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Twisha Case: गिरिबाला सिंह और समर्थ की बढ़ीं मुश्किलें, CBI की कार्रवाई के बीच जेल से बाहर आना मुश्किल

भोपाल  नोएडा की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की भोपाल में ससुराल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में सास रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ सिंह को जेल में रहते करीब 30 दिन हो गए हैं। उनकी न्यायिक हिरासत फिर से बढ़ गई है। कोर्ट ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की रिमांड 14 जुलाई तक बढ़ा दी। दोनों आरोपियों के जेल से बाहर आने में सीबीआई आड़े आ रही है। आरोपी गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ सिंह को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद 30 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। न्यायाधीश आरती आदित्य बांदिल की अदालत में सीबीआइ ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। हालांकि बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच एजेंसी के पास हिरासत बढ़ाने का कोई नया आधार नहीं है लेकिन अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की। सीबीआइ ने अदालत में सुनवाई के दौरान जांच आगे बढ़ने की बात बताई। कोर्ट में उसकी ओर से दो आवेदन भी पेश किए गए। पहले आवेदन में समर्थ सिंह के जब्त लैपटॉप का पासवर्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई जबकि दूसरे में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी। सीबीआई के इन दोनों आवेदनों पर कोर्ट 3 जुलाई को सुनवाई करेगी। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि केवल मौखिक अनुरोध के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। यदि आरोपी पक्ष को ऐसी अनुमति चाहिए तो उसे लिखित आवेदन देना होगा। दरअसल तमाम कवायदों के बाद भी सीबीआई की जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है। जांच एजेंसी पर तय समय सीमा में चार्जशीट पेश करने का भी दबाव है। वकील ने बताया केस का सबसे संदिग्ध पहलू, दिल्ली AIIMS पर भी शक भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और सास पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह जेल से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। मंगलवार को कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ा दी है। ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह 2 जून से भोपाल की केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई अपनी पड़ताल में जुटी हुई है। इस बीच पीड़ित परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव का अहम बयान सामने आया है। उनका कहना है कि फिलहाल इस केस में हम सीबीआई पर बहुत निर्भर हैं। अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्विशा शर्मा डेथ केस के सबसे संदिग्ध पहलू की भी जानकारी दी। उनके अनुसार लिगेचर बेल्ट पर की गई लापरवाही बड़ी खामी है। अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का यह भी कहना है कि उन्हें पहले से शक था कि दिल्ली AIIMS टुकड़ों में नतीजे नहीं देगा। उन्होंने दूसरी पोस्टमार्टम के नतीजों को केस के लिए अहम बताया। समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के संबंध में पीड़ित परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, "CBI ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए अर्ज़ी दी थी और इसे 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम CBI पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। उन्होंने दो और अर्ज़ियां दायर करने की बात कही है। अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार एक मामला वॉइस स्पेक्ट्रोग्राफी टेस्ट से जुड़ा है। सीबीआई के अधिकारी, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह का यह टेस्ट करना चाहते हैं। इसके लिए संदिग्धों की असली आवाज़ से मिली हुई रिकॉर्डिंग का मिलान करना होगा, इसलिए उन्हें वॉइस सैंपल की ज़रूरत है। दूसरा मुद्दा एक लैपटॉप का है जिसे वे एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। शुरू से ही शक था कि AIIMS दिल्ली शायद टुकड़ों में नतीजे नहीं देगा दिल्ली एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव बोले- जहां तक दूसरे पोस्टमार्टम का सवाल है, मुझे शुरू से ही शक था कि AIIMS नई दिल्ली शायद टुकड़ों में नतीजे नहीं देना चाहेगा। हमने शुरुआती पोस्टमार्टम में कुछ कमियां बताई थीं, इसलिए हो सकता है कि वे FSL और विसरा रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हों। केस में लिगेचर बेल्ट की अहमियत ट्विशा पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने केस में लिगेचर बेल्ट की अहमियत भी बताई। उन्होंने कहा- शुरू से ही मेरा यह मानना ​​रहा है कि इस मामले का सबसे संदिग्ध पहलू समय पर लिगेचर बेल्ट को ज़ब्त न कर पाना और उसे पहले पोस्टमार्टम के लिए उपलब्ध न करा पाना था। ट्विशा के परिवार के लिए दूसरे पोस्टमार्टम के नतीजे जानना बहुत ज़रूरी है। असल में उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार भी है। फोरेंसिक जांच के लिए जरूरी है लैपटॉप: ट्विशा पक्ष की तरफ से अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय और शुभांग दीक्षित ने बताया, सीबीआइ समर्थ का लैपटॉप पहले ही जब्त कर चुकी है, लेकिन वह लॉक है। डिजिटल सबूत और फॉरेंसिक जांच पूरी करने के लिए उसका पासवर्ड जरूरी है। सीबीआइ ने समर्थ के लैपटॉप के पासवर्ड और मां-बेटे के वॉयस सैंपल की मांग की। जेल में बीते एक माह बता दें कि भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 2 जून को न्यायिक हिरासत में भोपाल की केंद्रीय जेल में भेजा गया था। वे तभी से यहीं हैं। इस प्रकार ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह करीब एक महीने से जेल में ही बंद हैं।

