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कलेक्टर के नाम से आदेश जारी करने पर घिरे DEO, RTI मामलों में अनदेखी का भी आरोप

बलरामपुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मनीराम यादव एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. डीईओ की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. आरोप है कि विभागीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारी अपने कार्यालय के आधिकारिक लेटरपैड का उपयोग करने के बजाय कई मामलों में कलेक्टर कार्यालय के नाम से आदेश जारी कर रहे हैं. इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि डीईओ कार्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने में असफल रहे हैं. कार्यालय के नियमित कर्मचारियों को दरकिनार कर बाहरी लोगों से काम लिया जा रहा है. इस बीच डीईओ पर यह भी आरोप है कि विद्यालयों से मंगाए गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कार्यालय में रखने के बजाय निजी निवास पर ले जाया जाता है. सूत्रों का कहना है कि कई बार संबंधित शाखा के कर्मचारियों को भी इन दस्तावेजों की जानकारी नहीं होती, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित होते हैं. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के मामलों में भी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि सैकड़ों आरटीआई आवेदन लंबित पड़े हैं, जबकि आवक-जावक शाखा को भी कई मामलों की जानकारी नहीं दी जाती. इससे आवेदकों को समय पर जानकारी नहीं मिल पा रही है. गौरतलब है कि जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पूर्व में भी कई विवादों और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में जिले के नवनियुक्त कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी से टेलिफोनिक चर्चा की तो उन्होंने कहा कि मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है अगर ऐसा आदेश जारी किया जा रहा है तो विधिवत जांच कराई जाएगी और उचित क्रिया भी लिया जाएगा.

रायपुर में बनेगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी और वेलनेस सेंटर, PPP मॉडल पर तैयार होगी परियोजना

रायपुर में विकसित होगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस सेंटर, क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के उन्नयन हेतु PPP मॉडल पर प्रस्तावित परियोजना इनडोर स्पोर्ट्स, जिम, स्विमिंग पूल, आधुनिक आवासीय सुविधाओं सहित होगा व्यापक आधुनिकीकरण रायपुर,  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राजधानी रायपुर स्थित क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रख-रखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एजेंसी नियुक्त करने की महत्वपूर्ण परियोजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल रायपुर को एक आधुनिक एवं प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी तथा वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। परियोजना के तहत क्लब परिसर में स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन हॉल, बिलियर्ड रूम तथा टेबल टेनिस हॉल जैसी आधुनिक खेल एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं विकसित एवं संचालित की जाएंगी। साथ ही वर्तमान अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण भी किया जाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह परियोजना रायपुर को एक नए प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गुणवत्तापूर्ण शहरी अधोसंरचना विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वींस क्लब ऑफ इंडिया की विशेष आवास योजना के अंतर्गत सांसद एवं विधायक वर्ग के 108 सदस्यों की विशेष सदस्यता पूर्ववत जारी रहेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वर्तमान सदस्यों के हितों एवं सुविधाओं का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि परियोजना को लाइसेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं ट्रांसफर (LDOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार क्लब की मौजूदा सुविधाओं का बेहतर संचालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा तथा टेनिस कोर्ट क्षेत्र के रिक्त भूभाग पर लगभग 61 कमरों वाले आधुनिक आवासीय एवं हॉस्पिटैलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होने के साथ-साथ दीर्घकालिक राजस्व सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना की लाइसेंस अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें अतिरिक्त 10 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहेगा। देव ने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों से उत्कृष्ट सड़क संपर्क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से राजधानी में उच्चस्तरीय आतिथ्य, खेल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का नया केंद्र विकसित होगा।

