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रायपुर में दिल दहला देने वाली घटना, पति पर पत्नी और दो बच्चों की हत्या का आरोप

रायपुर. रायपुर में शनिवार देर रात ट्रिपल मर्डर की घटना सामने आई है। पति ने अपनी पत्नी और 2 नाबालिग बच्चों की धारदार चाकू से हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने खुद पर भी चाकू से वार कर लिया, जिससे वह घायल हो गया। आरोपी को इलाज के लिए मेकाहारा में भर्ती कराया गया है। मामला माना थाना क्षेत्र के डूमरतराई का है। आरोपी की पहचान भुनेश्वर साहू (34) के रूप में हुई है। वह जिला बालोद का रहने वाला है और डूमरतराई के साहू पारा में किराए के मकान में रहता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पत्नी के कैरेक्टर पर शक के चलते उसने हत्या की है। पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या के बाद खुद पर किया वार जानकारी के मुताबिक, आरोपी भुनेश्वर साहू ने रात 1:30 बजे विवाद के बाद पहले पत्नी खिलेश्वरी साहू पर हमला किया। इसके बाद उसने दोनों बच्चों आशीष साहू (10) और ज्ञान साहू (8) पर हमला किया। तीनों की मौत के बाद उसने खुद पर भी चाकू से वार किए। पड़ोसियों को घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने पुलिस को सूचित किया। माना पुलिस रात में ही मौके पर पहुंची तो दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। महिला की हालत बेहद गंभीर थी। वहीं पति भी घायल हालत में पड़ा हुआ था। पत्नी को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सब्जी मंडी में काम करते थे पति-पत्नी पुलिस ने बताया का परिवार करीब 2 साल पहले किराए के मकान में रहने आया था। पति और पत्नी सब्जी मंडी में काम करते थे। 2 महीने पहले पति ने काम छोड़ दिया था। पड़ोसियों के मुताबिक चरित्र शंका को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। शनिवार रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। अंबेडकर अस्पताल में आरोपी का इलाज जारी पुलिस ने घायल आरोपी को इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया है। उसका इलाज जारी है। जबकि पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मेकाहारा भेज दिया है और घटनास्थल को सील कर दिया गया है। फिलहाल, पुलिस घटना के कारणों और वारदात से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से पहले रविवार को खुले बैंक, कल से 30 सितंबर तक कामकाज प्रभावित

भोपाल. अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम अटका हुआ है, तो उसे आज ही पूरा कर लें। 5 डे वर्किंग की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी सोमवार से 30 सितंबर तक हड़ताल पर जा रहे हैं। इसी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम जनता की सहूलियत के लिए रविवार की छुट्टी होने के बावजूद आज सभी सरकारी बैंकों को खुला रखने का विशेष आदेश दिया है। प्रदेश की 7 हजार शाखाओं में कामकाज रहेगा ठप इस हड़ताल का असर पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। प्रदेश भर में कुल 7 हजार बैंक शाखाएं हैं, जिनमें अकेले भोपाल की 400, इंदौर की 800 और उज्जैन की 300 ब्रांच शामिल हैं। हड़ताल में मुख्य रूप से स्केल-3 तक के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। हालांकि, स्केल-4 या इससे ऊपर के वरिष्ठ अधिकारी बैंक में मौजूद रहेंगे, लेकिन स्टाफ न होने के कारण वे ग्राहकों को कोई सेवा नहीं दे पाएंगे। रविवार को बैंक खोलने का क्या है कारण? शनिवार और रविवार को बैंकों की नियमित छुट्टी होती है। इसके बाद सोमवार से लगातार तीन दिन की हड़ताल थी। ऐसे में बैंक लगातार 5 दिनों तक बंद रहते, जिससे हाहाकार मच सकता था। जनता को इसी भारी असुविधा से बचाने के लिए आरबीआई ने रविवार को बैंक शाखाओं के साथ-साथ करेंसी चेस्ट भी चालू रखने का फैसला किया है। करोड़ों का लेन-देन होगा प्रभावित बैंक कर्मचारियों के काम बंद करने से नकदी जमा करने, पैसे निकालने, चेक क्लियरिंग, पासबुक अपडेट कराने और ड्राफ्ट बनवाने जैसे सभी जरूरी काम पूरी तरह से रुक जाएंगे। हालांकि, राहत की बात यह है कि मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं निर्बाध रूप से काम करती रहेंगी। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में रोजाना लगभग 5500 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेन-देन होता है, जिस पर इस हड़ताल का सीधा असर पड़ेगा। इससे पहले इसी महीने 11 से 13 सितंबर के बीच भी बैंकिंग सेवाएं बाधित रही थीं। क्या है '5 डे बैंकिंग वीक' की मांग? मौजूदा समय में बैंक कर्मचारियों को महीने के केवल दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। बैंक यूनियनों की एक ही प्रमुख मांग है कि हर शनिवार और रविवार को पूर्ण अवकाश दिया जाए, यानी हफ्ते में केवल 5 दिन ही बैंक खुलें। इसके बदले में कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव रखा है। यूनियनों का तर्क है कि इससे काम के घंटों का नुकसान भी नहीं होगा और कर्मचारियों को राहत भी मिलेगी।

