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नदी में तटबंध निर्माण से सुरक्षित होंगे घर– उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर उपमुख्यमंत्री ने 4.08 करोड़ रूपए की लागत के सकरी नदी तटबंध निर्माण का किया भूमिपूजन सकरी नदी में कटाव को रोकने और ग्रामीणों को बाढ़ से सुरक्षा देने के उद्देश्य से आज ग्राम कोडार में 4.08 करोड़ रुपए की लागत से 250 मीटर लंबे तटबंध निर्माण कार्य का भूमिपूजन उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने किया। इस महत्वपूर्ण परियोजना से ग्राम कोडार के नदी किनारे बसे मकान सुरक्षित होंगे, कटाव की समस्या पर नियंत्रण मिलेगा और ग्रामीणों को निस्तारी की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।  उपमुख्यमंत्री ने 4.08 करोड़ रूपए की लागत के सकरी नदी तटबंध निर्माण का किया भूमिपूजन उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने ग्राम रेगाखार पंचायत के आश्रित ग्राम कोडार में आयोजित कार्यक्रम में विधिवत पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सकरी नदी के किनारे लगातार हो रहे कटाव से ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी हो रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए इस तटबंध निर्माण की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि 250 मीटर लंबा यह तटबंध न केवल नदी के कटाव को रोकेगा, बल्कि बाढ़ के दौरान पानी के दबाव से होने वाले नुकसान को भी कम करेगा। इससे नदी किनारे बसे घर सुरक्षित रहेंगे और लोगों को बार-बार होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी। साथ ही, नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों के लिए निस्तारी की सुविधाएं भी बेहतर होंगी। उपमुख्यमंत्री ने 4.08 करोड़ रूपए की लागत के सकरी नदी तटबंध निर्माण का किया भूमिपूजन          उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ग्राम में 142 आवास स्वीकृत किए गए हैं और सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार ने अपने वादे के अनुरूप गठन के साथ ही कैबिनेट की पहली बैठक में आवास योजना को स्वीकृति देकर इसे प्राथमिकता दी है।  उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ गांव में ही आसानी से मिल सके, इसके लिए ग्राम पंचायत भवन में डिजिटल सुविधा केंद्र संचालित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सुविधा मिल रही है। साथ ही महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 25 किस्तों में 25 हजार रुपए की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की जा चुकी है, जिससे महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिली है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंच सके और गांवों का समग्र विकास हो सके।         कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी इस योजना को क्षेत्र के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे किसानों और आम ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। ग्रामीणों ने भी इस पहल पर खुशी जताते हुए शासन और उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। तटबंध निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद सकरी नदी के किनारे बसे ग्राम कोडार के लोगों को कटाव और बाढ़ की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू,  नितेश अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी,  संतोष पटेल,  विजय पटेल,  वीरसिंह पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: महिला हॉकी में हुआ एकतरफा मुकाबला

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में आज तीसरे दिन महिला हॉकी प्रतियोगिता के मुकाबले खेले गए। पूल ‘ए’ में खेले गए मैच में मध्य प्रदेश ने बिहार को 9-0 से पराजित किया। वहीं, पूल ‘बी’ के मुकाबलों में झारखंड ने गुजरात को 16-0 से और ओडिशा ने तमिलनाडु को 14-0 से हराया। आज खेले गए सभी मैच एकतरफा रहे, जिनमें विजेता टीमों ने पूरे समय खेल पर अपना दबदबा बनाए रखा। गौरतलब है कि 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' के इस प्रथम संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में लगभग 3,800 खिलाड़ी नौ विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती जैसे खेलों में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं। वहीं, मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।

नवा रायपुर स्थित डिजिटल संग्रहालय का किया भ्रमण

रायपुर नवा रायपुर स्थित डिजिटल संग्रहालय का किया भ्रमण गोवा राज्य के जनजातीय विकास, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माननीय मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर ने आज छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और गौरव की झलक देखी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का भ्रमण कर जनजातीय कला, संस्कृति, रीति-रिवाज एवं जनजातीय शौर्य के जीवंत प्रदर्शन को देखकर वे अत्यंत प्रभावित हुए।  नवा रायपुर स्थित डिजिटल संग्रहालय का किया भ्रमण गोवा के जनजातीय विकास मंत्री डॉ. तावड़कर ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। संग्रहालय में जनजातीय शौर्य के जीवंत प्रदर्शन एवं बड़े पैमाने पर किए गए डिजिटलीकरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि गोवा राज्य में भी जनजातीय समुदाय का समृद्ध इतिहास रहा है, परन्तु छत्तीसगढ़ की तरह इसका व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया है। इस मौके पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय  अटल बिहारी वाजपेयी जी को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2003 में उनके कार्यकाल के दौरान ही गोवा में निवासरत जनजातीय समुदाय को पहली बार औपचारिक मान्यता प्राप्त हुई थी।  डॉ. तावड़कर ने कहा कि गोवा एवं छत्तीसगढ़ के मध्य जनजातीय शोध, विकास एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतर आदान-प्रदान की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिनिधिमंडल को गोवा भ्रमण हेतु आंमत्रित भी किया। इस मौके पर गोवा राज्य के संचालक खेल डॉ. अजय कुमार गोड़े, आदिम जाति विभाग गोवा के संचालक  निलेश डाऐगोडकर, संचालक टीआरआई गोवा  पी. गांओकर, ओएसडी  राजेन्द्र बोरकर, वरिष्ठ अधिकारी  अर्जुन रामकृष्ण पाटिल,  जनक टेकाले,  मृकुंद नायक तुब्की,  अशोक अरविन्द काले एवं  राजेन्द्र दताजीराव भी मौजूद थे।  सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शोध एवं विकास हेतु गोवा एवं छत्तीसगढ़ के मध्य शीघ्र होगा एमओयू – प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा संग्रहालय भ्रमण के उपरांत टीआरआई के सभागार में एक संक्षिप्त बैठक का भी आयोजन किया गया, जिसमें दोनों राज्यों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा द्वारा पीपीटी के माध्यम से दोनों संग्रहालयों के निर्माण कार्य, उनकी विशेषताओं एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि गोवा एवं छत्तीसगढ़ के मध्य शीघ्र ही एक एमओयू किया जाएगा, जिससे जनजातीय संग्रहालय निर्माण, जनजातीय शोध, विकास सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग स्थापति हो सकेगा। बैठक में संस्थान की संचालक मती हिना अनिमेष नेताम ने जनजातीय संस्कृति के क्षेत्र में बन रहे ट्राईबल फोक म्यूजिक स्टूडियो सुरगुड़ी पर जानकारी दी।  उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय शौर्य को प्रदर्शित करता शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय का लोकार्पण राज्योत्सव के समय 01 नवंबर 2025 को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलों से हुआ था, जबकि छत्तीसगढ़ अदिवासी संग्रहालय का लोकार्पण मई 2025 को मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के कर कमलों से हुआ। इनके लोकार्पण के बाद इन्हें आमजन हेतु खोल दिया गया है। अब तक लगभग 02 लाख से अधिक पर्यटकों, शोधार्थियों, विशेषज्ञों द्वारा इसका भ्रमण किया जा चुका है। भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी, 2026 के अवसर पर आयोजित परेड में शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय की प्रतिकृति को प्रदर्शित किया गया। इससे छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में जनजातीय वीर नायकों की अमर गाथाओं, उनकी देश भक्ति, अदम्य साहस और बलिदान की परंपरा को नई पीढ़ी को जानने समझने का अवसर राष्ट्रीय मंच पर प्राप्त हुआ।

