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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से सजेगा नवभारत का भविष्य: टंक राम वर्मा

रायपुर

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर एवं एनईपी इम्प्लीमेंटेशन सेल द्वारा किया गया। 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा और रोजगार में सेतु का कार्य करेगी

उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत के भविष्य की दिशा और दशा तय करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया। यह नीति 21वीं सदी के नवभारत की आधारशिला मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, सक्षम और श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा नीति के प्रथम चरण में हम प्रवेश कर चुके हैं और इसे सफल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। यह नीति केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक, मानसिक, भावनात्मक और तकनीकी दृष्टि से भी सशक्त बनाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता, समानता, समावेशिता और सुलभता सुनिश्चित करना है। नीति के तहत पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन, विषयों के बीच समन्वय, और शिक्षक प्रशिक्षण एवं शोध को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। साथ ही उद्योग और शिक्षा की भागीदारी को प्रोत्साहित कर युवाओं को कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।    

मंत्री  वर्मा ने कहा कि सरकार ने प्राध्यापकों की कमी दूर करने के लिए 700 पदों की स्वीकृति दी है। डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और ई-लर्निंग सुविधाओं के विस्तार पर भी कार्य हो रहा है। मातृभाषा और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विषयों की कठोर सीमाओं को समाप्त कर लचीलापन प्रदान करने के साथ ही विद्यार्थियों को सीखने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करना। आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक शिक्षा को प्रोत्साहन देगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो समयबद्ध योजना बनाकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नीति के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन का साधन है। इसका सफल क्रियान्वयन विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ ही उन्हें सृजनशील, सामाजिक रूप से जागरूक और राष्ट्रभक्ति की भावना से परिपूर्ण बनाएगा। मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन को समझने और संवारने का साधन है। इस नई शिक्षा नीति के माध्यम से आने वाले समय में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और शिक्षा व्यवस्था अधिक समग्र तथा विद्यार्थी-केंद्रित होगी। 

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा की और शिक्षकों को नई शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका के बारे में मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को एनईपी के क्रियान्वयन की गहन जानकारी प्रदान करना और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई दृष्टि विकसित करना रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषयों की दीवारों से मुक्त कर विज्ञान, वाणिज्य और कला जैसे क्षेत्रों को एक साथ पढ़ने की स्वतंत्रता देना है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा में भागीदारी दर को वर्तमान 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, तथा विभिन्न कॉलेजों से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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