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स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से बदलेगा जयपुर, ई-चालान और रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी आसान

जयपुर जयपुर में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे शहर में रोड सेफ्टी को भी सुधारा जाएगा। इस कंट्रोल सेंटर का मुख्य उद्देश्य रियल-टाइम में शहर के ट्रैफिक की निगरानी करना और उसे सुव्यवस्थित बनाना है। गुरुवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस संबंध में एक रिव्यू मीटिंग भी ली। इस प्रोजेक्ट के लिए जयपुर ट्रैफिक पुलिस, जयपुर नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण एकसाथ मिलकर काम कर रहे हैं। योजना का ब्लू प्रिंट बनाने के लिए डिप्टी कमीशनर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई है। सेंटर बनाने के लिए जमीन की जरूरत AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए जमीन की जरूरत है और सरकार ने जयपुर विकास प्राधिकरण को जयपुर आयुक्त कार्यालय को जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी तक इसका सीमांकन नहीं हो सका है। नियम तोड़ने वालों की पहचान कर ई-चालान अधिकारियों के मुताबिक AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर मौजूदा अभय कमांड सेंटर से ज्यादा एडवांस होगा। यह नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से कर सकेगा और ऐसे वाहन चालकों को ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) टेक्नॉलजी के जरिए ई-चालान भेजेगा। निगरानी बेहतर होगी AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर के जरिए निगरानी बेहतर होगी, पुलिस अधिकारी मौके पर तुरंत पहुंच सकेंगे जिससे ट्रैफिक जाम और रोड सेफ्टी में सुधार होगा। उम्मीद है कि नए कंट्रोल सेंटर से शहर के कुछ सबसे व्यस्त कॉरिडोर जैसे महल रोड, सीकर रोड और न्यू सांगानेर रोड को में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगी।

राजस्थान में ओलावृष्टि से तबाही, ई-गिरदावरी ऐप से नुकसान दर्ज करने की सुविधा

जयपुर राजस्थान में बीते दिनों बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और किसानों को मुआवजा देने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शनिवार को यह जानकारी दी। खर्रा के मुताबिक फसलों को हुए नुकसान के लिए गिरदावरी की प्रक्रिया जारी है और किसान खुद भी मोबाइल एप (ई-गिरदावरी) के जरिए अपनी-अपनी फसलों को हुए नुकसान की डिटेल को अपलोड कर सकते हैं। उन्होंने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘फसल के नुकसान का आकलन दो तरीके से किया जा रहा है।सरकारी स्तर पर गिरदावरी की जा रही है, और किसान मोबाइल एप का इस्तेमाल करके अपने खेतों से नुकसान की डिटेल भी अपलोड कर सकते हैं।’ कांग्रेस पर भी कसा तंज वहीं पिछली कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘एक समय था जब मुआवजा तभी दिया जाता था जब नुकसान 50% से ज्यादा हो। अब, किसान 33% नुकसान पर भी इसके पात्र हैं, और मुआवजे की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।’ कई जिलों में लगातार बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान आपको बता दें कि मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के चलते प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। विशेषकर खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इस दौरान गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों को भी खासा नुकसान पहुंचा है। बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया था। मुख्यमंत्री ने किया है उचित मदद का वादा बीते महीने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी जिला क्लेक्टर को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे करवाने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। सीएम ने इस दौरान कहा कि किसानों का दर्द उनकी सरकार का ही दर्द है। उन्होंने कहा है कि सभी पीड़ित किसानों को उचित मदद दी जाएगी।  

युद्ध का पर्यटन पर असर: शाही ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स में सिर्फ 30 यात्री पहुंचे जैसलमेर

