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प्राचीन माँ बीजासन मंदिर में बुजुर्गों-महिलाओं-दिव्यांगों को रहत देने बनेगा रोप-वे

बूंदी. हाड़ौती की आराध्य देवी माँ बीजासन के दरबार में अब भक्तों को 750 से अधिक सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी नहीं रहेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इन्द्रगढ़ में 18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रोप-वे का शिलान्यास किया। इन्द्रगढ़ (बूंदी) स्थित माँ बीजासन मंदिर राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र का एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी शक्तिपीठ है। यह मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। इन्द्रगढ़ माताजी: रोप-वे से सुगम होंगे दर्शन इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्तमान में यहाँ पहुँचने के लिए भक्तों को कड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। रोप-वे बनने से सबसे अधिक लाभ बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को होगा। अब वे मिनटों में पहाड़ी के शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुँच सकेंगे। ओम बिरला ने कहा कि इस सुविधा के आने से श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और गाइडों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर पर्यावरण और पर्यटन का अद्भुत तालमेल चूंकि बीजासन माता मंदिर अभयारण्य क्षेत्र (रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पास) में स्थित है, इसलिए विकास कार्यों में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।     इको-फ्रेंडली प्रोजेक्ट: रोप-वे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों और वन संपदा को न्यूनतम नुकसान हो।     पर्यटन मानचित्र पर इन्द्रगढ़: बिरला ने विश्वास जताया कि आगामी कुछ वर्षों में इन्द्रगढ़ राजस्थान के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा। दो बार हो चुकी रोप-वे की घोषणा बीजासन माता मंदिर पर पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी रोपवे की घोषणा हुई थी, लेकिन रोप-वे की घोषणा केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। और धरातल पर नहीं आ पाई। ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि प्राचीनता: माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध संत बाबा कृपानाथ जी महाराज ने यहाँ कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने स्वयं पर्वत की चट्टान चीरकर दर्शन दिए थे। नाम का रहस्य: 'बीजासन' नाम देवी दुर्गा के उस स्वरूप को दर्शाता है जो राक्षस रक्तबीज का संहार करने के बाद उसके ऊपर आसन लगाकर विराजमान हुई थीं। स्थापना: कहा जाता है कि बूंदी के शासक राव शत्रुसाल के भाई इंद्रसाल ने इन्द्रगढ़ नगर बसाया था और पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को भव्य रूप दिया। मंदिर की भौगोलिक स्थिति और वास्तुकला स्थान: यह मंदिर बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 160 किमी और कोटा से करीब 75 किमी दूर है। पहाड़ी और सीढ़ियाँ: मंदिर पहाड़ी की चोटी पर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है। वर्तमान में भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब 750 से 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। प्रवेश: गुफा के अंदर माता की स्वयंभू (स्वयं प्रकट) प्रतिमा विराजमान है। मंदिर परिसर से अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। धार्मिक महत्व और मान्यताएँ नवदुर्गा स्वरूप: यहाँ माँ बीजासन को दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में सात बहनों (नवदुर्गा के स्वरूप) की पूजा का भी विधान है। मनोकामना पूर्ण: भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। विशेष रूप से निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहाँ आते हैं। अखंड ज्योति: मंदिर में एक अखंड ज्योति 24 घंटे प्रज्वलित रहती है, जिसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। प्रमुख उत्सव और मेले नवरात्रि मेला: साल में दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है। इस समय राजस्थान ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं। धार्मिक आयोजन: नवरात्रि में यहाँ विशेष मंगल आरती, भोग आरती और संध्या आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होना पुण्यदायी माना जाता है।

