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पर्यावरणीय उल्लंघनों पर मंडल सख्त: 30 उद्योगों पर उत्पादन बंद, 28.92 लाख की क्षतिपूर्ति

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, रायपुर द्वारा औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरणीय अनुपालन की सतत निगरानी के तहत व्यापक कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा जल एवं वायु प्रदूषणकारी उद्योगों का नियमित निरीक्षण कर उल्लंघन पाए जाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 एवं जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जनवरी 2026 से अब तक प्रदूषण की स्थिति पाए जाने पर 23 उद्योगों के विरुद्ध नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें उरला एवं सिलतरा औद्योगिक क्षेत्रों के प्रमुख स्पंज आयरन उद्योग—वासवानी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, शिल्फी स्टील्स प्रा. लिमिटेड एवं एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड शामिल हैं। इसके अलावा सारडा एनर्जी मिनरल्स लिमिटेड के विरुद्ध बिना अनुमति फ्लाई ऐश डम्पिंग के मामले में भी नोटिस जारी किया गया है। जारी नोटिसों के बावजूद संतोषजनक सुधार नहीं करने, मंडल की सम्मति के बिना संचालन तथा शिकायतों में प्रदूषण पाए जाने के कारण अब तक 30 उद्योगों के विरुद्ध उत्पादन बंद करने एवं विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की जा चुकी है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित उद्योग सभी पर्यावरणीय मानकों, वैधानिक प्रावधानों एवं सम्मति शर्तों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में 13 उद्योगों पर कुल 28 लाख 92 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अधिरोपित की गई है। मंडल ने जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सभी औद्योगिक इकाइयों एवं संबंधित विभागों से नियमों का कड़ाई से पालन करने और प्रशासनिक निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि उल्लंघन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

शिक्षा विभाग एक्टिव: सहायक प्राध्यापकों के हजारों प्रकरणों की जांच तेज

रायपुर       शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्ति को लेकर विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर परीक्षण कार्य किया जा रहा है। इसमें वर्ष 2022 से पूर्व नियुक्त 10 और जनवरी – फरवरी वर्ष  2022 में नियुक्त 338,मार्च -मई में नियुक्त 572 तथा जून-दिसंबर 2022 में नियुक्त 90 सहायक प्राध्यापकों के प्रकरणों की समीक्षा कर मामलों में निर्णय लिए गए हैं। इस तरह कुल 1010 परिवीक्षाधीन सहायक प्राध्यापकों के संबंध में परीक्षण के बाद 872 सहायक प्राध्यापकों का परिवीक्षा अवधि समाप्ति की अनुशंसा की गई है और 68 सहायक प्राध्यापक को परिभ्रमण में रखा गया है। इसी तरह 70 प्राध्यापकों के गोपनीय प्रतिवेदन में समिति की शर्तों के अनुरूप न होने के कारण परिवीक्षा अवधि में वृद्धि की अनुशंसा की गई है,जिसमे 53 प्राध्यापकों का 1 वर्ष और 17 सहायक प्राध्यापकों का 2 वर्ष शामिल है।     विभागीय जानकारी के अनुसार इन सहायक प्राध्यापकों की परीविक्षा अवधि समाप्ति की प्रक्रिया वर्ष 2025 तक पूरी की जानी है। इसके लिए वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन, पुलिस सत्यापन, सतत सेवा प्रमाण-पत्र, निष्ठा प्रमाण-पत्र, विभागीय जांच एवं न्यायालयीन प्रकरण से संबंधित दस्तावेज तथा चल-अचल संपत्ति विवरण जैसे आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।      फरवरी 2026 में आयोजित प्रथम बैठक में कुल 348 प्रकरणों की समीक्षा की गई,इनमें से 307 सहायक प्राध्यापक सभी मापदंडों पर पात्र पाए गए, जिनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त करने की अनुशंसा की गई। वहीं 15 प्रकरणों में दस्तावेज अपूर्ण पाए जाने पर उन्हें लंबित रखा गया। दस्तावेज पूर्ण करने की दशा में उन्हें पात्र माना जाएगा। इसी तरह 26 सहायक प्राध्यापक निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके चलते उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त नहीं करने की अनुशंसा की गई।        इसके बाद मार्च 2026 में आयोजित द्वितीय बैठक में मार्च से मई 2022 के बीच नियुक्त 572 प्रकरणों का परीक्षण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्राध्यापकों के मामलों पर विचार किया गया,इसमें 497 सहायक प्राध्यापक मापदंडों में पात्र जिसमे से 39 दस्तावेज पूर्ण करने पर पात्र तथा 36 सहायक प्राध्यापक मापदंड में अपात्र होने पर समिति द्वारा परिवीक्षा अवधि समाप्त नही किये जाने की अनुशंसा की गई है।       इसी तरह जून–2022 से दिसम्बर–2022 में नियुक्त कुल 90 प्रकरणों का परीक्षण किया गया, जिसमें 68 सहायक प्राध्यापकों को सभी मापदण्डों में पात्र पाये जाने के कारण उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्ति हेतु समिति के द्वारा अनुशंसा की गई। इसमें 14 सहायक प्राध्यापक ऐसे हैं, जिनके प्रकरण में दस्तावेज अपूर्ण हैं,वे पूर्ति कर देंगे तो पात्र माने जायेंगे। इन्हे अभी परीक्षण में रखा गया है। 08 सहायक प्राध्यापक मापदण्ड में अपात्र पाये गये।       पूरी प्रक्रिया के दौरान विभाग द्वारा पूर्ण पारदर्शिता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग का कहना है कि सभी पात्र सहायक प्राध्यापकों को समय पर लाभ दिया जाएगा, जबकि अपूर्ण या अपात्र प्रकरणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पहल से शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