जैसलमेर ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और फिर मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर राजस्थान पर भी पड़ रहा है. दुनिया की सबसे आलीशान ट्रेनों में शुमार ‘पैलेस ऑन व्हील्स' के लिए इस पर्यटन सीजन निराशाजनक रहा. वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और तनावपूर्ण हालात का सीधा असर इस शाही ट्रेन के यात्री भार पर पड़ा है.  इस सीजन के अंतिम फेरे पर पैलेस ऑन व्हील्स मात्र 30 यात्रियों को लेकर जैसलमेर पहुंची. इसके चलते अब पर्यटन इंडस्ट्री से जुड़े व्यवसायी काफी निराश हैं. आशंका है कि टूरिज्म इंडस्ट्री को इससे भारी नुकसान हो सकता है. स्टेशन पर ढोल-नगाड़ों से ट्रेन का स्वागत जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का भव्य स्वागत किया गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज, लोकसंगीत और पारंपरिक नृत्य के बीच विदेशी सैलानियों का गर्मजोशी से अभिनंदन हुआ. यात्रियों ने मिडल ईस्ट में चल रहे तनाव को यात्री भार कम होने का बड़ा कारण बताया और विश्व शांति की प्रार्थना की. मिडल ईस्ट में युद्ध के अलावा पहले भी रूस-यूक्रेन युद्ध और हमास-इजरायल तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या घटी थी. पहले ट्रेन में 70-80 प्रतिशत तक ऑक्यूपेंसी रहती थी, लेकिन इस बार अंतिम फेरे में केवल 26 प्रतिशत यात्री ही सवार थे. 32 में से 10 फेरे रद्द इस सीजन में कुल 32 फेरों में से 10 फेरे रद्द करने पड़े. जैसलमेर रेलवे स्टेशन अधीक्षक पंकज कुमार झा ने बताया कि कोरोना काल के बाद पर्यटन उद्योग पर बुरा प्रभाव पड़ा. हाल ही में ईरान-इजराइल युद्ध के कारण विदेशी पर्यटकों की आवक घटी, जिससे कई फेरे रद्द करने पड़े. अभी तक लगभग 10 फेरे ही पूरे हो पाए हैं. लोक कलाकारों की आजीविका पर भी संकट ट्रेन का 1982 में शुरू होना और 2023 में निजीकरण के बाद आधुनिक सुविधाओं से लैस होना भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सका. अत्यधिक किराया और वैश्विक अस्थिरता दोनों ही बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं. इस शाही ट्रेन के यात्री भार में कमी से राजस्थान पर्यटन को बड़ा झटका लगा है. लोक कलाकारों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है. जैसलमेर में कालबेलिया नृत्य करने वाले कलाकार बक्स खान ने कहा कि पर्यटक कम होने से उनके कार्यक्रम घट गए हैं और आजीविका पर असर पड़ा है.

सीकर के रींगस गढ़ की अनोखी कहानी, राजा उदय सिंह से जुड़ा माना जाता है इतिहास

जयपुर राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और वीरता की कहानियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. इसी विरासत का एक अहम हिस्सा सीकर जिले के रींगस में स्थित प्राचीन गढ़ है. यह गढ़ करीब 550 से 600 साल पुराना माना जाता है और आज भी अपने इतिहास और संरचना के कारण लोगों को आकर्षित करता है. स्थानीय लोग इसे रींगस का गढ़ या प्राचीन किला कहते हैं. राजा उदय सिंह से जुड़ा माना जाता है निर्माण इतिहासकारों के अनुसार इस गढ़ का निर्माण किसने करवाया इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसका निर्माण राजा उदय सिंह ने कराया था. बाद में यह गढ़ सीकर के शासक राव राजा कल्याण सिंह को सौंप दिया गया. समय के साथ देखरेख के अभाव में यह गढ़ खंडहर में बदलने लगा. लोगों ने मिलकर बचाई अपनी धरोहर साल 1957 में रींगस के स्थानीय लोगों ने मिलकर इस गढ़ को खरीद लिया. उनका उद्देश्य इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाना और यहां स्थित प्राचीन मंदिर की आस्था को बनाए रखना था. गढ़ के भीतर बना करीब 600 साल पुराना बालाजी मंदिर लोगों की गहरी श्रद्धा का केंद्र है, जिसके कारण इसे संरक्षित करने की पहल की गई. पर्चे वाले हनुमान मंदिर की अनोखी मान्यता इस गढ़ में स्थित हनुमान मंदिर को पर्चे वाले हनुमान जी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों को बालाजी का साक्षात अनुभव होता है. खास बात यह है कि मंदिर में स्थापित मूर्ति सालासर बालाजी की तरह दिखाई देती है. यहां दर्शन करने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि उन्हें सालासर धाम जैसे ही दर्शन मिलते हैं. युद्ध और सुरक्षा का केंद्र रहा गढ़ गढ़ की बनावट भी बेहद खास है. इसके चारों ओर मजबूत बुर्ज बने हुए हैं और चारों तरफ गहरी खाई मौजूद है, जिसमें कभी पानी भरा रहता था. ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र जयपुर और सीकर के शासकों के बीच युद्ध भूमि के रूप में इस्तेमाल होता था. सैनिकों को सुरक्षा और ठहरने के लिए इस गढ़ का उपयोग किया जाता था. आज भी जारी है संरक्षण का प्रयास वर्तमान में इस गढ़ के करीब 10 मालिक हैं, जो इसकी देखरेख कर रहे हैं. स्थानीय लोग लगातार इस ऐतिहासिक धरोहर और मंदिर की पूजा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं. यह गढ़ आज भी आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बना हुआ है.

