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हवारा की पैरोल याचिका पर सुनवाई, अदालत ने दिल्ली और NCT प्रशासन से मांगा जवाब

चंडीगढ़
 पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी करार दिए गए जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली के डायरेक्टर जनरल (प्रिज़न) को नए सिरे से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पूर्व में जारी नोटिस के बावजूद दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही अपना-अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। वहीं, दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से जवाब न आने पर अदालत ने दोबारा नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 6 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी।

दोबारा आतंकी संगठन से जुड़ सकते हैं हवारा
इससे पहले सीबीआई ने जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए उसकी रिहाई का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने और दोबारा आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। सीबीआई ने कहा कि वह पहले भी जेल से फरार हो चुका है। वर्ष 2004 में हवारा और उसके साथियों ने सुरंग खोदकर बुरैल जेल से फरार होने में सफलता हासिल की थी।

हवारा का बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से संबंध
हालांकि उसे करीब एक साल बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। हवारा का संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठनों से रहा है। उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे किसी भी सूरत में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए।

हवारा ने मां की सेवा के लिए मांगी पैरोल
हवारा ने अपनी वृद्ध और बीमार मां की देखभाल के लिए चार सप्ताह की पैरोल देने की मांग की है। याचिका में उसका कहना है कि वह पिछले लगभग 28 वर्ष 9 माह से जेल में बंद है और इस दौरान उसने कभी पैरोल की मांग नहीं की।

उसने यह भी दावा किया कि उसके पैतृक गांव हवारा कलां (जिला फतेहगढ़ साहिब) की पंचायत ने भी पैरोल दिए जाने के पक्ष में सहमति व्यक्त की है। ऐसे में मानवीय आधार पर उसे अस्थायी रिहाई प्रदान की जानी चाहिए। 

सीबीआई ने जताया विरोध
हालांकि सीबीआई ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में हवारा की पैरोल का जोरदार विरोध किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यदि उसे पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने की गंभीर आशंका है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि हवारा वर्ष 2004 में चंडीगढ़ की बुडैल जेल से अपने साथियों के साथ सुरंग बनाकर फरार हो चुका है।

बाद में उसे लगभग एक वर्ष बाद दोबारा गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में उसके पिछले आचरण को देखते हुए उसे पैरोल देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा। सीबीआई ने यह भी कहा कि हवारा का संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से रहा है।

एजेंसी के अनुसार पैरोल मिलने की स्थिति में उसके दोबारा अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों के संपर्क में आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उसके आपराधिक रिकॉर्ड और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को देखते हुए किसी भी परिस्थिति में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए।

6 जुलाई को होग अगली सुनवाई
दूसरी ओर, चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि हवारा वर्तमान में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। इसलिए पैरोल से संबंधित किसी भी मांग पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र दिल्ली प्रशासन और वहां की जेल अथॉरिटी के पास है।

प्रशासन ने कहा कि हवारा को अपनी पैरोल संबंधी मांग संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उठानी चाहिए। अब इस मामले में सभी पक्षों के जवाब आने के बाद हाई कोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई में पैरोल याचिका पर आगे विचार करेगा।

 

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