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कृषि मंत्री ने राज्य के 3556 बीज उत्पादक किसानों को 8.2 करोड़ रूपए प्रोत्साहन राशि का किया अंतरण

रायपुर कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  राम विचार नेताम ने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 3556 बीज उत्पादक किसानों को वित्तीय वर्ष 2024-25 का 8 करोड़ 01 लाख 97 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में ऑनलाईन अंतरित किया। यह राशि मंडी निधि के तहत हितग्राहियों को प्रदाय किया गया। इस मौके पर प्रदेश के सैकड़ों किसान प्रक्रिया केंद्रों से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे। मंत्री  नेताम ने बीज उत्पादक किसानों से चर्चा कर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए उनका हौसला बढ़ाया साथ ही निगम के एक वर्ष के उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त मती शहला निगार विशेष रूप से उपस्थित थीं।   कृषि मंत्री  राम विचार नेताम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों ने अथक मेहनत एवं परिश्रम से बीज उत्पादन किया है। उनके इस मेहनत का फल उन्हें मिले इस उद्देश्य से प्रोत्साहन की राशि सीधे उनके खाते में अंतरित किया गया। उन्होंने किसानों को धान के अलावा दलहन-तिलहन एवं मिलेट्स और सब्जी-भाजी व अन्य आय मूलक फसलें लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि गरमी के दिनों में धान की खेती से बचना चाहिए। क्योंकि इसमें पानी अधिक लगता है। हमें पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के प्रति भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि धान की जगह किसानों को दलहन-तिलहन की खेती करनी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। वहीं पानी की खपत भी कम होती है।   मंत्री  नेताम ने कहा कि बीज की गुणवत्ता पर सरकार की साख जुड़ी होती है। उन्होंने बीज उत्पादक किसानों को ईमानदारी के साथ गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन बीज उत्पादन करने की अपील की। उन्होंने किसानों से कहा कि प्रदेश किसानों के लगन और मेहनत से बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। सरकार की प्रतिबद्धता किसानों के लिए प्राथमिकता पर है। उन्होंने मिल-जुलकर छत्तीसगढ़ को कृषि उत्पादक राज्यों के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।   बीज निगम के अध्यक्ष  चन्द्रहास चंद्राकर ने कहा कि यह गौरव का विषय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और मंत्री  नेताम के मार्गदर्शन में निगम द्वारा समय पर बीज उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किया जा रहा है। आगे भी प्रयास रहेगा कि समय पर किसानों के मेहनत का सम्मान हो। उन्होंनें कहा कि हमारी सरकार किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की भाव से धान खरीद कर देश में किसानों का मान बढ़ाया है। उन्होंने इस मौके पर किसानों की ओर से कुछ मांगे भी रखी, जिसका मंत्री  नेताम ने गंभीरता के साथ विचार करने का आश्वासन दिया। राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक  अजय अग्रवाल ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी। मंत्री  नेताम ने इस अवसर पर कवर्धा, अंबिकापुर और रायपुर जिले के किसानों से चर्चा कर हालचाल जाना। किसानों ने वर्ष 2024-25 प्रोत्साहन राशि प्रदान करने पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मंत्री  रामविचार नेताम और निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर के प्रति आभार व्यक्त किया।

गन्ना किसानों को 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान मिला योगी सरकार में: सूर्य प्रताप शाही