Twisha Case: कॉल रिकॉर्ड्स ने बढ़ाई कई रसूखदारों की मुश्किलें, CBI की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

भोपाल  ट्विशा शर्मा डेथ केस में सीबीआई जांच की स्पीड कुछ बढ़ी है। गुरुवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों व अधिवक्ताओं की भूमिका की जांच के लिए प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष को भेजे गए हलफनामे के बाद अब कॉल डिटेल रेकॉर्ड (सीडीआर) सामने आई है। इसमें कई प्रभावशाली लोग फंसते दिख रहे हैं। इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर समर्थ के करीबी वकील से पूछताछ की। सीबीआई ने अभी तक जांच के निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया है हालांकि जल्द ही जिला कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही जा रही है। कॉल डिटेल रेकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर सीबीआई, एक साथ कई गुत्थियां सुलझा सकती है। दावा किया गया है कि पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत वाले दिन 12 मई की देर रात को और अगले दिन कई मोबाइल कॉल किए थे। इनमें जज, वकील और अन्य प्रभावशाली लोग शामिल थे। हालांकि इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होना अभी बाकी है। उधर, फरियादी पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने सीडीआर का हवाला देते हुए दावा किया है कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से वकालतनामा पेश करने वाले अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना सहित अन्य अनेक रसूखदारों को कई कॉल किए गए थे। ज्ञात हो कि श्रेयस राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अधिवक्ता के तौर पर नियुक्त हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अभी तक जांच के निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया है। 16 जून को अगली पेशी जिला कोर्ट में है, तब कोई रिपोर्ट प्रस्तुत करने की संभावना जताई जा रही है। मामले में आरोपी बनाए गए पति समर्थ सिंह और सास पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों की अगली पेशी 16 जून को होना है। लैपटॉप की जांच पूरी, अब मोबाइल पर फोकस सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने ट्विशा के लैपटॉप की तकनीकी जांच पूरी कर ली है। निजी जानकारियां, फोटो और मृतका की पुरानी कंपनी से जुड़े कामकाजी दस्तावेज खंगाले गए हैं। अब सीबीआई ट्विशा के मोबाइल को खंगाल रही है। पॉर्लर में नजर आए वकील से पूछताछ केस का एक अहम घटनाक्रम था ट्विशा का मौत से पहले पॉर्लर में जाना। वहां के सीसीटीवी फुटेज में वह बहुत ही सहज नजर आई थी। सीसीटीवी फुटेज सामने आए जिसमें तीन अधिवक्ता पॉर्लर के सोफे पर बैठे नजर आ रहे हैं। इन्हीं में से एक अधिवक्ता से सीबीआइ ने पूछताछ की है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि संबंधित लोगों के पॉर्लर जाने का उद्देश्य क्या था और उन्हें किसने वहां भेजा था।

ट्विशा मामले की जांच घेरे में! फंदे की पहचान का रिकॉर्ड गायब, जांच की जानकारी पहुंचने के भी आरोप