CGPSC घोटाले की जांच तेज, ED ने सोनवानी, ध्रुव और वासनिक के घरों पर मारी रेड

रायपुर/दुर्ग. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के भर्ती घोटाले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है. ईडी की टीम ने आज एक के बाद एक पांच जगहों पर दबिश दी है. इनमें आयोग के मामले में पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रण आरती वासनिक, राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको के अलावा एक और आरोपी ललित गणवीर के भाई भूपेंद्र गनवीर का निवास शामिल है. जानकारी के अनुसार, ईडी की पांच टीम भर्ती घोटाले में आरोपी पूर्व चेयरमैन टामन सोनवारी के ग्राम सरबदा में दबिश दी है. वहीं दो टीमों ने पूर्व सचिव जेके ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित निवास पर और अन्य टीम ने पूर्व परीक्षा नियंत्रण आरती वासनिक के रायपुर स्थित निवास पर दबिश दी है. इसके साथ एक अन्य आरोपी ललित गणवीर के भाई कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गणवीर के राजनांदगांव के शिक्षक कॉलोनी स्थित निवास और राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको के तालपुरी, भिलाई स्थित आवास पर ईडी की टीम ने दबिश दी है. टीम परिवार के सदस्यों से पूछताछ करने के साथ दस्तावेजों को खंगालने में जुटी है. बता दें कि अमृत खलको की की बेटी नेहा और बेटा निखिल का डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयन हुआ था. अमृत खलको बालोद जिले के कलेक्टर, बस्तर संभाग के कमिश्नर, आयुक्त समाज कल्याण, एमडी बीज निगम जैसे पदों पर पदस्थ रहे हैं. इसके अलावा राज्यपाल के सचिव थे, उनके रिटायरमेंट के बाद फिर से उन्हें संविदा नियुक्ति दी गई थी. सीजीपीएसपी भर्ती घोटाले में नाम सामने आने के बाद पद से उन्हें हटा दिया गया था. वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है मामला यह घोटाला 2020 से 2022 के बीच सामने आया था, जब सीजीपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं. अधिकारियों ने कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को फायदा पहुंचाने के लिए योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी की. परिणामस्वरूप, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित होने वाले कई नाम सवालों के घेरे में आ गए. इस प्रक्रिया ने न केवल भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि राज्य की प्रशासनिक पारदर्शिता को भी चुनौती दी. इस दिशा में जुलाई 2023 में कार्रवाई शुरू हुईं, जब छत्तीसगढ़ सरकार ने 2020-22 की परीक्षाओं में पक्षपात के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई की जांच के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने नियमों में हेरफेर कर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाया. उदाहरण के तौर पर, भतीजे के चयन को सुनिश्चित करने हेतु ‘रिश्तेदार’ शब्द को ‘परिवार’ में बदल दिया गया. इसी तरह, प्रश्न पत्रों का लीकेज कर परीक्षा पास करवाने के आरोप भी लगे हैं. आयोग के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक और ललित गणवीर जैसे अधिकारियों पर भी पद के दुरुपयोग का इल्जाम है. सभी आरोपी फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं. गिरफ्तारियों की फेहरिस्त लंबी है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने टामन सिंह सोनवानी के अलावा बजरंग पावर इस्पात कंपनी के निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, उप नियंत्रक ललित गणवीर, निशा कोसले, दीपा आदिल, सुमित ध्रुव समेत कई अन्य को हिरासत में लिया था, इनमें से कई लोग जमानत पर रिहा भी हो चुके हैं.

मछुआरों के लिए नई पहल, मुख्यमंत्री साय ने वितरित की आधुनिक उपकरण सामग्री

कोंडागांव/रायपुर. सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सोमवार को कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के मत्स्य पालकों एवं मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों को आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न आधुनिक उपकरण एवं सामग्री प्रदान की गई।  मुख्यमंत्री साय ने ग्राम मालाकोट के कमल सिंह नेताम एवं ग्राम जोबा के नरेंद्र कश्यप को मोटर साइकिल और आइस बॉक्स प्रदान किए। इन संसाधनों के माध्यम से अब दोनों हितग्राही अपनी मछलियों को सुरक्षित तरीके से दूरस्थ बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके व्यवसाय को नई गति मिलेगी। हितग्राहियों ने बताया कि पहले मछलियों के परिवहन और संरक्षण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आइस बॉक्स उपलब्ध होने से अब मछलियों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। वहीं मोटर साइकिल मिलने से परिवहन आसान होने के साथ-साथ समय और लागत की भी बचत होगी। आधुनिक जाल से बढ़ेगा उत्पादन कार्यक्रम में ग्राम बड़ेकनेरा के ललित बघेल एवं रामलाल नेताम को मछली पकड़ने के लिए आधुनिक जाल वितरित किए गए। हितग्राहियों ने बताया कि नए जाल मिलने से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी तथा व्यवसाय को और अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया जा सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मत्स्य पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है और सरकार इस क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन से प्राप्त यह सहयोग उनके व्यवसाय के विस्तार और आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक संसाधनों की मदद से वे अपने मत्स्य व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।

नैनो उर्वरकों से बढ़ी पैदावार और घटी लागत, सरगुजा के किसान पंकज राजवाड़े बने नवाचार की मिसाल

