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नीतीश पर तेजस्वी का तंज—साथ रहते तो हालात अलग होते

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने वाले फैसले से प्रदेश की राजनीति ने अचानक से करवट ली है। सत्ता पक्ष जहां नीतीश कुमार के फैसले की सराहना कर रहा है, तो वहीं विपक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार पर भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए दबाव बनाया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि अगर वे नीतीश कुमार के साथ होते तो उन्हें आज यह दिन नहीं देखना पड़ता और बिहार की सियासत से उन्हें बाहर नहीं होना पड़ता। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा, "नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं; उनके साथ हमारी पूरी सहानुभूति है। हमें पता है कि क्या हो रहा है और वह किस दौर से गुजर रहे हैं। अगर हम वहां होते, तो शायद नीतीश कुमार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। भाजपा लगातार दबाव बना रही थी। आखिरकार, यह तो होना ही था। नीतीश कुमार ने 20 साल तक बिहार की सेवा की। हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।" तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं। हम शुरू से ही कह रहे हैं कि भाजपा चुनाव के बाद नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी पर नहीं रहने देगी। वह अब सच हो रहा है। राजद-जदयू के गठबंधन टूटने के दौर का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी लोग जानते हैं कि हम लोगों ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार चलाई। नीतीश कुमार की सरकार में मैं दूसरी बार डिप्टी सीएम बना था। 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार हमें छोड़कर गए। उस दौरान उनके पास कोई वजह नहीं थी। उस समय भी हम लोगों ने कहा था कि भाजपा जदयू को खत्म करना चाहती है; जदयू बचेगी नहीं। हमारी पूरी सहानुभूति नीतीश कुमार के साथ है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी हमने कुछ नहीं कहा है। हमने कहा था कि नीतीश कुमार को घोड़ी तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ दिला रहे हैं। भाजपा नहीं चाहती है कि कोई ओबीसी समाज, दलित या आदिवासी समाज से आने वाला शख्स न्याय की बात करे। भाजपा के लोग उन्हें टिकने नहीं देना चाहते हैं। निशांत कुमार के राजनीति में आने पर तेजस्वी यादव ने कहा, "हम तो पहले से कहते रहे हैं कि उन्हें आना चाहिए। राजनीति में युवाओं को आना चाहिए।" बताते चलें कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन दाखिल कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह समेत बिहार सरकार के कई मंत्री मौजूद रहे।

