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Punjab News: अंबेडकर जयंती पर CM मान ने लॉन्च की ‘मुख्यमंत्री मांवां-धीयां सत्कार योजना’

जालंधर. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवान सिंह मान आदमपुर के गांव उदेशियां में डॉ. बीआर आंबेडकर के जन्म दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे है। मुख्यमंत्री पंजाब आज मुख्यमंत्री मांवां-धीया सत्कार योजना की शुरुआत करेंगे। गांव उदेशियां में अनुसूचित जातियों की 65% भागीदारी है और यहां शिक्षा का स्तर 90% है, लिंग अनुपात में भी 1000 के पीछे 984 लड़कियों का अनुपात है जबकि पंजाब में कल लिंग अनुपात 894 है। यह गांव हल्का आदमपुर हलका की सीट के लिए बेहद महत्वपूर्ण भी है, इस सीट से शिरोमणि अकाली दल के विधायक रहे पवन टीनू अब आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हैं और वर्तमान में पंजाब राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक के चेयरमैन है। 1500 रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि  इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि दी जाएगी। यह योजना महिलाओं को स्वतंत्र और सशक्त बनाकर उनकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह स्कीम महिलाओं को वित्तीय रूप से मजबूत करेगी, जिससे वे बचत और निवेश कर सकेंगी तथा घर-परिवार के लिए जरूरी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनेंगी।” मुख्यमंत्री कार्यालय ने आगे कहा, “इस योजना से 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की संभावना है, जो इसे देश की सबसे महिला-हितैषी सामाजिक सुरक्षा पहलों में शामिल करता है। यह योजना राज्य भर में महिलाओं को सीधी आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और महिलाओं के सशक्तिकरण के तहत उनके लिए वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के प्रति सरकार के विजन को दर्शाती है।” यह योजना सीधा लाभ प्रदान करने के लिए तैयार की गई है, जिसमें वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस स्कीम के तहत एक परिवार में योग्य महिलाओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी और एक ही परिवार की कई महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकेंगी। मौजूदा सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को भी इस योजना के तहत अपनी पेंशन के अलावा पूरा वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे इसकी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ेगी। पंजाब में 18 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं, जो वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जिनके पास पंजाब निवास वाला आधार कार्ड और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर कार्ड है, इस योजना के तहत लाभार्थी के रूप में रजिस्टर होने के योग्य होंगी। हर महिला तक इस योजना का लाभ पहुंचाने को सुनिश्चित करने के लिए भगवंत मान सरकार व्यापक पहुंच और रजिस्ट्रेशन संबंधी हर संभव प्रयास करेगी, जिसमें महिलाओं खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं के लिए दस्तावेज पूरे करना, बैंक खाते सक्रिय करना और निर्बाध रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने में सहायता शामिल है। इस पहल को और मजबूत करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पहले ही 9,300 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की जा चुकी है और योजना के पैमाने व पहुंच को देखते हुए यह पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे बड़ी महिला-हितैषी सामाजिक कल्याण पहलों में से एक होने की उम्मीद है।