भीलवाड़ा सर्राफा बाजार में 100 साल में पहली बार बड़ी गरजे बुलडोज़र

भीलवाड़ा. भीलवाड़ा शहर के सबसे पुराने और तंग रास्तों वाले सर्राफा बाजार में सोमवार को नगर निगम का 'पीला पंजा' खौफ की तरह गरजा। करीब सौ साल के इतिहास में यह पहला मौका था, जब इस व्यस्ततम बाजार में बुलडोजर की गर्जना सुनाई दी। इस कार्रवाई से व्यापारियों में हड़कंप मच गया। वहीं, सालों से अतिक्रमण की मार झेल रहे आमजन ने राहत की सांस ली। वहीं, नगर निगम ने बाजार क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र में सालों से दबी नालियों को भी अतिक्रमण एवं पक्के कब्जों से मुक्ति दिलाई। निगम की कार्रवाई से दहशत में आए सर्राफा व अन्य कारोबारी स्वयं दुकानों व प्रतिष्ठानों के बाहर से अतिक्रमण हटाने में जुट गए। लोग व व्यापारी भी कटर, हथौड़ा, गेती व फावड़ा, संबल लेकर खुद के अतिक्रमण को हटाने के साथ ही प्रशासन के हटाने गिरे मलबे को समटने में जुट गए। बड़ा मंदिर से लेकर सांगानेरी गेट क्षेत्र के लोग तो अतिक्रमण का दस्ता पहुंचने से पहले ही स्वयं कब्जे हटाने में जुट गए। विरोध के बावजूद नहीं थमा 'पीला पंजा' क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि सर्राफा बाजार में पहली बार अतिक्रमण हटाने की इतनी बड़ी कार्रवाई हुई। उन्होंने खुशी भी जाहिर की कि इस कार्रवाई से पुराना भीलवाड़ा के इस सर्राफा बाजार में आवागमन सहज हो सकेगा। दूसरी ओर कई व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई का विरोध भी किया, लेकिन पीला पंजा नहीं रुका। निगम की कार्रवाई से क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित रही। पांसल चौराहा क्षेत्र से हटाया अतिक्रमण शहर में पुर रोड के पांसल चौराहा क्षेत्र में नगर निगम के दस्ते ने सड़कें के दोनों तरफ दुकानों के बाहर से होर्डिग्स व बैनर हटाए, दुकानों के टीन शेड भी खोल ले गए। केबिन व फर्नीचरों की भी जब्ती की गई। शिकायतों के बाद लिया गया बड़ा एक्शन नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी ने बताया कि सर्राफा बाजार की अतिक्रमण़ से सिकुड़ती राह को लेकर कई शिकायतें आमजन की तरफ से आ चुकी थीं। अतिक्रमण हटाने को लेकर क्षेत्र के लोगों को पूर्व में कई बार सूचित किया जा चुका। जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर शहर में प्रमुख बाजारों को अतिक्रमण मुक्त किए जाने के अभियान के तहत सोमवार को भी सर्राफा बाजार में प्रभावी कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि भीमगंज थाना से लेकर सर्राफा बाजार होते हुए पुराना भीलवाड़ा के शहीद चौक क्षेत्र से होते हुए सांगानेरी गेट चौराहा तक क्षेत्र के अतिक्रमण हटाए जाएंगे। प्रशासन का सराहनीय कदम सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी महेश सोनी ने बताया कि सर्राफा बाजार में सोमवार को हुई प्रशासनिक कार्रवाई स्वागत योग्य है। बाजार की सड़कों को कब्जे से मुक्त करने एवं सड़कों को चौड़ा किए जाने की जरूरत भी थी। शहर में नेहरू रोड को चौड़ा किए जाने के दौरान भी सर्राफा बाजार की सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी कार्ययोजना बनी थी।