Bihar BJP CM Race: चर्चा तेज, लेकिन नाम उजागर करने से बच रहे भाजपा के दिग्गज

पटना दो दशक तक बिहार का राजकाज संभालने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में सीएम के कैंडिडेट की तलाश तेज होनी तय है। नीतीश के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के खाते में जानी तय है। नए सीएम के नाम पर अटकलबाजी कल ही शुरू हो गई थी, जब यह खबर आई कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश को दिल्ली जाने के लिए मनाया जा रहा है। बिहार में भाजपा के पास बड़े नेताओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन दिल्ली में रेखा गुप्ता, ओडिशा में मोहन चरण मांझी, छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को कुर्सी मिलने के उदाहरणों से सारे नेता सतर्क हैं। पार्टी नेतृत्व किसके नाम की पर्ची निकाल दे, ये अंदाजा किसी को नहीं है। भाजपा का संसदीय बोर्ड ऐसे मसलों पर फैसला लेता रहा है, लेकिन वहां क्या तय होगा, यह भनक फैसले से पहले शायद ही किसी को लग पाएगी। नीतीश के सीएम पद छोड़कर राज्यसभा जाने के बाद यह जरूर संभव है कि भाजपा किसी पिछड़ा (OBC) या अति पिछड़ा (EBC) को ही मुख्यमंत्री के पद पर बिठाए। एनडीए की अगली सरकार में जेडीयू से दो डिप्टी सीएम की बात है। कहा जा रहा है कि एक तो नीतीश के बेटे निशांत कुमार होंगे। निशांत आज ही जदयू में विधिवत शामिल हो रहे हैं। निशांत को राजनीति में लाने के लिए नीतीश पर जेडीयू के ही नेता काफी समय से दबाव डाल रहे थे। अब जब बिहार को अगला और नया मुख्यमंत्री देने की बारी भाजपा के पास आ गई है तो नेताओं का नाम उछलना स्वाभाविक है। बात लंबे समय से भाजपा के अघोषित सीएम कैंडिडेट रहे केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय की हो या इस समय सबसे मजबूत नेता बनकर उभरे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की या फिर विवाद-बयान से दूर पार्टी और संगठन का काम करने वाले दीघा के विधायक संजीव चौरसिया की। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष दिलीप जायसवाल भी विकल्प हैं, जो अमित शाह के करीबी नेता के तौर पर गिने जाते हैं। भाजपा के पास विधानसभा में 89 और परिषद में 22 सदस्य हैं। कई राज्यों में चौंका चुकी भाजपा इनमें से किसी को भी सीएम बना सकती है। पार्टी चाहे तो विधानमंडल से बाहर के किसी नेता को भी सीएम बना सकती है। भाजपा की जीत दर जीत से यह साफ हो चुका है कि वह चुनाव से छह महीने पहले चुनाव की तैयारी करने वाली पार्टी नहीं है। पश्चिम बंगाल के चुनाव की तैयारी वह पिछले एक साल से कर रही है। अब फोकस बढ़ गया है। बिहार की राजनीति में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति के साथ वो एक ऐसा मुख्यमंत्री चुन सकती है, जो पार्टी और सहयोगियों दलों के नेताओं से बेहतर तालमेल रख सके। जातीय गणित भाजपा देखती है, लेकिन वो इकलौती चीज नहीं है, जिस पर वो किसी को सीएम बनाती है। गिरिराज सिंह ने कहा है कि जो भी बनेगा, वो नीतीश कुमार की मर्जी से बनेगा। मतलब निकालें तो भाजपा के जिन नेताओं के नीतीश से रिश्ते बेहतर नहीं हैं, उनका चांस कमजोर होगा। गठबंधन सरकार को चलाने के लिए राजनीतिक समझदारी के साथ जोड़-तोड़ का अनुभव जरूरी है। बिहार में इस तरह का अनुभव रखने वाले भी कई नेता भाजपा में हैं जो चुनाव के समय गठबंधन के दलों से सीट बंटवारे पर सहमति बनाते नजर आते हैं। लेकिन किस राजनेता के नाम पर अंतिम सहमति बनेगी, यह दिल्ली में ही तय होगा। उसके बाद ही पटना में पहले भाजपा और फिर एनडीए विधायक दल की बैठकों में जय-जय होगा। नाम का ऐलान विधायक दल की बैठक से पहले या बाद में होना औपचारिकता रहेगी।  

JDU दफ्तर में बवाल: नाराज कार्यकर्ताओं ने किया तोड़फोड़, नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी

पटना राजधानी के वीरचंद पटेल पथ स्थित जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को पूरे दिन उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ का माहौल रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले से पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते कार्यालय परिसर में हंगामा हो गया। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के साथ ही जदयू समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में दोपहर 12 से ही सैकड़ों कार्यकर्ता जमा हो गए और "नीतीश कुमार बिहार के हैं, उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे", "हम जान दे देंगे, लेकिन नीतीश को नहीं जाने देंगे" जैसे भावुक नारे लगाने लगे। नारेबाजी के बीच कुछ आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के अंदर फर्नीचर उलट-पलट दिया, टेबल-कुर्सियां तोड़ीं, प्लेटें-बर्तन फेंके और पोस्टर-बैनर फाड़ दिए। यहां तक कि भोज के लिए तैयार बफे काउंटर को भी नुकसान पहुंचाया गया। भोज की व्यवस्था केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर की ओर से नामांकन के उपरांत कार्यकर्ताओं के लिए किया गया था। कार्यकर्ताओं का मुख्य गुस्सा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी रहा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि ये नेता भाजपा के साथ मिलकर पार्टी को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने विधान पार्षद संजय कुमार उर्फ गांधी जी के साथ धक्का-मुककी की। उन्हें गाड़ी से उतरकर किसी तरह कार्यालय में प्रवेश मिला। हंगामें की सूचना पर पार्टी कार्यालय पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ भी रही। कार्यकर्ता उनकी गाड़ी के आगे लेट गए। साथ में रहे सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह उन्हें प्रदेश कार्यालय के अंदर प्रवेश कराया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लाठीचार्ज सहकर नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया था, अब वे उन्हें राज्यसभा भेजकर बिहार को अकेला नहीं छोड़ सकते। पार्टी कार्यालय के अंदर जाने के बाद उमेश कुशवाहा ने एकबार फिर कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की भावना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। फिर भी कार्यकर्ता नहीं माने। वे नारेबाजी करते रहे। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अभी मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है। आपलोग शांत रहें। प्रदेश कार्यालय में शाम तक रूक रूक कर पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ नारेबाजी होती रही। मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी होता रहा प्रदर्शन, गुस्से मे दिखे कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी इसी तरह का हंगामा देखा गया, जहां कार्यकर्ता रोते हुए विरोध जता रहे थे और आने-जाने वाले नेताओं की गाड़ियां रोकी जा रही थीं। सुबह 10 बजे से कार्यकर्ता यहां जुटे थे। पटना, नालंदा, बेगूसराय से पहुंचे जदूय कार्यकर्ताओं को पुलिस बार-बार आवास के आगे से हटा रही थी। लेकिन जदयू कार्यकर्ता फिर वहां पहुंचकर नीतीश कुमार के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। वहीं, अपने ही पार्टी के वरीय नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इस दौरान जदयू कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेता व पशुपालन विभाग के मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी को रोक दिया। गाड़ी पर कार्यकर्ता मुक्के मारे रहे थे। पुलिस ने किसी तरह आक्राेशितों को हटाकर मंत्री की गाड़ी को वहां से निकलवाया।  

बिहार में सत्ता बदलाव की अटकलें: नीतीश कुमार कब देंगे इस्तीफा, कब होगा नए सीएम का शपथ ग्रहण?

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधायक, विधान पार्षद रह चुके हैं। लोकसभा सांसद भी। अब राज्यसभा भी जा रहे हैं। मतलब, बिहार के सीएम की कुर्सी खाली हो रही है। कुर्सी कब खाली होगी और अगला चेहरा उस कुर्सी पर कब विराजमान होगा, इन सवालों का जवाब भी समझना अब जरूरी हो गया है। नीतीश कुमार का तुरंत इस्तीफा देना मजबूरी नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि नामांकन के साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी होगी। भारतीय जनता पार्टी जल्द से जल्द वह कुर्सी हासिल करना चाहेगी, ताकि माहौल उलटा न बन जाए। जबकि, नीतीश कुमार के पास फैसला लेने के लिए समय रहेगा। 5 मार्च, यानी आज राज्यसभा के लिए नामांकन होगा और 16 मार्च को उनका निर्विरोध निर्वाचित होना तय है। इसके बाद चूंकि 9 अप्रैल तक मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल है तो इस समय तक मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के बने रहने में कोई तकनीकी परेशानी नहीं। खरमास के नाम पर भाजपा दिखा सकती है तेजी भाजपा के लिए नीतीश कुमार को पदच्युत करना बहुत आसान नहीं था और न आगे रहेगा। फिर भी, चूंकि नीतीश कुमार ने खुद राज्यसभा जाने की बात को लेकर भाजपा के दबाव की चर्चा नहीं की है तो आगे भारतीय जनता पार्टी अपना सीएम और जदयू के दो डिप्टी सीएम के प्रस्ताव को लेकर जल्द से जल्द नीतीश कुमार से इस्तीफा लेने का प्रयास भी करेगी। 15 मार्च के बाद खरमास शुरू हो रहा है और 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा के लिए जीत का एलान होना है। चूंकि, 202 सदस्यों के कारण विधानसभा कोटे से राज्यसभा के रास्ते में कोई दिक्कत नहीं है, इसलिए भाजपा खरमास से पहले ही नई सरकार के गठन का रास्ता तय करना चाहेगी। जानिए, सीएम नीतीश कुमार ने क्या कहा? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है। संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।