मां की ममता की मार्मिक तस्वीर, ऊंटनी के शव से चिपका रहा मासूम ऊंट का बच्चा

 जैसलमेर इंसान हो या जानवर, मां की ममता का कोई विकल्प नहीं होता.  राजस्थान के जैसलमेर जिले के लाठी गांव में ममता की एक ऐसी ही मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं. यहां ट्रेन की चपेट में आने से एक ऊंटनी की मौत हो गई, लेकिन उसका बच्चा अपनी मृत मां को सोता समझ तीन दिनों तक उसके शव के पास बैठा लगातार रोता रहा. ट्रेन हादसे में गई मां की जान जानकारी के अनुसार, यह घटना कुछ दिन पहले घटित हुई थी , जिसमें रेलवे ट्रैक के पास चर रही एक ऊंटनी अचानक ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई. ऊंटनी के साथ उसका छोटा बच्चा भी था, जो इस हादसे में बाल-बाल बच गया. मां की मौत से अनजान मासूम बच्चा तीन दिनों तक भीषण गर्मी और भूख-प्यास के बीच शव के पास ही डटा रहा. मंजर देख ग्रामीणों की भर आईं आंखें  प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्चा तीन दिनों तक अपनी मां के शव के पास ही बैठा रहा. वह कभी अपनी मां को सिर से उठाने की कोशिश करता, तो कभी जोर-जोर से चिल्लाने लगता. तीन दिन बाद जब उधर से गुजर रहे किसान जमालदीन और रमेश कुमार की नजर वहां पड़ी, तो वे दुर्गंध के कारण मौके पर पहुंचे. वहां का मंजर देखकर वे भी भावुक हो उठे। उन्होंने देखा कि बच्चा लगातार अपनी मां के पास बैठा रो रहा है और उसे छोड़ने को तैयार नहीं है. आखिरी समय भी मां के शव को रहा निहारता दोनों ने तुरंत इस घटना की सूचना गांव में ग्रामीणों को दी. जिन्होंने जगदम्बा सेवा समिति ट्रस्ट के सचिव जुगल किशोर आसेरा को घटना की सूचना दी. सूचना मिलते ही भादरिया गौशाला के गोरक्षक गोपालसिंह भाटी और दीनेश सिंह देवड़ा मौके पर पहुंचे. काफी मशक्कत के बाद उन्होंने बच्चे को उसकी मां के शव से अलग कर ऊंटनी को दफनाने के लिए गाड़ी में डाल कर विदा किया. रेस्क्यू कर गौशाला भेजा गया बच्चे को भादरिया गौशाला लाया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है. तीन दिनों से भूखे-प्यासे रहने के कारण वह काफी कमजोर हो गया है. गौशाला में उसे भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.

आबू रोड में बड़ा फर्जीवाड़ा: 2023 से 2026 तक प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश

स‍िरोही स‍िरोही के आबू रोड में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में 7 ग्राम विकास अधिकारी (VDO) को सस्‍पेंड कर द‍िया गया है. जांच पूरी होने तक न‍िलंब‍ित रहेंगे. मामले में जांच टीम गठ‍ित कर दी गई है. आबू रोड की 32 ग्राम पंचायत में साल 2023 से 2026 तक जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच के न‍िर्देश द‍िए गए हैं. डीएम ने 10 द‍िन में र‍िपोर्ट देने के न‍िर्देश द‍िए हैं. शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई   सबसे पहले जिला परिषद सीईओ को शिकायत दी गई थी, लेकिन यहां पर कार्रवाई नहीं हुई तो सीएमओ में शिकायत की. इसके बाद जिला कलेक्टर ने टीम का गठन करके र‍िपोर्ट मांगी है.  जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी बनाए   प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह फर्जी प्रमाण पत्र बीमा क्लेम पाने के ल‍िए बनाए गए थे. आबू रोड के खडात में 42, सियावा में 24, उपलागढ़ में 95 प्रमाण पत्र और निचलागढ़ में 40 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए हैं. निचलागढ़ में 154 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले सामने आए हैं. प्रमाण पत्र पर ग्राम विकास अधिकारी के हस्ताक्षर पाए गए हैं. जिला परिषद को कई बार इसकी शिकायत की गई, इसके बाद भी जिला परिषद के सीईओ ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि इस पूरे प्रकरण में जिला परिषद के अधिकारियों का संरक्षण सामने आ रहा है.

