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मेदिनीपुर कोर्ट में बम की सूचना से दहशत, पूरे परिसर की तलाशी; 3 घंटे ठप रहा कामकाज

संसू, मेदिनीपुर पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर शहर स्थित जिला अदालत परिसर में शुक्रवार दोपहर उस वक्त दहशत फैल गई, जब कोर्ट में बम रखे होने की सूचना मिली। इस धमकी भरी खबर के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा। ईमेल के जरिए दी गई धमाके की धमकी  मिली जानकारी के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट जज के कार्यालय में एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ था, जिसमें अदालत परिसर को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। खबर फैलते ही जजों, वकीलों और वादकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।  सूचना मिलते ही कोतवाली थाने की पुलिस सुबह 11 बजे तक मौके पर पहुंच गई। इसके बाद दोपहर 12 बजे बम निरोधक दस्ता (Bomb Squad) और खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की टीम ने मोर्चा संभाला।  घंटों चली तलाशी, नहीं मिला कोई संदिग्ध सामान  बम निरोधक दस्ते ने मेटल डिटेक्टर और स्निफर डॉग्स की मदद से करीब तीन घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान अदालत के मुख्य भवनों से लेकर कोने-कोने की जांच की गई।  गहन जांच के बाद जब कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, तब जाकर सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस घटना के कारण अदालत का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।  जनजीवन और न्यायिक कार्य प्रभावित  सरकारी अधिवक्ता गौतम मल्लिक ने घटना पर रोष जताते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दूर-दराज से आए लोगों को बिना सुनवाई के खाली हाथ लौटना पड़ा, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई।  गौरतलब है कि पिछले महीने भी आईआईटी खड़गपुर, घाटाल और झाड़ग्राम के उप डाकघर में इसी तरह की झूठी खबरें फैलाकर दहशत पैदा करने की कोशिश की गई थी। पुलिस अब ईमेल भेजने वाले की पहचान करने में जुट गई है।   

निशांत कुमार को MLC बनाने की अटकलें, JDU की आज लेंगे सदस्यता

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत रविवार को दिन में एक बजे जदयू प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस मौके पर जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सहित जदयू के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी को लेकर अभी संशय है। राजनीतिक गलियारे में ऐसी चर्चा है कि निशांत को नयी सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसके लिए वह आज जदयू की सदस्यता लेंगे। इसके बाद उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा। निशांत के जदयू में शामिल किए जाने का मांग लंबी अवधि से मांग चलती रही है। इस आशय के कई होर्डिंग्स भी कई बार शहर में दिखे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में विधायकों के साथ हुई नीतीश कुमार कुमार की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली थी कि निशांत राजनीति में आएंगे। उनसे इस संबंध में पार्टी के बड़े नेताओं की बात हो चुकी है। इस निर्णय के बाद जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के आवास पर जदयू के विधायकों की एक बैठक हुई, जिसमें निशांत भी मौजूद थे। बैठक में निशांत के जदयू में शामिल होने के स्वरूप पर विमर्श हुआ। मंत्री श्रवण कुमार व जदयू नेता संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी भी बैठक में शामिल हुए। पूरे बिहार में यात्रा करेंगे निशांत जदयू की योजना यह है कि निशांत को जिलों की यात्रा करायी जाएगी। संभवत: पश्चिमी चंपारण जिले से उनकी यात्रा आरंभ होगी। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जो असमंजस की स्थिति है, उसे निशांत कुमार के दौरे के माध्यम से दूर कराया जाए। वह नियमित रूप से नीतीश कुमार द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा नियमित रूप से मीडिया के साथ करते रहे हैं। युवाओं के लिए हुए फैसले की चर्चा करते रहे हैं। एक दिन पहले यह चर्चा थी कि निशांत हरनौत विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे। यह लंबी अवधि से जदयू की सीट रही है। हरिनारायण सिंह कई टर्म से वहां से जदयू के विधायक हैं, लेकिन अब कहा जा रहा कि निशांत हरनौत से चुनाव नहीं लड़कर विधान परिषद जाएंगे।

