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भोपाल के सरकारी स्कूल में हादसा, एमएलबी स्कूल की क्लास में गिरा प्लास्टर, दो बच्चियों को चोट

भोपाल भोपाल के एक पीएमश्री स्कूल में चलती कक्षा के दौरान छत का प्लास्टर छात्राओं पर गिरने से हड़कंप मच गया। सभी छात्राएं और शिक्षक कक्षा से निकलकर बाहर आ गए। इस हादसे में दो छात्राएं घायल हो गईं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह मामला भोपाल के बरखेड़ा स्थित शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्कूल (एमएलबी) का है। इस स्कूल का चयन पीएमश्री स्कूल के रूप में तीन साल पहले हुआ था, लेकिन अब तक स्कूल भवन की मरम्मत और सुधार कार्य नहीं किया गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ। बता दें कि इसी स्कूल में बीते शुक्रवार 11 जुलाई को भी एक कक्षा में छत का प्लास्टर गिरा था। शुक्र है कि उस दौरान कक्षा में कोई विद्यार्थी या शिक्षक उपस्थित नहीं था।   बारिश के बाद सीलन की समस्या इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को एक शिकायत पत्र लिखा था, इसके बावजूद सुधार कार्य नहीं किया गया। बल्कि यह निर्देश दे दिए गए कि इन कमरों में कक्षाएं न लगाई जाएं। स्कूल प्राचार्य स्मिता मेश्राम ने बताया कि स्कूल की कक्षाओं में वर्षा के बाद से ही सीलन की समस्या बनी हुई है, जिसकी सूचना पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन विभाग कोई सुधार कार्य नहीं कर रहा है। शौचालय भी खराब स्थिति में छात्राओं ने बताया कि स्कूल में बने शौचालयों की भी हालत बेहद खराब है, वह गंदे पड़े रहते हैं। लोहे के दरवाजे नीचे से गल गए हैं, दीवारों पर भी सीलन है। हर साल वर्षा में यही स्थिति होती है। वहीं, शिक्षकों ने बताया कि पूरे स्कूल में सीलन की समस्या है। कई कमरों की छत का प्लास्टर गिर रहा है।  

बीमा राशि रोकने वाली लापरवाही पर कोर्ट का तमाचा, 18 साल बाद टूटा पिता का इंतजार

भोपाल बैतूल जिले के सरकारी स्कूल की एक छात्रा की दुर्घटना में मृत्यु के बाद भी उसके परिवार को विद्यार्थी सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत बीमा राशि नहीं दी गई। 18 साल बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पिता को न्याय देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को दोषी मानते हुए 35 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश सुनाया। मामला बैतूल जिले के उड़दन ग्राम का है, जहां के निवासी कुंजीलाल कुमरे ने डीईओ और द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ आयोग में अपील लगाई थी। आयोग के सदस्य डॉ. श्रीकांत पांडेय और डॉ. मोनिका मलिक की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि छात्रा बीमा की हकदार थी और उसकी मृत्यु के 15 दिन के भीतर बीमा राशि का भुगतान किया जाना चाहिए था। बता दें कि इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पिता के खिलाफ में निर्णय सुनाया था, जिसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की गई थी।   बीमा न मिलने का कारण डीईओ की लापरवाही बीमा कंपनी ने दलील दी कि डीईओ ने निर्धारित समय पर प्रीमियम राशि जमा नहीं की थी, इस कारण पालिसी प्रभाव में नहीं रही। कंपनी ने यह भी कहा कि पालिसी की अवधि एक अगस्त 2006 से 31 जुलाई 2007 तक थी, जबकि छात्रा की मृत्यु 19 अगस्त 2007 को हुई। वहीं, अपीलकर्ता के वकील ने तर्क रखा कि योजना का नवीनीकरण हर वर्ष होता है और एक अगस्त 2007 से 31 जुलाई 2008 तक नई पालिसी प्रभावी थी। इसके अलावा योजना के तहत डीईओ को स्थानीय निधि से प्रीमियम राशि जमा करने की सुविधा भी थी। आयोग का निष्कर्ष आयोग ने पाया कि पूरी कक्षा के लिए लगभग 2.65 लाख रुपये की प्रीमियम राशि डीईओ को जमा करनी थी, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरती। इस कारण बीमा कंपनी की बजाय डीईओ को दोषी मानते हुए हर्जाने का आदेश दिया गया।

