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पूर्व अग्निवीरों के लिए MP सरकार का बड़ा ऐलान, 20% आरक्षण

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने अग्निवीरों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को वर्दी वाली सेवाओं में 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इसके साथ ही 24,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। ये फैसले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किए गए। राज्य सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा उन युवाओं को मिलेगा जो केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करते हैं। राज्य सरकार ने क्या बताया? राज्य सरकार के एक अफसर ने बताया कि युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दी वाली सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दे दी गई। अफसर के मुताबिक, गृह विभाग के तहत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। किसे कितना आरक्षण मिलेगा? अफसर के मुताबिक, विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, कारागार विभाग के तहत जेल प्रहरियों की नियुक्ति में होमगार्ड को 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने बताया है कि वनरक्षकों की नियुक्ति में भी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। अधिकारी ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग के तहत आबकारी आरक्षकों की नियुक्ति में होमगार्ड को 10 फीसदी, पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी और पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया है। अग्निवीरों के लिए दो राज्यों से गुड न्यूज आई। मध्य प्रदेश सरकार ने ऐलान किया कि वह पूर्व अग्निवीरों को वर्दी वाली नौकरियों में 20 फीसदी आरक्षण देगी। वहीं महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच सेवा मुक्त हो रहे अग्निवीरों के पहले बैच को बिना किसी लिखित परीक्षा के सीधे पुलिस और सुरक्षा बलों में नौकरी दी जायेगी। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि पहले बैच के सेवानिवृत्त अग्निवीरों को महाराष्ट्र पुलिस, राज्य रिजर्व पुलिस बल और अग्निशमन सेवाओं में सीधे समायोजित किया जाएगा। पात्र उम्मीदवारों को नयी लिखित परीक्षा से छूट मिलेगी, चार साल की आयु में छूट दी जाएगी और अगर जरूरी हुआ तो विशेष रूप से बनाए गए पदों पर समायोजित किया जाएगा। एमपी में कहां कहां अग्निवीरों को आरक्षण एमपी सरकार के अधिकारी ने बताया कि युवाओं के सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दी वाली सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दी गई। गृह विभाग के तहत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। उन्होंने बताया कि विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अधिकारी के अनुसार कारागार विभाग के तहत जेल प्रहरियों की नियुक्ति में होमगार्ड को 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वनरक्षकों की नियुक्ति में भी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। अधिकारी ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग के तहत आबकारी आरक्षकों की नियुक्ति में होमगार्ड को 10 फीसदी, पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी और पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया है। जनवरी 2027 तक 19 हजार से अधिक अग्निवीर घर लौट रहे केंद्र की ओर से 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष है। योजना के तहत 25 फीसदी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त किया जाता है। यानी 75 फीसदी को वापस घर भेज दिया जाता है। अब सेना से अग्निवीरों का पहला बैच जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने जा रहा है, जिसमें 19 हजार से अधिक अग्निवीर शामिल हैं। इनका चार साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सेवामुक्त (75 प्रतिशत) होने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने विभिन्न विभागों में ने आरक्षण और प्राथमिकताओं का प्रावधान किया है। अग्निवीरों को बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और असम राइफल्स में सिपाही तथा राइफलमैन के पदों पर 50% आरक्षण। इन्हें लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षा से भी छूट मिलेगी। भारतीय रेलवे: श्रेणी-2 और उससे ऊपर के पदों में 5 प्रतिशत और श्रेणी-1 के पदों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित किया गया है। अफसरों ने बताया कि हॉरिजॉन्टल आरक्षण सभी श्रेणियों यानी सामान्य वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में लागू होता है। 2022 में शुरू की गई थी अग्निपथ योजना केंद्र की ओर से 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष है, जिसमें छह महीने का प्रशिक्षण शामिल है। योजना के तहत 25 फीसदी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। चार साल की सेवा पूरी कर दिसंबर 2026 में अग्निवीर अपने घरों, अपने परिवारों और अपने प्रियजनों के बीच लौटने वाले हैं। ये वे हजारों युवा पुरुष और महिलाएं हैं, जिन्होंने भारतीय सेना का हिस्सा बनने के लिए चार साल की अवधि के लिए भर्ती होने का विकल्प चुना था।

