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पटना की घुरदौड़–ज्ञान निकेतन रोड सहित 9 सड़कों को मिला नया नाम

पटना. नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की सामान्य बैठकों में राजधानी की 9 सड़कों का नामकरण किया गया। साथ ही 5 पार्कों के नामकरण को भी स्वीकृति प्रदान की गई। समिति से मंजूरी मिलने के उपरांत नगर निगम प्रशासन द्वारा नामकरण से संबंधित सूचना डाक विभाग को भेजी जाती है। उल्लेखनीय है कि बीते एक माह के भीतर सशक्त स्थायी समिति की दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। दीघा रोड, घुरदौड़ से ज्ञान निकेतन गर्ल्स स्कूल तक की सड़क अब आचार्य किशोर कुणाल के नाम से जानी जाएगी। अशोक राजपथ स्थित नंद गोला मेन रोड पर डॉ. विजय कांत शर्मा के आवास से पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी श्रीराम कुमार के आवास तक के मार्ग को पूर्व पार्षद श्रीराम कुमार पथ नाम दिया गया। पूर्व पार्षद नथुनी राम यादव के नाम पर सड़क श्रीकृष्णापुरी पार्क के मेन गेट के सामने से लेकर एलएफ फ्लैट पार्क तक की सड़क का नामकरण न्यायमूर्ति इंदु प्रभा सिंह पथ किया गया। इसी प्रकार 15 दिसंबर को हुई बैठक में वार्ड 72 में अशोक राजपथ मुख्य सड़क लिंक पथ से अनिल कुमार यादव (बजरंगबली मंदिर) के मकान से सहदरा चौड़ाहा तक का नामकरण वरिष्ठ समाजसेवी व पूर्व पार्षद नथुनी राम यादव के नाम पर किया गया। दीघा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आशियाना दीघा रोड से आकाशवाणी रोड के बीच पड़ने वाली सड़क को मुंदर साह पथ नाम दिया गया। कंकड़बाग वार्ड 33 के पूर्वी इंद्रानगर स्थित सुधा देवी लेन रोड नंबर एक-ए का पूर्वी इंद्रा नगर नामकरण किया गया। रोड नंबर छह, राजेंद्र नगर सुपर स्पेशलिटी नेत्र अस्पताल से लेकर ज्योतिषाचार्य पं. रामलोचन पांडेय के घर के कोने तक सड़क को डॉ. ब्रजकिशोर सिन्हा मार्ग नाम दिया गया। एग्जीबिशन रोड-फ्रेजर रोड लिंक सड़क का नामकरण पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. दुखन राम मार्ग किया गया। वार्ड 44 अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय के समीप नगर निगम द्वारा निर्मित वाटिका एवं उसके सामने एसबीआइ शाखा से लेकर कंकड़बाग देवी स्थान तक जाने वाले मार्ग का नामकरण यदुनंदन प्रसाद मार्ग किया गया। पाटलिपुत्र कालोनी के पार्क को मिला अटल बिहारी वाजपेयी का नाम 15 दिसंबर को हुई बैठक में दीघा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाटलिपुत्रा कालोनी स्थित पार्क को अटल पार्क नाम दिया गया है। इस पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पहले से स्थापित है। चितकोहरा पंजाबी कालोनी स्थित पार्क का नामकरण गुरु गोबिंद सिंह पार्क किया गया। वहीं, न्यू पुनाईचक स्थित पार्क को भामा शाह पार्क नाम दिया गया है, जहां दानवीर भामा शाह की प्रतिमा पूर्व से ही स्थापित है। वार्ड 44 के अंतर्गत डाक्टर कालोनी में जीवक हार्ट हास्पिटल के दक्षिण स्थित पार्क का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी चंद्रमा सिंह के नाम पर किया गया।

