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सीताराम-सीताराम भरने से धर्म नहीं बचेगा’—धीरेंद्र शास्त्री ने चेतावनी दी

छतरपुर  बागेश्वर धाम में 301 कन्या विवाह महोत्सव के दौरान  सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ किया जा रहा है। इस दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सीताराम-सीताराम करने भर से धर्म नहीं बचेगा, बल्कि माला और भाला रखना होगा।  उन्होंने कहा- 12 देशों के बाद अब अमेरिका में भी बागेश्वर धाम का सुंदरकांड मंडल बनेगा। इस साल यूरोप के 8 देशों में भी बनाएंगे। सुंदर कांड मंडल बनाने के बाद हम शस्त्र और शास्त्र का भी प्रशिक्षण देंगे। बेटियों को जूडो कराटे सिखाएंगे। दाढ़ी तब बनाएंगे जब बेटियों का विवाह हो जाएगा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- हम दाढ़ी तब बनाएंगे जब बेटियों का विवाह हो जाएगा। हम एक जाप कर रहे हैं। एक टाइम फलाहार और दूसरे टाइम दवा कर खा रहे हैं। बेटियों का विवाह बहुत ही पुण्य का काम है। हमारी समिति और शिष्यमंडल ने ये जिम्मेदारी उठाई है। यूपी के मऊ से भी पाठ के लिए 300 सदस्य पहुंचे हैं हनुमान चालीसा पाठ के लिए उत्तर प्रदेश के मऊ से श्री हनुमत कृपा सेवा समिति के 300 सदस्य पहुंचे हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि 7100 सदस्यों की ओर से 21 बार पाठ होना है। इसमें राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक मोहम्मद फैज खान भी शामिल हैं। 15 फरवरी को सात फेरे, बारात और विदाई होगी शुक्रवार से मेहंदी और हल्दी रस्म होना है। दूसरे दिन संगीत होगा। 15 फरवरी को सात फेरे, बारात और विदाई होगी। इससे पहले, सुबह 8 बजे से 11 बजे तक सुंदर कांड पाठ किया गया था। दोपहर 12 बजे से सवा लाख हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है। पाठ से पहले पूजन किया गया। शाम को भागवत कथा होगी और रात में हवन किया जाएगा। सेवादार कमल अवस्थी ने बताया कि ऑनलाइन हवन में करीब 5 लाख लोगों के जुड़ने की उम्मीद है। कल मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव मंडप कार्यक्रम में बेटियों को आशीर्वाद देने आएंगे।