MP में सफल हो रहा सेवा संकल्प अभियान 2026, 3-4 अक्टूबर को लगेंगे शिविर

प्रदेश में सफल हो रहा है सेवा संकल्प अभियान 2026: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत 3 और 4 अक्टूबर को गावों और शहरों में लगेंगे शिविर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पन्न गतिविधियों की जानकारी लेकर आगामी कार्यक्रमों के संबंध में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस से प्रारंभ एक माह के सेवा संकल्प अभियान:2026 की गतिविधियों को अच्छी सफलता मिल रही है। अभियान में गत 12 दिवस अनेक अभिनव कार्य सम्पन्न हुए हैं। अभियान के शेष दिनों में ऐसे ही रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित होंगे जिससे जन-जन को जोड़ने का कार्य होगा। जनकल्याण की दिशा में जहां मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं वहीं सेवा संकल्प अभियान 2026 ने नागरिकों में उत्साह का संचार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत हुई विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को अभियान की गतिविधियां जारी रखने के निर्देश दिए। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, मंत्रीगण प्रह्लाद पटेल, विजय शाह, विश्वास सारंग, नागर सिंह चौहान, उदय प्रताप सिंह, सुनिर्मला भूरिया, श्रीमती प्रतिमा बागरी, नरेंद्र शिवाजी पटेल और मुख्यसचिव अशोक बर्णवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में अन्य मंत्रीगण वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से प्रारंभ हुए एक माह अवधि के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों से नागरिकों को जोड़ने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के कार्यो की जानकारी प्राप्त की और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। मंत्री गण और वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित हुए। अनेक मंत्री और जिला स्तर के अधिकारी वर्चुअल रूप से जुड़े। सेवा सेतु अभियान होगा 3 और 4 अक्टूबर को बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 3 और 4 अक्टूबर को सेवा सेतु अभियान आयोजित किया गया। अभियान में 3 अक्टूबर को ग्रामीण क्षेत्र और 4 अक्टूबर को नगरीय क्षेत्रों में शिविर आयोजित होंगे, जिनके माध्यम से नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। इस अभियान में 3 अक्टूबर को साप्ताहिक जन विश्वास अभियान को भी जोड़ा जाएगा। सेवा के रंग- राष्ट्र के संग (भारत मंडल) प्रदेश के 6 जिलों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, झाबुआ और आलीराजपुर में निर्धारित थीम पर मानव रंगोली की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के अंतर्गत विद्यार्थी, उद्यमी, शिक्षक, अधिकारी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। कुल 16 फोकस सेक्टर चिन्हित किए गए हैं। सेवा ज्योति कलश यात्रा 7 अक्टूबर को निकाली जाएगी, जिसके राज्य नोडल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग और राज्य प्रभारी अधिकारी संजीव सिंह होंगे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इन यात्राओं में हितलाभ वितरण के साथ विकसित भारत और सेवा के संकल्प से जुड़े आयोजन होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 7 अक्टूबर को वर्चुअल संबोधन देंगे। आशीर्वाद का दीया गतिविधि से हुए शानदार शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस 17 सितम्बर को अभियान प्रारंभ हुआ, जिसके अंतर्गत प्रदेश में 3 करोड़ 87 लाख 80 हजार 463 दीयें जलाए