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राजस्थान के 11 जिलों में स्कूल बंद, सड़कों पर आवागमन ठप

जयपुर राज्य के अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कोटा, सवाई माधोपुर और बूंदी जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई गांव टापू जैसे बन गए हैं और संपर्क कट गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में NDRF, SDRF और सेना की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। मौसम विभाग ने शनिवार को 11 जिलों में तेज बरसात का अलर्ट जारी किया है। इनमें 2 जिलों (भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़) में भारी बरसात का अलर्ट है। आज इन जिलों में स्कूलों की छुट्टी बारिश के चलते चित्तौड़गढ़, बारां, टोंक, सवाई माधोपुर, झालावाड़, कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, भीलवाड़ा में शनिवार को स्कूलों की छुट्टी रही। बारां से मांगरोल का सड़क संपर्क टूटा बारां में शुक्रवार सुबह से ही तेज बारिश हो रही है। बारिश के चलते वहां जबरदस्त जल भराव देखने को मिल रहा है। बाणगंगा नदी उफान पर है। इसके चलते  मांगरोल मार्ग पर खेड़ली गांव के समीप बापुलिया पर डेढ़ से दो फुट पानी बहने से आवागमन ठप हो गया है। बूंदी में बाढ़ के हालात, कई गांव टापू बने कोटा, सवाई माधोपुर, बूंदी में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। कई गांव टापू बन गए हैं। प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ सेना की मदद ली गई। बूंदी के नैनवां में 9 घंटे में 13 इंच पानी बरसा। जयपुर में शनिवार सुबह तेज बारिश हुई। मौसम विभाग ने शनिवार को 11 जिलों में तेज बरसात का अलर्ट जारी किया है। इनमें 2 जिलों (भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़) में भारी बरसात का अलर्ट है। आज इन जिलों में स्कूलों की छुट्टी बारिश के चलते चित्तौड़गढ़, बारां, टोंक, सवाई माधोपुर, झालावाड़, कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, भीलवाड़ा में शनिवार को स्कूलों की छुट्टी रही। इसलिए हो रही भारी बरसात मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक मानसून पिछले दो सप्ताह से इनएक्टिव मोड में था। मानसून ट्रफ के नॉर्मल पॉजीशन में आने से मानसून फिर एक्टिव फेज में आया। एक्टिव फेज में आने के साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेन सिस्टम एक्टिव हुआ। इस सिस्टम में मूवमेंट नहीं होने से यही स्टेबल रहा। इस कारण से राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में इतनी भारी बारिश देखने को मिली।

राजकीय अधिवक्ताओं को तोहफ़ा : सरकार ने बढ़ाई राजस्व न्यायालयों में रिटेनरशिप

जयपुर राजस्थान के राजस्व न्यायालयों में राज्य सरकार की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप फीस एक सितंबर से बढ़ा दी जाएगी। रिटेनरशिप फीस बढ़ाने के  राजस्व विभाग के प्रस्ताव को सीएम भजनलाल शर्मा ने मंजूरी दे दी है। राजस्व विभाग ने इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार- न्यायालय राजस्व मण्डल अजमेर एवं अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों, संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी में विचाराधीन राजस्व वादों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले पूर्णकालिक राजकीय अधिवक्ताओं की मासिक रिटेनरशिप फीस में बढ़ोतरी की गई है। राजस्व विभाग के शासन उप सचिव हरिसिंह मीना ने बताया कि राजस्व मंडल अजमेर में राज्य सरकार  की पैरवी करने वाले स्टेट एडवोकेट को 11,250 रुपए, एडिशनल स्टेट एडवोकेट को 10,200 रुपए, डिप्टी स्टेट एडवोकेट को 9000 रुपए मासिक रिटेनरशिप मिलेगी। सभी सम्भागीय आयुक्त और अतिरिक्त सम्भागीय आयुक्त कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को 6 हजार रुपए, जयपुर, अलवर,भरतपुर, चित्तोडगढ़, उदयपुर, कोटा, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर और पाली के जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को 6 हजार रुपए, बूंदी, झालावाड़, टोंक, जालोर, सिरोही, सीकर,झुन्झुनू, दौसा, बारां और राजसमंद में जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को चार हजार 500, बांसवाड़ा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डूंगरपुर, धौलपुर,जैसलमेर, हनुमानगढ़ और करौली जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट में पैरवी करने वाले राजकीय अधिवक्ता को 3 हजार रुपए मासिक रिटेनरशिप मिलेगी। अन्य जिलों के जिला कलेक्टर कोर्ट और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कोर्ट के सम्बंध में यह राशि 4500 रुपए प्रति माह होगी। राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (रेवेन्यू अपीलेट अथॉरिटी) और उनके कैम्प कोर्ट के वाद में यह राशि 3 हजार रुपए होगी। इसके अतिरिक्त न्यायिक दायित्वों के पेटे इन अधिवक्ताओं को देय राशि में भी वृद्धि की गई है। अब जवाबदावा के लिए 700 रुपए, प्रति पृष्ठ डिक्टेशन व टंकण शुल्क  के लिए 25 रुपए, प्रति पृष्ठ फोटो स्टेट के 2 रुपए, अधिवक्ता कल्याण कोष के लिए 200 रुपए, स्टेशनरी फाईल कवर, टेग्स आदि के लिए 60 रुपए, प्रति प्रमाण पत्र शपथ पत्र प्रमाणीकरण के लिए  100 रुपए एवं अन्य विधिक खर्चे के रुपए में 200 रुपए देय होंगे।