58 किग्रा महिला वेटलिफ्टिंग में अरुणाचल की अनाई वांग्सू ने जीता स्वर्ण

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 58 किग्रा महिला वेटलिफ्टिंग में अरुणाचल की अनाई वांग्सू ने जीता स्वर्ण रायपुर  रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के खेल परिसर में आज सीनियर महिला वेटलिफ्टिंग (58 किलोग्राम भार वर्ग) प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतिस्पर्धा में देशभर की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में अरुणाचल प्रदेश की अनाई वांग्सू (Anai Wangsu) ने बेहतरीन ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 169 किलोग्राम कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 74 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 95 किलोग्राम उठाकर शीर्ष स्थान हासिल किया। ओडिशा की मिना सांता (Mina Santa) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 165 किलोग्राम के कुल वजन के साथ रजत पदक जीता। वहीं ओडिशा की ही मीना सिंह (Mina Singh) ने 161 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। प्रतियोगिता में असम की मार्टिना मिली, तारा सोनवाल तथा आंध्र प्रदेश की जी. लेनिन एस प्रिया सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर सफल लिफ्ट पर दर्शकों की तालियां गूंज उठीं। यह प्रतियोगिता न केवल महिला खिलाड़ियों की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बनी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों की उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच भी प्रदान कर रही है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के माध्यम से देश की बेटियां खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।

पर्यावरणीय उल्लंघनों पर मंडल सख्त: 30 उद्योगों पर उत्पादन बंद, 28.92 लाख की क्षतिपूर्ति

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, रायपुर द्वारा औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरणीय अनुपालन की सतत निगरानी के तहत व्यापक कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा जल एवं वायु प्रदूषणकारी उद्योगों का नियमित निरीक्षण कर उल्लंघन पाए जाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 एवं जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जनवरी 2026 से अब तक प्रदूषण की स्थिति पाए जाने पर 23 उद्योगों के विरुद्ध नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें उरला एवं सिलतरा औद्योगिक क्षेत्रों के प्रमुख स्पंज आयरन उद्योग—वासवानी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, शिल्फी स्टील्स प्रा. लिमिटेड एवं एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड शामिल हैं। इसके अलावा सारडा एनर्जी मिनरल्स लिमिटेड के विरुद्ध बिना अनुमति फ्लाई ऐश डम्पिंग के मामले में भी नोटिस जारी किया गया है। जारी नोटिसों के बावजूद संतोषजनक सुधार नहीं करने, मंडल की सम्मति के बिना संचालन तथा शिकायतों में प्रदूषण पाए जाने के कारण अब तक 30 उद्योगों के विरुद्ध उत्पादन बंद करने एवं विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की जा चुकी है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित उद्योग सभी पर्यावरणीय मानकों, वैधानिक प्रावधानों एवं सम्मति शर्तों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में 13 उद्योगों पर कुल 28 लाख 92 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अधिरोपित की गई है। मंडल ने जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सभी औद्योगिक इकाइयों एवं संबंधित विभागों से नियमों का कड़ाई से पालन करने और प्रशासनिक निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि उल्लंघन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

