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कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देश पर हल्दी बीज वितरण में अनियमितता की शिकायत पर जाँच शुरू

कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देश पर हल्दी बीज वितरण में अनियमितता की शिकायत पर जाँच शुरू रकबा के सत्यापन के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश रायपुर,  कृषि विभाग के अनुशांगिक संस्था उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत हल्दी बीज वितरण में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया है।कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देशानुसार मामले की जाँच प्रारंभ कर दी गई है तथा जाँच के लिए संचालनालय स्तर से टीम भी गठित की गई है।          जिलों में हल्दी बीज वितरण से संबंधित शिकायतों के परिप्रेक्ष्य में संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा जिला अधिकारियों से हितग्राहीवार रोपित बीज की मात्रा, बीज प्रदायक संस्थाओं द्वारा प्रदाय बीज की मात्रा एवं गुणवत्ता तथा हल्दी बीज रोपण करने वाले कृषकों को भुगतान की गई अनुदान राशि की स्थिति सहित आवश्यक जानकारी और अभिलेख माँगे गए हैं।उद्यानिकी विभाग द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कृषकों द्वारा रोपित किये गये हल्दी बीज से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज, भुगतान संबंधी विवरण तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराई जाए, ताकि शिकायतों की तथ्यात्मक जाँच कर शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा सके। डिजिटल क्रॉप सर्वे के भी निर्देश        जाँच प्रक्रिया के अंतर्गत किसानों के खेतों में रोपित हल्दी फसल की वास्तविक स्थिति,  रोपित रकबा का सत्यापन करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही बीज वितरण से संबंधित अभिलेखों, बीज प्रदायक संस्थाओं के विवरण, देयकों, पंजीयन टैग तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी का परीक्षण किया जाएगा। किसानों के खेतों में रोपित फसल के जीपीएस आधारित फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके। अनुदान भुगतान पर रोक         उल्लेखनीय है कि राज्य में उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य पोषित योजनांतर्गत 1300 हेक्टेयर हल्दी क्षेत्र विस्तार का कार्यक्रम लिया जा रहा है। इस योजनांतर्गत स्वयं के स्तर से  प्रमाणित हल्दी बीज का रोपण करने वाले कृषकों को प्रति हेक्टेयर 46 हजार रूपए तक अनुदान देने का प्रावधान है। योजनांतर्गत बीज की व्यवस्था स्वयं कृषक द्वारा की जाकर अनुदान हेतु आवेदन जिला अधिकारी को प्रस्तुत करने पर मैदानी अमले से सत्यापन उपरांत अनुदान की राशि कृषक के बैंक खाते में भुगतान की जाती है। कृषकों द्वारा रोपित की गई हल्दी फसल के प्रमाणित बीज वितरण से संबंधित शिकायतों एवं सत्यापन की प्रक्रिया को देखते हुए विभाग द्वारा अनुदान भुगतान की कार्यवाही फिलहाल रोक दी गई है। कृषकों द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिलेखों, रोपित बीज की मात्रा एवं रकबा तथा फसल की स्थिति के सत्यापन की जाँच के बाद ही आगे की भुगतान प्रक्रिया के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। जाँच में अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित संस्था दोषी पाए जाते हैं कानूनी  कार्रवाई की जायेगी        मंत्री नेताम के निर्देश पर प्रारंभ की गई जाँच का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुँचाना है। विभाग ने निर्देशित किया है कि जाँच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित संस्था दोषी पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध कानूनी  कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। जाँच पूरी होने तथा संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। जाँच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की आर्थिक राहत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की आर्थिक राहत पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर हुआ मात्र 500 रुपये, पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण हुआ किफायती मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं में सुधार से नागरिकों को मिल रही सहूलियत रायपुर छत्तीसगढ़ में पारिवारिक संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन को सरल और किफायती बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधारों से नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है। बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी के लिए पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में शुल्क संबंधी रियायत महत्वपूर्ण सहारा बनी। संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के