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Punjab News: आनंदपुर साहिब की हाइडल नहर में ओवरफ्लो, ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन ने शुरू की जांच

नंगल. श्री आनंदपुर साहिब में उस समय लोगों की चिंता बढ़ गई जब हाइडल नहर का पानी भनुपली साइफन के निकट अचानक ओवरफ्लो होकर बाहर निकलने लगा। नहर से पानी बाहर आने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों में हलचल मच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के अनुसार नहर के ढांचे को किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। घटना की जानकारी मिलते ही पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के सिविल विंग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। टीम ने तत्काल स्थिति का जायजा लेना शुरू किया और पानी के प्रवाह की निगरानी बढ़ा दी। विभागीय अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि साइफन क्षेत्र में जल प्रवाह के दौरान किसी प्रकार की रुकावट आने के कारण नहर का पानी निर्धारित मार्ग से बाहर निकलने लगा। हालांकि ओवरफ्लो की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच जारी है। विभागीय अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। पीएसपीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों के अनुसार नहर से पानी बाहर निकलने की सूचना फैलते ही ग्रामीणों में चिंता का माहौल बन गया। लोगों को आशंका थी कि यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। हालांकि मौके पर पहुंची टीम ने स्थिति को संभालते हुए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए। पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के सिविल विंग के कार्यकारी अभियंता इंजीनियर अविनाश शर्मा ने बताया कि विभाग के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं और ओवरफ्लो के कारणों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट उन्होंने यह भी बताया कि पानी के प्रवाह को सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि समस्या का जल्द समाधान कर नहर व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य किया जाए। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि नहरों और जलमार्गों में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक तथा अन्य अपशिष्ट सामग्री न फेंकें। ऐसे पदार्थ जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न करते हैं और कई बार ओवरफ्लो जैसी समस्याओं का कारण बन जाते हैं। विभाग ने कहा कि जन सहयोग से ही इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल विभागीय टीमें मौके पर तैनात हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ओवरफ्लो के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

पंजाब में यात्री परेशान, कर्मचारियों की हड़ताल से दोपहर बाद बंद हुईं सरकारी बस सेवाएं

चंडीगढ़  सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को आज बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन के आह्वान पर बुधवार दोपहर 12 बजे से बस सेवाओं को प्रभावित करते हुए प्रदेशभर में रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि हड़ताल में करीब आठ हजार कर्मचारी शामिल हैं। इसके चलते प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत सरकारी बस रूट प्रभावित हुआ है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले बसों की उपलब्धता की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब के वरिष्ठ उपप्रधान हरकेश कुमार विक्की ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही। निजीकरण का हो रहा विरोध उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों का लगातार निजीकरण किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो रहा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें जेल भेजने जैसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बसों की पर्याप्त खरीद नहीं हुई कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि पिछले चार वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परिवहन विभाग में नई सरकारी बसों की पर्याप्त खरीद नहीं की गई। साथ ही लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। इन मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलन के अगले चरण में 11 जून को मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास के बाहर धरना देने की भी घोषणा की गई है। लोग हो रहे परेशान हड़ताल के कारण दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। परिवहन सेवाओं पर निर्भर हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है। वहीं, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत को लेकर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और विवाद का समाधान निकल सके।  

