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हरियाणा में यमुनानगर का ग्रीन रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक पौधारोपण के साथ शीर्ष पर पहुंचा

यमुना नगर. विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा की हरियाली की तस्वीर में यमुनानगर सबसे आगे दिखाई देता है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना में जंगलों से बाहर हरियाणा में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश के 4.01 करोड़ पेड़ों में 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुना नगर में हैं, यानी प्रदेश के कुल पेडों में हर सातवां पेड़ यमुनानगर जिले का है। वन क्षेत्र मामले में भी जिला दूसरे स्थान पर है। हालांकि बढ़ता प्रदूषण, गिरता भूजल, अवैध खनन व वनों पर बढ़ती तस्करी भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, पर इस बीच भी कलेसर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य व किसानों की कृषि वानिकी यमुनानगर को हरियाणा की हरित पहचान बना रहे हैं। कलेसर व किसानों ने दिलाई पहचान वन विभाग द्वारा कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार प्रदेश में जंगलों से बाहर 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ यमुनानगर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद अंबाला में 34,08,972, सिरसा में 33,18,033 और फरीदाबाद में 5,72,416 पेड़ हैं। इसके बाद कुरुक्षेत्र, पलवल और गुरुग्राम का स्थान है। पेड़ों की संख्या में यमुनानगर के आगे रहने की उपलब्धि के पीछे 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर नेशनल पार्क व वन्यजीव अभयारण्य बड़ी वजह हैं। शिवालिक की तलहटी स्थित यह क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाला वन क्षेत्र है। दूसरी ओर किसानों ने निजी भूमि पर पापलर, सफेदा व शीशम के बड़े स्तर पर रोपण कर कृषि वानिकी को नई ऊंचाई दी है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में पहचान मिली। किसान संघ के महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि किसानों की भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। 10.94% वन क्षेत्र से प्रदेश में दूसरा नंबर भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.53 प्रतिशत है। वन क्षेत्र के मामले में पंचकूला 47.4 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ पहले स्थान पर है। यमुनानगर 10.94 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत हर साल 2.2 से 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि पौधों को जीवित रखना अभी भी चुनौती बना हुआ है। औसतन 65 से 70 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं। सड़कों व नहरों किनारे यह दर कई बार 50 से 55 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इसी कारण पौधरोपण करने वाली एजेंसियों को पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा रही है। बढ़ रहे वाहन और गिर रहा भूजल स्तर प्रदेश में हर साल सात से आठ लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। कुल वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। सर्दियों में जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा व गुरुग्राम जैसे शहर गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में 19,487 तालाब होने के बावजूद भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के 143 ब्लाकों में 85 से 88 ब्लाक ओवर एक्सप्लाइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर 52 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच चुका है। यमुनानगर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले में औसत भूजल स्तर 14 से 16 मीटर के बीच है, पर यहां भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बोले- उपलब्धि बड़ी, खतरे गंभीर पर्यावरणविद् डा. रविश चौहान ने कहा कि यमुनानगर का पेड़ों की संख्या में प्रदेश में पहले स्थान पर होना एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। कलेसर के जंगल व किसानों की कृषि वानिकी ने जिले को विशेष पहचान दी है। लेकिन अवैध खनन, खैर कटान, भूजल दोहन व बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय हैं। यदि संरक्षण व संवर्धन साथ-साथ नहीं चले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। श्रेणी / सूचक    आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदेश में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)            4.01 करोड़ यमुना नगर में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)     60.94 लाख (प्रदेश के कुल पेड़ों का बड़ा हिस्सा) वन क्षेत्र (Forest Area) में पहला स्थान        पंचकूला वन क्षेत्र (Forest Area) में दूसरा स्थान        यमुनानगर यमुनानगर का कुल वन क्षेत्र प्रतिशत            10.94% हरियाणा का कुल वन क्षेत्र                           1,559 वर्ग किमी हर साल पौधारोपण का लक्ष्य                        2.2 से 2.5 करोड़ पौधे पौधों के जीवित रहने की दर                         65% से 70% प्रदेश में कुल तालाबों की संख्या                    19,487 ओवर एक्सप्लाइटेड ब्लॉक (अति-दोहित क्षेत्र)   85 – 88 ब्लॉक महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर                                  52 मीटर से अधिक गहरा सालाना पंजीकृत होने वाले नए वाहन                7 से 8 लाख