लालबाग पैलेस में हुई बहाली, इंदौर के ऐतिहासिक दरबार हॉल के दरवाजे जल्द खुलेंगे

इंदौर  इंदौर के ऐतिहासिक लालबाग पैलेस का दरबार हॉल नए रूप में पर्यटकों के सामने आने के लिए तैयार है। करीब दो महीने तक चले संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्य के बाद अगले हफ्ते से इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। फिलहाल काम के चलते दरबार हॉल को पर्यटकों के लिए बंद रखा गया था।  आईजीएनसीए ने संभाली संरक्षण की जिम्मेदारी लालबाग पैलेस के भीतर संरक्षण और फिनिशिंग का कार्य दिल्ली की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। पुराने एंटीक्स के संरक्षण के साथ दरबार हॉल के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए सुधार कार्य किए गए। नवंबर में फिनिशिंग और मरम्मत कार्य के चलते इसे बंद किया गया था। पुराने वैभव के साथ लौट रही शाही चमक आईजीएनसीए की टीम ने दरबार हॉल को उसके मूल स्वरूप में ही नई चमक दी है। यहां किए गए स्टुको वर्क को पॉलिश और सफाई के साथ रीस्टोर किया गया। इसके लिए बड्स, रूई और छोटे ब्रशों की मदद से बेहद बारीकी से काम किया गया। छत पर लगे पानी के दाग भी साफ किए गए हैं और फॉल सीलिंग के कुछ हिस्सों में सुधार किया गया है। प्राकृतिक रंगों से हुआ पुनरुद्धार लालबाग के निर्माण के समय जिन रंगों का उपयोग किया गया था, उन्हीं रंगों को विशेषज्ञों की मौजूदगी में दोबारा लगाया गया है। इसका उद्देश्य लालबाग के ऐतिहासिक और शाही वैभव को यथावत बनाए रखना है, ताकि पर्यटक उसी पुराने दौर की भव्यता का अनुभव कर सकें। सेंट्रल म्यूजियम का भी हो रहा विकास लालबाग परिसर स्थित सेंट्रल म्यूजियम में भी विकास कार्य जारी हैं। सिंहस्थ से पहले यहां कई सुविधाओं का विस्तार किया जाना है। बाउंड्रीवाल का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य स्टोन लगने और पॉलिशिंग के बाद पूरा किया जाएगा। आज कुछ हिस्सों से प्राचीन मूर्तियों को शिफ्ट किया जाएगा, जिसके बाद कैफेटेरिया, नए टिकट काउंटर और क्लॉक रूम का निर्माण कार्य शुरू होगा। आउटर गार्डन और कन्वेंशन सेंटर पर काम जारी लालबाग के बाहरी हिस्से और कन्वेंशन सेंटर का कार्य बीते वर्ष जून से मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। यह कार्य सिंहस्थ से पहले पूरा किया जाना है। यहां आउटर गार्डन, फव्वारे, देवी अहिल्याबाई सेंटर फॉर सेल्फ डिफेंस, साइकिलिंग और वॉकिंग ट्रैक विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटकों की रुचि बढ़ाने के लिए ओपन थिएटर का प्रस्ताव भी है। दरबार हॉल की ऐतिहासिक विशेषताएं लालबाग पैलेस का दरबार हॉल, जिसे दीवान-ए-आम भी कहा जाता है, इंदौर की शाही विरासत का प्रतीक है। इसका इंटीरियर रोकोको शैली से प्रेरित है और इसमें इटली से आयातित सफेद व रंगीन संगमरमर का उपयोग किया गया है। हॉल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दिन के समय बिना बिजली के भी पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिलती है। इसकी छतों पर ग्रीक पौराणिक कथाओं के दृश्य चित्रित हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस पर की गई सुनहरी पॉलिश इसे शाही रूप देती है। यूरोप से मंगवाए गए भव्य क्रिस्टल झूमर, बेल्जियम के रंगीन कांच से बनी खिड़कियां और दरवाजे, तथा जॉर्जियन और रीजेंसी शैली का फर्नीचर इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। दीवारों और कांच के पैनल्स पर होलकर राज्य का आदर्श वाक्य ‘जो प्रयास करता है, वही सफल होता है’ भी अंकित है।

