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DA को बेसिक में मिलाने की तैयारी? 8th Pay Commission को लेकर किन मुद्दों पर हुई अहम बातचीत

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को महंगाई से निपटने में मदद के लिए नियमित तरीके से महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी का लाभ दिया जाता है, लेकिन अब आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज होने से कर्मचारी संघ इससे भी बड़ी मांग कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में शामिल कर दिया जाए।  8वें वेतन आयोग के तहत मांग यह मांग आठवें वेतन आयोग की चल रही परामर्श प्रॉसेस के तहत किया गया है. अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी संघ (AINPSEF) सहित कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए गए अपडेट के दौरान सामने आई है।  सैलरी का हिस्‍सा बनाने की मांग आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं पर अपनी खास कवरेज के दौरान, इंडिया टुडे डॉट इन को पता चला है कि यूनियन का मानना ​​है कि महंगाई भत्ता (डीए) का वर्तमान स्तर यह बताता है कि पिछले कुछ सालों में जीवन यापन की लागत में कितनी तेजी से बढ़ोतरी हुई है और अब इसे संशोधित सैलरी स्‍ट्रक्‍चर का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।  सैलरी और पेंशन होगा प्रभावित यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक सैलरी में शामिल करने से लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन और रिटायर बेनिफिट्स सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।  महंगाई भत्ता क्या है?        महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए भुगतान की जाने वाली एक अतिरिक्त राशि है. आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए सरकार समय-समय पर महंगाई भत्ता (डीए) में संशोधन करती है ताकि कर्मचारी अपनी क्रय शक्ति को आंशिक रूप से बनाए रख सकें।  दो बार बढ़ता है महंगाई भत्ता   महंगाई के आंकड़ों के आधार पर महंगाई भत्ते में आमतौर पर साल में दो बार संशोधन किया जाता है. मौजूदा समय में केंद्र सरकार के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन से अलग से महंगाई भत्ता (डीए) दिया जाता है।  कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई NCJCM बैठक  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर रोजना नए – नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं। लगातार मीटिंग का दौर जारी है। लाखों सरकारी कर्मचारियों के साथ पेंशनभोगी की नजरें इस बात पर जमी हुईं हैं कि सरकार मिनिमम पेंशन से लेकर फिटमेंट फैक्टर कितना रखती है। इसी बीच नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) की 49वीं बैठक कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई। इसमें कर्मचारी संघों और सरकारी अधिकारियों ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, भर्ती, पदोन्नति, भत्ते और सेवा शर्तों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई । नई स‍िफार‍िश देने से पहले आयोग ने अलग कर्मचारी यून‍ियनों के साथ विचार-विमर्श का प्रोसेस शुरू कर द‍िया है। इस हाई लेवल मीट‍िंग में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच सैलरी, अलाउंस, प्रमोशन और पेंशन जैसे मामले पर बातचीत हुई। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 8वें वेतन आयोग के तहत चल रही चर्चाओं के बीच हो रही है। आयोग ने देश भर के कर्मचारी संघों और स्टाफ एसोसिएशनों के साथ बातचीत पहले ही शुरू कर दी है। मीटिंग में कौन – कौन हुए शामिल? NCJCM के स्टाफ साइड की ओर से शेयर किए गए दस्तावेजों के अनुसार, मीटिंग में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, व्यय सचिव, कार्मिक सचिव, डाक विभाग के सचिव, शिक्षा सचिव, स्वास्थ्य सचिव और कई अन्य मंत्रालयों तथा विभागों के अधिकारी शामिल थे। स्टाफ साइड का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं में स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा, एम. राघवैय्या, डॉ. एन. कनैय्या, गुमान सिंह, जे.आर. भोसले, सी. श्रीकुमार और कर्मचारियों के कई अन्य प्रतिनिधि शामिल थे। इन मुद्दों पर हुई चर्चा मीटिंग के दौरान कर्मचार‍ियों के प्रत‍िन‍िध‍ि ने पक्ष रखते हुए कैबिनेट सेक्रेटरी को जानकारी दी क‍ि उन्होंने वेतन आयोग को अपना ड‍िटेल्‍ड ज्ञापन पहले ही दे द‍िया है। ज्ञापन में न्‍यूनतम सैलरी हाइक, फ‍िटमेंट फैक्टर, एनुअल इंक्रीमेंट की दर और प्रमोशन पॉल‍िसी जैसे अहम प्‍वाइंट को शामिल किया गया है। यूनियनों की तरफ से सरकार से मांग की गई क‍ि आठवें वेतन आयोग के कामकाज के दौरान कर्मचारी संगठनों के साथ लगातार बातचीत बनाकर रखा जाए। इससे कर्मचारियों की उम्‍मीदों को सही तरीके से आयोग के सामने रखा जा सकेगा। सैलरी, अलाउंस के साथ एनपीएस (NPS) और यूपीएस (UPS) को वापस लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। स्‍वास्‍थ्‍य सेवा और मेड‍िकल र‍िम्‍बर्समेंट में सुधार की मांग मीटिंग में हेल्थ सर्विस को लेकर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने मांग की है कि CGHS और CS(MA) नियमों के तहत इलाज के खर्च का पूरा र‍िम्‍बर्समेंट होना चाहिए। उन्होंने शिकायत की कि हीयर‍िंग मशीन के लिए र‍िम्‍बर्समेंट की दर को प‍िछले 12 साल से नहीं बदला गया। इस पर कैबिनेट सेक्रेटरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन मामलों की जांच की जाए और तीन महीने के अंदर फैसला लिया जाए। इसके अलावा, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए 'चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस' और अतिरिक्त CGHS सेंटर की स्थापना पर बातचीत हुई।