सेहत सुधारने के नाम पर जहर! भोपाल में ड्रग्स रैकेट में डॉक्टर और जिम संचालक शामिल

भोपाल भोपाल क्राइम ब्रांच ने ड्रग तस्करी के एक बड़े गिरोह का खुलासा करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपित युवाओं को एमडी ड्रग्स (मेथामफेटामिन) की लत लगाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाते थे। वे वजन कम करने से लेकर अवसाद से जूझ रहे लोगों को एमडी ड्रग्स दवा के रूप में दिलवाते थे। इसके लिए वे डॉक्टरों का सहारा भी लेते थे। बाद में नशे के आदी हो चुके यही युवा उनके स्थायी ग्राहक बन जाते थे तो उन्हें महंगे दामों पर ड्रग्स बेचते थे। इसके अलावा तस्कर शहर के क्लब-पबों में होने वाली नाइट पार्टियों और कालेजों में भी लंबे समय से एमडी ड्रग्स खपा रहे थे। क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि तस्कर शुक्रवार रात गोविंदपुरा स्थित सब्जी मंडी टीन शेड के पास एमडी ड्रग्स लेकर किसी ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बुधवारा निवासी 28 वर्षीय सैफुद्दीन पिता रफीकउद्दीन व ऐशबाग स्थित बाग फरहत अफजा निवासी 28 वर्षीय आशू उर्फ शाहरूख की तलाशी ली तो उनके पास से 15.14 ग्राम एमडी ड्रग्स मिला। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर ड्रग्स, स्कूटी और मोबाइल जब्त कर लिया है। इनमें से एक आरोपित सैफुद्दीन पांच हजार का इनामी बदमाश था, जो क्राइम ब्रांच के ही एनडीपीएस के एक मामले में फरार था। एसआइ नितिन पटेल के अनुसार, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे लंबे समय से ड्रग्स तस्करी के गिरोह से जुड़े हैं। सनव्वर नामक तस्कर से वे एमडी ड्रग्स खरीदते हैं। इसके बाद आरोपित उस एमडी ड्रग्स को महंगे दामों पर भोपाल के पबों और क्लबों में बेचते थे। डॉक्टर और जिम ऑपरेटर करते थे उनकी मदद साथ ही कॉलेजों में नशे के आदी युवाओं को भी सप्लाई करते थे। आरोपितों का कहना है कि वे ड्रग्स की लत लगाने के लिए नए ग्राहकों को भी तैयार करते थे। इनमें कुछ डॉक्टर भी उनकी मदद करते थे। वे अवसाद से जूझ रहे लोगों को एमडी ड्रग्स दवाई के रूप में देते थे, ताकि वे इसके आदी हो जाएं और फिर महंगे दामों पर खरीदें। इसके अलावा जिम संचालक एक्सरसाइज करने वाले लोगों को मोटापा कम करने की दवाई के रूप में ड्रग्स देते थे। आरोपितों ने पूछताछ में ड्रग्स की बात भी कबूली है। आरोपितों ने इस गिरोह से जुड़े करीब दस संदिग्ध लोगों के नाम लिए हैं, जिसकी जांच पुलिस कर रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में किसी भी संदिग्ध की पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि जांच के घेरे में डाक्टर, जिम और पब संचालक हैं। उनकी जांच की जा रही है, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

शहडोल में ब्रेक फेल बस को रोकने बना मानव ढाल, ट्रक ड्राइवर ने दिखाई बहादुरी

शहडोल शहडोल जिले के पथखई घाट में शनिवार की शाम एक बड़ा  हादसा उस समय टल गया, जब रायपुर से कांवड़ियों को लेकर मैहर जा रही एक बस का ब्रेक फेल हो गया। बस अनियंत्रित होकर घाटी की ओर तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन सामने से आ रहे ट्रक चालक की सूझबूझ से सभी यात्रियों की जान बच गई। घटना सिंहपुर थाना क्षेत्र के पथखई घाट पर हुई। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के रायपुर से मैहर देवी के दर्शन के लिए जा रही बस (क्रमांक CG-07-BW-2738) में 50 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे। जैसे ही बस पथखई घाट पर पहुंची, उसका ब्रेक अचानक फेल हो गया और वह अनियंत्रित होकर घाटी की ओर लुढ़कने लगी।   इसी दौरान रीवा से छत्तीसगढ़ की ओर जा रहा एक ट्रक सामने से आ रहा था। ट्रक चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपनी जान की परवाह  किए बिना ट्रक को बस के सामने सटा दिया। इससे बस ट्रक से टकराकर रुक गई और खाई में गिरने से बच गई। हादसे में बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन सभी यात्री सुरक्षित हैं। मौके पर पहुंची सिंहपुर पुलिस ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली थी और तत्काल टीम को रवाना किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पथखई घाट पर आए दिन हादसे होते रहते हैं क्योंकि यहां वाहन तेज गति से चलते हैं और मोड़ काफी खतरनाक हैं। इस बार ट्रक चालक की सूझबूझ और साहस से एक बड़ी त्रासदी टल गई। 

मध्य प्रदेश: कुछ दिन राहत भरा रहेगा मौसम, बारिश के सिस्टम हुए निष्क्रिय

भोपाल  अवदाब का क्षेत्र अब राजस्थान की तरफ चला गया है। मानसून द्रोणिका भी ऊपर की तरफ चली गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, किसी प्रभावी मौसम प्रणाली के सक्रिय नहीं रहने के कारण अभी दो-तीन दिन तक बारिश बारिश के आसार नहीं हैं। वातावरण में बड़े पैमाने में नमी रहने के कारण कहीं-कहीं बौछारें पड़ सकती हैं। उधर, शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक सिर्फ श्योपुर में दो मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी अभिजीत चक्रवर्ती ने बताया कि पूर्वी राजस्थान और उससे लगे उत्तर-पश्चिम क्षेत्र पर अवदाब का क्षेत्र बना हुआ है। इसके कमजोर पड़कर गहरे कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होकर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून द्रोणिका अवदाब के क्षेत्र से होकर फतेहगढ़, मुजफ्फरपुर, बांकुरा, कोंटाई से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है।   पूर्वी और उत्तरी इलाकों में हुई भारी बारिश एक पश्चिमी विक्षोभ वर्तमान में पाकिस्तान और उससे लगे जम्मू के आसपास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। इन मौसम प्रणालियों का प्रभाव मध्य प्रदेश पर अब नहीं है। इस वजह से दो-तीन दिन तक भारी बारिश होने की संभावना नहीं है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि प्रदेश के पूर्वी एवं उत्तरी क्षेत्र में भारी बारिश हुई है। इस वजह से उस क्षेत्र में काफी नमी बरकरार है। इस कारण तापमान बढ़ने की स्थिति में गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। उधर, पिछले 24 घंटों के दौरान शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक श्योपुर में 48.2, शिवपुरी में 36, गुना एवं ग्वालियर में 33.2, नौगांव में 28, दतिया में 14.2, पचमढ़ी में 8.2, टीकमगढ़ में छह, जबलपुर में पांच, खजुराहो में चार, सिवनी में 3.2 और मलाजखंड में 2.5 मिलीमीटर बारिश हुई।

फर्जी एनकाउंटर का सच उजागर? CBI ने मारा छापा, निरीक्षक पपोला निलंबित

ग्वालियर नीमच में 16 साल पहले हुए फर्जी एनकाउंटर मामले में फरार चल रहे ग्वालियर में पदस्थ निरीक्षक मंगल सिंह पपोला की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है, वहीं सीबीआई की टीम उनकी तलाश में ग्वालियर के ठिकानों पर दबिश दे रही है। सूत्रों के अनुसार, ग्वालियर पुलिस के कुछ अधिकारी पर्दे के पीछे से निरीक्षक मंगल सिंह पपोला की मदद कर रहे हैं। वर्ष 2009 में नीमच पुलिस ने बंशी गुर्जर का एनकाउंटर करने का दावा किया था, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि बंशी गुर्जर जीवित है। इसके बाद यह मामला फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ। घटना के समय जो पुलिसकर्मी और अधिकारी एनकाउंटर टीम में शामिल थे, उन पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसी टीम में मंगल सिंह पपोला भी शामिल थे, जो उस समय प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। जब सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तारी शुरू की तो मंगल सिंह फरार हो गए। वे जांच के दौरान सिक डालकर निकल गए थे। पंद्रह दिन बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। पुलिस अधिकारियों ने भी इस लापरवाही को नजरअंदाज कर दिया। अब जब सीबीआई ने सख्ती बढ़ाई तो पपोला को निलंबित कर दिया गया। जानकारी है कि सीबीआई को ग्वालियर के एक वाहन शोरूम पर उनकी मौजूदगी का सुराग मिला था, जिसके बाद टीम लगातार सक्रिय बनी हुई है। एनकाउंटर के बाद मिला था प्रमोशन फर्जी एनकाउंटर टीम में शामिल मंगल सिंह पपोला उस समय प्रधान आरक्षक थे और तत्कालीन टीआई पीएस परमार व मुख्तार कुरैशी के साथ ऑपरेशन में शामिल थे। एनकाउंटर के बाद पपोला को प्रमोशन भी मिला था। 

चार जंगली हाथियों की वापसी से बुढ़ार में हड़कंप, कई घर तबाह

शहडोल शहडोल जिले के वन परिक्षेत्र बुढार में जंगली हाथियों की पुनः वापसी ने इलाके के ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है। हाल ही में चार हाथियों ने अनूपपुर के अहिरगवा से लौटकर बुढार के आसपास के गांवों में दस्तक दी और एक दर्जन से अधिक घरों में तोड़फोड़ की है। बुढार रेंजर सलीम खान के अनुसार, इन हाथियों की निगरानी के लिए 50 से अधिक वन कर्मचारी तैनात किए गए हैं, ताकि इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। हाथियों के इस आतंक ने दो दिनों में बुढार वन परिक्षेत्र के कई गांवों में हलचल मचा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हाथियों के हमलों के चलते उनमें भय का माहौल उत्पन्न हो गया है। रेंजर सलीम खान ने बताया कि हाथियों ने बुढार से अनूपपुर की ओर रुख किया था, लेकिन अब ये दोबारा बुढार वन परिक्षेत्र में लौट आए हैं। हमारी टीमें लोगों को सतर्क करने के लिए मुनादी करवा रही हैं और नुकसान का पंचनामा तैयार कर राजस्व टीम को सूचित किया जा रहा है। नुकसान की भरपाई की आवश्यकता जनपद सदस्य जगन्नाथ शर्मा ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, हाथियों ने हमारे क्षेत्र में कई घरों को नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन को शीघ्र इन लोगों की मदद करनी चाहिए। हमें मुआवजे की राशि दिलवाई जानी चाहिए ताकि वे लोग जो बेघर हो गए हैं, उन्हें राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारी बारिश के बीच हाथियों ने कई कच्चे घर तोड़ दिया है, जिससे ग्रामीणों की स्थिति और भी खराब हो गई है। रेंजर के अनुसार, हाथियों ने सिलपरी, कठई, कोल्हारू टोला, कोदवार कला समेत कई स्थानों पर घुसकर घरों को तोड़कर सामान को तहस-नहस कर दिया है। इससे पहले भी वन विभाग ने हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। चार रेंजरों के साथ वन विभाग की टीम हाथियो की निगरानी कर रही है।