उज्जैन महाकाल में महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ की संभावना, सुरक्षा के लिए 1500 पुलिसकर्मी

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाशिवरात्रि पर दर्शन व्यवस्था को लेकर बुधवार को पुलिस ओर प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. पर्व पर 24 घंटे मंदिर खुला रहने ओर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देख अधिकारियों ने दर्शन की रणनीति तय की. वहीं दर्शनार्थियों के आने वाले मार्ग ओर पार्किंग व्यवस्था का भी निरीक्षण किया. महाशिवरात्रि के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। अनुमानित भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस कंट्रोल रूम में एडीजी राकेश गुप्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं तथा वीवीआईपी मूवमेंट की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। महाशिवरात्रि पर सुरक्षा के लिए 6 एएसपी, 18 डीएसपी, 38 थाना प्रभारी, 50 एसआई, 85 एएसआई सहित कुल 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनका कंट्रोल रूम मंदिर परिसर में ही बनाया गया है। ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी रखी जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए इस बार एक नई पहल की गई है। नगर एवं ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों के साथ जिम में कसरत करने वाले युवा, आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी तथा कॉलेज छात्रों को वालंटियर के रूप में लगाया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को 40 मिनट के भीतर दर्शन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। महाकाल नगरी पूरी तरह तैयार है, अब इंतजार है श्रद्धालुओं की आस्था के सैलाब का। 24 घंटे खुला रहेगा बाबा का दरबार इस संबंध में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि नववर्ष के पहले दिन करीब 8 लाख दर्शनार्थी महाकाल मंदिर पहुंचे थे. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर यह संख्या 10 लाख पहुंच सकती है. पर्व पर तड़के होने वाली भस्म आरती आधा घंटा पूर्व होगी और मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा. इसलिए दर्शन व्यवस्था के साथ पार्किंग ओर दर्शनार्थियों के मार्ग का निरीक्षण किया जा रहा है. यह दिए निर्देश महाशिवरात्रि पर दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए कमिश्नर सिंह ने अधिकारियों के साथ मंदिर परिसर, महाकाल महालोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का भ्रमण व निरीक्षण किया. उन्होंने दर्शन मार्ग,श्रद्धालुओं की आवाजाही,पार्किंग, जूता स्‍टेण्‍ड, पेयज , लड्डू प्रसाद, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधा और भीड़ प्रबंधन का अवलोकन कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए. साथ ही मंदिर परिसर एवं महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेकर निर्माण एजेंसियों को कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए. 

