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एमपी में 345 विधायक और 45 सांसद, 33% महिला आरक्षण लागू होने से सत्ता के समीकरण में होगा बदलाव

भोपाल
 मध्य प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में एक ऐसा बड़ा बदलाव आने वाला है, जो अगले कई दशकों की राजनीति को नई दिशा देगा। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन) पेश होने जा रहा है। इस मास्टर प्लान के लागू होने से मध्य प्रदेश में न केवल महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होगी।

विधानसभा में होंगी 114 महिलाएं
प्रस्तावित बदलावों के तहत, मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 से बढ़ाकर 345 किए जाने की योजना है। इस विस्तारित सदन में महिलाओं के लिए 114 सीटें आरक्षित होंगी, जो वर्तमान में मात्र 27 महिला विधायकों की तुलना में एक बड़ी छलांग है।सीटों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े में भी बदलाव आएगा। अब राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 116 के बजाय 174 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यह बदलाव न केवल छोटे दलों की भूमिका को प्रभावित करेगा, बल्कि बड़े दलों को भी अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर करेगा।

कैबिनेट का भी होगा विस्तार
परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी।

लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है।

विधानसभा सीटें 230 345 +115
बहुमत का आंकड़ा 116 174 +58
महिला विधायक (आरक्षित) 27 (अनुमानित) 114 ऐतिहासिक वृद्धि
लोकसभा सीटें 29 43 +14
मंत्री परिषद की क्षमता 35 52 तक +17

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