69000 बेसिक: 8th Pay Commission के बाद आपकी सैलरी में बदलाव का हाल

  नई दिल्‍ली आठवें वेतन आयोग की टीम आए दिन अलग-अलग राज्‍यों में बैठकें कर रही है और कर्मचारियों की समस्‍या और मांग जानना चाहती है, ताकि वह एक रिपोर्ट तैयार कर सके और उसे सरकार को सौंप सके. अभी तक कर्मचारियों की ओर से कुछ मांग रखी गई है, जिसके मुताबिक, मिनिमम बेसिक सैलरी 69000 रुपये और फिटमेंट फैक्‍टर 3.83 रखने की बात कही गई है।  8वें वेतन आयोग की टीम ने दिल्‍ली, पुणे और उत्तराखंड में बैठक पूरी की है. अब अगर 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की 3.83 फिटमेंट फैक्टर वाली मांग मान ली जाती है तो सिर्फ बड़े अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि सरकारी चपरासी, क्लर्क, टीचर, रेलवे कर्मचारी से लेकर IAS अधिकारियों तक की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।  न्यूनतम बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर करीब 69000 रुपये तक पहुंच सकती है. साथ ही 30 साल में पांच बार प्रमोशन हो सकता है. महंगाई भत्ता और एचआर के अलावा, अन्‍य भत्तों में तीन गुना इजाफा हो सकता है. हालांकि, यहां एक सैलरी अनुमान लगाया गया है, जिसके तहत हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि किस लेवल के कर्मचारियों की कितनी सैलरी बढ़ सकती है?  आपकी कितनी बढ़ सकती है सैलरी?  8वें वेतन आयोग के तहत लेवल 1 में चपरासी और अटेंडेंट आते हैं. लेवल 2 में लोअर डिवीजन, लेवल 3 में कांस्‍टेबल और कुशल कर्मचारी आते हैं. लेवल 4 में ग्रेड डी स्‍टेनोग्राफर और यूनियर क्‍लर्क आते हैं, जिनकी मौजूदा सैलरी 25,500 रुपये है. अगर 3.83 रखा जाता है तो मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, सैलरी में बढ़ोतरी कुछ इस प्रकार हो सकती है।  संभावित नई बेसिक पे: लगभग 68,940 रुपये     लेवल-1: 18,000 रुपये  से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये     लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर लगभग 76,000 रुपये     लेवल-3: 21,700 रुपये  से बढ़कर लगभग 83,000 रुपये     लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर लगभग 97,000 रुपये     लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर लगभग 1.11 लाख रुपये मिड लेवल कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी      लेवल-6: 35,400 रुपये से बढ़कर लगभग 1.35 लाख रुपये     लेवल-7: 44,900 रुपये  से बढ़कर लगभग 1.72 लाख रुपये     लेवल-8: 47,600 रुपये से बढ़कर लगभग 1.82 लाख रुपये     लेवल-9: 53,100 रुपये से बढ़कर लगभग 2.03 लाख रुपये सीनियर अधिकारियों सैलरी कितनी बढ़ सकती है     लेवल-13: 1.23 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4.71 लाख रुपये     लेवल-14: 1.44 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 5.52 लाख रुपये     लेवल-15: 1.82 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 6.97 लाख रुपये     लेवल-18: 2.50 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 9.57 लाख रुपये  