दाखिल-खारिज में देरी से शहरी जनता परेशान: विधायक

मुजफ्फरपुर. शहरी अंचल में दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में आम लोगों को हो रही परेशानी को लेकर बोचहां की विधायक बेबी कुमारी ने जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन से मुलाकात कर शिकायत की। उन्होंने बोचहां विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं से जिलाधिकारी को अवगत कराया। विधायक ने कहा कि मुशहरी अंचल में दाखिल-खारिज के मामलों में लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने नरौली डीह निवासी विनय कुमार भोला कुशवाहा के मामले का जिक्र करते हुए बताया कि उनका दाखिल-खारिज आवेदन बार-बार अस्वीकृत किया जा रहा है। इसके अलावा राम बाबू पांडेय के परिमार्जन से जुड़े मामले समेत कई लंबित दाखिल-खारिज आवेदनों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने और दोषी अधिकारी, कर्मचारी या डाटा ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान विधायक ने जीरोमाइल गोलंबर के सौंदर्यीकरण, विभिन्न सड़कों के निर्माण व चौड़ीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना, बिजली आपूर्ति और पेयजल व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को भी जिलाधिकारी के समक्ष रखा। इसी के साथ प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत 19 मार्च को मुशहरी और 23 मार्च को बोचहां प्रखंड कार्यालय परिसर में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। विधायक बेबी कुमारी ने बताया कि इन कार्यक्रमों में सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहेंगे, जहां आम लोग अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रख सकेंगे।

बिहार की सियासत में हलचल: अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है। बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज है। सम्राट रविवार को शाह से मिलने पटना से दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार में नए सीएम के नाम पर मंथन चल रहा है। चर्चा है कि अगला सीएम भारतीय जनता पार्टी से होगा। अमित शाह ने सम्राट चौधरी को दिल्ली क्यों बुलाया है, इस बारे में कोई स्पष्ट वजह तो सामने नहीं आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर उनसे चर्चा की जा सकती है। सम्राट बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में नंबर दो की पॉजिशन पर हैं। वह राज्य का सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, जो पहले नीतीश के पास हुआ करता था। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संभावित सीएम पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे बिहार सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद नए सिरे से सरकार का गठन किया जा सकता है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका ऐलान उसी समय होने की संभावना है।  

संजय झा के घर जेडीयू की मीटिंग में दिखे निशांत कुमार

पटना. बिहार सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ऐक्शन में आ गए हैं। पहली बार वे जदयू के बड़े नेताओं की बैठक में नजर आए। यह बैठक राज्यसभा सांसद और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के घर पर बुलाई गई थी जिसमें मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हुए। निशांत ने पार्टी नेताओं के साथ खुलकर बात की। नीतीश कुमार से हरी झंडी मिलने के बाद निशांत के जदयू में विधिवत शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। सियासत की पीच पर औपराचिक एंट्री से पहले निशांत ने अपना मैसेज साफ कर दिया है। इस बैठक में युवा ब्रिगेड के साथ अनुभवी राजनेता भी मौजूद थे। मीटिंग का वीडियो फोटो सामने आया है जिसमें संजय झा के अलावे, मंत्री श्रवण कुमार,जेडीयू एमएलसी संजय गांधी मौजूद दिख रहे हैं। इनके साथ-साथ जेडीयू विधायकों में कोमल सिह, चेतन आनंद, राहुल सिंह, अतिरेक कुमार, ललन सर्राफ, रूहेल रंजन, शुभानंद मुकेश, एम मृणाल, समृद्ध वर्मा शामिल हुए। मीटिंग में जदयू के 20 से अधिक नेताओं ने भाग लिया जिनके साथ निशांत कुमार ने भविष्य की योजनाओं पर विमर्श किया। मीटिंग के बाद जदयू नेताओं के साथ निशांत कुमार बैठक को लेकर मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि निशांत कुमार की पार्टी में जरूरत है। कोई बैठक नहीं थी, बातचीत थी। विधायकों ने उनसे मुलाकात की। आने वाले दिनों में पार्टी को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई। वहां मौजूद सभी जदयू सदस्यों ने निशांत कुमार का स्वागत किया। पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को लंबे समय से इस दिन का इंतजार था। नीतीश कुमार जी से भी सहमति मिल गई है कि निशांत पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि निशांत राजनीति में बेहतर परफॉर्मेंस दिखाएंगे। इधर, निशांत के स्वागत में पटना के चौक चौराहों पर पोस्टर लगना शुरू हो गया है। जदयू के साथ-साथ बीजेपी कार्यालय के पास भी निशांत के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें उन्हें नीतीश कुमार के साथ दिखाया गया है। निशांत के लिए सरकार और पार्टी में बड़ी भूमिका की मांग की गयी है। हालाकि, यह तय माना जा रहा है कि राज्य की नई सरकार में निशांत की भूमिका होगी। उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि 8 मार्च(रविवार) को दोपहर बाद निशांत औपचारिक तौर पर जनता दल यू की सदस्यता हासिल करेंगे। इससे पहले शुक्रवार की शाम को नीतीश कुमार के आवास पर जदयू की हाईलेवल मीटिंग हुई जिसमें नीतीश कुमार ने औपचारिक तौर पर अपने निर्णय से पार्टी जनों को अवगत कराया। राज्यसभा जाने की बात सुनकर कई नेता भावुक हो गए। नीतीश कुमार ने उन्हें ढाढस बंधाया कि वह हमेशा बिहार से जुड़े रहेंगे। मीटिंग में निशांत कुमार को पार्टी में शामिल कराने पर सहमति बनी।