केंद्र का बड़ा फैसला: डीजल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त, पेट्रोल के दाम ₹10 घटे

मुख्यमंत्री ने कहा—140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत देने वाला ऐतिहासिक निर्णय, प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिचायक रायपुर केंद्र सरकार द्वारा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र ₹3 प्रति लीटर करने के निर्णय का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत पहुंचाने वाला ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक और मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भी केंद्र सरकार द्वारा आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ने देना एक बड़ी संवेदनशील पहल है, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करेगी। मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है। यह फैसला प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और देशवासियों के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है।

जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य स्तरीय बैठक संपन्न

रायपुर मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर (अटल नगर) में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य की समीक्षा हेतु राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (IDCC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय सचिव श्री भुवनेश यादव ने की।  बैठक में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की उप महानिदेशक श्रीमती पी. संगीता, संयुक्त महारजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं जनगणना निदेशक, छत्तीसगढ़ श्री कार्तिकेय गोयल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सचिव श्री भुवनेश यादव ने निर्देशित किया कि राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सटीक एवं अद्यतन आंकड़े उपलब्ध हो सकें। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव ने जन्म एवं मृत्यु पंजीयन की वर्तमान स्थिति एवं प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में पंजीयन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समीक्षा के दौरान वर्ष 2025 में जन्म पंजीयन का सकल पंजीयन दर 108.4 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 71.7 प्रतिशत तथा मृत्यु पंजीयन का सकल दर 102.6 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 92.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। कम प्रगति वाले जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

बंदरों की हरकत बनी आफत: बलौदा बाजार में ट्रांसफार्मर फटा, चिंगारी से कई दुकानें जलीं

बलौदा बाजार. जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल गिरौदपुरी में आज आग ने कहर बरपाया. आग से दस से बारह दुकानें पूरी तरह जलकर खाक हो गई, जिससे दुकानदारों को लाखों रूपए का नुक़सान हुआ है. जानकारी के अनुसार, बंदरों की उछल-कूद से ट्रांसफार्मर शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे निकली आग ने देखते ही देखते आस-पास स्थित दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया. दुकानदारों ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया. आग लगने के करीबन एक घंटे बाद दमकल वाहन पहुंचे, तब तक दुकानें जल चुकी थी. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची गिरौदपुरी पुलिस जांच में जुट गई है. बता दें कि गिरौदपुरी में बाबा गुरू घासीदास के मंदिर जाने वाले मार्ग में झोपड़ीनुमा दुकानें हैं, जहां छोटे-छोटे दुकानदार अपना व्यवसाय करते हैं. आग इन्हीं दुकानों में लगी. गमीमत रही कि समय रहते लोगों ने पानी का इंतजाम कर लिया और आग पर काबू पा लिया नहीं तो आग मंदिर परिसर तक पहुंच सकती थी. भविष्य में इस तरह की घटना न हो इसको देखते हुए इन दुकानदारों के लिए पक्के दुकान बनाये जाने की आवश्यकता है. अब यह देखना होगा कि इस घटना के बाद जिला प्रशासन के साथ ही समाज प्रमुख और मेरा समिति तथा ग्राम पंचायत क्या कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो.

