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Terror Module Exposed: ISIS और अल कायदा कनेक्शन सामने, पाकिस्तान में मिल रही ट्रेनिंग

जोधपुर. आंध्र प्रदेश पुलिस ने देश के अलग-अलग राज्यों से 12 ऐसे लोगों को पकड़ा है, जिन पर अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआइएस) और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और सीरिया (आइएसआइएस) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली और आंध्र प्रदेश पुलिस ने संयुक्त रूप से इस नेटवर्क का खुलासा किया है। इसमें जोधपुर का जीशान भी शामिल है। खुफिया एजेंसियां अलर्ट आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद जोधपुर की खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। जीशान के संपर्क में रहे नागौरी गेट निवासी हसन नामक युवक की भी तलाश की जा रही है। जीशान के पकड़े जाने के बाद से ही हसन फरार है और उसका मोबाइल भी बंद बताया जा रहा है। सदर बाजार थानाप्रभारी माणकराम विश्नोई ने जानकारी दी कि आरोपी के संपर्क में आए लोगों पर लगातार नजर रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है। आंध्र प्रदेश पुलिस के एसीपी रामचन्द्रर राव के अनुसार, आंध्र प्रदेश और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आंध्र प्रदेश के मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मिर्जा सोहेल बेग और मोहम्मद दानिश, बिहार के शादमान दिलखुश और अजमानुल्लाह खान, दिल्ली के रोहिणी निवासी लकी अहमद, पश्चिम बंगाल के मीर आसिफ अली, राजस्थान के जीशान, कर्नाटक के अब्दुल सलाम, महाराष्ट्र के शाहरुख खान और शियाज उर रहमान तथा तेलंगाना की सैदा बेगम को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और उनके नेटवर्क की विस्तृत जांच जारी है। गेमिंग एप के जरिए ग्रुप में हुए शामिल प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक गेमिंग ऐप के जरिए एक्यूआइएस और आइएसआइएस के विदेशी संचालकों से संपर्क स्थापित किया और धीरे-धीरे उनके नेटवर्क से जुड़ गए। यह भी आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय ध्वज को आइएसआइएस के झंडे से बदलकर पोस्ट किया। इसके साथ ही उन्होंने आइएसआइएस की सराहना की और भारत को इस्लामिक स्टेट में बदलने जैसी बातें भी साझा कीं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि वे एक महीने के भीतर ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे थे। जिहादी विचार किया सोशल मीडिया पर वायरल इस मामले में विजयवाड़ा के तीन युवकों को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि इन युवकों ने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और जिहाद के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ‘अल मलिक इस्लामिक यूथ’ नामक एक सोशल मीडिया ग्रुप बनाया था। आंध्र प्रदेश पुलिस के अनुसार, वे कथित तौर पर गजवा-ए-हिंद की अवधारणा पर काम कर रहे थे और अलग-अलग राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाने में लगे हुए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कम पढ़े-लिखे लोगों को भी निशाना बनाया गया और उनका ब्रेनवॉश किया गया। आरोपियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर जिहाद से जुड़ी गतिविधियों और विचारों को फैलाने का प्रयास किया। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।

बाड़मेर के लाल और प्रयागराज की बेटी की शाही शादी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज होंगे शामिल

केके बिश्नोई यूपी कैडर के 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नजदीकी माने जाते हैं. वहीं अंशिका वर्मा 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. केके बिश्ननोई की शादी की रस्में शुरू उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात दो चर्चित आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी अब शादी में बदलने जा रही है. काफी दिन से चर्चा के बाद अब दोनों शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं. संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली साउथ की पुलिस अधीक्षक अंशिका वर्मा कल 29 मार्च को जोधपुर में पारंपरिक रीति-रिवाज से सात फेरे लेंगे. केके बिश्नोई यूपी कैडर के 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नजदीकी माने जाते हैं. वहीं अंशिका वर्मा 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. दोनों की मुलाकात गोरखपुर पोस्टिंग के दौरान हुई थी. शादी की तैयारियां बिश्नोई के पैतृक गांव बाड़मेर के धोरीमना में जोरों पर हैं. यहां 27 मार्च से विवाह रस्में शुरू हो चुकी हैं. घी पिलाने, हल्दी और संगीत कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ आयोजित हो रहे हैं. 30 मार्च को जोधपुर में रिसेप्शन शनिवार धोरीमना में बारात सभा होगी और 29 मार्च को बारात धोरीमन्ना से जोधपुर के लिए रवाना होगी जहां विवाह संस्कार संपन्न होगा. 30 मार्च को जोधपुर के लहरिया रिसोर्ट में भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया जाएगा. इस शाही शादी में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई दिग्गज नेता तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वीवीआईपी मेहमानों को आमंत्रित गया है. प्रयागराज की रहने वाली हैं अंशिका केके बिश्नोई बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव के मूल निवासी हैं जबकि अंशिका वर्मा प्रयागराज की रहने वाली हैं. दोनों अधिकारियों की 25 मार्च को संभल में सगाई की रस्म हुई थी. स्थानीय स्तर पर इस जोड़ी की शादी को लेकर काफी उत्साह है और शुभचिंतक उन्हें नई जिंदगी की शुभकामनाएं दे रहे हैं.

