samacharsecretary.com

Assembly Session से पहले श्रद्धा का संदेश: कुलतार सिंह संधवां पहुंचे ऐतिहासिक गुरुद्वारा अंब साहब

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के आगाज से पहले स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। सोमवार को वह मोहाली के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल गुरुद्वारा अंब साहब पहुंचे, जहां उन्होंने मत्था टेक कर सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्पीकर ने इस दौरान ‘सरबत के भले’ की मंगलकामना की। विधानसभा की कार्यवाही शुरू करने से पहले गुरुद्वारे जाकर अरदास करना इस बात का संकेत है कि सरकार आगामी विधायी कार्यों, विशेषकर बेअदबी विरोधी बिल को लेकर कितनी गंभीर है। ऐतिहासिक दिन और नई चुनौतियों का जिक्र इस अवसर पर संधवां ने देश-दुनिया की संगत को खालसा सृजना दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दिन सिख कौम के गौरव और सेवा भावना का प्रतीक है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब की पवित्र धरती पर पूर्व में हुई बेअदबी की घटनाओं ने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय के सत्ताधारियों ने दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे जनमानस में भारी आक्रोश बना रहा। विपक्ष और एसजीपीसी पर तीखा प्रहार जब एसजीपीसी (SGPC) अध्यक्ष द्वारा विशेष बिल पर उठाए जा रहे सवालों के बारे में पूछा गया, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि जब बेअदबी की घटनाएं हो रही थीं, तब उनकी पार्टी की सरकार थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई? संधवां ने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल विरोध करने की राजनीति कर रहे हैं और विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता दोषियों को सजा दिलाना और धार्मिक मर्यादा की रक्षा करना है। सदन में सर्वसम्मति की जताई उम्मीद सदन में प्रस्तावित बिल के भविष्य पर बात करते हुए स्पीकर ने विश्वास व्यक्त किया कि शायद ही कोई ऐसा सदस्य होगा जो बेअदबी रोकने वाले इस कानून का विरोध करेगा। उन्होंने आशा जताई कि विधानसभा के सभी सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गुरु मर्यादा के अनुरूप इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपनी सहमति देंगे। यह सत्र केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पंजाब की धार्मिक भावनाओं और न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

पंजाब में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: ‘रोशन पंजाब योजना’ से गांव होंगे रोशन, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

जालंधर. पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलने और वहां सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशाल परियोजना की घोषणा की है। प्रदेश के लगभग 13 हजार गांवों को रोशन करने के लिए तीन लाख सौर स्ट्रीट लाइटें लगाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। ‘मुख्यमंत्री रोशन पंजाब योजना’ के तहत गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थलों को आधुनिक सौर ऊर्जा प्रणाली से लैस किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार की उम्मीद है। 550 करोड़ का बजट और कार्यान्वयन की रणनीति जालंधर में आयोजित एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस पूरे मिशन पर अनुमानित 550 करोड़ रुपये की लागत आएगी। विभाग ने इसकी निविदा प्रक्रिया को शीघ्र अति शीघ्र आरंभ करने के निर्देश दिए हैं। योजना का मुख्य केंद्र बिंदु गांवों के वे सार्वजनिक स्थान और घनी आबादी वाले मोहल्ले हैं, जहां वर्तमान में प्रकाश व्यवस्था का अभाव है। सुरक्षा और आर्थिक प्रगति पर विशेष ध्यान अंधेरा दूर होने से न केवल गांवों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि इससे स्थानीय निवासियों की कार्यक्षमता और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। सौर लाइटों के लगने से रात के समय होने वाली आपराधिक वारदातों में कमी आएगी और विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है, जिसके तहत जून से कार्य शुरू होकर अक्टूबर तक संपन्न किया जाएगा। पूरी व्यवस्था के प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय नियंत्रण केंद्र बनाया जा रहा है और नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। रखरखाव की जिम्मेदारी और वित्तीय ढांचा परियोजना की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। जिस कंपनी को लाइटें लगाने का अनुबंध मिलेगा, वही अगले सात वर्षों तक इनके परिचालन और मरम्मत के लिए उत्तरदायी होगी। यदि कोई लाइट खराब होती है, तो उसे 72 घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा, अन्यथा कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस योजना के कुल व्यय का 70 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत का योगदान ग्राम पंचायतें करेंगी। इसके साथ ही गांवों में पहले से मौजूद बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को भी इस अभियान के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा।

Jalandhar Nagar Kirtan: खालसा स्थापना दिवस पर श्रद्धा का सैलाब, आसमान से बरसे फूल