लखनऊ. कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के किसानों की आय 52 हजार से बढ़कर 1 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि अखिलेश यादव की सरकार में किसान बदहाल थे। अखिलेश यादव जब सत्ता में थे,  सोये हुए थे। 24 घंटे में समर्थन मूल्य देने की बात करने वाले अखिलेश यादव के जमाने में पर्ची से खर्ची (खर्चा) चलता था। तब 34 महीनों में भी किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो पाता था। अखिलेश सरकार में मिल मालिकों से होती थी सांठगांठ उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के समय में उनकी सरकार मिल मालिकों से सांठगांठ करके बैठी थी, इसलिए गन्ना किसानों का भुगतान नहीं हो पाता था। पूर्व सरकार में गन्ना किसानों का भुगतान वर्षों तक नहीं होता था। वहीं योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों में 8 से 10 दिन में भुगतान हो रहा है। आज देश में गन्ना उत्पादन का 55 प्रतिशत योगदान उत्तर प्रदेश से हो रहा है। गन्ना किसानों को 3 लाख करोड़ से ज्यादा का भुगतान कृषि मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव के जमाने में गन्ना मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल, तीन किस्तों में किसानों को मिलता था। यह शोषण किसान अब तक भूल नहीं पाए हैं। योगी सरकार ने गन्ना मूल्य 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल किया। इसका भुगतान भी किसानों को लगातार कराया जा रहा है। इसी क्रम में गन्ना किसानों को 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने 16 लाख से ज्यादा किसानों के बिजली बिल को माफ किया है और पर्याप्त मात्रा में बिजली आपूर्ति भी कर रही है। नलकूपों और सोलर पैनल के जरिए सिंचाई की सुविधा दी जा रही है। वर्षों से लंबित सरयू परियोजना को हमारी सरकार ने पूरा कराया। इससे 14 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा बढ़ी है। योगी सरकार द्वारा एमएसपी पर खरीद की जा रही है। किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल रहा है। योगी सरकार पर किसानों का भरोसा बढ़ा कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों का योगी सरकार और खेती के प्रति भरोसा बढ़ा है। उत्तर प्रदेश आज कृषि क्षेत्र में काफी प्रगति कर रहा है। लगभग 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल, 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। तिलहन में 48 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। सब्जी-फलों के उत्पादन में बढ़त देखी जा रही है। एथेनॉल के जरिए मिलें हुईं सशक्त उत्तर प्रदेश में गन्ने से एथेनॉल बनाकर मिलों को सशक्त किया गया है। इसके चलते गन्ना किसानों का भुगतान आसान हो गया है। अखिलेश यादव अपनी नाकामियों को देख नहीं पाते हैं। अखिलेश यादव जब सत्ता में थे तब उन्हें सरकारी कामकाज से कोई मतलब नहीं था। विपक्ष में बैठकर वह बड़े-बड़े वादे करते हैं। वह जानते हैं कि उनकी सरकार नहीं बनने वाली, इसलिए कोई भी वादा कर देते हैं। अखिलेश यादव जान लें कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती, एक बार उनकी सरकार की परेशानियों को जनता भुगत चुकी है। दोबारा वह सत्ता में नहीं आएंगे। अखिलेश सरकार में बिजली दरें 60 फीसदी तक बढ़ीं सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार में जनता बिजली के लिए परेशान थी, जबकि प्रदेश के कुछ जिलों में वीआईपी व्यवस्था थी। कन्नौज, इटावा, रामपुर में 24 घंटे की बिजली आपूर्ति होती थी, प्रदेश के अन्य जिलों में अंधेरा छाया रहता था। इन नीतियों के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर आपत्ति जताई थी। अखिलेश की सरकार में बिजली दरों में 60 फीसदी बढ़ोतरी की गई थी। अखिलेश यादव सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हैं। मोदी और योगी सरकार किसानों के हित में काम कर रही है।

समय से रबी बीजों की उपलब्धता एवं वितरण सुनिश्चित हो: कृषि मंत्री

कृषि मंत्री ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा लखनऊ बुधवार को कृषि निदेशालय में माननीय कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही तथा माननीय कृषि राज्यमंत्री श्री बलदेव सिंह औलख जी ने कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं/कार्यक्रमों की भौतिक एवं वित्तीय समीक्षा बैठक की। कृषि मंत्री जी द्वारा समस्त जनपद /मंडल के अधिकारियों को निम्न निर्देश दिए कि रबी फ़सलों(गेहूँ,जौ,चना, मटर,मसूर, सरसों, अलसी आदि) के सभी बीज 25 अक्तूबर 2025 तक समस्त राजकीय बीज भंडारों पर कृषकों को वितरण हेतु अपरिहार्य रूप से उपलब्ध करा दिये जाये। रबी फ़सलों के सभी अनुदानित बीजों का कृषकों को वितरण बुआई से पूर्व 25 नवम्बर 2025 तक अनिवार्य रूप से राजकीय कृषि बीज भंडारों के माध्यम से पूर्ण कर लिया जाये। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बाढ़ प्रभावित/हानि वाले इलाकों में कृषकों को बीमा का लाभ समय से प्राप्त कराए जाने हेतु राजस्व, कृषि एवं बीमा के जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की संयुक्त टीम द्वारा अविलंब पूर्ण कर प्रभावित कृषकों को तत्काल लाभ पहुंचाया जाये। रबी फ़सलों में विशेषकर दलहन (चना,मटर,मसूर आदि) एवं तिलहन(तोरिया,सरसों, राई,  अलसी आदि) में फसल उत्पादकता बढ़ाए जाने हेतु जनपदीय उप कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी विशेष प्रयास करें। श्री शाही ने कहा कि कृषक शासन की प्राथमिकता में सम्मिलित है, उन्नतशील बीजों का वितरण कृषकों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ समय से अवश्य सुनिश्चित किया जाये l इस सम्बंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही का प्रतिकूल संज्ञान लेकर कार्यवाही की जाएगी। उक्त बैठक में प्रमुख सचिव कृषि श्री रविंद्र, सचिव कृषि श्री इन्द्र विक्रम सिंह, विशेष सचिव कृषि श्री टी.के. शीबू, विशेष सचिव कृषि श्री ओ.पी. वर्मा, निदेशक कृषि श्री पंकज त्रिपाठी, निदेशक सांख्यिकी श्रीमती सुमिता सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सरकार का फोकस: आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से मजबूत बनेगी खेती