भोपाल  एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अब मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस बीच, सीबीआई जांच से पहले हुई स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जांच से जुड़े बेहद गोपनीय और अहम तथ्य पहले ही उन तक पहुंच रहे थे। इसी का फायदा उठाकर वह समय रहते अग्रिम जमानत लेने में कामयाब हो गई थीं, जिसे बाद में 27 मई को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। शुरुआती जांच में पुलिस की बड़ी लापरवाही ट्विशा के परिजनों की ओर से भोपाल कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अंकुर पांडे का आरोप है कि शुरुआत में ही मृतका की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को संदिग्ध माना जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 13 मई 2026 की सुबह सब इंस्पेक्टर (SI) दिनेश शर्मा ने फंदे की रस्सी तो जब्त की, लेकिन लिखापढ़ी में उस व्यक्ति का स्पष्ट विवरण ही दर्ज नहीं किया गया जिसने रस्सी की पहचान की थी। इसके अलावा, उस महत्वपूर्ण रस्सी को तुरंत फॉरेंसिक जांच के लिए एम्स अस्पताल भेजने के बजाय सब इंस्पेक्टर ने अपनी निजी कार में रख दिया था और बाद में उसे जांच के लिए भेजा गया। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा, केस डायरी का हिस्सा रहे जब्ती से जुड़े दस्तावेज भी आरोपियों तक पहुंच गए थे। कानूनी नियमों के मुताबिक, उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए उन्हें इन दस्तावेजों को देखने का कोई अधिकार नहीं था। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के साथ इन गोपनीय दस्तावेजों को अदालत में दाखिल कर दिया गया, जिससे साफ है कि जांच की जानकारी लीक हो रही थी। मनोचिकित्सक से पूछताछ और मेडिकल पर्चे की जांच केस को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई की टीम ने अब ट्विशा का इलाज करने वाले प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से विस्तृत पूछताछ की है। दरअसल, आरोपी पक्ष ने भोपाल कोर्ट में कुछ ऐसे मेडिकल दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक रूप से परेशान थी और उसका मनोरोग का इलाज चल रहा था। सीबीआई अब इन मेडिकल पर्चों की असलियत खंगाल रही है। जांच एजेंसी ने डॉक्टर से पूछा कि ट्विशा कब-कब इलाज के लिए आई थी, उसे क्या समस्याएं थीं और काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी निजी जिंदगी को लेकर क्या बातें साझा की थीं। इस पूछताछ पर डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई से संपर्क की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज की गोपनीयता और उसके अधिकारों को देखते हुए वह काउंसलिंग की व्यक्तिगत बातों का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकते। पूर्व जज की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट मामले में गिरफ्तारी के बाद 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। शुरुआत में दोनों को जेल के अस्पताल वार्ड में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के आरोप लगे थे, जिसके बाद जेल प्रबंधन ने उन्हें सामान्य बैरक में शिफ्ट कर दिया है। अदालत के निर्देश के बाद जेल में गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनकी बैरक के पास अतिरिक्त प्रहरियों की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बढ़ाने की मुख्य वजह यह है कि गिरिबाला सिंह जब 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल जिला कोर्ट में जज के पद पर तैनात थीं, तब उन्होंने जिन अपराधियों को सजा सुनाई थी, उनमें से 29 कैदी वर्तमान में इसी जेल में बंद हैं। ऐसे में किसी भी अनहोनी या आपसी रंजिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

ट्विशा मौत मामले के आरोपी समर्थ सिंह की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में पुलिस निगरानी बढ़ाई गई

भोपाल  भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में हैं। जेल में पहले दिन गिरिबाला सिंह ज्यादातर खामोश रहीं। उन्होंने पीने को साफ पानी मांगा। इधर समर्थ सिंह को इलाज के लिए मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। उसके पैर में चोट है जिसका इलाज चल रहा है। वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई है। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब भोपाल पुलिस की कथित लापरवाही भी जांच के दायरे में आ गई है। सीबीआइ ने लिगेचर से संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया जेल सूत्रों के अनुसार ट्विशा केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जिला जज गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया। वे जेल में आम कैदियों की तरह रहीं। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को मंगलवार शाम को यहां लाया गया था। अपनी बैरक में गिरिबाला सिंह ने कढ़ी-पकौड़े और रोटियां खाईं। पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं जेल अधिकारियों के अनुसार गिरिबाला सिंह पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं। उन्होंने साफ पानी की मांग भी की। विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस की संवेदनशीलता को देखते हुए गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अलग- अलग रखा गया है। जेल अधिकारियों के अनुसार शाम दोनों को जेल लाने के बाद से ही उन्हें विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सामान्य सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया न्यायिक हिरासत में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को महिला वार्ड में रखा गया है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पैर में चोट लग गई थी जिसके कारण खंड-बी स्थित मेडिकल वार्ड में भर्ती कराकर इलाज किया जा रहा है। समर्थ सिंह, कड़ी निगरानी में है। उन्हें भी आम बंदियों के समान नाश्ते के रूप में सुबह दलिया और नमकीन के साथ चाय भी दी गई। 14 दिन की न्यायिक हिरासत जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने यह फैसला दिया. इससे पहले 29 जून को कोर्ट ने दोनों को 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था. आज यानी 2 जून को दोनों की रिमांड खत्म हो रही थी।  27 मई को हुई थी गिरिबाला की गिरफ्तारी सीबीआई ने गुरुवार (27 मई) को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी गुरुवार (27 मई) को तब हुई, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. समर्थ सिंह को 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद, लगभग एक सप्ताह तक लापता रहने के बाद, भोपाल पुलिस ने 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था।  समर्थ सिंह को सबसे पहले 23 मई को भोपाल में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में पेश किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 29 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश पर जांच का जिम्मा संभालने के बाद सीबीआई ने आगे की पूछताछ के लिए समर्थ की हिरासत की मांग की थी. कोर्ट के आदेश के बाद वह 16 जून तक हिरासत में रहेंगे।  कथित तौर पर ट्विशा शर्मा अपने ससुराल कटारा हिल्स में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. बाद में उनके परिवार ने उनके पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच की मांग उठी थी. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ को कथित अपराध स्थल पर ले गई और विस्तृत फॉरेंसिक जांच की. सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर पर कई घंटे बिताए. इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की और सबूत इकट्ठा किए, साथ ही समर्थ से 12 मई की रात की घटनाओं के बारे में पूछताछ भी की। 

