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ऑपरेशन सिंदूर की जीत को समर्पित रही 15 हजार किमी की यात्रा, साइकिल से चारधाम पहुंचे दीपक शर्मा

पानीपत सौंधापुर गांव निवासी 37 वर्षीय दीपक शर्मा ने 15 हजार किलोमीटर चार धाम की यात्रा साइकिल से तय की। यह यात्रा एक साल में मई 2026 में पूरी की है। यह यात्रा ऑपरेशन सिंदूर की जीत को समर्पित रही। दीपक शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय देश की जीत पर यात्रा का संकल्प लिया था। दीपक इससे पहले दो फरवरी 2025 को पानीपत से महाकुंभ तक (एक हजार किलोमीटर) की लगभग 10 दिन की यात्रा केवल साइकिल से पूरी कर चुके हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने विभिन्न शहरों में लोगों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। दीपक ने बताया कि वह रोजाना 70 से 80 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर अपने आगे के लक्ष्य की ओर बढ़ते थे। युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे दीपक उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं, जिन्होंने अपने जुनून को समाज सेवा और राष्ट्रहित के संदेश से जोड़ दिया। दीपक ने साइकिल से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ भारत, जल बचाओ और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। साइकिल यात्रा कर 25 मई 2025 से 30 मई 2026 तक चार धाम द्वारकाधीश, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी और बद्रीनाथ के दर्शन किए। पत्नी ने भी दीपक से हुई प्रेरित दीपक की साइकिल यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनकी पत्नी जयंती बनी हैं। शादी के बाद दोनों ने ऋषिकेश से पानीपत तक की यात्रा साइकिल से पूरी की थी। पति के जज्बे और समर्पण को देखकर जयंती भी साइकिल के प्रति प्रेरित हुईं। कई यात्राओं में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलीं। दोनों दंपती आज समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन चुके हैं। पत्नी जब साइकिल से गांव पहुंची तो उनको सब देखकर सलाम कर रहे थे। साइकिल बनी पहचान, कई मंचों पर मिला सम्मान दीपक को साइकिल यात्रा के दौरान जागरूकता फैलाने के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, मंत्री कृष्णलाल पंवार, मंत्री महिपाल ढांडा, गुजरात, गोवा के राज्यपाल, गोवा के मुख्यमंत्री, कर्नाटक व केरल के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सम्मानित कर चुके हैं। दीपक का कहना है कि सम्मान उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना उनकी प्राथमिकता है। उनका सपना है कि अधिक से अधिक युवा साइकिल को अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ें। विकसित भारत का संदेश लेकर निकले चारधाम यात्रा के दौरान दीपक ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण बचाने, स्थानीय उत्पादों के उपयोग, डिजिटल लेनदेन, महिलाओं के सम्मान और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। दीपक ने एक पेड़ मां के नाम अभियान का संदेश भी दिया।  

चारधाम यात्रा पर बढ़ती मौतों ने बढ़ाई चिंता, ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी पर उठे सवाल

