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नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा, आज करेंगे नामांकन

पटना. बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल सुबह 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे. उनके साथ जदयू उम्मीदवार के रूप में रामनाथ ठाकुर भी नामांकन दाखिल करेंगे. जानकारी के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व की ओर से जदयू के प्रमुख नेताओं को नामांकन के दौरान मौजूद रहने के लिए कहा गया है. इस बीच, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर पर अब लगभग मुहर लग गई है. इसी क्रम में भाजपा की ओर से भी उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार भी अपना नामांकन दाखिल करेंगे. वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. बीजेपी का होगा मुख्यमंत्री? नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ ही बिहार में नए सिरे से सरकार गठन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक हलकों में इस कदम को बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर को लेकर जदयू के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नाराजगी की संभावना भी जताई जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मंथन किया. नामांकन के वक्त अमित शाह मौजूद रहेंगे  नामांकन के बाद सीएम नीतीश कुमार और एनडीए के अन्य नेताओं के साथ अमित शाह की बैठक हो सकती है. इसी बैठक में नई सरकार के गठन के फार्मूले पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा. जेडीयू को दो डिप्टी सीएम के पद मिल सकते हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालात और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर चर्चा की गई. कौन होगा अगला मुख्यमंत्री सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में नई सरकार के गठन को लेकर फॉर्मूला तय किया जा सकता है. चर्चा है कि बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जेडीयू को दो डिप्टी सीएम पद दिए जा सकते हैं. पार्टी में हलचल! बैठक के बाद संजय झा के आवास से बाहर निकलते हुए जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से राज्यसभा जा रहे हैं. पार्टी की ओर से यही संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यह फैसला उनका अपना है. इस दौरान विजय कुमार चौधरी ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर पर सबकी नजर बनी हुई है.