बाजार मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये किए जाने से उन्हें 81 हजार 648 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। इस राहत से पारिवारिक संपत्ति से संबंधित दस्तावेज का पंजीयन कम खर्च में पूरा हुआ और परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल और मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों में पंजीयन प्रक्रिया का सरलीकरण, शुल्क में रियायत, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों का विकास प्रमुख हैं। इन व्यवस्थाओं का लाभ आम नागरिकों तक किस प्रकार पहुंच रहा है, यह जानने के लिए विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं। 81 हजार रुपये से अधिक की बचत ने दी परिवार को बड़ी राहत सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपना अनुभव साझा करते हुए श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी ने बताया कि पारिवारिक हकत्याग से संबंधित रिलीज डीड का पंजीयन कराने के दौरान उन्हें शासन द्वारा निर्धारित रियायती पंजीयन शुल्क का लाभ मिला। इस व्यवस्था के कारण उनके 81,648 रुपये बच गए। संपत्ति संबंधी दस्तावेज के पंजीयन में इतनी बड़ी राशि की बचत उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत साबित हुई। श्रीमती जोशी ने बताया कि पंजीयन शुल्क में कमी आने से पारिवारिक संपत्ति से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों का पंजीयन कराना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ है। इससे परिवार को अतिरिक्त आर्थिक व्यय से राहत मिली है। उन्होंने इस सुविधा को आम नागरिकों के लिए उपयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। पारिवारिक हकत्याग पर अब मात्र 500 रुपये पंजीयन शुल्क राज्य शासन द्वारा संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले ऐसे दस्तावेजों के पंजीयन पर संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत शुल्क निर्धारित था, जिसे घटाकर अब मात्र 500 रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय से पात्र परिवारों को संपत्ति संबंधी अधिकारों के व्यवस्थापन और हकत्याग के दस्तावेजों का पंजीयन कराने में आर्थिक सहूलियत मिल रही है। विशेष रूप से उन परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है, जिन्हें पारिवारिक संपत्ति के हकत्याग से संबंधित दस्तावेजों के पंजीयन में पहले अधिक राशि खर्च करनी पड़ती थी। जगदलपुर की श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की राहत इसका उदाहरण है। पंजीयन शुल्क में कमी से बची राशि परिवार की अन्य आवश्यकताओं के लिए उपयोग की जा सकती है। डिजिटल सुविधाओं से सरल और पारदर्शी बन रही पंजीयन प्रक्रिया वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन भुगतान और ऑटो म्यूटेशन जैसी व्यवस्थाओं से नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनाई जा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों के समय और धन की बचत के साथ पंजीयन कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। प्रदेश में विकसित हो रहे सर्वसुविधायुक्त स्मार्ट पंजीयन कार्यालय राज्य में नागरिकों को बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्मार्ट पंजीयन कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। इन कार्यालयों में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल टोकन प्रणाली, हेल्प डेस्क, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, निःशुल्क वाई-फाई और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रथम चरण में सीबीडी नवा रायपुर, बेबीलोन टावर, श्रीराम बिजनेस पार्क सड्डू, अभनपुर, तिल्दा, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग और कुनकुरी स्थित पंजीयन कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जा चुका है। इन कार्यालयों में नागरिकों को सुविधाजनक वातावरण में पंजीयन कार्य पूरा करने और आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही बदलाव की कहानियां पंजीयन विभाग का 'सेवा संकल्प अभियान' नागरिकों के अनुभवों और सुझावों को जानने का माध्यम बन रहा है। अभियान के तहत हितग्राहियों से संवाद कर पंजीयन सेवाओं में हुए सुधारों के वास्तविक लाभ की जानकारी प्राप्त की जा रही है। जगदलपुर की श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी की कहानी दर्शाती है कि पंजीयन शुल्क में किए गए सुधार किस प्रकार परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत प्रदान कर रहे हैं। पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में 81,648 रुपये की बचत उनके लिए केवल शुल्क में रियायत नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक जरूरतों के लिए उपलब्ध हुई एक महत्वपूर्ण राशि भी है।

