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भिवाड़ी में मजदूरों का बड़ा आंदोलन, हजारों श्रमिक सड़कों पर उतरे

भिवाड़ी राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक हब भिवाड़ी (Bhiwadi) में मजदूरों का असंतोष गहराता जा रहा है. मदरसन कंपनी में प्रदर्शन खत्म होने के बाद अब गुरुवार सुबह दो और बड़ी कंपनियों (रिलैक्सो इंडिया और निफोन) के श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है. हजारों की संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. रिलैक्सो चौक पर चक्का जाम और नारेबाजी भिवाड़ी के व्यस्त रिलैक्सो चौक पर सुबह से ही श्रमिकों ने काम बंद कर दिया और सड़क पर जाम लगा दिया है. प्रदर्शनकारी श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें दी जाने वाली मजदूरी बेहद कम है और काम का बोझ अधिक है. प्रदर्शनकारी 'कंपनी प्रशासन मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रशासनिक अमला मौके पर, भारी पुलिस बल तैनात हजारों मजदूरों के सड़क पर आने की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं. हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए रिलैक्सो चौक और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. अधिकारियों ने श्रमिकों के प्रतिनिधियों से बातचीत का दौर शुरू कर दिया है ताकि औद्योगिक शांति बनी रहे और जाम खुलवाया जा सके. मदरसन कंपनी जैसा ही विवाद बता दें कि पिछले कुछ दिनों से भिवाड़ी में श्रमिकों के बीच वेतन को लेकर भारी नाराजगी है. श्रमिकों का कहना है कि जिस तरह मदरसन कंपनी में वेतन विसंगतियों को लेकर मांगें उठी थीं, वैसी ही समस्या रिलैक्सो और निफोन कंपनी में भी है. फिलहाल, बातचीत जारी है लेकिन श्रमिक अपनी मांग पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

जयपुर RPA में भव्य समारोह, पेंशनर्स के लिए डिजिटल पोर्टल लॉन्च

जयपुर    राजस्थान पुलिस आज यानी 16 अप्रैल 2026 को अपना 77वां स्थापना दिवस मना रही है. इस ऐतिहासिक मौके पर जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) में राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थल पर आगमन बेहद शाही रहा, जहां वे पुलिस की मोटरसाइकिल बटालियन और घुड़सवार जवानों के साथ समारोह स्थल तक पहुंचे. मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी ली और प्रदेश के जवानों के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया. पुलिस पेंशनर्स को मिला 'डिजिटल उपहार' स्थापना दिवस के इस खास मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस कल्याण की दिशा में एक बड़ी और अनूठी पहल की. उन्होंने राजस्थान पुलिस पेंशनर्स पोर्टल (Rajasthan Police Pensioners Portal) का लोकार्पण किया. इस विशेष सेवा को राजकॉप सिटीजन एप (RajCop Citizen App) से जोड़ा गया है. इस पोर्टल के शुरू होने से अब राजस्थान पुलिस के हजारों पेंशनर्स और उनके परिवारजन घर बैठे डिजिटल सेवाओं का लाभ ले पाएंगे, जिससे उन्हें अपनी पेंशन संबंधी कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. इन 3 नागरिकों को मिला राज्य स्तरीय सम्मान इस वर्ष पुलिस स्थापना दिवस पर केवल जवानों को ही नहीं, बल्कि समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले तीन आम नागरिकों को भी सम्मानित किया गया. मुख्यमंत्री ने सिरोही के समाजसेवी प्रकाश प्रजापति, झालावाड़ के सुरजीत कश्यप और उदयपुर की बाल सुरक्षा सलाहकार श्रीमती सिंधु बिनुजीत को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया. अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसफ के आदेशानुसार इन तीनों ने समाज सेवा में अनुकरणीय भूमिका निभाई है. बाल संरक्षण की अलख जगाने वाली सिंधु बिनुजीत की कहानी सम्मानित होने वालों में उदयपुर की सिंधु बिनुजीत का नाम विशेष चर्चा में है. वर्ष 2010 से डूंगरपुर के आदिवासी क्षेत्रों में बाल श्रम और पलायन रोकने के लिए उन्होंने यूनिसेफ के साथ मिलकर 'वत्सल वार्ता' और 'बाल मित्र थाने' जैसे नवाचार किए. उनके प्रयासों से बच्चों के मन से पुलिस का डर खत्म हुआ. साल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) भी उनके इस मॉडल से इतनी प्रभावित हुई थीं कि इसे पूरे राज्य में लागू करने के निर्देश दिए गए थे. कोटा से डूंगरपुर तक उत्साह स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश के सभी जिलों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए. कोटा में रेंज आईजी राजेंद्र प्रसाद गोयल और एसपी तेजस्विनी गौतम की मौजूदगी में परेड हुई और पौधरोपण किया गया. कोटपूतली में एसपी सतवीर सिंह ने झंडारोहण किया. वहीं बांसवाड़ा में एसपी सुधीर जोशी ने 54 पुलिसकर्मियों को उत्कृष्ट सेवा पदक से नवाजा. डूंगरपुर में एसपी मनीष कुमार के नेतृत्व में सेरेमोनियल परेड के साथ-साथ रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

बांसवाड़ा के वीर जवान मानसिंह को मिलेगा सम्मान, बहादुरी की मिसाल फिर याद

 बांसवाड़ा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक भावुक और गर्व से भरी पहल सामने आई है. वर्ष 1982 में डकैती के दौरान शहीद हुए पुलिस जवान मानसिंह को इस बार पुलिस स्थापना दिवस पर सम्मानित किया जाएगा. यह निर्णय पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी की पहल पर लिया गया है. डकैती के दौरान दिखाई थी बहादुरी मानसिंह उस समय घाटोल पुलिस चौकी में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे. 2 और 3 मार्च 1982 की रात गश्त के दौरान Bank of Baroda की घाटोल शाखा में 8 से 10 इस दौरान मानसिंह ने बिना डरे एक डकैत को पकड़ लिया. बाकी डकैतों ने उन पर जानलेवा हमला किया और तलवार से उनके दोनों हाथ काट दिए. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंत तक मुकाबला करते रहे और वीरगति को प्राप्त हुए. मरणोपरांत मिला था वीरता पदक उनके इस अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत पुलिस पदक फॉर गैलेंट्री से सम्मानित किया गया था. उनका बलिदान आज भी पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय है. एसपी सुधीर जोशी ने बताया कि शहीद मानसिंह की याद को जीवित रखने के लिए पुलिस लाइन में उनकी तस्वीर लगाई जाएगी. इससे पुलिसकर्मी और आम लोग उनके साहस से प्रेरणा ले सकेंगे. पार्क का नाम रखा गया ‘शहीद मानसिंह बालोद्यान' पुलिस लाइन में बने चिल्ड्रन्स पार्क का नाम बदलकर “शहीद मानसिंह बालोद्यान” कर दिया गया है. यह कदम उनकी स्मृति को स्थायी रूप देने की दिशा में उठाया गया है. राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस के मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस दौरान शहीद को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनके साहसिक बलिदान को याद किया जाएगा. एसपी की पहल की हो रही सराहना एसपी सुधीर जोशी ने पुराने दस्तावेज मंगवाकर पूरे मामले का अध्ययन किया और शहीद को सम्मान दिलाने की पहल की. उनकी इस सोच की पुलिस विभाग में व्यापक सराहना हो रही है. 44 साल बाद मिल रहा यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का मजबूत संदेश देगा.

डेजर्ट नेशनल पार्क में नई स्पाइडर प्रजाति मिली, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

 जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर में स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क से एक बड़ी खोज सामने आई है. इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने जंपिंग स्पाइडर की नई प्रजाति ‘मोग्रस शुष्का' को खोजा है. इस खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. यह शोध European Journal of Taxonomy और Zootaxa जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुआ है. इससे यह स्पष्ट है कि यह खोज वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. चार नई प्रजातियों की पहचान इस अध्ययन में सिर्फ ‘मोग्रस शुष्का' ही नहीं बल्कि तीन अन्य नई प्रजातियों की भी पहचान की गई है. इनमें मोग्रस पुणे लैंगेलुरिलस सह्याद्री और लैंगेलुरिलस उदयपुरीन्सिस शामिल हैं. यह खोज दर्शाती है कि रेगिस्तान में अभी भी कई अनदेखे जीव मौजूद हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘मोग्रस शुष्का' अत्यधिक गर्मी कम नमी और रेतीले माहौल में आसानी से खुद को ढाल लेती है. यह प्रजाति Rajasthan और Gujarat के शुष्क इलाकों में पाई जाती है. पुरानी प्रजातियों की भी नई जानकारी शोध में कुछ पहले से ज्ञात प्रजातियों की अधूरी जानकारी भी पूरी की गई. मोग्रस राजस्थानेंसिस के नर का पहली बार वैज्ञानिक विवरण मिला जबकि कुछ अन्य प्रजातियों की मादाओं का भी पहली बार वर्णन किया गया. एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि मोग्रस लारिसाए नामक मकड़ी जो पहले केवल कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में पाई जाती थी उसे पहली बार भारत में दर्ज किया गया. पारिस्थितिकी में मकड़ियों की बड़ी भूमिका विशेषज्ञों का कहना है कि मकड़ियां कीटों की संख्या नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करती हैं और फूड चेन को संतुलित बनाए रखती हैं. दुनिया भर में मकड़ियां हर साल लगभग 300 मिलियन टन कीट खा जाती हैं. रेगिस्तानी जैव विविधता का नया आयाम डेजर्ट नेशनल पार्क अब सिर्फ गोडावण जैसे बड़े जीवों के लिए नहीं बल्कि सूक्ष्म जीव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है. यहां करीब 120 प्रकार की स्पाइडर प्रजातियां पाई जाती हैं जो इसकी समृद्ध पारिस्थितिकी को दर्शाती हैं.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसल,आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत खारिज

 जयपुर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक परीक्षा घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने पहले नोटिस जारी किया था लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया. सरकार ने साफ कहा कि आरोपी का आचरण बेहद गंभीर है और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने राज्य के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राहत देने से मना कर दिया. डमी अभ्यर्थी बनकर दी कई परीक्षाएं जांच में सामने आया कि हनुमाना राम ने तीन लोगों के लिए डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दी. इसके अलावा उसने कई अन्य परीक्षाओं में भी प्रॉक्सी के तौर पर हिस्सा लिया. इनमें पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 और पटवार भर्ती परीक्षा 2021 शामिल हैं. आरोपी हनुमाना राम पढ़ाई में तेज माना जाता था. उसने आरएएस 2018 में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक भी लाई थी. इसके बावजूद उस पर संगठित पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने के आरोप लगे हैं. जांच में सामने आई गहरी संलिप्तता शुरुआती एफआईआर में आरोपी का नाम नहीं था लेकिन जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई. इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े परीक्षा रैकेट का हिस्सा था और लगातार ऐसे अपराधों में शामिल रहा. अदालत ने बताए गंभीर प्रभाव राज्य सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे कृत्य से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है. अगर जिम्मेदार पद पर चयनित व्यक्ति ही ऐसा करें तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरा बन जाता है. साथ ही राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि याचिकाकर्ता आरएएस अधिकारी नियुक्त हुआ है तो वह राज्य को बेच देता. आगे अदालत ने कहा कि आरोपी का व्यवहार एक बार की गलती नहीं बल्कि लगातार किया गया अपराध है. ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है.

श्यामसर गांव में ऐतिहासिक मायरा, चार भाइयों ने बहन को दिया करोड़ों का उपहार

 नागौर राजस्थान में नागौर जिले के श्यामसर गांव में भाई-बहन के रिश्ते ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे मारवाड़ ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर में चर्चा की लहर पैदा कर दी है. यहां चार भाइयों ने अपनी बहन के लिए ऐसा मायरा भरा, जो अब इतिहास बन गया है. यह मायरा सिर्फ धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और संस्कारों का अनोखा संगम बनकर सामने आया है. इतिहास रच गया मायरा श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की बेटी रामी देवी के परिवार में शादी का अवसर था. उनके बच्चों के विवाह समारोह में मायरे की रस्म के दौरान उनके चार भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर दिल खोलकर मायरा भरा. 21 लाख 51 हजार रुपये नगद, 25 बीघा खेती योग्य जमीन,7 बरी सोना, 21 बरी चांदी, 51 हजार रुपये टीका-  कुल मिलाकर यह मायरा 1 करोड़ 51 लाख रुपये का रहा, जिसने इस परंपरा को एक नई ऊंचाई दे दी. 1 करोड़ 51 लाख का उपहार स्थानीय लोगों के अनुसार, 'इतना बड़ा मायरा पहले कभी नहीं देखा गया. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन केवल आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है. यह घटना यह भी दिखाती है कि जहां कई जगह मायरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, वहीं श्यामसर के इन भाइयों ने इसे फिर से भावनाओं और जिम्मेदारी का उत्सव बना दिया. पूरा इलाका इस अनोखे मायरे की चर्चा कर रहा है. आस-पास के गांवों से लोग इस आयोजन को देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. सोशल स्तर पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग इसे राजस्थानी परंपरा का स्वर्णिम उदाहरण बता रहे हैं. परंपरा और आधुनिकता का संगम राजस्थान में मायरा केवल रस्म नहीं, बल्कि भाई द्वारा बहन के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक माना जाता है. श्यामसर की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक समय में भी परंपराएं जीवित हैं, बस उन्हें निभाने का जज्बा होना चाहिए. क्या श्यामसर का यह मायरा आने वाले समय में नई परंपरा बनेगा? या फिर यह केवल एक अनोखी मिसाल बनकर रह जाएगा? श्यामसर का यह मायरा केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है.

अजमेर में पानी सप्लाई बहाल, कई इलाकों को राहत

अजमेर अजमेर में बीसलपुर पाइपलाइन मरम्मत का काम पूरा हो गया. 30 घंटे का शटडाउन खत्‍म हो गया. कई इलाकों में सप्लाई बहाल हो गई. कल तक जलापूर्ति पूरी तरह पटरी पर आने की उम्मीद है. अब लोगों को पानी की समस्‍या नहीं होगी. पहले की तरह से पानी की सप्‍लाई शुरू हो जाएगी. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने बीसलपुर-अजमेर पेयजल परियोजना के अंतर्गत 30 घंटे का शटडाउन लिया था. 30 घंटे का शटडाउन अजमेर में 12 अप्रैल रात 12 बजे से 14 अप्रैल सुबह 6 बजे तक 30 घंटे पेयजल सप्लाई बंद थी. इस दौरान 1600 एमएम और 1500 एमएम पाइपलाइन पर जरूरी तकनीकी कार्य किए गए. इन इलाको में सप्लाई बाधित शटडाउन के कारण अजमेर शहर के साथ-साथ ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सरवाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित रही. शहर के प्रमुख इलाकों में वैशाली नगर, पंचशील, आदर्श नगर, माकड़वाली रोड, धोलाभाटा, क्रिश्चियनगंज, केसरगंज, रामगंज, सिविल लाइंस, फॉयसागर रोड और दरगाह क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बंद थी. लोगों को हुई परेशानी? 30 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. घरों में पानी स्टोरेज सीमित होने से खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई जैसी दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा.

सीलबंद Maaza में प्लास्टिक मिला, आयोग का बड़ा फैसला

  जैसलमेर खाने-पीने की चीजों में लापरवाही बरतने जैसलमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कंपनी को कड़ा सबक सिखाया है. माजा (Maaza) कोल्ड ड्रिंक की सीलबंद बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा मिलने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनी और विक्रेताओं पर कुल 2.50 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है. साथ ही आयोग ने परिवादी को क्षतिपूर्ति रकम के तौर पर 40 हजार रुपये और परिवाद लड़ने में हुए खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया है. माजा की बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा दरअसल, 16 जुलाई 2025 को जैसलमेर के डिब्बा पाड़ा निवासी तुषार पुरोहित ने स्थानीय विक्रेता 'शिवम् मार्केटिंग' से माजा कोल्ड ड्रिंक की एक पूरी केरेट खरीदी थी. जब उन्होंने बोतलों की जांच की तो वह यह देखकर दंग रह गए कि माजा कोल्ड ड्रिंक की बोतल पूरी तरह सीलबंद थी, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या पॉलीथिन जैसी कोई चीज नजर आई. इस पर ताषर ने स्वास्थ्य के साथ इसे खिलवाड़ लापरवाही मानते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई. मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी ने वह सीलबंद बोतल साक्ष्य के तौर पर आयोग के सामने पेश की. आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गोड की पीठ ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी होने के बावजूद गुणवत्ता में कमी गंभीर लापरवाही है. निरीक्षण में कोल्ड ड्रिंक की बोतल के अंदर बाहरी पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई. परिवादी को 40 हजार रुपये देने का आदेश साक्ष्यों और बहस के आधार पर आयोग ने 9 अप्रैल 2026 को कंपनी को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया. आयोग ने कंपनी को परिवादी को 40,000 रुपए क्षतिपूर्ति राशि और 10,000 रुपए परिवाद व्यय देने के निर्देश दिए. साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में गंभीर कमी को देखते हुए 2 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश भी दिया गया. परिवादी के अधिवक्ता प्रथमेश आचार्य ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