ट्विशा केस: गिरिबाला सिंह के बयान से मचा हड़कंप, स्टेटस और स्किल ने बढ़ाई CBI की चिंता

भोपाल  ट्विशा शर्मा डेथ केस में भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह कानून के शिकंजे में हैं। कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया है। देशभर में सुर्खियोें में आने के बाद इस केस की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी यानि सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई के जांच अधिकारी मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ट्विशा के पति समर्थ सिंह से कई घंटों की पूछताछ कर चुके हैं। इस दौरान सीबीआई अधिकारियों द्वारा उनपर उठे एक सवाल पर पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने स्वीकारोक्ति भी की। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे कहा कि आप खुद एक जिम्मेदार न्यायिक अधिकारी रह चुकीं हैं, ऐसे में मामले में बेटे समर्थ को फरार क्योें होने दिया! इस पर गिरिबाला सिंह ने माना कि हम दोनों से यह गलती तो हुई है। बयानों के साथ ही साक्ष्य जुटाने के काम में भी लगी सीबीआई एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सास रिटायर्ड जज गिरिबाला को रिमांड पर लेने के बाद सीबीआई फिर पूछताछ में जुट गई है। उन्हें बेटे समर्थ सिंह के साथ बैठाकर सवाल जवाब किए जाने की तैयारी चल रही है। सीबीआई बयानों के साथ ही साक्ष्य जुटाने के काम में भी लगी है। मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर ली सीबीआई की पूछताछ के दौरान गिरिबाला सिंह ने एक बड़ी बात कही। शुरुआती ना नुकुर के बाद उन्होंने एक मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर ली। गिरिबाला सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसे अहम पद पर रह चुकी हैं। इसी बात का उल्लेख करते हुए सीबीआई ने उनसे बेटे समर्थ सिंह की फरारी की वजह पूछी थी जिसपर पूर्व जज ने मान लिया कि यह हमारी गलती थी। बेटा समर्थ सिंह फरार कैसे और क्यों हो गया? दरअसल जांच अधिकारियों ने गिरिबाला सिंह से सीधा सवाल किया कि आप अहम न्यायिक पदों पर रही हैं, नियम-कानूनों की आपको हर जानकारी है। ऐसे में भी 12 मई को बहू ट्विशा शर्मा की मौत के बाद बेटा समर्थ सिंह फरार कैसे और क्यों हो गया? इस सवाल पर गिरिबाला सिंह पहले तो कुछ असहज हुईं लेकिन बाद में इसे गलती के रूप में स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह स्पष्टीकरण भी दिया कि वे परिस्थितियों का ठीक से अंदाजा नहीं लगा सकीं थीं। डरे सीबीआई अधिकारी, 5 वजहों से घिरीं सीबीआई ने भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 5-5 दिन की रिमांड पर ले लिया है। भोपाल कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों को 2 जून तक के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर दिया। ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह करीब पौने दो साल तक भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं हैं। इतना ही नहीं, वे क्राइम सीन मैनेजमेंट में भी दक्ष हैं। गिरिबाला सिंह के इस स्टेटस और स्किल का हवाला देते हुए ही सीबीआई ने उनका रिमांड मांगा। जांच अधिकारियों को डर है कि बाहर रहकर वे सबूतों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने उनके तर्क स्वीकार कर लिए। 7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल जिला कोर्ट में पेश किया यहां जस्टिस शोभना भलावे की अदालत के समक्ष वे दो घंटे से ज्यादा कठघरे में खड़ी रहीं। सीबीआइ कोर्ट से पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी। मायके वालों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया बता दें कि ट्विशा शर्मा की कटारा हिल्स स्थित आवास पर जब संदिग्ध हालात में मौत हुई तब सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की घर पर मौजूद थे। दोनों ने कहा कि ट्विशा ने सुसाइड की जबकि मायके वालों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया। पहले समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया पहले सीबीआइ ने समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया। बेटे को यहां दोपहर 12.35 बजे लाया गया जबकि 10 मिनट बाद पूर्व जज को लाए। आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं सीबीआइ ने रिमांड के लिए गिरिबाला सिंह के स्टेटस और स्किल को आधार बनाया। अधिकारियों ने कोर्ट में आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो इनके बल पर वे जांच प्रभावित कर सकती हैं। 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल की जिला जज रहीं अदालत से सीबीआई ने कहा कि गिरिबाला बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी ले रखी है। ऐसे में गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से साक्ष्य प्रभावित कर सकती हैं। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया। बता दें कि 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक गिरिबाला सिंह भोपाल की जिला जज रहीं हैं। इस प्रकार वे करीब 19 माह तक यहां पदस्थ थीं। इन 5 आधारों पर जांच एजेंसी ने मांगा रिमांड सीबीआइ ने तर्क दिया, गिरिबाला सिंह बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं। जिला कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के बाद लगातार घटनाक्रम को लेकर वे मीडिया में बनी रहीं। गिरिबाला सिंह ने केस को दूसरी ओर मोल्ड करने की भरपूर कोशिश की है। पूर्व जज गिरिबाला सिंह क्राइम मैनेजमेंट में दक्ष हैं, उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग ले रखी है। सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से वे साक्ष्य प्रभावित कर सकती है। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया।

