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पंजाब में CM रेस पर सिद्धू का बड़ा बयान, नवजोत कौर की गवर्नर से मुलाकात से अटकलें तेज

चंडीगढ़। कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के भीतर ही पांच नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं और वे अपनी ही पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने नवजोत सिंह सिद्धू की पार्टी में वर्तमान स्थिति और भविष्य को लेकर चौंकाने वाले बयान दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "पांच नेता पहले से ही मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं, जो अपनी ही पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं।" उनकी यह टिप्पणी पंजाब कांग्रेस में प्रमुख नेताओं के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष और गुटबाजी को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि नवजोत सिद्धू भावनात्मक रूप से कांग्रेस और प्रियंका गांधी से जुड़े हुए हैं, लेकिन भारी गुटबाजी के कारण उन्हें कोई भूमिका नहीं मिलेगी। उन्होंने सिद्धू के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर कोई पार्टी हमें कोई भूमिका देती है, तो हम पंजाब को फिर से सोना बना सकते हैं। अगर कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री बनाती है तो वह वापस लौट आएंगे। अन्यथा वह जीवन में खुश हैं।" नवजोत कौर सिद्धू ने चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से अपनी मुलाकात के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तथाकथित VVIPs ने शिवालिक रेंज में बड़े पैमाने पर जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि सुनने में आया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इसे वैध बनाने जा रहे हैं, जो वह नहीं कर सकते, क्योंकि यह जमीन सरकार की है। उनका दूसरा मुद्दा कानून व्यवस्था से संबंधित था, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। तीसरा मुद्दा पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंधित था। उनका चौथा बिंदु यह था कि नए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा जाना चाहिए।  

टैक्स चोरों पर गिरी गाज: CGST की नई मुहिम शुरू, बड़े खुलासों के संकेत

लुधियाना सैंट्रल जी.एस.टी. विभाग ने कर चोरी को रोकने और सरकारी राजस्व की रिकवरी को सुनिश्चित करने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए नई कार्रवाई शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, विभाग ने साफ कर दिया है कि बोगस फर्में बनाकर फर्जी बिलिंग करने और करोड़ों रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रैडिट (आई.टी.सी.) लेने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।  जानकारी मिली है कि विभाग ने सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए सीजी.एस.टी. एक्ट की धारा-83 के तहत टैक्स चोरी में शामिल करदाताओं की बैंक खाते व संपत्तियों को अटैच करना शुरू कर दिया है। अब तक कई मामलों में करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी अटैच की जा चुकी है और आने वाले दिनों में और भी मामलों में कार्रवाई की तैयारी है। विभाग का मानना है कि ऐसे कदम सरकारी राजस्व को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक हैं। नई नेतृत्वकारी व्यवस्था से बढ़ी कार्रवाई की गति बताया जा रहा है कि सैंट्रल जी.एस.टी. विभाग में नए प्रिंसीपल कमिश्नर के पदभार संभालने के बाद यह सख्त कार्रवाई संभव हो पाई है। सूत्रों का कहना है कि नए कमिश्नर का रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा है और वे टैक्स चोरी के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतते। उनका स्पष्ट मानना है कि विभाग अब टैक्स चोरी के खिलाफ किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हटेगा। 

पंजाब में आंदोलन की आहट: 14 गांवों की पंचायतों ने किया रोड जाम का ऐलान, 10 दिसंबर को ठप रहेगा यातायात