बस सेवाओं पर बड़ा असर! पंजाब में कर्मचारियों की हड़ताल से 80 फीसदी रूट प्रभावित

चंडीगढ़. सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को आज बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन के आह्वान पर बुधवार दोपहर 12 बजे से बस सेवाओं को प्रभावित करते हुए प्रदेशभर में रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि हड़ताल में करीब आठ हजार कर्मचारी शामिल हैं। इसके चलते प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत सरकारी बस रूट प्रभावित हुआ है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले बसों की उपलब्धता की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब के वरिष्ठ उपप्रधान हरकेश कुमार विक्की ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही। निजीकरण का हो रहा विरोध उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों का लगातार निजीकरण किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो रहा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें जेल भेजने जैसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बसों की पर्याप्त खरीद नहीं हुई कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि पिछले चार वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परिवहन विभाग में नई सरकारी बसों की पर्याप्त खरीद नहीं की गई। साथ ही लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। इन मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलन के अगले चरण में 11 जून को मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास के बाहर धरना देने की भी घोषणा की गई है। लोग हो रहे परेशान हड़ताल के कारण दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। परिवहन सेवाओं पर निर्भर हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है। वहीं, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत को लेकर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और विवाद का समाधान निकल सके।

भाखड़ा डैम पर अलर्ट जारी, बढ़ते जलस्तर के बीच पंजाब-हरियाणा से पानी के अधिक उपयोग की अपील

चंडीगढ़. धान रोपाई सीजन के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब, हरियाणा समेत साझेदार राज्यों को भाखड़ा जलाशय से सिंचाई के लिए अधिक पानी उठाने की सलाह दी है। चंडीगढ़ में हुई बीबीएमबी की तकनीकी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में अधिकारियों ने राज्यों से उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग करने को कहा। बोर्ड का मानना है कि जलाशय में इस समय पानी का स्तर अपेक्षाकृत ऊंचा है और आने वाले दिनों में हिमपात के पिघलने तथा मानसून के कारण अतिरिक्त जल प्रवाह मिलने की संभावना भी बनी हुई है। बीबीएमबी के आंकड़ों के अनुसार 9 जून को भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 1,578.07 फीट दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष इसी दिन के 1,556.60 फीट की तुलना में 21.47 फीट अधिक है। यह स्तर इस अवधि के औसत 1,543.72 फीट से भी काफी ऊपर है। अधिकारियों ने क्या बताया? अधिकारियों ने बताया कि जलाशय अब पूर्ण जलस्तर से केवल 102 फीट नीचे है। ऐसे में भारी वर्षा या सतलुज बेसिन में अचानक बढ़ने वाले जल प्रवाह की स्थिति में अतिरिक्त भंडारण क्षमता सीमित रह जाएगी। वर्तमान में जलाशय में 1.75 अरब घन मीटर (बीसीएम) जीवित भंडारण उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 1.27 बीसीएम था। जलाशय की भराव क्षमता 31 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो 9 जून 2025 के 22 प्रतिशत और दीर्घकालिक औसत 18 प्रतिशत से काफी अधिक है। बैठक में यह भी सामने आया कि धान की रोपाई शुरू होने के बावजूद साझेदार राज्यों ने अभी तक अपने हिस्से का पानी अपेक्षित स्तर पर नहीं लिया है। फिलहाल भाखड़ा में 13,748 क्यूसेक पानी की आमद हो रही है, जबकि पिछले वर्ष इसी दिन यह 21,792 क्यूसेक थी। दूसरी ओर जलाशय से 20,763 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जो पिछले वर्ष के 30,528 क्यूसेक से कम है। बीबीएमबी ने राज्यों से सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आगामी मानसून के लिए जलाशय में पर्याप्त भंडारण क्षमता बनाए रखने पर जोर दिया।

पंजाब से 541 श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान रवाना, गुरु अर्जन देव शहीदी पर्व पर मिला वीजा

