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कॉलेज-स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की मॉनिटरिंग अनिवार्य, शिक्षकों को जल्द सौंपनी होगी रिपोर्ट

चंडीगढ़  सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हरियाणा के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से आए आदेशों में कहा गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल में एक प्रोफेसर या शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो कुत्तों की निगरानी और जोखिम की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या नगर निगम को सूचित करने की जिम्मेदारी निभाएगा। इसके तहत रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, हिसार, कैथल सहित अन्य जिलों के स्कूलों में खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश भेजे जा चुके हैं। हर स्कूल में नोडल अधिकारी का नाम, पद और मोबाइल नंबर परिसर में प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही इस कार्य की रिपोर्ट शुक्रवार तक मांगे जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हसला ने जताई नाराजगी हालांकि, इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (HASLA) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि शिक्षक पहले ही शिक्षण कार्य के अतिरिक्त 20 से अधिक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब कुत्तों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सौंपना बिल्कुल अनुचित है।   आदेश तुरंत रद्द किए जाऐं उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मूल भूमिका विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, न कि पशु नियंत्रण से जुड़े कार्य करना। आवारा पशुओं व कुत्तों को नियंत्रित करना नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसे शिक्षकों पर थोपना शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करेगा। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए और आवारा कुत्तों के प्रबंधन का दायित्व संबंधित विभागों को ही सौंपा जाए।

फतेहाबाद में महिला का गुस्सा फूटा, मेडिकल स्टोर संचालक पर बेटी से गलत हरकत का आरोप

फतेहाबाद  हरियाणा के फतेहाबाद में एक मेडिकल स्टोर संचालक की महिला ने जमकर पिटाई कर दी। गुस्साई महिला ने जमकर थप्पड़ मारे व लात भी मारी। चप्पल से पिटाई कर कुर्सी उठाकर भी मारने की कोशिश की। महिला का आरोप है कि उसने बेटी पेट दर्द की दवा लेने मेडिकल स्टोर पर भेजा था। स्टोर संचालक ने इंजेक्शन लगाने के लिए कहा। इसी दौरान उसने गलत हरकत की। को मेडिकल स्टोर पर दवाई लेने भेजा था। मेडिकल संचालक ने उसकी बेटी से गलत हरकत की। बेटी ने घर आकर यह बात परिजनों को बताई। यह भी आरोप है कि जब मेडिकल स्टोर संचालक से इस बारे में पूछा गया तो माफी मांगने की बजाय उनके साथ ही अभद्रता की। इससे महिला का गुस्सा भड़क गया। हालांकि मेडिकल स्टोर संचालक पुलिस को बुलाने के लिए कहता रहा, लेकिन महिला ने उसकी एक नहीं सुनी। मामले में अभी तक पुलिस को शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें महिला मेडिकल स्टोर में हंगामा करती दिख रही है।

सोनीपत के गांव सलीमसर ट्राली में दिनदहाड़े आंगनबाड़ी वर्कर की बड़ी बेरहमी हत्या का सनसनीखेज मामला आया सामने

सोनीपत  सोनीपत के गांव सलीमसर ट्राली में दिनदहाड़े आंगनबाड़ी वर्कर की बड़ी बेरहमी हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लूट के बाद हत्या हुई है। आंगनवाड़ी वर्कर उषा अपने घर के पास एक मकान में आटा पिसाई करने गई थी, तभी इस वारदात को अंजाम दिया गया।  बताया जा रहा है कि ऊषा के दोनों हाथ टूटे हुए और साथ में शरीर पर तेजधार हथियार से कई वार के निशान मौजूद हैं। मृतक आंगनवाड़ी वर्कर उषा के शरीर से उसके पहने हुए गहने गायब मिले। उषा के शव का पोस्टमार्टम सोनीपत खानपुर पीजीआई में होगा। सोनीपत पुलिस की कई टीमें जघन्य हत्याकांड की गंभीरता से जांच कर रही हैं। 