शिक्षा जगत को बड़ा झटका: सेंट सोल्जर ग्रुप के चेयरमैन अनिल चोपड़ा नहीं रहे

जालंधर. जालंधर के प्रसिद्ध समाजसेवी, सेंट सोल्जर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस और पीपीआर (PPR) ग्रुप के चेयरमैन अनिल चोपड़ा का आकस्मिक निधन हो गया है। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे शहर के व्यापारिक, शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। वे एक दूरदर्शी उद्यमी होने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे। राजन और प्रिंस चोपड़ा पर टूटा दुखों का पहाड़ अपने पिता को अपना मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत मानने वाले राजन चोपड़ा और प्रिंस चोपड़ा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने हमेशा अपने पिता के सिद्धांतों को प्राथमिकता दी और उन्हीं के मार्गदर्शन में संस्थानों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके लिए यह केवल एक व्यावसायिक क्षति नहीं, बल्कि एक मजबूत भावनात्मक स्तंभ का ढह जाना है। दोनों बेटे अपने पिता के अधूरे सपनों और समाज सेवा के मिशन को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। शिक्षा जगत के लिए एक युग का अंत अनिल चोपड़ा ने अपनी कड़ी मेहनत और विजन के बल पर सेंट सोल्जर ग्रुप को उत्तर भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किया। उनके नेतृत्व में आज कई स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहाँ हजारों छात्र अपना भविष्य संवार रहे हैं। उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए ऐसी क्षति माना जा रहा है, जिसकी भरपाई होना नामुमकिन है। शाम 5 बजे मॉडल टाउन में दी जाएगी अंतिम विदाई पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, अनिल चोपड़ा की पार्थिव देह का अंतिम संस्कार आज, मंगलवार 14 अप्रैल को किया जाएगा। अंतिम विदाई के लिए शाम 5 बजे मॉडल टाउन स्थित श्मशान घाट का समय निश्चित किया गया है। उनके अंतिम दर्शनों के लिए शहर की तमाम बड़ी हस्तियों, राजनेताओं और उनके शुभचिंतकों के भारी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है। शहर की प्रमुख हस्तियों ने जताया गहरा शोक उनके निधन की सूचना मिलते ही शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा दुख प्रकट किया है। रिटायर्ड डीआईजी पवन उप्पल, एआईजी नवजोत महल और नितिन कोहली ने उनके जाने को समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। PLN भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करती है और विभिन्न धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी चोपड़ा परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

CM मान का बड़ा ऐलान: पंजाब की महिलाओं को ₹1500 मासिक, जालंधर से आज रजिस्ट्रेशन की शुरुआत

चंडीगढ़. पंजाब सरकार आज मंगलवार से अपनी प्रस्तावित 'मावां धियां सत्कार योजना' के लिए महिला लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन शुरू करेगा, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर से करेंगे। इसके 1 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। इस दिन से जनरल श्रेणी की महिलाओं को सीधे 1,000 और अनुसूचित जाति श्रेणी की महिलाओं 1,500 रुपये का मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा। आप के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू में 15 अप्रैल से नौ विधानसभा क्षेत्रों जैसे आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला ग्रामीण में पायलट आधार पर चलाई जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि 15 मई से इस प्रक्रिया का विस्तार बाकी 108 विधानसभा क्षेत्रों में भी कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के समय आवेदकों को पंजाब आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और बैंक पासबुक जमा करना होगा। इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल पात्रता की जांच करने और लाभार्थियों के खातों में सीधे लाभ ट्रांसफर करने में मदद के लिए किया जाएगा। यह योजना आम आदमी पार्टी (AAP) के 2022 के विधानसभा चुनावों के उस वादे को पूरा करने की दिशा में एक कदम है, जिसमें महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की बात कही गई थी। हालांकि, पार्टी ने उस समय 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने अब संकेत दिया है कि योजना के लागू होने के साथ-साथ इसके अंतिम स्वरूप, जिसमें लाभार्थी के लिए पात्रता के मानदंड और 1,000 से 1,500 रुपये की सीमा के भीतर मिलने वाली सटीक राशि शामिल है को भी अधिसूचित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए पिछले कई महीनों से तैयारियां चल रही हैं, जिसमें लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करना और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे इस रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य पूरे राज्य में योजना को लागू करने से पहले छोटे पैमाने पर इसके सिस्टम की जांच करना है। महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू करने वाला पंजाब अकेला राज्य नहीं है। पड़ोसी राज्यों—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश—ने भी ऐसी योजनाओं की घोषणा की है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी हाल के वर्षों में इसी तरह के कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू कल्याण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, इस योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बोझ पड़ने की संभावना है। राज्यों में पंजाब का GSDP के मुकाबले कर्ज़ का अनुपात सबसे ज़्यादा है, और नीति-निर्धारक हलकों में बार-बार होने वाले कल्याणकारी भुगतानों के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने से इसका बेहतर क्रियान्वयन हो पाएगा। इस तरह इकट्ठा किया गया डेटाबेस लाभार्थियों की अंतिम संख्या तय करने में मदद करेगा।