मोहाली  नगर निगम की सीमाओं के विस्तार के फैसले के विरोध में 14 गांवों की पंचायतों ने गांव मौली बैदवाण में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा ऐलान किया। पंचायतों ने साफ कहा कि सरकार ने पंचायतों से बिना सलाह लिए गांवों को निगम में शामिल कर एक तानाशाही आदेश जारी किया है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार नोटिफिकेशन वापस नहीं लेती, तो वे 10 दिसंबर को हलके के सभी गांवों की पंचायतों को साथ लेकर एयरपोर्ट रोड जाम करेंगे। उन्होंने जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने का भी फैसला किया। पंचायतों ने आरोप लगाया कि निगम में शामिल होने से गांवों पर अनावश्यक टैक्सों का बोझ बढ़ेगा और ग्रामीण बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। सरपंचों ने कहा कि विकास के नाम पर गांवों की जमीन और अधिकार छीने जा रहे हैं। यदि गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया, तो घर टैक्स, पानी और सीवरेज टैक्स का सीधा बोझ गांववासियों की जेबों पर पड़ेगा। अभी तक पंचायतों द्वारा दी जाने वाली कई सेवाएं मुफ्त या बेहद कम कीमत पर मिलती थीं, लेकिन निगम क्षेत्र में शामिल होने के बाद पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और सफाई शुल्क काफी बढ़ जाएंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मटौर गांव को 30 साल पहले नगर निगम में शामिल किया गया था, लेकिन आज भी वहां सफाई व्यवस्था खराब है, कई इलाकों में सीवरेज ओवरफ्लो होता है और बरसाती पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। अन्य गांवों में भी यही स्थिति है। सरपंचों ने कहा कि गांवों के लोग डेयरी फार्मिंग से अपना घर चलाते हैं, लेकिन निगम क्षेत्र में शामिल होने के बाद पशु रखने पर रोक लग जाएगी, जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी। आजादी के 7 दशक बाद भी कई गांवों में कच्चे घर हैं। पंचायत की ओर से उन्हें घर बनाने के लिए मिलने वाली ग्रांट भी निगम में शामिल होने के बाद बंद हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गांवों को अपने साथ जोड़कर करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा करना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। इसी संबंध में वे विधायक कुलवंत सिंह से भी मिले, जिन्होंने आश्वासन दिया कि 2 दिनों में मसले का समाधान किया जाएगा, अन्यथा पंचायतें अदालत जाएंगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौली बैदवाण के सरपंच गुरसेवक सिंह, संभालकी के गौरव शर्मा, बल्लोमाजरा के गुरजिंदर सिंह, नानूमाजरा के संदीप सिंह, बलौंकी के सतनाम सिंह, चप्पड़चिड़ी कलां के जस्स हुंदल, चिल्ला के अमेरिक सिंह, रुड़का की किरणदीप कौर, चप्पड़चिड़ी खुर्द की हरजीत कौर, लांडरा के जसप्रीत सिंह, कम्बाला के अजीत संधू, लखनौर की कुलदीप कौर और नानूमाजरा के पलविंदर सिंह मौजूद थे। 

पंजाब को आर्थिक संजीवनी? AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने केंद्र से मांगा ₹50 हजार करोड़ का पैकेज

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद केंद्र की BJP सरकार द्वारा की जा रही घोर उपेक्षा और भेदभाव को संसद में बेनकाब किया है। AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने बुधवार को लोकसभा सत्र के दौरान पंजाब में हुए भारी नुकसान का मुद्दा उठाया और BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल ₹50,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की। आनंदपुर साहिब से सांसद कंग ने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित छह जिलों के 2,500 गाँवों को दो महीने बीत जाने के बाद भी केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है। सांसद कंग ने सदन को बताया कि कुछ महीने पहले पंजाब में आई भयंकर बाढ़ ने लगभग 2,500 गाँवों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और 5 लाख एकड़ से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे गंभीर असर सीमावर्ती (बॉर्डर) जिलों में पड़ा, और याद दिलाया कि ये वही जिले हैं जिनके लोगों ने 'ऑपरेशन संदूर' के दौरान भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की लड़ाई लड़ी थी। कंग ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और भारत सरकार के तमाम मंत्री बाढ़ के बाद पंजाब का दौरा करने आए, लेकिन दो महीने बाद भी इन छह जिलों के लोगों को दोबारा पैरों पर खड़ा करने के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्र की दोहरी नीति पर सवाल उठाया: "जब बिहार में चुनाव होते हैं तो आप ₹50,000 करोड़, ₹70,000 करोड़ और यहाँ तक कि ₹90,000 करोड़ के पैकेज की बोलियाँ लगाते हैं।" उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब, जिसने देश की आज़ादी की लड़ाई में और देश के अन्न भंडार को भरने में सबसे बड़ा योगदान दिया, उसे संकट के समय अकेला छोड़ दिया गया है। उन्होंने इसे "सबसे बड़ा भेदभाव" बताया और इसके लिए BJP सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सांसद कंग ने हरियाणा और राजस्थान की सरकारों की भी आलोचना की, जो पंजाब के पानी का हिस्सा मांगती हैं, लेकिन आपदा के इस समय में पंजाब का साथ देने में विफल रहीं। AAP सांसद ने BJP सरकार से तत्काल ₹50,000 करोड़ का विशेष पैकेज जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह राशि पंजाब के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए, जिनके घर, अस्पताल, सड़कें और पूरा बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया है, और जिनकी 5 लाख एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं हैं, बेहद ज़रूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फंड खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने और खुद का पुनर्वास करने में मदद करेगा, जो राष्ट्र के लिए लड़ते हैं। AAP सरकार इस अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और केंद्र को पंजाब का हक़ देना ही होगा।

