samacharsecretary.com

उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे पर नया सियासी तूफान, कांग्रेस ने लगाए सनसनीखेज आरोप

देहरादून
उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने तमाम तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। भले ही खुद धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया लेकिन कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता अलग-अलग तरह की आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। टाइमिंग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने उनके इस्तीफे को बिहार चुनाव से जोड़ दिया है। उन्होंने यहां तक कहा कि एक नेता को स्थान देने के लिए धनखड़ को इस्तीफा देने के लिए कहा गया। बातचीत में कहा कि बिहार के एक नेता के लिए धनखड़ से इस्तीफा लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफे के तुरंत बाद कई नामों की चर्चा चल रही है और सभी नाम किसी ना किसी तरह से बिहार से जुड़े हैं। रावत ने कहा, ‘इस्तीफे की आकस्मिकता ने चौंका दिया है, बल्कि बहुत गहरी बात लगती है।’

बिहार के व्यक्ति विशेष को करना है अकोमडेट: रावत
उन्होंने कहा, ‘कुछ सूत्रों से जो नाम चल रहे हैं, उनमें से अधिकांश नाम वो हैं जो किसी ना किसी रूप में बिहार चुनाव को प्रभावित करते हैं। कहा तो यह जा रहा है कि वहां जो उनका गठबंधन है भाजपा का वह असहज हो रहा है एक ’व्यक्ति विशेष' के कारण, उसको अकोमडेट करने के लिए संकेत दिया गया जगदीप धनखड़ जी को कि महाराज बहुत हो गया, अब आप उतर जाइए। क्योंकि उनके इस्तीफे की स्टाइल वही है, जिसमें संदेश आता है और भाजपा में इस्तीफा हो जाता है।'

कहा- लगता है पूरा प्लेटफॉर्म सेट था
रावत ने कहा कि इस्तीफे के पीछे कई कहानियां हैं। उन्होंने कहा, 'धनखड़ जी की त्यागपत्र की जो आकस्मिकता है और जो समय का चयन है वो दोनों कई कहानियां, कई बातें कहती हैं और क्या कारण है इस इस्तीफे के पीछे वो बहुत गहरा है और उस गहराई का स्पष्टीकरण केवल पीएम या जगदीप धनखड़ जी दे सकते हैं।' उन्होंने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह पूरा सेट प्लेटफॉर्म जैसा लगता है। वह दिनभर सक्रिय रहे, उनके दो-तीन दिन के कार्यक्रम निश्चित थे। बिजनेस अडवाइजरी कमिटी की बैठक लेनी थी, उपराष्ट्रपति के तौर पर राजस्थान जाना था। सात-साढ़े सात बजे तक विपक्षी नेताओं से मुलाकात करते हैं और 9 बजे इस्तीफा आ जाता है।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here