बिहार मौसम अपडेट: होली के बाद गर्मी का असर, जानिए आज किस जिले में ठंड का अहसास

पटना मार्च की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अब भी बिहार के कई जिलों में लोग कंबल ओढ़ रहे हैं। न्यूनतम तापमान भी 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। बिहार के मधेपुरा, सहररसा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीवान, वैशाली, शेखपुरा, गया, बक्सर, भागलुपर और पूर्णिया का तापमान 15 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। होली तक ऐसा ही मौसम रहेगा। सुबह और रात गुलाबी ठंड का एहसास होगा। हालांकि, पटना समेत कुछ जिलों में गर्मी का भी एहसास हो रहा है। कई जिलों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री से अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। होली के बाद पटना में गर्मी और बढ़ेगी। अधिकतम तापमन 33 डिग्री तक जाने के आसार हैं। मार्च से मई तक कैसा रहेगा मौसम? इधर, मौसम विज्ञान केंद्र ने स्पष्ट कह दिया है कि मार्च से लेकर मई तक इस बार अधिक गर्मी लगेगी। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख आशीष कुमार ने कहा कि मार्च से मई तक 2026 की बिहार के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान और न्यूतनत सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। दिन और रात दोनों समय तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस होगा। अप्रैल और मई माह में ही बिहार के कई जिलों में हीटवेव की घटनाएं हो सकती है। शहरी क्षेत्रों में हीट आईलैंड प्रभाव के कारण तापमान अधिक हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख आशीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार से अपील है कि वह हीट एक्शन प्लान लागू करें। आम लोग दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।    पिछले 24 घंटे में कहां का तापमान कितना रहा? मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा और कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई। राज्य में अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री सेल्सियस से 33.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया। वहीं न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस से 20.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। तीन मार्च को बिहार में न्यूनतम तापमान सबसे कम 12.7 डिग्री सेल्सियस मधेपुरा और सहरसा में दर्ज किया गया। वहीं किशनगंज में 17.4 डिग्री सेल्सियस, अरवल में 17.5 डिग्री सेल्सियस, मोतिहारी में 17.5 डिग्री सेल्सियस, मुजफ्फरपुर में 17.2 डिग्री सेल्सियस, औरंगाबाद में 14.2 डिग्री सेल्सियस, मधुबनी में 14.2 डिग्री सेल्सियस, सुपौल में 16.6 डिग्री सेल्सियस, वाल्मीकिनगर में 16 डिग्री सेल्सियस, ज़िरादेई में 13.5 डिग्री सेल्सियस, समस्तीपुर में 13.8 डिग्री सेल्सियस, वैशाली में 15 डिग्री सेल्सियस, पटना में 18.2 डिग्री सेल्सियस, जहानाबाद में 16.8 डिग्री सेल्सियस, नालंदा (राजगीर) में 17.9 डिग्री सेल्सियस, शेखपुरा में 15 डिग्री सेल्सियस, गया में 15 डिग्री सेल्सियस, बक्सर में 15 डिग्री सेल्सियस, मुंगेर में 15.6 डिग्री सेल्सियस, भागलपुर में 14.7 डिग्री सेल्सियस, सबौर में 12.8 डिग्री सेल्सियस, पूर्णिया में 15.3 डिग्री सेल्सियस, कटिहार में 17.6 डिग्री सेल्सियस, फारबिसगंज में 18.2 डिग्री सेल्सियस तथा छपरा में 20.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। अगले तीन दिनों तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान में अगले दो से तीन दिनों तक विशेष बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद तीन दिनों के दौरान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है। इसी तरह न्यूनतम तापमान में भी अगले दो से तीन दिनों तक स्थिरता रहेगी, जबकि उसके बाद दो से चार  डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में आने वाले दिनों में दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी से गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। पटना में सात मार्च तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के पूर्वानुमान के अनुसार, तीन से सात मार्च तक राजधानी पटना में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। 3 मार्च को अधिकतम 31 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहने का अनुमान है, वहीं 4 मार्च को अधिकतम 32 डिग्री और न्यूनतम 18 डिग्री रहेगा। 5, 6 और 7 मार्च को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने तथा न्यूनतम तापमान क्रमशः 19, 19 और 20 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस अवधि में सूर्योदय लगभग 6:11 बजे से 6:07 बजे के बीच और सूर्यास्त 5:52 बजे से 5:55 बजे के बीच होगा। कुल मिलाकर पटना में अगले पांच दिनों तक धूप खिली रहेगी और दिन में गर्मी का अहसास बढ़ेगा।

पुल हादसे के बाद सख्त कार्रवाई: घोघरी नदी प्रोजेक्ट के तीन इंजीनियर निलंबित

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में निर्माण कार्यों में लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल के एक हिस्से के ढह जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण कार्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। क्या है पूरा मामला? सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर घाट पर घोघरी नदी के ऊपर बन रहे पुल का एक हिस्सा कुछ दिन पूर्व अचानक भरभराकर गिर गया। यह पुल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आवागमन का एक महत्वपूर्ण साधन बनने वाला था। निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान ही संरचना के ढह जाने से गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निगरानी में लापरवाही का आरोप लगाया। जांच के बाद निलंबन पुल गिरने की सूचना मिलते ही ग्रामीण कार्य विभाग मुख्यालय ने मामले का संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों की अनदेखी और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही सामने आई। विभागीय आदेश के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। तीनों अधिकारियों पर नियमित मॉनिटरिंग नहीं करने और गुणवत्ता नियंत्रण में विफल रहने का आरोप है। ठेकेदार पर भी कार्रवाई की तैयारी विभागीय सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य में लगी संवेदक एजेंसी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। सलेमपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस पुल के निर्माण का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। पुल गिरने से जहां सरकारी धन की बर्बादी हुई है, वहीं क्षेत्र का संपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच और निर्धारित समयसीमा में मजबूत पुल निर्माण की मांग की है। सरकार का सख्त संदेश हाल के महीनों में बिहार के विभिन्न जिलों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गोपालगंज की यह कार्रवाई अन्य जिलों के लिए भी एक सख्त संदेश मानी जा रही है कि भ्रष्टाचार और तकनीकी शिथिलता पर कठोर कार्रवाई तय है।

