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पंजाब में कोहरे और लो-विजिबिलिटी की मार झेल रही जनता

जालंधर. जालंधर महानगर में घना कोहरा पड़ने की वजह से विजिबिलिटी भी 30 मीटर से भी कम है। ऐसे में वाहन चालकों को परेशानी आ रही है। इसके साथ-साथ सर्द हवाएं चलने की वजह से ठंडक ज्यादा बढ़ गई है। मौसम विभाग की तरफ से दिन निकलने के साथ ही मौसम पूरी तरह से साफ हो जाएगा और धूप निकलने से तापमान में वृद्धि भी दर्ज की जाएगी। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया है कि फरवरी महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक और वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, विशेषकर उत्तर-पश्चिम भारत में, जिसमें पंजाब भी शामिल है। इस सूचना के बाद कृषि विशेषज्ञों और किसानों में फसलों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसम रबी फसलों, विशेषकर गेहूं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। फरवरी में गेहूं की बल्ली में दाना बनना शुरू होता है और इस समय यह दूध जैसे तरल पदार्थ के रूप में होता है। यदि तापमान औसत से अधिक रहा, तो यह दाना सूख सकता है, जिससे दाने का आकार छोटा होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि ऐसा हुआ, तो यह चौथी बार होगा जब पंजाब के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पिछले वर्ष भी फरवरी में गर्मी के कारण गेहूं की पैदावार में कमी आई थी, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।

पूर्व मंत्री मनजीत मन्ना को मारपीट मामले में कोर्ट ने किया भगौड़ा घोषित

चंडीगढ़. अकाली-भाजपा सरकार के दौरान विधायक व मंत्री रह चुके मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह को भगौड़ा घोषित कर दिया गया है। यह फैसला 2015 के एक मारपीट मामले में अदालत में पेश न होने के कारण आया। पीड़ित पूरन सिंह ने राजनीतिक प्रभाव के बावजूद न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद अदालत ने यह सख्त कदम उठाया। जानकारी के मुताबिक, 18 सितंबर 2015 को अकाली सरकार के दौरान एक नॉन-कस्टोडियल केस में विवाद होने के बाद, उस समय के अकाली विधायक मनजीत सिंह मन्ना और उनके भाई रणजीत सिंह ने अपने समर्थकों संग अपनी ही पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता पूरन सिंह को बुरी तरह पीटा था। आरोप यह भी लगे थे कि उन्होंने पीड़ित पर तेजधार हथियारों से हमला किया था और उसकी पगड़ी उतार दी थी। इसके बाद विधायक और उसके साथियों के अत्याचार का शिकार हुए पूरन सिंह के बेटे ने इस घटना की जानकारी थाने में दी। उन्होंने मारपीट के बारे में मेडिकल जांच करवाने की मांग की, लेकिन उस समय पुलिस ने पूरन सिंह की एक नहीं सुनी। पीड़ित के बेटे ने इस बारे में पंजाब पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी शिकायत दी, जिसका नंबर एएमआर-आरआर 814229 तारीख 18 सितंबर 2015 है। हरदीप सिंह ने पूरन सिंह को गुरु नानक देव अस्पताल अमृतसर में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज हुआ और डॉक्टर ने पूरन सिंह की मेडिकल रिपोर्ट बनाकर उसे थाना खलचिया भेज दिया। पीड़ित ने इस मामले की जानकारी पुलिस के बड़े अधिकारियों को दी, लेकिन आरोपियों के राजनीतिक अप्रोच के कारण पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित पूरन सिंह ने वकील वीके जसवाल के जरिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब की अदालत में 156 (3) सीआरपीसी के तहत शिकायत दी, जिसमें थाना खलचिया को आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश देने की गुहार लगाई गई, लेकिन जज ने इस शिकायत को केस में बदल दिया। इस केस में जज ने शिकायतकर्ता, मौके पर मौजूद गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट के बारे में डॉक्टरों और पुलिस को दी गई शिकायत के बारे में सरकारी गवाहों समेत कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए और वकील वीके जसवाल की दलीलों से सहमत हुए। इस बीच रंजीवपाल सिंह चीमा, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बाबा बकाला साहिब ने 12 जुलाई 2019 को सभी आरोपियों को धारा 326,324,323,341,148,149 के तहत समन जारी किए और सभी आरोपियों को 8 अगस्त 2019 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया। इस केस में मनजीत सिंह मन्ना के पर्सनल असिस्टेंट हरप्रीत सिंह और बलदेव सिंह के वकील मनिंदरजीत सिंह गहरी खुद पेश हुए, लेकिन बाकी आरोपियों ने केस को आज तक पेंडिंग रखा और कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज़ करते हुए कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर जज रमनदीप कौर ज्यूडिशियल, मजिस्ट्रेट बाबा बकाला ने 29 जुलाई 2025 को आरोपी पूर्व विधायक मनजीत सिंह मन्ना, उसके भाई रणजीत सिंह और एक साथी हरजीत सिंह के लिए पुलिस को अरेस्ट वारंट जारी किए और उन्हें 12 जून 2025 को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। लेकिन मनजीत सिंह मन्ना और उसका भाई हरजीत सिंह जानबूझकर कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिस पर जज रमनदीप कौर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जूनियर डिवीज़न बाबा बकाला ने 31 जनवरी 2026 को उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया और इस बारे में थाना मुखी खिलचिया को भी सूचित कर दिया गया है। जज ने बाकी आरोपियों के खिलाफ गवाही के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है।

दिव्यांगों को सरकारी दफ्तरों में सुलभता की केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं

चंडीगढ़. केंद्र सरकार के पास चंडीगढ़ में सरकारी कार्यालयों की दिव्यांगजनों के लिए सुलभता का पूरा डेटा उपलब्ध नहीं है। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। चंडीगढ़ में पिछले दो वर्षों में 330 श्रवण यंत्र बांटे गए और दो बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट हुआ। शिकायत निवारण के लिए मोबाइल ऐप और सहायता केंद्र उपलब्ध हैं, साथ ही उपकरणों की गुणवत्ता और वारंटी सुनिश्चित की जाती है। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लोकसभा में सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी। राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सरकारी भवनों, परिवहन व्यवस्था और सूचना प्रणाली को सुलभ बनाना राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की जिम्मेदारी है। इसी कारण चंडीगढ़ में कितने सरकारी कार्यालयों में रैंप, दिव्यांग शौचालय, संकेतक, लो काउंटर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसका कोई केंद्रीय स्तर पर संकलित आंकड़ा नहीं रखा जाता। मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार दिव्यांगों के लिए बाधारहित वातावरण के निर्माण हेतु राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मांग के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसके लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ी विशेष योजना के तहत अनुदान दिया जाता है। श्रवण सहायक उपकरणों की स्थिति पर सरकार ने बताया कि दिव्यांगों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की योजना के अंतर्गत चंडीगढ़ में पिछले दो वर्षों के दौरान 330 श्रवण यंत्र वितरित किए गए हैं। इसके अलावा दो बच्चों में कॉक्लियर प्रत्यारोपण कराया गया है। मंत्री ने कहा कि योजना के तहत लाभ पाने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य है। निर्धारित आय सीमा तक के लाभार्थियों को पूर्ण आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि अधिक आय वर्ग के लिए आंशिक सहायता का प्रावधान है। बच्चों के कॉक्लियर प्रत्यारोपण पर उपचार, जांच, यात्रा और पुनर्वास सहित सहायता दी जाती है। सरकारी कार्यालयों और सहायक उपकरणों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए नागरिकों को मोबाइल अनुप्रयोग, टोल फ्री सेवा और सार्वजनिक शिकायत प्रणाली के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी गई है। चंडीगढ़ में दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता केंद्र भी संचालित किया जा रहा है, जहां उपकरणों की मरम्मत और शिकायतों का निस्तारण किया जाता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगों को उपलब्ध कराए जाने वाले सभी सहायक उपकरण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होते हैं और इनके साथ न्यूनतम एक वर्ष की वारंटी दी जाती है, ताकि समय पर मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित हो सके।

पंजाब के जलशक्ति मंत्री बोले- 57 फीसदी कुओं में बढ़ा भूमिगत जलस्तर

बठिंडा. पंजाब में मानसून के बाद की अवधि में किए गए विश्लेषण के मुताबिक, 185 कुओं में से, 106 में यानी करीब 57 फीसदी (कुओं) में भूजल स्तर में 0 से 4 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 78 कुओं (42.2%) में पानी के स्तर में 4 मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई। एक कुएं में कोई बदलाव नहीं हुआ। जल शक्ति राज्य मंत्री, राज भूषण चौधरी ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। मंत्री पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। फाजिला में भूजल स्तर में सबसे अधिक बढ़ोतरी मंत्री ने जवाब दिया कि फाजिल्का में भूजल स्तर में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि जिले में विश्लेषण किए गए सभी 10 कुओं में वृद्धि दर्ज की गई। इस बीच, होशियारपुर में विश्लेषण किए गए 19 में से 10 कुओं में पानी के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। रोपड़ में भी 100 फीसदी कुओं में वृद्धि दर्ज की गई, क्योंकि विश्लेषण किए गए सभी सात कुओं में पानी के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक कमी बठिंडा में दर्ज की गई, जहां विश्लेषण किए गए 17 में से 13 कुओं में गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद फरीदकोट में 13 में से नौ कुओं में गिरावट दर्ज की गई। लुधियाना में, विश्लेषण किए गए नौ में से आठ कुओं में गिरावट दर्ज की गई, जबकि पटियाला में, विश्लेषण किए गए 12 में से आठ कुओं में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। 106 कुओं में बढ़ोतरी देखी गई चौधरी ने कहा कि 106 कुओं में से जिनमें वृद्धि दर्ज की गई, 80 में 0 से 2 मीटर की वृद्धि देखी गई, 17 में 2 से 4 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नौ कुओं में दशक में 4 मीटर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 78 कुओं में से जिनमें गिरावट दर्ज की गई, 38 में 0 से 2 मीटर की गिरावट दर्ज की गई, 17 में 2 से 4 मीटर के बीच गिरावट और 23 कुओं में दशक में 4 मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मंत्री ने बताया कि भूजल स्तर में लंबे समय के उतार-चढ़ाव का आकलन करने के लिए, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड द्वारा पंजाब के लिए मानसून के बाद (2025) इकट्ठा किए गए पानी के स्तर के डेटा की तुलना 2015 से 2024 तक मानसून के बाद के स्तरों के दस साल के औसत (2015 से 2024 तक नवंबर का डेटा) से की गई।

आज बेल पर बाहर आएंगे बिक्रम मजीठिया

लुधियाना/नाभा. पंजाब के पूर्व मंत्री और सीनियर अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया आज नाभा जेल से बाहर आएंगे। यह जानकारी उनकी पत्नी गनीव कौर मजीठिया ने सोमवार शाम को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की। बिक्रम मजीठिया को कल सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी, जिसके बाद आज वह नाभा जेल से रिहा हो जाएंगे। गौरतलब है कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोप में कार्रवाई करते हुए 25 जून को उन्हें गिरफ्तार किया था। दिसंबर 2025 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। इस वजह से उन्हें लगातार जेल में रहना पड़ा। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से अकाली दल खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है। मजीठिया के समर्थक नाभा जेल के बाहर उनके स्वागत की बड़ी तैयारी कर रहे हैं।

पंजाब में एग्जाम के बीच मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की ड्यूटी से टीचर्स नाराज

लुधियाना/तरनतारन. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कार्ड बनाने का काम शिक्षकों से करवाए जाने के विरोध में कंप्यूटर टीचर्स यूनियन, पंजाब ने मोर्चा खोल दिया है। कंप्यूटर टीचरों का एक डेलीगेशन, जिला प्रधान शीतल सिंह और प्रदेश प्रधान गुरविंदर सिंह की लीडरशिप में ए.डी.सी. (ज) राजदीप सिंह बराड़ तरनतारन से कंप्यूटर टीचरों की नॉन-एकेडमिक कामों में लगाई गई ड्यूटी के बारे में मिला। इसमें शीतल सिंह ने कहा कि डी.सी. ऑफिस तरनतारन ने कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड बनाने में लगाई है, जबकि मुख्यमंत्री ने सरकार बनने के बाद कहा था कि किसी भी टीचर की ड्यूटी किसी भी नॉन-एकेडमिक काम में नहीं लगाई जाएगी, लेकिन डी.सी. ऑफिस ने मुख्यमंत्री के बयान का उल्लंघन करते हुए कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड बनाने में लगा दी है।  वहीं इस काम में इस्तेमाल के लिए सरकारी स्कूलों से कंप्यूटर सेट और प्रिंटर भी मांगें जा रहे हैं, जबकि यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इन कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड ने 10वीं/12वीं के प्रैक्टिकल एग्जाम में भी लगाई है और कंप्यूटर सेट और प्रिंटर का इस्तेमाल भी स्टूडैंट्स के प्रैक्टिकल लेने के लिए किया जाना है, इसलिए तरनतारन के सभी जिलों के कंप्यूटर टीचरों ने डी सी ऑफिस तरनतारन से पुरजोर मांग की है कि इन ड्यूटी को तुरंत कैंसिल किया जाए और स्कूलों से हार्डवेयर न मंगवाया जाए। उन्होने कहा कि जब तक ड्यूटी कैंसिल नहीं होती, तब तक तरनतारन जिले के सभी कंप्यूटर टीचरों ने इन ड्यूटी का बायकॉट करने का ऐलान किया है। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष गुरविंदर सिंह ने कहा कि सरकार कोई भी फायदा देते समय कंप्यूटर टीचरों को भूल जाती है, लेकिन गैर-पढ़ाई वाले कामों के लिए सबसे पहले कंप्यूटर टीचरों की ड्यूटी लगाई जाती है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बॉर्डर एरिया में काम करने वाले टीचरों को दिया गया स्पेशल इंक्रीमैंट भी कंप्यूटर टीचरों को अभी तक नहीं दिया गया है। इस मौके पर मनी, कुमार गौरव, परविंदर सिंह, अजयपाल सिंह, पवन कुमार करनजीत सिंह, हरप्रीत सिंह आदि मौजूद थे।

पंजाब में हल्की वर्षा के बाद बढ़ा घना कोहरा

लुधियाना. पंजाब के तीन जिलों में हल्की वर्षा दर्ज की गई, जबकि अन्य सभी जिलों में धूप खिली रही। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार रविवार मध्यरात्रि से सोमवार सुबह पांच बजे के दौरान रूपनगर में चार मिलीमीटर, पठानकोट में 12 व मानसा में 0.5 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। विभाग के अनुसार बठिंडा में न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री रहा। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को पंजाब के अधिकांश जिलों में घनी धुंध पड़ सकती है। पंजाब के जीरकपुर सहित कई इलाकों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे सुबह-सुबह यातायात बाधित हो सकता है। कहां कितना रहा तापमान मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार फरीदकोट में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जोकि पंजाब में सबसे कम था। बठिंडा में न्यूनतम तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं लुधियाना में 5.4 डिग्री सेल्सियस, गुरदासपुर में 6.0 डिग्री सेल्सियस, एसबीएस नगर में 6.8 डिग्री सेल्सियस, पटियाला में 5.8 डिग्री सेल्सियस, अमृतसर में 6.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

बजट सत्र में शामिल नहीं हो पाएगा अमृतपाल सिंह

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को अस्थायी रिहाई देने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के हित सर्वोपरि हैं। ऐसे में उसे रिहाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। अमृतपाल ने बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गृह विभाग ने सोमवार को अमृतपाल की अर्जी खारिज कर दी। सरकार ने कहा कि हिरासत में रहते संसद सत्र में भाग लेना कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। 23 फरवरी 2023 को थाना अजनाला में खालिस्तानी समर्थक व सांसद अमृतपाल सिंह ने अपने साथी को छुड़वाने के लिए हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी जुगराज सिंह, एएसआइ जतिंदर सिंह, पुलिस होमगार्ड का जवान सुरजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। थाना अजनाला की पुलिस ने अमृतपाल सिंह सहित 19 लोगों का बायनेम व 250 के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद पंजाब सरकार की ओर से इन पर एनएसए लगाया गया था और इन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया था। खडूर साहिब सीट से बना सांसद पिछले साल लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लिया और यहां से वह सांसद चुना गया।

पंजाब को बजट में झटका? सुखबीर बादल बोले – AAP की विफल नीतियों का नतीजा

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार की राज्य के हकों की सही तरीके से वकालत करने में पूरी तरह नाकामी रहने के कारण पंजाब को यूनियन बजट में कुछ नहीं मिला। ये विचार शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और पंजाब के पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुखबीर सिंह बादल ने केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहे।   सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब को न तो कोई स्पेशल पैकेज मिला, न ही कोई बड़ा नया प्रोजेक्ट और न ही हमारे किसानों, व्यापारियों, इंडस्ट्री, युवाओं या बॉर्डर एरिया के लिए कोई नई योजना का एलान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल जी का दौर याद कीजिए, उन्होंने हर प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह समेत) के सामने पंजाब का पक्ष और हक मजबूती से रखा और राज्य के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट लाए। उन्होंने पंजाब का पक्ष दमदार तरीके से रखा, और AIIMS, रिफाइनरी, IIM, IIT, और 4/6-लेन नेशनल हाईवे समेत बड़े प्रोजेक्ट लेकर आए। सुखबीर ने कहा कि पंजाब को मजबूत लीडरशिप की जरूरत है जो अपने लोगों के लिए लड़े- न कि ऐसे जो सिर्फ बहाने बनाते रहें।

राजा वड़िंग का तीखा हमला: बोले– मैडम सिद्धू को करवाना चाहिए मानसिक उपचार

पंजाब पंजाब की राजनीति में एक बार फिर मैडम सिद्धू को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस और मैडम सिद्धू के बीच बयानबाज़ी अब तीखे आरोप-प्रत्यारोप में बदलती नजर आ रही है। कांग्रेस प्रदेश प्रधान राजा वडिंग ने मैडम सिद्धू पर सीधा और कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि नवजोत कौर सिद्धू को मानसिक इलाज की जरूरत है। राजा वडिंग ने अपने बयान में कहा कि जब किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक न हो, तो उसकी बातों को गंभीरता से लेने या उस पर गुस्सा करने का कोई मतलब नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति पार्टी में ही नहीं है, वह कांग्रेस से इस्तीफा कैसे दे सकता है। राजा वडिंग के मुताबिक, मैडम सिद्धू को तो पहले ही कांग्रेस से बाहर किया जा चुका था, ऐसे में उनके इस्तीफे का कोई औचित्य नहीं बनता। दरअसल, पूरा विवाद शनिवार को तब शुरू हुआ जब मैडम सिद्धू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया। इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई और इसे कांग्रेस के भीतर एक नए विवाद के रूप में देखा जाने लगा। राजा वडिंग ने आगे कहा कि मैडम सिद्धू के बयान केवल सुर्खियों में बने रहने की कोशिश हैं और कांग्रेस को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी ऐसे बयानों से न तो डरती है और न ही विचलित होती है।   वहीं दूसरी ओर, मैडम सिद्धू भी अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाती है, तो नवजोत सिद्धू कांग्रेस में जरूर वापस लौटेंगे। उनके इस बयान ने एक बार फिर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है और पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुल मिलाकर, मैडम सिद्धू को लेकर छिड़ा यह सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या यह बयानबाज़ी पार्टी की राजनीति पर कोई बड़ा असर डालती है या नहीं।