गए। इसमें कुल 2 करोड़ 64 लाख 85 हजार 60 नागरिकों ने सहभागिता की। उज्जैन में दीपक जलाने का विश्व कीर्तिमान बनाया गया। उज्जैन में 33 लाख 27 हजार 125 दिए जलाये गए। इस गतिविधि के लिए नोडल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य प्रभारी अधिकारी संजय दुबे थे। जनसम्पर्क सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला बाल विकास, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग ने दायित्व संभाला। मेरे सपनों का भारत- भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता 19 सितम्बर से 26 सितम्बर के बीच प्रदेश में 27 लाख 28 हजार 668 प्रतिभागियों ने चित्रकला प्रतियोगिता में और 12 लाख 37 हजार 810 प्रतिभागियों ने भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। नोडल मंत्री उदय प्रताप सिंह और प्रभारी सचिव संजय गोयल ने इस गतिविधि का दायित्व वहन किया। नमो सेवा प्रदेश में 19 सितम्बर से प्रारंभ नमो सेवा गतिविधि के अंतर्गत 5 अक्टूबर तक सांस्कृतिक दलों द्वारा नुक्कड़ टोलियां बनाकर प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। अब तक 3033 कार्यक्रम हुए हैं जिनमें 5208 कलाकारों ने हिस्सा लिया है। इस गतिविधि के नोडल मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी और राज्य प्रभारी अधिकारी अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला हैं। संबंधित जिला प्रशासन के साथ जनसम्पर्क विभाग द्वारा दायित्व निभाया जा रहा है। आंगन मिलन सेवा प्रदेश में आंगन मिलन सेवा के अंतर्गत 26 सितम्बर से गतिविधियां प्रारंभ हुई हैं, जो 5 अक्टूबर तक चलना हैं। आंगनवाड़ियों में 24 लाख 28 हजार 116 महिलाओं और बच्चों ने कार्यक्रम में भागीदारी की है। कुल 1 लाख 35 हजार 110 बहनों का सम्मान भी किया गया। प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया और राज्य प्रभारी अधिकारी श्रीमती जीवी रश्मि हैं1 सेवा की कहानी प्रदेश में कुल 5 लाख 25 हजार 54 प्रेरक कहानियां प्राप्त हुई हैं। सेवा की कहानी प्रकल्प में राज्य नोडल मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी और राज्य प्रभारी अधिकारी जनसम्पर्क आयुक्त और परिवहन सचिव मनीष सिंह हैं। सेवा की कहानी के अंतर्गत 17 सितम्बर से प्रारंभ गतिविधियां 17 अक्टूबर तक पूरे एक माह की अवधि में संचालित की जा रही हैं। वड़नगर से वाराणसी सेवा यात्रा इस गतिविधि की शुरूआत 17 सितम्बर से हुई है। अब तक 1706 नगरों और कस्बों में 6 लाख 48 हजार 520 नागरिकों की सहभागिता से कार्यक्रम सम्पन्न हुए हैं। मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल नोडल मंत्री हैं। सचिव टी इलैया राज राज्य प्रभारी अधिकारी हैं। यह गतिविधियां 7 अक्टूबर तक चलना है। सेवा मेरा योगदान प्रदेश में 10 गतिविधियों पर केंद्रित सेवा मेरा योगदान का संचालन 2 से 10 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्वच्छता, स्वास्थ्य शिविर, वृद्धाश्रमों और अनाथालयों में सेवा कार्य होंगे। दिव्यांगजन कल्याण और विद्यार्थी कल्याण की गतिविधियां भी राज्य नोडल मंत्री राकेश सिंह और राज्य प्रभारी अधिकारी श्रीमन शुक्ल के पर्यवेक्षण में होंगी। विकसित भारत संकल्प यात्रा प्रदेश में एक माह (17 सितम्बर से 17 अक्टूबर) की अवधि में विकसित भारत संकल्प यात्रा के अंतर्गत अन्य राज्यों के प्रतिनिधि और इनफ्लूएंसर्स प्रदेश भ्रमण पर आ रहे हैं। राज्य नोडल मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य प्रभारी अधिकारी सचिव मनीष सिंह इन गतिविधियों का पर्यवेक्षण और निर्देशन कर रहे हैं।  