राजभवन की नई पहचान: पंजाब में बदला नाम, अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाना जाएगा

चंडीगढ़ पंजाब के राजभवन को अब से लोक भवन पंजाब के नाम से जाना जाएगा। मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स की ओर से पंजाब राजभवन को नाम बदलने को लेकर 25 नवंबर को पत्र प्राप्त हुआ था। राज्यपाल  गुलाब चंद कटारिया ने “राज भवन” से “लोक भवन” में देशभर में हो रहे परिवर्तन का स्वागत किया. प्रिंसिपल सेक्रेटरी टू गवर्नर पंजाब विवेक प्रताप सिंह की ओर से इस संबंध में वीरवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब राजभवन में आयोजित कई राज्यों के स्थापना दिवस समारोह में भी इस बदलाव को लेकर मेहमानों को जानकारी दी थी। केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास सहित कुछ अन्य आवास के नाम बदलने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद ही पंजाब राजभवन को लोक भवन पंजाब नाम दिया गया है। लोक भवन पंजाब, चंडीगढ़ में वीरवार शाम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” पहल के तहत उत्तराखंड, झारखंड, असम और नागालैंड का स्थापना दिवस मनाया गया। राज्यपाल  गुलाब चंद कटारिया ने “राज भवन” से “लोक भवन” में देशभर में हो रहे परिवर्तन का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ऐसा नामकरण भारत की लोकतांत्रिक भावना और जनता की भागीदारी की आत्मा को दर्शाता है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की 562 रियासतों के एकीकरण और भारत को विभाजित करने की औपनिवेशिक साजिशों को विफल करने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया।    