पटना में पूरी तरह खुले स्कूल, सुबह 9 बजे से रहेंगी क्लास

पटना. पटना जिले में स्कूल पूरी तरह खोल दिए गए हैं। 17 जनवरी से जिले के तमाम निजी और सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं की पढ़ाई सुचारू कर दी गई है। बिहार में पड़ रही प्रचंड ठंड और शीतलहर को देखते हुए पिछले दिनों स्कूलों में पाबंदी लगाई गई थी। 16 जनवरी तक प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं पर पाबंदी थी, जिसे शनिवार को हटा दिया गया। इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) ने आदेश जारी किया है। पटना के डीएम त्यागराजन द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया कि जिले के सभी निजी एवं सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, किसी भी शिक्षण संस्थान में सुबह 9 बजे से पहले पढ़ाई नहीं हो पाएगी। स्कूलों का संचालन 9 बजे के बाद ही किया जाएगा। यह आदेश फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगा। ठंड में और राहत मिलने पर टाइमिंग में और राहत दी जाएगी। ठंड के चलते बंद किए गए थे स्कूल पटना समेत बिहार के कई जिलों में ठंड के चलते निजी एवं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद की गई थी। इस महीने की शुरुआत में जिले के सभी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। यह पाबंदी 11 जनवरी तक जारी रही थी। इसके बाद चरणवार तरीके से विभिन्न कक्षाओं की छुट्टियां खत्म की गईं। सबसे पहले, 12 जनवरी से छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन कक्षा 5 तक पाबंदी जारी रही। बाद में 14 तारीख से कक्षा 1-5 तक के लिए स्कूल खोले गए, लेकिन प्राइमरी एवं प्री-प्राइमरी के बच्चों की छुट्टियां जारी रहीं। अब सभी कक्षाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है।

विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना में शामिल हुए सीएम नीतीश

पूर्वी चंपारण. पूर्वी चंपारण. पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड के कैथोलिया स्थित जानकी नगर में बने रहे Virat Ramayan Mandir में शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े सहस्र लिंगम की स्थापना के लिए की जानेवाली पीठ पूजा का उत्साह उत्कर्ष पर है। बड़ी संख्या में शिवभक्तों की भीड़ मंदिर परिसर पर पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विराट रामायण मंदिर पहुंचकर सहस्र शिवलिंगम की स्थापना की प्रक्रिया को देखा। मंदिर परिसर का भ्रमण करने के उपरांत सीएम मोतिहारी में समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। उनके साथ दोनों डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी भी मौजूद हैं। विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की आज मोतिहारी में बन रहे विराट रामाणय मंदिर परिसर में आज स्थापना हो रही है। आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र शायन कुणाल और उनकी पत्नी शांभवी चौधरी मुख्य यजमान हैं। सीएम नीतीश कुमार इस आयोजन में भाग लेंगे। सुबह 8 बजे से 10:30 बजे तक पीठ पूजा का कार्यक्रम संपन्न किया गया।इसके बाद हवन व शिवलिंग स्थापित करने का कार्यक्रम शुरू हुआ है। 33 फीट ऊंचे शिवलिंग को दो क्रेन से सीधा कर स्थापित किया जा रहा है।बनारस व पटना से आए आचार्य शिवलिंग स्थापना कार्यक्रम को संपन्न करा रहे हैं। वैदिक मंत्रों से वातावरण गूंज रहा है। थोड़ी देर में सीएम नीतीश कुमार भी यहां पहुंचेंगे। वे यहां 15 मिनट तक रहेंगे। इधर, विराट शिवलिंग की स्थापना को लेकर माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है।सुबह से विराट रामायण मंदिर परिसर में लोग पहुंचने लगे थे। सड़कों पर लोगों की भीड़ है। सभी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने को लालायित दिख रहे हैं।वाहनों पर रोक के कारण पैदल ही लोग कार्यक्रम स्थल की ओर निकल पड़े हैं।लगातार हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज रहा है। मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मंदिर के चारो ओर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। लोग शिव मंत्र जप कर रहे हैं और महिलाएं महादेव के मंगलगीत गा रही हैं। अब से कुछ ही घंटों बाद महादेव की नगरी काशी समेत विभिन्न इलाकों से आए विद्वान पीठ पूजा की विधि शुरू करेंगे। समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति सायण कुनाल यजमान के रूप में बैठ हुए हैं। सायण कुणाल महावीर मंदिर न्यास पटना के सचिव भी हैं। याद रहे कि 20 जून, 2023 को विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए शिलापूजन का कार्य धार्मिक न्यास परिषद पटना के तत्कालीन अध्यक्ष आर्चाय किशोर कुणाल के नेतृत्व में की गई थी। तब से लगातार डेढ़ वर्षों तक प्रतिदिन ढाई सौ मजदूरों ने काम किया और जमीन के अंदर सौ फीट से कुल 3102 स्तंभ खड़े किए। नींव का कार्य पूरा करने के बाद परिसर में आधारपीठ तैयार किया गया, उसपर आज तमिलनाडु के महाबलीपुरम में बनाये गये 33 फीट ऊंचे व 33 फीट मोटे सहस्रलिंगम की स्थापना होनी है। सम्राट चौधरी ने X पोस्ट के जरिए इस कार्यक्रम को लेकर बधाई दी है। उन्होंने लिखा, "पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के स्थापना समारोह के पावन अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। यह दिव्य आयोजन हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन गौरव को और अधिक सशक्त करेगा।"