शराब से कमाई बढ़ाने की योजना, नई आबकारी नीति में सरकार ने तय किया 21 हजार करोड़ का लक्ष्य

भोपाल   मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार कमाई और राजस्व बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने प्लान बनाने शुरु कर दिया है और इस दिशा में काम भी शुरु कर दिया है। दरअसल मोहन सरकार शराब से राजस्व हासिल करने की सोच रही है। जानकारी के मुताबिक सरकार शराब के जरिए 21 हजार करोड़ राजस्व हासिल करने का लक्ष्य एकत्र करने की योजना बना रही है। नई नीति में 19,000 से 21,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार किया है, जिसमें शराब से लगभग 19,000 से 21,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य है। नई नीति में अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने पर भी फोकस है। जिसके चलते दुकानों की नीलामी 20% अधिक दर पर की जा सकती है, इससे शराब महंगी हो सकती है। दरअसल  सरकार के आबकारी विभाग ने आबकारी नीति 2026-27 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। शासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल समिति ने कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रालय में नई आबकारी नीति के ड्राफ्ट पर चर्चा की है। इस बैठक में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ने शिरकत की। नई नीति में शराब दुकानों की बिक्री से राजस्व का लक्ष्य बढ़ाकर 21 हजार  करोड़ रुपये करने पर केंद्रित किया गया है। मध्यप्रदेश में बहुत जल्द ही नई आबकारी नीति आने वाली है जिसमें बहुत सारे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इशारा किया है कि अप्रैल महीने में मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होगी। आबकारी नीति 2025- 26 में कई शहरों में शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दी जाएगी। वहीं, कुछ और बड़े फैसले लिए जाएंगे। कब तक मिल सकती है नई नीति को मंजूरी मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की एक बड़ी अधिकारी ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि फरवरी महीने की आखिरी में या मार्च की शुरुआत में कैबिनेट नई शराब नीति के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इसके तहत सबसे बड़ी शुरुआत मध्य प्रदेश की आध्यात्मिक और धार्मिक राजधानी उज्जैन से होगी। यहां की करीब 20 दुकान शराब की दुकान बंद कर दी जाएंगी। उज्जैन समेत 16 धार्मिक शहरों में होगी शराबबंदी उज्जैन के अलावा मध्य प्रदेश के करीब 15 शहरों में शराब की बिक्री बंद कर दी जाएगी। यह प्रावधान आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई नीति के ड्राफ्ट में किया है। यह ड्राफ्ट मंत्री परिषद की समिति को भेजा गया था,जिस पर सरकार ने चर्चा की है। मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इशारों में है बात बताई है कि जहां से है कई शहरों में शराबबंदी की जाएगी, वहां कुछ बड़े शहरों में मिनी बार के विकल्प पर मंथन किया जा रहा है। यह मिनी बार की तरह होंगे। क्यों की जा रही है शराबंदी मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार चाहती है कि शराब की बिक्री को हतोत्साहित किया जाए ताकि नागरिक उसके दुष्प्रभाव से बच सकें। वहीं, नई नीति में 25 फीसदी पुरानी शराब की दुकानों के ठेके करीब 20% बढ़ोतरी के साथ रिन्यू किए जा सकते हैं। हालांकि आबकारी विभाग ने कुछ जगहों पर दुकान बंद करने तो कुछ जगहों पर नई दुकान शुरू करने का भी प्रावधान बनाया है। लेकिन कुल मिलाकर सरकार प्रदेश की अधिकांश शहरों में शराब की दुकान बंद करके शराब की बिक्री को हतोत्साहित करने की ओर बढ़ रही है। शराबबंदी को लेकर क्या बोले थे सीएम आपको बता दे कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन में बयान देकर कहा है कि सरकार धार्मिक नगरों में शराब बंदी को लेकर आगे बढ़ रही है। नई वित्तीय वर्ष में इस पर अमल किया जा सकता है। चित्रकूट, उज्जैन, ओंकारेश्वर, अमरकंटक जैसे कई शहरों में शराब की दुकान बंद कर दी जाएगी। कई शहरों की शराब दुकान हटाकर उन्हें शहर की सीमा से दूर स्थापित किया जाएगा। नई नीति में अवैध शराब निर्माण, अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े प्रावधान जानकारी के मुताबिक ज्यादा राजस्व प्राप्त करने के लिए नई नीति में शराब के अवैध निर्माण के साथ ही अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े बताए जा रहे हैं। सबसे पहले नवीनीकरण के जरिए दुकानें आवंटित होंगी। फिर लॉटरी के जरिए और इसके बाद ई-टेंडर के माध्यम से शराब दुकानों का ठेका दिया जाएगा। आबकारी नीति ड्राफ्ट में जरूरी संशोधन के बाद सीएम मोहन यादव के समक्ष पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक नई आबकारी नीति में मप्र आबकारी अधिनियम-1915 में संशोधन का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार अधिनियम की वो चीजें खत्म कर दी जाएंगी जो अब अव्यावहारिक हैं और न ही राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। अगर  दुकान नहीं बिकती है तो ई टेंडर के माध्यम से होगी नीलामी जानकारी के मुताबिक नई आबकारी नीति में न कोई शराब दुकान बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई शराब दुकान खोला जाना प्रस्तावित है।  मप्र में शराब दुकानों की कुल संख्या 3,558 है। वहीं प्रदेश में  जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रावधान बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही  नई आबकारी नीति में शॉपिंग मॉल में महंगी शराब के काउंटर खोले जाने की जानकारी भी है।

भोपाल-इंदौर समेत शहरों में टाउनशिप विकास के लिए नई गाइडलाइन, राज्य समिति करेगी अंतिम निर्णय