जालंधर. पंजाब के जालंधर में खालसा के स्थापना दिवस के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह से भरा भव्य खालसा नगर कीर्तन निकाला गया। यह मार्च गुरुद्वारा नवमीं पातशाही दुश निवारण साहिब से आरंभ हुआ, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हो गए थे। धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुरु ग्रंथ सहाब जी की पावन छत्रछाया में यह मार्च निकाला गया। इसकी अगुवाई गुरु के पांच प्यारों ने की, जो सिख परंपरा का प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं। श्रद्धालु पूरे रास्ते में गुरु के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।यह खालसा मार्च शहर के विभिन्न प्रमुख इलाकों से होकर गुजरा। इसमें मॉडल टाउन मार्केट, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह साहिब मॉड टाऊन, , स्काईलार्क रोड, भगवान वाल्मिक चौक, अली मोहल्ला पुरी और पटेल चौक सहित कई स्थान शामिल रहे। अंत में यह मार्च ऐतिहासिक स्थल गुरुद्वारा छवमीं पातशाही बस्ती शेख पहुंचेगा। श्रद्धालुओं के लिए किए गए विशेष प्रबंध मार्च के मार्ग में शहर की विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष प्रबंध किए गए। जगह-जगह लंगर लगाए गए, जहां लोगों को प्रसाद और भोजन वितरित किया गया। इसके अलावा कई स्थानों पर श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरे शहर में भक्तिमय माहौल बन गया। नगर कीर्तन में दिखा अनुशासन व सेवा भावना खालसा नगर कीर्तन के दौरान अनुशासन और सेवा भाव का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में भाईचारे, सेवा और एकता का संदेश भी देता है। बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं इसमें शामिल होकर गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।

सरकार का बड़ा अपडेट: ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ में आवेदन तिथि बदली, लाभार्थियों को ₹1000 सहायता

चंडीगढ़. पंजाब में महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अब इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होगा। पहले यह प्रक्रिया 13 अप्रैल, बैसाखी के दिन शुरू होनी थी, लेकिन विशेष विधानसभा सत्र के कारण तारीख में बदलाव किया गया है। सरकार की ओर से योजना की औपचारिक शुरुआत 14 अप्रैल को जालंधर के आदमपुर में आयोजित रैली के दौरान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में सात जिलों—मुक्तसर, रोपड़, पटियाला, संगरूर, मोगा, जालंधर और फरीदकोट—को शामिल किया गया है। इनमें से अधिकांश जिले मालवा क्षेत्र के हैं, जबकि दो जिले दोआबा क्षेत्र से संबंधित हैं। जानें किन महिलाओं को मिलेगा लाभ इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की सहायता दी जाएगी। खास बात यह है कि अनुसूचित वर्ग की महिलाओं को अतिरिक्त लाभ देते हुए उन्हें 1500 रुपए प्रति माह देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इसके लिए बजट में 9300 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया है। योजना का लाभ सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसके लिए महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसमें मोबाइल नंबर, बैंक खाता और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। रजिस्ट्रेशन की सुविधा सेवा केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध होगी और यह पूरी प्रक्रिया निशुल्क होगी। सांसद, सरकारी नौकरी वाली महिलाएं नहीं की गई शामिल हालांकि, कुछ वर्गों की महिलाओं को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। इनमें पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, सरकारी कर्मचारी, पेंशनधारी और कर देने वाली महिलाएं शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आय की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में नौ विधानसभा क्षेत्रों की महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा, इसके बाद धीरे-धीरे इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं विपक्ष इस योजना के समय और क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठा रहा है।

Baisakhi 2026: नंगल में उमड़ी भारी भीड़, सतलुज झील में श्रद्धालुओं का स्नान

नंगल/रूप नगर. पंजाब के नंगल में बैसाखी पर्व के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। बैसाखी के इस पावन दिन पर सतलुज झील में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। झील के किनारे स्थित विभोर साहिब घाट पर सुबह से ही धार्मिक माहौल बना हुआ है, जहां श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पंजाब के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। तीन दिन तक चलने वाला पारंपरिक पंचगाठड़ा मेला इस अवसर का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मान्यता के अनुसार बैसाखी के दिन सतलुज झील में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु झील में डुबकी लगाने के बाद नाव में बैठे मलाहों को दान सामग्री अर्पित कर रहे हैं। घाट पर लगातार बढ़ती भीड़ के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बना हुआ है। सुरक्षा के कड़े प्रबंध श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष प्रबंध किए हैं। इस बार झील में बोटिंग करने वालों की संख्या सीमित कर दी गई है। पहले जहां एक नाव में 50 से अधिक लोग सवार हो जाते थे, वहीं अब सुरक्षा के मद्देनजर केवल 15 लोगों को ही अनुमति दी जा रही है। घाट पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। वृंदावन नांव घटना के बाद निगरानी तेज इस संबंध में एएसआई रामकुमार ने बताया कि सभी नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। झील में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा सिविल डिफेंस विभाग के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद हैं। दो गोताखोरों की तैनाती की गई है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