बीटीआई ग्राउंड में संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव की तैयारियों का भूमिपूजन के साथ शुभारंभ

रायपुर  राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बी.टी.आई.ग्राउंड में इस वर्ष संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति द्वारा भव्य नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों का शुभारंभ आज विधि.विधान एवं पूजा.अर्चना के साथ भूमिपूजन कर किया गया। समिति के संयोजक एवं छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ पारंपरिक रास गरबा का आयोजन किया जाएगा। भूमिपूजन के अवसर पर समिति के सदस्यों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया। भूमिपूजन के साथ ही बी.टी.आई.् ग्राउंड में होने वाले नवरात्रि उत्सव की तैयारियों का औपचारिक रूप से शुभारंभ हो गया है। आयोजन को भव्य एवं व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए समिति द्वारा विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। श्रद्धालुओं एवं गरबा प्रेमियों की सुविधाए कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों सहित अन्य आवश्यक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस अवसर पर समिति के संयोजक  संजय वास्तव ने कहा कि नवरात्रि हमारी सनातन        संस्कृति और आस्था का महापर्व है। मां दुर्गा की आराधना हमें शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है। वहीं रास गरबा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है। संकल्प नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव समिति का प्रयास है कि शंकर नगर में ऐसा आयोजन हो जिसमें श्रद्धा,    संस्कृति और उत्साह का सुंदर संगम देखने को मिले। उन्होंने कहा कि भूमिपूजन के साथ आज आयोजन की शुरुआत हो गई है और समिति की पूरी टीम मिलकर नवरात्रि एवं रास गरबा उत्सव को गरिमापूर्ण, भव्य एवं व्यवस्थित बनाने के लिए जुटेगी। यह उत्सव क्षेत्रवासियों सहित राजधानी के लोगों के लिए मां भगवती की भक्ति और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर बनेगा। समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं एवं गरबा प्रेमियों से आगामी नवरात्रि उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने और इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने का आह्वान किया गया। भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यरूप से अनिता खंडेलवाल, संगीता मिश्रा, पुष्पा जैन, सुनिला अग्रवाल, राजेश गुप्ता, अमरजीत सिंह, मिलिन गौतम, कोमल जैन, राखी साह, श्रुति जैन उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा टला! ओवरफ्लो पुल पर बहने लगी बस, पुलिस ने 70 यात्रियों को बचाया

रायपुर. राजधानी रायपुर के पास सारागांव में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोल्हान नाले के तेज बहाव में जय अंबे की बस फंस गई. रायपुर से बलौदाबाजार जा रही बस में 70 यात्री सवार थे. मार्ग पर पानी के तेज बहाव के कारण सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात थी. बाकी वाहनों की तरह बस को भी आगे जाने से रोका गया, लेकिन चालक ने ब्रेक नहीं लगाया. जानकारी के मुताबिक, विधानसभा थाना क्षेत्र के कोल्हान नाले में पानी के तेज बहाव को देखकर बस में सवार यात्रियों ने चालक को आगे जाने से मना किया. इसके बावजूद वह बस को आगे बढ़ाता गया. आगे से आ रही ट्रकों को रास्ता देने के लिए बस को साइड देना पड़ा. तभी तेज बहाव में बस फंस गई, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया. कुछ  लोगों ने घबराकर खिड़की से बाहर कूदने की तैयारी कर ली थी. स्थिति को संभालते हुए पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने बस के पास पहुंचकर लोगों को बाहर निकाले की प्रक्रिया शुरू की. दाई ओर की खिड़की से यात्रियों को बाहर निकाला गया. रेस्क्यू अभियान में ग्रामीणों ने भी पुलिस की मदद की. सभी 70 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया. पुलिस की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया. पुलिस ने बस चालक को हिरासत में ले लिया है. पूछताछ में चालक से पता लगाया जा रहा  कि चेतावनी के बावजूद उसने बस को आगे क्यों बढ़ाया. साथ ही बस परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस समेत अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई. सीएसपी विधानसभा वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि शनिवार को कोल्हान नाले में पानी का बहाव बढ़ा हुआ था. मौके पर मौजूद टीम वाहनों को आगे जाने से रोक रही थी. इसके बावजूद यात्री बस आगे बढ़ गई. ट्रकों की आवाजाही के दौरान बस को साइड करना पड़ा, जिसके बाद वह पानी के बहाव में फंस गई. पुलिस ने तत्काल यात्रियों को खिड़कियों के रास्ते बाहर निकाला. सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया और बस को भी बाहर कर लिया गया. चालक को हिरासत में लिया गया है. मामले में जांच जारी है.