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से सैलरी 283% तक बढ़ सकती है

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ी खबर है। नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह मांग मंजूर हो जाती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम मूल सैलरी और पेंशन में 283% तक का ऐतिहासिक उछाल आ सकता है। क्या है 3.83 फिटमेंट फैक्टर और इससे कितनी बढ़ेगी सैलरी? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था। अब JCM ने इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग रखी है। अगर मांग मान ली जाती है तो मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 × 3.83 = ₹68,940 हो जाएगा। वहीं, न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़कर ₹34,470 हो जाएगा। यानी सैलरी और पेंशन दोनों में 283% की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह सिर्फ कर्मचारियों की मांग है, अंतिम फैसला सरकार करेगी। क्या वाकई 283% बढ़ोतरी मिलेगी? हालांकि, 283% का आंकड़ा काफी चर्चा में है, लेकिन पिछले अनुभवों से समझा जा सकता है कि सरकार आमतौर पर कर्मचारियों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर तय करती है। एक्सपर्ट्स के अनुमान के अनुसार, सरकार 1.8 से 2.86 के बीच फिटमेंट फैक्टर लागू कर सकती है। ऐसे में असली बढ़ोतरी करीब 13% से 35% के बीच रहने की संभावना है, न कि 283%। फिर भी, यह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फायदा होगा। कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं? JCM ने सिर्फ सैलरी बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा है। उनकी अन्य प्रमुख मांगों में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली, वेतन स्तरों को घटाकर सिर्फ 7 लेवल करना, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) 30% करना, सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करना, और 30 साल की सेवा में कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करना शामिल है। इन मांगों पर सरकार का फैसला अभी बाकी है। कब बना 8वां वेतन आयोग और कब मिलेगा फायदा? 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी। 3 नवंबर 2025 को इसका औपचारिक गठन किया गया। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। उम्मीद है कि सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, भले ही औपचारिक लागू होने में देरी हो। संभावित तारीखों के अनुसार, कर्मचारियों को 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन मिलना शुरू हो जाएगा। 7वां और 8वां वेतन आयोग में तुलना अगर 7वें वेतन आयोग की बात करें, तो उसमें फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 और अधिकतम ₹2,50,000 था। वहीं 8वें वेतन आयोग के लिए प्रस्तावित 3.83 फैक्टर से न्यूनतम मूल वेतन ₹68,940 हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स अनुमान बताते हैं कि असली फैक्टर 2.86 के आसपास हो सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन करीब ₹51,480 बनता है। क्या पेंशनर्स को भी फायदा होगा? जी हां, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर समान रूप से लागू होंगी। जिस फिटमेंट फैक्टर से सक्रिय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, उसी फैक्टर से पेंशनभोगियों की पेंशन भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही, पिछली तारीख (1 जनवरी 2026) से एरियर भी दिया जाना संभव है।