हाईकोर्ट सख्त! गिरिबाला की बेल खारिज, CBI को गिरफ्तारी की खुली छूट

भोपाल  भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने बुधवार को कई घंटों की बहस के बाद देर रात आदेश जारी किया। जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। इसी के साथ अब CBI पूर्व जज गिरिबाला को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने हाईकोर्ट में ​अग्रिम जमानत निरस्त करने की याचिका लगाई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने भी पूर्व जज गिरिबाला पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। बुधवार को दिन में पौने तीन घंटे की बहस के बाद रिजर्व किया गया हाईकोर्ट का ऑर्डर गुरुवार को रात्रि एक बजे के बाद बाहर आया। दरअसल, कोर्ट ने बुधवार को शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ही साफ कर दिया था कि आदेश पारित करेंगे। हाईकोर्ट में बुधवार की सुनवाई में सीबीआई ने दोनों मामलों में पक्षकार बनाए जाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया था। मामला ट्विशा सिंह की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है। ट्विशा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई, 2026 को ट्विशा की मौत फांसी पर लटकी अवस्था में हुई। बाद में कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भोपाल ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे चुनौती दी गई। सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हाई कोर्ट ने कहा कि वाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 15 मई, 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए आदेश दिया। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। पूर्व जज को गिरफ्तार कर सकेगी CBI हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा सकेगा। मामले की जांच कर रही CBI उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। 12 मई की रात हुई थी ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। 24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। आरोपियों ने ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। आरोपी ने मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की, जो जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है। मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को पक्षकार बनाना जरूरी है। चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। इसी बिंदु को अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना और कहा कि इन परिस्थितियों में गहन जांच की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाए गए हैं कि सास और पति उस पर गर्भपात का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं। कोर्ट ने फैसले में क्या कहा? हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था। व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं आधारों पर अग्रिम जमानत दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और सबूतों की गहराई से जांच करने पर अलग तस्वीर सामने आती है। हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर क्या-क्या कहा ?     जमानत देना मामले की गंभीरता के हिसाब से सही नहीं था।     ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।     आरोपी पक्ष चोटों का सही जवाब नहीं दे पाया।     आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया।     मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश।     पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा भी चोटें मिलीं।     ये चोटें सिर्फ शव उतारने से नहीं हो सकतीं।     गवाहों ने गर्भपात का दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।     अग्रिम जमानत केवल खास हालात में दी जानी चाहिए। आखिर में क्या बोला हाईकोर्ट? अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी। इसी के साथ कोर्ट ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं। CBI और राज्य सरकार की दलीलें     गर्भावस्था के बाद पति और सास ने ट्विशा पर चरित्र को लेकर शक किया।     गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका उल्लेख व्हाट्सऐप चैट्स में है।     ट्विशा ने अपने परिवार को लगातार मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दी थी।     आरोपी … Read more

