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बिहार सरकार की नई टोल पॉलिसी तैयार, अब स्टेट हाईवे और पुलों पर बढ़ेगा टोल

पटना  बिहार में गाड़ी चलाना आपके लिए और महंगा होने जा रहा है। यूं समझिए कि पेट्रोल-डीजल के बाद अब बिहार में सरकार आपकी जेब का बोझ बढ़ाने जा रही है। बिहार की सम्राट चौधरी सरकार नई टोल नीति पर काम शुरू कर चुकी है। इसके लागू होने के बाद अब बिहार में आपको और टोल टैक्स चुकाना होगा। इसके लिए पथ निर्माण विभाग के अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक को काम पर लगा दिया गया है। बिहार में टोल टैक्स होगा महंगा बिहार की सम्राट सरकार की नई टोल नीति लाने का मकसद राजस्व बढ़ाना है। इस राजस्व का इस्तेमाल सड़कों और पुलों के रखरखाव पर किया जाएगा। इसको लेकर अफसरों को नई नीति तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं और वो इस पर काम भी कर रहे हैं। पुल के लिए भी टोल टैक्स इसमें एक और भी बड़ी बात है। वो ये कि अब बिहार में पुल पार करने पर भी टैक्स लगेगा। एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक जो प्रस्ताव रखा गया है उसके अनुसार पुल की एक किलोमीटर की लंबाई को साधारण सड़क के 10 किलोमीटर के बराबर माना जाएगा। ऐसे में सड़कों के मुकाबले पुल पर लगने वाला टोल टैक्स जाहिर तौर पर ज्यादा होगा। ऐसे समझिए कि आप जितना टोल सड़क पर 10 किमी गाड़ी चलाने के लिए देंगे, उतना पुल पर सिर्फ एक किलोमीटर का लग जाएगा। यही नहीं पुल तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड पर भी अलग टोल की दरें तय की जा रही हैं।     बिहार में जल्द आ सकती है नई टोल टैक्स पॉलिसी     इसके तहत पुलों के लिए भी लगेगा टोल टैक्स     स्टेट हाईवे पर भी वसूला जाएगा टोल     पथ निर्माण विभाग इसके लिए काम पर लगा सरकार क्यों बढ़ा रही टोल टैक्स पथ निर्माण विभाग के अनुसार बिहार में बड़े पुलों और स्टेट हाईवे के नेटवर्क को मेंटेन रखने के लिए मोटे बजट की जरूरत होती है। बिहार में टोल टैक्स को लेकर इस नई टोल नीति के बाद जो पैसा आएगा उससे पुलों और सड़कों की मरम्मत से लेकर सुरक्षा तक तय की जाएगी। हालांकि अभी प्रस्ताव पर सोच-विचार चल रहा है। ड्राफ्टिंग को पूरा होने में समय लगेगा। माना जा रहा है कि एक महीने के अंदर ही ये लागू किया जा सकता है। बिहार सड़क उपयोगकर्ता शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) अभी प्रक्रिया में है। लागू होने पर टोल वसूली के लिए एजेंसियों को चुना जाएगा।    