छत्तीसगढ़ में बाढ़ का खतरा, शबरी पुल के 6 फीट ऊपर बह रही महानदी; शिवरीनारायण से संपर्क टूटा

जांजगीर-चाम्पा. प्रदेश में बीते तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश से तमाम नदियां उफान पर है. नगर के शवरी पुल पर 6 फ़ीट ऊपर पानी बह रहा है, जिसकी वजह से जांजगीर का शिवरीनारायण का सम्पर्क टूट गया है. महानदी के तट तोड़कर बहने से नगर के बिलासपुर रोड और केरा रोड में पानी भर गया है. आलम यह है निचली बस्तियों में पानी भरने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है. वार्ड एक में पानी भरने की वजह से वार्ड के लोगों को संस्कृतिक भवन में रखा गया है. मेला ग्राउंड में भी पानी गया है. पानी के भराव की वजह से लोग नाव में सवार होकर आना-जाना कर रहे है. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात किया है. इसके साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए खाने-पीने और रहने के लिए अलग-अलग स्थानों में इंतजाम किया है. देर शाम तक शबरी सेतु के ऊपर ढाई फीट तक पानी बह रहा था जिससे गिधौरी बलौदाबाजार से शिवरीनारायण का सड़क संपर्क पूरी तरह से कटा रहा। सुबह 9 बजे बेरिकेट्स लगाकर पुल पर आना-जाना पूरी तरह से बंद करवा दिया गया था। एहतियात के लिए मोटरबोट और गोताखोरों को पुल के पास ही तैनात किया गया है। लगातार जल स्तर बढ़ने से क्षेत्र के छोटे-बड़े नालों के ऊपर से भी पानी बहने लगा था जिससे चारों दिशाओं से शिवरीनारायण का सड़क संपर्क टूट गया। बिलासपुर से शिवरीनारायण पहुंच मार्ग में मेन रोड़ में देवरी मोड़ के पास नाला से ऊपर पानी बहने से आना-जाना बंद हो गया। केरा से शिवरीनारायण मार्ग में नगारीडीह के पास कंजीनाला, केरा रोड मेंं कनस्दा से पहले पुराने पुल, दुरपा से पहले ललारी पुल भी उफान पर होने से संपर्क कट गया। तुस्मा पुल में पानी बहने से खैरताल से शिवरीनारायण मार्ग का भी संपर्क टूट गया था। हालांकि नगर के किसी बस्ती में पानी नहीं घुसा था। देर रात महानदी का जलस्तर बढ़ते क्रम में था जिससे शिवरीनारायण से लेकर चन्द्रपुर तक नदी तटों में बाढ़ की संभावना बनी हुई है। महानदी नदी के किनारे लगे ग्राम तनौद के नवापारा मोहल्ला पानी से डूब गया जिससे करीब चार दर्जन मवेशी और दो जेसीबी मशीन डूब गई।