शिक्षा विभाग एक्टिव: सहायक प्राध्यापकों के हजारों प्रकरणों की जांच तेज

रायपुर       शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्ति को लेकर विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर परीक्षण कार्य किया जा रहा है। इसमें वर्ष 2022 से पूर्व नियुक्त 10 और जनवरी – फरवरी वर्ष  2022 में नियुक्त 338,मार्च -मई में नियुक्त 572 तथा जून-दिसंबर 2022 में नियुक्त 90 सहायक प्राध्यापकों के प्रकरणों की समीक्षा कर मामलों में निर्णय लिए गए हैं। इस तरह कुल 1010 परिवीक्षाधीन सहायक प्राध्यापकों के संबंध में परीक्षण के बाद 872 सहायक प्राध्यापकों का परिवीक्षा अवधि समाप्ति की अनुशंसा की गई है और 68 सहायक प्राध्यापक को परिभ्रमण में रखा गया है। इसी तरह 70 प्राध्यापकों के गोपनीय प्रतिवेदन में समिति की शर्तों के अनुरूप न होने के कारण परिवीक्षा अवधि में वृद्धि की अनुशंसा की गई है,जिसमे 53 प्राध्यापकों का 1 वर्ष और 17 सहायक प्राध्यापकों का 2 वर्ष शामिल है।     विभागीय जानकारी के अनुसार इन सहायक प्राध्यापकों की परीविक्षा अवधि समाप्ति की प्रक्रिया वर्ष 2025 तक पूरी की जानी है। इसके लिए वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन, पुलिस सत्यापन, सतत सेवा प्रमाण-पत्र, निष्ठा प्रमाण-पत्र, विभागीय जांच एवं न्यायालयीन प्रकरण से संबंधित दस्तावेज तथा चल-अचल संपत्ति विवरण जैसे आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।      फरवरी 2026 में आयोजित प्रथम बैठक में कुल 348 प्रकरणों की समीक्षा की गई,इनमें से 307 सहायक प्राध्यापक सभी मापदंडों पर पात्र पाए गए, जिनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त करने की अनुशंसा की गई। वहीं 15 प्रकरणों में दस्तावेज अपूर्ण पाए जाने पर उन्हें लंबित रखा गया। दस्तावेज पूर्ण करने की दशा में उन्हें पात्र माना जाएगा। इसी तरह 26 सहायक प्राध्यापक निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके चलते उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त नहीं करने की अनुशंसा की गई।        इसके बाद मार्च 2026 में आयोजित द्वितीय बैठक में मार्च से मई 2022 के बीच नियुक्त 572 प्रकरणों का परीक्षण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्राध्यापकों के मामलों पर विचार किया गया,इसमें 497 सहायक प्राध्यापक मापदंडों में पात्र जिसमे से 39 दस्तावेज पूर्ण करने पर पात्र तथा 36 सहायक प्राध्यापक मापदंड में अपात्र होने पर समिति द्वारा परिवीक्षा अवधि समाप्त नही किये जाने की अनुशंसा की गई है।       इसी तरह जून–2022 से दिसम्बर–2022 में नियुक्त कुल 90 प्रकरणों का परीक्षण किया गया, जिसमें 68 सहायक प्राध्यापकों को सभी मापदण्डों में पात्र पाये जाने के कारण उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्ति हेतु समिति के द्वारा अनुशंसा की गई। इसमें 14 सहायक प्राध्यापक ऐसे हैं, जिनके प्रकरण में दस्तावेज अपूर्ण हैं,वे पूर्ति कर देंगे तो पात्र माने जायेंगे। इन्हे अभी परीक्षण में रखा गया है। 08 सहायक प्राध्यापक मापदण्ड में अपात्र पाये गये।       पूरी प्रक्रिया के दौरान विभाग द्वारा पूर्ण पारदर्शिता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग का कहना है कि सभी पात्र सहायक प्राध्यापकों को समय पर लाभ दिया जाएगा, जबकि अपूर्ण या अपात्र प्रकरणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पहल से शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

केंद्र का बड़ा फैसला: डीजल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त, पेट्रोल के दाम ₹10 घटे

मुख्यमंत्री ने कहा—140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत देने वाला ऐतिहासिक निर्णय, प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिचायक रायपुर केंद्र सरकार द्वारा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र ₹3 प्रति लीटर करने के निर्णय का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत पहुंचाने वाला ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक और मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भी केंद्र सरकार द्वारा आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ने देना एक बड़ी संवेदनशील पहल है, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करेगी। मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है। यह फैसला प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और देशवासियों के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है।

जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य स्तरीय बैठक संपन्न

रायपुर मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर (अटल नगर) में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य की समीक्षा हेतु राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (IDCC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय सचिव श्री भुवनेश यादव ने की।  बैठक में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की उप महानिदेशक श्रीमती पी. संगीता, संयुक्त महारजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं जनगणना निदेशक, छत्तीसगढ़ श्री कार्तिकेय गोयल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सचिव श्री भुवनेश यादव ने निर्देशित किया कि राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सटीक एवं अद्यतन आंकड़े उपलब्ध हो सकें। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव ने जन्म एवं मृत्यु पंजीयन की वर्तमान स्थिति एवं प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में पंजीयन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समीक्षा के दौरान वर्ष 2025 में जन्म पंजीयन का सकल पंजीयन दर 108.4 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 71.7 प्रतिशत तथा मृत्यु पंजीयन का सकल दर 102.6 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 92.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। कम प्रगति वाले जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