JDU में नई पीढ़ी की दस्तक: Nitish Kumar के बेटे निशांत को मिल सकता है बड़ा पद

नई दिल्ली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में आना तय हो चुका है और पार्टी जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा करेगी। मंत्री ने कहा कि निशांत कुमार को पार्टी में "बड़ी जिम्मेदारी" दी जाएगी। उन्होंने कहा, "अब यह स्पष्ट है और अंतिम रूप दे दिया गया है कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में शामिल होंगे। पार्टी एक-दो दिन में इसकी औपचारिक घोषणा करेगी। पार्टी कार्यकर्ता कई वर्षों से निशांत के राजनीति में आने की मांग कर रहे थे। अब होली से पहले इस फैसले के कारण कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है।" एक-दो दिन में हो जाएगा फैसला मंत्री ने कहा, "उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्हें क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका फैसला एक-दो दिन में हो जाएगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या निशांत को राज्यसभा भेजा जा सकता है तो कुमार ने कहा, "कुछ भी हो सकता है।" एक दशक से अधिक समय से राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री रहे श्रवण कुमार मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं।  

आज बसिऔड़ा, कल गुलाल: बिहार में होली मनाने की परंपरा क्यों है सबसे अलग?

पटना मथुरा के बरसाने की लट्ठमार और वृंदावन की फूलों की होली तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसे देखने देश-विदेश से लोग आया करते हैं, लेकिन होली के मामले में बिहार भी पीछे नहीं है। यहां की होली भी रंग-बिरंगी है और रूप अनेक हैं। मतलब, बिहार के अलग-अलग इलाकों में होली कई अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। होली के त्योहार की शुरुआत इस बार 02 मार्च की रात होलिका दहन से हो चुकी है। आज गांव-देहात में धुरखेली जैसी परंपरा के तहत धूल-कीचड़ से होली की शुरुआत हो चुकी है। इस एक स्टोरी में जानिए, होलिका दहन और होली से बिहार में कहां-कैसे संस्कृति को जिंदा रखे हुए है। इसके साथ ही फगुआ या फाग कैसे रंग जमाता है, वह भी पढ़िए। होलिका दहन के पहले गांवों में गोइठा मांगने की रही है परंपरा बिहार के गांवों में होली के आगमन के पहले होलिका दहन करने के लिए घर-घर से चंदा के रूप में गोइठा मांगने की प्राचीन परंपरा रही है। इस परंपरा के तहत युवाओं, खासकर बच्चों की टोली अपने-अपने गांव में बोरियां लेकर घूमती और हर घर जाकर चंदा के रूप में गोइठा मांगती रही है। इस दौरान बच्चे और युवा, "अगजा गोसाईं गोड़ लागे ली, घूम-घूम के गोइठवां मांगे ली" का यह गीत गाते गांव में फिरते हैं। जैसे ही वे किसी के घर पर गोइठा मांगने पहुंचते हैं, तो उनका दूसरा गीत शुरू होता है। घर की मालकिन महिला को संबोधित करते हुए वे गाते हैं, "ए जजमानी तोरा सोने के केवाड़ी, दू (चार, पांच, दस की संख्या) गोइठा दा"। इसके बाद उस घर से गोइठा मिलने के बाद रुख अगले घर की ओर और गीत के वही बोल। यह सिलसिला होलिका दहन का दिन आने