राजस्थान में ‘लेडी सिंघम’ IPS डॉ. प्रीति चंद्रा को मिली आईजी की ज़िम्मेदारी

जयपुर. राजस्थान कैडर की सबसे तेज-तर्रार महिला पुलिस अधिकारियों में शुमार डॉ. प्रीति चंद्रा एक बार फिर एक्शन मोड में लौटने को तैयार हैं। दरअसल, सोमवार देर रात को जारी 21 आईपीएस अफसरों की तबादला सूची में डॉ चंद्रा का नाम भी शामिल है। भजनलाल सरकार ने उन्हें डीआईजी (आर्म्ड बटालियन) से पदोन्नत कर आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) नियुक्त किया है। यह पद पुलिस महकमे में रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिम्मा सीधे तौर पर इसी पद के इर्द-गिर्द घूमता है। क्यों कहा जाता है 'लेडी सिंघम'? प्रीति चंद्रा का नाम सुनते ही चंबल के बीहड़ों के डकैतों से लेकर मानव तस्करी करने वाले गिरोहों तक के पसीने छूट जाते हैं। उन्हें यह खिताब उनके काम और उनकी दबंग छवि के कारण मिला है। बीहड़ों में दबिश: करौली में एसपी रहते हुए उन्होंने चंबल के दुर्गम बीहड़ों में घुसकर डकैतों का पीछा किया। उनके डर से हरिया गुर्जर जैसे 10 हजार के इनामी डकैत और कई अन्य खूंखार अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। देह व्यापार पर प्रहार: बूंदी में तैनाती के दौरान उन्होंने देह व्यापार के नरक में फंसी दर्जनों नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया और गिरोह के सरगनाओं को सलाखों के पीछे भेजा। कौन हैं डॉ. प्रीति चंद्रा? (पारिवारिक पृष्ठभूमि) प्रीति चंद्रा राजस्थान के सीकर जिले के कुंदन गांव की रहने वाली हैं। उनका जन्म 1979 में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनकी सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी मां कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को 'सिंघम' बनाने के लिए समाज के हर दबाव का सामना किया। सफर: पत्रकारिता से पुलिस सेवा तक की 10 बड़ी बातें शिक्षिका से शुरुआत: IPS बनने से पहले प्रीति चंद्रा एक स्कूल शिक्षिका थीं। उन्होंने बीएड और एमफिल की डिग्री हासिल की है। पत्रकार बनने का सपना: जयपुर में एक लोकल केबल टीवी चैनल में न्यूज़ रीडर भी रहीं। उनका शुरुआती सपना एक पत्रकार बनने का था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बिना कोचिंग पहली बार में सफलता: उन्होंने 2008 में बिना किसी भारी-भरकम कोचिंग के, अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा क्रैक की और 255वीं रैंक हासिल की। बीकानेर की पहली महिला एसपी: प्रीति चंद्रा के नाम बीकानेर की पहली महिला पुलिस अधीक्षक (SP) होने का गौरव दर्ज है। चंबल के डकैतों का काल: करौली एसपी के रूप में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई पुरुष अधिकारी नहीं कर पाए— बीहड़ों के डकैत गिरोहों का सफाया। मानव तस्करी के खिलाफ जंग: बूंदी और अलवर में उनकी तैनाती के दौरान मानव तस्करी गिरोहों पर की गई कार्रवाई आज भी मिसाल दी जाती है। भ्रष्टाचार पर लगाम: उन्होंने एसीबी (ACB) कोटा में भी अपनी सेवाएं दीं, जहाँ उन्होंने कई भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा। अधिकारियों की जासूसी का मामला: बीकानेर में तैनाती के दौरान जब एक दरोगा ने उनकी जासूसी करने की कोशिश की, तो उन्होंने उसे तुरंत पकड़वाकर जेल भिजवाया, जिससे विभाग में उनकी धाक जम गई। सादगी और सख्त अनुशासन: वे फील्ड में जितनी सख्त हैं, व्यक्तिगत जीवन में उतनी ही सरल और अनुशासित मानी जाती हैं। मुख्यधारा में वापसी: पिछले कुछ समय से वे तुलनात्मक रूप से शांत पदों (जैसे आर्म्ड बटालियन) पर थीं, लेकिन अब IG लॉ एंड ऑर्डर के रूप में उनकी 'पावरफुल' वापसी हुई है।

कंबल देने से इनकार का मामला गरमाया: हरियाणा-राजस्थान में चर्चा में आए भाजपा के अरबपति नेता

