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रक्सौल के व्यवसायी कलीम के ठिकानों पर IT का छापा

रक्सौल. सीमावर्ती शहर रक्सौल में शनिवार की सुबह आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के प्रमुख व्यवसायी मो. कलीम के विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों एवं पैतृक आवास पर एक साथ छापेमारी की। घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच आयकर विभाग के अधिकारी करीब एक दर्जन से अधिक वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे। आयकर टीम ने आदापुर प्रखंड के विष्णुपुरवा स्थित पैतृक घर, रक्सौल मुख्य पथ पर पंकज चौक के समीप स्थित प्रतिष्ठान, तनिष्क शोरूम तथा लक्ष्मीपुर स्थित हीरो होंडा शोरूम में एक साथ घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। सुबह के समय जब लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही संबंधित प्रतिष्ठानों और आवास को चारों ओर से घेर लिया गया तथा दस्तावेजों की जांच और पूछताछ प्रारंभ कर दी गई। अचानक हुई इस कार्रवाई की सूचना फैलते ही शहर में हड़कंप मच गया। आयकर विभाग की इस छापेमारी को लेकर दिनभर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। फिलहाल विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच जारी है और आधिकारिक रूप से कुछ भी बताने से परहेज किया जा रहा है।

झारखंड में सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना से बालिकाओं की पढ़ाई को मिला बल

रांची. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में सम्मिलित सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत अब तक 104.65 करोड़ रुपये का भुगतान लाभुक बालिकाओं के बीच हो चुका है। राज्य की हर बालिकाओं को बेहतर शिक्षा और बेहतर जीवन के साथ ऊंचाइयों तक पहुंचने के सभी अवसर मिले, इस उद्देश्य के साथ यह योजना वर्ष 2022-23 में की गई थी। इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत पात्र किशोरियों को चरणबद्ध ढंग से 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, ताकि किशोरी ड्राप आउट न हो तथा उसकी पढ़ाई जारी रहे। इस योजना का लाभ लेने के लिए इस वर्ष आवेदन की आनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई है। आठवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा की सभी बालिकाएं अपने विद्यालय से इस योजना का लाभ लेने के लिए सावित्रीबाईपीकेएसवाइ डाट झारखंड डाट इन पोर्टल पर आवेदन कर सकती हैं। अब तक 6,07,467 बालिकाओं ने इसका लाभ लेने के लिए आवेदन किया है, जिनमें 2,78,463 बालिकाओं को 104.65 लाख से अधिक राशि भुगतान किया जा चुका है। शेष लाभुकों की भुगतान की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। पूरे राज्य में अब तक ई विद्यावाहिनी में अंकित 15,007 विद्यालय में से 13,469 विद्यालयों से आवेदन प्राप्त हुए हैं। शेष विद्यालय से आवेदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को समय पर निष्पादित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, योजना का लाभ लेने के लिए अधिक जानकारी या सहायता के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सीडीपीओ या विद्यालयों के प्रधानाध्यापक से संपर्क किया जा सकता है।

चतरा के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का बदल गया स्थान

रांची/चतरा. मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट अब इटखोरी में लगाया जाएगा। पूर्व में इस प्रोजेक्ट को सदर प्रखंड के लक्षणपुर गांव स्थित भेड़-बकरा प्रजनन प्रक्षेत्र की भूखंड पर स्थापित करने की योजना थी, लेकिन झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ की तकनीकी टीम ने इटखोरी प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि फार्म की जमीन को उपयुक्त बताया है। कृषि फार्म की 10 एकड़ भूमि पर प्लांट की स्थापना की जाएगी। प्लांट स्थापना के लिए जमीन की अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ के प्रबंध निदेशक जयदेव बिस्वास ने 26 सितंबर 2025 को उपायुक्त कीर्तिश्री जी को पत्र लिख कर एनओसी की मांग की थी। प्रबंध निदेशक की इस मांग पर एनओसी की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उसके बाद तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करते हुए विस्तृत परियोजना प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। जिले में दूध उत्पादन, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी और महत्वाकांक्षी पहल की है। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की राशि से अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्लांट की स्थापना लंबे समय से लंबित है। करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन उपायुक्त अबु इमरान इस दिशा में पहल की थी। लेकिन सफल नहीं हो पाए थे। उसके बाद उनका स्थानांतरण हो गया। उनके स्थान पर रमेश घोलप यहां के उपायुक्त बने थे। लेकिन उन्होंने प्लांट स्थापना की दिशा में कोई रूचि नहीं दिखाई थी। वर्तमान उपायुक्त कीर्तिश्री जी प्रस्तावित परियोजना को जमीन पर उतारने को लेकर झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ पत्राचार कर पुनर्जीवित किया। जिला प्रशासन का प्रयास है कि इस साल के अंत तक प्लांट प्रारंभ हो जाए। NDDB होगी क्रियान्वयन एजेंसी हाल के महीनों में झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की संयुक्त तकनीकी टीम ने इटखोरी स्थित कृषि फार्म का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भूमि की उपलब्धता, परिवहन सुविधा, आसपास के बाजार और दूध उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए टीम ने इसे इटखोरी का चयन किया है। डेयरी प्लांट का क्रियान्वयन एजेंसी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) होगी। 50 हजार लीटर क्षमता का प्लांट मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता 50 हजार लीटर प्रतिदिन की है। तकनीकी टीम ने प्रस्तावित डेयरी प्लांट की क्षमता लिए पूरी तरह उपयुक्त बताया है। इटखोर में प्लांट की स्थापना होने से न सिर्फ चतरा, बल्कि हजारीबाग, बरही और चौपारण जैसे आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में विपणन योग्य अधिशेष दूध उपलब्ध है, जिसका समुचित उपयोग इस प्लांट के माध्यम से किया जा सकेगा। NOC की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला प्रशासन का लक्ष्य इस साल के अंत तक प्लांट की स्थापना है। उस दिशा में तीव्र गति से काम चल रहा है। स्थल का चयन पूर्व में लक्षणपुर गांव में किया गया था। लेकिन झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की संयुक्त तकनीकी टीम ने इटखोरी स्थित कृषि फार्म की जमीन को उपयुक्त बताया है। -कीर्तिश्री जी, डीसी, चतरा।