वैध पते के अभाव में नोशनल नंबर से बने थे मतदाता, शिकायत साबित हुई गलत

उदयपुर उदयपुर जिले के गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र के बड़गांव से आई मतदाता सूची से जुड़ी शिकायत ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया। जनसुनवाई के दौरान बड़गांव पंचायत प्रशासक सहित कुछ लोगों ने जिला कलेक्टर नमित मेहता को जनसुनवाई में बताया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी नाम दर्ज किए गए हैं। शिकायत में कहा गया कि एक ही मकान नंबर पर 700 से अधिक मतदाताओं के नाम अंकित हैं। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर मेहता ने गोगुंदा के उपखंड अधिकारी एवं मतदाता पंजीकरण प्राधिकारी (ईआरओ) को त्वरित जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिकायत तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक थी। दरअसल जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मतदाता सूची में दर्ज अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं, जो उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की जमीन पर अतिक्रमण करके बसे हुए हैं। उन्होंने अवैध रूप से कच्चे-पक्के मकान बना रखे हैं। चूंकि इन परिवारों के पास कोई वैध घर नंबर या अधिकृत पता नहीं है, इसलिए उन्हें नोशनल नंबर आवंटित कर मतदाता सूची में शामिल किया गया। यही कारण है कि सूची में एक ही मकान नंबर के अंतर्गत सैकड़ों नाम दर्ज दिखाई दिए, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि सूची में बोगस मतदाता जोड़े गए हैं। जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि ईआरओ स्तर की जांच में यह साफ हो गया कि मतदाता सूची में फर्जी या बोगस नाम दर्ज करने का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। फिर भी एहतियातन विस्तृत जांच कराई जा रही है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना जरूरी है। स्थायी पता न होने पर नोशनल नंबर के आधार पर नाम जोड़े जाते हैं, ताकि कोई भी नागरिक मतदान अधिकार से वंचित न हो। राजस्थान में शहरी क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बसे हजारों परिवारों को किस तरह से व्यवस्थित पते और पहचान से जोड़ा जाए इस बात को लेकर विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक इनके पुनर्वास और वैध आवास की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक प्रशासन द्वारा नोशनल नंबर प्रणाली ही व्यावहारिक विकल्प है। बहरहाल बड़गांव में एक ही मकान नंबर पर 700 मतदाताओं के दर्ज होने की शिकायत मात्र अफवाह साबित हुई। जिला प्रशासन की माने तो सभी वास्तविक लोग हैं, जिन्हें वैध मकान नंबर न होने के कारण नोशनल नंबर से सूचीबद्ध किया गया है। क्या है नोशनल नंबर? यह चुनाव आयोग की एक व्यवस्था है कि जब किसी मतदाता का स्थायी और वैध पता, मकान नंबर या वार्ड की जानकारी उपलब्ध नहीं होती या दस्तावेजों में पूरा विवरण नहीं होता, तब चुनाव आयोग उस मतदाता का नाम सूची में दर्ज करने के लिए एक अस्थायी/ काल्पनिक  नंबर अलॉट कर देता है। इसे ही नोशनल नंबर कहा जाता है।

48 घंटे से मूसलाधार बरसात, बाढ़ जैसे हालात में सेना और SDRF उतरी

कोटा हाड़ौती में बीते 48 घंटे से मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है। कोटा, बूंदी और बारां जिलों में बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कई कस्बों और गांवों में 8 से 10 फीट तक पानी भर गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गांव, कस्बे और शहर तक इस बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पिछले दो दिनों में हाड़ौती क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक कच्चे मकान ढह गए, जबकि कई मकानों को नुकसान पहुंचा है। हालात बिगड़ने पर एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ सेना को भी राहत कार्यों में लगाया गया है। अब तक 200 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ की वजह से कई गांव और कस्बे टापू में तब्दील हो गए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बूंदी जिले का कापरेन और कोटा जिले का सुल्तानपुर बताया जा रहा है। इसके अलावा दीगोद क्षेत्र में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। भारी बारिश और जलभराव से कई पुलिया और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। 100 से ज्यादा गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है। कोटा से मध्यप्रदेश के श्योपुर को जोड़ने वाला मार्ग बंद हो गया है। दीगोद, इटावा, खातोली और सुल्तानपुर जैसे क्षेत्रों का सीधा संपर्क कोटा से कट गया है। इसी तरह कोटा-कैथून और सांगोद मार्ग पर भी यातायात ठप हो गया है, जिससे 20 से ज्यादा गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत पूरी तरह जलमग्न होकर तालाब जैसे हो गए हैं। आसपास की नदियों और नालों का पानी खेतों में भर गया है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं शहरों और कस्बों में दुकानों व मकानों में पानी घुसने से व्यापारियों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।  

OBC आरक्षण व परिसीमन मुद्दे पर अटका राजस्थान का पंचायत-निकाय चुनाव

जयपुर राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार के विरोध के बावजूद पंचायत व शहरी निकाय चुनावों को लेकर चुनाव कार्यक्रम की प्रक्रिया शुरू कर दी। राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के सम्बन्ध में हाल में की गई एक टिप्पणी को आधार बनाते हुए कार्यकाल पूरा कर चुकी पंचायतों और नगरीय निकायों में मतदाता सूची तैयार करने के निर्देश शुक्रवार को जारी कर दिए  इधर सरकार बार-बार यह बयान दे रही है कि वह वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत सभी पंचायतों और निकायों के चुनाव एक साथ करवाएगी। पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार की बात को अनसुना कर दिया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार राजस्थान में पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव हो पाएंगे या राज्य सरकार अब भी वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत चुनाव करवाने की स्थिति में है। 3 नवंबर तक मतदाता सूचियां तैयार करने को कहा- राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कलक्टरों से कहा है कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूचियां 29 अक्टूबर तक और निकाय चुनाव की मतदाता सूचियां तीन नवम्बर तक तैयार कर लें ताकि इन पंचायतों और नगरीय निकायों में चुनाव कराए जा सकें।  कलक्टरों को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूचियो के लिए एक जनवरी 2025 को आधार बनाया जाए और विधानसभा के लिए तैयार सात जनवरी को 2025 को प्रकाशित सूची को काम में लें। कलक्टरों से कहा गया है कि मतदाता सूची तैयार करने के लिए प्रगणकों की नियुक्ति तुरंत करें और निकाय चुनाव के लिए 11 सितम्बर से यह काम शुरू कर दें, वहीं पंचायतों के लिए दस सितम्बर से काम शुरू कर दें।  गौरतलब है कि  मधुकर गुप्ता ने दो दिन पहले ही राजस्थान उच्च न्यायालय की टिप्पणी को आधार बनाते हुए जल्द प्रक्रिया शुरू करने और चुनाव घोषित करने के संकेत दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के वन स्टेट वन इलेक्शन के निर्णय पर भी सवाल उठाते हुए इसे अव्यवहारिक बताया था। जानिए क्या कहते हैं निर्वाचन विभाग से जुड़े जानकार कानून अनिवार्यता नहीं-  निर्वाचन विभाग के ही सूत्र कहते हैं कि राज्य निर्वाचन आयुक्त ने भले ही मतदाता सूचियां तैयार करने के लिए कह दिया है लेकिन इस आदेश की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है और सरकार अब भी अपने हिसाब से ही चुनाव करवा सकती है।  दरअसल राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता का कार्यकाल इसी साल 17 सितंबर को पूरा हो रहा है। अब इसके बाद सरकार यहां नए निर्वाचन आयुक्त को लगाएगी। नए निर्वाचन आयुक्त चाहें तो फिर से नया चुनाव कार्यक्रम भी जारी कर सकते हैं। परिसीमन अभी शेष: – राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने का निर्णय लेकर कार्यक्रम तो जारी कर दिया है, लेकिन बिना परिसीमन के चुनाव नहीं करवाए जा सकते हैं। अभी परिसीमन की अधिसूचना जारी नहीं हुई है।  सरकार नए  परिसीमन से पंचायतों और निकायेां के चुनाव कराना चाहती है और इसकी प्रक्रिया लगभग पूरी भी हो गई है, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं हुई है। हालांकि बताया जा रहा है कि पंचायत परिसीमन की अधिसूचना तो दो-तीन दिन में जारी भी कर दी जाएगी। वहीं निकायों की अधिसूचना भी जल्द जारी होने की सम्भावना है। हाईकोर्ट की खंडपीठ में निर्णय रिजर्व राज्य निर्वाचन आयोग ने उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा की गई टिप्पणी को आधार बना कर मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव तथा परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट की ही खंडपीठ सुनवाई पूरी कर चुकी है और इस पर अभी फैसला रिजर्व रखा हुआ है। ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट जरूरी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पंचायतो और निकाय चुनावों ओबीसी आरक्षण के लिए राज्य ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट जरूरी है। इसके बिना चुनाव नहीं कराए जा सकते। राज्य ओबीसी कमीशन हालांकि गठित तो पहले ही कर दिया गया था, लेकिन इसने अपना काम हाल में शुरू किया है और सरकार ने इसका कार्यकाल 31 दिसम्बर तक बढा दिया है। ऐसे में जब तक इसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक चुनाव नहीं कराए जा सकते। बताया जा रहा है कि कमीशन ने इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भी लिखा है।