Toll Hike Alert: जयपुर हाईवे पर 1 अप्रैल से बढ़ेगा शुल्क, पास धारकों पर भी असर

जयपुर. नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जयपुर से अलग-अलग शहरों के लिए जाने वाले नेशनल हाईवे की टोल दरों में बढ़ोतरी की है। ये बढ़ोतरी 1 अप्रेल से लागू होगी जिसके बाद जयपुर में रिंग रोड, जयपुर-किशनगढ़, जयपुर-सीकर और जयपुर दौसा हाईवे के टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को 5 से 20 रुपए तक अधिक शुल्क चुकाना होगा। हालांकि टोल बढ़ोतरी में LMV श्रेणी के वाहनों को छूट दी गई है। एलएमवी वाहनों को राहत NHAI की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, इन सभी टोल बूथ पर कार, SUV के लिए टोल दरों में कोई बढ़ोतरी फिलहाल नहीं की गई है। हल्के वाहनों पर टोल टैक्स पुरानी दरों से लगेगा। टोल शुल्क में अधिकांश बढ़ोतरी कॉमर्शियल या उससे बड़े भारी वाहनों के लिए हुई है। 5 से लेकर 20 रुपए तक ज्यादा टोल शुल्क एनएचएआइ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, टोल शुल्क में बढ़ोतरी 5 से लेकर 20 रुपए तक की गई है। रिंग रोड पर प्राइवेट के अलावा हल्के कॉमर्शियल गाड़ियों के लिए बढ़ोतरी नहीं की गई है। यहां केवल भारी कॉमर्शियल गाड़ियों के लिए टोल रेटों में 5 से लेकर 20 रुपए तक बढ़ोतरी की गई है। जयपुर के इन टोल बूथ पर बढ़ाया शुल्क ​NHAI से जारी नोटिफिकेशन में जयपुर से दिल्ली जाने वाले पुराने हाईवे पर दौलतपुरा, मनोहरपुर और शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर, जबकि जयपुर-किशनगढ़ हाईवे पर ठीकरिया, बड़गांव, रिंग रोड पर सीतारामपुरा, हिंगोनिया और जयपुर-सीकर हाईवे पर टाटियावास टोल बूथ पर बढ़ोतरी की है। सालाना पास भी 75 रुपए महंगा हाईवे पर एलएमवी वाहनों के टोल शुल्क में NHAI ने भले ही बढ़ोतरी नहीं की है लेकिन, कार,एसयूवी के लिए बनने वाले सालाना पास की कीमतों में 75 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। टोल की यह नई दरें भी आगामी एक अप्रेल से ही लागू होंगी। अभी सालाना पास 3 हजार रुपए में बनता है, जिसमें एक साल या 200 टोल बूथ पार करने की लिमिट होती है। ऐसे तय होती है टोल रेट हाईवे पर टोल टैक्स की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय की जाती हैं। हर साल के अंत में इंडेक्स का मूल्यांकन कर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नए रेट जारी करता है। टोल की राशि सड़क की लंबाई और उस पर बने इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे फ्लाईओवर, अंडरपास, टनल आदि के आधार पर भी तय होती हैं। जिस हाईवे पर ज्यादा सुविधाएं होती हैं, वहां टोल भी ज्यादा लगता है।