बंदरों की हरकत बनी आफत: बलौदा बाजार में ट्रांसफार्मर फटा, चिंगारी से कई दुकानें जलीं

बलौदा बाजार. जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल गिरौदपुरी में आज आग ने कहर बरपाया. आग से दस से बारह दुकानें पूरी तरह जलकर खाक हो गई, जिससे दुकानदारों को लाखों रूपए का नुक़सान हुआ है. जानकारी के अनुसार, बंदरों की उछल-कूद से ट्रांसफार्मर शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे निकली आग ने देखते ही देखते आस-पास स्थित दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया. दुकानदारों ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया. आग लगने के करीबन एक घंटे बाद दमकल वाहन पहुंचे, तब तक दुकानें जल चुकी थी. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची गिरौदपुरी पुलिस जांच में जुट गई है. बता दें कि गिरौदपुरी में बाबा गुरू घासीदास के मंदिर जाने वाले मार्ग में झोपड़ीनुमा दुकानें हैं, जहां छोटे-छोटे दुकानदार अपना व्यवसाय करते हैं. आग इन्हीं दुकानों में लगी. गमीमत रही कि समय रहते लोगों ने पानी का इंतजाम कर लिया और आग पर काबू पा लिया नहीं तो आग मंदिर परिसर तक पहुंच सकती थी. भविष्य में इस तरह की घटना न हो इसको देखते हुए इन दुकानदारों के लिए पक्के दुकान बनाये जाने की आवश्यकता है. अब यह देखना होगा कि इस घटना के बाद जिला प्रशासन के साथ ही समाज प्रमुख और मेरा समिति तथा ग्राम पंचायत क्या कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो.

मुख्य फ़ोकस नक्सल मुक्त क्षेत्रों में स्थायी एवं समावेशी विकास

रायपुर राज्य में नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में तीव्र, स्थायी एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज मुख्य सचिव  विकास शील की अध्यक्षता में इन जिलों के आजीविका संवर्धन हेतु राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।          कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव  ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास  निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव कृषि  सहला निगार, प्रमुख सचिव  सोनमणि वोरा, सचिव  भीम सिंह सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गृह एवं जेल विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, ग्रामोद्योग विभाग तथा ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर  अनीश कुमार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए तैयार समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।         इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील ने कहा कि जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होता जा रहा है, हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अब तक विकास नहीं पहुंच सका, वहां पहुंचकर हमें सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार कर कार्य करना होगा।        स्थानीय संसाधनों के आधार पर आजीविकामूलक गतिविधियों के संचालन एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाए। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। जिला स्तर के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मॉडल के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की योजना है। इसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन एवं बेहतर कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाएगा।           कार्यशाला में जिला, विकासखंड एवं क्लस्टर स्तर पर त्रिस्तरीय योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा की गई। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें तेजी से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।           कार्यशाला में यह भी बताया गया कि उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अगले चरण में प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा शामिल होगी। कार्यशाला में प्रस्तुत रणनीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बनेगी। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।           कार्यशाला में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों में आजीविका परिवर्तन एवं जीवन स्तर में सुधार हेतु परिवारों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। एनसीएईआर (NCAER) के सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अगले ढाई से तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।          प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी एवं संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति पर प्रकाश डाला। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा तथा प्रत्येक जिले में चार प्रमुख आजीविका क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।          यह पहल क्लस्टर आधारित एवं बाजार उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित होगी, जिसमें सशक्त मूल्य श्रृंखला तंत्र विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को सक्रिय नेतृत्व सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नाबार्ड, एफईएस तथा प्रदान जैसे सहयोगी संगठनों द्वारा एनटीएफपी (लघु वनोपज) मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देने संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए गए। कार्यशाला में “ट्राइपॉड मॉडल” को योजना निर्माण के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें परिवार, क्षेत्र एवं गतिविधियों का समेकित दृष्टिकोण शामिल है।