आनंदपुर साहिब जाते समय बैसाखी पर संगत पर गोलीबारी, माहौल तनावपूर्ण

आनंदपुर साहिब/कीरतपुर साहिब  बैसाखी के पावन अवसर पर जहां एक ओर नगर कीर्तन निकाले जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर देर रात कीरतपुर साहिब और आनंदपुर साहिब के बीच फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, जालंधर से आनंदपुर साहिब जा रही संगत जब उक्त स्थान पर पहुंची, तो कुछ हमलावरों ने गोलियां चला दीं। अचानक हुई फायरिंग से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, घटना ने श्रद्धालुओं में दहशत जरूर पैदा कर दी। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जानें कैसे शुरू हुई बैसाखी पर्व मनाने की परंपरा 14 अप्रैल का दिन आते ही मन में एक अलग ही उमंग भर जाती है, क्योंकि यही वह दिन है जब हम सब मिलकर बैसाखी का त्योहार मनाते हैं. इस साल 2026 में भी यह त्योहार खुशियों की नई सौगात लेकर आ रहा है. सौर कैलेंडर के हिसाब से देखें तो यह नए साल का पहला दिन है, जब सूर्य मेष राशि में कदम रखते हैं. उत्तर भारत में तो इस दिन की रौनक देखते ही बनती है. किसान अपनी लहलहाती सुनहरी फसल को देखकर फूले नहीं समाते और भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं. नदियों में आस्था की डुबकी लगाना और दान-पुण्य करना इस दिन को और भी पवित्र बना देता है, जिससे मन बिल्कुल शांत और सकारात्मक हो जाता है।  आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव सिख धर्म में बैसाखी का जिक्र आते ही दिल गर्व और श्रद्धा से भर जाता है. इसी खास दिन साल 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में ‘खालसा पंथ’ की नींव रखकर एक नया इतिहास लिख दिया था. उन्होंने पांच प्यारों को अमृत चखाकर एक ऐसी निडर कौम तैयार की, जो किसी भी जुल्म के आगे झुकना नहीं जानती. आज के दिन गुरुद्वारों में होने वाले कीर्तन और अरदास की गूंज सीधे रूह को छू लेती है. सड़कों पर सजे नगर कीर्तन और पांच प्यारों की वह आन-बान देखकर हर किसी का सिर फख्र से झुक जाता है. यह पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि मानवता की सेवा और सच्चाई की राह पर डटे रहना ही इंसान का असली धर्म है।  फसलों का त्योहार और प्रकृति का आभार बैसाखी का असली मतलब ही है खुशियों से भर जाना और प्रकृति के करीब आना. जब खेतों में सुनहरी गेहूं की फसल कटने को तैयार होती है, तो किसानों का दिल झूम उठता है और वे ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्धा पाकर अपनी खुशी मनाते हैं. हर घर से पकवानों की सोंधी खुशबू आने लगती है और लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाकर नए साल की बधाई देते हैं. लंगर में एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करना भाईचारे की सबसे सुंदर तस्वीर पेश करता है. शाम ढलते ही मोहल्लों में नाच-गाना और हंसी-मजाक का जो दौर चलता है, वह हमें याद दिलाता है कि मेहनत का फल वाकई बहुत मीठा होता है. यह त्योहार अपनों के साथ मिलकर जिंदगी का जश्न मनाने का एक प्यारा सा मौका है।  दान का पुण्य और सात्विक स्वाद की मिसाल पुरानी मान्यताओं की मानें तो बैसाखी पर किए गए दान का फल कभी खत्म नहीं होता. किसी प्यासे को पानी पिलाना या किसी जरूरतमंद को अन्न देना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य है. घर की रसोई में जब मां अपने हाथों से गुड़ वाले चावल या मीठी खीर बनाती हैं, तो उस सात्विक स्वाद की तुलना किसी भी बाजार की मिठाई से नहीं की जा सकती. शुद्ध घी और प्यार से बने इस भोग को ईश्वर को अर्पित करने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है. अपनों के बीच बैठकर सादा और शुद्ध भोजन करना ही असली सुख है. यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर की भक्ति और अपनों का साथ ही जीवन की असली पूंजी है। 