अफीम और गांजे पर पुलिस का बड़ा प्रहार, राजस्थान में 5860 पौधे नष्ट और 7 गिरफ्तार

जयपुर राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने नशे के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए एक ही दिन में राज्य के सात जिलों में 7 बड़ी कार्रवाइयां की हैं. इस अभियान में 5860 अफीम के पौधे नष्ट किए गए, 85 किलोग्राम अवैध डोडा पोस्त और लगभग 15 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया. कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें गुजरात पुलिस का वांछित अपराधी भी शामिल है. इन जिलों में हुई कार्रवाई राजसमंद (खमनोर थाना): ऑपरेशन गांजाजुली के तहत 5860 अफीम के पौधे नष्ट किए गए. 12.130 किलोग्राम गांजा बरामद कर 1 आरोपी गिरफ्तार.     बाड़मेर (सदर थाना): 76.108 किलोग्राम डोडा पोस्त बरामद, 1 आरोपी गिरफ्तार.     बाड़मेर (गुढ़ामलानी थाना): 7.960 किलोग्राम डोडा-चूरा बरामद.     कोटा (कुन्हाड़ी थाना): 1.750 किलोग्राम गांजा बरामद, 1 आरोपी गिरफ्तार.     कोटा (नयापुरा थाना): 432.984 ग्राम गांजा बरामद, 1 आरोपी गिरफ्तार.     जयपुर (पत्रकार कॉलोनी थाना): 16.20 ग्राम गांजा, 154 ग्राम डोडा पोस्त पाउडर और 2780 रुपये नकद बरामद, 1 आरोपी गिरफ्तार. प्रतापगढ़: गुजरात पुलिस का वांछित अपराधी गिरफ्तार. पुलिस का दावा एएनटीएफ की इन सातों कार्रवाइयों से नशे के तस्करों पर बड़ा प्रहार हुआ है. पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

नागौर में ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, काली कमाई से बना घर जब्त

 नागौर राजस्थान के नागौर में नशा तस्करों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. यहां एक आरोपी की अवैध कमाई से बने आलीशान मकान को सीज कर दिया गया. आरोपी ने इस प्रॉपर्टी को अपनी लिव-इन पार्टनर के नाम पर कर रखा था. नागौर के शारदापुरम इलाके में बना करीब 50 लाख रुपये का घर बनाया था. सुरपालिया थाना क्षेत्र के जानवा गांव का रहने वाला बहादुर सिंह उर्फ समीर लंबे समय से पुलिस की रडार पर था. आरोप है कि वह स्मैक (हेरोइन) की सप्लाई के धंधे में लिप्त था. इस अवैध कारोबार से मोटी रकम कमा रहा था. धीरे-धीरे काली कमाई से आलीशान मकान ले लिया. जांच की गई तो पुलिस को पता चला कि यह मकान बहादुर सिंह के नाम पर नहीं, बल्कि उसकी लिव-इन पार्टनर के नाम पर रजिस्टर्ड है. पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच शुरू की. पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए तो सामने आया कि बहादुर सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले पहले से दर्ज हैं. ये मामले करीब छह साल पुराने थे और इनमें से एक बीकानेर के पांचू थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ था. इन मामलों में पुलिस पहले ही चालान पेश कर चुकी थी, लेकिन असली कहानी अब सामने आ रही थी- काली कमाई की. जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने तस्करी के धंधे से शारदापुरम इलाके में मकान तैयार कराया था. कुछ रिपोर्ट्स में इसकी अनुमानित कीमत एक करोड़ से ज्यादा भी बताई जा रही है. कार्रवाई से बचने के लिए बहादुर सिंह ने यह संपत्ति अपनी लिव-इन पार्टनर के नाम रजिस्टर्ड करवा रखी थी. वह जांच एजेंसियों को भ्रमित करना चाहता था. पुलिस ने इस मामले में मजबूत साक्ष्य जुटाए और दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकरण के सामने पेश किए. प्राधिकरण से मंजूरी मिलने के बाद सुरपालिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मकान को सीज कर दिया. सुरपालिया थानाधिकारी सुमन कुलहरी ने बताया कि जांच में स्पष्ट रूप से सामने आया है कि यह मकान नशे के कारोबार से अर्जित धन से ही बनाया गया था. आरोपी की पहचान छिपाने की कोशिश नाकाम हो गई. पुलिस द्वारा मकान पर नोटिस चस्पा करने के कुछ ही देर बाद आरोपी ने नोटिस हटाने की कोशिश की. पुलिस ने इस हरकत को गंभीरता से लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है. नागौर एसपी रोशन मीणा ने कहा कि जिले में नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. अवैध कमाई से बनी प्रॉपर्टी को चिह्नित कर सीज किया जा रहा है. बीते 15 दिनों में चार संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं, जबकि कुल पांच मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन संकल्प के तहत यह अभियान और तेज होगा.

