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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, झज्जर में शुरू हुआ नेचुरोपैथी ट्रेनिंग सेंटर

झज्जर.

पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में देवरखाना स्थित केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आयुष मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह केंद्र अब वेलनेस क्षेत्र के लिए ''प्रशिक्षित प्राकृतिक चिकित्सा सहायक'' तैयार करने वाला देश का दूसरा ऐसा संस्थान बन गया है।

इससे पहले यह विशेष प्रशिक्षण केवल राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान, पुणे (एनआइएन) में ही दिया जाता था। इस दृष्टिकोण से देवरखाना में इस पाठ्यक्रम की शुरुआत होना उत्तर भारत के लिए मील का पत्थर है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य के बढ़ते चलन से इस क्षेत्र में करियर की असीम संभावनाएं खुली हैं। इस विशेष पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद युवा देश-विदेश के बड़े प्राकृतिक चिकित्सालयों, योग केंद्रों, वेलनेस रिसार्ट्स और लक्ज़री स्पा में ''प्राकृतिक चिकित्सा सहायक'' या ''थेरेपिस्ट'' के रूप में सम्मानजनक व आत्मनिर्भर करियर बना सकते हैं।

दो साल पहले अस्तित्व में आया संस्थान
करीब दो साल पहले अस्तित्व में आए संस्थान में 200 बेड का विशाल और अत्याधुनिक चिकित्सालय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जहां निरंतर आंतरिक एवं बाह्य रोगियों को विश्वस्तरीय प्राकृतिक उपचार सेवाएं दी जा रही हैं। अब यहां परिसर में ''उपचार सहायक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम'' (टीएटीसी) के प्रथम बैच का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। संस्थान के नोडल अधिकारी डा. एलांचेझियन और डा. घनश्याम यादव ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें इस क्षेत्र में स्वर्णिम व उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया।

20 सीटों से शुरुआत, प्रशिक्षण के साथ मिलेगा 8,000 मानदेय : संस्थान प्रशासन द्वारा तैयार किए गए इस विशेष और रोजगारपरक एक वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रथम चरण के तहत 20 सीटों पर प्रवेश दिया गया है, जिसकी नियमित कक्षाएं बीती 15 मई से प्रारंभ हो चुकी हैं। प्रशिक्षण अवधि के दौरान विद्यार्थियों को 8,000 प्रतिमाह का मानदेय भी दिया जाएगा। संस्थान प्रबंधन के अनुसार, भविष्य में यहां होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधानों के साथ-साथ इस तरह के अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों का दायरा और बढ़ाया जाएगा। साथ ही, पाठ्यक्रम के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान और मांग को देखते हुए आने वाले समय में सीटों की संख्या में भी इजाफा किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के बेहतरीन अवसर मिल सकें।

पाठ्यक्रम का स्वरूप और प्रशिक्षण 
भाग      विधा का नाम                    मुख्य प्रशिक्षण क्षेत्र
1.     प्राकृतिक चिकित्सा का दर्शन     परिभाषाएं, सिद्धांत, इतिहास और प्राकृतिक जीवन शैली।
2     मालिश (थ्योरी व प्रैक्टिकल)     इतिहास, नियम, विभिन्न प्रकार की मालिश (वृद्धावस्था, प्रसवपूर्व) एवं तकनीकें।
3     शरीर रचना और शरीर
क्रिया विज्ञान                     मानव शरीर के प्रमुख तंत्रों (श्वसन, पाचन, तंत्रिका आदि) का बुनियादी ज्ञान।
4     योग प्रशिक्षण     अष्टांग योग, सूर्यनमस्कार, आसन, प्राणायाम, ध्यान और चिकित्सीय योग।
   जल चिकित्सा     जल के गुण, ठंडे-गर्म पानी का प्रभाव, विभिन्न प्रकार के पैक, टब बाथ और स्प्रे।
   मिट्टी चिकित्सा     मिट्टी के गुण, शुद्धिकरण, मिट्टी के पैक तैयार करना और मड बाथ।
   आहार और पोषण     संतुलित भोजन, कच्चे आहार (सलाद, अंकुरित), प्राकृतिक चिकित्सा व्यंजन।
   उपवास     उपवास के प्रकार, महत्व, शरीर पर प्रभाव और इसकी वैज्ञानिक प्रक्रिया।
   चुंबक चिकित्सा     चुंबक के प्रकार, उपयोग के तरीके और पानी व तेल को चार्ज करने की विधि।
10     रंग चिकित्सा     रंगों के प्रभाव, सूर्य स्नान और क्रोमो थर्मोलियम।
11     एक्यूप्रेशर     एक्यूप्रेशर की मूल अवधारणाएं, प्रमुख बिंदु और दबाव देने का सही तरीका।
12     फिजियोथेरेपी     मोम स्नान (Wax Bath), विद्युत चिकित्सा और व्यायामशाला प्रबंधन।
13     क्लिनिकल ट्रेनिंग व नर्सिंग केयर     मरीजों की बुनियादी देखभाल, शारीरिक मापदंडों (वजन, बीपी, तापमान) की जांच।
14     अंग्रेजी संचार कौशल     मरीजों और डॉक्टरों के साथ संवाद के लिए मौखिक संचार का विशेष प्रशिक्षण।

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हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
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