प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल

आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

BSP कर्मचारियों के बोनस पर NJCS बैठक में होगा मंथन

भिलाई. सेल मैनेजमेंट ने बोनस के मुद्दे पर 1 अक्टूबर को एनजेसीएस कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। हालांकि, 23 मार्च 2023 को सेल मैनेजमेंट ने बोनस के लिए जो फार्मूला तय किया था, उसके हिसाब से गणना करने पर 30,200 रुपए बोनस बनेगा। इसमें मैनेजमेंट चाहे तो कर्मियों के प्रोत्साहन के लिए दो से तीन हजार रुपए की बढ़ोतरी कर सकता है। एनुअल सेल परफार्मेस लीक्ड इंसेंटिव स्कीम (एएसपीएलआईएस) यानी बोनस के लिए सेल मैनेजमेंट ने 1 अक्टूबर को दोपहर 01 बजे से नईदिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में बैठक रखी है। इसमें केवल एनजेसीएस कोर कमेटी के ही सदस्यों को बुलाया गया है। सेल मैनेजमेंट ने 23 मार्च 2023 से बोनस का नया फार्मूला लागू किया। इसके तहत यदि बोनस की गणना की जाए तो यह राउंड फिगर में 30200 रुपए ही बनेगा। दरअसल, जिस फार्मूले के आधार पर बोनस की गणना अब तक की जाती रही है वह फार्मूला पाँच वर्षों के लिए बनाया गया था। यह पाँचवाँ व अंतिम वर्ष है। ऐसे में उस फार्मूले में बदलाव के लिए सेल मैनेजमेंट तैयार नहीं होने वाला है। बल्कि सेल मैनेजमेंट ने फार्मूले के हिसाब से बोनस की गणना कर ली है, वह यूनियन नेताओं को इस राशि की केवल जानकारी देने के लिए ही बुलाया है। यानी यूनियन नेताओं को बोनस के कागजात पर जाकर केवल हस्ताक्षर ही करना है। बोनस पर डिस्कशन करने की स्थिति में यूनियन नेता नहीं रहेंगे। हाँ, यूनियन नेता बेहतर प्रोडक्शन परफार्मेस और लाभ का हवाला देते हुए बोनस को बढ़ाने के लिए केवल अनुरोध कर सकते हैं। वे दबाव बनाने की स्थित में नहीं होंगे। यूनियन नेताओं के अनुरोध पर कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए मैनेजमेंट 30200 रु. में दो-तीन हजार रु. की और बढ़ोतरी कर सकता है। यानी 32200 रु. से लेकर 33200 रु. तक बोनस मिलने की उम्मीद सेल कार्मिक कर सकते हैं।

नगरीय विकास पर सोनमणि बोरा का जोर, बोले- शहर की जरूरत के हिसाब से तैयार हो प्लान

शहर की तासीर के अनुरूप हो विकास की योजना : सोनमणि बोरा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने हुडको द्वारा नई दिल्ली में आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को किया संबोधित केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव तथा हुडको के अधिकारियों से भी मिले, छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी अमल व आगामी रणनीति पर की चर्चा रायपुर.  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने नई दिल्ली में हुडको (HUDCO) द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (UCF) पर आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों एवं नगरीय निकायों से कार्यशाला में हिस्सा ले रहे प्रतिभागियों से कहा कि शहरों के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहतर नियोजन, क्षमता विकास एवं वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने शहरों की भावी जरुरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर नियोजन, संस्थागत क्षमता विकास एवं उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया। प्रमुख सचिव बोरा ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह से नई दिल्ली में भेंट कर राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस और अर्बन चैलेंज फंड की प्रगति, उनके प्रभावी क्रियान्वयन तथा आगामी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने इन योजनाओं के लक्ष्यों की प्राप्ति तथा नगरीय निकायों की क्षमताओं को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। बोरा ने हुडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम के साथ बैठक कर राज्य के नगरीय निकायों के समग्र एवं आवश्यकता आधारित विकास की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में राज्य के नगरीय निकायों की स्थानीय आवश्यकताओं, संभावनाओं एवं विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। औद्योगिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों के लिए उनकी प्रकृति एवं विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा की गई, जिससे नगरीय सेवाओं एवं आधारभूत संरचनाओं का विस्तार स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में शहरों की आवश्यकतानुसार फूड पार्क, रेंटल हाउसिंग, पर्यटन संवर्धन, स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) सहित अन्य संभावित विकास के पहलुओं को शहरों की विकास योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं, उनके क्रियान्वयन अनुभवों तथा चुनौतियों का अध्ययन कर राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त पहलुओं को अपनाने एवं राज्य की नीतियों में आवश्यक प्रावधान किये जाने पर भी चर्चा की गई। बैठक में हुडको के सीएमडी ने परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) तैयार करने तथा राज्य स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर राज्य व नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का क्षमता विकास करते हुए विशिष्ट परियोजनाओं के चिन्हांकन एवं दस्तावेजीकरण के लिए सहमति प्रदान की। उन्होंने नगरीय परियोजनाओं हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने सहयोग प्रदान करने का भी आश्वासन दिया। बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय स्रोतों के बेहतर उपयोग तथा केंद्र एवं राज्य योजनाओं के माध्यम से वित्तीय अभिसरण (Convergence) की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

घर बैठे मिलेगी सरकारी सेवा, छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ ‘आपके द्वार’ अभियान