शीतकालीन सत्र में राष्ट्रीय महत्व के विषयों संग हरियाणा की आवाज़ को मिली प्राथमिकता

चंडीगढ़ हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि शीतकालीन सत्र कई दृष्टि से लाभकारी रहा। सत्र के दौरान प्रदेश की जनता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई तथा 16 विधेयक पारित किये गए। चुनाव सुधार से उत्पन्न हुई स्थिति और वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। तीन दिन में आयोजित 4 बैठकों में कुल 23 घंटे 45 मिनट कार्यवाही चली, जिसकी कार्य उत्पादकता 100 प्रतिशत से अधिक रही। सत्र के दौरान सभी 74 विधायकों ने शिरकत की, इसमें मुख्यमंत्री, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मंत्रियों की संख्या अलग से है। 18 से 22 दिसंबर तक चले सत्र के दौरान विधायकों की सक्रियता दिखाई दी। विधायकों की ओर से अध्यादेशों को निरस्त करने तथा संशोधन के नोटिस प्राप्त हुए। विपक्ष की ओर से उठाए गए प्रत्येक विषय पर किसी न किसी रूप में चर्चा की गई। सत्र का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ तथा समापन राज्यगीत और राष्ट्रगीत के साथ हुआ। विस अध्यक्ष ने बताया कि शून्यकाल की कार्यवाही तीन दिन रही जो 3 घंटे 18 मिनट चली। इस कार्यवाही में 70 सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिनमें कांग्रेस के 33 सदस्य 94 मिनट तक बोले। भाजपा के 32 सदस्यों ने 91 मिनट तक अपनी बात रखी, इनेलो के 2 सदस्यों ने 6 मिनट तथा तीन निर्दलीय विधायकों ने 7 मिनट तक बात रखी। तीन दिन में प्रश्नकाल के दौरान 81 तारांकित प्रश्न स्वीकृत किए गए जिनमे से ड्रा की प्रक्रिया के बाद 47 प्रश्नों के मौखिक जवाब कार्यवाही के दौरान दिए गए। इनमें कांग्रेस के 22, भाजपा के 14, इनेलो के 2 तथा 2 निर्दलीय विधायकों के प्रश्न थे। वहीं, 30 अतारांकित प्रश्न स्वीकृत हुए जिनके जवाब सदन पटल पर दिए गए। कांग्रेस के 33 विधायकों की ओर से नियम 65 के तहत प्रदेश सरकार के विरुद्ध अनेक विषयों पर आधारित अविश्वास प्रस्ताव आया। इस प्रस्ताव पर 19 दिसंबर को चर्चा करवाई गई। 4 घंटे 40 मिनट चली इस चर्चा में 17 विधायकों ने भाग लिया। कांग्रेस के 8 विधायकों ने 87 मिनट तक विस्तार से अपनी बात रखी। भाजपा के 6 सदस्य 69 मिनट बोले जबकि सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह ने 109 मिनट में जवाब दिया। इनेलो के 2 सदस्य 15 मिनट बोले। इनेलो की तरफ से एक ध्यानाकर्षण सूचना को स्वीकार किया गया। प्रदेश के स्कूलों/ प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों/अनुदेशकों की कमी बारे इस नोटिस पर 18 दिसंबर को चर्चा की गई। नेता प्रतिपक्ष के रूप में भूपेंद्र हुड्डा की नियुक्ति उपरांत विधान सभा में मान्यता मिलने की सूचना भी सदन में दी गई। संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा की ओर से 18 दिसंबर को पेश किए गए सरकारी प्रस्ताव में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में चर्चा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण के स्वीकार करने पर उसी दिन इस पर विस्तृत चर्चा करवाई। भाजपा विधायक घनश्याम दास और योगेन्द्र राणा की ओर से नियम 84 के तहत प्रस्तुत प्रस्ताव में ‘राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम्’ पर तथा भाजपा मुख्य सचेतक राम कुमार कश्यप और विधायक योगेन्द्र राणा की ओर से ‘मतदाता सूची बनाने से संबंधित चल रहे चुनाव सुधारों से उत्पन्न स्थिति’ पर क्रमशः 19 और 22 दिसंबर को चर्चा हुई। इन चुनाव सुधारों से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार किया। इस मामले में संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा की ओर से प्रस्तुत निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। सत्र के दौरान कुल 1058 दर्शक विधान सभा देखने पहुंचे, जिनमें 588 विद्यार्थी, 201 स्पीकर गैलरी और 269 दर्शक दीर्घा में थे।

नाम बदलने के फैसले पर चूहड़ माजरा में विरोध, गांव की पंचायत में उठे कई सवाल

कैथल कैथल जिले के गांव चूहड़ माजरा बदले के मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया है। गांववासियों ने विरोध करते हुए कहा कि वे गांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बदलने को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। इसके विरोध में ग्रामीणों की एक पंचायत बुलाई गई, जिसमें बहुमत ने फैसले को गलत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव लगभग 600 साल पहले बाबा चूहड़साध ने बसाया था। तभी से इस गांव का नाम चूहड़ माजरा है। उनका तर्क है कि नाम बदलने पर गांव की भावनात्मक विरासत प्रभावित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। दस्तावेज़ों, रिकॉर्ड और विदेश में बसे युवाओं के कागजों में बदलाव करवाने में समय और धन दोनों की बर्बादी होगी। बिना सलाह के नाम बदलने का आरोप गौरतलब है कि 23 दिसंबर को गांव में गुरु ब्रह्मानंद सरस्वती जयंती कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुछ लोगों की अनुशंसा पर गांव का नाम बदलकर ‘ब्रह्मानंद माजरा’ करने की घोषणा की थी। इसी निर्णय के बाद से गांव में विरोध स्वरूप आवाज़ें उठने लगी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत या गांव के अधिकांश प्रतिनिधियों से बिना सलाह-मशविरा लिए यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है।   ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत आबादी इस परिवर्तन के खिलाफ है। उनका कहना है कि गुरु ब्रह्मानंद का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन किसी संत का सम्मान करने का अर्थ यह नहीं कि गांव की परंपरागत पहचान मिटा दी जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो वे उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। सरपंच ने जताई सहमति गांव की सरपंच कविता और उनके पति कुलदीप ने ग्रामीणों के पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि गांववासियों का सामूहिक निर्णय ही सर्वोपरि होगा। वे नाम परिवर्तन को रद्द करने की मुहिम में ग्रामीणों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे।

जीते जी हक़ के लिए जंग, मौत के बाद मिली प्रोन्नति की जीत

हिसार  हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या फोगाट की मौत के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तत्कालीन आयुक्त अशोक कुमार गर्ग की जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध पाया गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डॉ. फोगाट की पदोन्नति दो साल तक जानबूझकर रोकी गई और उनकी मृत्यु के बाद उसे मंजूरी दी गई। प्रशासन का तर्क था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही थी। लेकिन 27 अक्तूबर, 2024 को उनकी मृत्यु होते ही प्रशासन ने वह कार्रवाई बंद कर दी और उन्हें पदोन्नति दे दी। जांच अधिकारी ने इस देरी को 'अन्यायपूर्ण' करार दिया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव ने 18 अगस्त, 2025 को हिसार के तत्कालीन आयुक्त अशांक कुमार गर्ग को जांच के आदेश दिए थे जिसकी रिपोर्ट उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले नवंबर माह में ही दे दी थी। इस रिपोर्ट की प्रति दैनिक ट्रिब्यून के पास है और इसी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। डॉ. फोगाट ने अपने अंतिम नोट में कुछ अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। तत्कालीन आयुक्त ने विवि की आंतरिक जांच को 'असंगत' माना है और अब इस पूरे मामले की जांच किसी बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वैज्ञानिकों के चयन में पारदर्शिता की कमी पाई गई।   मैक्सिको ट्रेनिंग के लिए दिव्या की जगह भेज दिया 56 वर्ष का वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि हकृवि में इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए वैज्ञानिकों की अनुशंसा के लिए पारदर्शी नीति नहीं है। यह मामला दिव्या फोगाट के मामले में स्पष्ट हुआ। हकृवि ने एक सवाल के जवाब बताया कि मैक्सिको में जुलाई, दिसंबर, 2022 और बांग्लादेश में मार्च, 2023 के प्रशिक्षण के लिए दिव्या फोगाट का नाम डिपार्टमेंटल एडवाइजरी कमेटी ने अनुशंसित किया था। मैक्सिको के प्रशिक्षण के लिए दिव्या फोगाट ने अपना नाम अपने स्तर पर सीधे आईसीएआर से नामित करवा लिया था और नियोक्ता की सहमति नहीं ली थी। इसलिए उन्हें मैक्सिको जाने की अनुमति नहीं दी गई। मैक्सिको के लिए 56 वर्षीय वैज्ञानिक ओपी बिश्नोई को नामित किया गया। आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आईसीएआर राष्ट्रीय बाॅडी है और उसकी अनुशंसा की विश्वसनीयता है। प्रशिक्षण के लिए 40 से कम उम्र के युवा वैज्ञानिक को भेजना था जबकि विवि ने 56 वर्षीय वैज्ञानिक को भेजा जिसकी आईसीएआर ने अनुशंसा नहीं की थी। मनमाने ढंग से उसे प्रशिक्षण के लिए रोका गया। प्रशासन का पक्ष और विरोधाभास विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि डॉ. फोगाट की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई और कार्यस्थल पर प्रताड़ना का कोई सबूत नहीं मिला। प्रशासन ने दिव्या फोगाट की मौत के लिए उसके पारिवारिक विवाद को भी कारण बताया। हालांकि, जांच अधिकारी ने प्रशासन के जवाबों को संतोषजनक नहीं माना और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

अर्जुन पुरस्कार की दौड़: 24 खिलाड़ियों के नाम तय, हरियाणा के 5 खिलाड़ियों की सिफारिश ने बढ़ाया प्रदेश का मान

पानीपत इस वर्ष अर्जुन पुरस्कार के लिए देशभर से 24 खिलाड़ियों के नामों की अनुशंसा की गई है। इनमें 5 खिलाड़ी अकेले हरियाणा से हैं। बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में इन नामों की सिफारिश की गई। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के उपकप्तान हार्दिक सिंह का नाम मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार के लिए सुझाया गया है। वहीं, भारतीय खेल इतिहास में पहली बार 'योगासन' खेल को अर्जुन पुरस्कारों की सूची में स्थान मिला है। खेल मंत्रालय से औपचारिक मान्यता मिलने के पांच साल बाद, राष्ट्रीय और एशियाई चैंपियन आरती पाल का नाम अर्जुन पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया है।    हरियाणा के जिन 5 सितारों के नामों की सिफारिश हुई है, उनमें मुक्केबाजी से अंतरराष्ट्रीय सितारे नरेंदर, कबड्डी से सुरजीत और पूजा, पैरा एथलेटिक्स से पैरा ओलिंपियन एकता भयान और कुश्ती से ओलिंपियन सोनम मलिक शामिल हैं। इस चयन समिति में भारतीय ओलिंपिक संघ के उपाध्यक्ष गगन नारंग, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट और पूर्व हॉकी खिलाड़ी एमएम सोमाया जैसे दिग्गज शामिल रहे। अर्जुन पुरस्कार के तहत चयनित होने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को 15 लाख रुपए की सम्मान राशि प्रदान की जाती है।  

जमीन घोटाले का पर्दाफाश: फर्जी वसीयत के जरिए कब्जे की साजिश, राजस्व अमले पर FIR

चरखी दादरी  दादरी जिले के बाढड़ा क्षेत्र में करोड़ों रूपये की कीमत वाली पैतृक जमीन पर अवैध कब्जा कराने के लिए फर्जी वसीयत तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्कालीन कानूनगो, पटवारी, नंबरदार और कुछ अन्य व्यक्तियों सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ताओं कृष्ण कुमार, निवासी गोपी (वर्तमान पता गुडाना) और राजस्थान के रमेश कुमार ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता पूर्ण, चाचा सुबराम और दादी छन्नी देवी के नाम गांव गोपी में जमीन दर्ज थी। आरोप है कि कब्जा कराने के लिए मृतक पूर्वजों के नाम से फर्जी वसीयतनामा तैयार किया गया और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करा दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि फरवरी 2022 में हुए इंतकाल नंबर 1349, 1350 और 1351 के समय संबंधित पटवारी अजीज अहमद ने इन्हें प्रमाणित नहीं किया था। बाद में पद पर न रहते हुए भी पटवारी रविंद्र ने हस्ताक्षर कर दिए। वहीं, उस दिन दस्तावेजों पर कानूनगो अवतार के हस्ताक्षर पाए गए, जबकि उस समय वास्तविक कानूनगो कपूर सिंह कार्यालय में मौजूद था। नंबरदार फतेह सिंह पर भी अधूरे वारिसान को सत्यापित करने के आरोप हैं। 

HTET 2026 नोटिफिकेशन जारी: अब शुरू हुए आवेदन, इस दिन तक भर सकेंगे फॉर्म

हरियाणा  एचटेट के लिए बीते दिन बुधवार से आवेदन शुरू हो गए हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 4 जनवरी है। इस बार आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सिर्फ दस दिन ही दिए गए हैं।आवेदन के लिए बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट पर लिंक जारी कर दिया गया है। आवेदन में सुधार के लिए अभ्यर्थियों को चार और पांच जनवरी का समय दिया गया है। HTET 2026 के लिए कैसे करें आवेदन? सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट –  bseh.org.in व htet.eapplynow.com पर जाना होगा। इसके बाद होम पेज पर दिख रहे HTET 2026 के लिंक पर क्लिक करना होगा। अब अपनी जरूरी जानकारी भरकर लॉगिन करें और आवेदन फॉर्म को ध्यानपूर्वक पूरा करें। फॉर्म भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और ऑनलाइन माध्यम से आवेदन शुल्क का भुगतान करें। अंत में कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर सुरक्षित रख लें।

खेती होगी सस्ती और स्मार्ट: हरियाणा में सोलर पंप पर 75% सब्सिडी का ऐलान

हरियाणा  हरियाणा के किसानों के लिए अच्छी खबर आई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर एनर्जी पंप लगाने का अवसर दिया जा रहा है। इच्छुक किसान आज से 29 दिसंबर 2025 तक सरकार के सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत किसानों को 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी क्षमता के सोलर पंप 12 अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने पहले बिजली आधारित ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।   तय समय सीमा में जमा करवाएं आवेदन  वहीं वेटिंग लिस्ट में शामिल पुराने आवेदकों को भी राहत दी गई है। यदि वे अपने सोलर पंप की क्षमता या प्रकार बदलना चाहते हैं, तो वे पुरानी फैमिली आईडी के माध्यम से दोबारा आवेदन कर सकते हैं। ऐसे किसानों को नया चालान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उनका अंश पहले ही विभाग के पास जमा है। यदि तय समय सीमा में नया आवेदन नहीं किया गया और पंप आवंटित नहीं होता, तो जमा की गई राशि वापस कर दी जाएगी। जानें आवेदन के लिए किसानों के पास क्या-क्या होना चाहिए ऑनलाइन आवेदन के लिए किसानों के पास फैमिली आईडी, कृषि भूमि के रिकॉर्ड या जमाबंदी और यह प्रमाण पत्र होना जरूरी है कि आवेदक के नाम पर कोई बिजली आधारित पंप नहीं है। किसानों को वर्चुअल अकाउंट नंबर के साथ चालान जारी किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी को अपना हिस्सा NEFT या RTGS के माध्यम से जमा करवाना पड़ेगा।