जयपुर एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'सबका साथ, सबका विकास' को अपनी सरकार का मूल मंत्र बताते हैं तो दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी के एक बड़े नेता ने कथित तौर पर धार्मिक आधार पर ऐसा भेदभाव किया जिसकी खूब आलोचना हो रही है। आरोप है कि उन्होंने एक मुस्लिम महिला को कंबल देने से इनकार कर दिया और विडंबना यह है कि ऐसा करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का भी नाम लिया। जिसे सोशल मीडिया पर 'छोटी हरकत' बताकर वायरल किया जा रहा है उसे करने वाले की शख्सियत बहुत बड़ी है। वह ना सिर्फ पूर्व सांसद हैं, बल्कि राजस्थान से हरियाणा तक की राजनीति में पैठ रखते हैं। नाम है- सुखबीर सिंह जौनापुरिया। दरअसल, जौनापुरिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह कुछ मुस्लिम महिलाओं को कंबल बांटने से इनकार करते दिख रहे हैं। पूर्व सांसद ने फेसबुक पर जो जानकारी दी है उसके मुताबिक यह वीडियो राजस्थान के निवाई विधानसभा के करेड़ा बुजुर्ग गांव का है। यहां उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और महिलाओं-बुजुर्गों को कंबल वितरित किए। वह 28 फरवरी को अजमेर में पीएम मोदी की होने जा रही सभा के लिए लोगों को आमंत्रित करने गए थे। नाम पूछा, कंबल देने से इनकार और अलग कर दिया वीडियो में दिख रहा है कि जौनापुरिया कतार में बैठी महिलाओं को कंबल बांट रहे हैं। आरोप है कि महिला के मुस्लिम होने की वजह से उन्होंने उसे कंबल देने से इनकार कर दिया। वह भीड़ में बैठी मुस्लिम महिलाओं को अलग हट जाने को कहते हैं। पूर्व सांसद कहते हैं, 'क्या नाम है तेरा, अलग हट, एकदन हट। मत दे इन्हें। नहीं है, बुरा मानो चाहो भला। बात सुनो, जो आप लोग बैठे हो ना मोदी को गाली देने वाला उन्हें लेने का हक ही नहीं हैं। किसी को बुरा लगे तो लगे, सीधी बात है।' इसके बाद जौनपुरिया मुस्लिम महिलाओं को लाभार्थी महिलाओं की भीड़ से अलग कर देते हैं। कार्यक्रम खत्म होने के बाद कुछ लोगों ने पूर्व सांसद को टोका और कहा कि यह अच्छा नहीं है। सरकार किसी से भेदभाव नहीं करती है तो उन्हें भी नहीं करना चाहिए। जौनापुरिया यह कहते हुए गाड़ी में बैठकर चले गए कि 'बहस की जरूरत नहीं है।' लाइव हिन्दुस्तान ने पूर्व सांसद को कई बार फोन किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। बड़े कारोबारी, हरियाणा से राजस्थान तक पकड़ सुखबीर सिंह जौनापुरिया हरियाणा और राजस्थान में एक बड़ी शख्सियत हैं। ना सिर्फ राजनीति बल्कि कारोबार जगत में उनका बड़ा नाम है। रियल स्टेट कारोबार से जुड़े जौनापुरिया ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी संपत्ति 142 करोड़ रुपये घोषित की थी। वह 2014 से 2024 तक टोंक-सवाई माधोपुर सीट से सांसद रहे हैं। 2014 में उन्होंने मशहूर क्रिकेटर रहे मोहम्मद अजरुद्दीन को हराया था। सांसद चुने जाने से पहले सुखबीर सिंह जौनापुरिया 2004 से 2009 तक हरियाणा की सोहना सीट से विधायक रहे हैं। 2024 में जौनापुरिया लोकसभा चुनाव हार गए थे। फेसबुक पर बुलंद करते हैं 'सबका विकास' वाला नारा मु्स्लिम महिला को कंबल देने से इनकार करने वाले जौनापुरिया सोशल मीडिया पर 'सबका साथ सबका विकास' वाला नारा बुलंद करते दिखते हैं। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट के कवर पेज पर पीएम मोदी के साथ अपनी तस्वीर लगाते हुए यही नारा लिखा है। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी के साथ मुलाकात करते हुए 2023 की एक तस्वीर को पिन किया है, जिसमें वह उन्हें एक किताब भेंट करते हुए दिख रहे हैं। विडंबना है कि इस पोस्ट में पीएम मोदी की बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि किस तरह जब उन्होंने पीएम मोदी को मुस्लिम महिलाओं से राखी बंधवाते हुए तस्वीर दिखाई तो वह बेहद खुश हुए।