​विशेष लेख ​"सेवा_संकल्प_अभियान" ​कागजी उलझनों से मुक्ति—छत्तीसगढ़ में सेवा का संकल्प पहुँचा आपके द्वार रायपुर ​छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में वर्षों से किसानों तथा भू-स्वामियों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कागजी दफ्तरों के चक्कर काटने और प्रशासनिक उलझनों से जूझने में बीत जाता था। नामांतरण की एक छोटी-सी अर्जी हो, जमीन का सटीक सीमांकन, प्राकृतिक आपदा के समय फसल बीमा का क्लेम हासिल करना हो या फिर कृषि विकास के लिए बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन लेना हो—हर छोटे-बड़े काम के लिए तहसील, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और पटवारी कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी जटिल प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों का अनुचित हस्तक्षेप, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद की निरंतर बनी रहने वाली चिंता ग्रामीण जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी। ​प्रशासनिक पहल: आधुनिक तकनीक से आई सुशासन की नई क्रांति          ​लेकिन जब प्रदेश प्रशासन ने "सेवा का संकल्प, सेवा पहुँची आपके द्वार" के मूलमंत्र को अपनी कार्यशैली में आत्मसात किया, तो छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन के इतिहास में एक युगपरिवर्तकारी क्रांति की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत प्रशासनिक सोच में आमूलचूल बदलाव लाया गया। अब किसान या भूमि स्वामी को अपनी वाजिब मांगों और भूमि संबंधी सुधारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि शासन का अमला खुद आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक जीपीएस उपकरणों और दक्ष सर्वेयरों की समर्पित टीम लेकर ग्रामीणों के सीधे दरवाजे तक पहुँचा। इस पहल ने न केवल शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाया, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम की। ​डिजिटल सर्वेक्षण का विशाल दायरा और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ           ​प्रशासन के इस दृढ संकल्प और सुनियोजित क्रियान्वयन का ही सुखद नतीजा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 ग्रामों (लगभग 96.37%) में विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।        ​दूसरी ओर, बस्तर संभाग के अत्यंत दुर्गम, वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे नारायणपुर, सुकमा तथा बीजापुर—में भी अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के जरिए शेष बचे गाँवों को मानचित्र पर सटीक रूप से दर्ज करने का काम युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है। ​भू-स्वामियों को मिले प्रमुख ऐतिहासिक लाभ         ​प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याण की इस अनुपम पहल से प्रदेश के लाखों भू-स्वामियों को दशकों पुरानी असुविधाओं से स्थायी मुक्ति मिल चुकी है। डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन के कारण ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी आपसी विवादों तथा कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अद्यतित और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड्स से पूरी राजस्व प्रणाली विश्वसनीय बनी है, जिससे दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।        ​पूर्णतः त्रुटिरहित और सुधारे गए राजस्व रिकॉर्ड्स के आधार पर अब बैंक किसानों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कृषि ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के सीधा और समय पर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है। ​आत्मनिर्भरता और आदर्श राज्य की ओर सुदृढ़ कदम         ​शत-प्रतिशत डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला देश का आदर्श राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा बढ़ाया गया यह ऐतिहासिक कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान कर रहा है। "सेवा संकल्प अभियान" ने यह साबित कर दिया है कि जब दृढ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मिलन होता है, तो "सेवा पहुँची आपके द्वार" का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर बदलती व्यवस्था की एक जीवंत और सुखद सच्चाई बन जाता है। विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक

घरेलू हिंसा मामले में पत्नी के रिश्तेदार भी आरोपी हो सकते हैं

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि घरेलू हिंसा के मामलों में केवल पति ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य जैसे सास, बहू, ननद और उसके मायके पक्ष के लोग भी दायरे में आ सकते हैं. हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने बहू और उसके परिजनों की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि साझा घर और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े विवादों का फैसला बिना सबूतों और गवाहों के शुरुआती स्तर पर नहीं किया जा सकता, इसके लिए ट्रायल जरूरी है. इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां शिकायत किसी बहू ने अपनी सास के खिलाफ नहीं बल्कि सास और ननद ने अपनी बहू और उसके मायके पक्ष के लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी. दरअसल रायपुर निवासी निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी ने रायपुर की निचली अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12 के तहत एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में उन्होंने अपनी बहू अनिशा अग्निवंशी और बहू के मायके पक्ष के भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों सुषमा सिंह, अभिषेक सिंह, अविनाश सिंह, अंजू सिंह और अलका सिंह को आरोपी बनाया था. इन पर आरोप लगाया कि बहू और उसके परिवार के लोग लगातार उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उन्हें घर से अलग करने के लिए दवाब बना रहे हैं. बहू और उसके परिजनों ने निचली अदालत में तर्क पेश करते हुए कहा कि वे साझा घर में एक साथ नहीं रहते हैं इसलिए उनपर घरेलू हिंसा का कानून लागू नहीं होता. निचली अदालत ने उनके तर्क को खारिज कर दिया, जिसके वे निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे, जहां हाईकोर्ट ने भी याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी है.