शिमला कृषि एवं पशुपालन मंत्री मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि कृषि को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है। कृषि रोड मैप एवं रबी एक्शन प्लान से किसानों को लाभकारी खेती की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि देश कृषि प्रधान है और इसका 14 प्रतिशत योगदान जीडीपी में है। कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के खुलने से वैज्ञानिकों के शोध ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रो. चंद्र कुमार आज यहां विकसित कृषि संकल्प अभियान (विकेएसए) के तहत भारतीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में “राज्य कृषि रोड मैप एवं रबी एक्शन प्लान” विषय पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में अपने विचार साझा कर रहे थे।  इस क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य सरकार के विभागों और आईसीएआर संस्थानों से "राज्य कृषि प्राथमिकताएँ एवं कार्यान्वित की जाने वाली रणनीतियाँ" विषय पर संस्थागत दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के लिए आगामी पांच वर्षों (2025-2030) का कृषि रोडमैप तैयार करना और विकसित कृषि संकल्प अभियान-2025 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप प्राकृतिक खेती में प्रदेश की अग्रणी भूमिका, कृषि-जलवायु विविधता का लाभ और राष्ट्रीय अभियानों से सामंजस्य स्थापित करने पर केंद्रित होगा, जिससे अगले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र का व्यापक रूपांतरण संभव हो सके। प्राकृतिक खेती के लिए मवेशियों की महत्ता अहम कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर है, परंतु इसके लिए मवेशियों की महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्राकृतिक खेती मवेशियों पर आधारित है। उन्होंने जोर दिया कि आज के दौर में कृषि क्षेत्र को रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को देहरादून में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है।   कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने के लिए दूध की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही, ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका संचालन डेयरी डेवलपमेंट अथॉरिटी करेगी। इस प्लांट में बने उत्पादों पर ट्रेडमार्क हिमाचल का होगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई प्रबंधन और विपणन संबंधों को मजबूत करना भी कृषि विकास की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में कृषि-जलवायु की पहचान कर विविधता लाने की आवश्यकता है। साथ ही, कीटनाशकों का न्यूनतम प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें। कृषि मंत्री ने सभी विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वह आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया जा सके। सचिव, कृषि एवं बागवानी सी. पाल रासु ने विभागीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए इस योजना में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। निदेशक नौणी अनुसंधान केंद्र डॉ. एस.के. चौहान, निदेशक प्रसार शिक्षा सीएसके एचपीकेवी पालमपुर डॉ. विनोद शर्मा और विभागाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान विभाग, सीपीआरआई शिमला एवं कार्यक्रम सचिव डॉ. आलोक कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। निदेशक आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला डॉ. बृजेश सिंह ने स्वागत संबोधन दिया। तकनीकी सत्रों की रूपरेखा पहला सत्र में विश्वविद्यालयों के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप, कृषि प्राथमिकताओं एवं कार्य नीतियों पर चर्चा हुई। पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय एवं नौणी बागवानी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने राज्य की कृषि चुनौतियों और अवसरों पर प्रस्तुतिकरण दिया। दूसरे सत्र में आईसीएआर से जुड़े विभिन्न अनुसंधान संस्थानों जैसे डीएमआर सोलन, आईआईडब्ल्यूबीआर शिमला, आईएआरआई और एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों ने कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन और अनुसंधान-आधारित रणनीतियों पर अपने विचार रखे। तीसरे सत्र में राज्य सरकार के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप एवं कार्य नीतियों पर चर्चा हुई। इसमें कृषि विभाग, बागवानी विभाग, प्राकृतिक खेती, पशुपालन विभाग, राज्य बीज एवं ऑर्गेनिक उत्पाद प्रमाणन एजेंसी और मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के निदेशकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए ठोस सुझाव दिए।  इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों, विभिन्न विभागों और आईसीएआर संस्थानों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