धान के पैरे से धनेश्वरी ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई पहचान, कला को बनाया कमाई का जरिया

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी धान के पैरे से धनेश्वरी ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई पहचान, कला को बनाया कमाई का जरिया बिहान योजना और नाबार्ड के प्रशिक्षण से निखरा हुनर, घर बैठे पैरा आर्ट से अर्जित कर रहीं अच्छी आमदनी खुद बनीं आत्मनिर्भर, अब दूसरी महिलाओं को भी सिखा रहीं हुनर और दिखा रहीं स्वरोजगार की राह रायपुर,   खेतों में धान की कटाई के बाद बचने वाला पैरा भी किसी के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकता है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम अवरीद निवासी श्रीमती धनेश्वरी धीवर ने अपनी मेहनत, लगन और रचनात्मकता से इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने पैरा आर्ट की कला सीखी और आज इसी हुनर के बल पर घर बैठे अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। कभी केवल अपनी रुचि के लिए सीखी गई कला अब उनकी आजीविका का आधार बन गई है। इतना ही नहीं, धनेश्वरी अब दूसरों को भी पैरा आर्ट का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बिहान से मिला अवसर, नाबार्ड के प्रशिक्षण ने संवारा हुनर श्रीमती धनेश्वरी धीवर की आत्मनिर्भरता की यात्रा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद शुरू हुई। नाबार्ड के सहयोग से उन्हें पैरा आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पैरे से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करने की बारीकियां सीखीं। अपनी रुचि और निरंतर अभ्यास के माध्यम से उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल की। धीरे-धीरे उनका हुनर निखरता गया और उन्होंने पैरा आर्ट को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। आज धनेश्वरी घर पर ही पैरा आर्ट की कलाकृतियां तैयार कर रही हैं और उनसे अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। इस कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें रोजगार के लिए घर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अपनी कला को समय देकर आय अर्जित कर पा रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अपने हुनर से दूसरों के सपनों को भी दे रहीं आकार धनेश्वरी धीवर की सफलता केवल स्वयं तक सीमित नहीं है। पैरा आर्ट में दक्षता हासिल करने के बाद वे अब प्रशिक्षक की भूमिका भी निभा रही हैं। वे अन्य लोगों को पैरा आर्ट की तकनीक और कलाकृतियां तैयार करने का प्रशिक्षण दे रही हैं, ताकि वे भी इस कला को सीखकर स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकें। इस तरह उनका हुनर न केवल उनकी अपनी आजीविका का माध्यम बना है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार की संभावनाएं तैयार कर रहा है। श्रीमती धनेश्वरी बताती हैं कि पैरा आर्ट ने उन्हें घर बैठे काम करने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर दिया है। बिहान से जुड़ाव और नाबार्ड के प्रशिक्षण ने उनके हुनर को नई दिशा दी। आज वे अपनी कला के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और दूसरों को प्रशिक्षण देकर अपने अनुभव का लाभ भी पहुंचा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रहा प्रोत्साहन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं की रुचि और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियां उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। श्रीमती धनेश्वरी धीवर ने अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनकी कहानी इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को पहचान देकर न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और आत्मविश्वास की नई राह खोल सकती हैं।

आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रतियां सीधे मोबाइल पर हुईं उपलब्ध, हार्ड कॉपी भी मिली