संस्कृत शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर कोर्ट की नाराजगी, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा टीजीटी संस्कृत भर्ती के संशोधित परिणाम जारी किए जाने के बाद चयन सूची से बाहर हुई कई शिक्षकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सिरसा जिले की लक्ष्मी व अन्यों ने याचिका दाखिल कर मांग की है कि लगभग दो वर्ष से सेवाएं दे रहे टीचर्स को नौकरी से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और उनको सेवा में बनाए रखने के आदेश दिए जाएं। याचिका के अनुसार लक्ष्मी व अन्यों ने वर्ष 2023 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी टीजीटी संस्कृत भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। वह आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और एचटेट पात्रता रखती हैं। भर्ती प्रक्रिया के बाद अंतिम परिणाम भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने 27 जुलाई 2024 को अंतिम परिणाम घोषित किया, जिसमें उनका चयन मेवात कैडर के लिए हुआ। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया और उन्होंने 14 अगस्त 2024 को नूंह जिले के एक सरकारी विद्यालय में टीजीटी संस्कृत के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। याचिका में कहा गया कि बाद में विभिन्न न्यायिक आदेशों के अनुपालन में आयोग ने 28 मई 2026 को संशोधित परिणाम जारी किया। इस संशोधित परिणाम में याची लक्ष्मी चयन सूची से बाहर हो गईं, जबकि वह लगभग दो वर्षों से नियमित रूप से सेवाएं दे रही हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में उनकी ओर से किसी प्रकार की धोखाधड़ी, तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने का आरोप नहीं है। नियुक्ति के बाद केवल संशोधित परिणाम के आधार पर सेवा समाप्त करना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। हाईकोर्ट के सामने क्या दलील? याचिकाकर्ता वकील जसबीर मोर ने हाई कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में यह माना है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति उसकी किसी गलती के बिना हुई हो और वह लंबे समय से सेवा दे रहा हो, तो उसे अचानक नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य में टीजीटी संस्कृत के अनेक पद अभी भी रिक्त हैं, इसलिए सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों को हटाने के बजाय समायोजन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल ही में इसी प्रकार के मामलों में हाई कोर्ट ने कुछ अन्य शिक्षकों को अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। लक्ष्मी ने भी समान आधार पर संरक्षण की मांग की है। हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि अंतिम सुनवाई तक उनकी सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगाई जाए और नियुक्ति की स्थिति यथावत रखी जाए। सभी पक्षों को सुनने का बाद कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न कोर्ट सरकार के आदेश पर रोक लगा दे।

‘इकोसिस्टम इंजीनियर्स’ की अहम भूमिका, पक्षी प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में निभा रहे बड़ा योगदान