झारखंड निकाय चुनाव में 5 से 25 लाख तक कर सकेंगे खर्च

रांची. झारखंड नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव में खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसमें दस लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम में मेयर के प्रत्याशी 25 लाख और पार्षद के प्रत्याशी पांच लाख रुपए तक ही चुनावी खर्च कर पाएंगे। निर्वाचन आयोग ने जनसंख्या के आधार पर बांटे गए नगर निकायों के लिए अलग-अलग खर्च की सीमा तय की है। इसमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए अलग-अलग खर्च की सीमा तय की गई है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को चुनाव समाप्ति के 30 दिनों के अंदर अपने-अपने रिटर्निंग ऑफिसर को खर्च का हिसाब देना अनिवार्य है। प्रत्याशियों द्वारा नियुक्त निर्वाचन अभिकर्ता को प्रत्याशी के चुनाव खर्च का हिसाब देना होगा। अगर कोई जीता हुआ प्रत्याशी 30 दिनों के अंदर चुनाव खर्च का हिसाब नहीं देता है तो उसकी सदस्यता रद्द करते हुए उसे अगले तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोक दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार कोई भी प्रत्याशी अगर सरकारी भवनों पर झंडा-बैनर या प्रचार सामग्री लगाता है तो उसपर एफआईआर दर्ज की जाएगी। वहीं निजी भवनों में झंडा-बैनर लगाने पर उस भवन मालिक से लिखित में सहमति पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है।

पारसनाथ पहाड़ के मामले में सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश

रांची झारखंड हाइकोर्ट ने जैन धर्म के प्रमुख – धार्मिक स्थल गिरिडीह स्थित पारसनाथ – पहाड़ को जैन धर्मावलंबियों की – भावनाओं के अनुरूप संरक्षित रखने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस एमएस – सोनक व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की – सुनवाई के दौरान प्रार्थी का पक्ष सुना। खंडपीठ ने पारसनाथ पहाड़, जो इको सेंसेटिव जोन घोषित है, वहां पर होनेवाले खनन के मामले में राज्य सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 12 फरवरी की तिथि निर्धारित की। इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारूका ने पक्ष रखते हुए खंडपीठ को बताया कि गिरिडीह के जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की रिपोर्ट में पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में हो रहे माइनिंग गतिविधियों का कोई जिक्र नहीं है। वह पूरा क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन के रूप में घोषित है। वहां पर खनन नहीं हो सकता है। इसके बावजूद वहां अवैध खनन हो रहा है। उस पर रोक लगाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी जैन संस्था ज्योत की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है। इसमें कहा गया है कि पारसनाथ पहाड़ जैन धर्मावलंबियों का पवित्र धार्मिक स्थल है। वहां विगत कई वर्षों से शराब व मांस की बिक्री होती है। अतिक्रमण भी किया जा रहा है। लोग यहां पिकनिक मनाने भी आते हैं।केंद्र सरकार के वन, पर्यावरण व क्लाइमेट चेंज मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी। मंत्रालय ने माना है कि पारसनाथ पहाड़ी पर जो भी कार्य किया जाये, वह जैन धर्मावलंबियों की भावना को ध्यान में रख कर किया जाये।

झारखंड विधानसभा के 18 से बजट सत्र के आज से विधायक पूछ सकेंगे सवाल

रांची. झारखंड विधानसभा का पंचम (बजट) सत्र 18 फरवरी से 19 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र का औपबंधिक कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस संबंध में सभी विधायकों को सूचना भेज दी गई है। विधानसभा सदस्य शुक्रवार से ही सदन में अपने-अपने प्रश्न दर्ज करा सकेंगे, जिससे सत्र की तैयारी औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। सत्र के पहले दिन 18 फरवरी को राज्यपाल विधानसभा सत्र को संबोधित करेंगे। इसी दिन शोक प्रकाश भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद सरकार और विपक्ष के लिए सत्र की कार्यवाही क्रमशः आगे बढ़ेगी। हेमंत सोरेन सरकार 24 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट विधानसभा में पेश करेगी, जिसे इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव 19 फरवरी को प्रश्नकाल के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर सदन में वाद-विवाद होगा, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी बात रखेंगे। 20 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पर सरकार का उत्तर दिया जाएगा। इसके बाद मतदान कराया जाएगा। इसी दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 की तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी भी सदन के पटल पर रखी जाएगी। 21 और 22 फरवरी को विधानसभा की कार्यवाही नहीं होगी। 23 फरवरी को तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर विस्तृत चर्चा, मतदान और संबंधित विनियोग विधेयक का उपस्थापन एवं पारण किया जाएगा। 25 फरवरी से बजट पर सामान्य वाद-विवाद की शुरुआत होगी, जिसमें विभिन्न दलों के विधायक सरकार की वित्तीय नीतियों पर अपनी राय रखेंगे। 26 और 27 फरवरी को अनुदान मांगों पर चर्चा 26 और 27 फरवरी को अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान प्रस्तावित है। इसके बाद 28 फरवरी से आठ मार्च तक होली और अन्य पर्व-त्योहारों को लेकर अवकाश रहेगा। नौ मार्च से 13 मार्च तक अलग-अलग तिथियों में प्रश्नकाल के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक की अनुदान मांगों पर वाद-विवाद, सरकार का उत्तर और मतदान कराया जाएगा। 14 और 15 मार्च को पुनः अवकाश रहेगा। सत्र के अंतिम चरण में 16 और 18 मार्च को अनुदान मांगों पर चर्चा के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के विनियोग विधेयक सदन में लाए जाएंगे। इसके बाद विभिन्न राजकीय विधेयकों और अन्य शासकीय कार्यों पर विचार किया जाएगा। सत्र के अंतिम दिन 19 मार्च को गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे।

झारखंड के रिम्स में 8.5 लाख से अधिक ओपीडी और 63 हजार की हुई सर्जरी

रांची. राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है। अस्पताल की ताजा वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में रिम्स की ओपीडी में 8 लाख 58 हजार से अधिक मरीजों ने इलाज कराया, जबकि 78 हजार से ज्यादा मरीजों को इंडोर यानी आइपीडी सेवाएं दी गई। ये आंकड़े न सिर्फ रिम्स की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि राज्य के लोग अब जटिल बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करने लगे हैं। हजारों सर्जरी, जटिल इलाज में भी इजाफा रिपोर्ट के अनुसार, वर्षभर में रिम्स में कुल 63,926 सर्जरी की गईं। इनमें 20,995 मेजर आपरेशन शामिल हैं, जबकि 42,931 माइनर सर्जरी की गई। मेजर सर्जरी की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अब हार्ट, ब्रेन, कैंसर, ट्रामा और अन्य जटिल बीमारियों का इलाज रिम्स में बड़े स्तर पर संभव हो रहा है। इससे मरीजों को बाहर के निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों में रेफर होने की मजबूरी भी कम हुई है। जांच सुविधाओं पर भी बढ़ा भरोसा रिम्स में डायग्नोस्टिक सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में कुल 1,40,779 रेडियोलाजी जांच की गई। इनमें 90,758 एक्स-रे, 23,868 अल्ट्रासाउंड और 26,153 सीटी स्कैन शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच उपलब्ध से गंभीर बीमारियों का शुरुआती स्तर पर ही निदान संभव हो पा रहा है, जिससे इलाज की सफलता दर बढ़ी है। लैब सेवाओं पर भारी दबाव पैथोलाजी और सेंट्रल लैब सेवाओं में भी रिकार्ड संख्या में जांच की गई। सेंट्रल लैब में कुल 8,92,531 जांच दर्ज की गई। इनमें हेमेटोलाजी विभाग में 1.75 लाख से अधिक जांच, क्लिनिकल पैथोलाजी में 25,625 जांच, माइक्रोबायोलाजी में 2.72 लाख से अधिक और वायरलाजी व एसपी मालिक्यूलर जांच की संख्या 1.82 लाख रही। यह आंकड़े बताते हैं कि रिम्स राज्य का सबसे बड़ा डायग्नोस्टिक हब बनता जा रहा है। हृदय रोगियों को मिली बड़ी राहत कार्डियोलाजी विभाग में भी मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार एक साल में 35,735 ईसीजी, 17,580 ईको, 1,248 टीएमटी और 302 होल्टर टेस्ट किए गए। इससे बीपी, हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों की समय पर पहचान और इलाज संभव हो सका। मातृ-शिशु सेवाओं में भी अहम योगदान रिम्स ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्षभर में अस्पताल में 5,214 प्रसव कराए गए, जिनमें 2,773 बालक और 2,441 बालिकाओं का जन्म हुआ। वहीं, 10,165 मौतें दर्ज की गई, जो यह दर्शाती हैं कि रिम्स एक तृतीयक रेफरल सेंटर होने के कारण राज्यभर से गंभीर और जटिल मरीजों का दबाव झेलता है। टीकाकरण में भी सक्रिय भूमिका रिम्स में वर्षभर में कुल 33,505 टीकाकरण किए गए। इसमें बीसीजी, डीपीटी, पेंटावैक, ओपीवी, रोटा वायरस, पीसीवी, हेपेटाइटिस-बी सहित अन्य आवश्यक टीके शामिल हैं। इससे बच्चों और आम लोगों को कई संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिली। रिम्स निदेशक डा. राजकुमार के अनुसार ये आंकड़े बताते हैं कि रिम्स अब केवल रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए जीवनरेखा बन चुका है। सीमित संसाधनों और बढ़ते मरीज दबाव के बावजूद रिम्स द्वारा दी जा रही सेवाएं यह संकेत देती हैं कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

खुद के नाम जमाबंदी नहीं होने से ई-केवाईसी में आगे लेकिन रजिस्ट्री में पीछे

लखीसराय. सरकार द्वारा किसानों को फसल ऋण, फसल बीमा, मुआवजा एवं आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ सरलता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फार्मर रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रथम चरण में उन्हीं किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की जा रही है, जिनके नाम से भूमि की जमाबंदी कायम है और जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक हैं। जिले में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत पांच दिसंबर 2025 को रामगढ़ चौक प्रखंड से की गई थी। यह अभियान 31 दिसंबर 2025 तक प्रस्तावित था, लेकिन भूमि संबंधी लंबित मामलों के निष्पादन में राजस्व कर्मचारियों के व्यस्त रहने के कारण 10 दिसंबर से 31 दिसंबर तक फार्मर रजिस्ट्री का कार्य बाधित रहा। इसके बाद छह जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2026 तक फार्मर रजिस्ट्री को लेकर विशेष अभियान चलाया गया। इस अवधि में जिले के प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के कुल 49,123 सक्रिय लाभुक किसानों में से 40,656 किसानों का ई-केवाईसी पूरा किया जा सका, जबकि मात्र 9,190 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाई। फार्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति को देखते हुए सरकार ने पुनः 18 जनवरी 2026 से 21 जनवरी 2026 तक गहन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। प्रखंडवार स्थिति (6 से 11 जनवरी 2026 तक) – बड़हिया प्रखंड में 3,950 लाभुकों में 4,122 का ई-केवाईसी तथा 1,021 की फार्मर रजिस्ट्री हुई। चानन प्रखंड में 8,532 लाभुकों में 6,336 का ई-केवाईसी और 1,456 की रजिस्ट्री की गई। हलसी प्रखंड में 7,350 लाभुकों में 5,675 का ई-केवाईसी और 2,060 की रजिस्ट्री हुई। लखीसराय प्रखंड में 5,576 लाभुकों में 4,625 का ई-केवाईसी और 812 की रजिस्ट्री हुई। पिपरिया प्रखंड में 2,678 लाभुकों में 2,236 का ई-केवाईसी और 514 की रजिस्ट्री की गई। रामगढ़ चौक प्रखंड में 4,331 लाभुकों में 3,783 का ई-केवाईसी और 950 की रजिस्ट्री हुई। वहीं सूर्यगढ़ा प्रखंड में सर्वाधिक 16,706 लाभुकों में 13,879 का ई-केवाईसी और 2,377 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की गई। फार्मर रजिस्ट्री धीमी होने का कारण प्रथम चरण में केवल उन्हीं किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो रही है, जिनके नाम से भूमि की जमाबंदी दर्ज है। जिले के अधिकांश प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक किसानों की भूमि उनके पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से दर्ज है। स्वयं के नाम से जमाबंदी रखने वाले किसानों की संख्या कम होने के कारण फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया कृषि समन्वयक द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों का आधार सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी किया जाता है। इसके बाद राजस्व कर्मचारी भूमि विवरण के आधार पर फार्मर आईडी का निर्माण कर फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करते हैं। फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य – प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर भविष्य में किसान सम्मान निधि के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। सरकार ने इसे लेकर 18 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक गहन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। – कुंदन कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, लखीसराय

झारखंड के 119 स्कूलों को मिलेगा मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार

गिरिडीह. मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए गिरिडीह जिला के आठ और पूरे राज्य के 119 विद्यालयों का चयन पांच अलग-अलग कैटेगरी में हुआ है। आठ जनवरी को संपन्न राज्य स्तरीय समिति (JEPC) की बैठक में विद्यालयों का चयन किया गया। गिरिडीह जिला के चयनित विद्यालयों में प्राइमरी ग्रामीण कैटेगरी में प्राथमिक विद्यालय भंडारीडीह व उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय घोंसे ऊपर टोला, एलीमेंट्री ग्रामीण कैटेगरी में उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोरियांचू, एलीमेंट्री शहरी में पीएम श्री शारदा कन्या मध्य विद्यालय पचंबा, उच्च विद्यालय ग्रामीण में उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोंदलो व प्लस टू एसएस उच्च विद्यालय कुम्हरलालो, शहरी में उत्क्रमित प्लस टू सर जेसी बोस बालिका विद्यालय गिरिडीह तथा आवासीय कैटेगरी में पीएम श्री झारखंड आवासीय विद्यालय सरिया शामिल हैं। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह ने सभी उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को पत्र जारी कर चयनित विद्यालयों की सूची प्रेषित की है। साथ ही आवश्यक दिशानिर्देश दिया है। चयनित विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा साप्ताहिक करने का निर्देश दिया गया है। कहा गया है कि ये चयनित विद्यालय न केवल स्वच्छ रहे बल्कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम ग्रीन स्कूल्स के रूप में पूरे देश के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