झारखंड कैबिनेट ने 18 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र को दी मंजूरी

रांची. राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 18 फरवरी से 19 मार्च तक विधानसभा का बजट सत्र चलाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट भवन में आयोजित बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दावोस और लंदन दौरे के लिए होने वाले खर्च की उद्योग विभाग को मंजूरी दी गई। महीने भर चलने वाले बजट सत्र में 24 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। 9 से 18 मार्च तक आय व्यय की अनुदान मांगों पर वाद विवाद होगा। कैबिनेट से मिली स्वीकृति के बाद राज्य के दस पंचायतों में नारी अदालत योजना चलाई जाएगी। राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना में भी संशोधन किया गया है। अब इस योजना में आने वाले स्वास्थ्य कर्मी एडवांस के तौर पर पांच लाख रुपए ले सकेंगे। इसके अलावा देश के 13 बड़े अस्पतालों में सीजीएचएस दर से अधिक दर पर भी राज्य कर्मी इलाज करा सकेंगे। शामिल किए गए अस्पतालों में सीएमसी वेल्लोर, अपोलो और मेदांता जैसे अस्पताल शामिल हैं। विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए इस योजना में शामिल होने को स्वैच्छिक किया गया है। डीजीपी नियुक्ति नियमावली में संशोधन को मंजूरी राज्य कैबिनेट ने बैठक में डीजीपी नियुक्ति नियमावली-2025 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके अलावा राज्य के 606 थानों में 8 हजार 854 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट क निर्देश के बाद जैप आइटी ने इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना दी है जिसे मंजूरी दी गई। 10 पंचायतों में बनेगी नारी अदालत महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव पर स्वीकृति देते हुए राज्य मंत्रिपरिषद ने 10 पंचायतों में प्रथम चरण में नारी अदालत लगाने की स्वीकृति दी है। पहले वर्ष इन अदालतों में महिला अधिकारों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसमें 7 से 11 सदस्यीय महिलाओं का समूह बनाया जाएगा। यह समूह सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक मामलों में महिलाओं की समस्या का समाधान करेगा। रांची जिले के नामकुम प्रखंड में रामपुर में यह अदालत लगाया जाएगा। कैबिनेट के अन्य निर्णय – पलामू जिले में रोड ओवर ब्रिज के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिस पर 114 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बोकारो जिले के जैनामोड़ से फुसरो तक सड़क निर्माण के लिए 157 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की गई। झारखंड विधि आयोग के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में पदों के पुनर्गठन को स्वीकृति दी गई। रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में भी पदों के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया है। झारखंड मिल्क फेडरेशन के अंतर्गत सरायकेला जिले में एक नया डेयरी प्लांट स्थापित किया जाएगा। नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्रबंधन एवं संचालन से संबंधित नियमावली को मंजूरी दी गई। अब जमशेदपुर के बालीगुमा की जगह सरायकेला के तीतर बेला में खुलेगा डेयरी प्लांट।

बिहार के खिलाडियों ने दो साल में देश-विदेश में बढ़ाया ‘वैभव’