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब एकीकृत टाउनशिप बनेंगी। किसान, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति भी शहरों के आसपास लैंड पुलिंग के जरिये भूमि लेकर टाउनशिप बना सकेंगे। परियोजना के 15 प्रतिशत भू-भाग पर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और एलआइजी श्रेणी के आवास बनाने होंगे। किफायती आवास बनाने पर अलग से अनुदान मिलेगा। विकासकर्ता को नगर तथा ग्राम निवेश में पंजीयन कराना होगा। ग्रीन बेल्ट जैसी पांबदियों से छूट मिलेगी। परियोजना के बीच सरकारी भूमि आने पर आठ हेक्टेयर तक छूट दी जा सकेगी। नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने  नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं। प्रदेश में शहरीकरण को लेकर बढ़ते दबाव और बेतरतीब विकास को व्यवस्थित करने के लिए सरकार अब एकीकृत टाउनशिप को बढ़ावा देगी। इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं, जो विकास प्राधिकरण सहित अन्य हाउसिंग एजेंसियों पर भी लागू होंगे। 10 से 20 हेक्टेयर न्यूनतम भूमि की शर्त नियमों के अनुसार पांच लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में एकीकृत टाउनशिप के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में यह सीमा 20 हेक्टेयर तय की गई है। स्थानीय निकाय सीमा या योजना क्षेत्र में 40 हेक्टेयर या अधिक क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं के लिए कम से कम 30 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य होगी। बड़े शहरों में विकास योजना सड़क की चौड़ाई 24 मीटर निर्धारित की गई है। 66 वर्गमीटर तक अफोर्डेबल आवास का प्रावधान नियमों में अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत अधिकतम 66 वर्गमीटर तक के आवास निर्माण की अनुमति दी गई है। परियोजना स्थल एक ही स्थान पर होना चाहिए। केवल राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या प्रमुख जिला मार्ग से विभाजित स्थिति में छूट रहेगी। डेवलपर के पंजीयन के लिए संचालक नगर एवं ग्राम निवेश को पंजीयन अधिकारी बनाया गया है। आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। 15 दिन के भीतर आवेदन स्वीकृत या निरस्त किया जाएगा। निरस्तीकरण की स्थिति में 20 प्रतिशत कटौती के बाद शुल्क वापस होगा। पंजीयन शुल्क 50 हजार, नवीनीकरण 25 हजार पंजीयन शुल्क 50 हजार रुपए और नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपए तय किया गया है। पंजीयन पूरे राज्य में मान्य रहेगा। डेवलपर को शपथ पत्र देना होगा कि वह किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं है। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी सदस्य होंगे। अन्य जिलों में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे और संबंधित स्थानीय अधिकारी सदस्य रहेंगे। बड़े जिलों में नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय नोडल एजेंसी होगा, जबकि अन्य में संयुक्त संचालक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। भूमि अधिग्रहण में प्रशासनिक सहयोग का प्रावधान डेवलपर को कम से कम 80 प्रतिशत भूमि स्वयं प्राप्त करनी होगी। शेष भूमि के लिए आवश्यकता होने पर प्रशासनिक सहयोग लिया जा सकेगा। पारस्परिक सहमति के माध्यम से भूमि एकत्र करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यहां नियम लागू नहीं बनक्षेत्र के नदी-ताला, तालाब, बांध आदि राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य। रक्षा संपदा क्षेत्र, छावनी बोई। अधिसूचित पर्यावरण ईको संवेदनशील क्षेत्र। खदान, एसईजेड वन्यजीव गलियारा। ऐतिहासिक पुरा स्थलों से प्रभावित स्थल। रेलवे भूमि या जिसे राज्य सरकार ने प्रतिबंधित किया। यह करना अनिवार्य     टाउनशिप डेगालपर का टीएंडसीपी में पंजीयन।     पंजीयन शुल्क 50000, नवीनीकरण शुल्क 25000 व प्रमाण-पत्र की वैधता 5 वर्ष जैसी व्यवस्थाएं लागू।     कुल क्षेत्र का 2.5%, ग्रीन कवर।     टाउनशिप में कुल क्षेत्रफल का 10%, पार्क और खुला क्षेत्र राना अनिवार्य।     15% ईडबल्यूएस-निम्न आय वर्ग के लिए रिजर्व। कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा अभी तक टाउनशिप का विकास कालोनाइजरों तक सीमित था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा। इन पर कालोनाइजर एक्ट के प्रविधान लागू होंगे। नागरिकों को पेयजल, बिजली, सड़क, नाली सहित सभी सुविधाएं देनी होंगी। निजी भूमि का आपसी सहमति से होगा अधिग्रहण टाउनशिप विकसित करने के लिए यदि भूमि कम पड़ती है और वहां सरकारी भूमि उपलब्ध है तो वह आठ हेक्टेयर की सीमा में उपलब्ध कराई जा सकेगी। बीच में यदि निजी भूमि आती है तो विकासकर्ता सरकार से अनुरोध कर आपसी सहमति के आधार पर अधिग्रहण करा सकेंगे। टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा निर्धारित शुल्क चुकाकर उन्हें पंजीयन भी कराना होगा। टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा। प्रत्येक चरण के लिए तीन वर्ष रखे जाएंगे। दूसरे चरण का काम तभी प्रारंभ किया जा सकेगा, जब पहले चरण का काम कम से कम 50 प्रतिशत पूरा हो जाए। पांच लाख से कम आबादी क्षेत्र के लिए दस हेक्टेयर भूमि नियम में स्पष्ट किया गया है कि पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के आसपास टाउनशिप के लिए कम से कम दस हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए यह 20 हेक्टेयर रहेगी। मार्ग चौड़ाई 24.0 मीटर से कम न हो। मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी 40 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र वाले टाउनशिप में मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टाउनशिप के विकास की अनुमति राज्य स्तर से लेनी होगी। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में साधिकार समिति रहेगी। बाकी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति देगी। आवेदन करने पर 60 दिन के अंदर अनुमति देनी होगी।  