नैनो उर्वरकों से बढ़ी पैदावार और घटी लागत, सरगुजा के किसान पंकज राजवाड़े बने नवाचार की मिसाल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से खेती हुई अधिक लाभकारी, किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील रायपुर कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत में भी कमी ला रहे हैं। राज्य शासन और कृषि विभाग द्वारा प्रोत्साहित नैनो उर्वरकों का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। सरगुजा जिले के विकासखंड अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत जगदीशपुर के प्रगतिशील किसान पंकज राजवाड़े इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी बनाया है। पंकज राजवाड़े पिछले दो वर्षों से अपनी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का नियमित उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन उन्नत तरल उर्वरकों के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है, उत्पादन में सुधार आया है तथा खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। कम खर्च में बेहतर परिणाम मिलने से उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का उपयोग विभिन्न प्रकार की फसलों और सब्जियों में प्रभावी रूप से किया जा सकता है। आलू, टमाटर, बैंगन, लहसुन, प्याज सहित अन्य व्यावसायिक फसलों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। तरल स्वरूप में उपलब्ध होने के कारण इनका छिड़काव आसान है और पौधों को पोषक तत्व सीधे एवं प्रभावी रूप से प्राप्त होते हैं। इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में सुधार होता है। पंकज ने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की आवश्यकता कम मात्रा में पड़ती है, जिससे परिवहन और भंडारण की सुविधा बढ़ती है तथा किसानों का खर्च भी कम होता है। इसके साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत अनुकूल विकल्प साबित हो रहा है। अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं और किसान भाई भी इसका लाभ लेकर अपनी खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बना सकते हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। जगदीशपुर के किसान पंकज राजवाड़े की सफलता यह दर्शाती है कि नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

रायपुर में World Bicycle Day पर लोगों ने भरी साइकिल की रफ्तार, सेहत और हरियाली का दिया संदेश

रायपुर. दुनियाभर में आज विश्व साइकिल दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राजधानी रायपुर में द बाइसिकल कैफे (The Bicycle Cafe) एवं स्पोर्ट्स एंथूज़ियास्ट एसोसिएशन (SEA) के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य साइकिल राइड का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में शहर के साइक्लिंग प्रेमियों ने हिस्सा लेकर फिटनेस, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। बता दें कि साइकिल राइड का उद्देश्य लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना तथा साइक्लिंग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। द बाइसिकल कैफे के संचालक राघवेंद्र औऱ स्पोर्ट्स एंथूज़ियास्ट एसोसिएशन (Sports Enthusiast Association) के सचिव नीलेश कटारिया ने इस अवसर पर साइक्लिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साइक्लिंग केवल एक खेल या शौक नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि साइक्लिंग शरीर को फिट रखने के साथ-साथ हृदय को मजबूत बनाती है और मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक होती है। इसके अलावा यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त परिवहन का एक बेहतर विकल्प है। SEA के अध्यक्ष समीर सिंह ने भी इस दौरान साइक्लिंग को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए। उन्होंने लोगों से नियमित रूप से साइक्लिंग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण के निर्माण में भी योगदान मिलता है। कार्यक्रम का सफल संचालन SEA की प्रवक्ता लिपि जैन ने किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह और ऊर्जा देखने लायक रही। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि समाज में फिटनेस, स्वास्थ्य जागरूकता और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सके। विश्व साइकिल दिवस पर आयोजित यह राइड लोगों को स्वस्थ रहने, पर्यावरण संरक्षण और नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति जागरूक करने का एक सार्थक प्रयास साबित हुई।

छत्तीसगढ़ में अब ऑनलाइन मिलेगा न्याय, राजस्व ई-कोर्ट परियोजना बनी डिजिटल सुशासन की मिसाल