नीतीश कुमार के 10 क्रांतिकारी कदम: बिहार में बदलाव की कहानी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने किया फॉलो

पटना नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कार्यकाल में खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना हुई। उनकी योजनाओं ने बिहार की महिलाओं के साथ ही पिछड़ा,अति पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में काफी मदद की। पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण नीतीश सरकार ने देश में पहली बार बिहार की महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 फीसदी आरक्षण दिया। इससे निचले स्तर पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 55 फीसदी तक हो गई है। बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तराखंड आदि ने भी इस फैसले का अनुसरण किया। नौकरी/पढ़ाई में महिलाओं को 35 प्रतिशत रिजर्वेशन 2013 में नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस में 35 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया। इसका प्रभाव हुआ कि आज बिहार में कुल पुलिस बल का लगभग 30 फीसदी महिलाएं हैं और महिला पुलिस की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। नीतीश सरकार ने 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू कर दिया। राज्य के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण लागू है। जीविका योजना ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ 2006 में बिहार में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) परियोजना की शुरुआत की। आज इससे एक करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर ‘जीविका दीदी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। यह महिलाएं 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में गोलंबद हैं। इसकी तर्ज पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका मिशन लागू किया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए हैं। इनमें रोजगार बढ़ाने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। कन्या उत्थान/ जननी बाल सुरक्षा योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने काफी काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान 2008-09 में कन्या उत्थान योजना शुरू की गई। इसके परिणाम स्वरूप जन्म पंजीकरण में भारी वृद्धि हुई। एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, जन्म पंजीकरण दर 54.9% बढ़कर 5.8 से 60.7 हो गया है। जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई। आशा और ममता जैसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं से गर्भवतियों व स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई। वर्ष 2006-07 में केवल चार प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल आती थीं, जो बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी, कड़े कानून बनाए अप्रैल 2016 से पूरे राज्य में देशी शराब और विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया। गांधी जयंती पर दो 2 अक्टूबर, 2016 को नया मद्य निषेध अधिनियम पूरे राज्य में लागू किया गया। यह सामाजिक सुधार की दिशा में बहुत बड़ा कदम रहा। शराबबंदी ने महिलाओं के लिए सामाजिक क्रांति लाई। इससे घरेलू हिंसा में 35 से 40 फीसदी कमी आई और परिवारों में शांति स्थापित हुई। महिलाओं की बचत बढ़ी। अपराध की दर घटी। कानून व्यवस्था से बदली बिहार की छवि नीतीश कुमार ने 2005 के बाद अपराध पर नियंत्रण के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। इससे बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया। बाहुबलियों को जेल भेजा गया और शाम होते ही घरों में दुबक जाने वाले लोग रात-बेरात सड़कों पर निकलने लगे। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान भी अपनी इस उपलब्धि का लगातार बखान किया। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान बाल विवाह और दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए 2017 से एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में ही करीब ढाई करोड़ लोगों ने बाल विवाह और दहेज प्रथा को समाप्त करने की शपथ ली। इसमें पंचायत प्रतिनिधि, स्कूली छात्रों, सरकारी अधिकारी, गैर-सरकारी कार्यकर्ता व आम जनता भी शामिल हुए। लड़कियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों के चलते पिछले वर्षों में बाल विवाह की दर में भारी कमी आई है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में महिला हेल्पलाइन स्थापित किया। यह हेल्पलाइन घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य सामाजिक बुराइयों से पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा और कानूनी सहायता प्रदान करती है। पिछड़ा वर्ग की साक्षरता को चलाया अभियान 2009-10 से अक्षर अंचल योजना चलायी, जिससे 67 लाख से अधिक महिलाएं साक्षर हुईं। 2013 में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया। इसके कारण बिहार में महिलाओं और एससी-एसटी की साक्षरता में पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इस उपलब्धि के कारण बिहार को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार प्राप्त हुआ। हुनर और औजार ‘हुनर’ के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों लड़कियों को विभिन्न व्यवसायों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया है। फिर उन्हें ‘औजार’ कार्यक्रम के तहत टूल-किट दी गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। महादलित टोलों के विकास को लेकर इनकी बहुलता वाली पंचायत और शहरी वार्डों में समुदाय से ही विकास मित्र बहाल किए गए।

उमेश कुशवाहा फिर बने जदयू के बिहार अध्यक्ष, नीतीश कुमार का भरोसा लगातार तीसरी बार कायम

पटना उमेश सिंह कुशवाहा जनता दल यूनाइटेड के तीसरी बार बिहार अध्यक्ष बन गए हैं। कुशवाहा ने शुक्रवार को इस पद के लिए नामांकन किया। जदयू प्रदेश अध्यक्ष के लिए अन्य कोई नामांकन नहीं आने के बाद उन्हें निर्विरोध चुन लिया गया। शाम 4 बजे इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई। बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में संगठनात्मक चुनाव चल रहे हैं। वैशाली जिले के महनार से विधायक उमेश सिंह कुशवाहा बीते 5 सालों से बिहार में जदयू की कमान संभाल रहे हैं। वह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। पहली बार वह 2021 में जदयू प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे। उन्होंने वशिष्ठ नारायण सिंह की जगह ली थी। इसके बाद वे लगातार इस पद पर चुने जा रहे हैं।   नीतीश को उमेश पर क्यों इतना भरोसा? नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की राजनीति का मुख्य आधार 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी) वोट बैंक है। कोइरी समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा इस समीकरण के 'कुश' पक्ष को मजबूती देते हैं, जो बिहार की राजनीति में एक अहम वोट बैंक माना जाता है। वहीं, उमेश कुशवाहा वे जेडीयू संगठन की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते हैं और पार्टी की राजनीति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम करते रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े कोइरी नेताओं के पार्टी छोड़ने के बावजूद वे नीतीश कुमार के साथ मजबूती से टिके रहे, जिसने उनके प्रति विश्वास को और बढ़ाया। नीतीश कुमार को पार्टी में एक ऐसे युवा चेहरे की जरूरत थी जो ऊर्जावान हो और कैडर के साथ संवाद कर सके। इसी कारण उन्हें 2021 में जेडीयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और हाल ही में वे तीसरी बार इस पद के लिए चुने गए हैं। उमेश कुशवाहा वैशाली जिले के महनार से विधायक हैं। वे 2015 और 2025 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि, 2020 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2020 का विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद नीतीश ने उन्हें जदयू प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। वर्तमान में, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद बिहार में राजनीतिक परिस्थिति बदल रही है। ऐसे में उमेश कुशवाहा को फिर से जदयू प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना, नीतीश की लंबी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उमेश कुशवाहा बोले- निशांत राजनीति में आएं तीसरी बार जदयू प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद उमेश कुशवाहा ने सीएम नीतीश के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि निशांत सक्रिय राजनीति में आएं। वे पार्टी में शामिल हों और राज्य की सेवा करें।  

PM मोदी के पोस्टर से छेड़छाड़, जदयू दफ्तर में विरोध प्रदर्शन; नीतीश के राज्यसभा जाने पर नाराज़गी

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले का उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड में विरोध तेज हो गया है। पटना स्थित जदयू के प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और नीतीश के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। जदयू कार्यालय में लगे पोस्टर में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर कालिख भी पोत दी। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश से राज्यसभा जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। शुक्रवार सुबह से पटना में जदयू कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। जदयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए और बैनर लगाकर नारेबाजी करने लगे। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह बिहार के जनादेश का अपमान है। बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था। उनके चेहरे पर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा गया था। इसलिए मुख्यमंत्री पद के लिए वही पात्र हैं। जदयू कार्यकर्ताओं ने जदयू अध्यक्ष एवं सीएम नीतीश कुमार से राज्यसभा जाने का फैसला वापस लेने की मांग की है। जदयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ इस दौरान जदयू कार्यालय के बाहर लगे फिर से नीतीश और मोदी के पोस्टर में पीएम के चेहरे पर कालिख भी पोत दी गई। साथ ही जदयू कार्यालय के गेट पर कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश से राज्यसभा जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पोस्टकार्ड भी लिखे। बता दें कि लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गुरुवार को यह ऐलान किया। उन्होंने जदयू प्रत्याशी के तौर पर गुरुवार को ही बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन भी कर दिया। नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में कहा कि वह अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं। उनकी बिहार विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहने की इच्छा है। वह विधायक, एमएलसी और लोकसभा सांसद रह चुके हैं और अब राज्यसभा सांसद के रूप में नई पारी की शुरुआत करेंगे। बताया जा रहा है कि नीतीश के राज्यसभा सांसद बनते ही अगले महीने बिहार में नई सरकार का गठन होगा और सूबे को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा। एक दिन पहले भी जदयू कार्यालय और सीएम आवास के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश के इस फैसले का विरोध करते हुए हंगामा किया था। शुक्रवार को एहतियातन पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया।

