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चुनावी नतीजों पर संतोष सुमन का तंज, ममता से लेकर कांग्रेस तक पर तीखी टिप्पणी

नई दिल्ली

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री संतोष कुमार सुमन ने अलग-अलग राज्यों से आए चुनाव परिणामों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व की जमकर सराहना करते हुए विपक्ष पर करारा तंज कसा है। संतोष सुमन ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आज उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक पूरे विपक्ष की हालत 'झालमुड़ी' जैसी हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की राजनीति में विपक्ष अब पूरी तरह से अपनी प्रासंगिकता खो चुका है और जनता ने उनके एजेंडे को नकार दिया है।

'देशविरोधी ताकतों की कठपुतलियों के लिए जगह नहीं'
विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए संतोष सुमन ने कहा कि आज देश की राजनीति में विपक्षी दलों का हाल ऐसा हो गया है कि आम जनता उनकी असलियत समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक अब जागरूक हो गए हैं और वे यह भली-भांति जान चुके हैं कि देशविरोधी ताकतों के इशारे पर काम करने वाली कठपुतलियों के लिए हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं बची है। जनता अब सिर्फ विकास और राष्ट्रहित की राजनीति को ही अपना समर्थन दे रही है।

विपक्ष को जमकर घेरा
अलग-अलग राज्यों के चुनाव परिणामों की समीक्षा करते हुए संतोष सुमन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 'ममता बुआ' की नीतियों और उनकी राजनीतिक सोच पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। वहां की जनता अब पूरी तरह से सत्ता में बदलाव का मन बना चुकी है। वहीं, असम का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की जमकर तारीफ की। सुमन ने कहा कि हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में हुए विकास और उनकी निर्णायक राजनीति ने असम में विपक्ष को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस नेताओं पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों में कांग्रेस के गौरव गोगोई और पवन खेड़ा का 'पेड़ा' बन गया है।

दक्षिण भारत में DMK से बढ़ रही है नाराजगी
दक्षिण भारत की राजनीति पर अपनी बात रखते हुए 'हम' के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि वहां भी विपक्ष के लिए स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में DMK की विचारधारा और उनके नेताओं द्वारा हाल ही में दिए गए कुछ विवादित बयानों को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनता के बीच पनप रहा यह गुस्सा अब सीधे तौर पर वहां के राजनीतिक और चुनावी परिणामों में भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

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