अब पुल की लंबाई तय करेगी टोल टैक्स: बिहार सरकार ला रही नया फॉर्मूला

पटना  बिहार में अब राज्य के बड़े पुलों और चुनिंदा मुख्य सड़कों पर सफर करने के लिए आपकी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली होने वाली है। राज्य सरकार पहली बार अपनी टोल टैक्स नीति लेकर आ रही है। पथ निर्माण विभाग इस नई नीति को अंतिम रूप देने में जोर-शोर से जुटा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नई नीति के तहत पुलों पर टोल टैक्स की राशि उनकी लंबाई के आधार पर तय की जाएगी। विभाग के विशेषज्ञ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस के आधार पर इसके निर्धारण में जुटे हैं, ताकि सड़कों और पुलों का बेहतर रखरखाव किया जा सके। 10 गुना बढ़ाकर लिया जाएगा टोल इस नई टोल नीति में टैक्स तय करने का जो फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है, वह बेहद खास है। विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, पुल के मुख्य हिस्से की जो वास्तविक लंबाई होगी, उसे 10 से गुणा करके टैक्स की राशि तय की जाएगी। आसान भाषा में समझें तो, अगर किसी पुल का मुख्य हिस्सा 5 किलोमीटर लंबा है, तो उस पर 10 गुना बढ़ाकर यानी 50 किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स वसूला जाएगा। वहीं, एप्रोच रोड की लंबाई पर प्रति किलोमीटर 60 से 65 पैसे का टैक्स लगेगा। अंत में पुल और एप्रोच रोड दोनों की राशि जोड़कर फाइनल टोल तय होगा। कॉमर्शियल वाहनों के लिए अलग दरें निजी चारपहिया वाहनों के लिए जहां प्रति किलोमीटर 60-65 पैसे का प्रस्ताव है, वहीं कॉमर्शियल और भारी वाहनों के लिए टोल टैक्स की दरें अलग-अलग निर्धारित की जाएंगी। हालांकि, पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस फॉर्मूले पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। आपको बता दें कि राज्य में अब तक अपनी कोई टोल टैक्स नीति नहीं थी, इसलिए यातायात सुविधाओं को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इस नई नीति में आम जनता की सहूलियत का भी ध्यान रखा गया है। नए मानक लागू होने के बाद, टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को टैक्स से छूट दी जाएगी। वहीं, जो लोग नौकरी या अपने व्यवसाय के सिलसिले में रोज उस मार्ग से सफर करते हैं, उनके लिए मंथली पास का विशेष प्रावधान किया जाएगा।

टोल पर झंझट खत्म! भारत में पहली बार बैरियर-फ्री टोल, आज से ट्रायल शुरू

 सूरत हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश में पहली बार पूरी तरह बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम तैयार किया गया है, जिसका ट्रायल आज से शुरू होने जा रहा है। यह नया सिस्टम गुजरात में लगाया गया है और इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा शुरू किया जा रहा है। गुजरात में तैयार हुआ पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्लाजा गुजरात के सूरत जिले के कामरेज इलाके में स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर बनाया गया है। यह मौजूदा पारंपरिक टोल बूथ की जगह लेगा, जहां अब तक वाहन चालकों को टोल देने के लिए रुकना पड़ता था। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और भीड़ को खत्म करने की बात कर रहे थे। इसी दिशा में इस प्रोजेक्ट को पायलट आधार पर लागू किया गया है। ड्राइवरों को क्या फायदा होगा? बैरियर-फ्री टोल सिस्टम लागू होने के बाद वाहन बिना रुके टोल क्षेत्र से गुजर सकेंगे। न तो ब्रेक लगाने की जरूरत होगी और न ही कतार में लगने की परेशानी रहेगी। इससे यात्रा का समय कम होगा और हाईवे पर ट्रैफिक का बहाव पहले से ज्यादा बेहतर हो जाएगा। कैसे काम करेगा नया टोल सिस्टम? इस नई व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।     हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ेंगे     सिस्टम FASTag से लिंक होकर अपने आप टोल की राशि काट लेगा     पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के होगी     खास बात यह है कि वाहन लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे।     विदेशी तकनीक से देश को बड़ा फायदा     इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ताइवान की FETC एजेंसी के 25 से अधिक विशेषज्ञ पिछले कई महीनों से काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस नई तकनीक के लागू होने से हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी। साथ ही, टोल कलेक्शन में पारदर्शिता बढ़ने से करीब 6000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।     आगे की योजना क्या है?     सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की योजना है कि वर्ष 2026 के अंत तक देशभर के 1050 से ज्यादा टोल प्लाजा को AI आधारित मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम में बदला जाए। यदि गुजरात में शुरू किया गया यह ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के सभी नेशनल हाईवे पर टोल वसूली का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।    

Toll Tax नियमों में नई क्रांति, Fastag से अब होगा स्वचालित भुगतान

नई दिल्ली अगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश लेन-देन को पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, देश को डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 1 अप्रैल के बाद टोल प्लाजा पर केवल FASTag और UPI ही भुगतान के मान्य माध्यम होंगे। वर्तमान में कई टोल प्लाजा पर FASTag होने के बावजूद लोग कैश लेन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। नए नियम के लागू होने के बाद:     टोल प्लाजा से कैश लेन पूरी तरह हटा दी जाएगी।     वाहन चालकों को जाम से निजात मिलेगी और यात्रा समय की बचत होगी।     पारदर्शिता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होगी। सरकार 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम लाने की तैयारी में है। इसके तहत…     बिना बैरियर के टोल: शुरुआत में देशभर के 25 टोल प्लाजा पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू किया जाएगा।     सेंसर तकनीक: इस सिस्टम में कोई बैरियर नहीं होगा। वाहन बिना रुके गुजरेंगे और ऊपर लगे कैमरे व सेंसर FASTag के जरिए अपने आप टोल काट लेंगे।     सुगम यात्रा: पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा, जिससे हाईवे पर वाहनों की गति बाधित नहीं होगी।

टोल टैक्स नियमों में बदलाव, सरकार ने 70% तक की बंपर छूट का ऐलान, देखें कहां मिलेगा लाभ

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने टोल टैक्स के नियम बदले हैं। इसके तहत अब 70 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। एनएचआई के नए नियम के मुताबिक, दो लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान टोल टैक्स में 70 फीसदी की छूट देने का निर्णय लिया है। सड़क यात्री टोल टैक्स का सिर्फ 30 प्रतिशत भुगतान करेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। इस नए नियम के तहत दो-लेन (पेव्ड शोल्डर सहित) वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा करने के दौरान वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों से पूरा टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसमें 70 फीसदी की बड़ी कटौती की गई है। संशोधित नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख से लेकर परियोजना पूरा होने तक सड़क यात्रियों को तय टोल का केवल 30 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा। यानी निर्माण के दौरान यात्रियों को टोल दरों में 70 प्रतिशत की सीधी छूट मिलेगी। मालूम हो कि एनएचएआई हर साल टोल दरों में सात से 10 फीसदी की वृद्धि करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह संशोधन नए साल से लागू कर दिया गया है। सरकार ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। नया नियम उन सभी वर्तमान और नई राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगा, जहां दो-लेन राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक में अपग्रेड किया जा रहा है। चार लेन के हाईवे पर 25 फीसदी की छूट नए नियम के अनुसार, राजमार्ग के चार-लेन से छह या आठ-लेन बनने पर टोल टैक्स में 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। यानी टोल टैक्स की तय दर का 75 फीसदी भुगतान करना होगा। इसके अलावा, टोल रोड की लागत पूरी होने पर टैक्स सिर्फ 40 प्रतिशत लेने का नियम पहले से है। 25-30 हजार किमी पर चल रहा काम सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 25 से 30 हजार किलोमीटर के दो-लेन राजमार्गों को चार-लेन में अपग्रेड किया जाना है। इसके लिए करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई का हिस्सा 40 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य है। चार-लेन कॉरिडोर बनने से व्यावसायिक वाहनों की औसत रफ्तार 30-35 से बढ़कर 50 किमी प्रतिघंटा से अधिक हो जाएगी।

हैरान करने वाले आंकड़े! हरियाणा में 10 साल में टोल टैक्स में रिकॉर्ड उछाल, प्रति नागरिक पर बढ़ा बोझ

हरियाणा  हरियाणा में वाहन चालकों से ज्यादा टोल वसूला जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक गुजरात में टोल वसूली 1928.57 करोड़ रुपये कम हुई है, जबकि हरियाणा में इस अवधि में 368.57 करोड़ रुपये अधिक टोल वसूली हुई है।  हरियाणा में टोल वसूली ज्यादा और बजट आवंटन कम आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में टोल वसूली 2014-15 में 461.88 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में 2,324.95 करोड़ यानी पांच गुना बढ़ गई है। दीपेंद्र हुड्डा के सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में यह जानकारी दी। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा से तीन गुना बड़े प्रदेश गुजरात से ज्यादा टोल यहां वसूला जा रहा है। टोल वसूली के नाम पर हरियाणा की जनता की जेब खाली हो रही है। गुजरात में 62 टोल हैं, जबकि हरियाणा में 75 टोल के माध्यम से वसूली हो रही है। हरियाणा में टोल वसूली ज्यादा और बजट आवंटन कम है। केंद्र सरकार ने 3500 करोड़ के खेल बजट में से केवल 80 करोड़ ही हरियाणा को दिया है, जबकि गुजरात को 600 करोड़ का खेल बजट दिया। दीपेंद्र हुड्डा ने बताया कि हरियाणा में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा 917.1 रुपये की टोल वसूली हो रही है।

टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का फटकारा, खराब रोड पर पैसे लेने पर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NHAI यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पूछा कि अगर केरल के त्रिशूर में 65 किलोमीटर लंबे राजमार्ग को तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो किसी यात्री को 150 रुपये के टोल (शुल्क) का भुगतान करने के लिए क्यों कहा जाए। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी एनएचएआई और टोल वसूलने का अधिकार रखने वाली कंपनी ‘गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर’ द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए की। याचिका में त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल संग्रह पर रोक लगाने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सीजेआई ने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति को सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 12 घंटे लगते हैं, तो उसे 150 रुपये क्यों देने चाहिए? जिस सड़क पर एक घंटे का समय लगने की उम्मीद है, उसमें 11 घंटे और लगते हैं और उन्हें टोल भी देना पड़ता है।' सुनवाई के दौरान पीठ को सप्ताहांत में इस मार्ग पर लगभग 12 घंटे तक यातायात जाम रहने की जानकारी दी गई। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग 544 के एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति और निर्माण कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात जाम के आधार पर टोल निलंबन का आदेश दिया था। एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और टोल वसूल करने का अधिकार रखने वाली कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा, 'हम हर पहलू पर विचार करेंगे, आदेश सुरक्षित रखेंगे।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि जिस दुर्घटना के कारण यह सड़क अवरुद्ध हुई, वह महज 'दैवीय कृत्य' नहीं था, जैसा कि मेहता ने तर्क दिया, बल्कि एक ट्रक के गड्ढे में गिर जाने के कारण हुई थी। मेहता ने कहा कि जहां अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा था, वहां एनएचएआई ने सर्विस रोड उपलब्ध कराई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मॉनसून की बारिश ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें टोल को निलंबित करने के बजाय आनुपातिक रूप से कम करने का सुझाव दिया गया था। वहीं, गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा कि उसने 60 किलोमीटर का क्षेत्र अपने नियंत्रण में रखा है और उसने सर्विस रोड की रुकावटों के लिए ‘पीएसजी इंजीनियरिंग’ सहित तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को दोषी ठहराया। दीवान ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'बेहद अनुचित' बताते हुए कहा, 'जब मैं दूसरों को सौंपे गए काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, तो मेरी आय का स्रोत नहीं रोका जा सकता। मुझे सिर्फ 10 दिनों में ही 5-6 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।' पीठ ने कहा कि टोल वसूली का अधिकार रखने वाली कंपनी को उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के खिलाफ नुकसान का दावा करने की अनुमति दे दी है। दीवान ने कहा कि यह अपर्याप्त है, क्योंकि दैनिक रखरखाव लागत जारी है और राजस्व वसूली रुक गई है। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को टोल वसूली पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के प्रति अनिच्छा जताई थी। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को टोल वसूली को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि जब राजमार्ग का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है और यातायात जाम बहुत अधिक है, तो वाहन चालकों से टोल नहीं वसूला जा सकता। उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा था कि जनता और एनएचएआई के बीच संबंध 'जन विश्वास' का है और सुचारू यातायात प्रवाह बनाए रखने में विफलता ने उस विश्वास को भंग किया है।