क्या 8वां वित्त आयोग बढ़ाएगा शिक्षकों की सैलरी 1.34 लाख तक? जानें सच

नई दिल्ली  8वें वित्त आयोग की एक महत्वपूर्ण मीटिंग 28 से 30 अप्रैल के बीच दिल्ली में हुई। इस मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने वित्त आयोग के सामने कई बड़े मुद्दे उठाए। जिस पर अब पे कमीशन को फैसला करना है। अगर वित्त आयोग कर्मचारी संगठनों की बात मांग लेता है कि सरकारी शिक्षकों की शुरुआती सैलरी 1.34 लाख रुपये हो जाएगी। 8th Pay Commission: टीचर्स की सैलरी 134500 रुपये? दिल्ली में हुई मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने शिक्षकों की सैलरी (लेवल 6) की बढ़ाकर 134500 रुपये करने की मांग की है। अगर यह डिमांड मान ली जाती है तब की स्थिति में शिक्षकों की सैलरी में तेज उछाल देखने को मिलेगा। इसी मीटिंग में फिटमेंट फैक्टर को 2.62 से 3.83 करने की मांग की गई है। जोकि मौजूदा समय के फिटमेंट फैक्टर 2.57 से अधिक है। वहीं, इसके अलावा सालाना 6 से 7 प्रतिशत सैलरी इंक्रीमेंट की भी मांग संगठनों ने वित्त आयोग के सामने रखा है। 50% डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA demands) पे कमीशन से डीए को लेकर भी डिमांड की गई है। संगठनों ने कहा कि भत्ता 50 प्रतिशत होने पर इसे बेसिक पे के साथ मिला दिया जाए। ऐसा होने पर कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय अच्छा लाभ मिल सकता है। HRA को 36% करने की मांग (8th Pay Commission HRA demands) टीचर्स से जुड़े संगठनों ने HRA को 12 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट भत्ता को बेसिक पे का 12 से 15 प्रतिशत करने की डिमांड की गई है। रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जाए (8th Pay Commission pension demands) शिक्षक संगठनों ने रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर 65 वर्ष करने की डिमांड की है। वहीं, ग्रेजुएटी लिमिट को भी 50 लाख रुपये करने की मांग हुई है। इन सबके अलावा संगठन ने एनपीएस और यूपीएस की जगह ओल्ड पेंशन स्कीम लाने की मांग की है। इंटरनेट के लिए मिले 2000 रुपये हर महीने (8th Pay Commission internet demands) डिजिटल अलाउंस के लिए शिक्षक संगठन ने हर महीने 2000 रुपये की मांग रखी है। छुट्टियों को भी बढ़ाने की मांग कर्मचारी संगठनों ने की है। बता दें, 8वें पे कमीशन का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय है। इस दौरान वित्त आयोग सभी से बात करेगा और सुझाव मांगेगा। यही वजह है कि बीते दिनों वित्त आयोग की एक बैठक दिल्ली में हुई है।