पटना. बिहार में खेल अब सिर्फ मैदान तक सीमित गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव, युवा सशक्तिकरण और राज्य की नई पहचान का मजबूत आधार बन चुका है। 9 जनवरी 2024 को गठित बिहार खेल विभाग ने महज दो वर्षों में यह साबित कर दिया है कि यदि नीति स्पष्ट हो और इच्छाशक्ति मजबूत, तो खेल किसी भी राज्य की तस्वीर बदल सकते हैं। इन दो वर्षों का सफर बिहार को उस निर्णायक मोड़ पर ले आया है, जहां से वर्ष 2026 को खेलों के नए युग की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। कैसे शुरू हुई खेल क्रांति बिहार में खेल क्रांति की नींव योजनाबद्ध तरीके से रखी गई। अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और संरचित कोचिंग का रास्ता खोला। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटित बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर ने खेल को शिक्षा, शोध और करियर से जोड़ते हुए एक स्थायी ढांचा खड़ा किया। इन संस्थानों ने यह संदेश दिया कि बिहार में खेल अब शौक या विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य का सशक्त माध्यम है। गांव-गांव से निकल रहे चैंपियन बीते दो वर्षों में खेल विभाग ने अवसंरचना को केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अवसर सृजन का माध्यम बनाया। जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायत स्तर तक विकसित खेल सुविधाओं ने बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए खेल को सुलभ बनाया है। प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियम, जिला खेल भवन सह जिमनैजियम और गांवों में विकसित खेल मैदानों ने खेल को शहरों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है। वर्ष 2025 में ही 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियमों का पूर्ण होना इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। आज बिहार के गांवों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं। विश्व स्तर पर बिहार की पहचान बिहार अब केवल खिलाड़ियों को तैयार करने वाला राज्य नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का भरोसेमंद मेजबान भी बन चुका है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, सेपकटाकरा वर्ल्ड कप, एशियन रग्बी सेवन्स, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बिहार वैश्विक खेल मानकों पर खरा उतरने की पूरी क्षमता रखता है। इन आयोजनों से न केवल राज्य की छवि बदली, बल्कि पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा मिली। बच्चों में जगी खेल की नई रुचि खिलाड़ी विकास की सोच में भी बुनियादी बदलाव देखने को मिला है। ‘मशाल’ जैसी व्यापक प्रतिभा खोज पहल ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा। एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निरंतर मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, राजगीर सहित अन्य प्रशिक्षण केंद्रों के कारण अब बिहार के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं रही। खिलाड़ी-केंद्रित शासन की शुरुआत खेल विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया है। वहीं छात्रवृत्ति, सरकारी नियुक्ति, प्रोत्साहन राशि और कल्याणकारी योजनाओं ने यह भरोसा दिलाया है कि बिहार में खेल प्रतिभा का भविष्य सुरक्षित है। पदक जीतने वाले खिलाड़ी अब सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें स्थायी अवसर और सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिल रही है। बिहार बनेगा खेल हब वर्ष 2026 बिहार खेल विभाग के लिए आत्मविश्वास और विस्तार का वर्ष होगा। सात निश्चय योजना (03) के तहत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी, जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र, एकलव्य खेल केंद्रों का सुदृढ़ संचालन, नई छात्रवृत्ति प्रणाली और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां, ये सभी पहल बिहार को खेल आधारित विकास मॉडल की ओर ले जाएंगी। खेल युग की औपचारिक शुरुआत दो वर्षों में बिहार खेल विभाग ने यह सिद्ध कर दिया है कि खेल राज्य की पहचान और दिशा दोनों बदल सकते हैं। विकसित भारत 2047 और गौरवशाली बिहार 2047 के लक्ष्य के साथ बिहार अब खेलों के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है। वर्ष 2026 को बिहार में इसी नए खेल युग की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

बिहार में 36.3 लाख लीटर शराब जब्त कर 1.25 लाख लोग गिरफ्तार

पटना. बिहार में पिछले 9 साल से शराबबंदी लागू है। जिसके चलते यहां शराब तस्करों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। साल 2025 में पुलिस ने 36.3 लाख लीटर से ज़्यादा शराब जब्त की है। वहीं, शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में 1.25 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने बताया कि ज़ब्त की गई शराब में 18.99 लाख लीटर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और 17.39 लाख लीटर देसी शराब शामिल थी। अधिकारियों ने पिछले साल शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में 1,25,456 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1,21,671 था। यानी 2024 की तुलना में 2025 में 3 प्रतिशत अधिक गिरफ्तारी की गई है। 2016 में लागू किया गया था शराबबंदी कानून बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 में एक कानून बनाया था, जिसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, व्यापार, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, बिक्री और सेवन पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, इस कानून के कड़े प्रावधानों के बावजूद, तब से कई बार शराब की तस्करी और जहरीली शराब से होने वाली मौतों की खबरें सामने आई हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के लिए, स्पिरिट बेचने वालों पर खास नजर रखी जा रही है।उन्होंने कहा कि 2025 के दौरान शराब से जुड़ी कोई बड़ी घटना नहीं हुई, लेकिन शराबबंदी से जुड़े मामलों में जब्ती और गिरफ्तारियों में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पुलिस लगातार चला रही है अभियान उन्होंने कहा, "हम अवैध शराब के धंधे में शामिल लोगों की संपत्ति को भी टारगेट कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से रोका जा सके।" कुमार ने बताया कि पिछले साल शराब के धंधे के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कुल 38 ऑपरेशन किए। इसमें 15 ऑपरेशन झारखंड, 17 उत्तर प्रदेश, चार छत्तीसगढ़ और 2 मध्य प्रदेश में हुए। इन अभियानों के दौरान कुल 29 बड़े वाहन, 26 छोटे वाहन और 2,27,182 लीटर शराब ज़ब्त की गई। यह 2024 में प्रोहिबिशन यूनिट द्वारा किए गए चार ऑपरेशन्स की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है, जब 28,210 लीटर स्पिरिट जब्त की गई थी। विनय कुमार ने बताया कि 2025 में, शराब के अवैध व्यापार से जमा की गई संपत्ति के लिए कुल 289 लोगों की पहचान की गई और उन व्यक्तियों के खिलाफ BNSS की धारा 107 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह धारा आपराधिक गतिविधि से जुड़ी संपत्ति की कुर्की, जब्ती या बहाली से संबंधित है।