होटल और रेस्तरां को अब 60 प्रतिशत गैस आपूर्ति पंजीकरण कराना हुआ अनिवार्य

राजस्थान राजस्थान में एलपीजी के कमर्शियल सिलेंडरों के वितरण को लेकर सरकार ने नई नीति तय कर दी है। इसमें शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को 100 प्रतिशत, होटल-रेस्तरां व डेयरियों को 60 प्रतिशत एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी।  खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने राज्य में व्यवसायिक एलपीजी गैस के आवंटन के लिए नई वितरण नीति जारी की है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण रुकी आपूर्ति को अब चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा रहा है और यह पहले की स्थिति के लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।जानिए किसे कितनी प्राथमिकता मिलेगी प्रवासी श्रमिकों और फूड कार्ट्स को छोटे सिलेंडर वहीं प्रवासी श्रमिकों और फूड कार्ट्स को जरूरत के अनुसार छोटे सिलेंडर दिए जाएंगे।नीति के अनुसार व्यवसायिक उपभोक्ताओं को एलपीजी प्राप्त करने के लिए संबंधित ऑयल गैस कंपनी के वितरक के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण गैस नहीं मिलेगी। जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण बिना नहीं मिलेगा सिलेंडर नीति के अनुसार व्यवसायिक उपभोक्ताओं को एलपीजी प्राप्त करने के लिए संबंधित ऑयल गैस कंपनी के वितरक के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण गैस नहीं मिलेगी। जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। आवंटन पिछले एक साल की औसत खपत के आधार पर एलपीजी आवंटन अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक की औसत खपत के आधार पर तय किया जाएगा। साथ ही, जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां स्थानीय जरूरत के अनुसार अतिरिक्त आवंटन का निर्णय ले सकेंगी।खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि नई नीति से वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी तथा प्रभावित उद्योग-धंधों को राहत मिलेगी।  

मार्च के अंत में सक्रिय हुआ नया वेदर सिस्टम और राजस्थान के कई संभागों में 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं

राजस्थान राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम बदला है। कई जिलों में बारिश, आंधी और तेज हवाएं चल रही हैं। इससे गर्मी से राहत मिली, लेकिन गेहूं-सरसों जैसी रबी फसलों पर नुकसान का खतरा बढ़ गया है। राजस्थान में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। फरवरी और मार्च की शुरुआत में जहां तेज धूप और शुष्क हवाओं ने लोगों को परेशान कर रखा था, वहीं अब उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी है। इससे गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। रबी फसलों पर बढ़ा खतरा 12 मार्च के बाद लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह बदलाव आमजन के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन खेतों में पककर तैयार खड़ी रबी फसलें जैसे गेहूं और सरसों अब जोखिम में हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान का हाल बीते 24 घंटों में हल्की बारिश का असर देखने को मिला। इस दौरान कोटा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सिरोही में न्यूनतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे वहां अपेक्षाकृत ठंडक महसूस की गई। अन्य प्रमुख शहरों में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जिसमें जयपुर, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहर शामिल हैं। अगले 48 घंटे अहम मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार 28 से 30 मार्च के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में आंधी और बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार 28 मार्च को  जोधपुर, बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में दोपहर बाद आंधी और हल्की बारिश हो सकती है। वहीं 29 से 30 मार्च तक जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और कोटा संभाग में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। राहत और चुनौती साथ-साथ मौसम में आई इस नरमी ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण बन गया है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख फसलों की स्थिति तय करेगा।

एशिया के मैनचेस्टर में कच्चे माल की भारी किल्लत के साथ ही रेड सी रूट महंगा होने से करोड़ों के ऑर्डर अटके