अमृतसर. पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का विशेष जत्था बुधवार को रवाना हो गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से भेजे गए इस जत्थे में 541 श्रद्धालु शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान सरकार की ओर से वीजा जारी किया गया है। श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के दौरान विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों में नतमस्तक होंगे और शहीदी पर्व से संबंधित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। जानकारी के अनुसार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इस यात्रा के लिए कुल 561 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास को भेजे थे। वीजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद 541 श्रद्धालुओं को अनुमति मिल गई, जबकि 20 श्रद्धालुओं को वीजा जारी नहीं किया गया। वीजा प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। 18 जून को होगा विशेष समागम धर्म प्रचार कमेटी के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल ने बताया कि गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के संबंध में पाकिस्तान में 18 जून को विशेष धार्मिक समागम आयोजित किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का जत्था रवाना किया गया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिख श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है, क्योंकि इससे उन्हें उन ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने का अवसर मिलता है जो सिख इतिहास और परंपरा से गहराई से जुड़े हुए हैं। जत्थे की रवानगी से पहले शिरोमणि कमेटी कार्यालय में अरदास की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब के जयकारे लगाए और पूरी श्रद्धा के साथ यात्रा की शुरुआत की। धार्मिक वातावरण के बीच रवाना हुए श्रद्धालुओं ने यात्रा को अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया। 19 जून को होगी जत्थे की वापसी यात्रा के दौरान श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेकेंगे और वहां आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। शहीदी पर्व के अवसर पर होने वाले कीर्तन, गुरबाणी पाठ और अन्य धार्मिक आयोजनों में भी उनकी सहभागिता रहेगी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अनुसार यह जत्था 19 जून को भारत वापस लौटेगा। यात्रा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध पहले ही पूरे कर लिए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। शहीदी पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है।

चुनाव से पहले सियासी हलचल, क्या कैप्टन की घर वापसी बदल देगी पंजाब का राजनीतिक समीकरण?

चंडीगढ़ पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. शिरोमणि अकाली दल के भीतर मचे घमासान और भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संघर्ष के बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पंजाब की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं. हालांकि, इस खबर के बीच शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात हुई है. कैप्टन सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अमर सिंह के एक बयान ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।  चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की संभावना पर बेहद सधा हुआ और गंभीर बयान दिया. उन्होंने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और पार्टी सहित सरकार में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हम उनके सामने काफी जूनियर हैं. इसलिए, अगर उनकी वापसी या इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा की आवश्यकता है, तो उसे सीधे हमारा शीर्ष नेतृत्व ही हैंडल करेगा.” सांसद अमर सिंह का यह बयान साफ इशारा करता है कि कैप्टन की वापसी की फाइल अब सीधे दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंच चुकी है।  पंजाब विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर? अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी औपचारिक रूप से हो जाती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पूरी बिसात ही बदल जाएगी. साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह अपमानजनक ढंग से कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और उसके बाद कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, उस गलती को सुधारने का मौका अब पार्टी के पास होगा।  हिंदू और सिख वोट बैंक का अनूठा समन्वय कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के इकलौते ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ सिखों के साथ-साथ राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं पर भी समान रूप से मजबूत है।  जमीनी कैडर में नया जोश: नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य प्रांतीय नेताओं की आपसी कलह के कारण जो पारंपरिक कांग्रेस कार्यकर्ता आज घर बैठा है या उदासीन है, कैप्टन का नाम सामने आते ही वह दोबारा सड़कों पर सक्रिय हो जाएगा।  राष्ट्रवाद और पंजाब की सुरक्षा का नैरेटिव: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कैप्टन की फौजी पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद की मुखर छवि कांग्रेस को अकाली दल और भाजपा के मुकाबले एक मजबूत बढ़त दिलाएगी।  क्या पंजाब में ‘आप’ को टक्कर सिर्फ कांग्रेस ही देगी? वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के सामने मुख्य चुनौती पेश करने के मामले में कांग्रेस सबसे आगे खड़ी दिख रही है. अकाली दल इस समय गंभीर आंतरिक कलह और नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है, जबकि भाजपा अभी भी शहरी इलाकों से निकलकर पंजाब के ग्रामीण और किसान बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पैठ नहीं बना पाई है. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, ‘पंजाब की जनता पारंपरिक रूप से एक मजबूत और स्थापित चेहरे को पसंद करती है. पिछले चुनाव में आप को एक बड़े विकल्प के रूप में मौका मिला था, लेकिन एंटी-इंकंबेंसी और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घिरी सरकार के सामने विपक्ष का स्पेस पूरी तरह खाली है. कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस में आते ही यह लड़ाई सीधे तौर पर आप बनाम कांग्रेस के द्विपक्षीय मुकाबले में तब्दील हो जाएगी, जहां कांग्रेस का पलड़ा बेहद भारी हो सकता है।  पंजाब का इतिहास गवाह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को जब-जब राजनीतिक रूप से कमतर आंका गया, उन्होंने उतनी ही मजबूती से वापसी की है. भले ही उनकी उम्र इस समय एक फैक्टर हो, लेकिन पंजाब की जनता के बीच उनकी राजनीतिक साख और प्रशासनिक अनुभव का कोई सानी नहीं है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में बैठी कांग्रेस की टॉप लीडरशिप पंजाब के प्रांतीय नेताओं के विरोध को दरकिनार कर कैप्टन की घर वापसी पर कब अंतिम मुहर लगाती है. इस फैसले पर ही पंजाब की भावी सत्ता का भविष्य निर्भर करेगा। 