ट्विशा केस में बड़ा एक्शन, CBI आज करेगी समर्थ से पूछताछ; चैट और कॉल डिटेल्स जांच के दायरे में

भोपाल  ट्विशा शर्मा की मौत मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच करेगी. सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ और सास के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इससे पहले सोमवार (25 मई) को एजेंसी ने जांच का जिम्मा संभालने और आवश्यक दस्तावेज और सबूत जुटाने के लिए भोपाल में एक स्पेशल क्राइम यूनिट भेजी।  मुलाकात के बाद, सीबीआई ने प्रक्रिया के अनुसार, भोपाल पुलिस की एफआईआर को पुनः दर्ज किया, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया था।  सीबीआई के हाथ में आई जांच, नई टीम गठित ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है. भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले दर्ज एफआईआर को एजेंसी ने री-रजिस्टर किया है. इस मामले की जांच दिल्ली में पदस्थ एसपी राजबीर सिंह के नेतृत्व में की जाएगी, वहीं डीएसपी निशु कुशवाहा को जांच अधिकारी (आईओ) नियुक्त किया गया है. सीबीआई टीम अब पूरे मामले की नई सिरे से पड़ताल करेगी।  आज समर्थ सिंह की कस्टडी लेगी CBI सूत्रों के अनुसार, सीबीआई बुधवार को मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर सकती है. एजेंसी डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर उससे गहन पूछताछ करेगी. सीबीआई की नजर व्हाट्सएप चैट्स, कॉल डिटेल्स और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिनके जरिए घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जाएगी।  12 मई को हुई थी संदिग्ध मौत यह मामला भोपाल के कटारा हिल्स इलाके का है, जहां 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना पुलिस को मिली थी. शुरुआती जांच में सामने आया कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने से हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटेमॉर्टम हैंगिंग' यानी जीवित अवस्था में फांसी की पुष्टि हुई, लेकिन शरीर पर चोटों के निशान मिलने से मामला और संदिग्ध हो गया।  गिरिबाला सिंह का आरोप, ट्विशा को ड्रग्स की लत थी ट्विशा (33) का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था. उनके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है. वहीं, ट्विशा के ससुराल वालों ने दावा किया कि उसे मादक पदार्थों की लत थी।  दहेज और प्रताड़ना के गंभीर आरोप मृतका के परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत में कहा गया है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जाता था. बताया गया कि शादी के दौरान करीब 2 लाख रुपए का दबाव डालकर लेन-देन कराया गया और इसके बाद भी लगातार अतिरिक्त रकम की मांग की जाती रही. इसके अलावा, ट्विशा के साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए हैं।  गर्भपात कराने का भी आरोप एफआईआर के अनुसार, अप्रैल 2026 में ट्विशा गर्भवती थी. परिजनों का आरोप है कि पति और सास ने उसके चरित्र पर सवाल उठाते हुए दबाव बनाकर गर्भपात करवाया. यह आरोप मामले को और गंभीर बना रहे हैं, जिस पर सीबीआई विशेष रूप से जांच कर रही है।  इन कानूनी धाराओं में दर्ज हुआ मामला सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया है. मध्यप्रदेश सरकार की सहमति के बाद केंद्र सरकार ने 25 मई को अधिसूचना जारी कर सीबीआई को जांच का अधिकार सौंपा था।  डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य होंगे अहम सीबीआई अब इस मामले में डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच करेगी. व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर घटनाक्रम को पुनर्निर्माण किया जाएगा. इसके साथ ही पोस्टमार्टम में मिले चोटों के निशान और उनके कारणों का भी विश्लेषण किया जाएगा।  परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद सीबीआई की एंट्री के बाद परिजनों को अब निष्पक्ष और सटीक जांच की उम्मीद जगी है. यह मामला न सिर्फ एक संदिग्ध मौत बल्कि दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है. आने वाले दिनों में आरोपी से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना है।  चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह सुनिश्चित करेगी कि इस मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो।  पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. प्राथमिकी में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है।  दोनों परिवारों को सलाह- मीडिया से बात न करें पीठ ने कहा, ‘‘हम पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं, ताकि जारी जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और कोई पूर्वाग्रह नहीं हो। 