तक चलता रहता था। बच्चे और युवक चंदे में मिले गोइठों को अपने गांव में एक स्थान पर जमा करते हैं। इसके बाद जमा किए गए गोइठा होलिका दहन में जलाए जाते हैं। हालांकि, कई गांवों में होलिका दहन के लिए गोइठा मांगने की यह परंपरा अब लुप्त होती जा रही है। दरभंगा में डंफा की थाप पर होलिका दहन परिक्रमा की परंपरा दरभंगा के ग्रामीण इलाकों में डंफा (एक तरह का ढोल) की थाप पर पारंपरिक होली गीतों के गायन के साथ जलती हुई होलिका की परिक्रमा करने की समृद्ध परंपरा रही है। हालांकि, यह परंपरा अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। कुछ गांवों में ही इस परंपरा का निर्वहन हो रहा है। फगुआ (फाग) गायन अब गांव से शहरों तक पहुंचा हुआ है होली के आगमन के पहले बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) के दिन से बिहार में फगुआ (फाग) गायन की समृद्ध परंपरा रही है। यह परंपरा आज भी जीवित है। इसके तहत गांवों में सार्वजनिक स्थान पर और शहरी इलाकों में देवी-देवताओं के मंदिरों के परिसर में फगुआ गाए जाते हैं। फगुआ गायन बसंत पंचमी से शुरू होकर होली तक चलता है। इस दौरान लोग राम-सीता, कृष्ण-राधा, शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं के होली खेलने के गीत गाते हैं। होली के दिन फाग गायन के समाप्त होने के बाद चैत्र (चैत) माह के शुरू होने के साथ ही चैता गायन शुरू होता है, जो रामनवमी तक चलता है। इस दौरान "चैत मासे लिहले जनमवा हो रामा चैत मासे…" आदि पारंपरिक लोकगीत उमंग के साथ गाए जाते हैं। बिहार में होली के साथ कुछ गंदी परंपराएं भी चली आ रही हैं। इनमें हंड़िया टांगने और कीचड़ वाली होली शामिल है। हंड़िया टांगने वाली परंपरा पूरी तरह शरारत से भरी है। इस परंपरा में गांवों में शरारती किस्म के युवक मिट्टी की हांडी की गर्दन में रस्सी बांधते हैं और हांडी में मल-मूत्र, गंदगी या कीचड़ भर कर रात में किसी घर के मुख्य दरवाजे पर टांग देते हैं। साथ ही दरवाजे पर कीचड़, गंदगी या मल-मूत्र बिखेर देते हैं। यहां तक कि किसी छोटे जानवर का मृत शरीर भी घर के दरवाजे पर टांग देते हैं। सुबह होते ही घर का मालिक या परिवार का कोई सदस्य जैसे ही दरवाजा खोलता है, वह हंड़िया से टकरा जाता है और सारी गंदगी उस पर गिर जाती है तथा पैर भी दरवाजे पर गिराई गई गंदगी से सन जाते हैं। स्वाभाविक है कि ऐसा जिस घर के साथ होगा, उस घर के लोग ऐसा करने वालों को गालियां देंगे; और ऐसा करने वाले लोग भी उसी टोले-मुहल्ले के होते हैं, जो गालियां सुनकर खुद मजे लेते हैं तथा उन्हें और गाली देने के लिए प्रेरित भी किया करते हैं। गांवों में शरारती किस्म के युवक हंड़िया टांगने वाला काम बहुधा उन्हीं घरों पर करते हैं, जिस घर के लोग चिढ़ने और गुस्सा करने वाले होते हैं। होली की दूसरी गंदी और गलत परंपरा कीचड़ तथा गंदगी वाली होली है। इस होली में लोग नाली के कीचड़, गोबर, मिट्टी, मल-मूत्र से होली खेलते हैं। इस तरह की होली झगड़े का भी सबब बन जाती है। सुखद बात यह है कि सभ्यता के विकास के दौर में होली से जुड़ी ये गलत परंपराएं अब समाप्त हो रही हैं।