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी सरकारी सेवाओं की राह हुई आसान, सेवा सेतु से नंद किशोर की बेटी को सिर्फ 4 दिनों में मिले तीन प्रमाण पत्र आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रतियां सीधे मोबाइल पर हुईं उपलब्ध, हार्ड कॉपी भी मिली समयबद्ध और पारदर्शी सेवाओं से नागरिकों को मिल रही राहत, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवाओं को सरल, सुगम और समयबद्ध बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से अब जरूरी प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के सारागांव तहसील अंतर्गत ग्राम सरवानी निवासी नंद किशोर का अनुभव इसका उदाहरण है। उन्होंने अपनी पुत्री के आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया और मात्र चार दिनों के भीतर तीनों प्रमाण पत्र प्राप्त हो गए। प्रमाण पत्रों की डिजिटल प्रतियां सीधे उनके मोबाइल पर उपलब्ध होने के साथ ही हार्ड कॉपी भी प्रदान की गई। चार दिनों में पूरे हुए तीन काम, मोबाइल पर मिले प्रमाण पत्र नंद किशोर अपनी पुत्री के लिए आवश्यक आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तहसील कार्यालय स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया। केन्द्र में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन स्वीकार कर आवश्यक कार्रवाई की गई। आवेदन करने के महज चार दिनों के भीतर तीनों प्रमाण पत्र तैयार हो गए और उनकी पीडीएफ प्रतियां नंद किशोर के मोबाइल पर प्राप्त हो गईं। इसके साथ ही उन्हें प्रमाण पत्रों की हार्ड कॉपी भी उपलब्ध करा दी गई। नंद किशोर के लिए यह सुविधा राहत देने वाली साबित हुई। एक ही केन्द्र के माध्यम से तीनों आवश्यक दस्तावेज समय पर प्राप्त होने से उन्हें अलग-अलग प्रक्रियाओं की परेशानी नहीं उठानी पड़ी। डिजिटल माध्यम से प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के कारण दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया भी सुविधाजनक रही। न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर, न लंबा इंतजार सेवा सेतु केन्द्र से समय पर प्रमाण पत्र मिलने पर नंद किशोर ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज आसानी से और निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध हो रहे हैं। इससे आम नागरिकों को शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में सुविधा मिल रही है। विशेष रूप से मोबाइल पर प्रमाण पत्रों की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध होना नागरिकों के लिए उपयोगी व्यवस्था है। नंद किशोर ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र से उनकी पुत्री के तीनों प्रमाण पत्र केवल चार दिनों में मिल गए, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। डिजिटल सेवाओं से नागरिकों के समय की बचत, बढ़ रही सुविधा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक शासकीय सेवाएं सरल और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रमाण पत्रों की आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेजों की उपलब्धता अधिक सुविधाजनक बन रही है। नंद किशोर की यह कहानी दर्शाती है कि तकनीक आधारित नागरिक सेवाएं सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मात्र चार दिनों में आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध होना सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को मिल रही समयबद्ध सेवाओं का उदाहरण है।

एसएसपी ने बिलासपुर के 6 थानेदारों को किया पुरस्कृत, पुलिस विभाग में बढ़ा उत्साह

बिलासपुर. गंभीर अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाकर आरोपियों को सजा दिलाने, अपराधी पकड़ने समेत अन्य बेहतर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एसएसपी ने सम्मानित किया है। पॉक्सो, हत्या और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में मजबूत चार्जशीट पेश करने वाले 25 पुलिसकर्मियों को नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए गए हैं। इन मामलों में अदालतों ने आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई है। सम्मान पाने वालों में टीआई देवेश सिंह राठौर का प्रदर्शन प्रमुख रहा। इसके अलावा टीआई प्रदीप आर्य, निलेश पाण्डेय, दामोदर मिश्रा समेत अन्य निरीक्षकों को पुरस्कृत किया गया है। इनाम पाने वाले निरीक्षक रजनीश सिंह को पॉक्सो के एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए। निरीक्षक दामोदर मिश्रा को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए और निरीक्षक निलेश पांडेय को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। उप निरीक्षक रामनरेश यादव को एनडीपीएस के मामले में चार आरोपियों को 15-15 साल की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए। उप निरीक्षक राज सिंह को हत्या के मामले में उम्रकैद और मीना ठाकुर को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1- 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। जीएल चंद्राकर को पॉक्सो के मामले में आठ साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए दिए गए। वहीं बसंत साहू को 900 रुपए तथा संतरा चौहान और नारायण ठाकुर को 500-500 रुपए से पुरस्कृत किया गया। एएसआई और हेड कांस्टेबलों को भी मिला पुरस्कार एएसआई गुलाबचंद पटेल और रमेश ओरके को 1-1 हजार रुपए, देवेंद्र तिवारी को 800 रुपए तथा विजय शर्मा को 600 रुपए दिए गए। इसी तरह हेड कांस्टेबल रामायण सिंह और सत्यप्रकाश यादव को 1-1 हजार रुपए, भुवनेश्वर मरावी को 500 रुपए तथा रमेश आदिले और परमेश्वर ठाकुर को 200-200 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न आवास जल्द पूरा करने वाले हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश रायपुर,   मंत्रालय महानदी भवन में आज मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 और 1.0 के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।         मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के स्वीकृत आवासों का निर्माण कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि जो हितग्राही अपने आवास का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0         प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0: बैठक में लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) घटक के तहत चल रही आवास निर्माण परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही, भागीदारी में किफायती आवास (AHP) घटक के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के निर्माण स्थल में परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0         इस योजना के तहत लाभार्थी आधारित आवास निर्माण घटक के अंतर्गत पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं की कटौती के बाद संशोधित परियोजनाओं की स्वीकृति के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नगरीय प्रशासन विभाग के विभिन्न अन्य प्रस्तावों को भी बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।        नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत कुल 2,43,087 मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2 लाख 25, हजार 411 आवास पूरी तरह से पूर्ण हो चुके हैं। 17 हजार 368 आवासों का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं, बीएलसी घटक के अंतर्गत स्वीकृत 2 लाख 6 हजार 118 मकानों में से 1 लाख 96 हजार 144 मकान पूर्ण हो चुके हैं और 9 हजार 666 आवासों का निर्माण विभिन्न चरणों में जारी है।      बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (राज्य शहरी विकास अभिकरण) सुमित अग्रवाल सहित ऊर्जा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगर तथा ग्राम निवेश, हाउसिंग बोर्ड, हुडको और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड

कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड रायपुर  जिंदल स्टील लिमिटेड ने कर्मचारियों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को अपने सुरक्षा कार्यक्रम “दक्षता इंजीनियरिंग सेफ्टी” के लिए वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (वर्ल्डस्टील) का प्रतिष्ठित 2026 स्टीली अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन पीपल मिला है। यह पुरस्कार 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें स्टीलीए अवॉर्ड्स में दिया गया। जिंदल स्टील को चीन बाओवू, इन्फ्राबिल्ड, टाटा स्टील और यूएसिमिनास जैसी वैश्विक कंपनियों के बीच से स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति ने विजेता चुना। दक्षता कार्यक्रम का उद्देश्य हर कर्मचारी को उसकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार सुरक्षा के लिए तैयार करना है। इसमें केवल प्रशिक्षण में शामिल होना ही नहीं, बल्कि सुरक्षा ज्ञान, व्यावहारिक कौशल, आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और सुरक्षित व्यवहार का भी आकलन किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत जिंदल स्टील के छह स्थानों पर 27,100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़ा गया है। कंपनी ने 16,539 नए कर्मचारियों का सुरक्षा आकलन किया है और 69 प्रमाणित प्रशिक्षकों के माध्यम से 372 सुरक्षा एवं एचएसई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। इन कार्यक्रमों में 96 प्रतिशत प्रशिक्षण पूरा किया गया। रायपुर मशीनरी डिवीजन में एआई आधारित कार्यस्थल निरीक्षण, डिजिटल जोखिम विश्लेषण और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां 17,752 सुरक्षा निरीक्षण किए गए और 379 उच्च जोखिम वाले कार्यों को हटाया गया या मशीनों के माध्यम से सुरक्षित बनाया गया। इसी अवधि में आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 15 प्रतिशत सुधार हुआ और इसे घटाकर 5.25 मिनट किया गया। साथ ही, रायपुर मशीनरी डिवीजन ने एलटीआईएफआर 0.00 हासिल किया, जो कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति जिंदल स्टील की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सम्मान जिंदल स्टील के उस निरंतर प्रयास की पहचान है, जिसके माध्यम से कंपनी हर कर्मचारी के लिए अधिक सुरक्षित, सक्षम और बेहतर कार्यस्थल तैयार कर रही है।

साइबर ठगी के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल, भिलाई में म्यूल अकाउंट्स नेटवर्क का खुलासा