बिहार में अब फोन से करें ठगी की शिकायत

पटना. बीमा कराया, समय पर प्रीमियम भरा, लेकिन बीमारी के वक्त अस्पताल में कैशलेस सुविधा देने से या जीवनबीमा का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया। बड़े अरमनों से कोई मनचाहा ऑनलाइन सामान मंगवाया, डिलीवरी तो समय पर हुई मगर डिब्बा खुलते ही घटिया या खराब उत्पाद निकला। शिकायत की तो न रिटर्न मिला न रिफंड। मोबाइल, इंटरनेट, ट्रैवल या होम सर्विस का वादा बड़े-बड़े दावों के साथ किया गया, लेकिन पैसे लेने के बाद कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। डिजिटल दौर में जितनी तेजी से सुविधाएं बढ़ी हैं, उससे कहीं ज्यादा गति से उपभोक्ताओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी या सेवा में लापरवाही की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे मामले उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ज्यादातार ग्राहक अक्सर यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहां शिकायत करें, कौन कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाएगा, सालों तक अधिवक्ताओं की फीस देगा। ई-कामर्स प्लेटफार्म, कंपनियां व कई बार बड़े दुकानदार तक ग्राहकों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनका अधिकार नहीं देतीं। ऑनलाइन खरीदारी में खराब गुणवत्ता के सामान वापसी, रिफंड नहीं मिलने या सेवा देने में कोताही की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधीन संचालित उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) शुरू किया है। अब ठगे गए ग्राहकों को बिना कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाए उनका पैसा वापस चंद घंटों या अधिकतम दो-तीन दिन में वापस मिल रहा है। यह सुविधा सिर्फ एक फोन कॉल , वाट्सएप या मैसेज पर मिल रही है। यह जानकारी पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य रजनीश कुमार ने दी। तेजी से हो रहा समस्याओं का समाधान रजनीश कुमार ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन 1915 से समाधान नहीं मिला या वे उससे संतुष्ट नहीं थे, ऐसे 440 मामले 2025 में जिला आयोग के समक्ष आए थे। इसी समयावधि में आयोग ने 1033 मामलों का निष्पादन किया। इनमें नए के साथ लंबित मामले भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां जीवनबीमा, हेल्थ इंश्योरेंस या इससे संबंधित मामले सर्वाधिक रहते थे। आजकल ई-कामर्स खासकर इलेक्ट्रानिक उत्पादों से संबंधित व 10 मिनट डिलिवरी वाले मामले ज्यादा आ रहे हैं। इसके अलावा रेलवे, फ्लाइट, अपार्टमेंट-फ्लैट, विभिन्न प्रवेश परीक्षा व नौकरियों की तैयारी कराने वाली कोचिंग, स्कूल-कॉलेजों की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। अस्पताल की सेवा में कमी या चिकित्सा में उपेक्षा, ऑनलाइन शापिंग, इंश्योरेंस, भवन, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग, रेलवे, फ्लाइट समेत सभी तरह की शिकायतों का समाधान किया जाता है। हेल्पलाइन त्वरित समाधान घर बैठे उपलब्ध करा रहा है। सुबह 8:00 से शाम 8:00 बजे तक करें ऑनलाइन शिकायत – उपभोक्ता सुबह 8:00 बजे से शाम आठ बजे तक टोल फ्री नंबर 1915 पर फोन कर, 8800001915 पर वाट्सएप या एसएमएस या उमंग एप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां से समाधान नहीं होने या संतुष्ट नहीं होने पर जिला या राज्य आयोग में शिकायत की जाती है। शिकायत के लिए निम्न बातों का रखें ध्यान – आर्डर आइडी, बिल, भुगतान प्रमाण, समस्या की फोटो-वीडियो व एप-कंपनी से की शिकायत की फोटो जरूर संलग्न करें। कंपनी-एप को चैट-ईमेल से लिखित शिकायत कर उसका टिकट नंबर जरूर लें। तीन से सात दिनों में समस्या का समाधान नहीं होने या जवाब नहीं मिलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में फोन-वाट्सएप या ईमल करें। इसमे अपना नाम, मोबाइल नंबर, कंपनी का नाम, ऑर्डर विवरण, समस्या, प्रमाण व शिकायत अपलोड करें। हेल्पलाइन से सहायता नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में आफलाइन या ऑनलाइन मामला दर्ज कराएं। शिकायत की भाषा सरल व तथ्यात्मक रखें। इसमें तारीख, समय, राशि स्पष्ट लिखें। किस आयोग में कितने तक की शिकायत जिला आयोग में 50 लाख तक के मामले। राज्य आयोग में 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक के मामले। राष्ट्रीय आयोग में दो करोड़ रुपये से अधिक के मामले। क्या मांग सकते हैं – रिफंड मुआवजा सेवा में सुधार मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना   ऐसे मामलों में मिला त्वरित न्याय – बोरिंग रोड निवासी दिलीप कुमार को फ्लाइट टिकट रद करने के बाद रिफंड नहीं मिला, उन्होंने शिकायत की तो कंपनी ने तुरंत पूरी राशि वापस कराई। पाटलिपुत्र निवासी राजेश कुमार ने एक ई-कामर्स प्लेटफार्म से प्रीपेड किराना आर्डर किया। कंपनी ने डिलिवरी तो नहीं ही की, रिफंड के बारे में गलत सूचना दी। शिकायत पर पूरी राशि दो दिन में वापस कराई गई। पाटलिपुत्र निवासी कमलेश के पुत्र ने वाशिंग मशीन ऑनलाइन आर्डर कर भिजवाई। मशीन में खराबी के कारण वापस करने के आवेदन के बावजूद न तो मशीन उठवाई गई और न ही नई मशीन भेजी गई। उन्होंने आयोग की हेल्पलाइन में शिकायत की जिसके तीन दिन बाद उन्हें पूरी कीमत वापस कर दी गई। गोलारोड निवासी अखिलेश कुमार ने ई-कामर्स के प्लेटफार्म से पांच सितारा रेफ्रिजरेटर का आर्डर किया। जब उन्हें आर्डर मिला तो वह थ्री स्टार था। भारी छूट का लालच दे सस्ता व कम गुणवत्ता का उत्पाद भेजने की उन्होंने हेल्पलाइन में शिकायत की। इसके बाद कंपनी ने पूरी राशि वापस की। इन मामलों में प्राप्त कर सकते हैं सहायता खाद्य सामग्री की खराब गुणवत्ता व मिलावट, एक्सपायर्ड, नकली या घटिया गुणवत्ता का सामान, गलत लेबलिंग (तारीख, वजन, सामग्री छिपाना) के मामले में। गलत वजन या माप यानी कम तौलना-नापना, पैकेट पर लिखे वजन से कम सामग्री देना। अधिक मूल्य वसूली, अधिकतम से अधिक मूल्य लेना, बिल न देना या गलत बिल देना, सरकारी दर से अधिक कीमत लेना आदि। सेवाओं में कमी जैसे मोबाइल, इंटरनेट, डीटीएच, बिजली, पानी की खराब सेवा, बैंक, बीमा, अस्पताल, स्कूल, ट्रैवल आदि में लापरवाही, मरम्मत या डिलीवरी में अनावश्यक देरी। भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे करने वाले विज्ञापन, आफर-छूट के नाम पर धोखाधड़ी, गारंटी-वारंटी का गलत प्रचार आदि। ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े मामलों में गलत या खराब सामान की डिलीवरी, रिफंड-रिटर्न नहीं देना, ई-कामर्स प्लेटफार्म की शिकायत आदि। उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन जैसे शिकायत के बाद भी समाधान नहीं करना, जबरदस्ती कोई वस्तु-सेवा थोपना, अनुचित व्यापार व्यवहार करना।

पानी के 955 नमूनों में से 20 में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

पटना. लोक स्वास्थ्य संस्थान (पीएचआइ) के बैक्टीरियोलाजी विभाग में स्थित जल जांच प्रयोगशाला में गत वर्ष रेलवे के 743 व आमजन के 212 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 20 में हैजा, टायफायड, हेपेटाइटिस ए या ई, अमीबायसिस, जियार्डियासिस, डायरिया और फ्लोरोसिस जैसे रोगों के कारक बैक्टीरिया पाए गए। यह जानकारी पीएचआइ के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दी। ऐसे में यदि आप अपने पीने के पानी की गुणवत्ता जानना चाहते हैं तो सरकारी प्रयोगशालाओं में निशुल्क जांच करवा सकते हैं। सरकार ने इसकी पुख्ता व्यवस्था की है। जिले में पीएचईडी विभाग हर अनुमंडल, जिला के साथ राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला संचालित कर रहा है। वहीं PHI के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह के अनुसार आमजन यदि पानी जांच का आवेदन देते हैं तो उनकी टीम एक दिन में चार जगह से नमूने लेकर उनकी निशुल्क जांच करती है। इसकी रिपोर्ट संबंधित व्यक्ति व संस्थान को देने के साथ उनके विशेषज्ञ जल उपचार के उपाय भी सुझाते हैं। वहीं, पीएचईडी विभाग के अधीन एक राज्यस्तरीय, 38 जिला स्तरीय व 75 अनुमंडलीय स्तर जल जांच प्रयोगशाला कार्यरत हैं। कमोवेश हर जिले में दो से तीन जल जांच प्रयोगशाला हैं। जिलास्तरीय जांच प्रयोगशाला में हर माह 300 तो अनुमंडलस्तरीय प्रयोगशाला में 125 नमूनों की जांच की जानी है। 15 जिलास्तरीय प्रयोगशालाओं को एनएबीएल सर्टिफिकेट प्राप्त हैं। इनमें 16 मानकों पर पानी की गुणवत्ता जांच होती है। सरकार हर वर्ष सिर्फ पानी की जांच पर 62 लाख 32 हजार 500 रुपये खर्च कर रही है। सप्लाई का पानी साफ होने का दावा पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) पूर्वी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर कुमार अभिषेक के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के हर वार्ड में हर घर नल का जल योजना के तहत जिस जल की आपूर्ति की जा रही है, उसकी भौतिक, रासायनिक, बैक्टीरियल-वायरल जांच हर तीन माह में कराई जाती है। आपूर्ति जल अबतक सभी मानकों पर खरा उतरा है। जिले के लोग रेडियो स्टेशन के पीछे स्थित राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला या राजवंशी नगर में ऊर्जा आडिटोरियम के पास स्थित जिला जल जांच प्रयोगशाला के अलावा अपने अनुमंडल स्थित प्रयोगशाला में चापाकल, कुआं, बोरिंग, नल आदि के पानी की जांच निशुल्क करा सकते हैं। पीएचईडी के विपरीत नगर निगम के पास अपनी कोई जल जांच प्रयोगशाला नहीं है। हाल में पेयजल की शुद्धता का मामला गरमाने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने पीएचईडी की प्रयोगशालाओं में नमूने भेज कर गुणवत्ता की जांच कराई है। उपलब्ध जांच की सुविधा प्रयोगशाला में उपलब्ध जांच की सुविधा : पानी के रंग-गंध, पीएच, क्लोरीन, क्षारीयता, खारापन, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन, सल्फेट, नाइट्रेट, आर्सेनिक, ई-कोली या कोलिफार्म बैक्टीरिया, थर्मो टालरेंट कोलिफार्म बैक्टीरिया की जांच होती है। एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला कम पेयजल की जांच बीआइएस मानक आइएस-10500 के अनुसार की जाती है। नेशनल एक्रिडिएशन लैबोरेटरी बोर्ड प्रमाणित प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट को ही मानक माना जाता है। प्रदेश में पटना, भागलपुर, गया, मुज़फ्फरपुर, बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, शेखपुरा, सासाराम, बांका जैसे 15 जिलों की ही प्रयोगशाला एनएबीएल प्रमाणित हैं।आरओ के चयन में इन बातों का रखें ध्यान राज्य जल जांच प्रयोगशाला के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण कुमार ने बताया कि शुद्ध पेयजल के लिए सिर्फ कोई भी आरओ लगवाना उचित नहीं है। आरओ लगवाने के पहले पानी की जांच करवाएं और उसके अनुसार फिल्टर का चयन जरूरी है। पेयजल में आर्सेनिक, पानी लाल-पीला हो तो आयरन, हड्डी-दांत की समस्या ज्यादा हो, तो फ्लोराइड, नाइट्रेट, टीडीएस व ई-कोली या कोलीफार्म की जांच हर व्यक्ति को जरूर करानी चाहिए। आयरन ज्यादा हो तो आयरन रिमूवर फिल्टर लगवाएं आरओ नहीं। आर्सेनिक-फ्लोराइड ज्यादा है तो आरओ-यूएफ के साथ मिनरल कार्टिरेज लगवाएं, टीडीएस 300 से कम हो लेकिन बैक्टीरिया है तो यूवी प्लस यूएफ फिल्टर लगवाएं सामान्य आरओ नहीं। यदि सब कुछ मानक से ज्यादा हो तो संपूर्ण आरओ सिस्टम लगवाना चाहिए जो आर्सेनिक-फ्लोराइड सर्टिफाइड हो। पेयजल के मानक पेयजल रंगहीन, गंधहीन व प्राकृतिक स्वाद वाला होना चाहिए। पीएच मानक 6.5 – 8.5 के बीच l टीडीएस (कुल घुलनशील ठोस) 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम कठोरता या क्षारीयता 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम सल्फेट 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम क्लोराइड 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम नाइट्रेट 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम फ्लोराइड 1 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर आयरन (लोहा)0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम आर्सेनिक 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम लेड (सीसा)0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए। ई-कोली, टोटल कोलीफार्म जैसे बैक्टीरिया प्रति 100 मिलीग्राम में शून्य होना चाहिए। कीटनाशक, मरकरी, कैडमियम, फिनाल, साइनाइड जैसे विषैले तत्वों की भी जांच अब जरूरी होती जा रही है।

