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धान तस्करी पर कसा शिकंजा, बॉर्डर एरिया से 1370 क्विंटल धान बरामद

गरियाबंद

छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमावर्ती क्षेत्रों में धान तस्करी पर लगातार चल रही कार्रवाई है. सीमा का आड़ लेकर धान को एक राज्य से दूसरे राज्य में खपाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लगभग एक महीने में पुलिस की मुस्तैद कार्रवाई ने तस्करों की कमर तोड़ दी है.

मगररोडा जांच नाका से महज 500 मीटर दूर पर स्थित ओडिसा चंदाहांडी थाना क्षेत्र के जामलीपारा में ट्रक से धान लाकर डंप किया गया, जिसे पिकअप के जरिए देवभोग इलाके में लाने की तैयारी थी. देवभोग पुलिस ने पुख्ता सूचना पर मौके पर पहुंची तो ट्रक डंप कर भाग चुका था.

थाना प्रभारी फैजुल शाह हुदा ने बताया कि किसी भी स्थानीय ने इस धान को अपना नहीं होना बताया. जिसके बाद चंदाहांडी पुलिस और वहां के फूड इंस्पेक्टर पृथ्वी राज मेहर को सूचना कर पुलिस ने 25 तो राजस्व अमला ने 6 वाहन किए जब्त कर लिया गया. पुलिस के इस संयुक्त कार्रवाई के बाद तस्करों का सीमापार डंपिंगयार्ड बनाने की रणनीति भी ध्वस्त पड़ गई. थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि गैर कानूनी कार्य में सीमाएं बाधा नहीं बनेंगे. कानून अपना काम करना जानती है, पुलिस कप्तान के दिशा निर्देश में सीमावर्ती पुलिस थानों में समन्वय बना कर आगे भी इसी तरह कार्रवाई किया जाएगा.

इधर अमलीपदर में भी बीती रात तीन बड़ी कार्रवाई ने बिचौलियों के नींद उड़ा दिया है. थाना प्रभारी दिलीप मेश्राम ने बताया कि अवैध तस्करी रोकने बनाई टीम को दो ट्रेक्टर और एक मेटाडोर में ओडिसा के रास्ते अवैध धान आने की सूचना मिली थी. सीमा पार के चुके वाहन चालक को भनक लगी तो वापस जाने की आपाधापी में लगा रहा, लेकिन मुस्तैद टिम ने पकड़ लिया. मेश्राम ने बताया कि रात को ही कार्रवाई में 314 पेकेट धान जब्त किया गया है, दो ट्रेक्टर में कूल 110 पैकट शेष मात्रा मेटाडोर में जब्त हुआ है.

पुलिस ने 25 तो राजस्व अमला ने 6 वाहन किए जब्त

पिछले 27 दिनों में देवभोग पुलिस ने 17 वाहन और डंप मिलाकर 670 क्विंटल धान जब्त किया है.जबकि राजस्व अमला ने 6 वाहनों के साथ 200 क्विंटल धान जब्त किया. अमलीपदर पुलिस ने भी 8 वाहनों में 500 क्विंटल जप्त किया है. इस तरह अब तक 28 वाहन और 1370 क्विंटल धान जप्त किया गया. ओडिसा के इस अवैध धान के एवज में सरकार को लगभग 45 लाख का भुगतान करना पड़ता.

कार्रवाई से खरीदी आधी हो गई

अंतिम खरीदी तारीख तक देवभोग ब्लॉक के 12 खरीदी केंद्र में 8 हजार क्विंटल की खरीदी हुई थी.जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16 हजार पार कर गया था. ऐसा ही परिवर्तन गोहरापदर ब्रांच के अधीन आने वाले 9 से ज्यादा सीमावर्ती खरीदी केंद्रों में देखने को मिला है. लगातार वाहनों के धर पकड़ के चलते इस बार कोचियों और सप्लायर में हड़कंप मचा हुआ है. प्रशासन का दबाव आगे भी इसी तरह बना रहा तो सरकार को बोगस खरीदी में होने वाले प्रति वर्ष के करोड़ों का नुकसान, इस बार नहीं होगा.

ओडिसा से धान आवक की दो बड़ी वजह

1. स्थानीय उत्पादन तय मात्रा से कम

देवभोग तहसील क्षेत्र की औसतन पैदावारी प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल है. अमलीपदर तहसील क्षेत्र में भी लगभग यही स्थिति.सरकार समर्थन मूल्य में प्रति एकड़ रकबे में 21 क्विंटल खरीदी करती है. ऐसे में खरीदी के लिए प्रावधिक मात्रा और उत्पादन मात्रा के अंतर के लिए किसान ओडिसा की पैदावारी पर निर्भर है.पिछले पांच सालों से ओडिसा के धान पर निर्भरता बढ़ गई है.

2. उड़ीसा की धान खरीदी नीति में झोल झाल

दो साल पहले तक ओडिसा में 2300 प्रति क्विंटल में धान खरीदी होती थी.सत्र 2024 से बोनस 800 देना शुरू कर 3100 में खरीदी तय तो किया पर,खरीदी प्रक्रिया मिलर के सहूलियत पर निर्भर होती है.इस साल 28 नवंबर से समर्थन मूल्य खरीदी शुरू कर दिया गया,लेकिन मिलर से अनुबंध नहीं होने के कारण ,धान खरीदी बंद है.कब शुरू होगा,आगे क्या होगा यह बताने वाले भी नहीं.ऐसे में बिचौलिए ओडिसा के किसान के घर घर पहुंच कर 2000 में धान नगद खरीद रही,जिसे 2300 से 2500 रुपए तक में सीजी सीमावर्ती किसान ओडिसा का धान खरीदी करने तैयार हैं.

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