राजस्थान राजस्थान की कपड़ा नगरी भीलवाड़ा, जिसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता है, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है. ईरान-इजरायल युद्ध का सीधा असर यहां की करीब 80 से 90 हजार करोड़ की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर दिखने लगा है. करीब 100 साल पुरानी इस इंडस्ट्री में पहली बार इतने खराब हालात बने हैं. उद्योगपतियों के पास अब सिर्फ एक से दो सप्ताह का कच्चा माल ही बचा है, जिससे उत्पादन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. महंगा हुआ कच्चा माल, बढ़ी उत्पादन लागत भीलवाड़ा में करीब 400 वीविंग यूनिट्स और 18 स्पिनिंग मिल्स हैं, जहां हर साल लगभग 125 करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता है. यहां का सालाना कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है. लेकिन युद्ध के कारण पॉलिएस्टर फाइबर, केमिकल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है. रेड सी रूट महंगा होने से कंटेनर फ्रेट 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गया है, जिससे यार्न की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. कपड़े की लागत प्रति मीटर 12 से 14 रुपये तक बढ़ चुकी है. गैस संकट से प्रोसेस हाउस ठप होने की कगार पर भीलवाड़ा सहित पाली, बालोतरा और बाड़मेर के प्रोसेस हाउस गैस की कमी से बुरी तरह प्रभावित हैं. एक प्रोसेस हाउस में रोजाना करीब 250 किलो गैस की जरूरत होती है, जबकि कुल खपत 3 लाख किलो प्रतिदिन है. गैस की कमी के चलते 25 से ज्यादा प्रोसेस हाउस का काम लगभग ठप हो चुका है और आगे 80 प्रतिशत वीविंग यूनिट्स बंद होने का खतरा है. निर्यात पर भी पड़ा असर, हजारों करोड़ के ऑर्डर अटके मिडिल ईस्ट और यूरोप में निर्यात पर भी युद्ध का असर साफ दिख रहा है. करीब 5 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर अटक गए हैं, जबकि 800 से 1000 करोड़ रुपये का कारोबार पहले ही प्रभावित हो चुका है. हर साल अप्रैल से जून के बीच 5 से 6 करोड़ मीटर कपड़ा मिडिल ईस्ट भेजा जाता है, जो अब संकट में है. वहीं भेजे गए माल का भुगतान भी अटका हुआ है. लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा राजस्थान में 1800 से अधिक टेक्सटाइल यूनिट्स में करीब 18 से 20 लाख लोग काम करते हैं. भीलवाड़ा की 100 से ज्यादा यूनिट्स अब शिफ्ट कम करने की तैयारी में हैं. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो बड़े पैमाने पर रोजगार पर असर पड़ सकता है.

Jaipur Mega Stadium: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड निर्माणाधीन, गहलोत के तीखे आरोप

जयपुर. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान भजनलाल सरकार के खिलाफ अपना हमला तेज कर दिया है। गहलोत ने अपनी चर्चित 'इंतज़ारशास्त्र' सीरीज के छठे अध्याय में जयपुर के चौंप में बन रहे विश्व के तीसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम की बदहाली का मुद्दा उठाया है। एक वीडियो संदेश के साथ गहलोत ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक द्वेष के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह प्रोजेक्ट अब 'ठंडे बस्ते' में चला गया है। जो विश्व रिकॉर्ड बनना था, वो अब 'लापरवाही' का शिकार अशोक गहलोत ने अपनी पोस्ट में दर्द साझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस सरकार ने राजस्थान को वैश्विक खेल मानचित्र पर लाने के लिए जयपुर के पास चौंप गांव में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने की आधारशिला रखी थी। इस स्टेडियम का काम 2024 तक पूरा होना था, लेकिन गहलोत का दावा है कि 36 महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जनता के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद खिलाड़ियों को अपनी ही धरती पर अंतरराष्ट्रीय मैच देखने और खेलने का मौका क्यों नहीं मिल रहा? RCA चुनाव और क्रिकेट की राजनीति पर कटाक्ष पूर्व मुख्यमंत्री ने केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि खेल प्रशासन पर भी प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव पिछले दो वर्षों से नहीं हो सके हैं। गहलोत के अनुसार, प्रशासनिक शून्यता और सरकार की अरुचि के कारण राजस्थान में क्रिकेट का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। खिलाड़ियों के सपनों से खिलवाड़ बंद करे सरकार' गहलोत ने एक वीडियो साझा किया है जिसमें स्टेडियम की वर्तमान स्थिति (कथित रूप से रुका हुआ काम) को दिखाया गया है। उन्होंने भजनलाल सरकार से मार्मिक अपील करते हुए कहा: "राजनीतिक द्वेष छोड़िए, खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़ बंद कीजिए!" क्या है 'इंतज़ारशास्त्र' सीरीज? पिछले कुछ हफ्तों से अशोक गहलोत सोशल मीडिया पर एक विशेष सीरीज चला रहे हैं जिसे उन्होंने 'इंतज़ारशास्त्र' नाम दिया है। उद्देश्य: इस सीरीज के माध्यम से वे उन प्रोजेक्ट्स को उजागर कर रहे हैं जो उनकी सरकार के समय शुरू हुए थे लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कथित तौर पर ठप्प पड़े हैं। खेल-विरोधी सोच बनाम विकास का दावा गहलोत का आरोप है कि भाजपा सरकार केवल नाम बदलने या पुराने प्रोजेक्ट्स को रोकने में लगी है। उन्होंने 'इंतज़ारशास्त्र' के शीर्षक में सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया— ''खेल-विरोधी सोच ने डुबोया राजस्थान का नाम!''। इस बयान ने राजस्थान के खेल हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई बजट या मंशा की कमी के कारण चौंप स्टेडियम का काम रुका है?