झज्जर/चंडीगढ़. भोर की पहली किरण के साथ चहकने वाले पक्षी केवल आकाश की सुदंरता नहीं हैं, बल्कि ये धरती के वे मूक और सच्चे ''इकोसिस्टम इंजीनियर्स'' हैं, जो बिना किसी वेतन या स्वार्थ के ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर जंग लड़ रहे हैं। जब ये पंख वाले संरक्षक उड़ते हैं, तो अपने साथ जीवन का बीजारोपण करते हैं, बंजर हो चुकी जमीनों को घने वनों में तब्दील कर देते हैं, कीटों से जंगलों की रक्षा करते हैं और वनस्पतियों को नया जीवनदान देते हैं। पर्यावरणविद एवं डीएफओ सुंदर सांभरिया बताते है जब तक हम इन मूक बागवानों के आशियानों, शाखाओं और उनकी आर्द्रभूमियों को महफूज नहीं करते, तब तक ''क्लाइमेट एक्शन'' का हमारा हर संकल्प अधूरा रहेगा। दिवस विशेष की पावन वेला में इन बेजुबान संरक्षकों को बचाने का विचार ही हमारे सुरक्षित और हरे-भरे कल की असली नींव है। क्योंकि, वे सीधे तौर पर 'प्रकृति से प्रेरित' समाधानों को धरातल पर उतारते हैं। प्राकृतिक बीजारोपण और वनों का पुनर्जीवन जलवायु परिवर्तन से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका कार्बन को सोखना है, और इसमें पक्षी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे विज्ञान में ''एंडोजूकोरी'' कहा जाता है। कार्बन सोखने वाले विशाल पेड़ों का रोपण: बड़े आकार के पक्षी (जैसे हार्नबिल या टूकेन) घने और भारी कार्बन सोखने वाले पेड़ों के फल खाते हैं। जब ये पक्षी उड़ते हैं, तो दूर-दराज के बंजर क्षेत्रों या कटे हुए जंगलों में बीजों को मल के रूप में छोड़ देते हैं। प्राकृतिक खाद और त्वरित अंकुरण: जब कोई बीज पक्षी के पाचन तंत्र से गुजरता है, तो उसके पेट के एंजाइम बीज की कठोर बाहरी परत को हल्का कर देते हैं। इससे वह बीज सामान्य से अधिक तेजी से अंकुरित होता है। साथ ही, पक्षियों की बीट प्राकृतिक नाइट्रोजन युक्त खाद का काम करती है, जिससे पौधों को शुरुआती पोषण मिलता है। वनस्पतियों का जीवन चक्र: पक्षियों द्वारा होने वाले परागण को विज्ञान की भाषा में ''आर्निथोफिली'' कहा जाता है। जैव विविधता का संरक्षण: हमिंगबर्ड, सनबर्ड और हनीईटर जैसे पक्षी जब फूलों का रस चूसते हैं, तो परागकण उनकी चोंच और पंखों पर चिपक जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार विश्व की लगभग 15% से 25% जंगली पौधों की प्रजातियां पूरी तरह से पक्षियों द्वारा होने वाले परागण पर निर्भर हैं। यदि ये पक्षी न हों, तो जलवायु परिवर्तन के इस दौर में कई दुर्लभ औषधीय और जंगली वनस्पतियां हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ने से हानिकारक कीड़ों और महामारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। पक्षी इस संतुलन को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रक्षक का कार्य करते हैं। लाखों टन कीड़ों का खात्मा: दुनिया भर के कीटभक्षी पक्षी (जैसे स्वैलो, ब्लू बर्ड और गौरैया) मिलकर हर साल 40 से 50 करोड़ टन कीड़े खाते हैं। वनों और फसलों की सुरक्षा: पक्षी पेड़ों की पत्तियों को चट करने वाले कैटरपिलर और टिड्डियों को खाकर वनों को नष्ट होने से बचाते हैं। यदि पक्षी इन कीड़ों को न खाएं, तो घने जंगल समय से पहले ही सूख जाएंगे, जिससे पृथ्वी की कार्बन सोखने की क्षमता आधी रह जाएगी। संक्रमण और ग्रीनहाउस गैसों पर लगाम: मृत जीवों के अवशेषों को खाकर ये पक्षी पर्यावरण में रैबीज, एन्थ्रेक्स जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मृत जानवर खुले में सड़ते हैं, तो उनसे बड़ी मात्रा में मीथेन और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, लेकिन ये पक्षी उन्हें खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। जलवायु परिवर्तन के जैविक संकेतक: पक्षी पर्यावरण में आ रहे बदलावों को सबसे पहले भांपने की क्षमता रखते हैं। तापमान में मामूली वृद्धि होने पर भी पक्षियों के प्रवास और उनके व्यवहार में तुरंत बदलाव देखा जाता है। वैज्ञानिक पक्षियों की घटती-बढ़ती आबादी को देखकर यह सटीक अनुमान लगाते हैं कि कौन सा पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, जिससे समय रहते ''क्लाइमेट एक्शन'' लिया जा सके।

