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नई डिजिटल व्यवस्था लागू, AIIMS का पेमेंट सिस्टम बनेगा पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड

भोपाल   एम्स में मरीजों को अब शुल्क जमा कराने के लिए बिलिंग काउंटर की लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। एम्स प्रबंधन ने एक डिजिटल नवाचार की घोषणा की है, जिसके तहत इस महीने के अंत तक स्मार्ट कार्ड आधारित भुगतान सुविधा शुरू कर दी जाएगी। यह कदम मरीजों और उनके परिजनों को हो रही दिक्कतों से बड़ी राहत देगा। शुरु होगा डिसेंट्रलाइज्ड पेमेंट सिस्टम वर्तमान में मरीजों को जांच, टेस्ट या अन्य सेवाओं का भुगतान करने के लिए बार-बार बिलिंग काउंटर तक जाना पड़ता है। एम्स प्रशासन के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने पर पेमेंट सिस्टम पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड हो जाएगा। अस्पताल के प्रत्येक विभाग में स्कैनर लगाए जाएंगे, जहां मरीज तुरंत कार्ड स्कैन कर भुगतान कर सकेंगे। इससे मरीजों को अस्पताल के बड़े परिसर में बार-बार चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनके समय और ऊर्जा दोनों की बचत होगी। एसबीआइ संभाल रहा जिम्मेदारी इस अत्याधुनिक स्मार्ट कार्ड प्रणाली को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। एसबीआई की टीम वर्तमान में कार्ड निर्माण और स्कैनर सेटअप का अंतिम ट्रायल करने की तैयारी में है। सफल परीक्षण के बाद यह सुविधा मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। इस स्मार्ट कार्ड में मरीज से जुड़ी पूरी मेडिकल जानकारी सुरक्षित रहेगी। किसी भी यूनिट में कार्ड स्कैन करते ही उसका विवरण कंप्यूटर पर खुल जाएगा। उपचार के दौरान मरीज कार्ड के माध्यम से तुरंत भुगतान कर सकेगा, जिससे नकद लेनदेन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और पूरा प्रोसेस तेज हो जाएगा।- संदेश कुमार जैन, डिप्टी डायरेक्टर, एम्स  

2026 से MP में कैंसर इलाज होगा आधुनिक: गामा नाइफ और पीईटी-सीटी स्कैन से सुविधा बढ़ेगी