मुख्य फ़ोकस नक्सल मुक्त क्षेत्रों में स्थायी एवं समावेशी विकास

रायपुर राज्य में नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज मुख्य सचिव  विकास शील की अध्यक्षता में इन जिलों के आजीविका संवर्धन हेतु राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।          कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव  ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास  निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव कृषि  सहला निगार, प्रमुख सचिव  सोनमणि वोरा, सचिव  भीम सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गृह एवं जेल विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, ग्रामोद्योग विभाग तथा ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर  अनीश कुमार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए तैयार समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।         इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील ने कहा कि जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है, हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अब तक विकास नहीं पहुंच सका, वहां पहुंचकर हमें सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार कर कार्य करना होगा।        स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविकामूलक गतिविधियों के संचालन एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाए। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मॉडल के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की योजना है। इसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन एवं बेहतर कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाएगा।           कार्यशाला में जिला, विकासखंड एवं क्लस्टर स्तर पर त्रिस्तरीय योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा की गई। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें तेजी से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।           कार्यशाला में यह भी बताया गया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अगले चरण में प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा शामिल होगी। कार्यशाला में प्रस्तुत रणनीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बनेगी। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।           कार्यशाला में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में आजीविका परिवर्तन एवं जीवन स्तर में सुधार हेतु परिवारों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। एनसीएईआर (NCAER) के सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अगले ढाई से तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।          प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी एवं संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति पर प्रकाश डाला। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा प्रत्येक जिले में चार प्रमुख आजीविका क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।          यह पहल क्लस्टर आधारित एवं बाजार उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित होगी, जिसमें सशक्त मूल्य श्रृंखला तंत्र विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को सक्रिय नेतृत्व सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नाबार्ड, एफईएस तथा प्रदान जैसे सहयोगी संगठनों द्वारा एनटीएफपी (लघु वनोपज) मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला में “ट्राइपॉड मॉडल” को योजना निर्माण के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें परिवार, क्षेत्र एवं गतिविधियों का समेकित दृष्टिकोण शामिल है।

केरल की एथलेटिक्स टीम पहुंची जगदलपुर, पारंपरिक लोकनृत्य से हुआ भव्य स्वागत

रायपुर आदिवासी खिलाड़ियों को समर्पित इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी करने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य बन गया है, जो भारत की खेल यात्रा में आदिवासी सशक्तिकरण और जमीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स की प्रतियोगिताओं का आयोजन 30 मार्च से 2 अप्रैल तक किया जाएगा।               खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स के अंतर्गत बस्तर जिले में आयोजित होने वाली एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए केरल राज्य की टीम आज जगदलपुर पहुंची। रेलवे स्टेशन पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत किया गया। बस्तर के हृदय स्थल जगदलपुर में आगामी 30 मार्च से 2अप्रैल तक आयोजित होने वाले चार दिवसीय नेशनल ट्राइबल गेम्स का उत्साह अब धरातल पर दिखने लगा है। इस राष्ट्रीय खेल महाकुंभ में अपनी चुनौती पेश करने के लिए देश के कोने-कोने से खिलाड़ियों का आगमन शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में केरल राज्य से 17 सदस्यीय एक दल किरंदुल पैसेंजर के माध्यम से जगदलपुर रेलवे स्टेशन पहुँचा।             इस अवसर पर स्थानीय नर्तक दल ने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत कर मेहमान खिलाड़ियों का अभिनंदन किया, जिससे बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। गौर नृत्य समूह के नर्तकों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ढोल की थाप और ऊर्जावान नृत्य से ऐसा समां बांधा कि लंबी दूरी तय कर आए खिलाड़ी अपनी थकान भूल गए             खेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रतियोगिता की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं, 30 मार्च से शुरू होने वाले इस आयोजन के लिए प्रशासन ने  विभिन्न राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए आवास, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इस आयोजन के माध्यम से न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि बस्तर की संस्कृति और परंपरा को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

राजनीतिक बयानबाजी: BJP विधायक बोले—रामनवमी श्रद्धा से मनाएं, राम को काल्पनिक कहना गलत