MP में डिजिटल डिवाइड साफ, आधे गांवों तक नहीं पहुंचा BSNL नेटवर्क, निजी 5G कंपनियों का दबदबा

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी और निजी टेलीकॉम सेवाओं के बीच की खाई गहरी होती जा रही है। संसद में पेश सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां एक ओर प्रदेश के आधे से ज्यादा गांव अत्याधुनिक 5G नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी कंपनी बीएसएनएल (BSNL) अभी भी आधे से ज्यादा प्रदेश में अपनी पहुंच बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। BSNL का हाल: 56% गांवों तक अब भी नहीं पहुंची पहुंच संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में बीएसएनएल के नेटवर्क विस्तार की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है। मध्य प्रदेश में कुल 54,903 गांव हैं इनमें से केवल 24,394 गांवों को ही बीएसएनएल की सेलुलर सेवाओं से कवर किया जा सका है। नेटवर्क विहीन: प्रदेश के लगभग 55.5% (करीब 30,509 गांव) में आज भी बीएसएनएल का सिग्नल नहीं पहुंचता है। उत्तर प्रदेश (पूर्व) जैसे सर्कल में बीएसएनएल ने 92% गांवों को कवर कर लिया है, जबकि एमपी में यह आंकड़ा आधे से भी कम है। 4G टावरों का जाल और 5G की तैयारी संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया कि बीएसएनएल वर्तमान में पूरे देश में 1 लाख स्वदेशी 4G टावर लगा रहा है । 15 जनवरी, 2026 तक 97,672 साइटें स्थापित की जा चुकी हैं, जिनमें से 95,511 साइटें ऑन-एयर हो चुकी हैं । खास बात यह है कि ये सभी उपकरण भविष्य में 5G में अपग्रेड किए जा सकेंगे । 5G की रफ्तार: आधा मध्य प्रदेश हाई-स्पीड इंटरनेट से लैस बीएसएनएल की सुस्ती के विपरीत, देश में 5G के विस्तार ने प्रदेश में तेज रफ्तार पकड़ी है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G बाजार बन गया है। मध्य प्रदेश के 27,961 गांवों में 5G नेटवर्क पहुंच चुका है. यानी प्रदेश के 51% से अधिक गांव अब सुपर-फास्ट इंटरनेट जोन में हैं। गांवों तक 5G पहुंचाने में एमपी देश में 6वें नंबर पर टावरों का जाल: प्रदेश भर में अब तक 22,182 5G बीटीएस (BTS) टावर लगाए जा चुके हैं। गांवों तक 5G पहुंचाने के मामले में मध्य प्रदेश देश के टॉप राज्यों की सूची में छठे (6th) स्थान पर है। बीटीएस (BTS) टावर: क्या है यह तकनीक? खबरों में बार-बार आने वाला शब्द 'बीटीएस' (Base Transceiver Station) वह मुख्य मशीन है जो मोबाइल और नेटवर्क के बीच सिग्नल का आदान-प्रदान करती है। 5G के लिए लगाए जा रहे ये नए बीटीएस पुराने टावरों की तुलना में कई गुना ज्यादा डेटा स्पीड और कम विलंबता (Latency) प्रदान करते हैं, जिससे वीडियो कॉलिंग और गेमिंग जैसे काम बिना रुके होते हैं। मप्र-छग सर्किल में किस कंपनी के पास कितने यूजर्स? मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सर्किल में कुल मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 7.98 करोड़ के पार पहुंच गई है। मार्केट शेयर के हिसाब से रिलायंस जियो का दबदबा बरकरार है। ट्राई (TRAI) द्वारा 10 फरवरी 2026 को जारी की गई रिपोर्ट (दिसंबर 2025 के आंकड़ों तक) के अनुसार, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (MP-CG) सर्किल में मोबाइल यूजर्स का डेटा और कंपनियों की स्थिति इस प्रकार है ..   टेलीकॉम कंपनी कुल यूजर्स (लगभग) मार्केट शेयर (%) स्थिति रिलायंस जियो (Jio) 4.02 करोड़ 50.4% नंबर-1 पर एयरटेल (Airtel) 1.65 करोड़ 20.6% दूसरे स्थान पर वोडाफोन-आइडिया (Vi) 1.62 करोड़ 20.3% तीसरे स्थान पर बीएसएनएल (BSNL) 69 लाख 8.7% चौथे स्थान पर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऊर्जा मंत्री तोमर के सुपुत्र रिपुदमन के विवाह समारोह में शामिल हुए वर-वधु को दिया आशीर्वाद