हड्डी जैसी संरचना से मचा हड़कंप, जैसलमेर में फिर उठे डायनासोर के सवाल

  जैसलमेर जैसलमेर के मेघा गांव के पास तालाब किनारे खुदाई के दौरान रहस्यमयी जीवाश्म मिले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जुरासिक काल के उड़ने वाले डायनासोर का हिस्सा हो सकता है। प्राथमिक जांच में यह संरचना रीढ़ की हड्डी जैसी प्रतीत हो रही है, जबकि इसका बड़ा हिस्सा 15 से 20 फीट जमीन के अंदर दबा हुआ है। भूजल वैज्ञानिक नारायण दास इणखिया ने दावा किया कि यह जैसलमेर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा कंकाल है। उनका कहना है कि जियोलॉजिकल सर्वे की टीम इसकी जांच करेगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जीवाश्म किस प्रजाति का है और कितने वर्ष पुराना है। डॉ. इणखिया के अनुसार, यह अवशेष लाखों-करोड़ों साल पुराने हो सकते हैं। अगर यह अन्य जानवर की हड्डियां होतीं तो समय के साथ नष्ट हो जातीं। लेकिन इनके सुरक्षित रहने से यह माना जा रहा है कि यह जीवाश्म बनने की प्रक्रिया में जम चुके हैं। उनका अनुमान है कि यह करीब 20 फीट लंबे किसी उड़ने वाले डायनासोर का कंकाल हो सकता है। गौरतलब है कि जैसलमेर क्षेत्र प्राचीन भूगर्भीय इतिहास से जुड़ा है। करीब 25 करोड़ वर्ष पहले यह इलाका समुद्र का हिस्सा हुआ करता था, जहां डायनासोर भोजन की तलाश में आते थे। यही कारण है कि यहां समय-समय पर जीवाश्म और प्राचीन अवशेष मिलते रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में डॉ. इणखिया को जेठवाई पहाड़ी पर मॉर्निंग वॉक के दौरान डायनासोर के अंडे का जीवाश्म मिला था। वहीं थईयात की पहाड़ियों में भी डायनासोर के पैरों के निशान और हड्डियां खोजी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसलमेर में मिले ये नए अवशेष भारत की पुरातत्व और भूगर्भीय धरोहर को और समृद्ध करेंगे। वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह सचमुच उड़ने वाले डायनासोर का कंकाल है या किसी अन्य प्राचीन जीव का अवशेष।  