रायपुर. विधायक पुरंदर मिश्रा ने देशवासियों को रामनवमी पर्व की बधाई देते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा, सभी को रामनवमी का पर्व मनाना चाहिए। खासकर रामनवमी पर कांग्रेस को पूजा करनी चाहिए, क्योंकि कांग्रेस का सफाया हो रहा है। प्रभु राम को काल्पनिक ना मानकर रामनवमी मनाएं। भगवान से सद्बुद्धि की मांग करें, ताकि वे मजबूत विपक्ष के रूप में बने रहे। कांग्रेस पंचायत स्तर पर कमेटियों का गठन करेगी। इस मामले में बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा, कांग्रेस बोलती कुछ और करती कुछ है। अब तक प्रदेश, ब्लॉक, मंडल का गठन नहीं कर पाई है। पंचायतों में कमेटी का गठन करना कांग्रेस के लिए असंभव है इसलिए कांग्रेस में आलू से सोना निकलता है। कांग्रेस पार्टी का जनाधार खिसक चुका है। छत्तीसगढ़ के जेलों में 285 कैदियों की मौत मामले में NHRC ने मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। इस मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के तंज पर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा, सरकार की आंखें खुली है, कान से भी जोर से सुन रहे हैं, तभी छत्तीसगढ़ प्रदेश चल रहा है। कई अपराधी जेल में है, जितना उनको जीवन दिया है उतना अपराधी जिएगा। विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि यह एक प्रक्रिया है। हमको इसके खिलाफ बोलने का अधिकार नहीं है। जो जेल में है और जेल से बाहर है उन्हें लंबी उम्र भगवान दे। शासन अपने स्तर पर काम कर रही है। जो भी काम में गड़बड़ी करेगा उसे साय सरकार नहीं छोड़ेगी।

चैत्र नवरात्र पर मनेन्द्रगढ़ में भक्ति की बयार: प्रभात फेरी में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर मनेन्द्रगढ़ में इन दिनों गहरा भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। जिला मुख्यालय में प्रतिदिन आयोजित हो रही प्रभात फेरी में सैकड़ों श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग लेकर शहर की गलियों को भजन-कीर्तन से गुंजायमान कर रहे हैं। प्रभात फेरी का शुभारंभ राम मंदिर से होता है, जहां से श्रद्धालु "जय राम" के जयघोष के साथ शहर के विभिन्न मोहल्लों में भ्रमण करते हैं। हर दिन अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली इस फेरी के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिल रहा है। जगह-जगह हो रहा भव्य स्वागत प्रभात फेरी के दौरान शहर के अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिक श्रद्धालुओं का फूलों की वर्षा कर स्वागत करते हैं। साथ ही जलपान की भी व्यवस्था की जाती है, जिससे पूरे आयोजन में उत्सव जैसा माहौल बना रहता है। इस धार्मिक आयोजन में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। प्रभात फेरी का समापन   प्रतिदिन राम मंदिर में होता है, जहां विधिवत पूजा-अर्चना और आरती संपन्न होती है। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया जाता है तथा स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन की आकर्षक प्रस्तुतियां दी जाती हैं। राम मंदिर के सचिव रघुनाथ पोद्दार ने बताया कि आयोजन समिति द्वारा प्रभात फेरी को अनुशासित और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को भी सुदृढ़ कर रहा।

VB-GRAMG योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जनपद स्तरीय कार्यशालाएं सम्पन्न

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की महत्वाकांक्षी “विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAMG)” योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिले के विभिन्न जनपद पंचायतों में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित की गईं। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इस योजना के मद्देनजर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को पूर्व प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशालाओं में योजना की जानकारी, पात्रता, लाभ एवं क्रियान्वयन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। मनेंद्रगढ़, भरतपुर एवं खड़गवां जनपदों में आयोजित कार्यक्रमों में लगभग 120 लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सरपंचों व अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। साथ ही प्रतिभागियों को योजना संबंधी बुकलेट भी वितरित की गई। आगामी सप्ताह में क्लस्टर स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान मनरेगा के तहत दिवंगत हितग्राही की पत्नी को 25 हजार रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की गई। कार्यशालाओं से योजना के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे इसके सुचारू व पारदर्शी क्रियान्वयन की उम्मीद जताई गई।