देहरादून  उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को शुरू हुई थी. यानि इस यात्रा को 30 दिन पूूरे हो चुके हैं. इस दौरान आधिकारिक तौर पर यात्रा में शामिल 55 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. ज़्यादातर मौतों की मुख्य वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, विशेषकर दिल की बीमारियां और ऊंचाई पर होने वाली बीमारियां।  इसमें 30 लोगों की मृत्यु केदारनाथ यात्रा के रास्ते में हुई तो 10 लोगों की मौत बदरीनाथ यात्रा के दौरान हुई तो यमनोत्री और गंगोत्री धाम के रास्ते में 8 और 7 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है।  उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार चार धाम यात्रा में मौतों में 70–75% तक मामले खराब स्वास्थ्य यानि प्री‑एक्सिस्टिंग हार्ट डिज़ीज, हाई ब्लडप्रेसर, डायबिटीज, पल्मोनरी एडिमा आदि के कारण होते हैं. कई वृद्ध यात्री या फिटनेस कम वाले लोग ऊंचाई, थकान और तनाव के कारण अचानक हार्ट अटैक, स्ट्रोक या फेफड़ों में सूजन से मर जाते हैं।  आमतौर पर लोग यहां के चार धामों की यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करते हैं. इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है. चूंकि ये यात्रा हाई अल्टीट्यूड पर ही ज्यादा होती है, लिहाजा लोगों को हृदय संबंधी दिक्कतों से भी जूझना होता है. सलाह दी जाती है कि हृदय संबंधी दिक्कतों वाले इन यात्राओं से बचें. आगे ये जानेंगे कि आखिर ऊंचाई वाली जगहें क्यों दिल संबंधी बीमारियों वालों के लिए जानलेवा भी बन जाती हैं।  उत्तराखंड के चारों धाम ऊंचाई वाली जगहों पर ही हैं. सभी पहाड़ों की ऊंचाई पर हैं, उनमें मौसम भी ठंडा और बर्फीला रहता है, चाहे यमुनोत्री हो या फिर बद्रीनाथ. वहां गर्मी के मौसम में भी इर्द गिर्द के पहाड़ों पर बर्फ ढंकी नजर आती है. लेकिन ऊंचाई वाली जगहें कैसे हृदय स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।  अधिक ऊंचाई पर रहना अगर उन व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होता है, जिनका हृदय स्वास्थ्य अच्छा होता है. तो उन लोगों के लिए खतरनाक जो मौजूदा तौर पर हृदय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हों. बहुत से श्रद्धालु बिना पहले से डॉक्टरी जांच, फिटनेस टेस्ट या ऊंचाई के अनुकूलन के बिना सीधे चार धाम के लिए निकल पड़ते हैं।  हाई अल्टीट्यूड यानि उच्च ऊंचाई किसे माना जाता है? – समुद्र तल से 6,560 फीट से नीचे का कोई भी स्थान कम ऊंचाई वाला माना जाता है. इससे ऊपर की यात्रा मध्यम ऊंचाई और उच्च ऊंचाई वाली मानी जाती है. समुद्र तल से 6,560 से 9,840 फीट के बीच वाले स्थानों को मध्यम ऊंचाई वाला माना जाता है. समुद्र तल से 9,840 फीट से ऊपर की जगहें उच्च ऊंचाई वाली होती हैं. ये वो जगहें हैं जहां आपका शरीर ऊंचाई से संबंधित महत्वपूर्ण प्रभावों का अनुभव करने लगता है।  भारत में हाई अल्टीट्यूड एरिया के पैरामीटर्स क्या हैं? – भारतीय सेना उच्च ऊंचाई (एचए) क्षेत्रों को 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर के क्षेत्रों के रूप में परिभाषित करती है। इन्हें ऊंचाई के आधार पर तीन चरणों में वर्गीकृत किया गया है: स्टेज I: 9,000–12,000 फीट (2,750–3,657 मीटर) चरण II: 12,000-15,000 फीट (3,657-4,572 मीटर) चरण III: 15,000 फीट से ऊपर (4,572 मीटर) चार धाम की यात्रा किन ऊंचाइयों से गुजरती है? – छोटा चार धाम के दर्शन के लिए 4000 मीटर से भी ज्‍यादा ऊंचाई तक की चढ़ाई करनी होती है. इसमें कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें होती हैं तो कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें. इसलिए ये यात्रा मुश्किल मानी जाती है।  चार धाम यात्रा गढ़वाल हिमालय में ऊंचाई पर होती है, इसलिए इसे उच्च ऊंचाई वाली यात्रा कहा जाता है. चार धाम यात्रा के चार तीर्थस्थल इन ऊंचाइयों पर हैं. भारतीय सेना के हाई अल्टीट्यूड वाले पैरामीटर्स के हिसाब से भी ये सारी जगहें हाई अल्टीट्यूड एरिया हैं।  यमुनोत्री: 3,291 मीटर गंगोत्री: 3,415 मीटर केदारनाथ: 3,553 मीटर बद्रीनाथ: 3,300 मीटर केदारनाथ: 11,700 फीट गंगोत्री: 10,200 फीट हाई अल्टीट्यूड वाले इलाके आमतौर पर कैसे होते हैं? – उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आमतौर तापमान काफी ठंडा होता है. ज्यादा बारिश होती है, तेज हवाएं चलती हैं. कम वायु दबाव होता है और हवा में ऑक्सीजन का स्तर भी कम होने लगता है।  इस ऊंचाई के लिए कई तरह के दिशा निर्देश दिए जाते हैं 1. धीरे-धीरे चढ़ो 2. एक दिन में कम ऊंचाई से सीधे 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर जाने से बचें 3. एक बार 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर सोने की ऊंचाई को प्रतिदिन 1,600 फीट (500 मीटर) से अधिक नहीं बढ़ाएं 4. प्रत्येक 3,300 फीट (1,000 मीटर) पर अनुकूलन के लिए एक अतिरिक्त दिन की योजना बनाएं. उच्च ऊंचाई आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती है? – जब आप अधिक ऊंचाई पर होते हैं, तो पतली हवा के कारण आपके फेफड़ों को कम ऑक्सीजन प्राप्त होती है. यह आपके फेफड़ों और हृदय पर इसलिए ज्यादा जोर बढ़ा देता है क्योंकि आपके शरीर के बाकी हिस्सों को भी लगातार ऑक्सीजन युक्त रक्त की जरूरत होती है. जिसकी मात्रा पर अशर पड़ने लगता है. इसी वजह से बहुत अधिक ऊंचाई पर बहुत से स्वस्थ लोगों को भी चक्कर आना, सिरदर्द और थकान जैसे दिक्कतें होने लगती हैं।  अगर कोई हृदय संबंधी दिक्कतों से गुजर रहा है तो इस ऊंचाई पर क्या अनुभव करता है? – यदि आप किसी हृदय संबंधी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का अनुभव करते हैं तो अधिक ऊंचाई का आपके शरीर पर और भी अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को आमतौर पर ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचने के तुरंत बाद हृदय गति और रक्तचाप दोनों में बढोतरी महसूस होगी. ये समस्याएं आमतौर पर रात में और ज्यादा हो जाएंगी।  अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी होता है क्या? – इस बात के प्रमाण हैं कि अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं. हार्वर्ड स्कूल ऑफ ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक ऊंचाई पर रहने वाले व्यक्तियों में इस्केमिक हृदय रोग से मरने की संभावना कम होती है. उनकी जीवन प्रत्याशा आमतौर पर लंबी होती है।  क्या हृदय रोग से पीड़ित रोगी अधिक ऊंचाई पर यात्रा कर सकते हैं? – जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि … Read more