अब न्याय होगा ऑनलाइन: छत्तीसगढ़ की राजस्व ई-कोर्ट परियोजना बनी डिजिटल सुशासन की नई मिसाल डिजिटल क्रांति से बदल रही है राजस्व न्याय व्यवस्था विशेष लेख                  भारत तेजी से डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ रहा है और इसी दिशा में छत्तीसगढ़ ने राजस्व प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और आमजन के लिए सहज बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई “राजस्व ई-कोर्ट परियोजना” अब केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी नागरिकों के लिए न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल, त्वरित और भरोसेमंद बनाने वाला प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है।         वर्षों तक राजस्व मामलों में आम लोगों को तहसील, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फौती प्रकरण, खाता सुधार या भूमि विवाद जैसे मामलों में पेशी की तारीख जानने, आदेश की प्रति लेने या केस की स्थिति समझने में समय, धन और ऊर्जा तीनों की भारी खपत होती थी। कई बार बिचौलियों और भ्रष्टाचार का सामना भी करना पड़ता था। लेकिन अब वही पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ चुकी है।         छत्तीसगढ़ की ई-कोर्ट परियोजना ने राजस्व न्यायालयों की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलकर उसे “पेपरलेस”, “स्मार्ट” और “जनकेंद्रित” बना दिया है। नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर और राजस्व मंडल तक की न्यायिक प्रक्रिया अब ऑनलाइन संचालित हो रही है। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। ई-कोर्ट व्यवस्था एक प्रभावी समाधान-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय         मुख्यमंत्री  ने राजस्व ई-कोर्ट परियोजना को सुशासन और डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा है कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जनता के लिए सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।        राजस्व मामलों में वर्षों से चली आ रही जटिलताओं को समाप्त करने के लिए ई-कोर्ट व्यवस्था एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। अब नागरिकों को छोटी-छोटी जानकारियों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार न्याय प्रक्रिया को लोगों के मोबाइल तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।          उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ने से भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका स्वतः समाप्त होगी तथा आम लोगों का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, “ई-गवर्नेंस केवल तकनीक नहीं, बल्कि जनता को सम्मानपूर्वक और समयबद्ध सेवाएं देने का माध्यम है। पारदर्शिता और जवाबदेही की नई व्यवस्था       ई-कोर्ट प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आवेदन प्राप्त होते ही उसका ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है और तत्काल डिजिटल पावती जारी होती है। इससे आवेदक को यह भरोसा मिल जाता है कि उसका आवेदन रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है और अब उसे किसी कर्मचारी या दलाल के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।        इसके बाद की पूरी प्रक्रिया—जैसे नोटिस जारी करना, इश्तहार प्रकाशित करना, पक्षकारों को सूचना भेजना, सुनवाई की तारीख तय करना और अंतिम आदेश पारित करना सभी ऑनलाइन दर्ज होते हैं।प्रत्येक कार्रवाई डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहती है, जिससे किसी भी स्तर पर हेरफेर की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।          ई-कोर्ट पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे यह देख सकते हैं कि उनके मामले में पिछली तारीख पर क्या कार्यवाही हुई, अगली पेशी कब है और आदेश जारी हुआ है या नहीं। इससे न्यायालयों के बाहर लगने वाली भीड़ और अनावश्यक भागदौड़ में उल्लेखनीय कमी आई है। किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए बड़ी राहत         राजस्व मामलों का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भू-स्वामियों पर पड़ता है। पहले किसानों को एक छोटी सी जानकारी के लिए भी पूरे दिन का समय निकालकर तहसील मुख्यालय जाना पड़ता था। कई बार केवल अगली तारीख जानने में ही मजदूरी और किराए का नुकसान हो जाता था। अब ई-कोर्ट व्यवस्था ने यह परेशानी काफी हद तक समाप्त कर दी है। किसान अपने गांव के लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर या मोबाइल फोन के माध्यम से ही अपने प्रकरण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिल रही है।        डिजिटल न्याय व्यवस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन के प्रति विश्वास को भी बढ़ाया है। जब लोगों को अपने आवेदन की ऑनलाइन पावती और हर कार्रवाई की जानकारी समय पर मिलने लगती है, तो पारदर्शिता स्वतः स्थापित होती है। विवादित जमीनों की जानकारी अब सार्वजनिक        ई-कोर्ट परियोजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि विचाराधीन भूमि विवादों की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। इससे जमीन खरीदने वाले लोग पहले ही जांच कर सकते हैं कि संबंधित खसरा नंबर पर कोई विवाद या न्यायालयीन प्रकरण लंबित तो नहीं है।        यह व्यवस्था फर्जीवाड़े, अवैध बिक्री और धोखाधड़ी रोकने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। पहले कई लोग विवादित भूमि खरीदकर वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर काटते रहते थे, लेकिन अब पारदर्शी ऑनलाइन रिकॉर्ड के कारण ऐसी घटनाओं में कमी आई है। तकनीक के सहारे मजबूत हुआ प्रशासन       राजस्व ई-कोर्ट प्रणाली के सफल संचालन के लिए प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में कंप्यूटर, डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे न्यायालयों के कार्य निष्पादन की गति बढ़ी है और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हुई है।        डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित सर्वर में संग्रहीत होने से अब फाइलों के गुम होने, फटने या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसी समस्याएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं। प्रशासनिक निगरानी भी आसान हुई है क्योंकि उच्च अधिकारी किसी भी न्यायालय की कार्यवाही ऑनलाइन मॉनिटर कर सकते हैं। “मोबाइल में कोर्ट” की दिशा में बड़ा कदम       छत्तीसगढ़ की यह पहल वास्तव में “मोबाइल में कोर्ट” की अवधारणा को साकार करती दिखाई देती है। अब नागरिकों को केवल जानकारी लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर … Read more

अवैध रेत उत्खनन पर राज्यपाल रमेन डेका सख्त, बोले- नदियों के अस्तित्व से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

अवैध रेत उत्खनन पर राज्यपाल रमेन डेका सख्त बोलेः नदियों के अस्तित्व से खिलवाड़ मंजूर नहीं रायपुर  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेश की नदियों और बड़े नालों में हो रहे अवैध व बेतरतीब रेत उत्खनन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पर्यावरण और जल संसाधनों की सुरक्षा के लिए इस पर तत्काल व प्रभावी रोक लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि रेत राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण के लिए एक अनिवार्य खनिज है, परंतु इसके अनियंत्रित और अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँच रही है।         लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस संवेदनशील विषय पर विस्तृत चर्चा की और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में रेत खनन पूरी तरह से वैज्ञानिक, सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि विकास की रफ्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक आदर्श संतुलन बना रहे। अनियंत्रित खनन से पर्यावरण और भू-जल स्तर को खतरा           राज्यपाल ने अवैध उत्खनन से होने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि अंधाधुंध खुदाई के कारण नदियों का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। नदी के तल में अत्यधिक गहराई तक खुदाई होने से उनकी जलधारण क्षमता घट रही है, जिसका सीधा प्रतिकूल असर भू-जल स्तर पर पड़ रहा है। नदी तटों के तीव्र कटाव की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जलस्रोत सूख रहे हैं और जलीय जैव विविधता के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नदियों व बड़े नालों की जल क्षमता को बनाए रखने तथा भू-जल स्तर में सुधार के लिए अब दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। आई आई टी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कराया जाएगा वैज्ञानिक सर्वे           भविष्य की कार्ययोजना पर बात करते हुए राज्यपाल डेका ने निर्देश दिए कि रेत खनन से प्रभावित क्षेत्रों का गहन वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। इसके लिए आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद ली जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि खनन के सटीक आकलन, तकनीकी अध्ययन और सर्वे के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी) जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग लिया जा सकता है। पारदर्शी व्यवस्था और कड़ी निगरानी के निर्देश          राज्यपाल ने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए रेत बेहद जरूरी है, लेकिन इसका दोहन निर्धारित नियमों और वैज्ञानिक मानकों के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने खनिज विभाग को निर्देशित किया कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाए। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए संपूर्ण खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए।

राज्यपाल रमेन डेका से मुख्य सचिव ने सौजन्य भेंट की

राज्यपाल रमेन डेका से मुख्य सचिव ने सौजन्य भेंट की रायपुर राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील ने सौजन्य भेंट की। भेंट के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्याे की प्रगति से राज्यपाल को अवगत कराया।

फसल पंजीयन की तारीख घोषित, किसान आईडी और खसरे की कॉपी के बिना नहीं होगा आवेदन

जांजगीर-चांपा. खरीफ वर्ष 2026 में कृषकों के प्रक्षेत्र पर उत्पादन कार्यक्रम के तहत फसल पंजीयन किया जाना है. बीज उत्पादन कार्यक्रम का आयोजन 10 जून से 24 जून तक जांजगीर-चांपा एवं सक्ती जिले के सभी विकास खंडों में आयोजित की जाएगी. उप प्रबंधक व बीज प्रबंधक नम्रता तिवारी ने बताया कि बीज उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत पंजीयन कार्य विकासखंड बम्हनीडीह में 10 जून को, अकलतरा विकासखंड में 11 जून को, पामगढ़ विकासखंड में 12 जून को, बलौदा विकासखंड में 15 व 16 जून को, नवागढ़ विकासखंड में 17 व 18 जून को प्रातः 10 बजे से सायं 05.30 बजे तक बीज उत्पादन कार्यक्रम आयोजन कर पंजीयन कार्य किया जाएगा. सक्ती जिले अंतर्गत विकासखंड सक्ती में 19 जून को, डभरा ब्लाक में 22 जून को जैजैपुर ब्लाक में 23 जून को एवं मालखरौदा में 24 जून को प्रातः 10 बजे से सायं 5.30 बजे तक बीज उत्पादन कार्यक्रम आयोजन कर पंजीयन कार्य किया जाएगा. कृषकों को पंजीयन हेतु किसान आईडी एग्रीटेक क्रमांक, पासपोर्ट साईज 1 नवीन कलर फोटो, बी-1 एवं खसरा की नकल संबंधित पटवारी से सत्यापित कराकर एवं आधार कार्ड, पैन कार्ड, चालू मोबाईल नम्बर तथा बैंक पास बुक की छायाप्रति पंजीयन के समय एक प्रति के साथ पंजीयन कार्यवाही कराना होगा.