8वें वेतन आयोग से जुड़ा बड़ा फैसला, सैलरी और फिटमेंट फैक्टर पर होगी चर्चा

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. दिल्‍ली में 8th पे कमीशन को लेकर 3 दिनों की बैठक शुरू हो चुकी है. इस बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कितनी बढ़नी चाहिए, क्‍या फिटमेंट फैक्‍टर होना चाहिए, महंगाई भत्ता मर्ज होगा या नहीं? आदि जैसी मांगों पर बात होगी।  दरअसल, जनवरी में 8वें वेतन आयोग का गठन किया गया था, जिसे 18 महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है. इसी के मद्देनजर, आयोग ने जमीनी स्‍तर पर काम तेज कर दिया है और एक के बाद एक राज्‍यों के साथ बैठक कर रहा है और केंद्रीय कर्मचारियों के यूनियन की मांगों पर विस्‍तार से चर्चा कर रहा है।  मंगलवार को दिल्‍ली में एक बैठक शुरू की गई, जो 3 दिनों तक चलेगी. इससे पहल उत्तराखंड में 8वें पे कमीशन को लेकर बैठक हुई थी. इस बैठक में कर्मचारियों की मांगों पर विस्‍तार से चर्चा की गई. 30 अप्रैल तक दिल्‍ली में इसकी बैठक चलेगी. इसके बाद मई महीने में आयोग की टीम पुणे और महाराष्‍ट्र के अन्‍य ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर उनका फीडबैक लेगी।  69,000 मिनिमम सैलरी की डिमांड  8वां वेतन आयोग मिनिमम बेसिक सैलरी के साथ ही कई भत्तों की भी समीक्षा कर रहा है, जिसमें ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य सेवा शर्तें शामिल हैं. कर्मचारी आयोग का कहना है कि इन भत्तों में भी सुधार की आवश्‍यकता है. इसके साथ ही बेसिक पे को भी बढ़ाने की मांग है. आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 18000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्‍ताव दिया है।  फिटमेंट फैक्‍टर इतना करने की मांग 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के सामने कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने फिटमेंट फैक्‍टर को लेकर बड़ी मांग रख दी है. फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.833 करने की मांग की गई है. अगर यह मांग मान ली जाती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ी उछाल आएगी।  5 यूनिट की फैमिली  एक बदलाव 5 यूनिट फैमिली को लेकर है, क्‍योंकि अभी तक 3 यूनिट की फैमिली मानकर भत्ता तय किया जाता है. अब यूनियन की मांग 5 यूनिट की फैमिली मानकर किया जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में और भी बड़ा इजाफा होगा।  

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकें शुरू, सैलरी पर नए प्रस्ताव पर चर्चा

 नई दिल्‍ली देश के 45 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और 60 लाख पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. आठवें वेतन आयोग के तहत रिपोर्ट तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है, आयोग ने अब जमीनी स्‍तर पर काम शुरू कर दिया है, जो अलग-अलग राज्‍यों का दौरा कर कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशन से मुलाकात कर रहा है, ताकि 8वें वेतन आयोग के तहत उनकी मांगों और प्रस्‍तावों पर अच्‍छे से चर्चा कर सके।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग ने अपनी पहली आमने-सामने की बैठक उत्तराखंड के कर्मचारी संगठनों के साथ शुक्रवार को पूरा किया. इसके बाद आयोग 28 से 30 अप्रैल के बीच दिल्ली में बड़ी बैठक करेगा. साथ ही मई महीने में आयोग की टीम पुणे और महाराष्‍ट्र के अन्‍य ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर उनका फीडबैक लेगी।  फिटमेंट फैक्‍टर को लेकर क्‍या है मांग? 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के सामने कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने फिटमेंट फैक्‍टर को लेकर बड़ी मांग रखी है. फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.833 करने की मांग की गई है. अगर यह मांग मान ली जाती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल आ सकता है।  5 यूनिट की फैमिली  एक बदलाव 5 यूनिट फैमिली को लेकर है, क्‍योंकि अभी तक 3 यूनिट की फैमिली मानकर भत्ता तय किया जाता है. लेकिन अब यूनियन की मांग 5 यूनिट की फैमिली मानकर किया जा रहा है. इसके साथ ही महंगाई भत्ता का कैलकुलेशन 12 महीने के एवरेज को आधार बनाने का प्रस्‍ताव दिया गया है. इसके अलावा, कुछ स्‍केल पे को आपस में मिलाने का भी प्रस्‍ताव है।  बेसिक सैलरी को लेकर क्‍या है मांग?  वेतन आयोग सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य सेवा शर्तों की भी समीक्षा कर रहा है. कर्मचारी आयोग का कहना है कि इन भत्तों में भी सुधार की आवश्‍यकता है. इसके साथ ही बेसिक पे को भी बढ़ाने का प्रस्‍ताव रखा गया है. आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 18000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्‍ताव दिया गया है।  कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?  जनवरी 2025 में सरकार ने आयोग का गठन किया था, जिसे 18 महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करनी हैं. अभी 30 अप्रैल तक फीडबैक के लिए विंडो खुला हुआ है. इसके बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, फिर फिटमेंट फैक्‍टर पर फैसला लिया जाएगा। 