गोयनका समुदाय को समर्थन, उद्योग जगत को आमंत्रित किया मुख्यमंत्री ने

फतेहपुर  राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने देश के  गोयनका समुदाय के चोटी के उद्यमियों को राजस्थान में निवेश के लिए आमन्त्रित किया है। आज फतेहपुर शेखावाटी में गोयनका समुदाय के वार्षिक 'गोयनका संगम' को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस समय राज्य में ऊर्जा, पर्यटन सौर ऊर्जा, खनन और इन्फ्रास्ट्र्रक्चर विकास में  निवेश की असीम संभावनाएं हैं और राज्य सरकार औद्योगिक विकास में गोयनका समुदाय के उद्योगपतियों की सक्रिय हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहती है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि नई सरकार ने पारदर्शिता और ईमानदारी  से कार्य करते हुए प्रदेश में अनुकूल औद्योगिक माहौल तैयार किया है तथा राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए कृत संकल्प है। उन्होंने कहा की सरकार औद्योगिक निवेश की निरंतरता बनाये रखने के लिए कृत संकल्प है ताकि प्रदेश की जी.डी.पी. को बढ़ाया जा सके तथा युवाओं को उनके नजदीकी स्थानों पर आकर्षक रोगजार के अवसर मिल सकें। उन्होंने श्री शक्ति गोयनका ट्रस्ट द्वारा राजस्थान में सामाजिक क्षेत्रों में किये गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए उनकी सराहना की और उन्हें समाज सेवा के अतिरिकत दूसरे क्षेत्रों में भी सकारत्मक हिस्सेदारी करने की अपील की। इस सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान विधान सभा के स्पीकर बासुदेव जी देवनानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ से निपटने के लिए स्वदेशी अपनाने का मूल मन्त्र दिया।  बासुदेव जी  देवनानी ने कहा कि हर भारतीय अगर स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेगा तो अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थ व्यवस्था पर कतई असर नहीं होगा और इसके लिए उन्होंने सभी को एकजुट होने की अपील की ताकि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखा जाये और भारत को विकसित देशो की श्रेणी में खड़ा किया जा सकें।  वासुदेव देवनानी ने कहा की प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की गतिशील नीतियों के वजह से बर्ष 2014 में 11वें स्थान से आज भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है जोकि उनके कुशल नेतृत्व का जीता जागता उदहारण है। उन्होंने इस सम्मान समारोह में पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने गोयनका समुदाय के बजुर्गो द्वारा स्थापित उच्च मूल्यों को आगे बढ़ाया है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।   उन्होंने कहा कि गोयनका समुदाय ने भारत के अलावा दुबई, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका जैसे देशो में व्यापार के साथ-साथ भारतीय सांस्कृति का परचम लहराया है जोकि दूसरे समुदाय के लिए  प्रेरणा का स्त्रोत है। उन्होंने कहा की समाज की प्रगति ऊंची गगन चुम्बी इमारतों से नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों से आंकी जाती है। उन्होंने गोयनका समुदाय को व्यापार के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया ताकि वह मातृभूमि के ऋण को चुकता कर सकें। उन्होंने कहा कि जब शुरू में यह कहा गया था की 21वीं शताब्दी भारत की होगी तो उन्हें कुछ संशय था लेकिन वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह अहसास हो गया कि यह सपना साकार होने जा रहा  है। इससे पहले  विधानसभा के स्पीकर वासुदेव जी देवनानी का गोयनका मन्दिर में पहुंचने पर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सुशील गोयनका, अवार्ड समिति के अध्यक्ष अरुण गोयनका  और सभी ट्रस्टियों ने उनका फूलमालाओं से पूरी गर्म जोशी से स्वागत किया।  उन्होंने  दादी जी के मन्दिर में पूजा अर्चना की और श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इस अवसर पर मात्र ढाई साल की उम्र में ही हेयांश गोयनका ने भारत के मानचित्र में राज्य चिन्हित करने और उसकी राजधानी बताने के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करने के लिए उसकी प्रसंशा की गई  है। 4 साल की उम्र से ही वह कई श्लोक, मंत्र, आरती और पौराणिक कथाओं का कंठस्त उच्चारण करते हैं। वे सार्वजनिक रूप से भारी भीड़ के सामने पौराणिक कथाएं सुनते  हैं और उन्होंने विधान सभा स्पीकर के सामने भी मंत्रोच्चारण किया।  इस अवसर पर बोलते हुए श्री शक्ति ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सुशील गोयनका ने फतेहपुर शेखावाटी में सड़कों और अन्य ढांचागत सुविधाओं को सुदृड़ करने की आवश्यकता पर बल दिया और इसमें ट्रस्ट की सक्रिय हिस्सेदारी का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर गिरधारी लाल गोयनका ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 5 दिन तक चलने वाले इस उत्सव में पूज्य भूपेंद्र भाई पंड्या जी ने हनुमान कथा का उच्चारण किया। इसके अलावा अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए जिसमे  युवाओं की सक्रिय हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई ताकि वह अपनी जड़ों से जुड़े रहें और उनका राजस्थानी संस्कृति से कनेक्ट रखा जा सके। इस दौरान गोयनका समुदाय की कुल देवी दादी जी के मन्दिर में रोज भजन संध्या का आयोजन किया गया ।  