चारधाम यात्रा का आरंभ हरिद्वार से ही क्यों? जानें परंपरा और धामों की खासियत

चारधाम यात्रा 2026 का शंखनाद हो चुका है. 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. परंपरा के अनुसार, 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 23 अप्रैल को भगवान बद्रीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पावन यात्रा की शुरुआत हमेशा हरिद्वार से ही क्यों होती है? और इन चारों धामों का धार्मिक महत्व क्या है? आइए, विस्तार से जानते हैं. हरिद्वार से ही क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा? हिंदू धर्म में हरिद्वार को देवताओं का द्वार कहा जाता है. मान्यता है कि यहीं से देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र तीर्थों की यात्रा का प्रवेश द्वार शुरू होता है. यह शहर गंगा नदी के किनारे बसा है और यहां स्नान करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है. इसलिए श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर निकलने से पहले हरिद्वार में गंगा स्नान कर आत्मशुद्धि करते हैं. धार्मिक मान्यता यह भी है कि बिना हरिद्वार से यात्रा शुरू किए चारधाम यात्रा अधूरी मानी जाती है. यही कारण है कि सदियों से यह परंपरा चली आ रही है. गंगोत्री धाम की कथा गंगोत्री धाम को मां गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं. माना जाता है कि गंगा का वास्तविक उद्गम गौमुख ग्लेशियर से होता है, लेकिन गंगोत्री धाम में ही मां गंगा की पूजा की जाती है. यमुनोत्री धाम की कथा यमुनोत्री धाम को मां यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना सूर्य देव और संज्ञा की पुत्री हैं और यमराज की बहन हैं. कहा जाता है कि यमुनोत्री में स्नान करने से मृत्यु का भय समाप्त होता है और व्यक्ति को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है. केदारनाथ धाम की कथा केदारनाथ धाम भगवान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए शिव की शरण में गए. भगवान शिव उनसे नाराज होकर बैल का रूप धारण कर यहां छिप गए. बाद में जब पांडवों ने उन्हें पहचान लिया, तो शिव जी ने उन्हें दर्शन दिए और यहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए. बद्रीनाथ धाम की कथा बद्रीनाथ धाम भगवान भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान विष्णु यहां तपस्या कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी ने उन्हें ठंड से बचाने के लिए बद्री (जंगली बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर लिया. इसी कारण इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा. यह भी माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. क्यों खास मानी जाती है चारधाम यात्रा? चारधाम यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानी जाती है. गंगोत्री (जल) यमुनोत्री (शक्ति) केदारनाथ (शिव) और बद्रीनाथ (विष्णु) ये चारों धाम जीवन के चार महत्वपूर्ण तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा पर निकलते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं.

