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घर में घुसा बाघ बना काल, बांधवगढ़ में महिला की मौत; बचाने पहुंचे तीन लोग घायल

उमरिया. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा क्षेत्र अंतर्गत खेरवा मोहल्ला में शुक्रवार तड़के एक बाघ की घुसपैठ से पूरे गांव में दहशत फैल गई। बाघ घर में घुस आया और सो रही महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। महिला को बचाने पहुंचे पति, पिता और ससुर भी बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में भय, तनाव और आक्रोश का माहौल है। मृत महिला की पहचान फूल बाई पति पहलू पाल (करीब 40 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार सुबह लगभग तीन बजे बाघ अचानक घर के भीतर घुस गया और महिला पर हमला कर दिया। महिला की चीख सुनकर पति पहलू पाल, पिता और ससुर दशई पाल उसे बचाने दौड़े, लेकिन बाघ ने उन पर भी हमला कर दिया। घायलों को गंभीर हालत में मानपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। घंटों घर में डटा रहा बाघ घटना के कई घंटे बाद तक बाघ घर के भीतर मौजूद बताया गया, जिससे ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई। परिवार के अन्य सदस्यों पर हमले की आशंका बनी रही। गांव के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन डर के कारण कोई घर के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। ग्रामीणों का फूटा गुस्सा वन अमला बाघ को सुरक्षित बाहर निकालने और क्षेत्र खाली कराने में जुटा रहा। इसी दौरान नाराज ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्राधिकारी पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट आई। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा और निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे। वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती बताया जा रहा है कि मृतका के पिता कुछ दिन पहले पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने बेटी के घर आए थे, लेकिन यह यात्रा दर्दनाक हादसे में बदल गई। फिलहाल वन विभाग के सामने बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने के साथ ग्रामीणों के आक्रोश को शांत करने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सीएम ने की आर्थिक सहायता का एलान बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत ग्राम खेरवा टोला, जिला उमरिया में बाघ के हमले में एक महिला और कुछ नागरिकों की मौत हो गई है। मरने वाले के परिजनों को 25 लाख की सहायता राशि दी जा रही है। घायलों के निशुल्क इलाज की व्यवस्था के आदेश दिए हैं।

पार्टी के बाद सड़क पर मचा हड़कंप! भोपाल में कार ने लोगों और वाहनों को रौंदा

भोपाल. भोपाल में शनिवार रात एक बेकाबू कार ने खूब उत्पात मचाया। कार चला रहे युवक नशे में धुत थे। बर्थडे पार्टी के बाद उन्होंने कई लोगों, गाड़ियों और ठेलों को टक्कर मारी। करीब 10-12 किलोमीटर तक उत्पात मचाया। एक्सीडेंट में कई लोगों के घायल होने की खबर है। बैरागढ़ इलाके में जन्मदिन मनाया फिर मचाया उत्पात शनिवार रात करीब 9 से 9:30 बजे के बीच की घटना बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक सर्वा दुबे, आदित्य, तुषार खरे और संभव जायसवाल सहित कुछ युवक बैरागढ़ इलाके में जन्मदिन मनाने के लिए इकट्ठे हुए थे। पार्टी के दौरान शराब पी और फिर टोयोटा हाइराइडर कार से निकले। कई लोगों और वाहनों को मारी टक्कर पहले आदित्य नाम का युवक कार चला रहा था। फिर स्टेशन के पास उसने गाड़ी सर्वा दुबे को दे दी। सर्वा दुबे ने तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ाई। रास्ते में ठेले, बाइक और कई लोगों को टक्कर मारता आगे बढ़ा। कीर्ति मेडिकल के पास से लेकर अशोका गार्डन, अयोध्या नगर, कोलार रोड और मीनाल इलाके तक तेज रफ्तार कार ने कई लोगों को चपेट में लिया। 3 थानों की पुलिस ने पीछा करके किया अरेस्ट आरोपी युवकों ने एक पुलिस आरक्षक को भी टक्कर मारी। पुलिस को जैसे ही सूचना मिली कि कुछ युवक कार से उत्पात मचा रहे हैं तो पुलिस एक्टिव हो गई। 3 थानों की पुलिस ने कार का पीछा किया और 10-12 किलोमीटर भागने के बाद मिनाल के पास पकड़ा। आरोपियों को भीड़ ने घेरा, पुलिस ने बचाकर निकाला एक्सीडेंट से गुस्साए हजारों लोगों ने आरोपियों को घेर लिया। हालात बेकाबू हो गए थे। पुलिस ने आरोपी युवकों को भीड़ से बचाकर निकाला। पुलिस ने 2 आरोपियों को सुरक्षित हिरासत में लिया। एक आरोपी के फरार होने की आशंका है। घायलों की संख्या स्पष्ट नहीं एक्सीडेंट में घायल लोगों के अयोध्या नगर और अशोका गार्डन इलाके के अस्पतालों में होने की संभावना है। घायलों की संख्या स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन संख्या ज्यादा बताई जा रही है। सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबर: मध्यप्रदेश का नौगांव सबसे गर्म, 46.8 डिग्री पर पहुंचा पारा, खजुराहो में 46.4, भोपाल में 42.2 और इंदौर में 41.4 डिग्री तापमान पुलिस बोली- आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई  बजरिया थाना प्रभारी शिल्पा गौरव ने कहा कि घटना बेहद गंभीर है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मौत से पहले अजमेर जाने को लेकर बढ़ा था तनाव, ट्विशा केस में समर्थ सिंह का खुलासा