राजस्थान में SIR में 31 लाख 36 हजार मतदाताओं के कटे नाम

जयपुर. नई दिल्ली। राजस्थान में निर्वाचन विभाग ने 200 में से 199 विधानसभा सीटों की एसआईआर(विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। एक विधानसभा सीट पर पिछले साल,नवंबर में उप चुनाव होने के कारण एसआईआर का कार्य नहीं हो सका था। 199 सीटों पर जारी एसआईआर की अंतिम सूची में राज्य में 31 लाख 36 हजार 286 मतदाताओं के नाम कटे हैं। पिछले साल,16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट सूची के बाद 10 लाख 48 हजार नाम बढ़े हैं। अब प्रदेश में पांच करोड़ 15 लाख 19 हजार 923 मतदाता हैं,जबकि 27 अक्टूबर,2025 को एसआईआर शुरू होने से पहले पांच करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 मतदाता हैं। कहां से हैं सबसे अधिक नाम एसआईआर के तहत अंतिम मतदाता सूची में सबसे अधिक नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा से 51 हजार 71 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सबसे कम ओंसिया विधानसभा क्षेत्र में सात हजार 512 मतदाताओं के नाम कटे हैं। अंतिम मतदाता सूची में 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या में चार लाख 35 हजार 61 की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि मतदाता सूची में नाम हटाने एवं जोड़ने का काम जारी रहेगा। कैसे जुड़वाएं नाम बूथ स्तर के अधिकारी के समक्ष फॉर्म भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाया जा सकता है। एसआईआर के तहत नाम काटने और कटवाने को लेकर एक लाख छह जार आपत्तियां मिली थी।वहीं नए नाम जुड़वाने को लेकर दस लाख 25 हजार से अधिक आवेदन मिले थे।

बारात आने से पहले जहर खाने से हुई थी दोनों सगी बहनों की मौत

पोकरण. राजस्थान में बारात आने से कुछ घंटे पहले मृत पाई गईं सगी बहनों की मौत जहर खाने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों की मौत का कारण जहर बताया गया है। दोनों की शादी शनिवार को होनी थी। शुक्रवार रात को जब यह घटना घटी, उस समय शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। पुलिस ने सोमवार को बताया कि शुक्रवार सुबह मनई गांव में मृत पाई गई दो बहनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण जहर बताया गया है। मृतक बहनों की पहचान शोभा (25) और विमला (23) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों बहनें एक निजी स्कूल में काम करती थीं। माना जा रहा है कि वे अपने रिश्तों से खुश नहीं थीं। बारात आने के कुछ घंटे पहले ही उनके शव मिले। सूर सागर थाना के एसएचओ हरिश्चंद्र सोलंकी ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने जहर के कारण मौत की पुष्टि की है। घटनास्थल से कोई जहरीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। सोलंकी ने कहा कि शरीर के आंतरिक अंगों के नमूने सुरक्षित रख लिए गए हैं और सेवन किए गए पदार्थ की सटीक पहचान के लिए उन्हें फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। पुलिस ने दोनों बहनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं ताकि चैट, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधि की जांच की जा सके। पुलिस ने उनके पिता दीप सिंह से भी पूछताछ की ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये मौतें आत्महत्या का मामला हैं या पारिवारिक विवाद या बाहरी दबाव जैसे अन्य कारणों से हुई हैं। दोनों बहनों की सगाई पहले उनके मामा के माध्यम से भीनमाल के एक परिवार के सदस्य से हुई थी। आरोप है कि मामा के दबाव में आकर पिता ने वह रिश्ता तोड़ दिया। इसके बाद पोकरण के पास जैमला गांव में दो चचेरे भाइयों से उनका नया रिश्ता तय किया गया। मामा का दावा है कि बहनें इस रिश्ते से नाखुश थीं और शायद इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। इस घटना के बाद शादी की सभी तैयारियां पूरी कर चुके दूल्हों के परिवारों ने तुरंत नए रिश्ते तलाशने शुरू कर दिए। जैमला गांव के सरपंच अमन सिंह के अनुसार, शनिवार को दोनों दूल्हों की शादी जोधपुर के बालेसर और बीकानेर के कोलायत में दूसरी दुल्हनों से हो गई।