भिलाई नगर. सुपेला, खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त कार्रवाई में कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराने वाले 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन म्यूल खातों के जरिए लाखों रुपये के संदेहास्पद लेन-देन का खुलासा हुआ है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी मात्र 5 से 15 हजार रुपए के कमीशन के लिए अपने बैंक खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और उससे जुड़े सिम कार्ड अन्य व्यक्तियों को सौंप देते थे। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल आम जनता से ठगे गए पैसों को ट्रांसफर करने और पहचान छुपाने के लिए करते थे। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर दुर्ग पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की। सुपेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत फेडरल और उत्कर्ष बैंक से संबंधित मामलों में 02 आरोपियों शुभम चौधरी (22 वर्ष) और गुरमीत कौर को पकड़ा गया। वहीं खुर्सीपार थाना क्षेत्र में इंडियन बैंक खातों से जुड़े मामले में 5 आरोपियों तरुण नायक (40 वर्ष), निखिल नेताम (22 वर्ष), यसमीत सिंह (22 वर्ष), गौरव साहू (23 वर्ष) और नरगिस को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (2), 318 (3) और 317 (4) के तहत सुपेला और खुर्सीपार में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।

रायगढ़ के रामभांठा में ₹75 लाख से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, मंत्री ओपी चौधरी ने किया भूमिपूजन

रायगढ़ के रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन शाला नायक सुमन के हाथों कराया भूमिपूजन, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया सम्मानित शिक्षा की ताकत से ही मेरे जीवन में आया बदलाव, छोटे से गांव से निकलकर आईएएस और वित्त मंत्री बनने तक का सफर शिक्षा से ही हुआ संभव  : ओ.पी. चौधरी रामभांठा स्कूल को 10वीं से 12वीं तक उन्नयन की मिली सुविधा, क्षेत्र के बच्चों को उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में मिलेगी सहूलियत रायपुर,  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन हाई स्कूल भवन का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में उन्होंने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। नया स्कूल भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सपनों को साकार करने की मजबूत नींव बनेगा। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शाला नायक सुमन के हाथों नवीन भवन का भूमिपूजन कराया। उन्होंने सुमन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में इतनी ऊंचाई हासिल करें कि भविष्य में आप हमसे भी बड़े विकास कार्यों का भूमिपूजन करें। वित्त मंत्री के इस आत्मीय व्यवहार से विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल रहा। शिक्षा ने बदली मेरी जिंदगी, यही हर बच्चे की सफलता का आधार : वित्त मंत्री चौधरी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने अपने जीवन के संघर्षों और शिक्षा के महत्व को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति, समाज, प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। किसी भी देश के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंत्री चौधरी ने कहा कि मेरा जन्म रायगढ़ से लगभग 17 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बायंग में हुआ था। जब मैं आठ वर्ष का था, तब मेरे पिता का निधन हो गया। मेरी माताजी केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा ने मेरे जीवन को नई दिशा दी। शिक्षा की बदौलत मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचा और आज रायगढ़ के विधायक तथा छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रामभांठा विद्यालय का 12वीं तक उन्नयन, अब बच्चों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्ष 2025 में रामभांठा विद्यालय को हाई स्कूल से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के रूप में उन्नत किया गया। पहले यहां केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की सुविधा थी, लेकिन अब बारहवीं कक्षा तक शिक्षा की व्यवस्था होने से रामभांठा और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी सहूलियत मिल रही है। उन्होंने कहा कि 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाला नया भवन विद्यालय की अधोसंरचना को मजबूत करेगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शैक्षणिक अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी बच्चों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षक ही गढ़ते हैं समाज और राष्ट्र का भविष्य वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों के हाथों में होती है। शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करते हैं।  इस अवसर पर वित्त मंत्री चौधरी ने प्रतिभा सम्मान समारोह के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और सभी बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, बड़े सपने देखने तथा जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में रायगढ़ नगर निगम के महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविंद्र गबेल, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य नरेंद्र पटेल, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट रायपुर,  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष तोमन साहू ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने राज्य के 13 जिलों में जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित किए जाने की जानकारी दी और इसका प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपा।         साहू ने राज्यपाल को जिलों में रेड क्रॉस की गतिविधियों और संचालित कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया। साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज्यपाल को आमंत्रित किया।         राज्यपाल डेका ने शेष जिलों में भी जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेड क्रॉस की गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य युगल सिन्हा उपस्थित थे।