भोपाल. भोपाल में त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस पूछताछ के दौरान पति समर्थ सिंह ने बताया कि 17 अप्रैल को गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद त्विषा के व्यवहार में बदलाव आने लगा था। यह बयान उन आरोपों के बीच आया है, जिनमें कहा गया था कि समार्थ सिंह ने पत्नी से गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता को लेकर सवाल पूछे थे, जिससे वह मानसिक तनाव में थी। अजमेर यात्रा को लेकर हुआ था विवाद मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस जांच में सामने आया कि त्विषा शर्मा और समर्थ सिंह के बीच विवाह के पांच महीनों के दौरान अक्सर विवाद होते थे। मौत से कुछ घंटे पहले भी दोनों के बीच राजस्थान के अजमेर जाने को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद 12 मई को भोपाल स्थित उनके घर में त्विषा शर्मा मृत पाई गईं। मां को भेजे संदेशों में जताई परेशानी जांच के दौरान त्विषा शर्मा और उनकी मां के बीच हुए संदेश भी सामने आए हैं। इन संदेशों में उन्होंने गर्भावस्था के दौरान ससुराल के माहौल को लेकर तनाव और असहजता व्यक्त की थी। एक संदेश में उन्होंने लिखा था, “मेरा दम घुट रहा है मां।” परिवार का आरोप है कि त्विषा लगातार अपने माता-पिता से उन्हें वहां से ले जाने की गुहार लगा रही थीं। मौत से पहले मां को किया था फोन त्विषा शर्मा के भाई मेजर हर्षित शर्मा, जो भारतीय सेना में अधिकारी हैं, ने बताया कि 12 मई की रात करीब 10:05 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन कर अपनी परेशानियों के बारे में बताया था। बातचीत के दौरान अचानक समार्थ सिंह कमरे में पहुंचे, जिसके बाद कॉल कट गई। परिवार ने इसके बाद त्विषा , समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। कुछ घंटों बाद समार्थ की मां गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत की जानकारी परिवार को दी। समार्थ सिंह पुलिस रिमांड पर समर्थ सिंह फिलहाल सात दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। वह घटना के बाद से लापता थे और बाद में जबलपुर में आत्मसमर्पण करने पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर भोपाल ले आई। उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है। उनकी मां गिरिबाला सिंह, जो सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, को अग्रिम जमानत मिली है। पुलिस ने उन पर जांच में सहयोग नहीं करने और नोटिसों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। अदालत में समार्थ सिंह के व्यवहार पर चर्चा शुक्रवार को अदालत में पेशी के दौरान समार्थ सिंह का व्यवहार भी चर्चा का विषय बना। मौजूद लोगों के अनुसार, वह अदालत में पूरी तरह शांत और आत्मविश्वास से भरे दिखाई दिए। उनके चेहरे पर किसी तरह की घबराहट या पछावे के संकेत नहीं थे। AIIMS करेगा दूसरा पोस्टमार्टम मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर रविवार को नई दिल्ली स्थित AIIMS के चार वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम भोपाल में त्विषा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमॉर्टम करेगी। त्विषा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिवार ने पति और ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस मामले ने व्यापक जनआक्रोश पैदा कर दिया है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

