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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण

रायपुर. उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण शहर की आपाधापी, धूल और शोर-शराबे से दूर, बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए शुक्रवार को एक भव्य और अनमोल ठिकाना मिल गया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, परंपरा और नैसर्गिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में निर्मित 'जनजातीय गौरव वाटिका' का लोकार्पण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई यह वाटिका अब जनता के लिए समर्पित कर दी गई है, जो न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है। शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  किरण देव के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, सीसीएफ  आलोक तिवारी, स्टायलो मंडावी, संचालक कांगेर वैली सहित अन्य प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। लोकार्पण के पश्चात उपमुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी  उत्तम कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अतिथियों को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, जिसे बाद में एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने यहाँ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए बनाए गए 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में बनाए गए 'गपशप ज़ोन' और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा को भी देखा, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। वाटिका भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यहाँ की 'इको-फ्रेंडली' नीति और 'प्लास्टिक फ्री ज़ोन' के नियम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। वाटिका के बीच में निर्मित तालाब और आइलैंड ने सभी का मन मोह लिया। आगंतुकों की सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग और प्रसाधन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से शुरू हो गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी गई। उपमुख्यमंत्री  शर्मा द्वारा किए गए इस लोकार्पण के साथ ही अब 'जनजातीय गौरव वाटिका' बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल के रूप में अंकित हो गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की राशि के चेक वितरित किए। इस पहल के माध्यम से शासन ने वनांचल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और वन आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने 'वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि' के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण वितरित किया। इसमें सबसे बड़ी राशि बकावण्ड के 'मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह' को प्रदान की गई, जिन्हें काजू प्रसंस्करण और विपणन जैसे बड़े कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसी कड़ी में, आसना के 'गोधन स्व-सहायता समूह' को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अतिरिक्त,  शर्मा ने घोटिया और भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए क्रमशः 13.13 लाख और 13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि वितरित कर स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित किया।   कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल भी प्रदान किया। उन्होंने 'राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना' के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपा। यह सहायता राशि उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी। उप मुख्यमंत्री द्वारा किया गया यह वितरण न केवल लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद है, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इस दौरान उपस्थित महिला समूहों के सदस्यों से इमली, काजू के प्रोसेसिंग की गतिविधियों का संज्ञान लेकर बाजार की उपलब्धता एवं मार्केटिंग की व्यवस्था के संबंध चर्चा किए ।

अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ

रायपुर. अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है।  डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा

रायपुर. मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है। आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया जा रहा है प्रशिक्षण कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत् प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह कर सके। चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़ वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20 का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो रहा- मनहेर तारम चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी 40 वर्षीय  मनहेर तारम ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा है। इसी तरह  नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके। 19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से जोड़ रहे हैं,  जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले रही हैं। इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला, सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी  विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20 के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का मौका मिल सके।

पण्डूम 2026 की तैयारियों की समीक्षा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिया जायजा

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने लिया जायजा संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डूम 2026 कार्यक्रम की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने आज निरीक्षण कर जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कार्यक्रम स्थल का भ्रमण कर आयोजन की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित बस्तर की पारंपरिक कला, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और जनसहभागिता से परिपूर्ण हो। निरीक्षण के दौरान स्कूली छात्रों द्वारा की जा रही सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों का अभ्यास देखकर उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डूम जैसे आयोजन बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रतिभाओं को व्यापक पहचान दिलाने का सशक्त मंच हैं। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी., कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

शहरी खेती का नया मॉडल: हाइड्रोपोनिक्स से टेरेस गार्डन में हरियाली

रायपुर. छत्तीसगढ़ वन निगम की पहल छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइड्रोपोनिक्स पद्धति पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन नया रायपुर आवासीय परिसर, सेक्टर-26 में विगत दिनों किया गया। इस कार्यशाला में मिट्टी के बिना फल एवं सलाद सब्जियों के उत्पादन तथा टेरेस गार्डन की स्थापना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्घाटन निगम के प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें सीमित स्थान में अधिक उत्पादन का अवसर देती हैं और पर्यावरण संरक्षण के साथ आय बढ़ाने में भी सहायक हैं। यह पहल शासकीय योजनाओं के अनुरूप आधुनिक कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में हाइड्रोपोनिक्स विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक श्री जावेद आलम ने प्रतिभागियों को इस पद्धति के मूल सिद्धांत, टेरेस गार्डन की स्थापना, मृदा-रहित खेती की तकनीक तथा न्यूट्रिशन फ्लो टेक्नीक (एनएफटी) विधि के बारे में सरल तरीके से जानकारी दी। साथ ही व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स नर्सरी की स्थापना और प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रतिभागी इस तकनीक को आसानी से अपनाने के लिए प्रेरित हुए। कार्यशाला में निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल आधुनिक, कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भविष्य में उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ नए आय के अवसर भी सृजित होने की संभावना है।

शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय फेस-2 का कार्य जल्द होगा प्रारंभ: सोनमणि बोरा

रायपुर. नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय फेस-2 निर्माण के लिए जल्द ही कार्य प्रक्रिया शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण किया जाएगा। आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान स्थित सभाकक्ष में आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, आर्टिस्ट एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।  गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष एक नवंबर को राज्योत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का शुभारंभ हुआ था। इसके पहले जनजातीय जीवन शैली एवं परम्पराओं पर आधारित संग्रहालय का उद्घाटन मई 2025 में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया था। इन संग्रहालयों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बाद अब शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय फेस-2 का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा।  प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में कहा कि संग्रहालय में कैफेटेरिया, गढ़ कलेवा एवं अन्य दुकानें भी खोली जानी हैं इस संबंध में अंतिम रूपरेखा पर चर्चा की गई। उन्होंने संग्रहालय फेस-2 के अंतर्गत ही आकर्षक बागवानी, परिसर के भीतर स्थित नंद सागर का सौंदर्यीकरण, फॉउंटेन एवं पार्किंग की बेहतर व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की।   बैठक में आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में नवनिर्मित छात्रावास के पास ही निर्माणाधीन कन्वेंशन सेंटर की रूपरेखा पर भी चर्चा की। इसके डिजाइन एवं लेआउट पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए। इस कन्वेंशन सेंटर में एक ऑडिटोरियम, आर्ट गैलरी, प्रदर्शनी हॉल, मीटिंग रूम, प्रशासनिक भवन, फूड कोर्ट आदि की व्यवस्था रहेगी।   बैठक में संचालक, टीआरटीआई मती हिना अनिमेष नेताम, उपसचिव  बी.के.राजपूत, अपर संचालक  संजय गौड़,  जितेन्द्र गुप्ता,  आर.एस.भोई, उपायुक्त  विश्वनाथ रेडडी, कार्यपालन यंत्री  त्रिदीप चक्रवर्ती, उपयंत्री  गुप्ता एवं  यशवंत राव सहित आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, आर्टिस्ट एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

स्वास्थ्य पंचायत सम्मेलन: रामगढ़ में मितानिनों के कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री राजेश अग्रवाल

रायपुर रामगढ़ में मितानिनों द्वारा आयोजित स्वास्थ्य पंचायत सम्मेलन में शामिल हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल सरगुजा जिले में उदयपुर ब्लॉक के रामगढ़ में मितानिनों द्वारा आयोजित स्वास्थ्य पंचायत सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने मितानिनों को सम्मानित करते हुए कहा कि मितानिन बहनें ग्रामीण एवं शहरी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे सशक्त और भरोसेमंद कड़ी हैं। शासन की स्वास्थ्य एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचा रही मितानिन बहनें ग्रामीण स्वास्थ्य की धुरी हैं। सरकार आपके हर प्रयास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। सम्मेलन में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया। उदयपुर विकासखंड की 59 ग्राम पंचायतों से 389 मितानिन, 20 मितानिन ट्रेनर, दो ब्लॉक को-आर्डिनेटर और पांच विकासखंड समन्वयक शामिल हुए। कार्यक्रम का लक्ष्य पंचायत स्तरीय स्वास्थ्य समस्याओं को उजागर कर संबंधित विभागों तक पहुंचाना था। मितानिनों ने अधिकारियों को क्षेत्रीय चुनौतियों से अवगत कराया, पंचायत प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा तथा ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता व पोषण समिति को सक्रिय बनाने पर बल दिया। जिला समन्वयक अर्चना कुशवाहा ने बताया कि मितानिनें मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण व स्वच्छता के माध्यम से समुदाय सशक्त कर रही हैं। विकासखंड समन्वयक गायत्री वास्तव व मानकुंवर प्रजापति ने उनकी भूमिका को स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत कड़ी बताया। इस वर्ष 85 स्वास्थ्य विभाग, 26 महिला-बाल विकास, 12 पीएचई, 12 खाद्य, 25 जनपद स्तर, 8 पुलिस, 5 विद्युत, 5 शिक्षा, 5 सेंट्रल बैंक व 7 विधायक स्तर के आवेदन प्राप्त हुए। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सभी पर तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिलाया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को और प्रभावी बनाया।

भारत सरकार के जल शक्ति और पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिया गया है यह अवार्ड