बाबूलाल मरांडी ने नीतीश कुमार के ट्वीट पर दी प्रतिक्रिया, बोले– सुशासन में आपका योगदान सबसे बड़ा

रांची झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के ट्वीट पर जवाब दिया है। मरांडी ने लिखा, नीतिश कुमार, पिछले तीन-चार दशकों से आप बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। मरांडी ने आगे लिखा, बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में आपका योगदान सर्वोच्च रहा है। आपके नेतृत्व में राज्य ने प्रशासनिक स्थिरता, विकास और व्यवस्था की एक नई दिशा प्राप्त की। मरांडी ने लिखा, सार्वजनिक जीवन में आपने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आपका कार्यकाल राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। मरांडी ने कहा कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन आपके अनुभव, द्दष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा। आपके उज्ज्वल भविष्य और इस नई पारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। विकसित भारत के निर्माण में आपका अनुभव और योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।  

CM हेमंत ने नेमरा गांव में बाहा पूजा का निरीक्षण किया, तालाब और विकास कार्यों का लिया हाल

रांची  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक गांव नेमरा (गोला प्रखंड, रामगढ़ जिले) में बाहा पूजा के अवसर पर विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ तालाब का दौरा किया और जल संरक्षण व सफाई से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। तालाबों का संरक्षण जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों का संरक्षण ग्रामीण जीवन और पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को काम में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। इस मौके पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अंचल अधिकारी समेत कई विभागीय अधिकारी मौजूद थे। तालाब निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री सामुदायिक भवन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में बाहा पूजा के आयोजन, सुरक्षा, यातायात और अतिथियों के ठहरने की व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने निर्देश दिए कि पूजा के दौरान ग्रामीणों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। पूर्व विधायक और अन्य अतिथियों का आगमन बाहा पूजा में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री एक दिन पहले बुधवार शाम को नेमरा पहुंचे थे। इस दौरान पूर्व विधायक सीता सोरेन भी कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने गांव पहुंचीं। मुख्यमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है और सामुदायिक भवन में अतिथियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक व्यवस्था बीएसएनएल टावर के पास नियंत्रित की जा रही है ताकि आवागमन सुचारू रहे। गांव में उत्साह का माहौल बाहा पूजा के अवसर पर नेमरा गांव में उत्साह और खुशी का माहौल है। प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच पारंपरिक समारोह को शांतिपूर्ण और भव्य बनाने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।  

नीतीश चले दिल्ली: बिहार की सियासत में बड़ा मोड़, क्या भाजपा संभालेगी सीएम की कुर्सी?

पटना बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 105 दिन पहले 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खुद यह जानकारी दी है। नीतीश के राज्यसभा जाने का मतलब है राज्य की सत्ता में बहुत कुछ बदलने जा रहा है। राज्य में नई सरकार बनेगी। महज 105 दिन पहले दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं नीतीश के कुर्सी छोड़ने से बिहार के लिए और क्या-क्या बदल जाएगा? 1. पहली बार बिहार की सत्ता की बागडोर संभाल सकती है भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 105 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।   2. हिंदी हार्टलैंड का आखिरी किला फतह करेगी भाजपा 1980 में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिंदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 300 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 20 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है। इन सबके बावजूद हिंदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।  बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य है जहां भाजपा अब तक अपना मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रही है। 3. नौवीं बार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे नीतीश नीतीश कुमार बीते दो दशक के बिहार की सत्ता का पर्याय बने हुए हैं। इस दौरान उनकी पार्टी राज्य की पहले नंबर की पार्टी रही हो या तीसरे नंबर की मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते रहे। 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश का पहला कार्यकाल महज सात दिन का रहा था। इसके बाद 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने नीतीश ने अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। 2010 में उन्होंने प्रचंड जीत के साथ तीसरी बार शपथ ली, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। दरअसल, भाजपा ने जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया तो नीतीश ने अपनी राह बदल ली। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले उतरी और बुरी तरह हारी। पार्टी को राज्य की 40 में से महज दो सीटों पर जीत मिली। इस हार के बाद नीतीश ने कुर्सी छोड़ दी और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। महज नौ महीने बाद नीतीश ने फिर से सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके बाद 2015 का विधानसभा चुनाव नीतीश ने अपने धुर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर लड़ा और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया और एक बार फिर राज्य की बागडोर संभाली। 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद फिर से नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, जबकि उनकी पार्टी सीटों के लिहाज से राज्य में तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। 2022 में नीतीश ने फिर से लालू का साथ पकड़ा और फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नीतीश फिर से भाजपा के साथ आ गए और फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2025 में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश ने 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने महज 105 दिन बाद यह तय हो गया कि नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। शायद ये आखिरी बार भी होगा। 4. बिहार की सियासत में पीढ़ीगत बदलाव आपातकाल के दौर में बिहार की सियासत में कई युवा चेहरे उभरे। ये चेहरे दशकों तक बिहार की सियासत का पर्याय रहे। लालू प्रसाद यादव, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, शरद यादव, नीतीश कुमार इनमें सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। इन चेहरों में से रामविलास पासवान, सुशील मोदी और शरद यादव का निधन हो चुका है। लालू यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने के बाद से सक्रिय सियासत से दूर हैं। अब इस पीढ़ी के आखिरी बड़े चेहरे नीतीश के दिल्ली जाने के साथ ही बिहार की सियासत में एक पीढ़ी का लगभग अंत हो जाएगा। 5. बीस साल से बिहार की सत्ता में काबिज जदयू पहली बार बैक सीट पर होगी पिछले बीस साल और चार चुनाव से बिहार की सत्ता की बागडोर जदयू के हाथ में है। अब अगर राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है तो जदयू के गठन के बाद यह पहली बार होगा जब जदयू सहयोगी के रूप में बिहार की सत्ता में होगी। 6. दूसरी बार जदयू का शीर्ष नेता बिहार की सत्ता का हिस्सेदार नहीं होगा ये दूसरा मौका होगा जदयू सत्ता की … Read more

बिहार में ड्रग्स पर लगाम लगाने हर जिले में खुलेगा नारकोटिक्स थाना

पटना. बिहार सरकार ने हाल ही में आर्थिक अपराध इकाई और सीआईडी से अलग कर मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो का गठन किया है. अब इस नवगठित ब्यूरो को जिला स्तर तक मजबूत करने की तैयारी चल रही है. साइबर थानों की तर्ज पर राज्य के हर जिले में नारकोटिक्स थाना खोला जाए, ताकि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच तेज हो और अभियुक्तों को जल्द सजा दिलाई जा सके. राज्य से जिले तक- एक नई कमांड स्ट्रक्चर हाल ही में राज्य सरकार ने आर्थिक अपराध इकाई से नारकोटिक्स और सीआईडी से मद्य निषेध इकाई को अलग कर एक नई संरचना तैयार की है. यह नवगठित ब्यूरो शराब और सूखे नशे दोनों के खिलाफ कार्रवाई करेगा. राज्यस्तरीय थाने को मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि अधिसूचना की प्रक्रिया जारी है. इसी वजह से फिलहाल नारकोटिक्स से जुड़े केस आर्थिक अपराध इकाई में ही दर्ज हो रहे हैं. लेकिन अब फोकस जिला स्तर पर है. हर जिले में अलग नारकोटिक्स थाना खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे जांच की रफ्तार और निगरानी दोनों को धार मिलेगी. एडीजी की सीधी निगरानी, 218 टास्क फोर्स एक कमांड में नया ब्यूरो एडीजी (मद्य निषेध) के नेतृत्व में मिशन मोड पर काम कर रहा है. राज्यभर में जिला और अनुमंडल स्तर पर काम कर रही 218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) अब इसी ब्यूरो के नियंत्रण में होंगी. यानी शराब और ड्रग्स के खिलाफ अभियान का पूरा रिमोट कंट्रोल एक ही कमांड के पास रहेगा. सरकार ने इस मिशन को मजबूत करने के लिए 88 नए पद सृजित किए हैं. इसके अलावा 229 पुराने पदों का हस्तांतरण तेजी से किया जा रहा है. संविदा के आधार पर विशेषज्ञों की भर्ती की भी तैयारी है, ताकि तकनीकी और खुफिया स्तर पर ड्रग नेटवर्क को तोड़ा जा सके. तकनीकी अड़चनें जल्द दूर, कार्रवाई होगी सीधी फिलहाल राज्यस्तरीय थाने की अधिसूचना लंबित होने के कारण केस दर्ज करने में तकनीकी बाधा है. लेकिन जैसे ही जिला स्तर पर थाने सक्रिय होंगे, बिहार पुलिस को ड्रग पेडलर्स और बड़े सिंडिकेट के खिलाफ सीधी और त्वरित कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा. जल्द ही जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर नए आदेश जारी होंगे. माना जा रहा है कि यह कदम बिहार में नशे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई साबित हो सकता है.