CM यादव का निर्देश- हॉट स्पॉट पर बढ़ाएं निगरानी, युवाओं को नशे से बचाएं

युवाओं को नशे से बचाएं, जो हॉट स्पॉट हैं वहां रखें निगरानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवाओं को हर हाल में नशे से बचाएं। विशेष रूप से शहरों में जो हॉट स्पॉट हैं वहां निगरानी रखी जाए। जिला स्तर पर प्रत्येक माह बैठक होना चाहिए जिसमें नशा मुक्त भारत पर विचार हो और इसके क्रियान्वयन की दिशा में भी आगे बढ़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में नशा मुक्त भारत के संबंध में वीडियो कांफ्रेंस द्वारा कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है। प्रदेश में निरंतर समीक्षा के साथ दोषियों के विरूद्ध सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस और आबकारी विभाग आवश्यकतानुसार संयुक्त कार्यवाही में पीछे न हटें। बैठक में प्रजेंटेशन में बताया गया कि नशीली दवा, मादक पदार्थों में उत्पादन, व्यापार, सेवन और तस्करी पर रोक लगाने के लिए एनडीपीएस एक्ट लागू है। इस कड़े काननू के तहत इस वर्ष प्रदेश में 2706 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। कुल 3690 आरोपियों से अगस्त 2026 तक 46 हजार 313 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। प्रतिबंधित कफ सीरप जप्त करने, शिक्षण संस्थानों की 500 मीटर परिधि में ड्रग्स फ्री परिसर बनाने, नशा मुक्त मित्रों का सहयोग प्राप्त करने और जिलों में नशा मुक्त केंद्रों की भूमिका सक्रिय बनाने के कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। नशा मुक्त हेल्पलाइन 14446 की व्यवस्था भी लागू की गई है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, एडीजी नार्कोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।  

पंचायतों के उप निर्वाचन में 56.62 एवं नगर परिषद सुसनेर में 75.96 प्रतिशत हुआ मतदान

भोपाल नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 पूर्वाध के घोषित कार्यक्रम अनुसार 29 सितम्बर, 2026 को मतदान सम्पन्न हुआ। जिला आगर-मालवा की नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद के लिए 75.96 प्रतिशत मतदान हुआ। पंचायत उप निर्वाचन के लिये 56.62 प्रतिशत मतदान हुआ। नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद के लिए मतगणना 3 अक्टूबर को होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी। पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 7, जनपद पंचायत सदस्य के 28, सरपंच के 110 और 4090 पंच पद के लिये उप निर्वाचन होना था।  

दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के वन्य-जीव कछुओं की अंतर्राज्यीय तस्करी

भोपाल  स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, क्षेत्रीय इकाई इंदौर द्वारा अंतर्राज्यीय स्तर पर जलीय वन्य-जीवों की अवैध तस्करी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ की गई कार्रवाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर द्वारा वन अपराध प्रकरण में शामिल मुख्य आरोपी कमल मेहता की नियमित जमानत याचिका को निरस्त कर दिया गया है। 19 अगस्त, 2026 को स्टेट टाइगर फोर्स इंदौर की टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर तीन इमली चौराहा, इंदौर से आरोपी रोहन और केशव को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 30 नग जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए (विभिन्न प्रजातियों के) जप्त किये गये। पूछताछ के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अंतर्राज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ और कनाडिया रोड स्थित 'श्री पेट शॉप' (आरोपी कमल मेहता के परिसर) की तलाशी ली गई। वहाँ से अनुसूची-I एवं II के तहत संरक्षित एक इंडियन स्टार टॉरटॉइस तथा एक रोज रिंग पैराकिट पक्षी बरामद किया गया। प्रकरण में अब तक आरोपी कमल मेहता और उसके अंतर्राज्यीय गिरोह के सदस्यों के कब्जे से कुल 33 नग जीवित दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए जप्त किये जा चुके हैं। इस गिरोह के तार मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से जुड़े हुए हैं। आरोपी कमल मेहता के विरुद्ध वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध है। एसटीएफ द्वारा आरोपी को 23 सितंबर, 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। एसटीएसएफ की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में सशक्त पक्ष रखते हुए अवगत कराया गया कि आरोपी एक संगठित अंतर्राज्यीय वन्य-जीव तस्करी गिरोह का हिस्सा है। जमानत मिलने पर आरोपी द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित करने, विवेचना में बाधा डालने की प्रबल संभावना है। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर ने प्रकरण में दुर्लभ वन्य-जीवों की अंतर्राज्यीय तस्करी की गंभीरता और आरोपी की प्रथम दृष्ट्या संलिप्तता को देखते हुए 28 सितंबर, 2026 को आरोपी कमल मेहता की जमानत याचिका निरस्त करने का आदेश पारित किया। प्रकरण में विवेचना जारी है।  

युवा, शोधकर्ता और युवा वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर करेंगे संवाद