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर के सुपुत्र रिपुदमन सिंह (सागर) के विवाह समारोह में शामिल होकर वर-वधु को आशीर्वाद प्रदान किया। ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर के सुपुत्र रिपुदमन सिंह का विवाह कनिका (सिमरन) सुपुत्री मती सीमा-स्व. सूर्यवीर सिंह सिसौदिया के साथ हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर-वधु को आशीर्वाद प्रदान कर राधाकृष्ण की मूर्ति भेंट की। उन्होंने मंत्री  तोमर एवं उनके परिजन को शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव दमोह जिले के नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव में होंगे शामिल

भोपाल. नोहटा स्थित ऐतिहासिक नोहलेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित दस दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव में शामिल होंगे। यह आयोजन संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेन्द्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन में चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को ही छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम में महाशिव रात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित गरीब परिवारों की कन्याओं के सामुहिक विवाह समारोह में भी शामिल होंगे। नोहलेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व नोहटा में स्थित नोहलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। यह मंदिर कलचुरी कालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण 10वीं–11वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। मंदिर की शिल्पकला, अलंकृत स्तंभ, विशाल गर्भगृह एवं कलात्मक नक्काशी आज भी दर्शकों को उस युग की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती है। पुरातत्वविदों के अनुसार नोहलेश्वर मंदिर मध्य भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, जहां प्राचीन काल से ही श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते आ रहे हैं। यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। महोत्सव की विशेषताएं महोत्सव के दौरान देशभर के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समा बॉध रहे है। साथ ही, धार्मिक, सांस्कृतिक संध्याएं, कार्यशालाएं, महिला सम्मेलन, किसान गोष्ठी और पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है।  

भारतीय संस्कृति में एकल शोध नहीं, समग्र कल्याण आधारित है शोध की परंपरा

संस्थान द्वारा प्रकाशित 7 पुस्तकों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "Mahakal: The master of time" वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले "41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव" के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा। पूज्य आचार्य श्री मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है। वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक श्री सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है। भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए। उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंटरनेशनल पैरा स्विमर श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दी बधाई

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दुनिया के सबसे मुश्किल समुद्री चैनलों में से एक, न्यूज़ीलैंड के कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्मश्री और तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड जीतने वाले श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया ने इतिहास रच दिया है। इस शानदार कामयाबी के साथ, वे कुक स्ट्रेट को जीतने वाले एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं। उनकी यह असाधारण कामयाबी देश और मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया के ज़बरदस्त जज़्बा और पक्का इरादा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहेगा।