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पुलिसवालों को गालियां और धमकी! राजस्थान के मंत्री मुश्किल में, FIR दर्ज

जयपुर  राजस्थान के एक मंत्री पर एफआईआर दर्ज किया गया है। मंत्री पर पुलिसवालों से गाली-गलौज करने और उन्हें धमकाने का आरोप है। मंत्री के इस करतूत का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं, मंत्री ने कहा कि जान बूझकर मुझे बदनाम करने की की गई कोशिश है। ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद ऐक्शन पुलिस ने बताया कि राजस्थान के मंत्री गौतम डक के खिलाफ चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज करने और उन्हें धमकाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। मंत्री पर बीएनएस की धारा 132, 351(2) और 351 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद डूंगला थाने के एसएचओ शैतान सिंह ने मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस क्लिप में कथित तौर पर मंत्री पुलिसकर्मियों को गालियां देते हुए सुनाई दे रहे थे। मंत्री का आरोपों से इनकार इस बीच, मंत्री गौतम डक ने इन आरोपों से इनकार किया और उस ऑडियो क्लिप को उन्हें बदनाम करने की जान-बूझकर की गई कोशिश बताया। मंत्री ने एक वीडियो बयान में कहा कि यह मेरी आवाज जैसी नहीं लगती। यह मुझे बदनाम करने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। एफआईआर के अनुसार यह घटना सोमवार को हुई। एसएचओ शैतान सिंह को मंत्री डक का फोन आया और उन्होंने एसएचओ से थाने से बाहर आने को कहा। थाने से बाहर आने के बाद कथित तौर पर मंत्री ने एसएचओ से कहा कि वे कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और विष्णु कुमार को भी बुलाएं। सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहे कांस्टेबलों के पहुंचने के बाद मंत्री ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की बात सुने बिना ही सार्वजनिक रूप से उन्हें अपशब्द कहना शुरू कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों से गाली-गलौज भी की। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि डक ने अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक बल प्रयोग करने का भी प्रयास किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। दरअसल, यह मामला एक दूसरे केस की चल रही जांच से जुड़ा था। इस केस में धनराज खरोल नाम के एक आरोपी को 25 मई को पूछताछ के लिए थाना बुलाया गया था। शायद इसी बात को लेकर मंत्री गौतम डक नाराज थे।

पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे कनेक्टिविटी, 33 लाख का सर्वे स्वीकृत

बालोतरा राजस्थान में बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. रेलवे ने बालोतरा से पचपदरा को जोड़ने वाली नई लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी के लिए बालोतरा से पचदरा तक 11 किमी नई लाइन के सर्वे के लिए 33 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी. साथ ही क्षेत्र का जोधपुर और अहमदाबाद व दिल्ली-जयपुर की ओर भी सम्पर्क स्थापित होगा. सर्वे काम पूरा होने के बाद बनेगी DPR बालोतरा से पचपदरा तक प्रस्तावित रेल रूट इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. इस नई रेल लाइन के निर्माण से पचपदरा स्थित रिफ़ाइनरी तक रेल मार्ग के माध्यम से पहुंच और सुगम होगी. साथ ही रोज़गार, व्यापार, कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए नए परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा. 11 किलोमीटर नई लाइन के लिए फ़ाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा होने के बाद परियोजना की वित्तीय और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर DPR तैयार कर कार्य स्वीकृत रेलवे बोर्ड स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी. 35 साल पहले इस मार्ग पर चलती थी ट्रेन इस मार्ग पर लगभग 35 साल पहले ट्रेन चला करती थी, जिसे 1992 में बंद कर दिया गया था और बाद में रेलवे ट्रैक भी हटा लिया गया था. इस पुरानी ट्रेन की कहानी पचपदरा के नमक उद्योग से जुड़ी है. सैकड़ों सालों से नमक उत्पादन का केंद्र रहे पचपदरा में, स्थानीय नगर सेठ गुलाब चंद के आग्रह पर तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार ने 1939 में बालोतरा से पचपदरा साल्ट तक एक रेलवे ट्रैक बिछाया था. इस ट्रेन में नमक लदान के लिए वैगन के साथ दो यात्री कोच भी जोड़े गए थे. पचपदरा साल्ट की नमक खदानों से हज़ारों टन नमक रोज़ाना इसी ट्रेन से ढोया जाता था.1990 की बाढ़ में रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद ट्रेन बंद कर दी गई थी.

पैरोल खत्म, सीधे जेल पहुंचे आसाराम; राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा में नहीं दी राहत

 जोधपुर नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने वाले हैं. राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ से बड़ा कानूनी झटका लगने के बाद आसाराम गुरुवार को एयर इंडिया की दिल्ली-जोधपुर फ्लाइट से जोधपुर पहुंच गए हैं. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, वे सिविल एयरपोर्ट से सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल जा रहे हैं, जहां कुछ ही देर में वे जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करेंगे. हाईकोर्ट की डबल बैंच ने बरकरार रखी थी सजा एक दिन पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की याचिका पर अपना अहम फैसला सुनाया था. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डबल बैंच ने निचली अदालत द्वारा दी गई 'अंतिम सांस तक आजीवन कारावास' की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा था. कोर्ट ने आसाराम को आंशिक राहत देते हुए सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं से भले ही बरी कर दिया हो, लेकिन मुख्य मामले में उम्रकैद की सजा पर कोई ढील नहीं दी थी. इसके साथ ही अदालत ने उन्हें तुरंत सरेंडर करने के सख्त निर्देश दिए थे. पैरोल खत्म, अब सीधे जेल का रास्ता आसाराम पिछले कुछ समय से खराब सेहत और इलाज के आधार पर मिली पैरोल पर जेल से बाहर चल रहे थे. हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद उनकी बाहर रहने की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं. दिल्ली से जोधपुर सिविल एयरपोर्ट उतरते ही सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल मुस्तैद हो गए, ताकि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति न बिगड़े. एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही आसाराम का काफिला सीधे सेंट्रल जेल के लिए रवाना हो गया. अब कानूनी विकल्पों के तौर पर आसाराम के पास सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता बचा है, लेकिन फिलहाल उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल की उसी कोठरी में वापस लौटना होगा जहां वे साल 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद से बंद हैं.

हीटवेव का प्रकोप जारी, 2–3 दिन और तपेगा राजस्थान

जयपुर राजस्‍थान में गर्मी सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है. पिछले 24 घंटे में 48.2 डिग्री सेल्सियस के साथ श्रीगंगानगर देश का सबसे गर्म शहर रहा. नौतपा शुरू होने के साथ ही प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार जारी है. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में चल रही हीटवेव और गर्म रातों का दौर आगामी 2-3 दिनों तक जारी रहने की प्रबल संभावना है. अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री दर्ज होने की संभावना है. बीकानेर, कोटा संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में कहीं-कहीं अधिकतम तापमान 46-47 डिग्री दर्ज होने की संभावना है. नया पश्चिमी विक्षोभ कराएगी बारिश   पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 28 मई को कहीं-कहीं अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज होने की संभावना है. प्रदेश में आज से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ भागों में आंधी बारिश की गतिविधियां शुरू होने की संभावना है. 30 मई से आंधी-बारिश की संभावना है. जून के पहले सप्ताह में कुछ भागों में आंधी बारिश होगी. जयपुर और भरतपुर में होगी बारिश पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 29 से 31 मई के दौरान जयपुर, भरतपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर अैर जोधपुर-बीकानेर संभाग के कुछ भागों में तेज अंधड़, तेज हवाएं 60-70 Kmph और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. आंधी बारिश के असर से 29 मई से तापमान में 2 से 3 डिग्री गिरावट होने व 29-30 मई से हीटवेव से राहत मिलने की उम्मीद है. इन जिलों में बारिश का येलो अलर्ट आज विभाग की ओर से बारां, बूंदी, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, बालोतरा, बाड़मेर, और जोधपुर में हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया गया है.  बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी और श्रीगंगानगर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.  अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़, सवाईमाधोपुर, सीकर, टोंक, चूरू से हनुमानगढ़ में हीटवेव के साथ आंधी बारिश का येलो अलर्ट भी है.  इन जिलों में शाम से आंधी बारिश का दौर शुरू हो सकता है.

मोटर व्हीकल SI भर्ती पर बड़ा फैसला: डिग्री नहीं, सिर्फ डिप्लोमा उम्मीदवार होंगे शामिल

जयपुर राजस्थान में SI भर्ती 2021 पहले से ही विवादों में है, जिसे कोर्ट के आदेश पर रद्द कर दिया गया है. जबकि अब SI भर्ती की परीक्षा फिर से आयोजित होने वाली है. वहीं अब मोटर व्हीकल एसआई भर्ती (MVSI भर्ती 2021) को लेकर भी हाई कोर्ट का फैसला आय गया है, जिस पर काफी समय से विवाद चल रहा था. MVSI परीक्षा भी 2021 में हुई थी और इसमें सफल हुए अभ्यर्थी की मेरिट लिस्ट बन चुकी है. लेकिन अब हाई कोर्ट के फैसले से फिर विवाद खड़ा होने वाला है. दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने Motor Vehicle Sub Inspector (MVSI) भर्ती 2021 विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती नियमों में केवल डिप्लोमा योग्यता निर्धारित है, वहां डिग्री धारकों को स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने परिवहन उप निरीक्षक भर्ती (MVSI) से जुड़ी विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया. कोर्ट ने केवल डिप्लोमा धारकों को भर्ती में शामिल करते हुए राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए. क्या था विवाद दरअसल, मोटर व्हीकल एसआई भर्ती परीक्षा में डिग्री धारक यानी बीटेक और बीई करे हुए अभ्यर्थियों ने दावा किया कि चूंकि वे उच्च योग्यता रखते हैं. ऐसे में उन्हें भर्ती में शामिल किया जाए. वहीं, डिप्लोमा धारकों ने तर्क दिया कि भर्ती विज्ञापन विशेष रूप से उनके लिए था और डिग्री धारकों को शामिल करना नियमों के खिलाफ होगा. हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद बुधवार (27 मई) को यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों के शेड्यूल में MVSI पद के लिए “minimum qualification” शब्द का उल्लेख नहीं है. नियमों में स्पष्ट रूप से Automobile Engineering या Mechanical Engineering में डिप्लोमा को ही पात्रता माना गया है. साथ ही, केवल वही योग्यताएं मान्य हैं जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार द्वारा समकक्ष घोषित किया गया हो. ऐसे में अदालत नियमों में ऐसी योग्यता नहीं जोड़ सकती जो वहां मौजूद ही नहीं है.

पाकिस्तान सीमा होगी हाईटेक: ड्रोन रोधी सिस्टम, नई फेंसिंग और 184 गांवों का विकास

जयपुर राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा अब पहले से ज्यादा मजबूत और आधुनिक होने जा रही है. राजस्थान की पाकिस्तान सीमा का सुरक्षा का पूरा मॉडल बदलने जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीकानेर के सांचू पोस्ट दौरे के बाद अब बॉर्डर पर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" तैयार करने की रणनीति तैयार की गई है. यानी बीएसएफ, सेना, स्थानीय नागरिक और प्रशासन मिलकर सीमा सुरक्षा की नई दीवार बनेंगे. इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों को हाईटेक और आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी तैयारी भी शुरू हो चुकी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परसों, 25 मई की रात दो दिन के दौर पर बीकानेर आए थे. उन्होंने राजस्थान के 5 बॉर्डर जिलों के DM-SP के साथ अहम बैठक की थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर में हुई हाईलेवल बैठक में राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए बड़ा सुरक्षा ब्लूप्रिंट तैयार किया है. भारत-पाक सीमा से 15 किलोमीटर तक अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. शाह ने साफ कहा है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध निर्माण तुरंत ध्वस्त किए जाएं. बैठक में घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए संयुक्त एक्शन प्लान पर जोर दिया गया. BSF, NCB, CBDT और राज्य एजेंसियां मिलकर बॉर्डर मैनेजमेंट करेंगी. डीएम को बड़े अधिकार दिए जाएंगे. फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स, नकली आधार कार्ड और संदिग्ध फंडिंग की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं.   बीएसएफ, सेना, नागरिक और प्रशासन का "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" साइबर क्राइम रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन के प्रभावी इस्तेमाल और नए आपराधिक कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया. कल, 26 मई को बीकानेर के सांचू पोस्ट पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संदेश दिया कि सीमा सुरक्षा अब सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, स्थानीय लोगों और प्रशासन के तालमेल से मजबूत होगी. अमित शाह ने बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और प्रशासन को मिलाकर "चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड" बनाने की बात कही है. यानी सीमा के उस पार से होने वाली हर गतिविधि पर चौतरफा निगरानी रखी जाएगी. सीमा को बनाया जाएगा ड्रोन रोधी पाकिस्तान से लगती सीमा सुरक्षा को हाईटेक बनाने के लिए अब कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नई डिजाइन की फेंसिंग लगाई जा रही है. ड्रोन रोधी सिस्टम अगले छह महीने में शुरू करने की तैयारी है. 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि जवानों की आवाजाही और निगरानी आसान हो सके. बीएसएफ चौकियों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का काम भी तेजी से चल रहा है. वहीं महिला जवानों के लिए आधुनिक बैरक बनाए जा रहे हैं. सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों को चुना गया है. इन गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, टीवी कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे. हर गांव पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलौदी के गांव अब सिर्फ सीमा के आखिरी गांव नहीं, बल्कि देश की पहली सुरक्षा लाइन बनेंगे. मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम से भी विकास राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के जरिए भी सीमावर्ती इलाकों के विकास को गति दी है. इसके तहत 1 हजार 206 गांवों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़े एक हजार से ज्यादा काम स्वीकृत किए गए हैं.

जयपुर का राजमंदिर सिनेमा मनाएगा 50वीं वर्षगांठ, DDLJ से ‘हम आपके हैं कौन’ तक का होगा मुफ्त शो

जयपुर जयपुर के राजमंदिर सिनेमा का पूरे देश में नाम है. यह का प्रतिष्ठित सिनेमा 1 जून को अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. थिएटर की गोल्डन जुबली के मौके पर राजमंदिर सिनेमा के प्रबंधकों ने एक खास इंतजाम किया है. इस विशेष दिन के लिए थिएटर में सिने प्रेमियों के लिए चार सुपरहिट बॉलीवुड फिल्मों का नि:शुल्क प्रदर्शन किया जाएगा. इन 5 सुपरहिट फिल्मों के नाम हैं – ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', ‘राम तेरी गंगा मैली', ‘हम आपके हैं कौन' और ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' और 'चुपके-चुपके'. इन शो के लिए दर्शकों को फ्री टिकट पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिए जाएंगे. लेकिन, बिना पैसे दिए फिल्म देखने के लिए भी फ्री टिकट लेना होगा. कैसे मिलेंगी टिकटें? राजमंदिर प्रबंधन के अनुसार 1 जून को 5 अलग-अलग शो में चार क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी. टिकट बुक माय शो और थिएटर काउंटर से प्राप्त किए जा सकेंगे. आयोजन का उद्देश्य पुराने दौर की सिनेमाई यादों को फिर से जीवंत करना है. 50 साल पहले शुरू हुआ था राजमंदिर का सफर राजमंदिर का उद्घाटन 1 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने किया था. उसी साल यहां पहली फिल्म ‘चरस' प्रदर्शित हुई थी, जिसमें धर्मेंद्र और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में थे. पिछले पांच दशकों में यह थिएटर जयपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. अपनी भव्य वास्तुकला, शानदार इंटीरियर और अनोखे फिल्मी माहौल के कारण राजमंदिर देश-दुनिया के पर्यटकों के बीच भी आकर्षण का केंद्र रहा है. 400 से ज्यादा फिल्में, कई रिकॉर्ड भी बने राजमंदिर में अब तक 400 से अधिक फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैं. शुरुआत में थिएटर में 1168 सीटें थीं, लेकिन बाद में दर्शकों की सुविधा को देखते हुए सीटों की संख्या घटाकर 862 कर दी गई. यहां सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की फिल्में लगी हैं. ‘राम तेरी गंगा मैली' और ‘हम आपके हैं कौन' यहां लगातार 75-75 सप्ताह तक चली थीं. उस दौर में टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लगती थीं और लोग पहले से परिवार के साथ फिल्म देखने की योजना बनाते थे. कर्मचारियों की यादों से भी जुड़ा है राजमंदिर पुराने कर्मचारियों का कहना है कि राजमंदिर सिर्फ एक थिएटर नहीं, बल्कि लोगों की खुशियों, जश्न और भावनाओं का हिस्सा रहा है. टिकट काउंटर से लेकर प्रोजेक्शन रूम और कैंटीन तक, यहां काम करने वाले लोगों ने पीढ़ियों को फिल्मों के जरिए जुड़ते देखा है. यही वजह है कि 50 साल बाद भी राजमंदिर जयपुर की सांस्कृतिक धड़कन बना हुआ है.