भोपाल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सतत विकास के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त करने में युवाओं, शोधकर्ताओं एवं युवा वैज्ञानिकों की भूमिका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 30 सितंबर को भोपाल में प्री-सीओपी31 परामर्श संवाद आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम एमपीसीएसटी, विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में होगा। संवाद का विषय “सही राह पर आगे बढ़ते हुए-जलवायु एवं सतत विकास के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में राज्य की भूमिका को बढ़ाना” है। कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, नर्मदा समग्र, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (ईपीसीओ) तथा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, युवा वैज्ञानिकों एवं युवाओं के साथ संवाद होगा। कार्यक्रम में ‘क्लाइमेट शाला’ का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद “जलवायु एवं एसडीजी समन्वय तथा मध्यप्रदेश की प्राथमिकताएं” विषय पर पैनल चर्चा होगी और संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा।कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।  

कचरा मुक्त एवं धूल मुक्त शहरों के निर्माण के साथ युवाओं और उद्योगों की सहभागिता से सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल  स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत शहरी स्वच्छता, सैनिटेशन एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में देश के चयनित 50 शहरों को मॉडल शहर के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रगति-50 पहल में मध्यप्रदेश के भोपाल एवं उज्जैन शहरों का चयन किया गया है। चयनित शहरों में स्वच्छता, सैनिटेशन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा नागरिक सहभागिता के क्षेत्र में समयबद्ध एवं परिणाम आधारित कार्यों को गति दी जाएगी। प्रगति-50 पहल के संबंध में आज आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ऑनलाइन शामिल हुए। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे सहित विभागीय अधिकारी एवं संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की ।बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत नई पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा प्रगति-50 शहरों में स्वच्छता के परिणामों को गति देने के लिए निगरानी एवं क्रियान्वयन व्यवस्था पर चर्चा हुई। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप मध्यप्रदेश PRAGATI-50 के लिए संकल्पित होकर कार्य करेगा। इंदौर, भोपाल और उज्जैन में विस्तृत कार्ययोजना बनाकर हम उत्कृष्ट कार्य कर प्रदेश और इन महानगरों की प्रतिष्ठा बढ़ाने का काम करेंगे। उज्जैन सिंहस्थ की दृष्टि से इन तीनों शहरों का समग्र विकास अति महत्वपूर्ण है। इस पहल से इन शहरों में स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल सेक्टर के विस्तार में गति आएगी। युवा स्वच्छता के लीडर बन पाएंगे।” उज्जैन में सिंहस्थ की दृष्टि से विशेष तैयारी वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से स्वच्छता एवं सैनिटेशन अधोसंरचना को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ करने में इस पहल की बड़ी भूमिका होगी। घाटों, सार्वजनिक शौचालयों, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा भीड़-आधारित स्वच्छता व्यवस्था को उन्नत किया जाएगा। क्षिप्रा नदी की स्वच्छता, उपयोगित जल प्रबंधन एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाएगी। ज़ीरो वेस्ट ईवेंट और सर्कुलर सैनिटेशन मैनेजमेंट की अवधारणा को अपनाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। मिशन मोड पर होगा काम, युवाओं की सहभागिता का लक्ष्य इस पहल के अंतर्गत कचरा मुक्त और धूल मुक्त शहरों की अवधारणा को साकार करने के लिए मिशन मोड पर कार्य किया जाएगा। स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, घर-घर कचरा संग्रहण, एमआरएफ, कम्पोस्टिंग एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण को सुदृढ़ किया जाएगा। सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं दर्शनीय स्वच्छता और सुंदरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जाएगा। युवाओं, स्टार्टअप्स एवं उद्योगों की स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सहभागिता बढ़ाई जाएगी। स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए भोपाल के लिए विशेष कार्ययोजना वर्ष 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की दृष्टि से भोपाल को स्वच्छ, हरित एवं निवेश-अनुकूल महानगर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोगित जल का पुनः उपयोग, सार्वजनिक स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं दृश्य स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाएगी। कचरा संभावित स्थलों के उन्मूलन और सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प पर विशेष जोर दिया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ, सर्कुलर इकोनॉमी तथा पीपीपी आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहन करना भी इस पहल में शामिल है। इसके अंतर्गत समयबद्ध क्रियान्वयन एवं परिणाम आधारित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार को प्रोत्साहन स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक चयनित स्टार्टअप को प्रारंभिक स्तर पर 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की पहल पर कार्य किया जाएगा। आईआईटी कानपुर की सहभागित व सहयोग के साथ स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, सर्कुलर इकोनॉमी एवं तकनीकी नवाचार से जुड़े नए उद्यमों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।  

यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे। परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं। मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है। परिवहन सचिव  मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव  मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।  

सेवा की कहानी: खाली पड़ी जमीन पर बायोफ्लॉक मछली पालन से विप्लब ने बनाई आय की नई राह

रायपुर कभी खाली पड़ी जिस जमीन से कोई आमदनी नहीं होती थी, अब उसी जगह बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर विप्लब हलदर ने आय की नई राह बनाई है। मत्स्य विभाग की योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने बायोफ्लॉक तालाब तैयार कर मछली उत्पादन शुरू किया है। वर्तमान में मछलियां बढ़वार की अवस्था में हैं और करीब तीन माह बाद बिक्री योग्य आकार में आने की उम्मीद है। इसके बाद विप्लब को अपने इस नए व्यवसाय से आमदनी मिलने लगेगी। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए विप्लब बताते हैं कि पहले यह जमीन खाली पड़ी रहती थी और इससे किसी प्रकार का उत्पादन या आमदनी नहीं होती थी। मत्स्य विभाग से बायोफ्लॉक पद्धति की जानकारी और योजना के तहत सहायता मिलने के बाद उन्होंने खाली जमीन का उपयोग मछली पालन के लिए करने का निर्णय लिया। 14 लाख रुपये की इकाई लागत, 40 प्रतिशत मिला अनुदान बायोफ्लॉक तालाब निर्माण के लिए 14 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित है। योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस सहायता से हितग्राहियों को आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन अपनाकर स्वरोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने में सहयोग मिल रहा है। विप्लब ने भी विभागीय सहायता का लाभ लेकर मछली पालन को आजीविका के रूप में अपनाया है। उनका कहना है कि जिस स्थान से पहले कोई उत्पादन नहीं मिल रहा था, अब उसी जगह मछली पालन से आमदनी की संभावना बनी है। तीन माह बाद बिक्री की तैयारी, स्थानीय बाजार में मांग का भरोसा विप्लब के अनुसार वर्तमान में मछलियों को बिक्री योग्य आकार में आने में लगभग तीन माह का समय और लगेगा। इसके बाद तैयार मछलियों को बाजार में बेचा जाएगा। उन्हें स्थानीय बाजार में मछली की मांग को देखते हुए बिक्री में परेशानी नहीं होने की उम्मीद है। उनके अनुसार बाजार में मछली की कीमत लगभग 120 रुपये तक मिलती है। पहली खेप की बिक्री के बाद उत्पादन लागत और आमदनी के आधार पर वास्तविक लाभ का आकलन हो सकेगा। विप्लब को उम्मीद है कि बेहतर परिणाम मिलने पर वे इस गतिविधि को आगे भी जारी रखेंगे। खाली जमीन बनी स्वरोजगार का आधार बायोफ्लॉक पद्धति से मछली पालन ने विप्लब के लिए खाली पड़ी जमीन के उपयोग की नई संभावना तैयार की है। मत्स्य विभाग से मिली सहायता और आधुनिक तकनीक के उपयोग से वे अब इस स्थान को आयमूलक गतिविधि से जोड़ चुके हैं। विप्लब का कहना है कि मछली पालन किसानों और ग्रामीण हितग्राहियों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकता है। योजना के तहत मिलने वाली सहायता से इस व्यवसाय को शुरू करने में सहूलियत मिल रही है। उन्होंने योजना के माध्यम से मिली सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा संकल्प अभियान के तहत विप्लब हलदर की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि शासकीय सहायता और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अनुपयोगी पड़ी जमीन को भी स्वरोजगार और आय के अवसर में बदला जा सकता है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में अब तक 64 हजार 644 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 440 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक कुल 64 हजार 644 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं, जिन्हें 440 करोड़ 40 लाख से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलो वाट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्य घर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चैटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं जिससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।