बिहार में एक साथ 23 आईएएस अफसरों के तबादले, नई जिम्मेदारी का आदेश जारी

पटना  बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने 23 आईएएस अफसरों का स्थानांतरण (IAS Transfer) किया है। इनमें से एक को एडिशनल चार्ज सौंपा गया है। पूर्णिया, बाढ़, महुआ (वैशाली), पालीगंज, नौगछिया और बगहा (पश्चिम चंपारण) के अनुमण्डल पदाधिकारी बदले गए हैं। इसके अलावा उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी और नगर आयुक्त समेत कई पदों के प्रभार में बदलाव हुआ है। तबादले और नियुक्ति से संबंधित आदेश 9 जनवरी 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी कर दिया है। आईएएस अधिकारी समीर सौरव उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद पटना को स्थानांतरित करके प्रबंध निदेशक कम्फेड पटना के पद पर भेजा गया है। दीपक कुमार मिश्रा नगर आयुक्त नालंदा को संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा उन्हें अपर निदेशक, मिशन निदेशक का कार्यकाल, बिहार विकास मिशन पटना का एडिशनल चार्ज भी सौंपा गया है। इन आईएएस अफसरों का हुआ तबादला      अभिषेक पलासिया, उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद खगड़िया को नगर आयुक्त, गया नगर निगम, गयाजी के पद पर पदस्थ किया गया है।     कुमार निशांत विवेक, उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद गोपालगंज को नगर आयुक्त बिहार शरीफ नगर निगम नालंदा के पद की जिम्मेदारी दी गई है।     श्रीकांत कुण्डलिक खांडेकर उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद नालंदा को उप विकास आयुक्त -सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद पटना पद का प्रभार सौंपा गया है।     शुभम कुमार, नगर आयुक्त भागलपुर नगर निगम को विकास उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद नालंदा के पद पर पदस्थ किया गया है।     शिवाक्षी दीक्षित नगर आयुक्त मुंगेर नगर निगम को अगले आदेश तक नगर आयुक्त बेतिया नगर निगम पश्चिम चंपारण पद पर भेजा गया है।     पार्थ गुप्ता अनुमंडल पदाधिकारी पूर्णिया को नगर आयुक्त मुंगेर नगर निगम मुंगेर के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।     सूर्य प्रताप सिंह उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद के कैमूर, भभुआ को उपविकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद समस्तीपुर के पद पर भेजा गया है।     लक्ष्मण तिवारी, नगर आयुक्त, बेतिया नगर निगम पश्चिम चंपारण को उप विकास आयुक्त -सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद सारण, छपरा के पद की जिम्मेदारी मिली है।     आशीष कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी बाढ़ पटना को नगर आयुक्त मोतिहारी नगर निगम मोतिहारी पद पर भेजा गया है।     किसलय कुशवाहा अनुमंडल पदाधिकारी, महुआ, वैशाली को नगर आयुक्त भागलपुर नगर निगम पद की जिम्मेदारी दी गई है।     गौरव कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी बगहा पश्चिमी चंपारण को उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद गोपालगंज के पद पर पदस्थ किया गया है।     श्वेता भारती को उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद, खगड़िया पद पर भेजा गया है।     दिव्या शक्ति को उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद, सहरसा पद की जिम्मेदारी दी गई है। 11 बीएएस अफसरों को भी मिली नई जिम्मेदारी  राज्य सरकार ने शुक्रवार को कई बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का स्थानांतरण किया है। अनुमंडल पदाधिकारी, विशेष कार्य पदाधिकारी और सचिव समेत कई पदों के प्रभार में बदलाव किया गया है। पदस्थापना के प्रतीक्षा कर रहे चंदन कुमार को पालीगंज पटना का अनुमण्डल पदाधिकारी बनाया गया है।  ज्योत्सना कृष्ण को विशेष कार्य पदाधिकारी सामान्य प्रशासन विभाग पद पर नियुक्त किया गया है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग का नया सचिव संजय कुमार निराला को बनाया गया है। आशीष नारायण अनुमंडल पदाधिकारी राजगीर नालंदा को विशेष कार्य पदाधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय पद की जिम्मेदारी दी गई है। अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जमुई पद पर कार्यरत अनिल कुमार को अनुमंडल पदाधिकारी गया सदर पद पर भेजा गया है। उप सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय पद पर कार्यरत राजीव रंजन कुमार सिंह को अपर समहर्त्ता- सह- अपर जिला दंडाधिकारी नालंदा पद की जिम्मेदारी दी गई है।