पोल वॉल्ट में एशियन गेम्स के लिए निर्धारित 4.10 मीटर क्वालीफाइंग मार्क हासिल कर बढ़ाया प्रदेश का गौरव

भोपाल  रांची में 25 मई तक आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी नितिका आक्रे ने महिला पोल वॉल्ट स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया। नितिका ने 4.10 मीटर की शानदार छलांग लगाकर न केवल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया, बल्कि एशियन गेम्स 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफाइंग मार्क भी हासिल कर लिया। मंत्री  सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने नितिका आक्रे को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नितिका आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी। एशियन गेम्स एवं एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप में बनाई जगह नितिका आक्रे ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर आगामी एशियन गेम्स 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफाइंग मानक प्राप्त करते हुए प्रतियोगिता में स्थान सुनिश्चित किया है। साथ ही उन्होंने 9 से 12 जुलाई 2026 तक ऑर्डोस, चीन में आयोजित होने वाली प्रथम एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई किया है। यह उपलब्धि प्रदेश और देश दोनों के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। कोच घनश्याम के मार्गदर्शन में हासिल की सफलता नितिका आक्रे की इस उपलब्धि में उनके कोच  घनश्याम यादव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके तकनीकी मार्गदर्शन, निरंतर प्रशिक्षण एवं प्रेरणा ने नितिका को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया। यह सफलता खिलाड़ी और प्रशिक्षक के समर्पण एवं समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। मेहनत, लगन और अनुशासन का परिणाम नितिका आक्रे का यह प्रदर्शन उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण का प्रतिफल है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दबाव के बीच उत्कृष्ट तकनीक और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए पदक अपने नाम किया। प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को मिल रही नई पहचान मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। नितिका की यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं नितिका नितिका आक्रे की सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका यह प्रदर्शन दर्शाता है कि समर्पण, सतत अभ्यास और सही मार्गदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।  

वेतन भुगतान की मांग को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों का बड़ा प्रदर्शन, 25 मई को आर-पार की लड़ाई

भोपाल मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने प्रदेशभर के आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों से 25 मई को भोपाल के नीलम पार्क में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले पांच से छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। प्रदर्शन के बाद कर्मचारी उपमुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपेंगे। मांगें नहीं मानी गईं तो भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है। 30 हजार कर्मचारी दे रहे हैं सेवाएं संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों को समय पर वेतन, नौकरी की सुरक्षा और न्यूनतम वेतन जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। निजी एजेंसियों की मनमानी और शोषण का आरोप संघ का आरोप है कि निजी एजेंसियों और अधिकारियों की मनमानी के कारण कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। शासन द्वारा स्वीकृत राशि और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर है। कर्मचारियों को आठ से 12 हजार रुपए तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन की मांग लंबे समय से की जा रही है। कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें संघ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के बदले समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश सुविधा, मातृत्व अवकाश और निजी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई हैं।  

