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दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई की याचिका, अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में रहेगी सजा

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की ओर से भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए प्रत्यर्पण संधि को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है।  जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका खारिज करने का आदेश दिया. इसके पहले 17 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने मिशेल की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. याचिका में मिशेल ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात से हुई प्रत्यर्पण संधि को भारतीय संसद द्वारा बनाए गए प्रत्यर्पण कानून के अधीन घोषित करने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि भारतीय प्रत्यर्पण कानून की धारा 21 के तहत किसी प्रत्यर्पित व्यक्ति के खिलाफ किसी दूसरे आरोपों के मामले पर मामला नहीं चलाया जा सकता है।  याचिका में कहा गया था कि संयुक्त अरब अमीरात के प्राधिकार की ओर से जारी प्रत्यर्पण आदेश का उल्लंघन कर भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के तहत नए आरोप लगाए गए हैं. मिशेल की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा था कि नए आरोप लगाना देश के प्रत्यर्पण कानून का उल्लंघन है. मिशेल ने कहा था कि उसके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं उसकी अधिकतम सजा वो भुगत चुका है. अधिकतम सजा के बाद भी उसे हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21, 245 और 253 का उल्लंघन है।  बता दें कि राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को मिशेल को रिहा करने की मांग खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मिशेल के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 467 लगाई गई है जिसमें उम्रकैद का प्रावधान है. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि उसने अपनी अधिकतम सजा पूरी कर ली है।  सुनवाई के दौरान ईडी ने मिशेल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात से हुई प्रत्यर्पण संधि की धारा 17 के मुताबिक अगर कोई आरोपी प्रत्यर्पित किया जाता है तो उस पर न केवल वही मुकदमा चलेगा जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया है बल्कि दूसरे संबंधित मुकदमे भी चल सकते हैं।  बता दें कि मिशेल को अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में सीबीआई और ईडी दोनों के मामले में जमानत मिल चुकी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2025 को मिशेल को मनी लाउंड्रिंग मामले में जमानत दी थी. सीबीआई से जुड़े मामले में मिशेल को सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है।  दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद के मामले में 3600 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला दर्ज किया गया है. सीबीआई के मुताबिक मिशेल ने इस घोटाले की कुछ रकम 2010 के बाद हासिल किया और कुछ 2010 के बाद. 3600 करोड़ रुपये के इस घोटाले में ईडी ने मिशेल को जनवरी 2019 में गिरफ्तार किया था. मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित कर 4 दिसंबर 2018 को भारत लाया गया था. 23 अक्टूबर 2020 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. चार्जशीट में 13 को आरोपी बनाया गया है. 19 सितंबर 2020 को सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में क्रिश्चियन मिशेल, राजीव सक्सेना, अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल के डायरेक्टर जी सापोनारो और वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी के रिश्तेदार संदीप त्यागी समेत 13 को आरोपी बनाया गया है। 

ईडी केस से मिली राहत, अगस्ता वेस्टलैंड मामले में क्रिश्चियन मिशेल होंगे रिहा

नई दिल्ली अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उसकी रिहाई का आदेश दे दिया है। हालांकि, राहत के बावजूद क्रिश्चियन मिशेल फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएगा, क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जुड़े मामले में अभी उसकी रिहाई का कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में उसे जेल में ही रहना होगा। कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्रिश्चियन मिशेल के वकील ने दलील दी कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभी तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद आरोपी लगभग 7 साल से हिरासत में है, जो इस मामले में संभावित अधिकतम सजा के बराबर है। गौरतलब है कि इससे पहले क्रिश्चियन मिशेल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। वहीं, सीबीआई केस में उसे सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत दी गई थी, लेकिन उसके पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो जाने और जमानत की शर्तों के तहत जरूरी श्योरिटी न मिल पाने के कारण वह अब तक जेल से बाहर नहीं निकल सका था। इससे पहले 8 अगस्त को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल को बड़ा झटका दिया था। उस समय कोर्ट ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने जेल से रिहाई के निर्देश देने की मांग की थी। अदालत ने कहा था कि आरोपी पर आईपीसी की धारा 467 के तहत गंभीर आरोप हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि उसने अधिकतम सजा की अवधि पहले ही पूरी कर ली है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि धारा 467 लागू होती है या नहीं, यह फैसला आरोप तय होने के दौरान किया जाएगा। तब तक आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता। क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को 5 दिसंबर 2018 को संयुक्त अरब अमीरात से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। भारत पहुंचते ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया और इसके कुछ दिन बाद ईडी ने भी उसे हिरासत में ले लिया। तब से वह जेल में बंद है।