क्या खत्म होगी मुफ्त बिजली की सुविधा? 8 दिसंबर को सरकार का अहम ऐलान

गुरदासपुर  संयुक्त किसान मोर्चा, पावर कॉम संगठन और मजदूर संगठन 8 दिसम्बर को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पावर कॉम के सब-डिवीजन ऑफिस के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे और बिजली संशोधन बिल की कॉपियां जलाएंगे। इस संबंध में शहीद बलजीत सिंह भवन गुरदासपुर में संयुक्त किसान मोर्चा और पावर कॉम और मजदूर संगठनों के निमंत्रण पर एक बड़ी तैयारी बैठक हुई। जिसमें सभी किसान, मजदूर और बिजली कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने भाग लिया। इसकी अध्यक्षता किसान नेता गुरदीप सिंह मुस्तफाबाद और पावर कॉम संगठन नेता बलपुरियां ने संयुक्त रूप से की। मीटिंग को संबोधित करते हुए मक्खन सिंह कोहाड़ (डेमोक्रेटिक किसान सभा), सुखदेव सिंह भागोकावां (पंजाब किसान यूनियन), तरलोक सिंह बहरामपुर (किरती किसान यूनियन), लखविंदर सिंह मंजियांवली (बीकेयू उगराहां), मंगत सिंह जीवन चक (बीकेयू डकौंदा), जगजीत सिंह अलूना (कुल हिंद किसान सभा), राज गुरविंदर सिंह लाडी (क्रांतिकारी किसान यूनियन), अजीत सिंह हुंदल, बच्चा सिंह भबोई, गुरमुख सिंह खैरा, अश्वनी कुमार लखन कलां, लेबर लीडर राज कुमार कुमार पंडोरी, ध्यान सिंह ठाकुर, बलविंदर सिंह उदीपुर, शिव कुमार, गुलजार सिंह भुंबली और बिजली कर्मचारी संगठनों के नेता मेजर सिंह बलपुरिया, सलविंदर सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि बिजली संशोधन बिल 2025 सभी लोगों के लिए बहुत खतरनाक है। केंद्र सरकार अपनी बनाई कमेटियों का फायदा उठाकर जनविरोधी नीतियां अपना रही है। केन्द्र सरकार की सभी नीतियां कॉरपोरेट सेक्टर के हक में हैं। अब उन्हें बिजली संशोधन बिल के जरिए बिजली के डिस्ट्रीब्यूशन को पूरी तरह से प्राइवेटाइज करना है। मोबाइल फोन की तरह पहले पैसे दो फिर प्रयोग करों की नीति अधीन बिजली संशोधन बिल अधीन हर मीटर में एक चिप लगाई जाएगी। सबसिडी पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। टयूबवैल वालों के मुफ्त बिजली की सुविधा भी खत्म कर दी जाएगी और टयूबवैलों पर भी मीटर लगाए जाएंगे। गरीबों को मिलने वाली मुफ्त बिजली सुविधा खत्म हो जाएगी। नेताओं ने कहा कि इस बिल को रोकना बहुत जरूरी है लेकिन यह बहुत अफसोस की बात है कि पंजाब सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है और बिल का विरोध करने के लिए कुछ नहीं कहा है जबकि पंजाब सरकार ने कहा था कि वह इसका विरोध करेंगी लेकिन वह चुप बैठी हैं। अगर पंजाब सरकार इस बिल के विरोध में असेंबली का स्पेशल सेशन नहीं बुलाती है और इसके विरोध में कोई प्रस्ताव पास नहीं करती है तो मान सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला जाएगा।   फैसले के मुताबिक, इस संबंध में पावर कॉम के सभी सब-डिवीजनों गुरदासपुर, बटाला, कलानौर, डेरा बाबा नानक, फतेहगढ़ चूडिय़ां, कादियां, श्री हरबिंदपुर, बहरामपुर, दीना नगर, जोड़ा छत्तरां, काहनूवान आदि में किसान, मजदूर, बिजली कर्मचारी और अन्य जनहित संगठन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक धरने देंगे और बिल की कॉपियां जलाएंगे। नेताओं ने सभी बिजली उपभोक्ताओं से इन धरनों और आने वाली बड़ी लड़ाई में शामिल होने की जोरदार अपील की। इस मौके पर उक्त के अलावा रघबीर सिंह चहल, गुरमीत सिंह थानेवाल, कुलजीत सिंह सिधवां जमीता, रणजीत सिंह राणा, रजिंदर सिंह सोना और बलप्रीत सिंह घराला, बलबीर सिंह और कई अन्य नेता भी मौजूद थे। एक प्रस्ताव के जरिए चार लेबर विरोधी कोड का विरोध किया गया, कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे अलग-अलग डिपार्टमेंट के कर्मचारियों के संघर्ष का समर्थन किया गया और लेबर ऑफिस को गुरदासपुर से बटाला शिफ्ट करने का कड़ा विरोध किया गया।

