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महतारी वंदन की 26वीं किश्त जारी, 68.48 लाख महिलाओं के खाते में ट्रांसफर हुए 641.62 करोड़ रूपए

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक  सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 26वीं किश्त की राशि आज जारी की गई। इसके जारी होते ही हितग्राही महिलाओं के मोबाईल में खुशियों के नोटिफिकेशन की घंटी बज उठी। इस योजना के तहत राज्य की 68 लाख 48 हजार 899 महिलाओं को 641 करोड़ 62 लाख 92 हजार रूपए उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। लाभान्वित हितग्राहियों में 7773 महिलाएं नियद नेल्ला नार के योजना के गांवों की रहने वाली है।  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए और महिलाओं की बेहतरी के लिए यह योजना मार्च 2024 में शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक हर महीने हितग्राही महिलाओं को एक-एक हजार रूपए की सहायता राशि नियमित रूप से दी जा रही है। इस योजना के तहत अब तक हितग्राही महिलाओं को 16,881 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।  गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत हितग्राही महिलाओं के केवाईसी पूरा किए जाने का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। केवाईसी के अद्यतन की यह प्रक्रिया ई-गवर्नेस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 3 अप्रैल से शुरू की गई है, जो 30 जून तक चलेगी। व्हीएलई द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत भवन में तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड कार्यालय में केवाईसी अद्यतन का कार्य हो रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना की ऐसी हितग्राही महिलाओं से जिनका ई-केवाईसी नहीं हुआ है, उनसे तत्काल ई-केवाईसी कराने की अपील की है ताकि योजना की सहायता राशि बिना किसी व्यवधान के उनके खाते में पहुंच सके।  महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की संख्या 68,94,633 है, जिसमें से केवाईसी हेतु लंबित हितग्राहियों को छोड़कर 68,48,899 हितग्राहियों को 26वीं किश्त का भुगतान किया गया है।

बिजली बिल समाधान योजना बनी संजीवनी, धमतरी के परिवारों को मिली आर्थिक राहत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। धमतरी जिले में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है, जहाँ हजारों उपभोक्ता वर्षों पुराने बिजली बिल के बोझ से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। संकट में सहारा- विशाल परिवार की बदली किस्मत धमतरी निवासी बी. एस. विशाल के परिवार के लिए बिजली का बकाया बिल एक मानसिक तनाव बन चुका था। सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते बिल की राशि बढ़ती गई, जिससे बिजली कटने का डर हमेशा बना रहता था। जब शासन की समाधान योजना की घोषणा हुई, तो उनके पुत्र डेनियल विशाल ने विभागीय शिविर में संपर्क किया। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026  की प्रक्रिया इतनी सरल थी कि उन्हें जल्द ही योजना का लाभ मिला। डेनियल ने बताया कि बकाया मूल राशि में भारी छूट और सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी ने हमारे परिवार को नई शुरुआत करने का मौका दिया है। अब हम नियमित रूप से बिल चुकाने की स्थिति में हैं। यह योजना हम जैसे आम लोगों के लिए मुख्यमंत्री का बड़ा उपहार है। धमतरी जिले में योजना की शानदार सफलता विद्युत विभाग द्वारा जारी ताजा आँकड़ों के अनुसार, जिले में योजना को लेकर जबरदस्त उत्साह है। इस योजना के लिए अब तक 4,652 पात्र उपभोक्ताओं की पहचान की जा चुकी है। इसमें से 4,115 उपभोक्ताओं ने ऑफलाइन माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। आवेदन के बाद  537 परिवारों को पहले ही बकाया मुक्त कर प्रत्यक्ष लाभ दिया जा चुका है। किसे, कितना और कैसे मिलेगा लाभ योजना की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसका फायदा पहुँचे। गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ता को बकाया मूल राशि पर अधिकतम 75 प्रतिशत तक की भारी छूट दिया जा रहा है। इसी तरह घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता को मूल बकाया राशि में 50 प्रतिशत तक की राहत दिया जा रहा है। सभी पात्र श्रेणियों के लिए लेट पेमेंट सरचार्ज (अधिभार) को 100 प्रतिशत माफ कर दिया गया है। उपभोक्ता को केवल 10 प्रतिशत प्रारंभिक राशि जमा करनी होगी, जिसके बाद शेष राशि को वह अपनी सुविधा अनुसार निर्धारित किस्तों में जमा कर सकता है। 30 जून तक सुनहरा अवसर यह योजना 12 मार्च 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। विद्युत विभाग द्वारा गांव-गांव और वार्डों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में छूट न जाए। जनसंपर्क माध्यमों और स्थानीय मुनादी के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जनहित की दिशा में एक बड़ा कदम मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना केवल एक वित्तीय रियायत नहीं है, बल्कि यह सुशासन की उस सोच का प्रतीक है जहाँ सरकार अपने नागरिकों की बुनियादी समस्याओं को संवेदनशीलता से हल करती है। इस पहल से न केवल बिजली विभाग के राजस्व में सुधार होगा, बल्कि प्रदेश के हजारों घरों में फिर से खुशहाली की रोशनी फैलेगी।