भोपाल  मध्यप्रदेश में कैंसर मरीजों के लिए एम्स भोपाल में प्रदेश का पहला सेंट्रलाइज्ड कैंसर ब्लॉक विकसित किया जा रहा है, जिसे 2026 तक शुरू करने की तैयारी है। इस आधुनिक ब्लॉक में मरीजों को गामा नाइफ और पीईटी-सीटी स्कैन जैसी उन्नत सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। वर्तमान में एम्स में जांच और उपचार के लिए मरीजों को लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सिटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों के लिए छह माह से एक वर्ष तक का इंतजार शामिल है। नई सुविधा का उद्देश्य मरीजों को सभी सेवाएं एक जगह उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित कैंसर ब्लॉक में जांच से लेकर छह प्रकार के उपचार तक की व्यवस्थाएं होंगी, जिनमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट शामिल हैं। वर्तमान में कैंसर मरीजों को जांच, सर्जरी और रेडिएशन के लिए अलग-अलग विभागों में जाना पड़ता है, जबकि नया ब्लॉक शुरू होने के बाद सभी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार संयुक्त निर्णय लेंगे। जांच से लेकर 6 तरह के इलाज तक की सुविधा नए कैंसर ब्लॉक में मरीजों को जांच से लेकर ट्रीटमेंट तक की सभी सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इसमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट की व्यवस्था होगी। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल कैंसर मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकना पड़ता है। जांच एक जगह, सर्जरी दूसरी जगह और रेडिएशन तीसरी जगह होती है। लेकिन इस ब्लॉक के शुरू होने के बाद सभी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार संयुक्त फैसले लेंगे। गंभीर मरीजों के लिए ‘प्रेफरेंस सिस्टम’ तैयार होगा एम्स के इस नए ब्लॉक में स्मार्ट स्क्रीनिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज को पहले एक स्क्रीनिंग यूनिट से गुजरना होगा। यहां डॉक्टर उनकी जांच करेंगे और यह तय करेंगे कि मरीज को कैंसर है या नहीं। जिन मरीजों में कैंसर की पुष्टि होगी, उन्हें गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। इससे जिन मरीजों की हालत गंभीर है, उन्हें कम वेटिंग में प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिलेगा। वहीं, जिन मरीजों में सिर्फ कैंसर का संदेह होगा, उन्हें आवश्यक जांच के लिए अन्य संबंधित विभागों में भेजा जाएगा। एमपी के इन जिलों से सबसे ज्यादा मरीज एम्स भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 60% मरीज भोपाल के बाहर के हैं। सबसे ज्यादा केस आगर मालवा (3664), रायसेन (1776), विदिशा (1536), नर्मदापुरम (1216), सागर (1072), रीवा (944) जैसे जिले टॉप पर हैं। हालांकि, इसका बड़ा कारण भोपाल से भौगोलिक नजदीकी है। यह भी सवाल उठता है कि इन जिलों के सिविल अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में कैंसर इलाज की व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं है?। निदेशक बोले- रिसर्च-क्लिनिकल ट्रायल पर भी फोकस एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवानंद कर ने बताया कि यह कैंसर ब्लॉक प्रदेश में कैंसर ट्रीटमेंट की दिशा बदल देगा। कैंसर के हर मरीज को समग्र इलाज की जरूरत होती है। अभी मरीजों को अलग-अलग विभागों में भागदौड़ करनी पड़ती है। इस ब्लॉक के शुरू होने से सर्जरी, कीमो और रेडिएशन सब एक ही छत के नीचे संभव हो जाएगा। डॉ. माधवानंद ने यह भी कहा कि यहां रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स पर भी फोकस किया जाएगा, ताकि कैंसर के शुरुआती लक्षणों में ही सटीक इलाज शुरू किया जा सके। गंभीर मरीजों के लिए प्रेफरेंस सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज की पहले स्क्रीनिंग यूनिट में जांच होगी, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि वह कैंसर रोगी है या नहीं। जिनमें बीमारी की पुष्टि होगी, उन्हें गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत कर प्राथमिकता से उपचार दिया जाएगा। वहीं जिन मरीजों में सिर्फ कैंसर का संदेह होगा, उन्हें संबंधित विभागों में आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा।

अब भोपाल AIIMS में लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं, मरीज पाएंगे तेज OPD पंजीकरण और त्वरित डॉक्टर से मिलने का मौका

भोपाल  एम्स भोपाल ने ‘एम्स स्वास्थ्य’ मोबाइल ऐप में नई डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं, जिनसे मरीजों का इंतजार समय कम होगा और परामर्श प्रक्रिया तेज तथा पारदर्शी बनेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की डिजिटल हेल्थकेयर सर्विसेज एट योर फिंगरटिप्स के आधार पर यह ऐप अब स्वास्थ्य सेवाओं का वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है। यह ऐप आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप है। इसके जरिए मरीज अपना आभा आइडी बना सकते हैं या पहले से बनी आईडी को लिंक कर सकते हैं। इससे अस्पताल में बने स्वास्थ्य अभिलेख देशभर के अन्य अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। मिलेंगी नई डिजिटल सुविधाएं नई सुविधा ई-विजिट के तहत मरीज बिना कतार में लगे ओपीडी पंजीकरण कर सकते हैं। अस्पताल परिसर में लोकेशन एक्सेस देकर ऐप से खुद टिकट जेनरेट कर प्रिंट करवाया जा सकता है। ऐप से परामर्श शुल्क और ओपीडी सेवाओं का सीधे डिजिटल भुगतान भी किया जा सकता है। इससे डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन, डिस्चार्ज समरी और लैब रिपोर्ट कभी भी, कहीं भी देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। इससे समय की बचत के साथ ही कागज़ का इस्तेमाल भी घटेगा।