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Gift Nifty के संकेत ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता, क्या भारतीय बाजार में आने वाली है बड़ी गिरावट?

नई दिल्ली 
भारत का शेयर बाजार शुक्रवार 29 मई को भारी दबाव के साथ खुल सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) फ्यूचर्स करीब 2% टूटकर 23,580 के स्तर पर पहुंच गया, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग देखने को मिल सकती है। गुरुवार को बकरीद के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद था, लेकिन वैश्विक बाजारों में आई तेज हलचल का असर अब शुक्रवार को भारतीय बाजार पर दिखाई देने की संभावना है।

दरअसल, हालात तब और बिगड़ गए, जब अमेरिका ने ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर ताजा हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री रास्तों के आसपास तनाव काफी बढ़ गया है। कुवैत में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा उछलकर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 91 डॉलर के ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.4% गिरा, दक्षिण कोरिया का KOSPI 1% टूटा और जापान का निक्केई भी लाल निशान में बंद हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

हालांकि, भारतीय बाजार ने बुधवार को अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 142 अंक गिरकर 75,868 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली 7 अंक टूटकर 23,907 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि India VIX यानी बाजार का डर सूचकांक 6% गिरा, जिससे यह संकेत मिला कि अभी घबराहट पूरी तरह हावी नहीं हुई है। लेकिन अब ताजा भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद बाजार का मूड बदल सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,835–23,922 का स्तर बेहद अहम रहेगा। अगर बाजार इस दायरे के नीचे फिसलता है, तो कमजोरी और बढ़ सकती है। वहीं, अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर टिकता है, तो आने वाले दिनों में 24,200–24,300 तक की तेजी भी संभव है।

अब निवेशकों की नजर पूरी तरह मिडिल-ईस्ट (Middle East) के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेंगी। अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।

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