पहली बार पूरी तरह हाईटेक होगी जनगणना की प्रक्रिया और झालावाड़ की 12 तहसीलों सहित 1619 गांवों में शुरू होगा महाअभियान

झालावाड़ झालावाड़ जिले में करीब 15 साल बाद जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस बार जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी और विशेष बात यह है कि पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। अब तक की जनगणनाएं ऑफलाइन होती रही हैं, लेकिन इस बार मोबाइल एप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित की जाएगी।   4000 कार्मिक जुटेंगे, गांव और शहरी वार्ड दोनों कवर होंगे जिले के सांख्यिकी विभाग के अनुसार इस जनगणना में करीब 4000 प्रगणक (कर्मी) लगाए जाएंगे। ये कर्मी जिले के 1619 गांव और शहरी क्षेत्र के 240 वार्ड में घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार का विस्तृत विवरण जुटाएंगे। जिले की 12 तहसीलों के गांवों और आठ नगर निकायों के वार्डों को इसमें शामिल किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी तहसीलदार और नगर निकायों के ईओ स्तर के अधिकारी करेंगे।   समय-सारिणी और प्रश्नों का दायरा तय जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी, जिसमें पहला चरण 1 मई से 15 जून तक और दूसरा चरण 1 मई से 15 मई तक चलेगा। पहले चरण में मकान की स्थिति, पानी, बिजली, नल, शौचालय, वेस्ट वाटर लाइन जैसी सुविधाओं के साथ परिवार के सदस्यों की संख्या सहित करीब 34 प्रश्नों की जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से एकत्रित की जाएगी।   प्रशिक्षण की व्यापक तैयारी, अप्रैल में होगा आयोजन जनगणना से पहले प्रगणकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण का कार्य अप्रैल माह में किया जाएगा। मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण पहले जयपुर में आयोजित होगा, इसके बाद झालावाड़ के 56 फील्ड ट्रेनर को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर जिले के 4000 कर्मियों को जनगणना की बारीकियों से अवगत कराएंगे। 2001 और 2011 के आंकड़ों से मिलेगा तुलना का आधार विभाग के अनुसार जिले में 2001 की जनगणना में जनसंख्या 11 लाख 80 हजार 323 दर्ज की गई थी। वहीं 2011 में यह बढ़कर 14 लाख 11 हजार 129 हो गई थी, जिसमें 11 लाख 81 हजार 835 ग्रामीण और 2 लाख 29 हजार 291 शहरी आबादी शामिल थी। अब नई जनगणना से ताजा आंकड़े सामने आएंगे।   मोबाइल एप से आमजन भी कर सकेंगे सहयोग इस बार जनगणना के लिए एक मोबाइल एप लॉन्च किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्रगणक डेटा एकत्रित करेंगे। आमजन भी इस एप के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। हालांकि, एप के माध्यम से दी गई जानकारी का सत्यापन करने के लिए प्रगणक प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर विवरण की पुष्टि करेंगे।

ब्रज के दंगल में पहलवानों के दांव और मंत्रियों के बीच दिखा अपनापन सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