ट्विशा मामले में नया मोड़, राज्य सरकार बोली- जांच में बाधा डाल रहीं सास

भोपाल   ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया इस केस को सनसनीखेज बनाने से बचें। मीडिया परिजनों का इंटरव्यू नहीं चलाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका निष्पक्ष जांच जरूरी है। सच ये है कि लड़की की जान गई है। मीडिया को बयान देने से बचे पीड़ित और आरोपी के परिवार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम पीड़ित परिवार और आरोपी परिवार दोनों के परिवार वालों से अपील करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं ताकि चल जांच पर किसी तरह का कोई प्रभाव न पड़े। सॉलिसिटर जनरल बोले- जांच सीबीआई अपने हाथ में लेगी सॉलिसिटर जनरल (SG) ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देते हुए कहा कि ट्विशा केस की जांच आज ही CBI अपने हाथ में लेगी। इस बीच ट्विशा परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने FIR दर्ज करने में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गिरिबाला को तुरंत जमानत कैसे? रसूख से जांच में बाधा… ट्विशा केस में सुप्रीम कोर्ट में उठे ये सवाल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल उठाए हैं और सीबीआई को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आरोपी और पीड़ित परिवार से मीडिया में या सार्वजनिक मंचों पर बयान न देने की अपील की है. अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि गिरिबाला अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. कोर्ट ने ये भी सवाल उठाया कि उन्हें तुरंत जमानत कैसे मिल गई।  सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनलर तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CBI आज ही मामले की जांच अपने पास ले लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर ले लिया. CJI सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि CBI तुरंत और निष्पक्ष जांच करेगी।  निष्पक्ष हो जांच: SC अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे ये मौत खुदकुशी हो या फिर कोई अन-नेचुरल डेथ (अप्राकृतिक मौत), हर हाल में इस पूरे मामले की तह तक जाकर एक निष्पक्ष और पूरी जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस वक्त मीडिया और आम जनता के बीच चल रही किसी भी तरह की अटकलों को बिल्कुल बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं।  सरकार के फैसले की सराहना अदालत में सुनवाई के दौरान ये बात भी सामने आई कि आरोपी पक्ष की गिरिबाला सिंह के एक रिटायर्ड जज होने की वजह से समाज में ये नैरेटिव (विमर्श) सेट किया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले की सराहना की है, ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी तरह निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके।  'जांच में सहयोग नहीं कर रही गिरिबाला' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह अब तक पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं, लेकिन वह लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू देकर दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने तुरंत ही जमानत भी मिल गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच के लिए उनसे जब उनका मोबाइल मांगा गया तो उन्होंने इस को लेकर भी परेशानियां खड़ी कीं।  साथ ही ट्विशा के वकील ने कहा कि ट्विशा की सास मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में कॉल डिटेल्स भी दे रही हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इन बातों को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों (आरोपी-पीड़ित) के परिवारों को सख्त हिदायत दी है कि वो मीडिया में बयान देने के बजाय अपने बयानों को सीधे जांच एजेंसी के पास रिकॉर्ड कराएं।  'परिवार आना चाहिए आगे' शीर्ष अदालत ने कहा कि एक युवा बेटी को खोने पर परिवार को जिस असीम पीड़ा और दुख से गुजरना पड़ता है, उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवारों को सही वक्त पर अपनी बेटियों के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा होकर उनके साथ सुरक्षित रहे।  'प्री-जज नहीं बनाना चाहती कोर्ट' चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया और आम जनता से इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की मनगढ़ंत अटकलें लगाने से पूरी तरह दूर रहने की अपील की. सीजेआई ने कहा, 'हम चाहते हैं कि लोग देश की इस सबसे प्रीमियर जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा रखें. अदालत अभी उन मुद्दों के परिणाम पर कोई पहले से राय (प्री-जज) नहीं बनाना चाहती है, जिनकी जांच होना अभी बाकी है।  परिवार दायर कर सकता है ट्रांसफर याचिका इसके अलावा ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को सूचित किया कि वह इस पूरे मुकदमे की निष्पक्षता के लिए इसे मध्य प्रदेश राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग कर सकते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है और वो इसके लिए किसी भी समय स्थानांतरण याचिका दायर कर सकते हैं।  आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं।  क्या है मामला बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल के घर की छत पर फंदे से लटकी हुई मिली थीं। ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी … Read more

