samacharsecretary.com

छठ महापर्व के लिए खास तरीके से बनता है मिट्टी का चूल्हा, शुद्धता के लिए कुम्हार रखते हैं कड़े नियम

रांची
 लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियां राजधानी में शुरू हो गई हैं। दिवाली के छह दिन बाद मनाए जाने वाले इस पर्व में शुद्धता और पवित्रता का विशेष महत्व है। यही वजह है कि छठ का प्रसाद बनाने के लिए आज भी मिट्टी के नए चूल्हे का इस्तेमाल करने की परंपरा कायम है।

खास बात यह है कि इस चूल्हे को बनाने वाले कुम्हार भी इसकी पवित्रता का पूरा ध्यान रखते हैं। चूल्हा बनाने से पहले स्नान करना और मांस-मछली का सेवन नहीं करना उनकी परंपरा का हिस्सा है। हरमू और आसपास के क्षेत्रों में कई कुम्हार परिवार वर्षों से छठ के लिए मिट्टी के चूल्हे तैयार करते आ रहे हैं। जुमार नदी के पास रहने वाले कुम्हार हेमंत बताते हैं कि छठ के चूल्हे बनाने की तैयारी दिवाली के साथ ही शुरू हो जाती है।

इसके निर्माण में गांव की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। मिट्टी में गोबर और कुट्टी मिलाकर चूल्हे को आकार दिया जाता है। इसे तैयार करने से लेकर सुखाने तक विशेष सावधानी बरती जाती है। चूल्हा बनाने वाले कारीगर स्नान के बाद ही काम शुरू करते हैं और इस दौरान मांस-मछली का सेवन भी नहीं करते हैं।

45 दिनों तक चलती है तैयारी, बिहार-बंगाल से भी मंगाए जाते हैं चूल्हे
छठ पर्व को लेकर मिट्टी के चूल्हों की मांग काफी बढ़ जाती है। स्थानीय कुम्हारों के साथ बड़ी-बड़ी दुकानों में भी इसकी बिक्री की तैयारी शुरू हो गई है। दुकानदार दिवाली के बाद दुकानों के बाहर अलग स्टाल लगाकर छठ की पूजन सामग्री सजाते हैं। कई दुकानदार बिहार और बंगाल से भी मिट्टी के चूल्हे मंगवाते हैं।

इन चूल्हों को सामान्य सामान से अलग रखा जाता है। स्टाल पर काम करने वाले लोगों की साफ-सफाई और खानपान का भी ध्यान रखा जाता है। चूल्हे तैयार करने की प्रक्रिया में करीब 45 दिन तक लग जाते हैं। बाजार में इनकी कीमत 100 से 200 रुपये तक है।

खरना से लेकर ठेकुआ तक इसी चूल्हे पर बनता है प्रसाद
छठ पर्व में मिट्टी के चूल्हे का इस्तेमाल केवल परंपरा नहीं, बल्कि शुद्धता और आस्था से भी जुड़ा है। मान्यता है कि जिस चूल्हे पर सामान्य भोजन बनाया जाता है, उस पर छठ का प्रसाद तैयार नहीं करना चाहिए। इसलिए व्रती नया मिट्टी का चूल्हा खरीदते हैं

इसी पर खरना का गुड़ वाली खीर और रोटी के साथ-साथ ठेकुआ सहित अन्य प्रसाद तैयार किए जाते हैं। प्रकृति और पंचतत्वों की उपासना के इस पर्व में मिट्टी के चूल्हे का विशेष महत्व है। यह परंपरा धरती के प्रति सम्मान और लोक आस्था का भी प्रतीक है। आधुनिक दौर में गैस और बिजली के विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद मिट्टी के चूल्हे के प्रति लोगों की आस्था कम नहीं हुई है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here