समस्तीपुर में ड्रोन से छिड़काव पर अनुदान का 106 किसानों ने किया आवेदन

समस्तीपुर. खाद हो या कीटनाशक, किसानों को इसके छिड़काव के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सरकार उन्हें किराए पर ड्रोन उपलब्ध करा रही है। साथ ही छिड़काव के लिए जो सरकारी दर निर्धारित किया गया है, उसपर भी 50 फीसद तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। समस्तीपुर जिले में अब तक कुल 106 किसानों ने 1100 एकड़ के लिए आवेदन किया है। समस्तीपुर में दो हजार एकड़ में ड्रोन से दवा छिड़काव का लक्ष्य है। किसानों को प्रति एकड़ छिड़काव कराने पर सरकार 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। दवा का छिड़काव करने वाली सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन किया गया है। एक एकड़ में छिड़काव करने पर 480 रुपये खर्च आएगा। इसमें से 240 रुपये ही किसानों को देना पड़ेगा। ड्रोन से छिड़काव के लिए एक किसान अधिकतम 15 एकड़ तक का ही लाभ ले सकते हैं। साथ ही दवा भी किसान को ही उपलब्ध करानी होगी। अच्छी बात यह कि रैयत के साथ ही गैर-रैयत किसानों को भी लाभ दिया जा रहा है। रैयत किसानों को अपनी भूमि का रसीद भी लगाना होगा, जबकि गैर-रैयत किसानों को स्व-घोषणा पत्र एवं पड़ोस के दो किसानों का गवाह का हस्ताक्षर के साथ आवेदन संलग्न कर जमा कराना होगा। 240 रुपये में एक एकड़ में ड्रोन से फसलों पर छिड़काव एक एकड़ में छिड़काव पर 480 रुपये का खर्च निर्धारित है। इसमें से 240 रुपये ही किसानों को देना पड़ेगा। ड्रोन से छिड़काव के लिए एक किसान अधिकतम 15 एकड़ तक का ही लाभ ले सकते हैं। साथ ही दवा भी किसान को ही उपलब्ध करानी होगी। कृषि विभाग एवं कृषि वैज्ञानिक द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करना होगा। निबंधित किसानों को मिलेगा योजना का लाभ किसान तिलहन, दलहन, आलू, मक्का, गेहूं व अन्य फसलों पर कीट प्रबंधन के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर निबंधित हैं। आवेदन के लिए जरूरी प्रक्रिया ड्रोन से दवा का छिड़काव कराने वाले इच्छुक किसान कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करते समय जमीन का रकवा, फसल के प्रकार, जमीन का रसीद और आधार कार्ड देना होगा। कृषि समन्वयक, पौधा संरक्षण कर्मी, प्रखंड तकनीकी व सहायक प्रबंधक प्राप्त आवेदनों का सत्यापन करेंगे। जबकि, चयनित एजेंसी ड्रोन से दवा का छिड़काव करेगी। दो हजार एकड़ में छिड़काव का लक्ष्य – समस्तीपुर जिला में कृषि ड्रोन से फसलों पर कीटनाशी एवं तरल उर्वरक का छिड़काव योजना शुरू किया गया है। कृषि विभाग द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत ड्रोन से दवा का छिड़काव के लिए समस्तीपुर जिला का भी चयन किया गया है। समस्तीपुर जिला में कुल दो हजार एकड़ में छिड़काव करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक प्रखंड में 100 एकड़ छिड़काव की योजना है। – राजीव कुमार रजक, सहायक निदेशक (पौधा संरक्षण) कृषि विभाग, समस्तीपुर