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित होगा जिला स्तरीय कार्यक्रम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत गंगा दशमीं पर के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में 25 मई को कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्य शासन ने समस्त जिलों में गंगा दशमी पर्व पर आयोजित गतिविधियों एवं कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले मुख्य अतिथियों की सूची जारी की है। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा, मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह रतलाम, मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय धार, मंत्री श्री प्रहलाद पटेल नरसिंहपुर, मंत्री श्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री श्री करण सिंह वर्मा सिवनी, मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह नर्मदापुरम, मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट देवास, मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग विदिशा, मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह निवाड़ी, मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री श्री राकेश शुक्ला भिंड, मंत्री श्री चेतन्य काश्यप भोपाल और मंत्री श्री इंदर सिंह परमार आगर-मालवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर सीहोर, राज्यमंत्री श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी खंडवा, राज्यमंत्री श्री दिलीप जायसवाल मंडला, राज्यमंत्री श्री गौतम टेटवाल उज्जैन, राज्यमंत्री श्री लखन पटेल दमोह, राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह पंवार राजगढ़, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी सतना, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार अनूपपुर और राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल बैतूल के कार्यक्रम में शामिल होंगे। लोकसभा सांसद श्री रोड़मल नागर शाजापुर, लोकसभा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सीधी, लोकसभा सांसद श्री जनार्दन मिश्रा मऊगंज, लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता मंदसौर, लोकसभा सांसद श्री बंटी विवेक साहू छिंदवाड़ा, लोकसभा सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ग्वालियर और लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी इंदौर और राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर नीमच, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया सिंह नारोलिया पांढुर्णा के कार्यक्रम में शामिल होंगे। विधायक श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना, विधायक श्री जयसिंह मरावी शहडोल, विधायक श्री अर्चना चिटनीस बुरहानपुर, विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार खरगौन, विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर, विधायक श्री श्याम बरडे बड़वानी, विधायक श्री हरिशंकर खटीक टीकमगढ़, विधायक श्री पन्नालाल शाक्य गुना, विधायक श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी अशोकनगर, विधायक श्री शिवनारायण ज्ञान सिंह उमरिया, विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी रायसेन, विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल दतिया, विधायक श्रीमती ललिता यादव छतरपुर, विधायक श्री संजय सत्येन्द्र पाठक कटनी और विधायक श्री रामनिवास शाह सिंगरौली के कार्यक्रम में शामिल होंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गुड्डीबाई आदिवासी श्योपुर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रूदेश परस्ते डिंडोरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सहाय हरदा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरीबाई खरत आलीराजपुर और नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत ठाकुर बालाघाट के कार्यक्रम में शामिल होंगे।  

शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा फैसला, मेरिट आधार पर होगा चयन

 भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब शिक्षक भर्ती के लिए अलग से चयन परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उम्मीदवारों को केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी और उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के लिए “कनिष्ठ सेवा संयुक्त परीक्षा नियम-2026” का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि यह नियम अगले एक माह के भीतर लागू कर दिए जाएंगे। जुलाई व अगस्त में माध्यमिक व प्राथमिक पात्रता परीक्षा से इसकी शुरुआत होगी। दोहरी परीक्षा प्रणाली होगी समाप्त अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पहले पात्रता परीक्षा और उसके बाद चयन परीक्षा आयोजित की जाती थी। इस व्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को दो बार आवेदन करना पड़ता था और अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी और केवल एक परीक्षा के आधार पर भर्ती की जाएगी। वर्ष 2018 में आयोजित उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती में भी एकल परीक्षा प्रणाली अपनाई गई थी। उस समय करीब 21 हजार पदों पर भर्ती की गई थी। हालांकि बाद में शिक्षक भर्ती-2023 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2024 में फिर दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली लागू कर दी गई थी। अब विभाग फिर से पुरानी एकल परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रहा है। सरकारी शिक्षकों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष नई व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए जारी स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष तक रहेगी। यदि इस अवधि में अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं मिलती है तो उसे दोबारा परीक्षा देनी होगी। भर्ती के लिए विभागीय पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी जारी की जाएगी और मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा। निजी स्कूलों में भी पात्रता परीक्षा अनिवार्य निजी स्कूलों में भी अब केवल पात्रता परीक्षा पास अभ्यर्थियों की ही नियुक्ति की जाएगी। हालांकि निजी विद्यालय किसी भी वर्ष की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवार को नियुक्त कर सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता आजीवन रहेगी। अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। पहले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा दोनों के लिए अलग-अलग 500 रुपये शुल्क देना पड़ता था। हर वर्ष लगभग पांच से छह लाख अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। अब एक ही परीक्षा होने से समय और धन दोनों की बचत होगी। स्कोर सुधारने का मिलेगा मौका ईएसबी अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली में अभ्यर्थियों को भविष्य में अपने स्कोर में सुधार करने का अवसर भी मिलेगा। उम्मीदवार चाहें तो दोबारा परीक्षा देकर बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं। अब शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ पात्रता परीक्षा होगी। चयन परीक्षा नहीं होगी। आजीवन वैध रहेगा, लेकिन अभ्यर्थी चाहें तो अपने स्कोर में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।- केके द्विवेदी, संचालक, स्कूल शिक्षा विभाग  