Punjab Assembly में कड़ा कदम: भगवंत मान सरकार लाई सख्त बेअदबी कानून, उम्रकैद तक सजा संभव

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए अहम विधेयक सदन में पेश किया गया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह वॉक आउट न करे और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा में भाग ले। बिल पेश होने के बाद सदन में इस पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से मांग की कि पिछले वर्ष गठित सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट पहले सदन में पेश की जाए। उन्होंने कहा कि कमेटी को बने नौ महीने हो चुके हैं, इसलिए उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सत्र की अवधि एक दिन बढ़ाने का सुझाव भी दिया। इस पर स्पीकर ने जवाब देते हुए कहा कि कमेटी अपना कार्य कर रही है और उचित समय पर रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी जाएगी। वहीं, मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह एक व्यापक और पवित्र कानून है, जिसमें बेअदबी के मामलों की जांच तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच किसी भी स्थिति में उच्च स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं होगा। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूर किए जा चुके इस संशोधन विधेयक में ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008’ को और मजबूत बनाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। उद्देश्य: धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना इस सत्र में सबसे अहम मुद्दा रहा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ा प्रस्तावित नया कानून। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूरी दिए गए इस विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया गया है। इसका नाम ‘जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026' रखा गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना और बेअदबी जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है। संशोधन समय की जरूरत  सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे समाज में गहरी नाराजगी और तनाव की स्थिति पैदा हुई है। इन घटनाओं ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित किया है। सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा कानूनों में ऐसे मामलों के लिए सज़ा पर्याप्त कठोर नहीं है, इसलिए सख्त संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कई कठोर दंडात्मक प्रावधान भी हैं शामिल प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अन्य कठोर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सरकार का दावा है कि यह कानून समाज में शांति, भाईचारे और धार्मिक सम्मान को मजबूत करेगा। मंत्रिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि धार्मिक पवित्रता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विधेयक के अनुसार, जानबूझकर धार्मिक ग्रंथों की अवमानना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Boat Tragedy in Vrindavan: मां के बाद बेटी को भी दी विदाई, लुधियाना में गमगीन माहौल

लुधियाना. वृंदावन में माथा टेकने गई लुधियाना दुगरी फेस टू की डिक्की बंसल का सोमवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे और नम आंखों से अंतिम विदाई दी । इस दौरान रिश्तेदारों व अन्य लोगों ने परिजनों से शोक संवेदना प्रकट की। गौरतलब है कि दुगरी की मीनू बंसल की बेटी डिकी बंसल दोनों वृंदावन गए थे। वहां यमुना नदी पार कर मंदिर में माथा टेकने के दौरान जब वह नाव में बैठे तो यमुना में अचानक नाव पलट गई। इस वजह से लुधियाना के कई श्रद्धालु उसमें डूब गए। जिसमें मीनू बंसल व उनकी बेटी डिक्की बंसल भी थी। मीनू बंसल का शव दो दिन पहले मिल गया था। और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था लेकिन उनकी बेटी डिकी बंसल का शव नहीं मिला था वह शुक्रवार को मिला। इसके बाद परिवार वृंदावन गया और शव को लेकर आया। आज सोमवार को सुबह डिकी बंसल का अंतिम संस्कार किया गया है । बंसल 22 वर्षी की थी और वह अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। इस तरह से उनके निधन से परिवार शोक में है।

जब आशा भोसले ने विरासत-ए-खालसा उद्घाटन में किया शबद गायन, सिख संगत हुई भावविभोर

रूपनगर/चंडीगढ़. विख्यात गायिका आशा भोसले अपने जीवन में चाहे मात्र एक बार ही जिला रूपनगर के आनंदपुर साहिब क्षेत्र में आई थीं, लेकिन उनके आनंदपुर साहिब दौरे की यादें आज भी आनंदपुर वासियों के दिलों में ताजी हैं। भोसले 2001 के दौरान उस वक्त आनंदपुर साहिब की धरती पर आई थीं, जब पंजाब में स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिअद-भाजपा गठबंधन वाली सरकार थी। उन दिनों आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा का निर्माण युद्ध स्तर पर करवाया जा रहा था, क्योंकि 2002 में विधानसभा चुनाव आने वाला था। उस वक्त तत्कालीन बादल सरकार द्वारा आनन-फानन में विरासत ए खालसा के पहले फेज के उद्घाटन की घोषणा कर दी गई । नवंबर 2001 में विरासत-ए-खालसा के पहले फेज का उद्घाटन भी कर दिया गया। पंजाब सरकार ने विशेष निमंत्रण पर बुलाई थी उद्घाटन के वक्त पांचों तख्तों के जत्थेदारों के साथ श्री श्री रविशंकर सहित अनेकों संत व हस्तियां आनंदपुर साहिब पहुंची थीं, जिनमें विख्यात गायिका भोसले भी शामिल थीं, जिन्हें पंजाब सरकार द्वारा विशेष निमंत्रण पर बुलाया गया था। उस वक्त को यादगार बनाने के लिए आशा भोसले द्वारा एक मात्र हारमोनियम तथा तबले की संगत में मेरे साहेब मेरे साहेब तू निमानिमानी, अरदास करी प्रभु अपने आगे सुन सुन जीवां तेरी बाणी शबद का गायन करते हुए उन पलों को यादगार बना दिया था। आशा भोसले ने धरती पर टेका था माथा  उस वक्त उनका कहना था कि आज वो इस धरती पर आकर खुद को धन्य समझ रही हैं, जिस धरती पर दशमेश पिता ने खालसा पंथ की स्थापना की तथा जिस धरती पर सिख पंथ के पांच महान तख्तों में से एक तख्त श्री केसगढ़ साहिब है। उस वक्त आशा भोसले ने इस धरती पर माथा भी टेका था। आज आशा भोसले चाहे इस संसार को अलविदा कह गई हैं, लेकिन उनकी आनंदपुर साहिब से जुड़ी मात्र कुछ घंटे की यादें हमेशा ताजा रहेंगी।

Punjab Satkar Act: बेअदबी पर उम्रकैद का प्रावधान, आज विधानसभा में रखा जाएगा नया बिल

चंडीगढ़. पंजाब सरकार की ओर सोमवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस दौरान सरकार शनिवार को कैबिनेट की ओर से मंजूर किए गए जागत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026 को पेश करेगी। विधानसभा में इस बिल को मंजूर करवाने में सरकार को कोई परेशानी नहीं होगी, हालांकि इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी दिलाना बड़ी चुनौती रहेगी। इसका मुख्य कारण बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने पर जो सजा के प्रविधान किए गए हैं, वे केंद्रीय कानून से टकराते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यपाल इस बिल को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेज दें। हालांकि राज्य सरकार का तर्क है कि यह स्टेट बिल है और इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं होती। सरकार की ओर तैयार किए गए बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और पांच से 25 लाख जुर्माने का प्रविधान किया गया है। उधर, कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सरकार की ओर से बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र को एक नाटक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार वर्षों में सरकार एक भी दोषी को सजा नहीं दिला सकी है। सरकार मुश्किल हालात से बचने के लिए बार-बार विशेष सत्रों का सहारा लेती रही है। अगर सरकार की नीतियां वास्तव में सच्ची होतीं, तो वह इस तरह का कानून तैयार करने से पहले संबंधित पक्षों, विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करती। 2016 और 2018 में भी धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को लेकर बिल विधानसभा में पेश किए जा चुके हैं। 2016 में तो इसे राष्ट्रपति ने कहते हुए वापिस कर दिया कि सभी धर्मों के ग्रंथों के अपमान पर एक जैसी सजा ही दी जा सकती है, अलग-अलग नहीं। इस बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान पर उम्र कैद और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर दस साल की सजा का प्रविधान था। 2018 में सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए सभी धर्मों को शामिल कर लिया लेकिन आठ साल गुजरने के बावजूद राष्ट्रपति से इसे मंजूरी नहीं मिली है।

जासूसी नेटवर्क पर शिकंजा: ऑपरेशन सिंदूर में 18 गिरफ्तार, छिपे कैमरों से रखी जा रही थी नजर

चंडीगढ़. जासूसी अब सरहद पार छिपकर नहीं, बल्कि पंजाब के शहरों के बीच लगे कैमरों से खुलेआम हो रही थी। यह मामला सिर्फ जासूसी का नहीं, बल्कि लाइव निगरानी युद्ध का है। दिल्ली पुलिस की ओर से आईएसआई बीकेआई मॉड्यूल में पंजाब के जिन आठ आरोपितों को पकड़ा गया है उन्हें पंजाब पुलिस ट्रांजिक्ट रिमांड पर लाने की तैयारी कर रही है आरोपितों की ओर से जिन मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया जा रहा था वह भी फर्जी दस्तावेज लगाकर लिए गए थे। पंजाब पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं पंजाब में बार्डर एरिया में लगे सीसीटीवी कैमरों का आडिट भी करवाया जाएगा। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि इस मामले में शामिल आरोपितों को लेकर संबंधित जिलों की ओर से जांच की जा रही है। वहीं केंद्रीय जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। जोकि पंजाब के पड़ोसी राज्यों से है। डेढ़ दर्जन युवाओं को पकड़ा गया उधर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पंजाब में अब तक डेढ़ दर्जन से ज्यादा युवाओं को जासूसी के आरोप में पकड़ा जा चुका है। जांच एजेंसियों के अनुसार, हनी ट्रैप और इंटरनेट मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बनाया जाता था। फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर संपर्क किया जाता और धीरे-धीरे उन्हें भरोसे में लेकर संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती। कई मामलों में पैसों का लालच देकर भी आरोपितों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया। खास बात यह रही कि इस नेटवर्क में शामिल लोग आम जिंदगी जीने वाले थे, जिन पर आसानी से शक करना मुश्किल था। पंजाब के तरनतारन, फिरोजपुर, मलेरकोट, जालंधर और गुरदासपुर जैसे इलाकों से जुड़े आरोपित इस नेटवर्क की जमीनी कड़ी बने हुए थे। भारत में क्या हैं नियम आईटी एक्ट, 66E     निजी जगहों (बाथरूम/बेडरूम) की बिना अनुमति रिकार्डिंग, शेयरिंग पर कार्रवाई आईटी रुलज, 2011     फुटेज सुरक्षित रखना कैमरा लगाने वाले की जिम्मेदारी     आईटी एक्ट 2000     सीसीटीवी फुटेज डिजिटल डेटा, इसे सुरक्षित रखना जरूरी     आर्टिकल 21: निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, किसी के घर के अंदर निगरानी का नहीं सबसे बड़ी चुनौती सात कंपनियों के कैमरे सुरक्षित देश में फिलहाल 7 कंपनियों के 53 माडल ही एसटीक्यूसी सर्टिफाइड हैं। एसटीक्यूसी कैमरों को सर्टिफाइड करती है एसटीक्यूसी यानी स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन डायरेक्टोरेट भारत सरकार की एक संस्था है, जो इलेक्ट्रानिक और आई उत्पादों की क्वालिटी, सुरक्षा और भरोसेमंद होने की जांच करती है। यह आईटी मंत्रालय के तहत काम करती है। इस संस्थान का काम सीसीटीवी जैसे इलेक्ट्रानिक उत्पादों की टेस्टिंग, सॉफ्टवेयर और सिस्टम की क्वालिटी जांच, साइबर सिक्योरिटी और डेटा सुरक्षा की जांच करती है। घर-दुकान, संस्थान में सीसीटीवी लगा है तो नोटिस बोर्ड लगाना भी जरूरी – आप सीसीटीवी की निगरानी में हैं। अधिकतम 90 दिन तक फुटेज सेव रखना होता है। उसके बाद डिलीट कर सकते हैं। सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर डालना कानूनी अपराध है। सीसीटीवी पड़ोसी के घर की तरफ नहीं लगा सकते। यह निजता का उल्लंघन होगा। 1 अप्रैल से हैकिंगप्रूफ कैमरे ही बिकेंगे, जो सरकारी सुरक्षा जांच (एसटीक्यूसी सर्टिफिकेशन) पास करेंगे। भारत में 80 फीसदी कैमरे चीन के हैं, जिनसे डेटा चोरी का खतरा बना रहता है। फिलहाल 7 कंपनियों के 53 माडल ही ऐसे हैं जो सटिफाइड है। अब तक पंजाब के यह जासूस पकडे़ गए मनप्रीत सिंह (तरनतारन), अनमोल (फिरोजपुर), साहिल (फिरोजपुर), गुरजीत सिंह (कपूरथला), रिंपलदीप सिंह (फाजिल्का), सलविंदर सिंह उर्फ कालू (फाजिल्का), बूटा सिंह (फाजिल्का), हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी (मोगा) शामिल है। आपरेशन सिंदूर के बाद जालंधर से मोहम्मद मुर्तजा अली, सुख्रपीत सिंह गुरदासपुर पंजाब, करनबीर सिंह गुरदासपुर, यामीन माेहम्मद मलेरलकोटला को गिरफ्तार किया गया था।