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। जशपुर स्थित सरना एथनिक रिसॉर्ट को रिसॉर्ट एवं परिसर में स्वच्छता तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मानकों पर पूर्णतः उपयुक्त पाए जाने पर वर्ष 2025-26 हेतु प्रतिष्ठित ग्रीन लीफ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस पुरस्कार को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य को प्रदान किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की अथक मेहनत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।  ग्रीन लीफ अवॉर्ड पर्यटन क्षेत्र में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने वाला एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग का हिस्सा है। यह अवॉर्ड होटलों, रिसॉर्ट्स, होमस्टे और अन्य पर्यटन इकाइयों को प्रदान किया जाता है जो उच्च स्वच्छता मानकों, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा निर्देशों का पालन करते हैं।  छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने हाल के वर्षों में पर्यटन विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया है। बोर्ड ने इको-फ्रेंडली रिसॉर्ट्स, होमस्टे और ट्रेकिंग रूट्स विकसित कर पर्यटन राजस्व में वृद्धि दर्ज की। जशपुर के सरना एथनिक रिसॉर्ट को मिला यह सम्मान बोर्ड की स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदाय सशक्तिकरण की नीतियों का जीवंत प्रमाण है। इससे राज्य में पर्यटन को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की

रायपुर. स्वीकृत विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की प्रथम बैठक जिला मुख्यालय दुर्ग स्थित लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में प्राधिकरण के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख विकास कार्यों, प्राधिकरण मद से निर्माणाधीन कार्यों के अनुमोदन, प्रावधानित बजट तथा नवीन स्वीकृत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान हेतु संचालित योजनाओं की प्रगति का आकलन करना तथा भावी विकास रणनीतियों का निर्धारण करना था, ताकि विकास का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके। मुख्यमंत्री  साय ने प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत बजट का समय पर एवं पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का लाभ सीधे आमजन तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर सतत निगरानी आवश्यक है। मुख्यमंत्री  साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले के अंतर्गत स्वीकृत सभी विकास कार्यों, सेवाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के हित को प्राथमिकता में रखते हुए सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों को अविलंब पूर्ण किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर वित्तीय वर्ष 2024-25 तक स्वीकृत निर्माण एवं विकास कार्यों की जिलेवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रगति की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ऐसे विकास कार्य जो अब तक अप्रारंभ हैं अथवा प्रगतिरत हैं, उन्हें चिन्हित करते हुए दो माह की समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला कलेक्टरों से प्रत्यक्ष संवाद कर कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय नेतृत्व से परामर्श लेकर अल्पकालिक योजनाओं का निर्माण, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा जन अपेक्षाओं के अनुरूप छोटे-छोटे निर्माण कार्यों की त्वरित स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। प्राधिकरण के अंतर्गत राज्य के 35 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आधारभूत नागरिक सुविधाओं के विकास, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन, शैक्षणिक सुविधाओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही शिक्षा एवं छात्रावासों के विकास पर प्रमुख रूप से जोर दिया गया है और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। बैठक में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री  श्यामबिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, अनुसूचित जाति विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  ललित चंद्राकर सहित अन्य विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, सचिव  बसवराजू एस, शासन के विभिन्न विभागों के सचिव, आईजी, कमिश्नर, कलेक्टर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

छात्रों को प्रोत्साहन: स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी विद्यालय एनसीडीसी के 68 विद्यार्थियों को साइकिल वितरण

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने छात्राओं को बांटी साइकिल स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय एनसीडीसी कोरबा में , छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन ने सरस्वती साइकिल योजना अंतर्गत छात्राओं को  साइकिल वितरित की।     सरस्वती साइकिल वितरण कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जलवन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान मंत्री  देवांगन ने कहा कि सरस्वती साइकिल वितरण योजना के तहत आज स्कूल में छात्राओं को साइकिल वितरण किया जा रहा है।  सभी छात्राओं को बधाई व शुभकामनाएं। खूब पढ़े-खूब बढ़े,  बेटियां हैं तो कल है ,सभी बच्चें लगन से पढ़ाई करें और अपने विद्यालय का नाम रोशन करें, हमारे प्रदेश के  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी की सोच है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विकास करते हुए छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करें। इसी उद्देश्य के साथ कोरबा जिले के सभी जर्जर हो चुके शासकीय स्कूलों के नवीन भवन निर्माण को तेजी से कराया जा रहा है, स्कूलों में निशुल्क नाश्ता का प्रदाय किया जा रहा है। मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष कोचिंग की सुविधा रायपुर भेज कर उपलब्ध कराई जा रही है। हमारी छात्राओं को स्कूल आने में परेशानी ना हो जिसके लिये सरस्वती साइकिल योजना के तहत सरकार द्वारा साइकिल वितरण किया जा रहा है, शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए अच्छा अवसर देना हमारा कर्तव्य है। हमारी सरकार के मंशा के अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में आगे की ओर अग्रसर होते हुए प्रदेश में बेहतर शिक्षा देना हमारा कर्तव्य है।       इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष  राजेश राठौर ,पार्षद मती सिमरन कौर, पार्षद  मुकुंद कंवर , पार्षद  लक्ष्मण वास, शाला प्रतिनिधि  यासीन खान ,  मिलाप बरेठ , मती ज्योति वर्मा , धर द्विवेदी , मती अर्चना रूनीझा , मती मंदाकिनी त्रिपाठी जी, प्राचार्य डॉ अलका फिलिप्स सहित अभिभावक गण, छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।