निकाय और पंचायत आम चुनाव 2026 से पहले चुनाव मोड में आया प्रशासन

जयपुर. निकाय व पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 से पहले प्रशासन ने ‘चुनावी मोड’ में कदम बढ़ा दिए हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में पंचायत समिति विकास अधिकारियों (बीडीओ) के तबादलों का बड़ा फैसला लिया गया है। आदेश के अनुसार अब कोई भी बीडीओ अपनी गृह पंचायत समिति में पदस्थापित नहीं रहेगा। साथ ही जो अधिकारी पिछले चार वर्षों में तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही जिला, नगर पालिका या पंचायत समिति क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा। अतिरिक्त कार्यभार भी होगा समाप्त जिन अधिकारियों को लंबे समय से विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है और वे तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही क्षेत्र में कार्यरत हैं, उनका अतिरिक्त कार्यभार भी तुरंत हटाया जाएगा। विभाग का उद्देश्य है कि चुनाव के दौरान कोई भी अधिकारी अत्यधिक प्रभावशाली स्थिति में न रहे। जिला परिषद सीईओ पर जिम्मेदारी ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में पदस्थापित बीडीओ की सूची तैयार कर जांच करें। तीन दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। रिपोर्ट में देरी होने पर संबंधित सीईओ की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जयपुर ग्रामीण में दिखेगा असर पंचायत समिति बस्सी सहित जयपुर ग्रामीण क्षेत्र की बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़, तूंगा, आंधी और कोटखावदा पंचायत समितियों में वर्षों से जमे अधिकारियों पर इस आदेश का सीधा असर पड़ेगा। इनका कहना है… राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह कदम उठाया गया है। चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से कराने के लिए निर्धारित अवधि से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों को हटाया जा रहा है। आदेशों की समयबद्ध पालना सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। – डॉ. जोगराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग

शिक्षा मंत्री के बयान से गरमाया सदन, विज्ञान संकाय को लेकर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

जयपुर राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल में सरकारी स्कूलों में विज्ञान संकाय खोलने और शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े सवाल पर जोरदार हंगामा हुआ। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से जब संबंधित आंकड़े मांगे गए तो उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाने शुरू कर दिए, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार रिक्त पदों को भर रही है और आगामी सेवानिवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व योजना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने स्कूल तो खोले, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की। स्पीकर का हस्तक्षेप और सवालों की पुनरावृत्ति स्थिति तीखी होने पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने हस्तक्षेप करते हुए मंत्री से मूल प्रश्न का उत्तर देने को कहा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल दोहराते हुए पूछा कि पिछले दो वर्षों में कितने विज्ञान संकाय खोले गए और कितने पदों पर नियुक्तियां की गईं। इस दौरान मंत्री और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्री ने पूर्व सरकार पर तबादलों में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए, जिस पर टीकाराम जूली ने कहा कि मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं और तथ्यों के आधार पर जवाब दें। बाद में मंत्री ने बताया कि एक बार 3880 और दूसरी बार 970 पद स्वीकृत किए गए।   दिव्यांग स्कूटी वितरण पर भी टकराव प्रश्नकाल के दौरान दिव्यांगों को स्कूटी वितरण से जुड़े सवाल पर भी बहस तेज हो गई। भाजपा विधायक के पूरक प्रश्न के उत्तर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने पिछली सरकार के समय हुई देरी का उल्लेख किया और समाधान का आश्वासन दिया। जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पूरक सवाल पूछने के लिए खड़े हुए तो सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने टोका, जिस पर जूली ने आपत्ति जताई और स्पीकर से व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की।   टिप्पणी पर बढ़ा विवाद इसके बाद अविनाश गहलोत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद और बढ़ गया। मंत्री ने तंज करते हुए कहा कि सदन में पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी के कारण विपक्ष में प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। इस पर टीकाराम जूली ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि राजनीतिक टिप्पणियों के बजाय सवाल का सीधा जवाब दिया जाए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बीच प्रश्नकाल की कार्यवाही जारी रही।

Operation Sindoor के बाद सबसे बड़े युद्धाभ्यास में गरजेंगे टैंक !

बीकानेर/जैसलमेर. राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना की 'पश्चिमी कमान' (Western Command) अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवा रही है। दो सप्ताह तक चलने वाले इस उच्च तीव्रता वाले युद्ध अभ्यास 'खड़ग शक्ति 2026' में सेना की प्रसिद्ध 'खड़ग कोर' (स्ट्राइक कोर) अपनी पूर्ण युद्धक क्षमता के साथ भाग ले रही है। आज सोमवार 23 फरवरी को जब महाजन रेंज में तोपें गरजेंगी और टैंक आग उगलेंगे, तो यह साफ़ हो जाएगा कि भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध के बजाय 'टेक्नोलॉजी ड्रिवन' ऑपरेशंस पर फोकस कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद नया इतिहास सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह युद्धाभ्यास 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पश्चिमी कमान का पहला पूर्ण-स्तरीय कॉम्बैट ड्रिल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय सेना के बदलते हुए 'वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' (युद्ध सिद्धांत) का प्रदर्शन है। अब सेना भारी सैनिकों की तैनाती के बजाय कम समय में, सटीक मारक क्षमता और आधुनिक उपकरणों के जरिए दुश्मन को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है। नाइट फायरिंग: रात के अंधेरे में भी नहीं बचेगा दुश्मन 'खड़ग शक्ति' का एक प्रमुख हिस्सा 'नाइट कॉम्बैट' है। सोमवार की रात को सेना की बख्तरबंद (Armoured) और मशीनीकृत (Mechanized) इकाइयां अंधेरे में काल्पनिक ठिकानों पर सटीक गोलाबारी का अभ्यास करेंगी। वहीं थर्मल इमेजर और नाइट विजन उपकरणों से लैस टी-90 जैसे भीष्म टैंक रात के सन्नाटे को अपनी गूँज से भर देंगे। हेलीबोर्न ऑपरेशंस और एयर सपोर्ट अभ्यास के दौरान थल सेना और वायु सेना के बीच जबरदस्त समन्वय देखने को मिलेगा। हमलावर हेलीकॉप्टर दिन के उजाले में 'हेलीबोर्न ऑपरेशंस' को अंजाम देंगे, जिसमें सैनिकों को दुश्मन के पीछे के ठिकानों पर उतारा जाएगा। इसी तरह से तोपखाना (Artillery) और बख्तरबंद रेजिमेंट के साथ मिलकर ये हेलीकॉप्टर सघन हमले का भी प्रदर्शन करेंगे। उच्च सैन्य नेतृत्व की निगरानी इस युद्धाभ्यास की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि थल सेनाध्यक्ष और आर्मी कमांडर सहित कई उच्च सैन्य अधिकारी खुद महाजन फायरिंग रेंज पहुँचकर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। पश्चिमी सीमा पर संभावित खतरों और पाकिस्तान के साथ लगने वाले बॉर्डर के पास इस तरह का युद्धाभ्यास भारत की सामरिक तैयारियों का सीधा संदेश है।

वसुंधरा राजे अचानक भावुक हुईं और फिर छलक पड़े आंसू

झालावाड़/बकानी. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ के दौरे पर थीं। बकानी के खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जब वे सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा के तीसरे चरण के शुभारंभ समारोह के मंच पर पहुँची, तो एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने उन्हें भावुक कर दिया। कविता सुन मंच पर रो पड़ीं 'महारानी' समारोह के दौरान बकानी की एक युवती अदिति शर्मा ने वसुंधरा राजे के सम्मान में एक कविता का पाठ किया। इस कविता में राजे के माता-पिता (राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजीराव सिंधिया), उनके दिवंगत भाई (माधवराव सिंधिया), उनके शासन करने के तरीके और उनकी जनकल्याणकारी योजनाओं का मार्मिक उल्लेख था। अपने माता-पिता और भाई का नाम सुनकर राजे स्वयं को रोक नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। 'मैं आंसू रोक नहीं पाई' कार्यक्रम के बाद राजे ने इस वाकये का ज़िक्र सोशल मीडिया पोस्ट पर भी किया। इसमें उन्होंने लिखा, 'तीसरे चरण की इस पदयात्रा के अवसर पर अदिति शर्मा ने एक कविता पढ़ी, जिसमें मेरे संपूर्ण परिवार, मेरे शासन करने के तरीके और योजनाओं के बारे में उल्लेख था। माँ राजमाता विजय राजे सिंधिया जी, पिता श्रीमंत जीवाजी राव सिंधिया जी और भाई श्रीमंत माधव राव सिंधिया जी पर लिखी कविता सुन अपने आँसू रोक नहीं पाई। मेरे जीवन में इन तीनों के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकती।आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है। मेरे माता-पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं है। जब भी उनकी याद आती हैं, तब मैं लोगों से मिल रहे प्यार में उनको खोजने लगती हूँ और अहसास करती हूँ कि इन्हीं में मेरे खोए हुए परिवारजन है।' 'जनता का प्यार मिलेगा तो समय बदलेगा' भावुकता के बीच वसुंधरा राजे ने जनता को संबोधित करते हुए एक गहरा राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी बहुत अच्छा समय होता है और कभी बहुत खराब। राजे ने जोर देकर कहा, "धन-दौलत ही सब कुछ नहीं होता, जनता का प्यार सबसे अनमोल है। अगर जनता का प्यार मिलेगा तो समय जरूर बदलेगा।" राजे का यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिसमें कहा जा रहा था कि चुनाव न होने के बावजूद इस यात्रा का क्या औचित्य है। राजे ने स्पष्ट किया कि वे इस यात्रा के माध्यम से कुछ लेने नहीं, बल्कि केवल जनता का प्यार और आशीर्वाद लेने आई हैं। किसानों के दर्द पर मरहम: फसल खराबे का मुद्दा जनसंवाद यात्रा के दौरान केवल भावनाएं ही नहीं, बल्कि किसानों की समस्याएं भी प्रमुखता से उठीं। पिछले दो दिनों में हुई तेज हवाओं और बेमौसम बारिश के कारण अफीम सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। मुआवजे की मांग: किसानों ने राजे और सांसद दुष्यंत सिंह के सामने विशेष गिरदावरी और शीघ्र मुआवजे की मांग रखी। भरोसा: सांसद दुष्यंत सिंह ने किसानों को आश्वस्त किया कि वे सरकार से बात कर उचित मुआवजा दिलवाने का प्रयास करेंगे। झालावाड़: राजे का अभेद्य दुर्ग और परिवार पूर्व सीएम ने एक बार फिर दोहराया कि पूरा झालावाड़ जिला उनका परिवार है। उन्होंने कहा कि इस चार दिवसीय यात्रा के दौरान जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका त्वरित समाधान किया जाएगा। इस अवसर पर विधायक गोविंद रानीपुरिया, पूर्व विधायक नरेंद्र नागर और जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।