धमकी भरे पत्र से हड़कंप, नगर निगम कार्यालय समेत दो प्रमुख मंदिरों को उड़ाने की चेतावनी

चंडीगढ़. सेशन जज की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें अदालत परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। हरियाणा पुलिस ने बताया कि सोमवार को सत्र न्यायाधीश की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक ईमेल प्राप्त होने के बाद पंचकुला जिला अदालत में दहशत फैल गई, जिसमें अदालत परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। इसके चलते अदालत को खाली कराया गया और तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि अलर्ट मिलने के बाद पंचकुला पुलिस और जिला प्रशासन हरकत में आए और संभावित खतरे को खत्म करने के लिए तुरंत मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए और अदालत परिसर को अस्थायी रूप से खाली करा दिया। पुलिस ने बताया कि बम निरोधक दस्ते, खोजी कुत्तों और विशेष पुलिस टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया और उन्होंने मिलकर अदालत परिसर में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पंचकुला के सहायक पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार ने कहा, “अदालत परिसर और आसपास के इलाके की गहन तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। यह एक अफवाह थी।” सुरक्षा जांच के बाद स्थिति को पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में घोषित कर दिया गया, लेकिन पुलिस ने अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया और सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार निगरानी बढ़ा दी, पुलिस सूत्रों ने बताया। पंचकुला की डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा, “धमकी मिलते ही स्थापित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार तत्काल कार्रवाई की गई। पूरे कोर्ट परिसर की गहन जांच की गई है और स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर सेल ईमेल का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। हम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने का आग्रह करते हैं।” साइबर सेल ने ईमेल के स्रोत का पता लगाने और उसके तकनीकी पहलुओं की जांच करने के लिए जांच शुरू कर दी है। पुलिस और जिला अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं, वहीं अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जिले में कानून व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। हेडक्वार्टर में सुरक्षा जांच इस बीच, पंचकुला जिला अदालत को मिली बम की धमकी के मद्देनजर, सोमवार दोपहर को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय परिसर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और चंडीगढ़ पुलिस की टीमों द्वारा गहन सुरक्षा जांच की गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई "एहतियाती उपाय" के रूप में की गई थी, खासकर हाल ही में हुई कई घटनाओं को देखते हुए जिनमें चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में स्कूलों और अदालत परिसरों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे। उच्च न्यायालय परिसर की गहन और व्यवस्थित तलाशी के लिए खोजी दल और बम निरोधक दल सहित विशेष टीमों को तैनात किया गया था। अभियान के दौरान सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। यह कहानी इस विज्ञापन के नीचे जारी है शुक्रवार को अंबाला कोर्ट परिसर में बम की धमकी वाला ईमेल मिलने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हाल के हफ्तों में, चंडीगढ़ के कई स्कूलों के अलावा पंजाब के अमृतसर, जालंधर और पटियाला और हरियाणा के अंबाला में भी इसी तरह की बम की धमकियां मिली हैं, जो बाद में झूठी साबित हुईं।

अबोहर में 13 जून को होगा बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन, नायब सैनी की रैली की तैयारियां तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक गतिविधियाें को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 13 जून को अबोहर की नई अनाज मंडी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा इस कार्यक्रम को पंजाब में संगठन को मजबूत करने और चुनावी माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए हरियाणा सरकार के लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा गत दिवस अबोहर पहुंचे। उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया और नई अनाज मंडी को जनसभा के लिए उपयुक्त स्थान बताया।  उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां लगातार जारी हैं तथा जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम और अन्य नेताओं की सूची सार्वजनिक की जाएगी। अबोहर पहुंचने पर भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण माहर के निवास पर मंत्री गंगवा का स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर सम्मेलन और जनसभाएं आयोजित कर रही है। राजनीतिक दृष्टि से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नायब सिंह सैनी पहले ऑल इंडिया ओबीसी मोर्चा के उपाध्यक्ष और पंजाब ओबीसी मोर्चा के प्रभारी रह चुके हैं। पंजाब में संगठनात्मक कार्य के दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया था, जिससे उनकी क्षेत्र में अच्छी पहचान बनी हुई है। इसके अलावा अबोहर क्षेत्र से उनका पारिवारिक जुड़ाव भी माना जाता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी लोकप्रियता देखने को मिलती है। भाजपा कार्यकर्ताओं और युवाओं में कार्यक्रम को लेकर उत्साह है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जनसभा पंजाब में भाजपा के चुनावी अभियान का शुरुआती शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकती है और पार्टी को नए सिरे से मजबूती देने का संदेश देगी।

हरियाणा की ऐतिहासिक धरोहर को नया ठिकाना, तिगड़ाना में बनेगा मॉडर्न म्यूजियम

भिवानी. हरियाणा की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने तिगड़ाना में प्रस्तावित संग्रहालय और पर्यटन केंद्र की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ड. नरेंद्र परमार सात सदस्यीय टीम के साथ मंगलवार को तिगड़ाना पहुंचे और सजरा प्लान के आधार पर करीब 20 एकड़ क्षेत्र की निशानदेही व पैमाइश करवाई। पुरातत्व विभाग ने खेड़े की सुरक्षा के लिए बनने वाली चारदीवारी के लिए दो करोड़ 22 लाख 63 हजार रुपये लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को जमा करा दिए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले एक माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। चारदीवारी बनने के बाद पूरे पुरातात्विक स्थल को संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर का महत्वपूर्ण पड़ाव डिप्टी डायरेक्टर के अनुसार प्रस्तावित पुरातात्विक कारिडोर में तिगड़ाना के साथ-साथ राखीगढ़ी (हांसी), खरड़अलीपुर (हिसार), भिरड़ाना (फतेहाबाद), बनावली (फतेहाबाद), कुनाल (फतेहाबाद) और बालू (कैथल) जैसी ऐतिहासिक साइटों को जोड़ा जाएगा। आधुनिक संग्रहालय विकसित किया जाएगा – तिगड़ाना खेड़े की सुरक्षा और संरक्षण के लिए चहारदीवारी निर्माण को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सबसे पहले सजरा प्लान के तहत पैमाइश करवाई है। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। भविष्य में यहां आधुनिक संग्रहालय विकसित किया जाएगा, जहां खोदाई में प्राप्त पुरावशेषों को प्रदर्शित किया जाएगा। – डॉ. नरेंद्र परमार, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग चंडीगढ़

150 करोड़ के नगर निगम घोटाले का खुलासा, फर्जी खातों के जरिए उड़ाए करोड़ों रुपये

पंचकूला/चंडीगढ़. पंचकूला नगर निगम में करीब 150 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में निकाली रकम का इस्तेमाल लग्जरी गाड़ियों की खरीद, अचल संपत्तियों में निवेश और कई स्तरों पर धन के ट्रांसफर के लिए किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विशेष अदालत में रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य आरोपित कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने इस धन से बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, महिंद्रा थार, महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन और एक मोटरसाइकिल खरीदी। मार्च में मामला उजागर होने से पहले इन सभी संपत्तियों और वाहनों को बेच दिया गया। इससे पूर्व ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने अदालत में उन्हें इस पूरे कथित घोटाले का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए दावा किया कि बैंकिंग सिस्टम और पद का इस्तेमाल कर नगर निगम की रकम को अवैध तरीके से बाहर निकाला गया। जांच एजेंसी के अनुसार नगर निगम पंचकूला के नाम पर दो बैंक खाते – 2015073031 और 2046279112 कथित रूप से जाली दस्तावेजों के जरिए खोले और संचालित किए गए। ईडी के अनुसार रजत दहरा को 88.17 करोड़, स्वाति तोमर को 31.58 करोड़, कपिल कुमार को 2.36 करोड़ और विनोद कुमार को 1.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। 10 से 12 चेकों पर किए साइन कपिल कुमार ने जांच एजेंसी को बताया कि रजत दहरा ने बताया कि अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया और पुष्पिंदर सिंह के घर पर उससे 10-12 चेकों पर हस्ताक्षर करवा लिए। स्वाति तोमर ने बयान में कहा कि उसे भी बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार किया गया। उसके मुताबिक पुष्पिंदर सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर के प्रभाव में उसने पीएनबी, आइसीआइसीआइ और आइडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए। स्वाति ने यह भी कहा कि उसने कभी पुष्पिंदर सिंह, प्रीति ठाकुर, रजत दहरा, आर्यन सिंह, समर मोहन रंगा, सनी गर्ग, प्रियंका गर्ग या उनसे जुड़ी संस्थाओं को कोई कर्ज नहीं दिया और कई लाभार्थियों को वह जानती तक नहीं थी। आरोपितों को नौ जून तक रिमांड पर भेजा पुष्पिंदर सिंह ने 2020 से 2023 के बीच रजत दहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये ऋण के रूप में मिलने की बात स्वीकार की, जिनका उपयोग कथित तौर पर वाहन और संपत्तियां खरीदने में किया गया। पूर्व नगर निगम लेखा अधिकारी विकास कौशिक के हवाले से एजेंसी ने कहा कि नगर निगम और बैंक के बीच होने वाला भौतिक संवाद पुष्पिंदर सिंह और बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव के जरिए होता था। पहली जून को पुष्पिंदर सिंह की ओर से अदालत में कहा गया कि धनशोधन निवारण कानून की धारा 19 की शर्तें पूरी नहीं हुईं और हिरासत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बावजूद विशेष अदालत ने अंतिम लाभार्थियों और धन के प्रवाह की जांच के लिए उन्हें 9 जून तक ईडी रिमांड पर भेज दिया।

पश्चिमी विक्षोभ के असर से हरियाणा में मौसम यू-टर्न, कई जिलों में बारिश की चेतावनी

हिसार. प्रदेश में नया पश्चिमी विक्षोभ मंगलवार रात से सक्रिय होगा। इसके चलते बुधवार को प्रदेश में वर्षा का आरेंज और यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम में परिवर्तन छह जून तक रहेगा। अभी कुछ दिन से मौसम साफ रहने और गर्मी अधिक होने से सिरसा सबसे ज्यादा गर्म रहा। यहां का तापमान 41.2 डिग्री तक पहुंच गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। हाल ही में तीन दिन से वर्षा नहीं होने से अधिकतम तापमान में फिर से वृद्धि दर्ज की गई है। सिरसा का तापमान कितना? इसके चलते सिरसा का तापमान 41.2 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं बाकी जिलों का तापमान 36 डिग्री के आसपास चल रहा है। अब मंगलवार रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से फिर से तेज व हल्की वर्षा होने की संभावना है, जिससे तापमान में कमी आएगी। छह जून तक तापमान में ऐसे बदलाव होने से आने वाले दिनों में गर्मी से राहत मिलेगी। इस समय किसान भी फसलों की बिजाई कर रहे हैं तो यह उनके लिए लाभकारी हो सकती है। वर्षा का अलर्ट:  ऑरेंज अलर्ट : सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी। यलो अलर्ट : कैथल, जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात व पलवल                   तापमान (डिग्री सेल्सियस में) जिला     न्यूनतम तापमान     अधिकतम तापमान अंबाला     24.8     37.9 भिवानी     22.5     36 फरीदाबाद     26.4     36.4 गुरुग्राम     23.4     36.2 हिसार     25.3     38.2 करनाल      23.7     35.2 नारनौल     22     36.5 सिरसा    26.4     41.2 सामान्य तिथि से लगभग तीन दिन की देरी के साथ मानसून चार जून को केरलम पहुंच सकता है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनी अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले कुछ दिनों में इसके केरलम में प्रवेश करने की संभावना है। इसके साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। आमतौर पर मानसून एक जून के आसपास केरलम पहुंचता है। यहीं से देश में चार महीने के वर्षा मौसम की शुरुआत मानी जाती है। इस बार मौसम विभाग (आइएमडी) ने पहले 26 मई को मानसून आने का अनुमान जताया था, मगर परिस्थितियां अनुकूल नहीं बनने के कारण इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। अब विभाग का कहना है कि चार जून के आसपास केरलम में मानसून की दस्तक हो सकती है। उत्तर भारत में भी बुधवार से मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के लिए भी राहत के संकेत दिए हैं। दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में मौसम का रुख बदल सकता है।

चेचक के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता, अंबाला में 20 संक्रमितों को किया गया होम आइसोलेट

अंबाला. अंबाला कैंट के टैगोर गार्डन में चेचक के केस सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। आनन-फानन में विभाग की टीमों ने इस क्षेत्र का दौरा किया और मरीजों की जांच शुरू की। इस दौरान लोगों की स्क्रीनिंग की और जो भी मरीज सामने आए उनका उपचार शुरू कर दिया गया है। विभाग की मानें, तो अभी तक इस क्षेत्र में बीस केस सामने आ चुके हैं, जिनमें बच्चे व व्यस्क भी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर कोई कसर नहीं छोड़ रहा है, जबकि इन मरीजों का रोजाना फालोअप किया जाएगा। मरीजों को दवाइयां आदि दी हैं तथा बताया है कि कैसे अन्य लोगों को इस बीमारी से बचना है। जो भी मरीज हैं उनको उनके घर में ही आइसोलेट कर दिया गया है। फिलहाल मरीजों के स्वजनों को कहा गया है कि स्वास्थ्य पर नजर रखें और यदि दिक्कत बढ़े तो डाक्टर से संपर्क करें। इस तरह से केस आए सामने जानकारी के अनुसार टैगोर गार्डन के कुछ बच्चे एक स्थान पर खेलने व पढ़ने जाते हैं। इसके बाद उनमें चेचक के लक्षण दिखाई देने लगे। शुरुआत में यह कम थे, जबकि धीरे-धीरे यह बढ़ने लगे। इसकी जानकारी जब स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाई तो विभाग ने अपनी टीम इस क्षेत्र में भेजी। इस दौरान जब डाक्टरों ने चेक किया तो पाया कि सही में इन में चेचक के लक्षण थे और मरीज काफी बीमार हैं। इन मरीजों के सारे आवश्यक टेस्ट किए गए। डाक्टरों का दावा है कि अभी किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर नहीं है। यह बीमारी कैसे आई और कौन इसका कैरियर है, इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं है। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में और भी मरीज सामने आ सकते हैं, जबकि स्क्रीनिंग कई लोगों की हुई है। टैगोर गार्डन के दो हिस्सों में हैं मरीज स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब टैगोर गार्डन के क्षेत्र में जांच शुरू की तो दो हिस्सों में यह मरीज मिले। विभाग का कहना है कि अभी बीस मरीज सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि मरीजों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लगातार स्क्रीनिंग कर रहा है ताकि मरीजों का पता लगाया जा सके। दावा, मरीजों की संख्या ज्यादा हाे सकती है जिस तरह से एक ही क्षेत्र से करीब बीस केस चेचक के सामने आए हैं, उससे माना जा रहा है कि मरीजों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग अभी बीस केसों की पुष्टि कर रहा है। हालांकि टीमें मंगलवार को भी इन क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगी, जबकि मरीजों का फालोअप करेंगे और अन्य को भी चेक करेंगी। करीब 70 मरीजों का चेकअप, तीन वार्डों में केस स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 70 लोगों का चेकअप किया और मौके पर उनको दवाइयां दी हैं। इसी तरह बताया जा रहा है कि वार्ड 14, 16 और 18 में भी ऐसे ही केस सामने आए हैं। हालांकि अभी स्क्रीनिंग का काम किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि केसों की संख्या बीस से अधिक है और यदि लगातार स्क्रीनिंग हुई तो यह संख्या और बढ़ सकती है। यह है चेचक चेचक एक वायरस है और संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को आइसोलेट यानी कुछ दिनों के लिए अन्य लोगों से अलग रखना पड्ता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। खांसने, छींकने पर भी यह फैल सकता है। इसमें शरीर पर बड़े-बड़े दाने हो जाते हैं, जिनमें तरल पदार्थ रहता है। मरीज के लिए खाने के बरतन, कपड़े, तौलिया आदि अलग रखा जाता है। दस दिनों का विंडो पीरियड होता है और इसके बाद धीरे-धीरे यह समाप्त होने लगता है। खास है कि इस दौरान मरीज को दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए। मरीजों को घरों में आइसोलेट किया अंबाला कैंट के टैगोर गार्डन क्षेत्र से बीस मरीज चेचक के सामने आए हैं। इन मरीजों को विभाग की टीम ने दवाइयां दी हैं और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए हैं। इन को घरों में ही आइसोलेट किया गया है। मरीजों का फालोअप किया जाएगा और नियमित दवाइयां दी जाएंगी। दस दिनों का विंडो पीरियड है और इसके बाद मरीज सामान्य होने लगता है। इस में काफी सावधानी व परहेज बरतना होगा। -डॉ. सुनील हरि, महामारी नियंत्रक, नागरिक अस्पताल अंबाला शहर  

ऑपरेशन सिंदूर की जीत को समर्पित रही 15 हजार किमी की यात्रा, साइकिल से चारधाम पहुंचे दीपक शर्मा

पानीपत सौंधापुर गांव निवासी 37 वर्षीय दीपक शर्मा ने 15 हजार किलोमीटर चार धाम की यात्रा साइकिल से तय की। यह यात्रा एक साल में मई 2026 में पूरी की है। यह यात्रा ऑपरेशन सिंदूर की जीत को समर्पित रही। दीपक शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय देश की जीत पर यात्रा का संकल्प लिया था। दीपक इससे पहले दो फरवरी 2025 को पानीपत से महाकुंभ तक (एक हजार किलोमीटर) की लगभग 10 दिन की यात्रा केवल साइकिल से पूरी कर चुके हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने विभिन्न शहरों में लोगों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। दीपक ने बताया कि वह रोजाना 70 से 80 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर अपने आगे के लक्ष्य की ओर बढ़ते थे। युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे दीपक उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं, जिन्होंने अपने जुनून को समाज सेवा और राष्ट्रहित के संदेश से जोड़ दिया। दीपक ने साइकिल से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ भारत, जल बचाओ और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। साइकिल यात्रा कर 25 मई 2025 से 30 मई 2026 तक चार धाम द्वारकाधीश, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी और बद्रीनाथ के दर्शन किए। पत्नी ने भी दीपक से हुई प्रेरित दीपक की साइकिल यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनकी पत्नी जयंती बनी हैं। शादी के बाद दोनों ने ऋषिकेश से पानीपत तक की यात्रा साइकिल से पूरी की थी। पति के जज्बे और समर्पण को देखकर जयंती भी साइकिल के प्रति प्रेरित हुईं। कई यात्राओं में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलीं। दोनों दंपती आज समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन चुके हैं। पत्नी जब साइकिल से गांव पहुंची तो उनको सब देखकर सलाम कर रहे थे। साइकिल बनी पहचान, कई मंचों पर मिला सम्मान दीपक को साइकिल यात्रा के दौरान जागरूकता फैलाने के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, मंत्री कृष्णलाल पंवार, मंत्री महिपाल ढांडा, गुजरात, गोवा के राज्यपाल, गोवा के मुख्यमंत्री, कर्नाटक व केरल के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सम्मानित कर चुके हैं। दीपक का कहना है कि सम्मान उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना उनकी प्राथमिकता है। उनका सपना है कि अधिक से अधिक युवा साइकिल को अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ें। विकसित भारत का संदेश लेकर निकले चारधाम यात्रा के दौरान दीपक ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण बचाने, स्थानीय उत्पादों के उपयोग, डिजिटल लेनदेन, महिलाओं के सम्मान और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। दीपक ने एक पेड़ मां के नाम अभियान का संदेश भी दिया।