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दिल्लीवालों को मिलेगी बड़ी सौगात, यमुना खादर में बनेगा साइकिलिंग ट्रैक और ग्रीन कॉरिडोर; जानें रूट

नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के निवासियों के लिए बहुत ही अच्छी खबर है। दरअसल, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा यमुना के खादर (फ्लडप्लेन) के किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिलिंग ट्रैक विकसित करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अब आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्राधिकरण ने पहले चरण के लिए निविदाएं (टेंडर्स) आमंत्रित की हैं, जो यमुना के पश्चिमी तट के साथ 24 किलोमीटर लंबे हिस्से को कवर करेगा। यह ओल्ड रेलवे ब्रिज से नेशनल हाईवे 9 (NH-9) तक होगा। इसके निर्माण की अनुमानित लागत 16.4 करोड़ रुपये तय की गई है।

वजीराबाद से सराय काले खां तक मार्ग विकसित किया जाएगा
इस योजना के अंतर्गत वजीराबाद के पास पुराने रेलवे पुल से सराय काले खां के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग-24 तक साइकिल ट्रैक बनाया जाएगा। इसके अलावा पैदल चलने वालों के लिए अलग रास्ते और यमुना किनारे हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा। नदी के पश्चिमी किनारे पर 75 से 100 मीटर तक चौड़ा सार्वजनिक हरित गलियारा बनाने का प्रस्ताव है।

6 से 7 महीने में बनकर होगा पूरा
नदी के दोनों ओर विकसित किए जाने वाले इस ट्रैक को पूरा होने में लगभग छह से सात महीने का समय लगने की उम्मीद है। इस परियोजना में ट्रैक का निर्माण, सोलर पैनल और एलईडी बोलार्ड्स व लाइट्स लगाना, अन्य लाइटिंग कार्य और बागवानी विकास (हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट) के जरिए रूट के किनारे बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित करना शामिल है।

साइकिलिंग कॉरिडोर में पारगम्य सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा और इसमें डॉकिंग स्टेशन, पार्किंग क्षेत्र, छायादार विश्राम स्थल, व्यूइंग डेक और वे-फाइंडिंग (दिशा-सूचक) सिस्टम शामिल होंगे। अधिकारियों ने बताया, "ये सभी तत्व खादर के पारिस्थितिक (पारिस्थितिकी संबंधी) स्वरूप को नुकसान पहुंचाए बिना आसपास के परिदृश्य के साथ प्राकृतिक रूप से घुल-मिल जाएंगे।"

पूरा होने के बाद, यह ट्रैक रिवरफ्रंट के साथ एक निरंतर मनोरंजक मार्ग प्रदान करने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह गैर-मोटर चालित आवाजाही (Non-motorised mobility) को बढ़ावा देगा और खादर तक नियंत्रित सार्वजनिक पहुंच की अनुमति देगा।

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत हो रहा काम
दिल्ली मास्टर प्लान 2047, जिसे इस वर्ष 20 अगस्त को अधिसूचित किया गया था, में यमुना खादर के किनारे समर्पित 52 किलोमीटर लंबे साइकिलिंग और वॉकिंग ट्रैक का प्रस्ताव है। तीन चरणों में विकसित किए जाने के लिए नियोजित, यह ट्रैक वजीराबाद यमुना पुल से NH-9 तक और आगे कालिंदी कुंज बायोडायवर्सिटी पार्क तक फैला होगा। इस योजना का उद्देश्य ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना और राजधानी के कई पार्कों को आपस में जोड़ना है।

इस साल अप्रैल में, प्रस्तावित रूट में बदलाव के बाद परियोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रमुख समिति से मंजूरी मिल गई थी। एक अधिकारी ने कहा, "यह मंजूरी विशेषज्ञों द्वारा रूट के संरेखण (अलाइनमेंट) पर चिंता व्यक्त किए जाने के बाद आई है। योजना में आवश्यक संशोधन करके मुद्दों को हल कर लिया गया।"

पर्यावरणीय संवेदनशीलता और साल भर इसकी उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों के सुझावों के बाद पहले चरण की योजना में संशोधन किया गया था। तदनुसार, मार्ग को नदी के संवेदनशील किनारों से दूर हटा दिया गया है और अब यह मौजूदा तटबंधों (एमबैंकमेंट्स) और स्थापित रास्तों के साथ आगे बढ़ेगा।

डीडीए की व्यापक योजना का हिस्सा

  • यह परियोजना यमुना खादर के 1,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को जैव-विविधतापूर्ण और सार्वजनिक रूप से सुलभ स्थानों के रूप में पुनर्स्थापित करने की डीडीए की व्यापक योजना का हिस्सा है। प्राधिकरण ने शहर में खादर के किनारे 13 परियोजनाएं शुरू की हैं।
  • इनमें से कई, जिनमें असीता, बांसेरा, कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वाटिका और अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क शामिल हैं, कई घाटों पर विकास कार्यों के साथ पहले ही पूरे हो चुके हैं। मयूर नेचर पार्क और एक इको-टूरिज्म ज़ोन सहित अन्य परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
  • अधिकारियों के अनुसार साइकिलिंग ट्रैक इन पुनर्स्थापित स्थलों को आपस में जोड़ेगा। ये पहल नदी के पारिस्थितिक परिदृश्य को पुनर्स्थापित और पुनर्जीवित करने के साथ-साथ जनता को वहां तक नियंत्रित पहुंच प्रदान करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
  • अधिकारियों ने कहा कि यह साइकिलिंग कॉरिडोर केवल एक परिवहन परियोजना नहीं होगी, बल्कि दिल्लीवासियों और नदी के बीच संबंधों को मजबूत करने के एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा होगी।
  • उन्होंने कहा कि गैर-मोटर चालित परिवहन को बढ़ावा देकर, इस साइकिलिंग ट्रैक से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और मनोरंजक अवसरों के विस्तार की भी उम्मीद है।

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