केसी त्यागी की JDU से छुट्टी, पार्टी ने कहा- ‘अब उनका हमारे साथ कोई संबंध नहीं’

पटना  जेडीयू के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी का पार्टी में अध्याय अब समाप्त हो चुका है. हाल के दिनों में के.सी. त्यागी के कुछ बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं. सूत्रों के अनुसार, त्यागी ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया था, जिसके बाद जेडीयू नेतृत्व ने उन्हें दूरी बनाने का फैसला किया. पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन के हालिया बयान से यह साफ हो गया है कि जेडीयू का अब के.सी. त्यागी से कोई औपचारिक संबंध नहीं रह गया है.  के.सी. त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग उठाई थी. उन्होंने बाकायदा पीएम मोदी को लेटर लिखकर इसकी मांग की थी. अपने पत्र में त्यागी ने लिखा था कि जैसे पिछले साल चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया था, उसी तरह नीतीश कुमार भी इसके पूरी तरह हकदार हैं. लेकिन जेडीयू ने उनकी इस मांग से किनारा कर लिया. जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'के.सी त्यागी की इस मांग का पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से कोई लेना नहीं होता है. दरअसल, वह जेडीयू के साथ हैं या नहीं, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ये भी पता नहीं है. इसलिए उनके बयानों को और उनकी विज्ञप्ति को उनकी निजी क्षमता में दिए गए बयान के तौर पर लेना चाहिए.' सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है. हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल के.सी. त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है. इसकी वजह पार्टी से उनके लंबे और पुराने संबंध बताए जा रहे हैं. जेडीयू के भीतर यह माना जा रहा है कि त्यागी ने पार्टी के साथ लंबे समय तक अहम भूमिकाएं निभाई हैं, जिसे देखते हुए नेतृत्व किसी तरह का टकराव नहीं चाहता. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, के.सी. त्यागी अब जेडीयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते. मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में दिया था बयान भविष्य में पार्टी की ओर से जारी होने वाले बयानों और राजनीतिक रुख में उनका कोई दखल नहीं होगा. जेडीयू नेतृत्व ने इस मुद्दे पर फिलहाल संतुलित रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि यह अलगाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से हुआ है. जेडीयू के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी नेतृत्व आगे की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. बता दें कि हाल ही में के.सी. त्यागी ने मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान दिया था, जो जेडीयू नेतृत्व को नागवार गुजरा. उन्होंने कहा था, 'खेल में राजनीति नहीं लाना चाहिए. जब बांग्लादेश ने हिंदू क्रिकेटर लिट्टन दास को अपनी टीम का कप्तान नियुक्त किया है, तो भारत को भी मुस्तफिजुर पर पुनर्विचार करना चाहिए और उन्हें आईपीएम में खेलने की अनुमति दी जानी चाहिए.' बांग्लादेश में हिंदुओं पर हालिया अत्याचार और उनकी हत्याओं के बाद मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल में लेने का भारत में जबरदस्त विरोध हुआ. इसके बाद बीसीसीआई के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्तफिजुर को रिलीज कर दिया. हालांकि, के.सी. त्यागी ने ये माना था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों से भारत में गुस्सा है. लेकिन उनका आईपीएल को लेकर दिया गया बयान जेडीयू को रास नहीं आया. पार्टी सूत्रों का मानना है कि उन्हें आईपीएल पर बयान देने की क्या जरूरत है और वो भी ऐसा बयान जो जनमत की भावना के खिलाफ हो और एनडीए गठबंधन में अलग-अलग राय दिखाए?  जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि जब मामला दो देशों के बीच का हो तो सरकार के सहयोगी दल के नाते बोलने से पहले त्यागी को पार्टी में बात करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. के.सी. त्यागी पहले भी बड़े सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री के माध्यम से नियुक्ति, समान नागरिक संहिता और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर एनडीए की नीतियों से अलग बयान दे चुके हैं, जिसने जेडीयू के लिए असहज स्थिति में डाल दिया. इन बयानों के कारण ही के.सी. त्यागी से जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी जगह राजीव रंजन को जेडीयू ने अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था.