फर्जी डॉक्टर बनकर बुजुर्ग से 4.39 लाख की ठगी, तीन आरोपी भोपाल से दबोचे गए

अजमेर अजमेर शहर में यूनानी थेरेपी के नाम पर बुजुर्ग से लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय ठग गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फर्जी डॉक्टर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से नकदी और ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया है। बुजुर्ग को जाल में फंसाया एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने शनिवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पीड़ित 62 वर्षीय हरीराम किशनचंद मूलचंदानी ने शिकायत दर्ज कराई थी। 26 मार्च को एक व्यक्ति ने उनके घुटनों के दर्द को देखकर सहानुभूति जताई और ‘डॉ. समीर जरीवाला’ नाम के कथित डॉक्टर से इलाज कराने का झांसा दिया। इसके बाद गिरोह ने योजनाबद्ध तरीके से बुजुर्ग को अपने जाल में फंसा लिया। आरोपियों को भोपाल से गिरफ्तार किया गया फर्जी डॉक्टर घर पहुंचा और ‘सिंघी’ जैसे उपकरण से घुटने से मवाद निकालने का नाटक किया। आरोपियों ने 73 बार मवाद निकालने का दावा कर पीड़ित से कुल 4 लाख 39 हजार रुपये वसूल लिए और फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी हिमांशु जांगिड़ और डिप्टी एसपी शिवम जोशी के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने अभय कमांड सेंटर सहित 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें गिरोह की लाल रंग की स्विफ्ट कार ट्रेस हुई। तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपियों को मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया गया, जहां वे एक और वारदात की फिराक में थे। गिरफ्तार आरोपियों में दीन मोहम्मद (38), निवासी अंता बारां, मोहम्मद कादिर (28), निवासी अंता बारां (फर्जी डॉक्टर), और मोहम्मद आसिफ (35) निवासी विज्ञान नगर कोटा शामिल हैं। पुलिस ने नकदी, मोबाइल समेत अन्य सामान बरामद किया पुलिस ने आरोपियों के पास से 33,800 रुपये नकद, इलाज में उपयोग किए जाने वाले उपकरण, दवाइयां, स्प्रे, 12 मोबाइल फोन और 9 सिम कार्ड जब्त किए हैं। एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने बताया कि गिरोह के सदस्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ियों पर रेडियम टेप लगाने के बहाने घूमते थे। इस दौरान वे चलने-फिरने में असमर्थ या संपन्न बुजुर्गों को पहचानते और उनसे संपर्क कर ‘मददगार’ बनते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी डॉक्टर के पास भेजकर ठगी को अंजाम दिया जाता था। वारदात के बाद आरोपी सिम कार्ड नष्ट कर शहर छोड़ देते थे।  

चंदवाजी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, क्रेशर खदान से भारी मात्रा में विस्फोटक जब्त

 जयपुर जयपुर जिले में अवैध खनन और विस्फोटक तस्करी के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। चंदवाजी थाना पुलिस ने त्रिवेणी क्रेशर के पास खदान क्षेत्र में छापेमारी कर अवैध भंडारण का बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने 795 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया पुलिस ने मौके से 795 किलो अमोनियम नाइट्रेट सहित बड़ी मात्रा में खतरनाक विस्फोटक सामग्री बरामद की। इस कार्रवाई में बाबूलाल और सुरेश नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार, पुलिस को पहले से इनपुट मिला था कि खदान क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री जमा की जा रही है और बड़े स्तर पर ब्लास्टिंग की तैयारी चल रही है। इसी सूचना पर ट्रेनी आईपीएस नितिन चौधरी के नेतृत्व में टीम ने दबिश दी। बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त तलाशी के दौरान पुलिस ने 32 कार्टन में रखा अमोनियम नाइट्रेट बूस्टर (कुल 286 नग, 795 किलो), 121 डेटोनेटर, डीटीएच वायर, जिलेटिन बत्ती और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास इस सामग्री के भंडारण या उपयोग का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का अवैध भंडारण गंभीर सुरक्षा खतरे की ओर इशारा करता है। आशंका है कि इसका उपयोग अवैध खनन में बड़े पैमाने पर ब्लास्टिंग के लिए किया जाना था। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। मामले की गहन जांच जारी है।