में कुल 59.97 लाख हवाई यात्री थे। 2024 में यह संख्या 1.28 करोड़ से अधिक और 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1.55 करोड़ से अधिक हो गई। बीते नौ वर्षों में प्रदेश में 9.98 प्रतिशत कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से यात्री यातायात बढ़ा है, जो यह दर्शाता है कि हवाई यात्रा अब आम नागरिकों के लिए भी सुलभ होती जा रही है। यह ‘उड़ान-उड़े देश का आम नागरिक’ के मूल उद्देश्य को जमीन पर उतारने का प्रमाण है। घरेलू उड़ानों से मजबूत हुआ क्षेत्रीय संपर्क उन्होंने बताया कि प्रदेश में घरेलू उड़ानों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2016 में घरेलू यात्रियों की संख्या 52.30 लाख थी, जो 2024 में 1.16 करोड़ से अधिक और 2025 में 1.41 करोड़ से अधिक पहुंच गई। इससे न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिला, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए। इसी तरह, इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या जो 2016 में 7.66 लाख थी वो 2024 में 12.63 लाख से अधिक और 2025 में 13.37 लाख से अधिक पहुंच गई।  एयर कार्गो में पांच गुना उछाल, अर्थव्यवस्था को बल योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश एयर कार्गो के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ा है। 2016 में एयर कार्गो ट्रैफिक 5,895 मीट्रिक टन था, जो 2024 में 27,998 मीट्रिक टन और 2025 में बढ़कर 29,761 मीट्रिक टन हो गया। एयर कार्गो में इन 9 वर्षों में 17.58 प्रतिशत सीएजीआर से हुई वृद्धि ने प्रदेश को कृषि उत्पादों, एमएसएमई और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म दिया है। जेवर एयरपोर्ट और क्षेत्रीय हब की भूमिका नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) सहित प्रदेश में विकसित हो रहे नए और क्षेत्रीय हवाई अड्डे उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख विमानन और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर नागरिक तेज, सुरक्षित और सस्ती हवाई कनेक्टिविटी से जुड़े। ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का यह सम्मान योगी सरकार की इसी विकासोन्मुख सोच, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता है, जो उत्तर प्रदेश को ‘नए भारत’ की उड़ान में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

ओबरा, अमरोहा, विधूना, कुरावली एवं नौगढ़ तहसील में हो रहा है राजस्व भवनों का निर्माण

राजस्व भवनों के निर्माण कार्य को मिली रफ्तार विभागीय आधारभूत संरचना की मजबूती के लिए वर्ष 2025-26 में 196.39 करोड़ रुपये की राशि हुई स्वीकृत ओबरा, अमरोहा, विधूना, कुरावली एवं नौगढ़ तहसील में हो रहा है राजस्व भवनों का निर्माण  गोरखपुर, मेरठ व संभल में कलेक्ट्रेट भवनों के निर्माण और मरम्मत का कार्य प्रगति पर राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए बनाये जा रहे हैं आवासीय परिसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक राजस्व विभाग की आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान करने के लिए राजस्व विभाग से जुड़े भवनों के निर्माण व मरम्मत का कार्य तेज गति से किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के विभिन्न मंडलों, जनपदों व तहसीलों में चल रहे कार्यालयी एवं आवासीय भवनों के निर्माण और मरम्मत के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 196.39 करोड़ रुपये की धनराशि निर्गत की गई, जिसके माध्यम से तेज गति से निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। इनके पूरा होने से एक ओर राजस्व विभाग के कार्य सुचारू रूप से चल सकेंगे, साथ ही प्रदेशवासियों को भी राजस्व संबंधी कार्यों के संचालन में सुविधा मिलेगी।  ओबरा, अमरोहा व नौगावां सादात में तहसील भवनों का हो रहा निर्माण राजस्व विभाग के कार्यों का सुचारू रूप से संचालन और विकास कार्यों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जनपदों और तहसीलों में राजस्व भवनों का निर्माण और मरम्मत की जा रही है। इसके तहत सोनभद्र जनपद में ओबरा, गाजियाबाद में लोनी, अमरोहा में अमरोहा व नौगावां सादात तहसील के अलावा जालौन में उरई तहसील के राजस्व भवनों का निर्माण प्रगति पर है। कार्यदायी संस्थाएं इनका निर्माण तेजगति से कर रही हैं। इसके साथ ही गोरखपुर, मेरठ व संभल में कलेक्ट्रेट भवनों की मरम्मत का कार्य भी चल रहा है। इसी क्रम में जनपद सिद्धार्थनगर की तहसील नौगढ़, औरैया की तहसील विधूना और मैनपुरी की तहसील कुरावली में भी राजस्व भवनों का निर्माण किया जा रहा है। जिनमें से कुछ का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि शेष का जल्द ही पूरा हो जाएगा। ये कलेक्ट्रेट व राजस्व भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे, जहां एक ही छत के नीचे राजस्व संबंधी सभी तरह के कार्य किये जा सकेंगे।  महाराजगंज में बहुउद्देशीय ऑडिटोरियम हॉल के लिए धनराशि आवंटित   प्रदेश सरकार ने इस क्रम में कुछ नए व निर्माणाधीन कार्यों को भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इनमें महाराजगंज के जनपद मुख्यालय पर बहुउद्देशीय ऑडिटोरियम हॉल को विकसित करने के लिए धनराशि आवंटित की जा चुकी है, इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। इसके साथ ही राजस्व विभाग के कर्मचारियों के आवासीय परिसरों का भी निर्माण व मरम्मत की जा रही है। जिस क्रम में जिलाधिकारी बाराबंकी के आवास की मरम्मत और अयोध्या में राजस्व अधिकारियों के लिए टाइप-4 आवासों के साथ बस्ती की तहसील हरैया में आवासीय भवनों के निर्माण के नए कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य निर्माण कार्यों के प्रस्तावों पर भी स्वीकृति की कार्यवाही तेज गति से चल रही है। इनमें मिर्जापुर में कलेक्ट्रेट का पुनर्निर्माण, कानपुर की सदर तहसील, चंदौली की पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर तहसील और गाजीपुर में कासिमाबाद व सेवरई तहसीलों के कार्यालय भवनों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही मेरठ मंडल के आयुक्त कार्यालय में न्यायालय कक्ष और अमरोहा में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) के न्यायालय कक्ष एवं कार्यालय भवन के निर्माण के प्रस्ताव भी दिये जा चुके हैं। इसी क्रम में अयोध्या, कानपुर, मुरादाबाद, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, हरदोई, वाराणसी, आगरा व जौनपुर सहित कई जनपदों की तहसीलों में विभाग के कर्मचारियों के आवासों के निर्माण के प्रस्तावों पर भी स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।

मुख्यमंत्री ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

राष्ट्रपिता की पुण्य तिथि पर सीएम योगी ने बापू को किया नमन मुख्यमंत्री ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण श्रद्धा से भरे वातावरण में मुख्यमंत्री ने कुछ क्षण मौन रहकर राष्ट्रपिता को दी श्रृद्धांजलि मुख्यमंत्री ने किया आमजन से बापू के आदर्शों को अपनाने का आह्वान लखनऊ  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में स्थापित गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धा व सम्मान के वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बापू को नमन किया। इसके बाद कुछ क्षण मौन रहकर उन्होंने राष्ट्रपिता को स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर भी बापू को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आमजन से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।  भजनों से गूंजा कार्यक्रम स्थल श्रद्धांजलि समारोह के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा महात्मा गांधी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी गई। ‘रघुपति राघव राजाराम’ सहित अन्य भजनों की मधुर धुनों से जीपीओ पार्क गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकाग्रता के साथ लगभग 15 मिनट तक बैठकर भजनों को सुना। इस दौरान उन्होंने न केवल बच्चों की प्रस्तुति की सराहना की, बल्कि गांधी प्रतिमा के समक्ष सभी स्कूली बच्चों के साथ फोटो भी खिंचाई। सत्य और अहिंसा का संदेश इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। श्रद्धेय बापू का सत्यनिष्ठ आचरण, अहिंसा की उनकी अडिग साधना और मानवता के प्रति अनन्य करुणा, संपूर्ण विश्व को सदैव आलोकित करती रहेगी। आइए, बापू के आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।' कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, भाजपा के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपिता के चित्र व प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।