एम्स पटना के डॉक्टरों ने सर्जरी कर बच्ची का कटा हाथ जोड़ा

पटना. वैशाली की 6 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी का दाहिना हाथ रविवार की दोपहर चारा काटने की मशीन में कट गया। स्वजन तत्काल उसे लेकर अस्पतालों में मदद तलाशते रहे। अंततः शाम 7:30 बजे बच्ची को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया, जहां से उपचार की निर्णायक प्रक्रिया शुरू हुई। अस्पताल पहुंचते ही प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीमों ने स्थिति का आकलन कर त्वरित कार्यवाही की। आधे घंटे के भीतर लक्ष्मी को आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। रात आठ बजे शुरू हुई जटिल माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी छह घंटे तक चली। प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह के मार्गदर्शन में आपरेशन संपन्न हुआ। टीम में डॉ. अंसारुल, डॉ. कुलदीप, डॉ. मैरी, डॉ. अजीना, डॉ. निकिता और डॉ. अनुप शामिल थे। पूरी प्रक्रिया में एनेस्थीसिया, आपरेशन थिएटर और नर्सिंग टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इस उपलब्धि पर एम्स के निदेशक ने पूरी टीम को बधाई दी है। डॉक्टरों ने बताया कि लक्ष्मी की अंगुलियों में रक्त संचार के सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। चिकित्सकों को उम्मीद थी कि उचित देखभाल और पुनर्वास के साथ बच्ची अगले एक से दो महीनों में हाथ की कार्यक्षमता काफी हद तक प्राप्त कर सकती है। स्थिति अनुकूल रहने पर एक सप्ताह के भीतर उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सकों ने ऐसे मामलों में कटे अंग के सुरक्षित परिवहन को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कुछ सावधानियां भी बताई हैं। अंग कटने पर सुरक्षित जुड़ाव को लेकर रखें सावधानी प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह ने बताया कि किसी भी आकस्मिक घटना-दुर्घटना में अंग कटने या हटने की स्थिति में जोड़ने को लेकर आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। कटे हुए अंग को साफ प्लास्टिक बैग में रखें।

बिहार में 8 मार्च को मनेगा महिला रोजगार दिवस

पटना. 8 मार्च को इंटरनेशनल महिला दिवस है. इसी दिन बिहार में महिला रोजगार दिवस मनाया जाएगा. 8 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में रोजगार उत्सव के रूप में मनाया जाएगा. इसमें बड़ी संख्या में जीविका दीदियां शामिल होंगी. जानकारी के मुताबिक, महिला रोजगार योजना को लेकर 10-10 हजार रुपए मिलने के बाद महिलाओं ने जो रोजगार शुरू किया, उसे आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी. महिला उद्यमियों को किया जाएगा प्रोत्साहित इस दिन खास बात यह भी होगी कि ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित भी करेंगे. मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिक, 2005 के बाद यानी कि सत्ता में नीतीश सरकार के आने के बाद महिला सशक्तिकरण को लेकर कई तरह के काम किए गए हैं. स्वयं सहायता समूह के रूप में जीविका का गठन किया गया. ग्रामीण और शहर दोनों को मिलाकर अब तक टोटल 11 लाख 82 हजार स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा चुका है. जीविका दीदियों को लखपति बनाने की प्लानिंग बिहार में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं जीविका दीदियों को महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपए की राशि खुद का रोजगार शुरू करने के लिए दिया गया था. अब उन्हें लखपति बनाए जाने की प्लानिंग है. अब जीविका दीदियों की तरफ से शुरू किए गए रोजगार का आंकलन किया जाएगा. इसके बाद उन्हें 2 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी. 8 मार्च को कार्यक्रम में क्या-क्या होगा? जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के बारे में बताया गया कि इस दौरान महिला उद्यमी अपना एक्सपीरियंस शेयर करेंगी. इसके साथ ही उन्हें अपने रोजगार को और बेहतर करने के लिए एक्सपर्ट टिप्स देंगे. इसके अलावा महिला को बाकी के सरकारी योजनाओं की जानकारी और दो लाख रुपए देने को लेकर तमाम जानकारियां भी दी जायेंगी.

निशांत कुमार की सियासी दस्तक पर जदयू का संकेत, भाजपा बोली– खुले दिल से स्वागत

पटना जब विधानसभा चुनाव आया तो वह रास्ता। जब चुनाव निकल गया तो विधान परिषद् के रास्ते जाने की बात आई। अब राज्यसभा चुनाव की बारी आई तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री का रास्ता पक्का बताया जा रहा है। पहले की तरह ही जनता दल यूनाईटेड के मंत्रियों ने ही यह जानकारी दी है। यह भी कहा जा रहा है कि इस बार नीतीश कुमार ने सहमति दी है। उन्हें नीतीश कुमार के बाद जदयू अध्यक्ष बनाने की भी बात कही जा रही है। अब तक नीतीश ने इसपर खुद आकर कुछ नहीं कहा है, क्योंकि वह परिवारवाद पर लगातार हमलावर रहे हैं। इधर, जदयू के दिग्गज नेता दावा कर रहे हैं कि निशांत कुमार जल्द ही पार्टी में पूरी तरह से एक्टिव हो जाएंगे। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी चल रही है? इस सवाल पर जनता दल यूनाइटेड के किसी भी नेता ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन निशांत की जदयू एंट्री पर जरूर बड़ा बयान दे दिया है। सीएम नीतीश के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने कह दिया है कि जल्द ही वह सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं। राजनीति प्रवेश करने की पूरी संभावना बन गई ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट कहा है कि निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति प्रवेश करने की पूरी संभावना बन गई है। उनके बारे में बिहार के नौजवान और जदयू नेता चाहते हैं कि निशांत सक्रिय राजनीति में आए। अब जल्द ही सबकी चाहत पूरी होने वाली है। उनके उनके जदयू में आगमन की जल्द ही घोषणा होगी और पार्टी के अंदर काम करेंगे। मंत्री दिलीप जायसवाल ने क्या कहा वह जानिए इधर, निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश की खबरों पर बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि मैं नई पीढ़ी का राजनीति में स्वागत करता हूं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में नेतृत्व करने के लिए मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद करता हूं। यह बेहद खुशी की बात है कि निशांत जी अब मुख्यमंत्री और उनके परिवार के समर्थन के साथ राजनीति में प्रवेश करेंगे और हम उनका दिल से स्वागत करते हैं। वह निश्चित रूप से एक शिक्षित युवा नेता हैं, जिन्होंने बीटेक की डिग्री प्राप्त की है और जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। हर घटना अपने समय पर होती है और शायद अब सही समय आ गया है। उनके राजनीति में आने का गर्मजोशी से स्वागत किया जाना चाहिए। मंत्री अशोक चौधरी बोले- होली का बड़ा तोहफा है मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जनता दल यूनाईटेड और सीएम नीतीश कुमार की विचारधारा पर चलने वालों के लिए होली का एक बड़ा तोहफा है। जब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे तो बिहार के लिए काफी अच्छा रहेगा। वह काफी पढ़े लिखे हैं। इंजीनियर हैं। एक तरह से वह सीएम नीतीश कुमार की फोटो कॉपी है। होली के अवसर पर यह बड़ी खबर है। वह पार्टी के कार्यकर्ताओं की मांग पर आ रहे हैं। चुनाव के पहले से ही लोगों की मांग थी। अब वह सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं, यह खुशी की बात है।

बिहार के दो जिलों में पीपीपी मोड पर बनेंगे सरकारी मेडिकल कॉलेज

पटना. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई उंचाइयों पर ले जाने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा दांव खेला है. राज्य में अब नए सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण लोक निजी भागीदारी (PPP) मोड पर पर खोलने का निर्णय लिया हैं. सात निश्चय पार्ट-3 के तहत सरकार ने इन जिलों में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है. अब सहरसा और गोपालगंज के छात्रों को डॉक्टर बनने और मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना होगा. PPP मोड पर बनेगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के अधिक से अधिक जिलों में मेडिकल शिक्षा और उन्नत इलाज की सुविधा उपलब्ध हो. इसी रणनीति के तहत नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण PPP मॉडल पर कराया जाएगा, ताकि निजी निवेश के जरिए आधुनिक ढांचा और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके. जिन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज बनने हैं, वहां जमीन चिह्नित कर उसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है. यह कदम परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है. गोपालगंज में जमीन चिह्नित स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि गोपालगंज जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए मांझा प्रखंड में 24 एकड़ 37 डिसमील जमीन चिह्नित की गई है. जिला प्रशासन द्वारा जमीन का हस्तांतरण भी किया जा चुका है. सरकार ने इस जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के तकनीकी दल को स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आगे की निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यह स्थान जिले के लिए एक बड़ा ‘हेल्थ हब’ साबित होगा. जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) की एक एक्सपर्ट टीम को स्थल निरीक्षण का निर्देश दिया गया है. टीम की रिपोर्ट आते ही पीपीपी मोड पर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. सहरसा में भी तैयारी अंतिम चरण में सहरसा जिले में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग लंबे समय से हो रही थी. राज्य सरकार की योजना अगले पांच सालों में चरणबद्ध तरीके से उन सभी जिलों को कवर करने की है जहां अभी तक मेडिकल कॉलेज नहीं हैं. पीपीपी मोड पर बनने वाले ये कॉलेज न केवल सरकारी नियंत्रण में होंगे, बल्कि निजी निवेश के आने से यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं और आधुनिक मशीनें जल्द उपलब्ध हो सकेंगी. अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगा. इससे स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक इलाज और मेडिकल शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ मरीजों को बड़े शहरों की ओर पलायन से राहत मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.

20 हजार सेविका और सहायिका की भर्ती करेगा समाज कल्याण विभाग

पटना. समाज कल्याण विभाग ने राज्य भर में 20 हजार से अधिक सेविका और सहायिका की चयन प्रक्रिया शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है. विभाग ने न केवल पुराने केंद्रों की रिक्तियों को भरने की तैयारी की है, बल्कि 18 हजार नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं. इस मेगा भर्ती अभियान से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. 1.14 लाख केंद्र संचालित, 18 हजार नए प्रस्तावित बिहार में फिलहाल 1 लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. इसके अलावा 18 हजार नए केंद्रों की स्वीकृति के लिए पत्राचार किया गया है और 31 मार्च तक अनुमति मिलने की संभावना है. अनुमति मिलते ही पहले चरण में 9 हजार नए केंद्रों पर बहाली प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. पुराने 2200 से अधिक केंद्रों पर भी सेविका-सहायिका के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू होगी. कई केंद्रों पर लंबे समय से पद खाली पाए गए हैं, जिससे पोषण और प्राथमिक शिक्षा सेवाएं प्रभावित हो रही थीं. विभाग ने 10 मार्च से नए केंद्रों के लिए स्थलों की पहचान का निर्देश दिया है. सभी सीडीपीओ को कहा गया है कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें जहां या तो आंगनबाड़ी केंद्र पास-पास संचालित हो रहे हैं या फिर ऐसे इलाके जहां केंद्र नहीं होने से बच्चों को पोषाहार और प्रारंभिक शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ता है. 31 मार्च तक पूरी होगी कागजी कार्रवाई अनुमति मिलने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है और 31 मार्च तक मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है. मंजूरी मिलते ही पहले चरण में 9 हजार नए केंद्रों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इसके साथ ही, पुराने 2200 केंद्रों पर जहां पद खाली पड़े हैं, वहां भी नई नियुक्तियां की जाएंगी. 10 मार्च से सभी सीडीपीओ (CDPO) को नए स्थलों की पहचान करने का सख्त निर्देश दिया गया है. विभाग का लक्ष्य उन क्षेत्रों को कवर करना है जहां फिलहाल कोई केंद्र नहीं है और बच्चों को पोषाहार या प्राथमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. 10 मार्च से शुरू होने वाले इस सर्वे में उन मोहल्लों और टोलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां आंगनबाड़ी सुविधाओं का अभाव है. जिलों से रिपोर्ट आने के बाद ही नए केंद्रों की स्थापना और वहां बहाली का खाका फाइनल होगा. अप्रैल से चयन प्रक्रिया समाज कल्याण विभाग के मुताबिक, पहले से चल रहे केंद्रों में पाया गया है कि बड़ी संख्या में सेविका और सहायिका के पद रिक्त हैं. इन पदों को भरने के लिए 1 अप्रैल से जिलों में चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. जो महिलाएं स्थानीय स्तर पर काम करना चाहती हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका है. भर्ती से जुड़ी विस्तृत योग्यता और चयन के मानदंडों की आधिकारिक घोषणा जल्द ही विभाग की वेबसाइट पर कर दी जाएगी.