भाजपा का 47वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया, जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने घर पर फहराया पार्टी का ध्वज

बिलासापुर जिले में भारतीय जनता पार्टी का 47वां स्थापना दिवस बड़े ही उत्साह, गरिमा और राष्ट्रभावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने अपने निज निवास में पार्टी का ध्वज फहराकर कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा और मूल्यों के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई, जिसके पश्चात सभी ने एकजुट होकर राष्ट्रहित और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जो राष्ट्रवाद, सेवा और सुशासन के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का इतिहास संघर्ष, समर्पण और सेवा से भरा हुआ है, और आज पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। यह हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए गर्व की बात है कि हम इस संगठन का हिस्सा हैं। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम्" के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को देशभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। साथ ही, एक-दूसरे को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी गईं और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर कई कार्यकर्ताओं ने अपने विचार भी साझा किए और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत के साथ किया गया।

छत्तीसगढ़ की समाधान योजना बनी शाहीन बेगम का बिजली बिल कम करने में सहायक

रायपुर. बढ़ते बिजली बिल और सरचार्ज से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। यह योजना महज छूट तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक बोझ से दबे परिवारों को आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। योजना के तहत उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 50 से 75 प्रतिशत तक की छूट और सरचार्ज में 100 प्रतिशत माफी मिल रही है। साथ ही, केवल 10 प्रतिशत राशि जमा कर शेष भुगतान आसान किस्तों में करने की सुविधा इसे और भी सुलभ बनाती है। “मोर बिजली ऐप” और नजदीकी वितरण केंद्रों के माध्यम से पंजीयन प्रक्रिया भी सरल रखी गई है। मनेन्द्रगढ़ की शाहीन बेगम इसकी जीवंत मिसाल हैं। करीब 48 हजार रुपये के बकाया में 23 हजार रुपये से अधिक की छूट मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। प्रदेश में लगभग 28 लाख उपभोक्ताओं को लाभान्वित करने वाली इस योजना के तहत करीब 757 करोड़ रुपये की राहत दी जा रही है। यह पहल सरकार और नागरिकों के बीच भरोसे की नई नींव भी मजबूत कर रही है।

सड़क दुर्घटना में हुई मौत पर कांकेर और मनेन्द्रगढ़ में परिवारों को मिलेगा वित्तीय संबल

उत्तर बस्तर कांकेर. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) भानुप्रतापपुर श्री जी.डी. वाहिले द्वारा सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के प्रकरण में उनके निकटतम परिजन के लिए 25 हजार रूपए और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के लिए 10-10 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम भैंसमुण्डी, चौकी कच्चे निवासी धर्मेन्द्र कोला की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनकी पत्नी श्रीमती सोहन्तिन के लिए 25 हजार रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। इसी प्रकार सड़क दुर्घटना में घायल भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम कराठी निवासी शत्रुघन जैन और पखांजूर तहसील के ग्राम डोण्डे निवासी राजू मण्डल को 10-10 हजार रूपये की सहायता राशि स्वीकृत किया गया है। एमसीबी :सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता स्वीकृत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी). भरतपुर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में मृत हुए व्यक्तियों के परिजनों को आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत की गई है। जारी आदेश के अनुसार, ग्राम जनकपुर निवासी स्वर्गीय जोहनदास के विधिक वारिस एन्थोनीदास (पिता घासीदास) को 25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। इसी प्रकार स्वर्गीय बब्बू यादव (पिता भगवानदीन यादव) की पत्नी फुलमतिया यादव को 25 हजार रुपये तथा स्वर्गीय राहुल (निवासी ग्राम जनकपुर) के पिता संजू को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। उक्त सहायता राशि सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को वित्तीय संबल प्रदान करने के उद्देश्य से दी जा रही है। यह व्यय मांग संख्या-02, लेखा शीर्ष 2235 – सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण (800) के अंतर्गत “सड़क दुर्घटना में मृतकों के परिवार एवं घायलों को वित्तीय सहायता” मद से, चालू वित्तीय वर्ष 2025-2026 में वहन किया जाएगा।

भाजपा स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री साय ने फहराया झंडा, अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार करने का किया वचन