8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी, 18 हजार से अब 72,000 रुपये तक पहुंच सकती है सैलरी

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है. आयोग 18 महीने में इसपर विस्‍तार से रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपे‍गी, जिसके बाद विचार-विमर्श करने के बाद इसे लागू किया जाएगा. इसी बीच, अभी कर्मचारी संगठनों की तरफ से सुझाव दिए जा रहे हैं कि आयोग को 8वें वेतन आयोग के तहत क्‍या-क्‍या बदलाव करने चाहिए?  कुछ दिन पहले नेशनल काउंसिल के मजदूर संघ (एनसी-जेसीएम) की ओर से मांग रखी गई थी कि 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की न्‍यूनतम सैलरी 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये कर दी जाए. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्‍टर को 3.83 की जाए, लेकिन अब खबर आ रही है कि कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 72,000 रुपये रखी जाए और फिटमेंट फैक्‍टर को 4.0 कर दिया जाए।  क्‍या 72,000 रुपये हो जाएगी मिनिमम सैलरी?  इंडिया टुडे के मुताबिक, ये अधिकारिक मांग वाला आंकड़ा नहीं है. 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के प्रमुख प्रतिनिधि निकायों में से एक एनसी-जेसीएम ने सिर्फ मिनिमम सैलरी बढ़ोतरी की मांग  69,000 रुपये की है. फिर सवाल उठता है कि 72,000 रुपये की मांग आई कहां से।  रिपोर्ट के मुताबिक, यह सट्टा बाजार में अनुमान पर आधारित दिखाई देता है. कुछ मामलों में, कुछ कर्मचारी स्तरों के लिए अनुमानित वेतन 72,000 रुपये के करीब पहुंच जाता है, जिसे फिर एक मुख्य आंकड़े के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है. यह आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत न्यूनतम मूल वेतन की मांग के समान नहीं है।  72,000 रुपये सैलरी का अनुमान गलत  मिनिमम सैलरी का कैलकुलेशन कई चीजों पर निर्भर करता है. इसमें ग्रेड, अलाउंस और लेवल आदि शामिल हैं. ऐसे में 72,000 रुपये म‍िनिमम सैलरी होना मुश्किल दिखता है. इसे सिर्फ एक सार्वजनिक मंच पर बोलने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन यह कोई प्रस्‍ताव या सही कैलकुलेशन नहीं है।  फिलहाल, सरकार ने आठवें वेतन आयोग के तहत किसी भी अंतिम वेतन संरचना की घोषणा नहीं की है. कर्मचारी प्रतिनिधियों, विभागों और हितधारकों से परामर्श के बाद सिफारिशें तैयार की जाएंगी, और किसी भी वेतन संशोधन को लागू करने से पहले आधिकारिक मंजूरी की आवश्यकता होगी।  बता दें आठवें वेतन आयोग पर नजर रखने वाले लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी अनुमानित सैलरी को सही नहीं मानना चाहिए. अधिकार‍िक ऐलान के बाद ही स्‍पष्‍ट हो पाएगा कि कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है।   

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग ने दिया महत्वपूर्ण अपडेट, पूरा प्लान किया साझा

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग ने एक बड़ा अपडेट दिया है। दरअसल, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन जारी कर आगे की बैठकों के बारे में बताया है। वेतन आयोग के मुताबिक 28 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक दिल्ली में होने वाली बैठकों में भाग लेने और आयोग से बातचीत करने के लिए बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हुए हैं। हालांकि, सीमित समय और व्यस्त कार्यक्रम के कारण सभी अनुरोधों को स्वीकार कर पाना संभव नहीं है। हालांकि, वेतन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली में होने वाली बैठकों के दौरान अधिकतम संख्या में यूनियनों, कर्मचारी संगठनों और विभिन्न एसोसिएशनों से संवाद करने का प्रयास किया जाएगा लेकिन हर संगठन को समय देना कठिन हो सकता है। वेतन आयोग का कहना है कि आने वाले महीनों में दिल्ली के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी बैठकें आयोजित की जाएगी। इन बैठकों के बारे में वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी दी जाएगी। आयोग ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर से बाहर के इच्छुक हितधारक अपने राज्य या नजदीकी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में आयोग से मुलाकात के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के संगठनों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें दिल्ली आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पिछले साल वेतन आयोग का गठन बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। जनवरी महीने में ऐलान के बाद नवंबर में वेतन आयोग के चेयरमैन और अन्य सदस्यों का गठन हुआ। वहीं, इसी साल फरवरी में वेतन आयोग ने आधिकारिक वेबसाइट को लॉन्च किया है। वेतन आयोग इस वेबसाइट पर हर जरूरी अपडेट साझा करेगा। 18 महीने का इंतजार वेतन आयोग के गठन के बाद 18 महीनों में सिफारिशों की रिपोर्ट सरकार को सौंपना है। यह सरकार को तय करना है कि वह वेतन आयोग की सिफारिशें अक्षरश: मान लेगी या संशोधन करेगी। बहरहाल, वेतन आयोग पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से अपनी मांगें और सुझाव रखने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न कर्मचारी संघों में उत्सुकता बनी हुई है। वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों में संशोधन, पेंशन सुधार और सेवा शर्तों में बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर कई संगठन आयोग के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन आयोग अब सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में बैठकों का दौर शुरू हुआ है। आगामी महीनों में होने वाली बैठकों के आधार पर वेतन और पेंशन से जुड़े बड़े फैसलों की दिशा तय हो सकती है।

कर्मचारियों के लिए बुरी खबर, 8वें वेतन आयोग के हिसाब से नहीं मिलेगा डीए का एरियर

नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्‍ता 2 फीसदी बढ़ाने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन इसका फायदा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत नहीं दिया जाएगा. केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले दिनों जनवरी-जून, 2026 के लिए महंगाई भत्‍ता 2 फीसदी देने का ऐलान किया है. यह महंगाई भत्‍ता 7वें वेतन आयोग के हिसाब से बढ़ाया जाएगा, लेकिन आगे जब 8वां वेतन आयोग लगेगा तो इस महंगाई भत्‍ते का एरियर केंद्रीय कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा।  केंद्रीय कर्मचारी संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अभी 8वां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है. लिहाजा सरकार ने 2 फीसदी महंगाई भत्‍ता बढ़ाने का ऐलान 7वें वेतन आयोग के हिसाब से ही किया है. आगे जब 8वां वेतन आयोग लागू होगा तो माना जा रहा है कि इसे 1 जनवरी, 2026 से ही प्रभावी किया जाएगा. ऐसे में कर्मचारी संगठन कयास लगा रहे थे कि तब 8वें वेतन आयोग और 7वें वेतन आयोग के बीच जो भी अंतर होगा, उस राशि को जनवरी-जून, 2026 के महंगाई भत्‍ते के हिसाब से एरियर बनाकर दिया जाएगा. लेकिन, मामले से जुड़े लोगों को कहना है कि सरकार इस एरियर के भुगतान को नजरअंदाज कर सकती है।  अभी तक क्‍या था नियम कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि ने बताया कि अभी तक जब भी नया वेतन आयोग लागू होता था तो पहला महंगाई भत्‍ता शून्‍य कर दिया जाता था और उसकी शुरुआत 6 महीने बाद होती थी. तब कर्मचारियों को बीच की अवधि वाले महंगाई भत्‍ते की राशि को एरियर के रूप में नए वेतन आयोग के हिसाब से कैलकुलेट करके दिया जाता था. इस बार कर्मचारियों को भले ही मूल वेतन पर महंगाई भत्‍ते का एरियर मिल जाएगा, लेकिन जनवरी-जून अवधि के लिए 8वें वेतन आयोग के हिसाब से अलग एरियर नहीं दिया जाएगा।  इस बार क्‍या होगा नुकसान कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि का कहना है कि इस बार जनवरी-जून का महंगाई भत्‍ता 7वें वेतन आयोग के हिसाब से दिया जा रहा है, लिहाजा इस अवधि का कोई डीए बकाया नहीं होगा. आगे जब 8वें वेतन आयोग को लागू कर दिया जाएगा तब जुलाई से 7वें वेतन आयोग के तहत जो डीए की बढ़ोतरी होगी, उस पर 8वें वेतन आयोग के हिसाब से कैलकुलेट करके महंगाई भत्‍ते के एरियर का भुगतान किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी जनवरी, 2026 से ही बढ़ाए जाने का अनुमान है।  असली मुद्दा एचआरए का फंसेगा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हर बार जब भी नया वेतन आयोग लगता है तो एचआरए का एरियर ही फंस जाता है. सरकार को चाहिए कि 8वां वेतन आयोग लगने के बाद महंगाई भत्‍ते की तरह एचआरए के एरियर का भी भुगतान किया जाए. अगले महंगाई भत्‍ते का ऐलान दिवाली के आसपास अक्‍टूबर में किया जाएगा. तब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से कर्मचारियों को डीए के एरियर का भुगतान किया जा सकता है।   