Udaipur में अचानक तापमान उछाल, मौसम विभाग ने दी हीटवेव की चेतावनी

  जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर में भीषण गर्मी पड़ने लगी है. तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार को अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे ज्यादा है. दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने हालात और भी मुश्किल कर दिए. सड़कों पर सन्नाटा नजर आया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले.   आने वाले समय में और बढ़ेगा तापमान शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए प्याऊ और मटकी का ठंडा पानी राहगीरों के लिए राहत का जरिया बन रहा है. लोग रुककर पानी पीते नजर आ रहे हैं, जिससे कुछ हद तक गर्मी से राहत मिल रही है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सावधानी बरतने, दोपहर में धूप से बचने और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है. उदयपुर के तापमान में अचानक उछाल उदयपुर में पिछले तीन दिनों में तापमान में अचानक उछाल देखने को मिला हैं. सोमवार को तापमान 39.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो कि इस महीने का सबसे गर्म दिन रहा. यहीं नहीं, मौसम विभाग ने इस सप्ताह आसमान साफ रहने और तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई हैं. वहीं मंगलवार दोपहर को अचानक गर्म हवाएं चलने लगी और हीटवेव का अहसास दिलाने लगी.    इस बार सामान्य रहेगी बारिश   इस साल मानसून को लेकर तस्वीर थोड़ी चिंताजनक नजर आ रही है.  मौसम विभाग के पहले पूर्वानुमान में साफ कहा गया है कि देश में इस बार सामान्य से कम बारिश हो सकती है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, यानी लगभग 8 प्रतिशत की कमी होने का अनुमान है. मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह अल नीनो को माना जा रहा है.  यह प्रशांत महासागर के पानी के गर्म होने की स्थिति होती है जो भारत में मानसून को कमजोर कर देती है.  इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है जिससे मानसून की शुरुआत और उसकी रफ्तार दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

अजमेर में पानी संकट के बीच अवैध कनेक्शन से पानी चोरी का मामला सामने आया

 माखुपुरा राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के विदा होते ही सूर्यदेव ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. अजमेर में पारा 36.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जिले में पेयजल संकट गहराने लगा है. इस संकट के बीच, माखुपुरा इलाके में पानी चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जनता के पीने के पानी से खेतों की सिंचाई की जा रही थी. जिसकी भनक  जलदाय विभाग को लगते ही टीम ने  कार्रवाई करते हुए इस पूरे खेल का खुलासा कर दिया. खेत में टैंक बनाकर पीने के पानी का कर रहा था स्टोरेज मामला माखुपुरा इलाके का है जहां जलदाय विभाग ने  जांच के दौरान पाया की आरोपी ने न केवल मुख्य पाइपलाइन से कनेक्शन लिया, बल्कि खेत में टैंक बनाकर पानी का स्टोरेज भी कर रहा था. मामले की जांच कर रहे विभाग के जेईएन बीना मीणा ने जलापूर्ति निरीक्षण के दौरान इस अवैध कनेक्शन को पकड़ा. जांच के दौरान पाया कि माखुपुरा के रहने वाले लेखराज के खेत तक सीधे एक पाइपलाइन जोड़ी गई थी. जब उससे कनेक्शन के वैध दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका. जिसके बाद इसकी सूचना विभाग को दी. सूचना के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर एईएन सत्यवीर ने कार्रवाई की. आदर्श नगर थाने में आरोपी के खिलाफ  पानी की चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई.  मामले को लेकर विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि यह केवल पानी चोरी का केस नहीं है. बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और आम जनता के हक पर डाका डालने जैसा है. इलाके में अवैध कनेक्शन की जांच में जुटा जलदाय विभाग फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. साथ ही यह पता लगाने का काम कर रहा है कि कहीं इस तरह के अवैध कनेक्शन इलाके में और तो नहीं हैं. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अजमेर में कई इलाकों में पानी की किल्लत बनी हुई है. ऐसे में पीने के पानी का दुरुपयोग और अवैध दोहन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.