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भाजपा के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विधिवत ध्वजारोहण किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने भाजपा के 47वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा और संगठन की ताकत ही उसे लगातार आगे बढ़ा रही है। इस मौके पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद छत्तीसगढ़ पर हमेशा बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस कल्पना और दृष्टि के साथ अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया था, उनकी सरकार उसी दिशा में काम करते हुए उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास करेगी। पत्रकारों से चर्चा के दौरान ही मुख्यमंत्री साय ने अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “देर आए, दुरुस्त आए।” उन्होंने कहा कि इस मामले में अमित जोगी मुख्य आरोपी रहे हैं और न्यायालय का निर्णय उचित है। वहीं पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में वे वहां से होकर आए हैं और प्रदेश में ममता बैनर्जी के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है और बहन-बेटियों को भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में अच्छा माहौल बन चुका है और वहां परिवर्तन की लहर चल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में भाजपा की सरकार बनेगी।

आत्मसमर्पण से पुनर्वास तक-पवन कुमार ने हिंसा का रास्ता छोड़ जीवन की नई शुरुआत की

आत्मसमर्पण से पुनर्वास तक-पवन कुमार ने हिंसा का रास्ता छोड़ जीवन की नई शुरुआत की विशेष आवास परियोजना से मिला पक्का आशियाना रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुशासन सरकार की सरकार ने माओवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 हिंसा छोड़ मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को नई जिंदगी दे रही है। छत्तीसगढ सरकार ने माओवादी  आत्मसमर्पितों को 5 लाख तक की सहायता, कौशल प्रशिक्षण, और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर नक्सल-मुक्त बस्तर के सपने को साकार कर रही है। कोण्डागांव जिले के फरसगांव के सुदेर पंचायत चिंगनार के श्री पवन कुमार को पुनर्वास नीति के तहत पक्का आवास मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।          कोण्डागांव जिले के विकासखण्ड फरसगांव के दूरस्थ ग्राम पंचायत चिंगनार, जो मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, कभी इस क्षेत्र में माओवाद के प्रभाव के कारण भय और असुरक्षा का माहौल था। अब इन क्षेत्रों में राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शांति और विकास स्थापित हो रहा हैं। इसी गांव में रहने वाले श्री पवन कुमार को पुनर्वास नीति के तहत पक्का आवास मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पवन कुमार पूर्व में माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे। उस दौर में उनका जीवन असुरक्षित और कठिनाइयों से भरा हुआ था। उनका परिवार जंगल किनारे एक झोपड़ी और जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था, जहां न तो पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही सुरक्षित भविष्य की कोई उम्मीद।        समय के साथ उन्होंने यह महसूस किया कि हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ले जाता है। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए माओवादी संगठन से नाता तोड़ लिया और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।         आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन द्वारा विशेष परियोजना आवास (आत्मसमर्पित परिवार) प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में उन्हें आवास स्वीकृत किया गया। शासन की सहायता से उन्हें चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया, जिसमें प्रथम किश्त के रूप में 40 हजार रुपये, द्वितीय किश्त में 55 हजार रुपये तथा अंतिम किश्त के रूप में 25 हजार रुपये की राशि दी गई। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत 90 दिनों की मजदूरी भी प्रदान की गई। इन सभी सहायता राशि और योजनाओं के समुचित उपयोग से पवन कुमार ने निर्धारित समय में अपना पक्का घर पूर्ण कर लिया। यह घर केवल एक आशियाना नहीं, बल्कि उनके नए जीवन की मजबूत नींव है। अब उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और भविष्य को लेकर आश्वस्त है।          इसके अतिरिक्त शासन द्वारा उनके घर में बिजली कनेक्शन, रसोई गैस, शौचालय और नल-जल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है। आज पवन कुमार अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण, सुरक्षित और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। और बेहतर भविष्य के लिए भी नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन की इस पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से अंधेरे रास्तों से लौटकर रोशनी तक- अरविंद हेमला की हिम्मत और बदलाव की कहानी

रायपुर  अंधेरे रास्तों से लौटकर रोशनी तक का सफर निराशा, संघर्ष और कठिनाइयों से निकलकर आशा, सफलता और ज्ञान की ओर जाने का प्रतीक है। यह एक ऐसी यात्रा है जो दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से पूरी की जा सकती है। 22 वर्षीय अरविंद हेमला का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बीजापुर जिले के एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे अरविंद बचपन से ही आर्थिक तंगी, अशिक्षा और सामाजिक चुनौतियों से जूझते रहे। परिवार की आजीविका कृषि मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था।                कम उम्र में ही माता-पिता का साया सिर से उठ जाना उनके जीवन का सबसे बड़ा आघात था, पिता का निधन 2009 में और माता का 2016 में हो गया। इस घटना ने अरविंद को पूरी तरह अकेला और असहाय बना दिया।  युवावस्था में गलत संगति, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आर्थिक मजबूरियों के कारण अरविंद नक्सली गतिविधियों की ओर आकर्षित हो गए। धीरे-धीरे वे इस रास्ते में उलझते चले गए, जिससे उनका सामाजिक और पारिवारिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। लेकिन समय के साथ अरविंद को एहसास हुआ कि यह रास्ता उन्हें केवल भय और अनिश्चित भविष्य की ओर ले जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन को बदलने का दृढ़ संकल्प लिया। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मार्च 2025 में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया।          आत्मसमर्पण के बाद शासन द्वारा उन्हें पुनर्वास केंद्र बीजापुर में आवश्यक मार्गदर्शन, सहयोग और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। राज मिस्त्री कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने निर्माण कार्य में तकनीकी दक्षता हासिल की। आज अरविंद तेलंगाना राज्य के मंचेरियल जिले में एक निर्माण श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं और प्रतिदिन 600 रूपए की मजदूरी अर्जित कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। अपने परिश्रम और लगन से उन्होंने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि समाज की मुख्यधारा में भी सफलतापूर्वक वापसी की है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति हिंसा की राह छोड़ने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने और समाज के साथ फिर से जुड़ने में मदद करना है। यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सही निर्णय, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।