कृषि मंत्री ने हरियाणा विधानसभा को बताया धान फसल में वायरस की स्थिति

चंडीगढ़ हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ‘सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस’ (एसआरबीएसडीवी) को लेकर सतर्क है और कृषि वैज्ञानिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राणा ने यह भी बताया कि किसानों को इस वायरस के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए राणा ने मंगलवार को सदन को बताया कि प्रदेश में लगभग 40 लाख एकड़ में धान की बुआई हुई है, जिनमें से करीब 92,000 एकड़ में यह वायरस पाया गया है। उन्होंने बताया कि एसआरबीएसडीवी वायरस के संक्रमण से होने वाला रोग है जो धान की फसल को प्रभावित करता है और यह देश के कई धान उत्पादक क्षेत्रों में चिंता का विषय बना हुआ है। मंत्री ने कहा कि यह बीमारी ‘व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर’ (डब्ल्यूबीपीएच) नामक कीट के माध्यम से फैलती है, जो धान के पौधों का रस चूसकर वायरस को संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों तक पहुंचाता है। राणा ने कहा कि जैविक खेती और ‘डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस’ (डीएसआर) के मामलों में इस वायरस से क्षति की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार धान की बुआई करें तो ऐसी बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस वायरस के कारण संक्रमित पौधों की सामान्य वृद्धि रुक जाती है, उनकी ऊंचाई सामान्य से काफी कम रह जाती है, पत्तियां गहरा हरा रंग धारण कर लेती हैं, नई कोंपलों का विकास धीमा हो जाता है या रुक जाता है और जड़ें भूरी होकर अविकसित रह जाती हैं, जिससे पौधों की पानी और पोषक तत्व सोखने की क्षमता घट जाती है। मंत्री ने कहा कि राज्य में इस वायरस का पहला मामला खरीफ 2022 सीजन में सामने आया था। उस वर्ष कुछ ही मामले मिले थे, लेकिन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू), हिसार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से चलाए गए जागरूकता अभियानों और त्वरित कार्रवाई के चलते फसलों को बड़े नुकसान से बचा लिया गया। राणा ने बताया कि खरीफ 2023 और 2024 में इस वायरस का कोई प्रकोप सामने नहीं आया, जिसका श्रेय प्रभावी रोकथाम उपायों और किसानों में बढ़ी हुई जागरूकता को दिया गया। उनके अनुसार, खरीफ 2025 से पहले भी किसानों को सतर्क किया गया और एहतियात दोहराए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में यह बीमारी दोबारा उभरी और इसके पहले मामले कैथल जिले से सामने आए और बाद में अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद और पंचकूला जिलों से भी मामलों का पता चला। राणा ने कहा कि इन क्षेत्रों के किसानों ने अपने खेतों में पौधों की असामान्य रूप से छोटी ऊंचाई की शिकायत की। इसके बाद एचएयू हिसार के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें सामने आया कि यह बीमारी सबसे अधिक हाइब्रिड धान की किस्मों में पाई गई, उसके बाद परमल (गैर-बासमती) और फिर बासमती किस्मों में भी इसका पता चला। मंत्री ने बताया कि यह समस्या मुख्य रूप से उन खेतों में देखी गई, जहां 25 जून से पहले धान की रोपाई की गई थी। उन्होंने कहा कि इस वायरस की पुष्टि के लिए एचएयू के वैज्ञानिकों ने संक्रमित पौधों के नमूने एकत्र किए और जांच की जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि पौधे ‘सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस’ से संक्रमित थे। बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि इस वायरस से सुरक्षा के लिए एचएयू ने किसानों के लिए परामर्श जारी किया है।