बिहार विधानसभा में गेट नंबर 10 से आगे मीडिया की नो एंट्री

पटना. बिहार विधानसभा परिसर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं. प्रशासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक मीडिया प्रतिनिधियों की एंट्री केवल गेट संख्या 10 तक ही सीमित है. इसके आगे किसी भी पत्रकार को जाने की अनुमति नहीं दी. सुरक्षा और कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. गेट नंबर 10 ही होगा मीडिया का एंट्री पॉइंट प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, 5 मार्च को कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों के लिए केवल गेट संख्या 10 ही एकमात्र प्रवेश द्वार है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पत्रकारों को इस गेट से आगे जाने की अनुमति नहीं दी. विधानसभा के अन्य सभी द्वारों से मीडिया का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए यह ‘नो-गो ज़ोन’ तैयार किया गया है. सुरक्षा का ‘चक्रव्यूह’ या कवरेज पर पहरा? विधानसभा परिसर में अचानक बढ़ी इस सख्ती के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं. कई दिग्गज राजनीतिक हस्तियों और वीवीआईपी (VVIP) मेहमानों का जमावड़ा है। किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है. हालांकि, मीडिया गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या इतनी पाबंदी कवरेज को प्रभावित करेगी? प्रशासन का तर्क है कि यह फैसला केवल व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है. नियमों का उल्लंघन पड़ा तो होगी कार्रवाई प्रशासन ने न केवल रास्ते सीमित किए हैं, बल्कि सख्त लहजे में चेतावनी भी जारी की है. आदेश में कहा गया है कि जो भी मीडियाकर्मी निर्धारित नियमों या तय सीमा का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पत्रकारों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर गेट संख्या 10 पर पहुंचें और वहीं से अपनी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें. विधानसभा के आसपास सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि हर आने-जाने वाले की गहन तलाशी ली जा रही है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी को असुविधा पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि कार्यक्रम की सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. मीडिया संगठनों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके.

अमित शाह ने नीतीश के RS नामांकन की सराहना की, नॉमिनेशन के बाद CM हाउस में मुलाकात

पटना  नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर दिया है. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा. इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी. नीतीश की अमित शाह ने दिल खोलकर की तारीफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. ऐसे में उन्होंने पटना पहुंचकर नामांकन भरा. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. नीतीश कुमार के सियासी सफर पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, "नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में बिहार को जंगल राज से मुक्त करने का काम किया. बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा. इनके दामन पर कोई दाग नहीं है. नॉमिनेशन के बाद CM हाउस पहुंचे नीतीश, शाह ने की मीटिंग नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन कर दिया है. नॉमिनेशन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए हैं. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह स्टेट गेस्ट हाउस में बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ की मीटिंग . तेजस्वी बोले- सबको पता था, बीजेपी यही करेगी तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा कि पहले से ही कह रहा था कि उनको बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है. उनके साथ जो हो रहा है, सबको पता था कि यही होगा. हम लोग अगर वहां होते, तो उनको ये दिन नहीं देखना पड़ता. उनके साथ सहानुभूति है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि चुनाव में नारा दिया 25 से 30, फिर से नीतीश और अभी देखिए. पटना के जेडीयू दफ्तर में तोड़फोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात पर जेडीयू समर्थक भड़क उठे. भड़के जेडीयू समर्थकों ने पटना के जेडीयू दफ्तर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. 'मैं राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं…', नीतीश ने किया ऐलान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सक्रिय राजनीति में अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे और बिहार की नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देंगे.