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पंचकूला एजेएल मामल,हाईकोर्ट के फैसले के बाद विशेष अदालत ने हुड्डा और मोतीलाल वोरा को दी क्लीन चिट

चंडीगढ
सीबीआई की विशेष अदालत ने पंचकूला में प्रकाशन समूह एसोसिएटिड जनरल्स लिमिटेड (एजेएल) को प्लॉट आवंटित करने के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को शुक्रवार को आरोप मुक्त कर दिया । मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर के सरकारी भूखंड आवंटित करने से संबंधित है। सीबीआई ने हुड्डा समेत एचएसवीपी के चार वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया था। हुड्डा पर आरोप था कि 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया।

मोतीलाल वोरा को भी आरोप मुक्त करार दिया
इस मामले में पूर्व कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा को भी आरोप मुक्त करार दिया गया है। वोहरा का करीब छह साल पहले निधन हो चुका है। इस मामले में सुनवाई के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा शुक्रवार को अदालत में पेश हुए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीबीआई कोर्ट की ओर से आरोप तय किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें स्पेशल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने कहा था कि बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। प्रथम दृष्टया आरोप साबित नहीं हो रहे। ऐसे में कोर्ट ने आरोप तय करने के आदेशों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई कोर्ट के विशेष जज राजीव गोयल ने भी इस मामले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आरोप मुक्त कर दिया है।

क्या है पूरा मामला
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को पंचकूला में अखबार शुरू करने के लिए 1982 में जमीन आवंटित की गई, तब कांग्रेस के कई नेता एजेएल के पदाधिकारी थे। इनमें मोतीलाल वोरा चेयरमैन थे। जब जमीन आवंटित हुई, तब कांग्रेस की सरकार थी और भजनलाल मुख्यमंत्री थे।
1992 में भजनलाल सरकार ने ये प्लॉट रिज्यूम कर लिया था। इसमें तर्क दिया गया था कि छह महीने में निर्माण कार्य शुरू करना था, जो 10 साल में पूरा नहीं हो सका। एजेएल ने प्लॉट रिज्यूम करने के आदेश को चैलेंज किया था। 2005 में हरियाणा में कांग्रेस सरकार वापस आने पर हुड्डा ने यह प्लॉट फिर से एजेएल को आवंटित कर दिया।

सीबीआई ने दर्ज किया था केस
सीबीआई ने 27 जनवरी 2017 को मामले में केस दर्ज किया था। इसके बाद 1 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दायर की। 2021 से लेकर 2025 तक हाईकोर्ट ने इस केस में सुनवाई पर स्टे लगाए रखा। प्रदेश में 10 साल हुड्डा सरकार रही। इसके बाद 2014 में भाजपा की सरकार बनी। 5 मई 2016 को हरियाणा राज्य की विजिलेंस ब्यूरो ने इस विषय में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। इसके बाद जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को 4 अप्रैल 2017 में सौंप दी गई। CBI ने भी अपना केस रजिस्टर्ड किया था।
राहुल महाजन

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