सरकार का बड़ा एक्शन, RGHS घोटाले में 14 पर गिरी गाज

जयपुर राजस्थान सरकार ने राज्य की प्रमुख योजना राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में अनियमितताओं के आरोप में बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 कार्मिकों को निलंबित कर दिया है, जिनमें 5 चिकित्सक भी शामिल हैं। साथ ही, एक निजी अस्पताल, एक मेडिकल स्टोर, तीन चिकित्सकों एवं एक कार्डधारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है।  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि विगत काफी समय से राजस्थान गवर्नमेंट हैल्थ स्कीम में विभिन्न हितधारकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर अनियमितता करने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों की गहनता के साथ जांच की गई। जांच के बाद सख्त कार्रवाई करते हुए 9 कार्मिकों को निलंबित किया गया है, इनमें दो आयुर्वेद चिकित्सक सहित 5 डॉक्टर शामिल हैं। राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजी लाल अटल ने  बताया कि कार्रवाई के क्रम में आरजीएचएस में अनियमितता पर राजकीय आयुर्वेद डीबी सामान्य चिकित्सालय चूरू की आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. कविता धनखड़ एवं डॉ. पवन जांगिड़, सीएचसी बीबरानी, खैरथल—तिजारा की चिकित्सक डॉ. मनीषा, जिला चिकित्सालय अलवर के डॉ. नरसीलाल पचौरी, टीबीसी अलवर के डॉ. कपिल भारद्वाज, राजकीय आयुर्वेद औषधालय, नाहरी का नाका के कम्पाउण्डर मदन मोहन पाण्डे, आयुर्वेद औषधालय  बालेटा अलवर के कम्पाउण्डर चंद्रशेखर जाटव, कार्यालय उप निदेशक आयुर्वेद विभाग जयपुर के परिचारक मोहसिन खान तथा जल संसाधन विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी महेश कुमार महावर को निलंबित किया गया है।   एक ही कार्ड पर ओपीडी में 26 लाख का उपचार इसी प्रकार राजस्थान पेंशनर्स एसोसिएशन मेडिकल स्टोर, कम्पनी बाग रोड, अलवर, मित्तल हॉस्पिटल, चिकित्सकों एवं कार्ड धारी कार्मिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। प्रकरण में कार्मिक, चिकित्सकों एवं फार्मा स्टोर की मिलीभगत कर कूटरचित ओपीडी पर्चा तैयार किया जाता था। दवा के स्थान पर फार्मा स्टोर से अन्य सामग्री ली जाती थी। इस कार्मिक के कार्ड से एक वर्ष में ही ओपीडी के जरिए करीब 26 लाख 70 हजार का उपचार एवं दवाएं आदि का लाभ लिया गया।

‘अमर रहें’ के नारों के बीच हुआ कर्नल सोनाराम का अंतिम संस्कार

बाड़मेर पश्चिमी राजस्थान के दिग्गज जाट नेता और पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव मोहनगढ़ में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा और “कर्नल सोनाराम अमर रहें” के नारों के बीच हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने नेता को अंतिम विदाई दी। चार बार सांसद और एक बार विधायक रहे कर्नल चौधरी का बुधवार को नई दिल्ली में एक बैठक के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया था। गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से बाड़मेर लाया गया और आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। यहां आमजन से लेकर कई बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। शुक्रवार को मोहनगढ़ स्थित आवास पर भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इस दौरान राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई, सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, बायतु विधायक हरीश चौधरी, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, जैसलमेर के पूर्व विधायक रुपाराम धनदे सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा उनके आवास से निकलकर मोहनगढ़ के मुख्य मार्गों से होते हुए श्मशान घाट पहुंची। इस दौरान सड़कों के किनारे खड़े लोगों ने अपने नेता को अंतिम विदाई दी। श्मशान घाट पर उनके पुत्र डॉ. रमन चौधरी ने मुखाग्नि दी और कर्नल चौधरी पंचतत्व में विलीन हो गए।

कोटा-बारां-बूंदी में जलभराव, सवाई माधोपुर में नदियां उफान पर

जयपुर राजस्थान में अलग-अलग जिलों से आज भारी बारिश के समाचार हैं। सवाई माधोपुर, टोंक, कोटा, बारां, बूंदी और भीलवाड़ा में तेज बारिश का दौर शुक्रवार सुबह भी जारी है। बारां जिले में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने शुक्रवार और शनिवार को सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में छुट्टी घोषित की है। वहीं सवाई माधोपुर में एक बार फिर से बाढ़ की स्थिति बन गई है। पुराने शहर के पल्ली पार इलाके में घरों में पानी घुस गया। करीब 250 घर जलमग्न हो गए हैं। नेशनल हाईवे-552 पर तेज बारिश के कारण पुलिया टूट गई। इससे ट्रैफिक पूरी तरह से बाधित हो गया है। भीलवाड़ा के बिजौलिया में 24 घंटे में 166 मिमी बारिश दर्ज होने के बाद 23 फीट भराव क्षमता वाला पंचानपुरा बांध ओवरफ्लो हो गया। एरू नदी ऊफान पर आ गई है। शुक्रवार सुबह 5 बजे कोटा बैराज के 3 गेट खोले गए। इनसे 25 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बूंदी के कापरेन कस्बे में लगातार बारिश के चलते कई कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। बारां में शुक्रवार और शनिवार को सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। अजमेर में गुरुवार रात बांध में डूबने से अपने ही बर्थडे के दिन एक युवक की मौत हो गई। जयपुर के चाकसू में गुरुवार शाम ढूंढ नदी की रपट पर बाइक समेत पति-पत्नी बह गए। लोगों ने पति को बचा लिया लेकिन पत्नी बह गई। मौसम केंद्र जयपुर ने राज्य में शुक्रवार को भी 4 जिलों उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बारां जिला मुख्यालय पर शुक्रवार तड़के पांच बजे शुरू हुई बरसात ने सात बजे बाद तीखे तेवर दिखाना शुरू कर दिया। सुबह आठ बजे शहर के मुख्य बाजार सहित कई बस्तियों में जल भराव शुरू हो गया। नगर परिषद के सामने दुकानों में पानी भर गया। मुख्य बाजार में जल भराव की सूचना के साथ ही दुकानदारों ने दुकानों पर पहुंचकर सामान सुरक्षित रखने के जतन भी प्रारंभ कर दिए हैं। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने भारी बारिश को देखते हुए जिले में सभी स्कूलों में दो दिन का अवकाश भी घोषित कर दिया है और शुक्रवार सुबह ही सभी अधिकारियों को विशेषकर नगर परिषद को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। बूंदी के कापरेन कस्बे में लगातार बारिश के चलते कई कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। कापरेन कस्बे के बीच से निकल रही पुलिया पर पानी की आवक होने से ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट गया। शहर में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोग जान जोखिम में डालकर पुलिया को पार कर रहे हैं। शिवनगर में भी बारिश के कारण घरों में पानी आ गया। बारिश के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की टर्फ लाइन अब दक्षिण दिशा से शिफ्ट होकर अपनी नॉर्मल पोजीशन के नजदीक आ गई है। शुक्रवार को ये जैसलमेर, कोटा, दतिया (एमपी), सीधी (एमपी), रांची (झारखंड) से होकर गुजर रही है। इस कारण प्रदेश में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो अगले दो दिन और जारी रहने की संभावना है।