क्यों अहम है मालवा की 69 सीटों की लड़ाई? पंजाब की राजनीति का सबसे बड़ा रणक्षेत्र

अमृतसर  पंजाब की सियासत में सबसे अहम क्षेत्र है मालवा, केवल इसलिए नहीं कि कुल 117 विधानसभा सीटों में से 69 इसी क्षेत्र में हैं बल्कि इसलिए भी कि इस इलाके से उठी सियासी लहर पूरे पंजाब में सियासत के रुख को बदल देती है। राजनीति हो या किसानी आंदोलन यहां के नेता और बाशिंदों ने बखूबी अपना दम दिखाया है। कद्दावर नेताओं के साथ-साथ बड़ी किसान जत्थेबंदियां का मालवा से संबंध है।   पंजाब के सभी राजनीतिक दल इस क्षेत्र का सियासी महत्व जानते हैं लिहाजा साल 2027 के मद्देनजर नेताओं ने इस क्षेत्र पर अपना फोकस और सक्रियता बढ़ा दी है। इसके इतर मालवा के मतदाताओं की खास बात यह है कि यहां के लोगों ने सभी दलों को परखा, समझा और फिर अपनी सेवा का मौका दिया। पिछले पांच विधानसभा चुनावों का ट्रेंड इसी बात को साबित करता है। यही वजह है कि भाजपा को छोड़कर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और आम आदमी पार्टी इस क्षेत्र को अपना-अपना गढ़ मानते रहे हैं मगर यहां मतदाताओं का मिजाज पढ़ना आसान नहीं है। साल 2002 के विधानसभा चुनाव का परिणाम देखें तो कांग्रेस को यहां सबसे ज्यादा 29 सीटें मिली थीं जबकि 27 सीटों के साथ शिअद दूसरे नंबर पर थी। साल 2007 में मालवा की 37 सीटें कांग्रेस जीती थी जबकि अकालियों के खाते में 19 सीटें आई थीं। साल 2012 में शिअद ने 34 सीटों पर कब्जा किया जबकि कांग्रेस 31 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई।  साल 2017 में कांग्रेस ने 40 सीटें जीतकर मालवा में दोबारा जलवा दिखाया जबकि अकाली 8 सीटों पर सिमट गए। इसी चुनाव में सूबे में नया दल आम आदमी पार्टी (आप) ने पहली बार इस इलाके से 18 सीटें जीती। साल 2022 के चुनाव में मालवा के मतदाताओं ने आप पर इतना प्यार लुटाया कि पार्टी ने इस क्षेत्र की 69 में से 66 सीटों पर कब्जा किया। कांग्रेस 2 और अकाली 1 सीट पर सीमित रह गए। मतदाताओं का यह रुझान बताता है कि यहां के बाशिंदे लहर के साथ चलते हैं। पंजाब के बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का (अबोहर तहसील को छोड़कर), फिरोजपुर, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, मुक्तसर साहिब, रूपनगर व संगरूर मालवा का हिस्सा हैं। पार्टियों के अध्यक्ष यही सें, डेरा फैक्टर असरदार बरनाला से राजनीतिक मामलों के माहिर बघेल सिंह धालीवाल बताते हैं कि मालवा के लोग सरल मगर क्रांतिकारी प्रवृत्ति के हैं। यही वजह है कि नेताओं की घोषणाओं, उनके भाषणों, उनकी गतिविधियों और वादों का यहां के मतदाताओं पर बड़ा असर पड़ता है। पेंडू (ग्रामीण) कल्चर का भी यहां सियासत में काफी प्रभाव रहता है। अधिकतर बड़े नेता इसी संस्कृति की देन है। डेरा (सिरसा व ब्याास) फैक्टर भी अच्छी पकड़ रखता है। हालांकि सभी जातियों के लोग यहां बसते हैं मगर जट सिख बिरादरी की सियासत यहां ज्यादा अहम दिखती है। मोगा से सियासी मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि पंथक मसलों का इस बेल्ट में बहुत असर रहता है। बरगाड़ी, बहबलकलां, कोटकपूरा में बेअदबी कांड हो या फिर हाथ में गुटका साहिब रखकर सूबे से नशा खत्म करने की बात हो, पंथ के हर मसले से जुड़ी बात यहां से उठकर पूरे पंजाब में सियासी असर डालती है। राजनीतिक विषयों