मौत से पहले अजमेर जाने को लेकर बढ़ा था तनाव, ट्विशा केस में समर्थ सिंह का खुलासा

भोपाल. भोपाल में त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस पूछताछ के दौरान पति समर्थ सिंह ने बताया कि 17 अप्रैल को गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद त्विषा के व्यवहार में बदलाव आने लगा था। यह बयान उन आरोपों के बीच आया है, जिनमें कहा गया था कि समार्थ सिंह ने पत्नी से गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता को लेकर सवाल पूछे थे, जिससे वह मानसिक तनाव में थी। अजमेर यात्रा को लेकर हुआ था विवाद मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस जांच में सामने आया कि त्विषा शर्मा और समर्थ सिंह के बीच विवाह के पांच महीनों के दौरान अक्सर विवाद होते थे। मौत से कुछ घंटे पहले भी दोनों के बीच राजस्थान के अजमेर जाने को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद 12 मई को भोपाल स्थित उनके घर में त्विषा शर्मा मृत पाई गईं। मां को भेजे संदेशों में जताई परेशानी जांच के दौरान त्विषा शर्मा और उनकी मां के बीच हुए संदेश भी सामने आए हैं। इन संदेशों में उन्होंने गर्भावस्था के दौरान ससुराल के माहौल को लेकर तनाव और असहजता व्यक्त की थी। एक संदेश में उन्होंने लिखा था, “मेरा दम घुट रहा है मां।” परिवार का आरोप है कि त्विषा लगातार अपने माता-पिता से उन्हें वहां से ले जाने की गुहार लगा रही थीं। मौत से पहले मां को किया था फोन त्विषा शर्मा के भाई मेजर हर्षित शर्मा, जो भारतीय सेना में अधिकारी हैं, ने बताया कि 12 मई की रात करीब 10:05 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन कर अपनी परेशानियों के बारे में बताया था। बातचीत के दौरान अचानक समार्थ सिंह कमरे में पहुंचे, जिसके बाद कॉल कट गई। परिवार ने इसके बाद त्विषा , समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। कुछ घंटों बाद समार्थ की मां गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत की जानकारी परिवार को दी। समार्थ सिंह पुलिस रिमांड पर समर्थ सिंह फिलहाल सात दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। वह घटना के बाद से लापता थे और बाद में जबलपुर में आत्मसमर्पण करने पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर भोपाल ले आई। उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है। उनकी मां गिरिबाला सिंह, जो सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, को अग्रिम जमानत मिली है। पुलिस ने उन पर जांच में सहयोग नहीं करने और नोटिसों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। अदालत में समार्थ सिंह के व्यवहार पर चर्चा शुक्रवार को अदालत में पेशी के दौरान समार्थ सिंह का व्यवहार भी चर्चा का विषय बना। मौजूद लोगों के अनुसार, वह अदालत में पूरी तरह शांत और आत्मविश्वास से भरे दिखाई दिए। उनके चेहरे पर किसी तरह की घबराहट या पछावे के संकेत नहीं थे। AIIMS करेगा दूसरा पोस्टमार्टम मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर रविवार को नई दिल्ली स्थित AIIMS के चार वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम भोपाल में त्विषा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमॉर्टम करेगी। त्विषा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिवार ने पति और ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस मामले ने व्यापक जनआक्रोश पैदा कर दिया है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

ट्विशा मामले में जांच तेज, गिरिबाला सिंह की नियुक्ति भी जांच के घेरे में

भोपाल  देशभर में सुर्खियां बने मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह अब भी फरार है, जबकि उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। दूसरी ओर, ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस ने जहां पति व मुख्य फरार आरोपी समर्थ की गिरफ्तारी पर इनाम बढ़ाकर 30 हजार कर दिया है, वहीं उसकी सास गिरिबाला सिंह को पद से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया है। विभागीय स्तर पर उनकी नियुक्ति की जांच की भी बात कही गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासनिक समीक्षा के बाद की गई है।     समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई     घटना के 9 दिन बाद भी मुख्य आरोपी पति फरार     आरोपी की तलाश में 6 पुलिस टीमें और SIT गठित     समर्थ सिंह पर इनाम 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार किया गया     पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोट के कई निशान मिलने का दावा     गिरीबाला सिंह को उपभोक्ता आयोग से हटाने की कार्रवाई शुरू     मामले की CBI जांच की मांग को लेकर अलग याचिका की तैयारी आरोपी पति ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका दूसरी ओर मॉडल ट्विशा की मौत में मुख्य आरोपी बनाए गए अधिवक्ता समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। संभवत: शुक्रवार को इस पर सुनवाई हो सकती है। इसके पूर्व भोपाल जिला अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। बता दें कि इसकी मामले में समर्थ की मां को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और वे जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट जा रहे हैं।