अदालत का फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद, पीड़िता को मिला 4 लाख का मुआवजा

बिलासपुर. नाबालिक को भागकर दुष्कर्म के मामले में आरोपी युवक को पास्को एक्ट के तहत 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है. तखतपुर थाना क्षेत्र के इस मामले में जिला एवं जिला न्यायालय में विशेष अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम एफटीसी पास्को अधिनियम पीठासीन अधिकारी पूजा जायसवाल की अदालत ने आरोपी जयकुमार लहरे उर्फ कलुआ को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने 4 लाख पीड़िता को देने का आदेश भी दिया है. न्यायालय ने इस घटना को अपराधिकृत मानते हुए टिप्पणी की है कि जिस समय नाबालिक पीडि़ता को भगा कर ले गया. अपराधी घटना की गई उसमें पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी. पीड़ित बच्चों के मन में उसके स्वास्थ्य विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. न्यायालय ने कहा है कि आरोपी युवक का यह कृत्य पीड़ित बच्चों के मन पर घृणित कृत्य का प्रभाव आजीवन रहेगा. स्वास्थ्य विकास पर भी पड़ेगा. घटना के समय पीड़िता की आयु 18 वर्षों से कम थी. इसलिए हमारे पास उच्च न्यायालय के विवादित निर्णय को रद्द करने और ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बहाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने दोनों पक्षों की गवाही के बाद आरोपी जय कुमार लहरें को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई. साथ ही शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीषा नंदी ने पैरवी की है. ये है पूरी घटना  तखतपुर थाना क्षेत्र के पीड़िता के पिता ने 2024 को थाना तखतपुर में उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिक पुत्री को 8 नवंबर 2024 की सुबह 11 बजे बिना बताए कहीं चली गई है और आज तक वापस नहीं आई है. पूछताछ के दौरान पतासाजी में रिश्तेदारी में पता चला कि किसी ने बहला-फुसलाकर कर उनकी नाबालिक बेटी को अपहरण करके ले गया है. पुलिस ने अपनी विवेचना में पाया कि आरोपी ने हीं नाबालिक को भगा कर ले गया है. मौका नक्शा तैयार कर घटनास्थल का निरीक्षण व नक्शा तैयार कर पीडि़ता के माता-पिता के बयान दर्ज करने के बाद विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपी जयकुमार लहरे ने 22 नवंबर 2024 को ईंट भट्टा उत्तर प्रदेश में इसे बहला फुसलाकर कर भगाकर ले गया था. पुलिस ने उत्तर प्रदेश के ईंट भट्टा से नाबालिक को बरामद किया. पीड़िता का बयान दर्ज कर 13 नवंबर 2024 को आरोपी जयकुमार लहरे को धारा 180 बीएनएस से महिला थाना को प्रतिवेदन प्रेषित कर गिरफ्तार किया गया.

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सिम्स में ‘जेंडर फॉर हेल्थ’ विषय पर आयोजन, 100 से अधिक छात्रों ने लिया भाग

बिलासपुर विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सिम्स चिकित्सालय, बिलासपुर में “जेंडर फॉर हेल्थ” थीम पर एक व्यापक एवं जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं जेंडर समानता के महत्व को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान क्विज, पोस्टर मेकिंग एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, लैंगिक समानता एवं समाज में जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी वर्गों की समान भागीदारी आवश्यक है। यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम “जेंडर फॉर हेल्थ” के अनुरूप किया गया। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ, जिसमें स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में देशभर के सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों में चल रही समान गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई, जिससे प्रतिभागियों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया एवं उनके प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञों ने छात्रों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में सिम्स चिकित्सालय के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एवं नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप की विशेष उपस्थिति रही। इसके साथ ही डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अर्चना सिंह  डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. सचिन पांडे एवं डॉ. विवेक शर्मा सहित संस्थान के अन्य वरिष्ठ चिकित्सक, स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।