Assembly Session से पहले श्रद्धा का संदेश: कुलतार सिंह संधवां पहुंचे ऐतिहासिक गुरुद्वारा अंब साहब

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के आगाज से पहले स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। सोमवार को वह मोहाली के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल गुरुद्वारा अंब साहब पहुंचे, जहां उन्होंने मत्था टेक कर सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्पीकर ने इस दौरान ‘सरबत के भले’ की मंगलकामना की। विधानसभा की कार्यवाही शुरू करने से पहले गुरुद्वारे जाकर अरदास करना इस बात का संकेत है कि सरकार आगामी विधायी कार्यों, विशेषकर बेअदबी विरोधी बिल को लेकर कितनी गंभीर है। ऐतिहासिक दिन और नई चुनौतियों का जिक्र इस अवसर पर संधवां ने देश-दुनिया की संगत को खालसा सृजना दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दिन सिख कौम के गौरव और सेवा भावना का प्रतीक है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब की पवित्र धरती पर पूर्व में हुई बेअदबी की घटनाओं ने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय के सत्ताधारियों ने दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे जनमानस में भारी आक्रोश बना रहा। विपक्ष और एसजीपीसी पर तीखा प्रहार जब एसजीपीसी (SGPC) अध्यक्ष द्वारा विशेष बिल पर उठाए जा रहे सवालों के बारे में पूछा गया, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि जब बेअदबी की घटनाएं हो रही थीं, तब उनकी पार्टी की सरकार थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई? संधवां ने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल विरोध करने की राजनीति कर रहे हैं और विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता दोषियों को सजा दिलाना और धार्मिक मर्यादा की रक्षा करना है। सदन में सर्वसम्मति की जताई उम्मीद सदन में प्रस्तावित बिल के भविष्य पर बात करते हुए स्पीकर ने विश्वास व्यक्त किया कि शायद ही कोई ऐसा सदस्य होगा जो बेअदबी रोकने वाले इस कानून का विरोध करेगा। उन्होंने आशा जताई कि विधानसभा के सभी सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गुरु मर्यादा के अनुरूप इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपनी सहमति देंगे। यह सत्र केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पंजाब की धार्मिक भावनाओं और न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

पंजाब में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: ‘रोशन पंजाब योजना’ से गांव होंगे रोशन, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

जालंधर. पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलने और वहां सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशाल परियोजना की घोषणा की है। प्रदेश के लगभग 13 हजार गांवों को रोशन करने के लिए तीन लाख सौर स्ट्रीट लाइटें लगाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। ‘मुख्यमंत्री रोशन पंजाब योजना’ के तहत गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थलों को आधुनिक सौर ऊर्जा प्रणाली से लैस किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार की उम्मीद है। 550 करोड़ का बजट और कार्यान्वयन की रणनीति जालंधर में आयोजित एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस पूरे मिशन पर अनुमानित 550 करोड़ रुपये की लागत आएगी। विभाग ने इसकी निविदा प्रक्रिया को शीघ्र अति शीघ्र आरंभ करने के निर्देश दिए हैं। योजना का मुख्य केंद्र बिंदु गांवों के वे सार्वजनिक स्थान और घनी आबादी वाले मोहल्ले हैं, जहां वर्तमान में प्रकाश व्यवस्था का अभाव है। सुरक्षा और आर्थिक प्रगति पर विशेष ध्यान अंधेरा दूर होने से न केवल गांवों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि इससे स्थानीय निवासियों की कार्यक्षमता और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। सौर लाइटों के लगने से रात के समय होने वाली आपराधिक वारदातों में कमी आएगी और विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है, जिसके तहत जून से कार्य शुरू होकर अक्टूबर तक संपन्न किया जाएगा। पूरी व्यवस्था के प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय नियंत्रण केंद्र बनाया जा रहा है और नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। रखरखाव की जिम्मेदारी और वित्तीय ढांचा परियोजना की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। जिस कंपनी को लाइटें लगाने का अनुबंध मिलेगा, वही अगले सात वर्षों तक इनके परिचालन और मरम्मत के लिए उत्तरदायी होगी। यदि कोई लाइट खराब होती है, तो उसे 72 घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा, अन्यथा कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस योजना के कुल व्यय का 70 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत का योगदान ग्राम पंचायतें करेंगी। इसके साथ ही गांवों में पहले से मौजूद बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को भी इस अभियान के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा।