ग्वालियर-नागपुर सिक्सलेन कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर, 9 जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा

सागर  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।  भूतल परिवहन मंत्रालय की सहमति के बाद सर्वे कार्य शुरु ग्वालियर से नागपुर की कनेक्टिविटी अभी तक सीधे तौर पर नहीं है. ऐसे में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने ग्वालियर, बैतूल, नागपुर कारीडोर के लिए सहमति दे दी है. फिलहाल जो प्रस्ताव है, उसके तहत 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्स लेन कॉरिडोर बनाया जाएगा. ये कॉरिडोर ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल से होते हुए नागपुर तक जाएगा. ग्वालियर से शुरू होकर यह मार्ग नागपुर तक पहुंचेगा।  फिजिबिलिटी सर्वे और डीपीआर की तैयारी फिलहाल इस कारीडोर के लिए NHAI (National Highways Authority of India) द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य ये है कि इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक की स्थिति क्या होगी और क्या लाभ होगा. इसी आधार पर जल्द ही कॉरिडोर के अलाइनमेंट और डीपीआर को अंतिम रुप दिया जाएगा. फिलहाल इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि इसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की तरह बनाया जाए. ये अभी जो सड़क हैं, उसी का चौड़ीकरण सिक्सलेन के रूप में किया जाए।  ब्लैक स्पाॅट खत्म करने का होगा काम प्रस्तावित ग्वालियर बैतूल नागपुर कॉरिडोर के निर्माण की शुरूआत से ही यातायात सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है. एनएचएआई कॉरिडोर के सिवनी जिले से गुजरने वाले हिस्से में लखनादौन और खवासा के बीच ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए काम कर रहा है. इन ब्लैक स्पाॅट पर अंडरपास, ओवरब्रिज और पुलों का निर्माण किया जाएगा. अंडरपास के जरिए लोकल ट्रैफिक को अलग से रास्ता दिया जाएगा।  सफर में 6-7 घंटे कम लगेगा वक्त इस कॉरिडोर के बनने से ग्वालियर और नागपुर के बीच यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा. फिलहाल ग्वालियर से नागपुर जाने में 22 से 24 घंटे लगते हैं. सिक्सलेन कारीडोर के बाद ये वक्त महज 16 से 18 घंटे रह जाएगा. इसके साथ ही सफर सुरक्षित हो जाएगा।  हर जिले में इंडस्ट्रियल क्लस्टर से व्यवसाय को लगेगे पंख पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि, ''ये कॉरिडोर मध्य प्रदेश के जिन 9 जिलों से गुजर रहा है, वहां कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाए जाएंगे. जिनका उद्देश्य लाजिस्टिक हब तैयार करना है. इस कॉरिडोर से पर्यटन व्यावसाय को पंख लगने के अलावा, खनिज, फल, अनाज, दवाईयां और प्लास्टिक व्यावसाय को पंख लगेगे. उद्यमियों की लागत और सफर में लगने वाला समय कम होगा. इस हाइवे की ग्वालियर-आगरा हाइवे और नागपुर पुणे मुंबई हाइवे से कनेक्टिविटी आसान हो  जाएगी। 