बीमा राशि के लिए 18 साल तक भटका पिता, डीईओ की लापरवाही पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

भोपाल बैतूल जिले के सरकारी स्कूल की एक छात्रा की दुर्घटना में मृत्यु के बाद भी उसके परिवार को विद्यार्थी सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत बीमा राशि नहीं दी गई। 18 साल बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पिता को न्याय देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को दोषी मानते हुए 35 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश सुनाया। मामला बैतूल जिले के उड़दन ग्राम का है, जहां के निवासी कुंजीलाल कुमरे ने डीईओ और द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ आयोग में अपील लगाई थी। आयोग के सदस्य डॉ. श्रीकांत पांडेय और डॉ. मोनिका मलिक की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि छात्रा बीमा की हकदार थी और उसकी मृत्यु के 15 दिन के भीतर बीमा राशि का भुगतान किया जाना चाहिए था। बता दें कि इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पिता के खिलाफ में निर्णय सुनाया था, जिसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की गई थी।   बीमा न मिलने का कारण डीईओ की लापरवाही बीमा कंपनी ने दलील दी कि डीईओ ने निर्धारित समय पर प्रीमियम राशि जमा नहीं की थी, इस कारण पालिसी प्रभाव में नहीं रही। कंपनी ने यह भी कहा कि पालिसी की अवधि एक अगस्त 2006 से 31 जुलाई 2007 तक थी, जबकि छात्रा की मृत्यु 19 अगस्त 2007 को हुई। वहीं, अपीलकर्ता के वकील ने तर्क रखा कि योजना का नवीनीकरण हर वर्ष होता है और एक अगस्त 2007 से 31 जुलाई 2008 तक नई पालिसी प्रभावी थी। इसके अलावा योजना के तहत डीईओ को स्थानीय निधि से प्रीमियम राशि जमा करने की सुविधा भी थी। आयोग का निष्कर्ष आयोग ने पाया कि पूरी कक्षा के लिए लगभग 2.65 लाख रुपये की प्रीमियम राशि डीईओ को जमा करनी थी, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरती। इस कारण बीमा कंपनी की बजाय डीईओ को दोषी मानते हुए हर्जाने का आदेश दिया गया।