Jalandhar Nagar Kirtan: खालसा स्थापना दिवस पर श्रद्धा का सैलाब, आसमान से बरसे फूल

जालंधर. पंजाब के जालंधर में खालसा के स्थापना दिवस के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह से भरा भव्य खालसा नगर कीर्तन निकाला गया। यह मार्च गुरुद्वारा नवमीं पातशाही दुश निवारण साहिब से आरंभ हुआ, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हो गए थे। धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुरु ग्रंथ सहाब जी की पावन छत्रछाया में यह मार्च निकाला गया। इसकी अगुवाई गुरु के पांच प्यारों ने की, जो सिख परंपरा का प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं। श्रद्धालु पूरे रास्ते में गुरु के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।यह खालसा मार्च शहर के विभिन्न प्रमुख इलाकों से होकर गुजरा। इसमें मॉडल टाउन मार्केट, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह साहिब मॉड टाऊन, , स्काईलार्क रोड, भगवान वाल्मिक चौक, अली मोहल्ला पुरी और पटेल चौक सहित कई स्थान शामिल रहे। अंत में यह मार्च ऐतिहासिक स्थल गुरुद्वारा छवमीं पातशाही बस्ती शेख पहुंचेगा। श्रद्धालुओं के लिए किए गए विशेष प्रबंध मार्च के मार्ग में शहर की विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष प्रबंध किए गए। जगह-जगह लंगर लगाए गए, जहां लोगों को प्रसाद और भोजन वितरित किया गया। इसके अलावा कई स्थानों पर श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरे शहर में भक्तिमय माहौल बन गया। नगर कीर्तन में दिखा अनुशासन व सेवा भावना खालसा नगर कीर्तन के दौरान अनुशासन और सेवा भाव का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में भाईचारे, सेवा और एकता का संदेश भी देता है। बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं इसमें शामिल होकर गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।

सरकार का बड़ा अपडेट: ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ में आवेदन तिथि बदली, लाभार्थियों को ₹1000 सहायता

चंडीगढ़. पंजाब में महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अब इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होगा। पहले यह प्रक्रिया 13 अप्रैल, बैसाखी के दिन शुरू होनी थी, लेकिन विशेष विधानसभा सत्र के कारण तारीख में बदलाव किया गया है। सरकार की ओर से योजना की औपचारिक शुरुआत 14 अप्रैल को जालंधर के आदमपुर में आयोजित रैली के दौरान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में सात जिलों—मुक्तसर, रोपड़, पटियाला, संगरूर, मोगा, जालंधर और फरीदकोट—को शामिल किया गया है। इनमें से अधिकांश जिले मालवा क्षेत्र के हैं, जबकि दो जिले दोआबा क्षेत्र से संबंधित हैं। जानें किन महिलाओं को मिलेगा लाभ इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की सहायता दी जाएगी। खास बात यह है कि अनुसूचित वर्ग की महिलाओं को अतिरिक्त लाभ देते हुए उन्हें 1500 रुपए प्रति माह देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इसके लिए बजट में 9300 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया है। योजना का लाभ सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसके लिए महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसमें मोबाइल नंबर, बैंक खाता और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। रजिस्ट्रेशन की सुविधा सेवा केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध होगी और यह पूरी प्रक्रिया निशुल्क होगी। सांसद, सरकारी नौकरी वाली महिलाएं नहीं की गई शामिल हालांकि, कुछ वर्गों की महिलाओं को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। इनमें पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, सरकारी कर्मचारी, पेंशनधारी और कर देने वाली महिलाएं शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आय की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में नौ विधानसभा क्षेत्रों की महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा, इसके बाद धीरे-धीरे इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं विपक्ष इस योजना के समय और क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठा रहा है।