बिहार सरकार ने शुरू किया महिलाओं के रोजगार का सर्वे, 10 हजार रुपये लेने वाली महिलाओं की ड्यूटी पर जीविका कर्मचारी

 रजौली  रजौली प्रखंड क्षेत्र में 28000 महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपये की सहायता प्राप्त करने वाली महिलाओं के रोजगार की स्थिति जानने के लिए व्यापक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर बनाना है। अब यह आकलन किया जा रहा है कि मिली आर्थिक सहायता का उपयोग किस प्रकार के व्यवसाय में किया गया और उसका वर्तमान स्वरूप क्या है। सर्वे की जिम्मेदारी जीविका समूह के कर्मियों को सौंपी गई है। जीविका कर्मी मोबाइल एप के माध्यम से लाभुक महिलाओं से सीधे संपर्क कर रहे हैं। वे उनसे व्यवसाय की प्रकृति, आय की स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। एकत्रित डेटा को तत्काल एप पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जा सके। किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन समेत अन्य रोजगार के लिए लिए हैं रुपये प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई महिलाओं ने किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और सब्जी बिक्री जैसे छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं। कुछ महिलाओं ने घर आधारित खाद्य सामग्री निर्माण का कार्य भी शुरू किया है। सर्वे के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि व्यवसाय कितना सफल रहा और किन लाभुकों को आगे अतिरिक्त मार्गदर्शन या वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है। सरकार का मानना है कि सही मूल्यांकन के आधार पर अगली किस्त का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे और उनके आर्थिक सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा हो सके। क्या कहते हैं जीविका बीपीएम? रजौली जीविका के बीपीएम मनीष कुमार ने बताया कि सभी महिलाओं को प्रशिक्षण कार्य जल्दी शुरू कर दिया जाएगा।  

नीतीश पर तेजस्वी का तंज—साथ रहते तो हालात अलग होते

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने वाले फैसले से प्रदेश की राजनीति ने अचानक से करवट ली है। सत्ता पक्ष जहां नीतीश कुमार के फैसले की सराहना कर रहा है, तो वहीं विपक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार पर भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए दबाव बनाया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि अगर वे नीतीश कुमार के साथ होते तो उन्हें आज यह दिन नहीं देखना पड़ता और बिहार की सियासत से उन्हें बाहर नहीं होना पड़ता। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा, "नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं; उनके साथ हमारी पूरी सहानुभूति है। हमें पता है कि क्या हो रहा है और वह किस दौर से गुजर रहे हैं। अगर हम वहां होते, तो शायद नीतीश कुमार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। भाजपा लगातार दबाव बना रही थी। आखिरकार, यह तो होना ही था। नीतीश कुमार ने 20 साल तक बिहार की सेवा की। हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।" तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं। हम शुरू से ही कह रहे हैं कि भाजपा चुनाव के बाद नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी पर नहीं रहने देगी। वह अब सच हो रहा है। राजद-जदयू के गठबंधन टूटने के दौर का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी लोग जानते हैं कि हम लोगों ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार चलाई। नीतीश कुमार की सरकार में मैं दूसरी बार डिप्टी सीएम बना था। 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार हमें छोड़कर गए। उस दौरान उनके पास कोई वजह नहीं थी। उस समय भी हम लोगों ने कहा था कि भाजपा जदयू को खत्म करना चाहती है; जदयू बचेगी नहीं। हमारी पूरी सहानुभूति नीतीश कुमार के साथ है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी हमने कुछ नहीं कहा है। हमने कहा था कि नीतीश कुमार को घोड़ी तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ दिला रहे हैं। भाजपा नहीं चाहती है कि कोई ओबीसी समाज, दलित या आदिवासी समाज से आने वाला शख्स न्याय की बात करे। भाजपा के लोग उन्हें टिकने नहीं देना चाहते हैं। निशांत कुमार के राजनीति में आने पर तेजस्वी यादव ने कहा, "हम तो पहले से कहते रहे हैं कि उन्हें आना चाहिए। राजनीति में युवाओं को आना चाहिए।" बताते चलें कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन दाखिल कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह समेत बिहार सरकार के कई मंत्री मौजूद रहे।