यात्रियों को राहत: भोपाल-सागर मार्ग पर रफ्तार और सुविधा दोनों मिलेगी

भोपाल/सागर  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सागर का सफर जल्द ही आसान और आरामदायक होगा। भोपाल-सागर के बीच हाईवे निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। कुल 6 टुकड़ों में बन रहे इस हाईवे का मोरीकोड़ी से विदिशा तक बन रहे खंड का काम लगभग 85 फीसदी पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि इस पर से नए साल के पहले महीने से आवागमन भी शुरू हो जाएगा। बाकी बचे तीन खंडों में भी जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एनएचएआइ व तीन नई ठेका कंपनियों के बीच निर्माण कार्य को लेकर अनुबंध कर लिया गया है। 6 टुकड़ों में बन रहा भोपाल-सागर हाईवे भोपाल-सागर हाईवे के निर्माण कार्य को छह खंडों में विभाजित कर पूर्ण करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में दो खंडों में कार्य चल रहा है। विदिशा जिले के तीन खंडों में कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। निविदा सहित अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद अब जल्द ही कार्य शुरू होगा। चौथा खंड सागर जिले में है। वहां के लिए भी प्रक्रिया शुरू है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआइ) के परियोजना निदेशक सिद्धांत सिंघई के अनुसार विदिशा जिले में विदिशा से ग्यारसपुर, ग्यारसपुर से राहतगढ़ और राहतगढ़ से बेरखेड़ी का कार्य अधिकतम एक अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। बाकी चौथे खंड बेरखेड़ी से सागर तक का कार्य भी जल्द ही शुरू होगा। जबकि बेरखेड़ी से सागर तक लिंक रोड का निर्माण कार्य भी पूरा होने वाला है। मोरीकोड़ी-विदिशा बायपास तक काम पूरा रायसेन जिले के मोरीकोड़ी से विदिशा तक 20.5 किलोमीटर के खंड में फोरलेन सड़क का निर्माण 85 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। जबकि मोरीकोड़ी से विदिशा बायपास तक 95 प्रतिशत से अधिक कार्य कर लिया गया है। ज्यादातर कार्य विदिशा बायपास से मिर्जापुर तक बाकी है। इस हिस्से में अभी पांच से छह महीने का वक्त लगेगा। जबकि मोरीकोड़ी से विदिशा बायपास तक के हिस्से में अधिकतम तीन से चार महीने में आवागमन शुरू हो जाएगा। करीब 320 करोड़ से स्वीकृत इस कार्य के पूर्ण होने पर न केवल विदिशा से रायसेन की बल्कि भोपाल की दूरी भी सांची व सलामतपुर से होकर जाने की तुलना में 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा जनहित में सशक्त भूमिका निभा रही

भोपाल  पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा जनहित में सशक्त भूमिका निभा रही है। आपातकाल में उन्नत चिकित्सा सेवा मुहैया कराने में बहुमूल्य समय की बचत कर जीवन संरक्षण किया जा रहा है। सिंगरौली जिले के श्री लाल कृष्ण वैश्य (31 वर्ष) को गंभीर अवस्था में जबलपुर से इंदौर स्थित आयुष्मान भारत से सम्बद्ध अस्पताल में एयर एम्बुलेंस सेवा से सफलतापूर्वक एयर लिफ्ट किया गया। श्री लाल कृष्ण सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे, जिससे उनके पूरे शरीर का पक्षाघात (पैरालिसिस) हो गया। मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण सड़क या रेल मार्ग से परिवहन जोखिमपूर्ण था। इस स्थिति में एयर एम्बुलेंस सेवा ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प था, जिसने समय रहते उन्हें उन्नत उपचार के लिए इंदौर पहुँचाया और उनकी जान बचाई जा सकी। पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों एवं प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित मरीजों को त्वरित एवं सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यह सेवा राज्य के नागरिकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवन रक्षक सुविधा बन चुकी है। सेवा के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड धारकों को निःशुल्क वायु परिवहन की सुविधा दी जाती है, अन्य नागरिकों के लिए भी निर्धारित परिस्थितियों में सुलभ दरों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। एयर एम्बुलेंस सेवा: पात्रता एवं स्वीकृति प्रक्रिया आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को राज्य के भीतर या बाहर शासकीय एवं आयुष्मान सम्बद्ध अस्पतालों में निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध है। गैर-आयुष्मान कार्डधारकों को राज्य में निःशुल्क तथा राज्य के बाहर अनुबंधित दरों पर सशुल्क परिवहन सुविधा दी जाती है। सड़क, औद्योगिक दुर्घटनाओं या प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित सभी नागरिकों को राज्य के भीतर या बाहर निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सेवा मिलती है। यह सेवा राज्य के सभी जिलों से जिला अस्पतालों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। नागरिकों को उनके जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या मेडिकल कॉलेज अधिष्ठाता की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर द्वारा राज्य के भीतर निःशुल्क परिवहन की अनुमति दी जाती है। राज्य के बाहर के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा, भोपाल, तथा सशुल्क मामलों में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल स्वीकृति प्रदान करते हैं।