डीलर्स की हड़ताल से राजस्थान में ईंधन संकट की आशंका

 जयपुर राजस्थान में 1 जून से आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के संकट का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा नहीं है कि प्रेट्रोल-डीजल की आवक रुकने वाली है, बल्कि प्रदेशभर के पेट्रोल-पंप संचालकों ने 1 जून से अनिश्चितकालीन पंप को ठप करने की चेतावनी दी है. पंप संचालकों ने सरकार और तेल कंपनियों की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है. इसे लेकर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप पर ताले लटक जाएंगे और पूरे प्रदेश में पहिया थम सकता है. WhatsApp और मौखिक आदेश से तेल देने की सीमा निर्धारित बताया जा रहा है कि इस हड़ताल का कारण पेट्रोल-डीजल को लेकर तेल कंपनियों द्वारा लगाई गई पाबंदियां है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी का आरोप है कि प्रदेश के कई इलाकों में पेट्रोल पंप तेल खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. जबकि इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों ने WhatsApp मैसेज और मौखिक आदेशों के जरिए ग्राहकों तेल देने की सीमा निर्धारित कर दी है. भाटी ने बताया कि अगर तेल कंपनी के नियमों के खिलाफ अगर कोई पंप ग्राहक को एक बार में 50 हजार रुपये से अधिक का डीजल और 5000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया जा सकता है. दूसरी ओर भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी अपनी सप्लाई बेहद सीमित कर दी है. अगर जरूरतमंद को सीमा से ज्यादा तेल दिया जाता है तो कंपनियां एकतरफा कार्रवाई करते हुए सप्लाई रोक देती है. जो नियमों का सरासर उल्लंघन है. वहीं तेल नहीं देने पर अनावश्यक लोगों में भ्रम फैलता है और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. VAT कम करने की मांग एसोसिएशन की ओर से राजस्थान में ईंधन पर लगाए जा रहे भारी VAT का भी विरोध किया है. इस वजह से पूरे देश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल राजस्थान में बिक रहा है. डीलरों की मांग है कि राजस्थान में भी अन्य राज्यों की तरह 5 प्रतिशत VAT कटौती की जाए. इसके अलावा अलग-अलग जिलों में कीमतों के भारी अंतर और हरियाणा-पंजाब की तुलना में राज्य में CNG की अत्यधिक कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं और डीलर्स में भारी असंतोष है. किसानों के लिए स्थिति होने वाली है गंभीर डीलरों का कहना है कि संकट अभी और बढ़ने वाली है जिससे किसान परेशान होने वाले हैं. क्योंकि आगामी बुवाई के सीजन को देखते हुए खेतों में डीजल की मांग बढ़ने वाली है. जबकि तेल कंपनियां नियमों का हवाला देकर ड्रमों में डीजल देने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है. ऐसे में किसान अपने बड़े कृषि उपकरणों को बार-बार शहरों के पंप तक नहीं ला सकते और अब हालात गंभीर हो सकते हैं. पीएम दौरे और सरकारी रैलियों के उधार लिया गया लाखों का ईंधन डीलर्स ने तेल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए तेल डिपो और पेट्रोल पंपों पर आधुनिक 'फ्लोमीटर' लगाने की मांग भी दोहराई है, ताकि हर बूंद का सही हिसाब मिल सके और कमी के लिए केवल डीलर्स को जिम्मेदार न ठहराया जाए. एसोसिएशन ने तेल कंपनियों द्वारा महंगे 'ब्रांडेड फ्यूल' को जबरन बेचने के दबाव और राज्य में चल रहे अवैध बायोडीजल के काले कारोबार पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई है. आर्थिक मोर्चे पर घिरे डीलर्स ने यह मुद्दा भी उठाया है कि प्रधानमंत्री के दौरों और सरकारी रैलियों के दौरान गाड़ियों में जो लाखों रुपये का ईंधन उधार दिया गया था, उसका भुगतान सरकार ने लंबे समय से अटका रखा है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है. मामले की गंभीरता के बावजूद, एसोसिएशन का आरोप है कि शीर्ष नौकरशाही का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है. लगातार ईमेल और पत्र भेजने के बाद भी प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक नहीं बुलाई जा रही है और न ही अधिकारी उनके फोन कॉल्स का जवाब दे रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मामले में खुद हस्तक्षेप कर 1 जून से पहले कोई बीच का रास्ता निकालते हैं, या फिर राजस्थान एक बड़े चक्काजाम और ईंधन संकट की तरफ बढ़ने को मजबूर होगा.

सफाई कर्मचारियों से गैर-कार्य न कराएं: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने साफ कहा कि सफाई कर्मचारियों से दफ्तर के अन्य काम कराने के बजाय सिर्फ सफाई का मूल काम ही लिया जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी मिली, तो सीधे संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय होगी. इसके साथ ही, जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेरिटेज शहर बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुले में कचरा फेंकने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने और पर्याप्त डस्टबिन रखने के निर्देश दिए हैं. उचित स्थानों पर डस्टबिन लगाने के निर्देश अदालत ने सफाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं और उनकी नियमित सफाई की जाए. कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी. खंडपीठ ने याद दिलाया कि जयपुर एक ऐतिहासिक हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाना चाहिए कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सके. चूंकि पर्यटन उद्योग राजस्थान का सबसे बड़ा उद्योग है, इसलिए अदालत ने इस तरह के स्वच्छता प्रयासों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की आवश्यकता जताई है. अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को मिली दिशा-निर्देश की जिम्मेदारी इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को सौंपी गई है. साथ ही, अदालत ने आम शहरवासियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) से भी अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने और नगर निगम की मदद करने की अपील की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि सालों पहले हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए 16 बिंदुओं के निर्देशों की नगर निगम ने आज तक पालना नहीं की है, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह नया आदेश पारित किया.

Camel Milk से तैयार हुआ खास पनीर, बीकानेर वैज्ञानिकों की रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीदें

बीकानेर रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ऊंट अब केवल परिवहन या दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध से विशेष प्रकार का पनीर तैयार कर एक नई उपलब्धि हासिल की है. यह पनीर ऊंटनी और गाय के दूध के मिश्रण से बनाया गया है, जो प्रोटीन, खनिज तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है. बीकानेर के वैज्ञानिकों की यह पहल न केवल डेयरी क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है, बल्कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।  एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. मितुल बुंबडिया और डॉ. राजेंद्र कुमार ने प्रयोगशाला स्तर पर सिट्रिक अम्ल की सहायता से इस विशेष पनीर को तैयार किया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंटनी के दूध में सामान्य गाय या भैंस के दूध की तुलना में प्रोटीन की संरचना अलग होती है, जिसके कारण इसे सीधे फाड़कर पनीर बनाना संभव नहीं होता. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में 30 प्रतिशत गाय का दूध मिलाकर उसकी जमावट क्षमता बढ़ाई. तैयार पनीर में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ऊंटनी के दूध का है।  पनीर को सात दिनों तक रखा जा सकता है सुरक्षित वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पनीर का स्वाद हल्का नमकीन है और इसे पांच से सात दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. खास बात यह है कि यह पनीर पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी माना जा रहा है. ऊंटनी के दूध में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. यही कारण है कि इस उत्पाद को औषधीय गुणों वाला दुग्ध उत्पाद भी माना जा रहा है।  ऊंटनी के दूध से तैयार पनीर लोगों के लिए बेहतर विकल्प डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि भारत में पनीर का उपयोग दैनिक भोजन से लेकर कई प्रकार के व्यंजनों में बड़े स्तर पर किया जाता है. ऐसे में ऊंटनी के दूध से तैयार यह पनीर लोगों के लिए एक नया और स्वास्थ्यप्रद विकल्प साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि यदि बाजार में इसकी मांग बढ़ती है, तो बड़े स्तर पर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा।  ऐसे तैयार होता है ऊंटनी के दूध से पनीर पनीर तैयार करने की प्रक्रिया भी वैज्ञानिकों ने साझा की है. सबसे पहले ऊंटनी के दूध को करीब 90 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है. इसके बाद इसे थोड़ा ठंडा कर विशेष अनुपात में तैयार मिश्रण के साथ फाड़ा जाता है, जिससे पनीर तैयार हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे शोध और प्रयोगों के बाद उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं और उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करने में सफलता मिली है. एनआरसीसी अब इस तकनीक को पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाने की तैयारी भी कर रहा है. यदि कोई किसान या पशुपालक ऊंटनी के दूध से पनीर बनाना सीखना चाहता है, तो वह केंद्र में आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है. इससे ऊंट पालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।