8वें वेतन आयोग का प्रस्ताव: ₹69,000 सैलरी, छुट्टी के बदले पैसा, 3x DA और क्या-क्या लाभ होंगे?

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बड़ी हलचल है और अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (National Council– Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने अपना विस्तृत मेमोरेंडम सरकार और वेतन आयोग को सौंप दिया है, जिसमें सैलरी, भत्तों, छुट्टियों और पे स्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े बदलावों की मांग की गई है। अगर ये मांगें लागू होती हैं, तो कर्मचारियों की आय और सुविधाओं में बड़ा इजाफा हो सकता है। न्यूनतम वेतन ₹69,000 और ग्रेच्युटी में ढील सबसे बड़ी और चर्चा में रहने वाली डिमांड है, न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने की। इसके साथ ही हर साल 6% की वृद्धि और प्रमोशन के समय कम से कम ₹10,000 की बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। संगठन ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों को 30 दिन का न्यूनतम बोनस गारंटी के साथ दिया जाए और ग्रेच्युटी के नियमों में भी ढील दी जाए। छुट्टियों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव रखा गया है। मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने, पैटरनिटी लीव 45 दिन करने औरअर्न्ड लीव (EL) को बिना सीमा के जमा करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, 600 दिन तक लीव इनकैशमेंट और 20 साल की सेवा के बाद 50% इनकैशमेंट की सुविधा देने की बात भी कही गई है। महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल लीव और 60 दिन का पैरेंट केयर लीव भी प्रस्ताव में शामिल है। बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस (CEA) को ₹10,000 प्रति माह प्रति बच्चे करने और इसे पोस्ट ग्रेजुएशन तक लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल सब्सिडी को ₹35,000 प्रति माह तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कर्मचारियों पर शिक्षा का खर्च कम हो सके। भत्तों (Allowances) में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। NC-JCM चाहता है कि सभी भत्तों को तीन गुना किया जाए और उन्हें महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए। इसके अलावा रिस्क अलाउंस ₹10,000 प्रति माह, नाइट ड्यूटी अलाउंस बेसिक सैलरी के आधार पर और सभी कर्मचारियों के लिए ड्रेस अलाउंस की मांग भी की गई है। फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने की डिमांड भी अहम है, क्योंकि इसी के आधार पर नई सैलरी तय होती है। साथ ही पे लेवल्स को मर्ज और अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर को आसान और संतुलित बनाया जा सके। ये मेमोरेंडम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार और 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं में कितना बदलाव आता है।