Baisakhi 2026: नंगल में उमड़ी भारी भीड़, सतलुज झील में श्रद्धालुओं का स्नान

नंगल/रूप नगर. पंजाब के नंगल में बैसाखी पर्व के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। बैसाखी के इस पावन दिन पर सतलुज झील में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। झील के किनारे स्थित विभोर साहिब घाट पर सुबह से ही धार्मिक माहौल बना हुआ है, जहां श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पंजाब के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। तीन दिन तक चलने वाला पारंपरिक पंचगाठड़ा मेला इस अवसर का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मान्यता के अनुसार बैसाखी के दिन सतलुज झील में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु झील में डुबकी लगाने के बाद नाव में बैठे मलाहों को दान सामग्री अर्पित कर रहे हैं। घाट पर लगातार बढ़ती भीड़ के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बना हुआ है। सुरक्षा के कड़े प्रबंध श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष प्रबंध किए हैं। इस बार झील में बोटिंग करने वालों की संख्या सीमित कर दी गई है। पहले जहां एक नाव में 50 से अधिक लोग सवार हो जाते थे, वहीं अब सुरक्षा के मद्देनजर केवल 15 लोगों को ही अनुमति दी जा रही है। घाट पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। वृंदावन नांव घटना के बाद निगरानी तेज इस संबंध में एएसआई रामकुमार ने बताया कि सभी नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। झील में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा सिविल डिफेंस विभाग के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद हैं। दो गोताखोरों की तैनाती की गई है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

Punjab Assembly में कड़ा कदम: भगवंत मान सरकार लाई सख्त बेअदबी कानून, उम्रकैद तक सजा संभव

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए अहम विधेयक सदन में पेश किया गया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह वॉक आउट न करे और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा में भाग ले। बिल पेश होने के बाद सदन में इस पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से मांग की कि पिछले वर्ष गठित सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट पहले सदन में पेश की जाए। उन्होंने कहा कि कमेटी को बने नौ महीने हो चुके हैं, इसलिए उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सत्र की अवधि एक दिन बढ़ाने का सुझाव भी दिया। इस पर स्पीकर ने जवाब देते हुए कहा कि कमेटी अपना कार्य कर रही है और उचित समय पर रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी जाएगी। वहीं, मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह एक व्यापक और पवित्र कानून है, जिसमें बेअदबी के मामलों की जांच तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच किसी भी स्थिति में उच्च स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं होगा। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूर किए जा चुके इस संशोधन विधेयक में ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008’ को और मजबूत बनाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। उद्देश्य: धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना इस सत्र में सबसे अहम मुद्दा रहा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ा प्रस्तावित नया कानून। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूरी दिए गए इस विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया गया है। इसका नाम ‘जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026' रखा गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना और बेअदबी जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है। संशोधन समय की जरूरत  सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे समाज में गहरी नाराजगी और तनाव की स्थिति पैदा हुई है। इन घटनाओं ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित किया है। सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा कानूनों में ऐसे मामलों के लिए सज़ा पर्याप्त कठोर नहीं है, इसलिए सख्त संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कई कठोर दंडात्मक प्रावधान भी हैं शामिल प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अन्य कठोर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सरकार का दावा है कि यह कानून समाज में शांति, भाईचारे और धार्मिक सम्मान को मजबूत करेगा। मंत्रिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि धार्मिक पवित्रता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विधेयक के अनुसार, जानबूझकर धार्मिक ग्रंथों की अवमानना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।