चार धाम यात्रा की शुरुआत, गंगोत्री मंदिर-यमुनोत्री मंदिर-बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तारीख जानें

उत्तराखंड उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में चारधाम यात्रा- 2026 के लिए बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य शिविरों का निरीक्षण किया और यात्रा को सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाने का संकल्प दोहराया। सरकार इस साल ग्रीन चारधाम, और प्लास्टिक मुक्त केदारनाथ पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर और रोपवे जैसी सुविधाओं से यात्रा अब और भी तेज होगी। यात्रा मार्ग पर बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बसें रवाना सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को ऋषिकेश में चारधाम यात्रा-2026 के लिए बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने तीर्थयात्रियों के लिए लगाए गए मुफ्त स्वास्थ्य शिविर का जायजा भी लिया। मुख्यमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आए यात्रियों का स्वागत किया। सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा आस्था और साधना का रास्ता है। इस यात्रा से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्वच्छता और पर्यावरण पर जोर सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड के कण-कण में भगवान रहते हैं। इस पवित्रता को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। सरकार ने इस साल पर्यावरण के अनुकूल यात्रा और प्लास्टिक मुक्त केदारनाथ का लक्ष्य रखा है। रास्तों पर सफाई के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। सभी गाड़ियों में कूड़ेदान रखना जरूरी कर दिया गया है। सभी से अपील है कि जैसे हम अपने घर के मंदिर को साफ रखते हैं, वैसे ही देवभूमि को भी स्वच्छ और पवित्र रखना है। कब-कब किन धाम के खुलेंगे कपाट? बता दें कि चारधाम यात्रा के पहले दिन रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। वहीं 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के खोले जाएंगे। इसके बाद अगले महीने 23 मई को श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुलेंगे। इस बार चारधाम यात्रा में कई बदलाव किए गए हैं। इस बार दर्शन के दौरान भीड़ से बचने के लिए टोकन सिस्टम लागू होगा। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है ताकि यात्रियों को कोई परेशानी ना हो। स्वास्थ्य पर भी फोकस मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण के काम तेजी से हो रहे हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में भी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक के लिए रोपवे परियोजनाओं का काम भी आगे बढ़ रहा है। केदारनाथ में मेडिकल अस्पताल तैयार हो गया है। बद्रीनाथ में 50 बेड का अस्पताल जून तक तैयार हो जाएगा। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है।

चार धाम यात्रा की तारीख तय, अक्षय तृतीया से यमुनोत्री धाम के दर्शन शुरू

देहरादून हिंदू धर्म में उत्तराखंड स्थित चार धाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) बेहद ही महत्वपूर्ण व पवित्र तीर्थयात्रा मानी गयी है। ये तीर्थयात्रा अमूमन अप्रैल या मई के महीने से शुरू होकर अक्टूबर और नवंबर के महीने तक चलती है। इस साल विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोल दिए जाएंगे। यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ होगा। रविवार, 19 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा अर्चना की जाएगी, जिसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का शुभारंभ भी हो जाएगा। इसके बाद अगले छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यमुनोत्री धाम में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे। अक्षय तृतीया पर खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम यात्रा तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि इस साल 6 गते बैसाख, अक्षय तृतीया शुक्ल पक्ष, कृतिका नक्षत्र, कर्क लग्न और आयुष्मान योग में 19 अप्रैल रविवार को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर मां यमुना जी के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। मंगलवार को यमुना जयंती के शुभ अवसर पर मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली मंदिर में यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त विधि विधान से निकाला गया। इस दौरान श्री यमुनोत्री मंदिर समिति, समस्त तीर्थ पुरोहित समाज और पंच पंडा समिति की उपस्थिति में पंचांग गणना के बाद कपाट खुलने की तिथि और समय की औपचारिक घोषणा की गई। बता दें कि इस बार 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल सकते हैं। इस अवसर पर मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल, पंच पंडा समिति के सचिव गिरीश उनियाल, मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल, कृतेश्वर उनियाल, मनमोहन उनियाल, ज्योति प्रसाद उनियाल, प्रदीप उनियाल, गिरीश उनियाल, गौरब उनियाल, संजीव उनियाल, विपिन उनियाल सहित अन्य तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे। चारधाम यात्रा के लिए बन रहे ग्रीन कार्ड एआरटी प्रशासन ऋषिकेश रावत सिंह के अनुसार, 23 मार्च से कार्यालय में पूजा-अर्चना, यज्ञ-हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ग्रीन कार्ड बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने चारधाम यात्रा-2026 के सुगम, सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित संचालन के दृष्टिगत समस्त व्यावसायिक सवारी वाहनों के संचालकों और चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों का समय परीक्षण कराकर, आवश्यक वैध दस्तावेजों के साथ कार्यालय में उपस्थित होकर ग्रीनकार्ड प्राप्त करें। बिना ग्रीनकार्ड के किसी भी सवारी वाहन को यात्रा मार्ग पर संचालित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

शानदार टूर पैकेज के साथ चार धाम यात्रा होगी आसान, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली भारत में ऐसे कई सारे धार्मिक स्थल हैं, जहां हर साल लोग भगवान के दर्शन करने जाते हैं। इन्हीं दार्शनिक स्थलों में चार धाम मंदिर भी शामिल है, जहां देश-विदेश से लोग दर्शन करने आते हैं। इस साल होने वाली चार धाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन पहले भी शुरू हो चुके हैं। वहीं, अब आईआरसीटीसी लोगों को चार धाम के दर्शन कराने के लिए अपने नए टूर पैकेज का एलान किया है। तो चलिए जानते हैं इस पैकेज से जुड़ी सभी जरूरी डिटेल्स- यहां से शुरू होगी यात्रा आईआरसीटीसी (IRCTC Tour Package) ने यात्रा की शुरुआत दिल्ली से तय की है। कुल 12 दिन और 11 रातों का यह पैकेज सड़क मार्ग से पूरा होगा। यात्रियों को कंफर्ट वेरिएंट की सुविधा दी जाएगी और प्रत्येक प्रस्थान पर 20 श्रद्धालुओं का समूह यात्रा करेगा। यह यात्रा 01, 12, 24 सितम्बर और अक्टूबर में 01, 15 से शुरू होगी।   पैकेज का किराया (प्रति यात्री) सिंगल ऑक्युपेंसी : ₹79,000 डबल ऑक्युपेंसी : ₹54,000 ट्रिपल ऑक्युपेंसी : ₹49,000 बच्चा (5-11 वर्ष, बिस्तर सहित) : ₹30,000 बच्चा (5-11 वर्ष, बिना बिस्तर) : ₹22,000 यह यात्रा दिल्ली से शुरू होकर हरिद्वार, बरकोट, यमुनोत्री, उत्तरकाशी, गंगोत्री, गुप्तकाशी, केदारनाथ, बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग/श्रीनगर होते हुए वापस हरिद्वार और फिर दिल्ली पर समाप्त होगी। श्रद्धालु मार्ग में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ धामों के दर्शन करेंगे। पैकेज में शामिल सुविधाएं सभी स्थानों पर होटल आवास मिलेगा। दिल्ली से लेकर वापसी तक एसी टेम्पो ट्रैवलर द्वारा यात्रा (हरिद्वार के बाद पहाड़ी क्षेत्र में एसी बंद रहेगा) होगी। इसके साथ नाश्ता और रात का भोजन शामिल होगा। पैकेज में कौन-कौन सी सेवाएं शामिल नहीं हेलीकॉप्टर चार्ज, पोनी-पालकी शुल्क, गाइड फीस, व्यक्तिगत खर्च, अतिरिक्त भोजन या दर्शनीय स्थल आदि को यात्री को स्वयं वहन करना होगा।