के विशेषज्ञ जगतार सिंह भुल्लर कहते हैं मालवा की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आप, कांग्रेस, शिअद और अब भाजपा ने अपने-अपने प्रदेशाध्यक्ष इसी क्षेत्र से चुने है। कांग्रेस, शिअद और आप तो यहां की सियासत में अपना जलवा दिखा चुके हैं, अब भाजपा यहां ज्यादा फोकस कर रही है। इस इलाके में विकास की बात भी होती है लेकिन लोक लुभावनी घोषणाओं की मतदाताओं पर गहरी छाप दिखती है। मिशन 2027 के लिए अहम क्यों? इन दिनों मालवा की सियासी महत्ता फिर बढ़ी हुई है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। सभी दल इन इलाकों में अपना-अपना पार्टी सर्वे करवा रहे हैं। कांग्रेस करवा चुकी है। बठिंडा, मानसा, सरदूलगढ़, मोड़ मंडी, रामपुरफूला, तलवंडी साबो इत्यादि क्षेत्रों में किसान वर्ग निर्णायक बनता है। साल 2022 के परिणामों में यहां दबदबा तो आप का है मगर कांग्रेस और अकाली यहां दोबारा अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं जबकि भाजपा के लिए यहां खाेने के लिए कुछ नहीं है। लिहाजा सभी दलों ने यहां ताकत झोंकनी शुरू कर दी है।  

लुधियाना के व्यापारियों का ऐलान, 26 जून से तीन दिन तक बाजार रहेंगे बंद, जानें वजह

दोराहा/लुधियाना. ऑल ट्रेड यूनियन दोराहा की ओर से शहर के समस्त व्यापारिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारी नेताओं और सदस्यों ने भाग लेते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी गर्मियों की छुट्टियों के दौरान निकलने वाली सद्भावना यात्रा के मद्देनजर 26, 27 और 28 जून (शुक्रवार, शनिवार और रविवार) को दोराहा शहर के समस्त बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रखे जाएंगे। बैठक के दौरान व्यापारिक नेताओं ने कहा कि सद्भावना यात्रा केवल एक धार्मिक अथवा सामाजिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, एकता और सांझी संस्कृति का प्रतीक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शहर के समस्त व्यापारियों द्वारा इन तीन दिनों के बंद को पूर्ण सहयोग देने का निर्णय लिया गया है, ताकि इस यात्रा को सफल बनाने में अपना योगदान दिया जा सके। यूनियन की ओर से सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की गई कि वे तीन दिनों के दौरान अपनी दुकानें बंद रखकर सद्भावना यात्रा के प्रति एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का परिचय दें। इस बैठक में विशेष रूप से उपस्थित डीएसपी पायल हरमनप्रीत सिंह चीमा ने व्यापारियों द्वारा उठाए गए ट्रैफिक प्रबंधन और पार्किंग से संबंधित मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिलाया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर कुछ दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर सामान रखकर अवैध कब्जे कर लेते हैं, जिसके कारण न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि ग्राहकों को अपने वाहन खड़े करने में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में चेयरमैन प्रीतम सिंह जग्गी, हरकेश कुमार हैप्पी वर्मा, वनीत मकौल, मोहित मल्होत्रा, केशवा नंद, अवतार सिंह मठाड़ू, मनदीप सिंह विक्की ओबराय, राजेश अबलिश, सतपाल तिवाड़ी, राका अबलिश, जसवीर सिंह, राजिंदर सिंह सहित शहर के विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

ट्रैफिक समस्या के चलते रुका अंडरपास निर्माण, जालंधर के 3 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर सवाल

जालंधर. अर्बन एस्टेट फाटक पर बन रहे अंडरपास को लेकर नई अपडेट सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, अर्बन एस्टेट के रेलवे क्रॉसिंग नंबर-7 पर करीब 3 करोड़ रुपए के बनाए जा रहे व्हीकल अंडरपास का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। दरअसल, इस अंडरपास को लेकर इलाके के लोगों द्वारा विरोध जताया जा रहा था। लोगों ने इसके डिजाइन और सुरक्षा को लेकर आपत्तियां जताई। इसके बाद से नगर निगम ने रेलवे को पत्र लिखा और इसके काम को रुकवा दिया गया।  लोगों ने जताई आपत्तियां आपको बता दें कि अंडरपास के डिजाइन को लेकर लोगों द्वारा आपत्तियां जताई जा रही हैं। इसी के चलते अर्बन एस्टेट रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी ने बिना स्थानीय राय के बन रहे इस अंडरपास प्रोजेक्ट को रोकने की मांग की है। इलाका निवासियों का कहना है कि 'U' आकार के बन रहे इस अंडरपास पर केवल छोटे वाहन ही गुजर सकेंगे। यहां इस अंडरपास पर भारी ट्रैफिक की समस्या रहेगी वहीं दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रह सकता है। यही नहीं इस अंडरपास के पास एक बड़ी सीवरेज लाइन गुजरती है। बारिश के दिनों में यहां पर जलभराव व लीकेज की समस्या भी रह सकती है। इसके लिए DRM कार्यालय में शिकायत की गई। जिसके बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। सर्वे के बाद 5 सदस्यी कमेटी करेगी बैठक बताया जा रहा है कि, इस अंडरपास से जुड़े मामले की समीक्षा के लिए तहसीलदार की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस 5 सदस्यी कमेटी में डीआरएम कार्यालय का प्रतिनिधि, पीडब्ल्यूडी का एक्सईएन स्तर का अधिकारी, नगर निगम कमिश्नर कार्यालय का प्रतिनिधि और अर्बन एस्टेट की वेलफेयर सोसायटी का प्रतिनिधि शामिल होगा। प्रोजेक्ट पर अंतिम फैसला लेने से पहले ये कमेटी संयुक्त बैठक करेगी। बैठक से पहले संबंधित विभागों के अधिकारी पहले मौके का सर्वे करेंगे। उसके बाद कमेटी की बैठक होगी। फिर इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।   अंडरपास बनने से किसे होगा फायदा जानकारी के मुताबिक, इस अंडरपार के बनने से अर्बन एस्टेट फेज-1 और 2, फेज-1 के स्कूल और व्यावसायिक इलाके, गढ़ा, कैंट, एजीआई, जमशेर, सुभाना क्षेत्र, सुभाना रोड और गीता मंदिर के आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों फायदा होगा। अब तक हुए ये काम आपको बता दें कि, अंडरपास के लिए नकोदर लाइन के नीचे खुदाई का काम पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा रेलवे ने कंक्रीट बॉक्स तैयार करने के लिए लोहे का ढांचा भी बनाना शुरू किया था। लोगों का इसको लेकर विरोध होता देखकर इस काम को रोक दिया गया। सीधी बात करें तो अब तक एक फीट कंक्रीट भी नहीं डाली गई है।

परीक्षा कॉपी देखने में आ रही दिक्कत पर CBSE का जवाब, जानिए किसे मिलेगी एक्सेस

लुधियाना. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद कॉपियों की री-चैकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए खुले 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' पर ‘रोल नंबर नॉट फाऊंड’ का मैसेज आने से विद्यार्थियों और अभिभावकों में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर पोर्टल के काम न करने की उड़ रही अफवाहों और तकनीकी खराबी के दावों के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई.) ने स्थिति को पूरी तरह साफ किया है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि सी.बी.एस.ई. का 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' ठीक से काम नहीं कर रहा है और कई विद्यार्थियों को 'रोल नंबर नॉट फाऊंड' (रोल नंबर नहीं मिला) का मैसेज दिखाई दे रहा है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की इसी बढ़ती बेचैनी को देखते हुए सी.बी.एस.ई. ने साफ तौर पर बताया है कि यह कोई तकनीकी खराबी या पोर्टल की गड़बड़ी नहीं है। असल में नियमों के मुताबिक जिन विद्यार्थियों ने पहले चरण में अपनी 'उत्तर पुस्तिकाओं की आंसर कॉपी' के लिए सफलतापूर्वक आवेदन नहीं किया था, केवल उन्हें ही यह मैसेज दिखाई दे रहा है। बोर्ड ने पहले ही अपनी गाइडलाइंस में यह स्पष्ट कर दिया था कि कॉपियों की दोबारा जांच और पुनर्मूल्यांकन के अगले चरण का फायदा केवल वही विद्यार्थी उठा सकते हैं जिन्होंने इससे पिछले चरण यानी अपनी स्कैन की हुई कॉपियों की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। इसलिए जिन विद्यार्थियों ने पहला चरण छोड़ दिया, वे इस चरण के लिए पात्र नहीं हैं। 3.8 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए मिले आवेदन सी.बी.एस.ई. ने बताया कि वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की यह विंडो 2 से 7 जून तक पूरी तरह ओपन और एक्टिव थी। इस तय समय के दौरान विद्यार्थियों ने इस सुविधा का जमकर फायदा उठाया। आंकड़ों की बात करें तो इस 6 दिनों की अवधि में 1.6 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने 3.8 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए सफलतापूर्वक आवेदन सबमिट किए। आई.आई.टी. और साइबर टीम के कड़े पहरे में चला पोर्टल इतने बड़े पैमाने पर आए आवेदनों के बावजूद पोर्टल बिना किसी रुकावट के चलता रहा, क्योंकि इसके पीछे एक बहुत ही मजबूत तकनीकी टीम काम कर रही थी। इस पूरे सिस्टम की देखरेख और मैनेजमैंट का जिम्मा सरकारी तकनीकी एजैंसियों के साथ-साथ देश के प्रतिष्ठित आई.आई.टी. की टीमों के हाथों में था। इतना ही नहीं, किसी भी तरह के ऑनलाइन खतरे, हैकिंग या फर्जी ट्रैफिक से पोर्टल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष साइबर सिक्योरिटी टीमों ने चौबीसों घंटे इस पर पैनी नजर रखी। साथ ही, सी.बी.एस.ई. की समर्पित टीमों ने हेल्पलाइन नंबर और शिकायत निवारण माध्यमों से उन विद्यार्थियों की हर संभव मदद की जिन्हें फॉर्म भरने में कोई परेशानी आ रही थी। बोर्ड ने एक बार फिर दोहराया है कि वह विद्यार्थियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और एक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध है।