राजस्थान राजस्थान की राजनीति में अक्सर खींचतान और बयानों के तीर चलते दिखते हैं, लेकिन शुक्रवार को डीग के ब्रज नगर में जो हुआ, उसने सबका दिल जीत लिया। मौका था नगर पालिका द्वारा आयोजित सात दिवसीय मेले का, जहां दो कद्दावर मंत्रियों के बीच ऐसा दोस्ताना दिखा कि वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे। दरअसल, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने औपचारिकताएं किनारे कर ब्रज की शान जलेबा से UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा का मुंह मीठा कराया। जब सर्किट हाउस में घुली मिठास बता दें कि मेले में आयोजित कुश्ती दंगल के मुख्य अतिथि UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा थे। उनके स्वागत के लिए सर्किट हाउस में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम पहले से ही मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि जैसे ही दोनों नेता मिले, माहौल पूरी तरह से पारिवारिक हो गया। बेढम साहब ने बिना किसी प्रोटोकॉल की परवाह किए, ब्रज का मशहूर विशाल जलेबा अपने हाथों से तोड़कर खर्रा जी को खिलाया। देसी घी से लबालब इस मीठे मिलन को देखकर वहां मौजूद लोग कहने लगे- इसे कहते हैं ब्रज की मेहमाननवाजी। क्या है ये जलेबा जिसकी हो रही चर्चा? अक्सर लोग जलेबी के बारे में जानते हैं, लेकिन ब्रज और हरियाणा के बॉर्डर पर जलेबा का अपना ही स्वैग है। इसे जलेबियों का राजा कहा जाता है। इसका आकार साधारण जलेबी से कई गुना बड़ा होता है। एक अकेले जलेबे का वजन 250 ग्राम से लेकर आधा किलो तक होता है। शुद्ध देसी घी और चाशनी में डूबा यह जलेबा ब्रज क्षेत्र की खास पहचान है। गौरतलब है कि रामनवमी के मौके पर आयोजित इस दंगल में राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के दिग्गज पहलवानों ने भी दांव-पेच दिखाए। अखाड़े की मिट्टी में जहां पहलवान अपनी ताकत आजमा रहे थे, वहीं अखाड़े के बाहर मंत्रियों के बीच दिखे इस प्रेम ने लोगों का ध्यान खींच लिया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक और जिले के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। प्रशासनिक मुस्तैदी और जनता का उत्साह मंत्रियों के इस जलेबा मिलन की चर्चा दंगल से ज्यादा पूरे शहर में रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेताओं के बीच ऐसा अपनापन कम ही देखने को मिलता है। इस दौरान मंत्रियों ने जिले के विकास कार्यों को लेकर भी अनौपचारिक चर्चा की।

रेगिस्तान में नजर आया कैराकल, जैसलमेर बना वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र

जैसलमेर राजस्थान के पश्चिमी छोर पर स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे शुष्क मरुस्थलीय इलाकों में एक बेहद अहम वन्यजीव खोज सामने आई है। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ वन्य जीव कैराकल की मौजूदगी ने वन विभाग और वैज्ञानिकों में नई उम्मीद जगा दी है। जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र में इस प्रजाति की लगातार गतिविधियों के प्रमाण मिलने से यह इलाका अब संरक्षण के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर का यह पूरा क्षेत्र शुष्क मरुस्थलीय घासभूमि (डेजर्ट ग्रासलैंड) का हिस्सा है, जो कैराकल के प्राकृतिक आवास के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यहां खुले मैदान, कम वनस्पति और छोटे शिकार जीवों की उपलब्धता इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से यह प्रजाति मानव गतिविधियों और आवास खत्म होने के कारण नजर नहीं आ रही थी, लेकिन अब इसके फिर से दिखने से संकेत मिलते हैं कि यह क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। निगरानी के लिए हाईटेक इंतजाम इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग और Wildlife Institute of India ने मिलकर संरक्षण प्रयासों को तेज कर दिया है। क्षेत्र में कुल 9 मोशन सेंसिंग कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जो दिन-रात गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। इन कैमरों से मिले फुटेज ने कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं, जिनमें कैराकल की आवाजाही, उसके शिकार के तरीके और रहने के पैटर्न को समझने में मदद मिल रही है। रेडियो कॉलर से हो रही ट्रैकिंग वन विभाग ने दो महीने पहले एक नर कैराकल को पकड़कर उसे रेडियो कॉलर लगाया और फिर सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया। इसके बाद उसकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। रेडियो कॉलर से प्राप्त डेटा के अनुसार, यह कैराकल भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे विस्तृत क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस प्रजाति का आवास सीमाओं से परे फैला हुआ है, जो संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को भी दर्शाता है। तीन कैराकल की पुष्टि, बढ़ी उम्मीद अब तक मिले कैमरा ट्रैप फुटेज में रेडियो कॉलर लगे कैराकल के अलावा एक अन्य नर और एक मादा कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस तरह क्षेत्र में कुल तीन कैराकल के होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा एक गुफा में दो नर कैराकल के एक साथ रहने के संकेत भी मिले हैं, जो इस प्रजाति के व्यवहार को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर कैराकल एकाकी जीवन जीते हैं, ऐसे में यह व्यवहार शोध का विषय बन गया है। फूड चेन की भी हो रही पहचान निगरानी के दौरान वैज्ञानिकों ने कैराकल की फूड चेन को भी आंशिक रूप से पहचान लिया है। यह जीव मुख्यतः छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों का शिकार करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इस प्रजाति के टिके रहने का एक बड़ा कारण हो सकती है। संरक्षण के लिए बढ़ी सक्रियता वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं और कैराकल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को भी इस दुर्लभ जीव के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो।