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राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस की रणनीति, कमलनाथ के नाम की चर्चा, और ये भी नाम हो सकते हैं उम्मीदवार

भोपाल 

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस में गहन मंथन चल रहा है। आंकड़े के हिसाब से पार्टी भले ही मजबूत हो, लेकिन परिस्थितियां कुछ ओर ही बता रही हैं। ऐसे में दिल्ली दरबार कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है। उन्हें समझ आ रहा है कि कमलनाथ ही हैं जो कि सीट जीत कर दे सकते हैं। हालांकि राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को ही बताया जा रहा है तो दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि पीसी शर्मा को मौका दिया जाए।

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं जिसके चुनाव होना हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से दो पर भाजपा की एक तरफा जीत होनी है तो तीसरी सीट के लिए 58 वोट चाहिए और कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे, लेकिन विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है तो दतिया विधायक राजेंद्र भारती भी संकट में है।

गहन मंथन जारी
इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी नहीं मिलेगा। इस गणित से 63 वोट ही बच रहे हैं जिससे रिस्क फेक्टर बड़ा हो गया। वहीं, हरियाणा में क्रॉस वोटिंग कराके भाजपा खेल कर चुकी है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस में प्रत्याशी को लेकर गहन मंथन चल रहा है। कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन है जो मध्य प्रदेश के मंदसौर से सांसद भी रह चुकी हैं और वर्तमान में मैनेजमेंट संभाल रही हैं।

 रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी अपने वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मैदान में उतार सकती है। उनके खड़े होने पर कांग्रेस का कोई भी विधायक क्रॉस वोटिंग नहीं कर पाएगा। तीसरी सीट फिर से पार्टी के खाते में आ जाएगी नहीं तो राज्यसभा से आकड़ा फिर कम हो जाएगा। इधर, एक समीकरण ये भी चल रहा है कि भाजपा अगर आदीवासी कार्ड खेलती है तो कमलनाथ खुद भी बाला बच्चन के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं जिसके लिए वे खुद भी लॉबिंग कर सकते हैं।

दिग्गी का पीसी शर्मा पर दांव
वैसे तो राज्यसभा जाने के लिए कांग्रेस के कई नेता उत्साहित हैं। दलित कोटे से सज्जनसिंह वर्मा भी चाहते हैं कि उन्हें पार्टी मौका दे तो मौजूदा राज्यसभा सदस्य दिग्जिय सिंह ने पीसी शर्मा का नाम आगे किया जो कि कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे। वे ब्राह्मण समाज को उपकृत कर पार्टी की पकड़ को मजबूत होने का दावा कर रहे हैं। इधर, कमलेश्वर पटेल का नाम भी दावेदारों की सूची में दर्ज हो गया है।

खींचतान में हो न जाए नुकसान
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच खींचतान जगजाहिर है। दोनों नेता एक-दूसरे को बिलकुल पसंद नहीं करते हैं। सिंघार की पटरी तो दिग्विजय सिंह से भी नहीं बैठती है, ये बात सिंह को भी समझ में आ गई थी। बड़ी बात ये है कि नाथ के आने पर पटवारी और सिंघार दोनों खुलकर मदद कर सकते हैं। उन्हें मालूम है कि नाथ सभी विधायकों से समन्वय बनाकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लेंगे। ये भी हो सकता है कि भाजपा अपना प्रत्याशी भी नहीं उतारे।

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