स्कूलों पर PSEB की सख्ती तेज, 10 दिसंबर तक जवाब न देने पर होगी कार्रवाई

लुधियाना  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पी.एस.ई.बी.) ने मार्च-2026 में होने वाली 10वीं और 12वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड ने राज्य के सभी स्कूलों की लॉगइन आई.डी. पर परीक्षा केंद्रों, उन्हें अलॉट किए गए बैंकों और उत्तर पुस्तिकाएं जमा करवाने वाले कलैक्शन सैंटर्स की विस्तृत जानकारी अपलोड कर दी है। बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जिन स्कूलों में परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, वहां के स्कूल प्रमुख ही बतौर 'सैंटर कंट्रोलर' पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे। परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्रों के सुरक्षित रखरखाव से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं को कलैक्शन सैंटर तक जमा करवाने की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं की होगी। यदि किसी स्कूल प्रमुख को अलॉट किए गए परीक्षा केंद्रों को लेकर कोई आपत्ति या समस्या है तो उन्हें 10 दिसम्बर तक अपना आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी (सैकेंडरी) के पास भेजना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 3 स्कूलों का विकल्प दर्ज करने और मंजूरी देने के बाद ही मुख्य दफ्तर में इस समस्या का समाधान किया जा सकेगा। संपर्क व्यवस्था को लेकर बोर्ड सख्त इस बार बोर्ड ने संपर्क व्यवस्था को लेकर विशेष सख्ती दिखाई है और पुराने अनुभवों से सबक लिया है। अक्सर देखा गया है कि बोर्ड के पास स्कूलों के पुराने नंबर ही दर्ज होते थे या कई बार प्रिंसीपल फोन नहीं उठाते थे जिससे परीक्षा के दौरान आपातकालीन स्थिति में बोर्ड को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इस संचार की कमी को दूर करने के लिए बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल लॉगइन आई.डी. में प्रोफाइल के अंदर फोन नंबर वाले कॉलम-1 में प्रिंसीपल और कॉलम-2 में मोस्ट सीनियर लैक्चरर या मास्टर का मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि प्रिंसीपल किसी कारणवश सम्पर्क में नहीं आते तो दूसरे जिम्मेदार अधिकारी से तुरंत बात हो सके। सभी स्कूल प्रमुखों को हिदायत दी गई है कि वे 10 दिसम्बर तक हर हाल में यह अपडेट और कार्रवाई पूरी करना सुनिश्चित करें, ताकि मार्च-2026 की परीक्षाएं बिना किसी बाधा के सम्पन्न हो सकें।

आदमपुर एयरपोर्ट ने भरी नई उड़ान, अब 90 यात्रियों की एक साथ होगी आवाजाही

जालंधर  आदमपुर हवाई अड्डे से पहली बार 90 सीटर चार्टर्ड फ्लाइट जयपुर के लिए रवाना हुई। यह अब तक की सबसे बड़ी क्षमता वाली चार्टर्ड फ्लाइट है, जिसमें एक साथ 90 यात्री यात्रा कर सकते हैं। फ्लाइट का संचालन स्पाइसजैट द्वारा किया गया। फ्लाइट दिल्ली से सुबह 7.40 बजे चली और 8.55 बजे आदमपुर पहुंची। इसके बाद यह 9.55 बजे जयपुर के लिए रवाना हो गई। फ्लाइट की ग्राऊंड हैंडलिंग त्रिकुटा ट्रैवल ने की। इस मौके पर एयरपोर्ट डायरैक्टर पुष्पेंद्र कुमार निराला ने बताया कि जुलाई से इंडिगो की आदमपुर–मुम्बई फ्लाइट शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अब आदमपुर से हिंडन, नांदेड़, बेंगलुरु और मुम्बई के लिए उड़ान सेवा उपलब्ध है, साथ ही एम्स्टर्डम, मैनचेस्टर और कोपेनहेगन के लिए कनैक्टिंग फ्लाइट की सुविधा भी मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हवाई अड्डा गैर-अनुसूचित फ्लाइटों के लिए 24 घंटे सेवा देने के लिए तैयार है। इस अवसर पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से अमित कुमार (सहायक महाप्रबंधक, सिविल), सूरज यादव (प्रबंधक, विद्युत), सूर्य प्रताप सिंह (कनिष्ठ कार्यपालक, ऑप्रेशन), मोहन पवार (मुख्य सुरक्षा अधिकारी) पंजाब पुलिस से डी.एस.पी. जसवंत कौर, त्रिकुटा ट्रैवल से जयवीर सिंह और जसप्रीत सिंह तथा स्टार एयर से अब्दुल लतीफ कलास (मैनेजर) और सौरभ कुमार (एयरलाइन मैनेजर, सुरक्षा) मौजूद थे। 

अब स्मार्ट बनेगा जालंधर ट्रैफिक: इन चौराहों पर लगेगा AI सिस्टम

जालंधर शहर के ट्रैफिक प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। नगर निगम ने पिम्स अस्पताल के सामने और छोटी बारादरी चौराहे पर एआई आधारित एडॉप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए पिम्स के सामने ट्रैफिक सिग्नल पर लगभग 14 लाख और छोटी बारादरी पर करीब 18 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। नई तकनीक सेंसर और इंटरनेट की मदद से वाहनों की संख्या का आकलन करके सिग्नल की टाइमिंग खुद तय करेगी। इससे खाली सड़क पर बेवजह लाल बत्ती पर रुकना नहीं पड़ेगा और एंबुलेंस को भी तेजी से रास्ता मिल सकेगा। सिस्टम real-time डेटा के आधार पर ट्रैफिक वॉल्यूम और स्पीड को मापकर सिग्नल के समय को लगातार एडजस्ट करेगा। बेंगलूरु में इसी तरह का सिस्टम 28 स्थानों पर सफलतापूर्वक चल रहा है, उसी मॉडल पर यह प्रोजेक्ट जालंधर में भी लागू होगा। जिला रोड सेफ्टी कमेटी के सदस्य सुरिंदर सिंह सेनी के अनुसार, संविधान चौक से वर्कशॉप चौक तक के छह प्रमुख चौराहों पर भी इस तकनीक की तुरंत जरूरत है। उनका कहना है कि सभी सिग्नल सिंक्रोनाइज हो जाएं तो यात्रा समय कम हो सकता है। 

75 साल बाद बड़ी सौगात: ब्रिटिश काल का अधूरा प्रोजेक्ट पूरा करेगा केंद्र, पंजाब को होगा फायदा

पंजाब  केंद्र सरकार पंजाब को एक बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने पंजाब में ब्रिटिश जमाने में शुरू हुए एक प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अधिकारियों को 40 km लंबे कादियां-ब्यास रेल लाइन प्रोजेक्ट को "डीफ़्रीज" करने और उस पर काम फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि यह प्रोजेक्ट पहले रोक दिया गया था, लेकिन अब केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बिट्टू ने इस मामले को उठाया है और इसे फिर से शुरू करने का फैसला किया है। बिट्टू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री वैष्णव पहले ही साफ कर चुके हैं कि पंजाब के रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है।  रवनीत सिंह बिट्टू ने अधिकारियों को सभी रुकावटों को दूर करने और कंस्ट्रक्शन का काम फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। यह नई रेल लाइन इलाके की स्टील सिटी के नाम से मशहूर बटाला की मुश्किलों से जूझ रही इंडस्ट्रियल यूनिट्स को काफ़ी बढ़ावा देगी। बिट्टू ने बताया कि नॉर्दर्न रेलवे के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (कंस्ट्रक्शन) की तरफ से एक लेटर जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि रेलवे बोर्ड इसे डीफ्रीज करेगा और इसका एस्टीमेट तुरंत पास करेगा और कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया जाएगा। ब्रिटिश काल में मंजूर हुआ था प्रोजेक्ट  मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि यह प्रोजेक्ट बहुत पुराना है। इसे सबसे पहले 1929 में ब्रिटिश सरकार ने मंजूरी दी थी और नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने इस पर काम शुरू किया था। 1932 तक करीब एक-तिहाई काम पूरा हो गया था, लेकिन अचानक प्रोजेक्ट रोक दिया गया। रेलवे ने इसे 2010 के रेल बजट में भी शामिल किया था, लेकिन प्लानिंग कमीशन की फाइनेंशियल चिंताओं के कारण काम एक बार फिर रोक दिया गया।