मध्यप्रदेश की नई ट्रांसफर पॉलिसी जारी, लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई; महिलाओं और रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को राहत

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 लागू करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत अब तय लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा से पहले भी हटाया जा सकेगा। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद आदेश जारी कर 1 जून से 15 जून तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी ट्रांसफर आदेश केवल ऑनलाइन जारी होंगे। 15 जून के बाद जारी किए गए तबादला आदेश मान्य नहीं माने जाएंगे। नई नीति का असर लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर पड़ेगा। खराब प्रदर्शन पर समय से पहले होगा तबादला नई व्यवस्था में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक जिले में तीन साल पूरा होने पर बाहर भेजा जा सकेगा। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों पर भी यही नियम लागू होगा।हालांकि सरकार ने साफ किया है कि तीन साल की अवधि अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का प्रदर्शन खराब पाया जाता है या वह विभागीय लक्ष्य पूरे नहीं कर पाता है, तो प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला पहले भी किया जा सकेगा। महिलाओं और सेवानिवृत्ति के करीब कर्मचारियों को राहत नई तबादला नीति में महिला कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने के लिए भी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। तीन साल से पहले भी हो सकेगा तबादला नई नीति के तहत प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकेगा। वहीं तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का भी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि तीन वर्ष की अवधि तबादले की अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पिछले वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाया है तो उसका तबादला तय अवधि से पहले भी किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। ई-ऑफिस के माध्यम से ही मंत्रियों को देना होगा अनुमोदन तबादले राज्य और जिला स्तर पर होंगे। पति-पत्नी (दंपती) की पदस्थापना एक स्थान पर रखी जाएगी। गंभीर बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवकों को भी तबादले में रियायत दी जाएगी। मंत्री व प्रभारी मंत्रियों की अनुशंसा पर तबादले होंगे। मंत्री का अनुमोदन ई-ऑफिस के माध्यम से ही होगा। इतना ही नहीं विभाग अपनी सुविधा के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अनुमोदन व मुख्यमंत्री की अनुशंसा से तबादला नीति बना सकेंगे। स्वयं के व्यय वाले तबादलों में दो स्थितियां शामिल नहीं होंगी। इन्हें तबादला नीति से बाहर रखा गया है। पहला कि ऐसे शासकीय सेवक जो अति गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, लकवा, हृदयाघात से पीड़ित हैं और मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरित किए जाते हैं उनका इस तबादला नीति में समावेश नहीं किया जाएगा। वहीं पति-पत्नी व स्वयं बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवक भी तबादला नीति की निर्धारित सीमा से बाहर रखा गया है। तबादला प्रतिबंध अवधि के दौरान केवल विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन पर ही तबादले होंगे। न्यायिक और प्रशासनिक सेवाओं पर लागू नहीं होगी नीति पद या संवर्ग की संख्या 200 तक है तो 20 प्रतिशत तबादले ही किए जाएंगे। वहीं 201 से 1000 संख्या तक 15 प्रतिशत, 1001 से 2000 तक 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक होने पर पद या संवर्ग में कार्यरत संख्या के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। तबादले ई-ऑफिस के माध्यम से होंगे। इनमें स्वैच्छिक तबादले भी होंगे। यह नीति मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मध्य प्रदेश मंत्रालय पर लागू नहीं होगी। सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे अमले को राहत जिले के भीतर जिला संवर्ग/राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से तबादला किया जाएगा। गृह विभाग में उप पुलिस अधीक्षक के कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों का स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड द्वारा और जिले के भीतर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से होगा। जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर/संयुक्त कलेक्टर अनुभाग परिवर्तन एवं तहसीलदार, नायब तहसीलदार की पदस्थापना प्रभारी मंत्री के परामर्श से की जाएगी। जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष हो, सामान्यतः उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक सरकार ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि केवल अवधि पूरी होने के आधार पर तबादले न किए जाएं। न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति से वापसी और रिक्त पदों की आवश्यकता जैसे मामलों में ही तबादला प्रक्रिया अपनाई जाएगी।साथ ही रिक्त पदों को भरने के नाम पर एक के बाद एक किए जाने वाले श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर भी रोक लगा दी गई है। पुलिस विभाग में अलग व्यवस्था लागू पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना का निर्णय पुलिस स्थापना बोर्ड करेगा। जिले के भीतर पदस्थापना पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद करेंगे।वहीं उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे। गंभीर बीमारियों और दिव्यांग कर्मचारियों को छूट नई नीति में गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर छूट दी जाएगी।इसके अलावा 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता सरकार ने सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन जारी करना अनिवार्य किया है। आदेश में कर्मचारी का एम्पलाई कोड दर्ज करना जरूरी होगा।तबादले के बाद पुराने स्थान से वेतन निकाले जाने पर इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। वहीं जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, गबन या नैतिक अपराधों की जांच लंबित है, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। रिक्त पदों के लिए श्रृखलाबंद तबादलों पर रोक सरकार ने विभागों को यह भी निर्देश … Read more

गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव! डबल कनेक्शन पर रोक, नए नियम नहीं माने तो ब्लॉक होगी सप्लाई

भोपाल  देश में रसोई गैस (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा नए और कड़े नियम प्रभावी कर दिए गए हैं. सरकार की 'एक परिवार, एक गैस कनेक्शन' नीति के तहत जारी की गई इन गाइडलाइंस का मुख्य उद्देश्य गैस की जमाखोरी, कालाबाजारी को रोकना और सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी बनाना है. यदि उपभोक्ता तय समय सीमा के भीतर इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनकी गैस आपूर्ति रोकी जा सकती है।  नए नियमों के तहत प्रमुख बदलाव और आवश्यक दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं 1. पीएनजी और एलपीजी का दोहरा कनेक्शन प्रतिबंधित नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन घरों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन चालू है, वे अब घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर का उपयोग नहीं कर सकेंगे. सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में सिलेंडर की आवश्यकता नहीं है. ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा. ऐसा न करने पर तेल कंपनियों (Indane, Bharat Gas, HP Gas) द्वारा एलपीजी कनेक्शन को ब्लॉक कर दिया जाएगा और रिफिल बुकिंग रोक दी जाएगी. उपभोक्ता अपने वितरक के पास सिलेंडर और रेगुलेटर जमा कर सुरक्षा राशि वापस पा सकते हैं।  2. सिलेंडर बुकिंग के लिए 'लॉक-इन पीरियड' तय सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और एडवांस बुकिंग पर अंकुश लगाने के लिए दो बुकिंग के बीच न्यूनतम समयावधि निर्धारित की गई है: शहरी क्षेत्र: उपभोक्ता अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के कम से कम 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे. ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच 45 दिनों का अनिवार्य अंतर रखना होगा।  3. ई-केवाईसी (e-KYC) और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य सभी सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके बिना उपभोक्ताओं की रिफिल बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी. साथ ही, जिन उपभोक्ताओं की वार्षिक कर योग्य आय ₹10 लाख या उससे अधिक है, उन्हें एलपीजी सब्सिडी के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।  4. सुरक्षित डिलीवरी के लिए DAC व्यवस्था गैस चोरी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है. सिलेंडर की डिलीवरी तभी होगी जब उपभोक्ता अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (OTP) को डिलीवरी एजेंट के साथ साझा करेंगे. उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपने नजदीकी गैस वितरक से संपर्क कर ई-केवाईसी की स्थिति जांच लें और नियमों का समय पर पालन करें।